प्रश्न 1.
स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं-
(A) पोषक तत्व
(B) मादक पदार्थ
(C) फल व सब्जियाँ
(D) ये सभी
उत्तर:
(B) मादक पदार्थ
व्याख्या: मादक पदार्थ शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर हानिकारक तथा प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
UP Board Class 9th सामाजिक विज्ञान Annual Paper 2022 A Code
कक्षा 9वीं · सामाजिक विज्ञान · 2022 · बोर्ड परीक्षा
स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं-
(A) पोषक तत्व
(B) मादक पदार्थ
(C) फल व सब्जियाँ
(D) ये सभी
उत्तर:
(B) मादक पदार्थ
व्याख्या: मादक पदार्थ शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर हानिकारक तथा प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
सबसे अधिक सुखी वर्ग होता है-
(A) धनी वर्ग
(B) मध्यम वर्ग
(C) श्रमिक वर्ग
(D) संतोषी व्यक्तियों का वर्ग
उत्तर:
(D) संतोषी व्यक्तियों का वर्ग
व्याख्या: संतोषी व्यक्ति उपलब्ध साधनों में संतुष्ट रहते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से सबसे अधिक सुखी रहते हैं।
कार्य-व्यवस्था के मानवीय साधन हैं-
(A) ज्ञान तथा सूझ-बूझ
(B) कार्य-व्यवस्था की क्षमता
(C) सहयोग प्राप्त करने की क्षमता
(D) ये सभी
उत्तर:
(D) ये सभी
व्याख्या: ज्ञान, सूझ-बूझ, कार्यक्षमता और सहयोग प्राप्त करने की योग्यता सभी मानवीय साधनों की श्रेणी में आते हैं।
वायु में ऑक्सीजन का भाग होता है-
(A) 78%
(B) 23%
(C) 20.95%
(D) 30%
उत्तर:
(C) 20.95%
व्याख्या: वायुमंडल में ऑक्सीजन का आयतन लगभग 20.95 प्रतिशत (लगभग 21%) होता है।
अंतर्राष्ट्रीय संगठन है-
(A) W.H.O
(B) G.I.C
(C) P.H.C
(D) ये सभी
उत्तर:
(A) W.H.O
व्याख्या: W.H.O (विश्व स्वास्थ्य संगठन) विश्व स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी कार्य करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था है।
………………सुरक्षा सम्बन्धी विलासात्मक आवश्यकता है।
(A) बहुमूल्य गहने
(B) घर का सामान
(C) अधिक व्यय
(D) मिठाई
उत्तर:
(A) बहुमूल्य गहने
व्याख्या: बहुमूल्य गहने धन के संचय और भावी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी विलासात्मक आवश्यकता माने जाते हैं।
बालकों को क्षय रोग से बचाने के लिए कौन-सा टीका लगाना चाहिए?
(A) टिटनेस
(B) ट्रिपल एन्टीजन
(C) बी.सी.जी.
(D) ये सभी
उत्तर:
सही विकल्प: (C) बी.सी.जी.
व्याख्या: बी.सी.जी. का टीका बालकों को क्षय रोग (टी.बी.) से सुरक्षा प्रदान करता है।
वायु में विद्यमान मुख्य निष्क्रिय गैस है?
(A) ऑक्सीजन
(B) नाइट्रोजन
(C) ओजोन
(D) कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर:
सही विकल्प: (B) नाइट्रोजन
व्याख्या: वायुमंडल में लगभग 78 प्रतिशत भाग नाइट्रोजन गैस का होता है, जो मुख्य निष्क्रिय (अक्रिय) गैस के रूप में कार्य करती है।
पर्यावरण को दूषित करने वाले पदार्थ कहलाते हैं-
(A) मिलावटी पदार्थ
(B) प्रदूषक
(C) विष
(D) व्यर्थ पदार्थ
उत्तर:
सही विकल्प: (B) प्रदूषक
व्याख्या: जो पदार्थ पर्यावरण में मिलकर उसकी प्राकृतिक गुणवत्ता को नष्ट करते हैं और प्रदूषण फैलाते हैं, उन्हें प्रदूषक कहते हैं।
जुकाम, छींकें, खाँसी तथा ज्वर ये लक्षण हैं-
(A) चेचक के
(B) इन्फ्लुएन्जा के
(C) डिप्थीरिया के
(D) तपेदिक के
उत्तर:
सही विकल्प: (B) इन्फ्लुएन्जा के
व्याख्या: इन्फ्लुएन्जा एक विषाणुजनित रोग है, जिसमें रोगी को जुकाम, खाँसी, छींकें तथा तीव्र बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं।
दाँत का अन्तिम भाग होता है-
(A) मूल
(B) ग्रीवा
(C) शिखर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
सही विकल्प: (A) मूल
व्याख्या: दाँत की संरचना में सबसे ऊपरी भाग शिखर, मध्य भाग ग्रीवा तथा सबसे निचला व अन्तिम भाग मूल (जड़) होता है।
वसा की अधिकता होती है-
(A) हृदय रोग
(B) मूत्र रोग
(C) आन्त्र रोग
(D) पीलिया
उत्तर:
सही विकल्प: (A) हृदय रोग
व्याख्या: भोजन में अत्यधिक वसा के सेवन से रक्त वाहिनियों में वसा जमा होने लगती है, जिससे हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
सन्तुलित आहार होता है-
(A) स्वादिष्ट आहार
(B) मँगहा आहार
(C) सभी पोषक तत्वों से युक्त
(D) भूख को मिटाने वाला
उत्तर:
सही विकल्प: (C) सभी पोषक तत्वों से युक्त
व्याख्या: सन्तुलित आहार में शरीर के पोषण एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व उचित मात्रा और अनुपात में विद्यमान होते हैं।
ग्रीष्म ऋतु के लिए सबसे उपयोगी है-
(A) ऊनी वस्त्र
(B) रेशमी वस्त्र
(C) नायलॉन
(D) सूती वस्त्र
उत्तर:
सही विकल्प: (D) सूती वस्त्र
व्याख्या: सूती वस्त्र पसीना आसानी से सोखते हैं और वायु का आवागमन सुगम रखते हैं, जिससे गर्मी के मौसम में शरीर को शीतलता मिलती है।
रोगी के कमरे में उचित व्यवस्था होनी चाहिए-
(A) सफाई की
(B) प्रकाश की
(C) संकल्प की
(D) इन सभी की
उत्तर:
सही विकल्प: (D) इन सभी की
व्याख्या: रोगी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए कमरे में उत्तम सफाई, शुद्ध वायु, पर्याप्त प्रकाश एवं अनुशासित वातावरण की व्यवस्था होना अनिवार्य है।
दूध से दही जमाने में कौन-सा एन्जाइम कार्य करता है?
(A) रेनिन
(B) टायलिन
(C) पेप्सिन
(D) इनमें सभी
उत्तर:
सही विकल्प: (A) रेनिन
व्याख्या: रेनिन एन्जाइम दूध में उपस्थित केसिन नामक प्रोटीन को थक्का जमाकर दही में परिवर्तित करने में सहायता करता है।
निम्नलिखित देशज औषधियों में से कौन सा मसाला नहीं है?
(A) जीरा
(B) हींग
(C) लौंग
(D) फिटकरी
उत्तर:
सही विकल्प: (D) फिटकरी
व्याख्या: जीरा, हींग और लौंग का प्रयोग मसालों के रूप में होता है, जबकि फिटकरी एक खनिज पदार्थ (लवण) है जिसका प्रयोग बाह्य औषधि एवं जल शोधन के लिए किया जाता है।
यदि व्यक्ति संक्रामक रोग से ग्रस्त हो तो उसे कहाँ रखना चाहिए?
(A) बरामदे में
(B) बच्चे के कमरे में
(C) रसोई घर में
(D) अलग कमरे में
उत्तर:
सही विकल्प: (D) अलग कमरे में
व्याख्या: संक्रामक रोग के रोगाणुओं को परिवार के अन्य सदस्यों तक फैलने से रोकने के लिए रोगी को एक अलग (पृथक) कमरे में रखना आवश्यक है।
कीटाणुनाशक पदार्थ है-
(A) नमक
(B) डेटॉल
(C) प्याज का रस
(D) अमृतधारा
उत्तर:
(B) डेटॉल
व्याख्या: डेटॉल एक प्रभावी एंटीसेप्टिक और कीटाणुनाशक पदार्थ है जो हानिकारक जीवाणुओं एवं कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।
कौन सा रोग मुख्य रूप से 2 से 5 वर्ष के बच्चों में होता है-
(A) डिप्थीरिया
(B) चेचक
(C) छोटी माता
(D) बड़ी माता
उत्तर:
(A) डिप्थीरिया
व्याख्या: डिप्थीरिया मुख्य रूप से 2 से 5 वर्ष की आयु के छोटे बच्चों को प्रभावित करने वाला एक गंभीर संक्रामक रोग है।
कल्याणकारी गृह व्यवस्था का क्या आधार हो सकता है?
उत्तर:
कल्याणकारी गृह व्यवस्था का मुख्य आधार परिवार के सभी सदस्यों की शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक आवश्यकताओं की संतुष्टि, सुव्यवस्थित नियोजन तथा आपस में प्रेम व सहयोगात्मक वातावरण है।
वायु के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
वायु के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
1. जीवों को जीवित रहने तथा श्वसन क्रिया हेतु ऑक्सीजन प्रदान करना।
2. पौधों को भोजन बनाने (प्रकाश-संश्लेषण) हेतु कार्बन डाइऑक्साइड प्रदान करना।
3. पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित एवं संतुलित रखना।
पित्त रस किसके द्वारा बनाया जाता है?
उत्तर:
पित्त रस मानव शरीर के यकृत (Liver) द्वारा बनाया (स्रावित किया) जाता है तथा यह पित्ताशय में संचित रहता है।
'टर्निकिट' से क्या तात्पर्य है? इसका क्या कार्य है?
उत्तर:
टर्निकिट से तात्पर्य कपड़े, रबड़ या पट्टी की एक विशेष दबाव-पट्टी से है जो चोट लगने पर इस्तेमाल की जाती है।
कार्य: इसका मुख्य कार्य गंभीर रूप से कटे या घायल अंग से अत्यधिक बहते हुए रक्तस्राव को रोकने के लिए घाव से थोड़ा ऊपर कसकर बाँधना है।
गुलाब जल का क्या प्रयोग है?
उत्तर:
गुलाब जल का प्रयोग त्वचा की सफाई, ताजगी एवं सौन्दर्य निखार के लिए प्राकृतिक टोनर के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग आँखों की जलन दूर करने, त्वचा को शीतलता प्रदान करने, तथा विभिन्न घरेलू औषधियों एवं व्यंजनों में सुगंध व स्वाद बढ़ाने के लिए होता है।
शय्या घाव से आप क्या समझती हो?
उत्तर:
दीर्घकालिक बीमारी के कारण लगातार बिछावन पर लेटे रहने से रोगी के शरीर के दबने वाले अंगों (जैसे पीठ, कुल्हे, एड़ी आदि) की त्वचा पर पड़ने वाले छालों या घावों को शय्या घाव (Bedsores) कहते हैं। यह निरंतर दबाव और रक्त प्रवाह में रुकावट के कारण होते हैं।
गृह कार्यों में समय तक श्रम की बचत के उपायों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
मृदा प्रदूषण पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
गृह कार्यों में समय तथा श्रम की बचत के उपाय:
1. कार्य का पूर्व नियोजन: प्रत्येक गृह कार्य की पूर्व योजना बनाकर व्यवस्थित समय-सारणी के अनुसार कार्य करना।
2. श्रम बचत उपकरणों का प्रयोग: प्रेशर कुकर, मिक्सी, वैक्यूम क्लीनर, वॉशिंग मशीन आदि आधुनिक उपकरणों का उपयोग करना।
3. सही तकनीक एवं कार्य-कुशलता: सही शारीरिक स्थिति में बैठकर या खड़े होकर वैज्ञानिक ढंग से कार्य करना।
4. पारिवारिक सहयोग: परिवार के सदस्यों के बीच उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्यों का विभाजन करना।
अथवा
मृदा प्रदूषण पर टिप्पणी:
मृदा (मिट्टी) के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा हानिकारक परिवर्तन जिससे उसकी उर्वरा शक्ति नष्ट होती है, मृदा प्रदूषण कहलाता है।
कारण: अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का प्रयोग, प्लास्टिक व कारखानों के अवांछित कचरे का निष्पादन, तथा वनों की अंधाधुंध कटाई।
प्रभाव: फसलों की पैदावार में कमी, विषैले तत्वों का खाद्य श्रृंखला में प्रवेश तथा पर्यावरण असंतुलन।
रोकथाम: जैविक खाद का प्रयोग, प्लास्टिक पर नियंत्रण तथा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करना चाहिए।
डिफ्थीरिया पर एक टिप्पणी लिखिए।
अथवा
स्वास्थ्य रक्षा की दृष्टि से वस्त्र में कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए?
उत्तर:
डिफ्थीरिया पर टिप्पणी:
डिफ्थीरिया एक अत्यंत घातक एवं संक्रामक रोग है जो कोरिनेबैक्टीरियम डिफ्थेरी नामक जीवाणु द्वारा फैलता है। यह मुख्य रूप से 2 से 5 वर्ष तक के बालकों को प्रभावित करता है।
लक्षण: गले में दर्द, हल्का बुखार, तथा गले व श्वास नली में एक पतली धूसर रंग की झिल्ली का बनना जिससे सांस लेने में भारी कठिनाई होती है।
बचाव व उपचार: शिशु को नियत समय पर DPT का टीका लगवाना चाहिए। रोगी को तुरंत अलग कमरे में रखकर चिकित्सीय देखरेख में उपचार कराना चाहिए।
अथवा
स्वास्थ्य रक्षा की दृष्टि से वस्त्रों में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए:
1. मौसम के अनुकूल: ग्रीष्म काल में सूती वस्त्र जो पसीना सोख सकें तथा शीत काल में ऊनी वस्त्र जो शरीर की ऊष्मा को बाहर न जाने दें।
2. आरामदायक एवं ढीले वस्त्र: वस्त्र बहुत अधिक तंग न हों ताकि शरीर में रक्त संचार और श्वसन क्रिया सुचारू रूप से चलती रहे।
3. स्वच्छ एवं रोगाणुरहित: वस्त्र नियमित रूप से धुले एवं साफ होने चाहिए ताकि त्वचा संबंधी संक्रमण न हो।
4. नमी अवशोषण क्षमता: वस्त्रों में पसीना और नमी सोखने की उत्तम क्षमता होनी चाहिए।
अपूर्ण पोषण के चार लक्षण लिखिए।
अथवा
कब्ज के निवारण के लिए अपनाई जा सकने वाली घरेलू औषधियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
अपूर्ण पोषण (कुपोषण) के चार प्रमुख लक्षण:
1. शरीर का भार आयु के अनुसार कम होना तथा शारीरिक वृद्धि का रुकना।
2. मांसपेशियों का कमजोर होना, त्वचा का सूखापन एवं चेहरे पर पीलापन।
3. रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आना, जिससे व्यक्ति बार-बार संक्रामक रोगों से ग्रस्त होता है।
4. शीघ्र थकान, शारीरिक कमजोरी तथा स्वभाव में चिड़चिड़ापन होना।
अथवा
कब्ज के निवारण के लिए अपनाई जा सकने वाली घरेलू औषधियाँ:
1. गुनगुना पानी एवं नींबू: प्रातः काल खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू का रस और थोड़ा नमक/शहद मिलाकर पीना।
2. इसबगोल की भूसी: रात में सोने से पहले गुनगुने दूध या पानी के साथ एक-दो चम्मच इसबगोल की भूसी का सेवन करना।
3. त्रिफला चूर्ण: रात को सोते समय गुनगुने जल के साथ एक चम्मच त्रिफला चूर्ण लेना।
4. मुनक्का एवं फाइबर युक्त आहार: मुनक्के को रात में भिगोकर सुबह खाना या दूध में उबालकर पीना, तथा भोजन में सलाद व हरी सब्जियों का पर्याप्त उपयोग करना।
'रोगी के कमरे की सफाई' पर एक टिप्पणी लिखिए।
अथवा
शय्या घाव का उपचार कैसे करेंगी? लिखिए।
उत्तर:
'रोगी के कमरे की सफाई' पर टिप्पणी:
रोगी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ तथा संक्रमण को रोकने के लिए उसके कमरे की स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है।
1. दैनिक सफाई: कमरे में प्रतिदिन फिनोल या फिनाइल युक्त जल से पोंछा लगाना चाहिए। उड़ने वाली धूल से बचने के लिए सूखे झाड़ू के स्थान पर नम कपड़े का प्रयोग करना चाहिए।
2. वस्त्रों की स्वच्छता: रोगी की चादर, तकिए का खोल और बिछावन प्रतिदिन बदलने चाहिए तथा उन्हें डिटॉल या गर्म पानी से धोकर सुखाना चाहिए।
3. वायु एवं प्रकाश: कमरे में ताजी हवा और प्राकृतिक प्रकाश के आवागमन हेतु खिड़कियों को खुला रखना चाहिए।
4. अपशिष्ट निस्तारण: रोगी के प्रयोग किए गए बर्तन, थूकदान तथा कचरे को नियमित रूप से निसंक्रमित करके कमरे से बाहर फेंकना चाहिए।
अथवा
शय्या घाव (Bedsores) का उपचार:
1. स्थिति परिवर्तन: रोगी के लेटने की स्थिति को प्रत्येक 1 से 2 घंटे में बदलते रहना चाहिए ताकि एक ही स्थान पर लगातार दबाव न बने।
2. घाव की सफाई व मलहम: घाव को एंटीसेप्टिक घोल (जैसे पॉविडोन आयोडीन या डिटॉल) से साफ करके डॉक्टर द्वारा बताई गई रोगाणुरोधक मलहम या पाउडर लगाना चाहिए।
3. प्रभावित स्थान को सूखा रखना: घाव वाले स्थान को हमेशा साफ, सूखा और हवादार रखना चाहिए।
4. एयर गद्दे व रिंग का प्रयोग: दबाव कम करने के लिए शय्या घाव वाले अंगों के नीचे रुई की बनी गोल रिंग (Ring) या एयर मैट्रेस (Air Mattress) का प्रयोग करना चाहिए।
हड्डी की टूट एवं मोच में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हड्डी की टूट एवं मोच में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
1. प्रभावित अंग: हड्डी की टूट में शरीर की अस्थि भंग या क्षत-विक्षत होती है, जबकि मोच में जोड़ों के स्नायुबंधन (लिगामेंट्स) खिंच जाते हैं या फट जाते हैं।
2. कारण: हड्डी की टूट तीव्र आघात, गिरने या दुर्घटना के कारण होती है, जबकि मोच असंतुलित कदम पड़ने, पैर मुड़ने या खिंचाव के कारण होती है।
3. अंग की बनावट: हड्डी टूटने पर प्रभावित अंग की प्राकृतिक बनावट बिगड़ जाती है और विकृति आ जाती है, जबकि मोच में अंग की आकृति नहीं बिगड़ती केवल सूजन व अत्यधिक दर्द होता है।
4. प्राथमिक उपचार: हड्डी की टूट में अंग को स्थिर रखने के लिए खपच्ची बाँधी जाती है, जबकि मोच में ठंडी-गर्म सेंक, क्रेप बैंडेज और आराम दिया जाता है।
अथवा
मानव शरीर में श्वसन क्रिया का क्या महत्व है?
उत्तर:
मानव शरीर में श्वसन क्रिया का विशेष महत्त्व निम्नलिखित है:
1. ऑक्सीजन की प्राप्ति: श्वसन के द्वारा वायुमंडल से ताजी ऑक्सीजन ग्रहण की जाती है जो शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचकर जीवन बनाए रखती है।
2. ऊर्जा का उत्पादन: ली गई ऑक्सीजन कोशिकाओं में उपस्थित पोषक तत्वों (ग्लूकोज) का ऑक्सीकरण करती है, जिससे शरीर को कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है।
3. कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन: कोशिकाओं में उपापचय के फलस्वरूप बनी विषैली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को श्वास छोड़ने की क्रिया द्वारा शरीर से बाहर निकाला जाता है।
4. शरीर का तापमान नियंत्रण: श्वसन क्रिया के दौरान जलवाष्प और ऊष्मा बाहर निकलती है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
5. रक्त का शुद्धिकरण: फेफड़ों में अशुद्ध रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड अलग होती है तथा ताजी ऑक्सीजन मिलने से रक्त शुद्ध होता है।
पर्यावरण प्रदूषण से आप क्या समझती हैं? पर्यावरणीय प्रदूषण के सामान्य कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण:
पर्यावरण के भौतिक, रासायनिक अथवा जैविक घटकों में होने वाला ऐसा अनचाहा परिवर्तन जो मानव, जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, पर्यावरण प्रदूषण कहलाता है।
पर्यावरणीय प्रदूषण के सामान्य कारण:
1. औद्योगीकरण: कल-कारखानों से निकलने वाला धुआँ, जहरीली गैसें और रासायनिक कचरा वायु, जल तथा मृदा को दूषित करता है।
2. वनों की अंधाधुंध कटाई: वृक्षों के अत्यधिक कटने से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ता है और प्राकृतिक चक्र बाधित होता है।
3. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि: बढ़ती जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
4. स्वचालित वाहनों का प्रयोग: पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसें वायु प्रदूषण का मुख्य कारण हैं।
5. कृषि में रसायनों का प्रयोग: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी और भूमिगत जल दूषित होता है।
6. ठोस अपशिष्ट का अनुचित निपटान: प्लास्टिक, कचरा और घरेलू गंदगी का सही निपटान न होने से पर्यावरण दूषित होता है।
अथवा
व्यक्तिगत सज्जा से आप क्या समझती हैं?
उत्तर:
व्यक्तिगत सज्जा से तात्पर्य स्वयं की शारीरिक स्वच्छता, वेशभूषा, केश विन्यास तथा संपूर्ण व्यक्तित्व को आकर्षक, सुव्यवस्थित एवं सुरुचिपूर्ण बनाने की कला से है। यह केवल बाह्य सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग नहीं है, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और आचार-विचार की अभिव्यक्ति है।
व्यक्तिगत सज्जा के मुख्य अंग:
1. शारीरिक स्वच्छता: नियमित रूप से स्नान करना, दाँतों, आँखों, बालों और नाखूनों की सफाई रखना।
2. वेशभूषा का चयन: अवसर, मौसम और अपनी शारीरिक बनावट के अनुकूल स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित वस्त्र पहनना।
3. केश सज्जा: बालों को साफ रखना, सँवारना तथा उपयुक्त केश विन्यास बनाना।
4. सौंदर्य प्रसाधनों का सीमित व संतुलित प्रयोग: प्रसाधनों का प्रयोग प्राकृतिक सुंदरता को निखारने के लिए सादगी से करना।
5. उत्तम आदतें एवं मुद्रा: उठने-बैठने का सही तरीका, मधुर वाणी तथा शिष्टाचार।
व्यक्तिगत सज्जा से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और समाज में आदर प्राप्त होता है।
आमाशय में भोजन का पाचन किस प्रकार होता है? समझाइए।
उत्तर:
आमाशय में भोजन के पाचन की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:
1. जठर रस का स्राव:
भोजन जब ग्रसिका से आमाशय में पहुँचता है, तो आमाशय की आंतरिक भित्ति की जठर ग्रंथियों से जठर रस निकलता है। इसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), पेप्सिन और रेनिन एंजाइम होते हैं।
2. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के कार्य:
यह भोजन के माध्यम को अम्लीय बनाता है जिससे एंजाइम क्रियाशील हो सकें।
यह भोजन में आए हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है।
यह भोजन के कठोर भागों को कोमल बनाता है।
3. एंजाइमों की क्रिया:
पेप्सिन एंजाइम: यह अम्लीय माध्यम में भोजन की प्रोटीन पर क्रिया करके उसे पेप्टोन और प्रोटियोज में बदल देता है।
रेनिन एंजाइम: यह दूध की प्रोटीन (कैसीन) को फाड़कर उसे दही के रूप में जमा देता है।
4. काइम का निर्माण:
आमाशय की पेशीय दीवारें संकुचित और शिथिल होकर भोजन को मथती हैं। लगभग 3 से 4 घंटे में भोजन गाढ़ी लेई के रूप में बदल जाता है, जिसे काइम कहते हैं। इसके बाद काइम धीरे-धीरे छोटी आँत में पहुँचता है।
अथवा
संतुलित आहार क्या है? इसके कौन-कौन से तत्त्व हैं? लिखिए।
उत्तर:
संतुलित आहार:
वह आहार जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी आवश्यक पोषक तत्व (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल) सही मात्रा और अनुपात में मौजूद हों, संतुलित आहार कहलाता है। यह शरीर को स्वस्थ, ऊर्जावान और रोगमुक्त रखता है।
संतुलित आहार के मुख्य तत्त्व:
1. कार्बोहाइड्रेट: यह शरीर को कार्य करने के लिए मुख्य रूप से ऊर्जा और ऊष्मा प्रदान करता है। यह गेहूं, चावल, आलू, चीनी आदि में पाया जाता है।
2. वसा: यह ऊर्जा का सांद्रित स्रोत है और शरीर को गर्म रखती है। यह घी, तेल, मक्खन, मेवों आदि से प्राप्त होती है।
3. प्रोटीन: यह शरीर के निर्माण, वृद्धि और ऊतकों की टूट-फूट की मरम्मत के लिए आवश्यक है। यह दालों, दूध, पनीर, अंडे आदि में पाई जाती है।
4. विटामिन: ये शरीर की रोगों से रक्षा करते हैं और विभिन्न जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये फल और हरी सब्जियों में प्रचुरता में होते हैं।
5. खनिज लवण: जैसे कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन आदि, जो हड्डियों, दाँतों और रक्त के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
6. जल: यह पाचन, पोषक तत्वों के परिवहन और शरीर के तापमान नियंत्रण के लिए अनिवार्य है।
प्राथमिक चिकित्सा के मुख्य सिद्धान्त कौन-कौन से हैं? सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राथमिक चिकित्सा के मुख्य सिद्धान्त:
दुर्घटना या अकस्मात बीमारी के समय डॉक्टर के आने से पूर्व पीड़ित व्यक्ति को दी जाने वाली तात्कालिक सहायता प्राथमिक चिकित्सा कहलाती है। इसके मुख्य सिद्धान्त निम्नलिखित हैं:
1. शांत एवं धैर्यवान रहना: प्राथमिक चिकित्सक को दुर्घटना स्थल पर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य और ठंडे दिमाग से स्थिति का सामना करना चाहिए।
2. त्वरित एवं फुर्तीली कार्यवाही: बिना समय गँवाए तुरंत आवश्यक सहायता प्रदान करनी चाहिए क्योंकि थोड़ी सी देरी घातक हो सकती है।
3. श्वास मार्ग खुला रखना: सबसे पहले यह जाँच करनी चाहिए कि पीड़ित व्यक्ति श्वास ले पा रहा है या नहीं। यदि श्वास रुकी हो, तो कृत्रिम श्वास देना प्रारंभ करना चाहिए।
4. रक्तस्राव को तुरंत रोकना: यदि शरीर से तेजी से खून बह रहा हो, तो घाव पर दबाव बनाकर या स्वच्छ पट्टी बाँधकर रक्तस्राव रोकना प्राथमिक कर्तव्य है।
5. भीड़ को दूर हटाना: दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के चारों ओर भीड़ न जमा होने दें ताकि उसे पर्याप्त शुद्ध हवा मिल सके।
6. रोगी को ढाँढस बँधाना: पीड़ित व्यक्ति को सांत्वना देनी चाहिए ताकि उसका मानसिक भय कम हो और वह सदमे से बच सके।
7. प्रभावित अंग को स्थिर रखना: यदि हड्डी टूटने की आशंका हो, तो अंग को बिल्कुल न हिलाएँ और खपच्ची का प्रयोग करें।
8. चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था करना: प्राथमिक उपचार के साथ-साथ किसी व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर, एम्बुलेंस या अस्पताल की व्यवस्था करने के लिए भेजना चाहिए।