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UP Board Class 9th Science Half Yearly Paper 2026 A /40,000

कक्षा 9वीं · विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक

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प्रश्न 1.

त्वरण किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए। एक साइकिल सवार विराम अवस्था से चलकर 4 सेकण्ड में 20 मी/से का वेग प्राप्त कर लेता है उसका त्वरण ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

किसी वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।

त्वरण का S.I. मात्रक मीटर/सेकण्ड² (मी/से²) होता है।

दिया है:

प्रारम्भिक वेग (u) = 0 मी/से

अन्तिम वेग (v) = 20 मी/से

समय (t) = 4 सेकण्ड

ज्ञात सूत्र:

त्वरण (a) = (v - u) / t

हल:

a = (20 - 0) / 4

a = 20 / 4

a = 5 मी/से²

अतः उत्तर:

साइकिल सवार का त्वरण 5 मी/से² है।

प्रश्न 2.

जड़त्व किसे कहते हैं? गति का जड़त्व तथा विराम अवस्था के जड़त्व को समझाइए। मोटरकार के अचानक रुकने पर उसमें बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं क्यों?

उत्तर:

जड़त्व:

किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विराम अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, उसे जड़त्व कहते हैं।

विराम अवस्था का जड़त्व:

यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है, तो वह विराम अवस्था में ही रहने का प्रयास करती है। उदाहरण के लिए, रुकी हुई बस के अचानक चलने पर यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं।

गति का जड़त्व:

यदि कोई वस्तु एकसमान गति से गतिशील है, तो वह उसी गति की अवस्था में बनी रहने का प्रयास करती है।

मोटरकार के अचानक रुकने पर यात्रियों का आगे झुकना:

जब मोटरकार चल रही होती है, तो यात्री का पूरा शरीर कार के साथ गति की अवस्था में होता है। जैसे ही ब्रेक लगाने पर मोटरकार अचानक रुकती है, तो यात्री के शरीर का निचला भाग जो कार के सम्पर्क में है, तुरंत विराम अवस्था में आ जाता है। परन्तु शरीर का ऊपरी भाग गति के जड़त्व के कारण गति की अवस्था में ही बने रहने का प्रयास करता है। इसीलिए यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं।

प्रश्न 3.

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण बल का नियम स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम:

इस नियम के अनुसार, ब्रह्मांड में किन्हीं दो पिण्डों के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

माना m1 तथा m2 द्रव्यमान के दो पिण्ड एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं।

उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है:

F ∝ m1 × m2

F ∝ 1 / r²

दोनों को मिलाने पर:

F = G × (m1 × m2) / r²

यहाँ G एक सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है, जिसका मान 6.67 × 10⁻¹¹ न्यूटन मीटर²/किग्रा² होता है। यह बल दोनों पिण्डों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।

प्रश्न 4.

गति के तृतीय समीकरण v² = u² + 2as का निगमन कीजिए।

अथवा

24 किग्रा द्रव्यमान के एक पिण्ड पर 120 न्यूटन का एक बल 2 सेकण्ड तक लगाया जाता है। पिण्ड का अन्तिम वेग ज्ञात कीजिए तथा इतने समय में चली गई दूरी ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

गति के तृतीय समीकरण v² = u² + 2as का निगमन:

माना किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग u, एकसमान त्वरण a, समय t, तय की गई दूरी s तथा अन्तिम वेग v है।

गति के प्रथम समीकरण से:

v = u + at

t = (v - u) / a ... (समीकरण 1)

तय की गई दूरी (s) = औसत वेग × समय

s = [(u + v) / 2] × t

समीकरण 1 से t का मान रखने पर:

s = [(v + u) / 2] × [(v - u) / a]

s = (v² - u²) / (2a)

2as = v² - u²

v² = u² + 2as

अथवा

दिया है:

द्रव्यमान (m) = 24 किग्रा

बल (F) = 120 न्यूटन

समय (t) = 2 सेकण्ड

प्रारम्भिक वेग (u) = 0 मी/से

ज्ञात सूत्र:

1. a = F / m

2. v = u + at

3. s = ut + (1/2)at²

हल:

त्वरण (a) = 120 / 24 = 5 मी/से²

अन्तिम वेग (v) = u + at

v = 0 + (5 × 2)

v = 10 मी/से

चली गई दूरी (s) = ut + (1/2)at²

s = (0 × 2) + (1/2) × 5 × (2)²

s = 0 + (1/2) × 5 × 4

s = 10 मीटर

अतः उत्तर:

पिण्ड का अन्तिम वेग 10 मी/से तथा चली गई दूरी 10 मीटर है।

प्रश्न 5.

क्वथन तथा वाष्पन में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

क्वथन तथा वाष्पन में चार मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. ताप: क्वथन एक निश्चित ताप (क्वथनांक) पर ही होता है, जबकि वाष्पन प्रत्येक ताप पर स्वतः होता रहता है।

2. स्थान: क्वथन सम्पूर्ण द्रव के आयतन में होने वाली घटना है, जबकि वाष्पन केवल द्रव की ऊपरी सतह पर होता है।

3. गति: क्वथन एक तीव्र एवं तेजी से होने वाली प्रक्रिया है, जबकि वाष्पन एक धीमी प्रक्रिया है।

4. प्रभाव: क्वथन से शीतलता उत्पन्न नहीं होती, जबकि वाष्पन के कारण द्रव में शीतलता (ठंडक) उत्पन्न होती है।

प्रश्न 6.

परमाणु तथा अणु में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

परमाणु तथा अणु में चार मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. स्वतंत्र अस्तित्व: परमाणु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता (अक्रिय गैसों को छोड़कर), जबकि अणु स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है।

2. रासायनिक अभिक्रिया: परमाणु रासायनिक अभिक्रिया में सीधे भाग लेता है, जबकि अणु सामान्यतः सीधे भाग नहीं लेता और अभिक्रिया से पूर्व परमाणुओं में विभाजित होता है।

3. विभाजन: परमाणु किसी तत्व का वह सूक्ष्मतम कण है जो और अधिक रासायनिक रूप से विभाजित नहीं हो सकता, जबकि अणु को रासायनिक विधियों द्वारा परमाणुओं में विभाजित किया जा सकता है।

4. निर्माण: परमाणु एक ही प्रकार के प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन व न्यूट्रॉन से बना होता है, जबकि अणु दो या दो से अधिक समान या भिन्न परमाणुओं के संयोजन से बनता है।

प्रश्न 7.

7. यौगिक तथा मिश्रण में छः अन्तर लिखिए।

अथवा

द्रव्य क्या है? द्रव्य की ठोस, द्रव तथा गैस अवस्था को उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:

यौगिक तथा मिश्रण में छः अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. संगठन: यौगिक दो या दो से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोजन से बनता है, जबकि मिश्रण दो या दो से अधिक पदार्थों को किसी भी अनुपात में मिलाने से बनता है।

2. गुण: यौगिक के गुण उसके अवयवी तत्वों के गुणों से पूर्णतः भिन्न होते हैं, जबकि मिश्रण अपने घटकों के गुणों को प्रदर्शित करता है।

3. पृथक्करण: यौगिक के घटकों को भौतिक विधियों द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता, जबकि मिश्रण के घटकों को साधारण भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है।

4. प्रकृति: यौगिक सदैव समांगी होता है, जबकि मिश्रण समांगी या विषमांगी दोनों हो सकता है।

5. गलनांक एवं क्वथनांक: यौगिक का गलनांक एवं क्वथनांक निश्चित होता है, जबकि मिश्रण का गलनांक एवं क्वथनांक निश्चित नहीं होता।

6. ऊर्जा परिवर्तन: यौगिक के बनने में ऊष्मा या प्रकाश का उत्सर्जन या अवशोषण होता है, जबकि मिश्रण बनने में सामान्यतः कोई ऊर्जा परिवर्तन नहीं होता।

अथवा

द्रव्य:

द्रव्य वह वस्तु है जो स्थान घेरती है, जिसमें द्रव्यमान होता है तथा जिसका अनुभव ज्ञानेन्द्रियों द्वारा किया जा सकता है।

1. ठोस अवस्था:

ठोस का आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं। इनके कणों के बीच अन्तराणुक आकर्षण बल अत्यधिक होता है।

उदाहरण: लोहा, लकड़ी, पत्थर, बर्फ।

2. द्रव अवस्था:

द्रव का आयतन निश्चित होता है परन्तु आकार निश्चित नहीं होता। यह बर्तन के अनुसार आकार ग्रहण कर लेता है।

उदाहरण: जल, दूध, तेल, अल्कोहल।

3. गैस अवस्था:

गैस का आकार और आयतन दोनों अनिश्चित होते हैं। इनके कणों के बीच अन्तराणुक आकर्षण बल नगण्य होता है।

उदाहरण: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, वायु, जलवाष्प।

प्रश्न 8.

8. प्रोकेरियोटिक तथा यूकेरियोटिक कोशिकाओं में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

प्रोकेरियोटिक तथा यूकेरियोटिक कोशिकाओं में चार अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. केन्द्रक की उपस्थिति: प्रोकेरियोटिक कोशिका में सुसंगठित केन्द्रक तथा केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है, जबकि यूकेरियोटिक कोशिका में स्पष्ट केन्द्रक एवं केन्द्रक झिल्ली उपस्थित होती है।

2. झिल्लीयुक्त कोशिकांग: प्रोकेरियोटिक कोशिका में झिल्लीयुक्त कोशिकांग जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गोलगीकाय आदि अनुपस्थित होते हैं, जबकि यूकेरियोटिक कोशिका में ये उपस्थित होते हैं।

3. राइबोसोम का प्रकार: प्रोकेरियोटिक कोशिका में 70S प्रकार के राइबोसोम होते हैं, जबकि यूकेरियोटिक कोशिका में मुख्य रूप से 80S प्रकार के राइबोसोम होते हैं।

4. आकार एवं गुणसूत्र: प्रोकेरियोटिक कोशिकाएँ आकार में छोटी होती हैं और इनमें केवल एक वृत्ताकार गुणसूत्र होता है, जबकि यूकेरियोटिक कोशिकाएँ आकार में बड़ी होती हैं और इनमें एक से अधिक रैखिक गुणसूत्र पाए जाते हैं।

प्रश्न 9.

9. लाइसोसोम क्या है? इसके कोई तीन कार्य लिखिए।

उत्तर:

लाइसोसोम:

लाइसोसोम एकल झिल्ली से घिरी गोल थैलीनुमा कोशिकांग संरचनाएँ हैं, जिनमें शक्तिशाली पाचक एन्जाइम भरे होते हैं। ये कोशिका के अपशिष्ट पदार्थों को निपटाने तथा बाहरी पदार्थों का पाचन करने का कार्य करते हैं। इसे कोशिका की आत्मघाती थैली भी कहा जाता है।

लाइसोसोम के तीन कार्य:

1. बाहरी हानिकारक पदार्थों जैसे जीवाणु तथा विषाणु का पाचन करके कोशिका की सुरक्षा करना।

2. पुरानी, मृत या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं एवं कोशिकांगों को पाचित करके कोशिका को स्वच्छ रखना।

3. कोशिका विभाजन तथा विशेष परिस्थितियों में कोशिकीय पदार्थों का स्व-पाचन करना।

प्रश्न 10.

10. न्यूरॉन की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर:

न्यूरॉन की संरचना:

न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। यह शरीर की सबसे लंबी कोशिका होती है जो संदेशों का संवहन करती है। इसके प्रमुख तीन भाग होते हैं:

1. साइटॉन (कोशिका काय): यह न्यूरॉन का मुख्य भाग है जिसमें एक स्पष्ट केन्द्रक और कोशिकाद्रव्य पाया जाता है। इसमें निसल के कण उपस्थित होते हैं।

2. द्रुमाश्य (डेंड्राइट्स): साइटॉन से निकले छोटे, शाखित प्रवर्ध डेंड्राइट्स कहलाते हैं। ये संवेदनाओं को ग्रहण करके साइटॉन तक पहुँचाते हैं।

3. तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन): साइटॉन से निकला एक लंबा बेलनाकार प्रवर्ध एक्सॉन कहलाता है। इसके ऊपर मायलिन आच्छद का आवरण होता है। यह आवेगों को साइटॉन से दूर ले जाता है।

चित्र विवरण:

- आकृति: एक लंबी तंतुवत कोशिका जिसमें ऊपर एक चौड़ा ताराकार भाग (साइटॉन) तथा नीचे एक लंबी नलिका (एक्सॉन) होती है।

- साइटॉन: ऊपर/केन्द्र में स्थित मुख्य चौड़ा भाग।

- केन्द्रक: साइटॉन के ठीक मध्य में स्थित गोल संरचना।

- डेंड्राइट्स: साइटॉन के चारों ओर निकली सूक्ष्म शाखित अंगुलियों जैसी संरचनाएँ।

- एक्सॉन: साइटॉन से नीचे की ओर फैली लंबी बेलनाकार छड़।

- मायलिन आच्छद: एक्सॉन के चारों ओर आवरण के रूप में चढ़ी बेलनाकार परतें।

- एक्सॉन सिरा: एक्सॉन का निचला शाखित छोर जो बटन जैसी रचनाओं पर समाप्त होता है।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

प्रश्न 11.

11. (क) अस्थि तथा उपास्थि में तीन अन्तर लिखिए।

(ख) स्नायु तथा कण्डरा में तीन अन्तर लिखिए।

अथवा

पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर लिखिए।

उत्तर:

(क) अस्थि तथा उपास्थि में तीन अन्तर:

1. अस्थि कठोर तथा अनम्य होती है, जबकि उपास्थि कोमल तथा लचीली होती है।

2. अस्थि का मैट्रिक्स ओसीन प्रोटीन और कैल्शियम-फास्फोरस लवणों से बना होता है, जबकि उपास्थि का मैट्रिक्स कॉन्ड्रिन प्रोटीन से बना होता है।

3. अस्थि में रक्त वाहिकाएं पाई जाती हैं, जबकि उपास्थि में रक्त वाहिकाएं अनुपस्थित होती हैं।

(ख) स्नायु तथा कण्डरा में तीन अन्तर:

1. स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है, जबकि कण्डरा मांसपेशी को अस्थि से जोड़ता है।

2. स्नायु अत्यधिक लचीला होता है, जबकि कण्डरा सीमित लचीलेपन वाला होता है।

3. स्नायु में पीले लोचदार तंतु पाए जाते हैं, जबकि कण्डरा में सफेद कोलाजन तंतु पाए जाते हैं।

अथवा

पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर:

1. कोशिका भित्ति: पादप कोशिका में सेलुलोज की बनी कोशिका भित्ति पाई जाती है, जबकि जन्तु कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।

2. लवक: पादप कोशिका में हरितलवक तथा अन्य लवक उपस्थित होते हैं, जबकि जन्तु कोशिका में लवक अनुपस्थित होते हैं।

3. रसधानी: पादप कोशिका में एक बड़ी तथा केंद्रीय रसधानी होती है, जबकि जन्तु कोशिका में रसधानियां छोटी तथा अस्थायी होती हैं।

4. तारककाय: पादप कोशिका में तारककाय अनुपस्थित होता है, जबकि जन्तु कोशिका में तारककाय उपस्थित होता है।

5. आकार: पादप कोशिका का आकार निश्चित तथा आयताकार होता है, जबकि जन्तु कोशिका का आकार अनिश्चित होता है।

6. संचित भोजन: पादप कोशिका में भोजन मण्ड के रूप में संचित होता है, जबकि जन्तु कोशिका में भोजन ग्लाइकोजन के रूप में संचित होता है।

प्रश्न 12.

12. निम्नलिखित में तत्व है–

(A) वायु

(B) जल

(C) मिट्टी

(D) ऑक्सीजन

उत्तर:

(D) ऑक्सीजन

व्याख्या: ऑक्सीजन एक शुद्ध तत्व है क्योंकि यह केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से मिलकर बना है, जबकि जल एक यौगिक है तथा वायु और मिट्टी मिश्रण हैं।

प्रश्न 13.

सोडियम का संकेत है–

(A) S

(B) Ni

(C) Na

(D) Ne

उत्तर:

(C) Na

व्याख्या: सोडियम का रासायनिक प्रतीक Na (लैटिन नाम Natrium से) है।

प्रश्न 14.

हड्डियों को पेशियों से जोड़ने वाला रेशेदार ऊतक कहलाता है–

(A) संयोजी ऊतक

(B) कण्डरा

(C) वसा ऊतक

(D) स्नायु

उत्तर:

(B) कण्डरा

व्याख्या: कण्डरा (Tendon) एक मजबूत रेशेदार संयोजी ऊतक है जो मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है।

प्रश्न 15.

तन्त्रिका ऊतक की इकाई है–

(A) न्यूरॉन

(B) साइटोन

(C) कोशा

(D) डेन्ड्रान

उत्तर:

(A) न्यूरॉन

व्याख्या: तन्त्रिका तंत्र और तन्त्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई न्यूरॉन होती है।

प्रश्न 16.

एक निश्चित कार्य करने वाले कोशिकाओं के समूह को कहा जाता है–

(A) ऊतक

(B) अंग

(C) अंगतन्त्र

(D) जीव

उत्तर:

(A) ऊतक

व्याख्या: समान उत्पत्ति, संरचना तथा विशिष्ट कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते हैं।

प्रश्न 17.

कोशिका में श्वसन कोशिकांग होते हैं–

(A) माइटोकाण्ड्रिया

(B) केन्द्रक

(C) राइबोसोम

(D) गॉल्जीकाय

उत्तर:

(A) माइटोकाण्ड्रिया

व्याख्या: माइटोकाण्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन की क्रिया सम्पन्न होती है तथा ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 18.

जन्तु कोशिका में नहीं पायी जाती है–

(A) कोशिका भित्ति

(B) जीव कला

(C) जीव द्रव्य

(D) गुण सूत्र

उत्तर:

(A) कोशिका भित्ति

व्याख्या: कोशिका भित्ति पादप कोशिकाओं में पाई जाती है, यह जन्तु कोशिका में अनुपस्थित होती है।

प्रश्न 19.

केन्द्रक की खोज किसने की ?

(A) श्लाइडेन ने

(B) श्वान ने

(C) रॉबर्ट ब्राउन ने

(D) डूब ने

उत्तर:

(C) रॉबर्ट ब्राउन ने

व्याख्या: रॉबर्ट ब्राउन ने सन् 1831 में कोशिका के केन्द्रक (Nucleus) की खोज की थी।

प्रश्न 20.

उपास्थि एक–

(A) मांसपेशी है

(B) संयोजी ऊतक है

(C) तंत्रिका ऊतक है

(D) ऐच्छिक पेशी है

उत्तर:

(B) संयोजी ऊतक है

व्याख्या: उपास्थि (Cartilage) एक लचीला संयोजी ऊतक है जो शरीर के विभिन्न अंगों और जोड़ों को आधार प्रदान करता है।

प्रश्न 1.

त्वरण किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए। एक साइकिल सवार विराम अवस्था से चलकर 4 सेकण्ड में 20 मी/से का वेग प्राप्त कर लेता है उसका त्वरण ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

त्वरण की परिभाषा: किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।

त्वरण = (अंतिम वेग - प्रारंभिक वेग) / समय

मात्रक: त्वरण का S.I. मात्रक मीटर/सेकण्ड² (मी/से²) होता है।

दिया है:

प्रारंभिक वेग (u) = 0 मी/से

अंतिम वेग (v) = 20 मी/से

समय (t) = 4 सेकण्ड

ज्ञात सूत्र:

a = (v - u) / t

हल:

a = (20 - 0) / 4

a = 20 / 4

a = 5 मी/से²

अतः उत्तर:

साइकिल सवार का त्वरण 5 मी/से² है।

प्रश्न 2.

जड़त्व किसे कहते हैं? गति का जड़त्व तथा विराम अवस्था के जड़त्व को समझाइए। मोटरकार के अचानक रुकने पर उसमें बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं क्यों?

उत्तर:

जड़त्व की परिभाषा: किसी वस्तु का वह स्वाभाविक गुण जिसके कारण वह अपनी विराम अवस्था या एकसमान गति की अवस्था में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, जड़त्व कहलाता है।

1. विराम अवस्था का जड़त्व: जब कोई वस्तु विराम अवस्था में होती है, तो वह विराम में ही बने रहने का प्रयास करती है जब तक उस पर बाह्य बल न लगाया जाए।

उदाहरण: दरी को डंडे से पीटने पर धूल के कण नीचे गिर जाते हैं।

2. गति का जड़त्व: जब कोई वस्तु गति की अवस्था में होती है, तो वह उसी वेग से गतिमान रहने का प्रयास करती है जब तक कि बाह्य बल लगाकर उसे रोका न जाए।

उदाहरण: चलती हुई बस से कूदने पर व्यक्ति आगे की दिशा में गिर पड़ता है।

कारण (मोटरकार के अचानक रुकने पर यात्रियों का आगे झुकना):

गतिमान मोटरकार के साथ उसमें बैठे यात्रियों का शरीर भी गति की अवस्था में होता है। जब कार चालक अचानक ब्रेक लगाता है, तो कार के साथ यात्री के शरीर का निचला भाग तुरंत विराम अवस्था में आ जाता है। परंतु यात्री के शरीर का ऊपरी भाग गति के जड़त्व के कारण गति की अवस्था में ही बने रहने का प्रयास करता है। इसी कारण यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं।

प्रश्न 3.

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण बल का नियम स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम:

इस नियम के अनुसार, "ब्रह्मांड में किन्हीं दो पिण्डों के मध्य कार्य करने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।"

माना m1 तथा m2 द्रव्यमान के दो पिण्ड एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं।

1. गुरुत्वाकर्षण बल द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है:

F ∝ m1 × m2

2. गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है:

F ∝ 1 / r²

दोनों नियमों को मिलाने पर:

F ∝ (m1 × m2) / r²

F = G × (m1 × m2) / r²

यहाँ G एक आनुपातिक नियतांक है, जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं।

G का मान 6.67 × 10⁻¹¹ न्यूटन मीटर² / किग्रा² होता है।

यह बल दोनों पिण्डों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।

प्रश्न 4.

गति के तृतीय समीकरण v² = u² + 2as का निगमन कीजिए।

उत्तर:

गति के तृतीय समीकरण का निगमन:

माना कोई वस्तु प्रारंभिक वेग u से गति प्रारंभ करती है। एकसमान त्वरण a से t समय तक चलने के बाद उसका अंतिम वेग v हो जाता है और इस समय में तय की गई दूरी s है।

गति के प्रथम समीकरण से:

v = u + at

at = v - u

t = (v - u) / a ... (समीकरण 1)

वस्तु का औसत वेग = (u + v) / 2

तय की गई दूरी (s) = औसत वेग × समय

s = [(u + v) / 2] × t ... (समीकरण 2)

समीकरण (2) में t का मान समीकरण (1) से रखने पर:

s = [(v + u) / 2] × [(v - u) / a]

s = (v² - u²) / (2a)

त्रियक गुणा करने पर:

2as = v² - u²

या v² = u² + 2as

यही गति का तृतीय समीकरण है।

अथवा

प्रश्न (अथवा):

24 किग्रा द्रव्यमान के एक पिण्ड पर 120 न्यूटन का एक बल 2 सेकण्ड तक लगाया जाता है। पिण्ड का अन्तिम वेग ज्ञात कीजिए तथा इतने समय में चली गई दूरी ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया है:

पिण्ड का द्रव्यमान (m) = 24 किग्रा

आरोपित बल (F) = 120 न्यूटन

समय (t) = 2 सेकण्ड

प्रारंभिक वेग (u) = 0 मी/से (विराम अवस्था से)

ज्ञात सूत्र:

1. त्वरण (a) = F / m

2. अंतिम वेग (v) = u + at

3. दूरी (s) = ut + (1/2)at²

हल:

(i) त्वरण की गणना:

a = 120 / 24

a = 5 मी/से²

(ii) पिण्ड के अंतिम वेग की गणना:

v = u + at

v = 0 + (5 × 2)

v = 10 मी/से

(iii) चली गई दूरी की गणना:

s = ut + (1/2)at²

s = (0 × 2) + (1/2) × 5 × (2)²

s = 0 + (1/2) × 5 × 4

s = 10 मीटर

अतः उत्तर:

पिण्ड का अन्तिम वेग = 10 मी/से

इतने समय में चली गई दूरी = 10 मीटर

प्रश्न 5.

क्वथन तथा वाष्पन में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

क्वथन तथा वाष्पन में चार मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. ताप: क्वथन केवल एक निश्चित ताप (क्वथनांक) पर ही होता है, जबकि वाष्पन प्रत्येक ताप पर (क्वथनांक से कम ताप पर भी) निरंतर होता रहता है।

2. स्थान: क्वथन संपूर्ण द्रव के आयतन में होने वाली प्रक्रिया है, जबकि वाष्पन केवल द्रव की ऊपरी सतह पर होने वाली प्रक्रिया है।

3. बुलबुले: क्वथन की क्रिया के दौरान द्रव के अंदर बुलबुले बनते हैं, जबकि वाष्पन की प्रक्रिया शांत होती है और इसमें बुलबुले नहीं बनते।

4. शीतलन प्रभाव: क्वथन से द्रव या वातावरण में ठंडक (शीतलन) उत्पन्न नहीं होती, जबकि वाष्पन की क्रिया से शीतलन उत्पन्न होता है।

प्रश्न 6.

परमाणु तथा अणु में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

परमाणु तथा अणु में चार मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. स्वतंत्रता: परमाणु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रह सकता (उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर), जबकि अणु स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है।

2. रासायनिक अभिक्रिया: परमाणु रासायनिक अभिक्रियाओं में सीधे भाग लेते हैं, जबकि अणु रासायनिक अभिक्रिया में सीधे भाग न लेकर पहले परमाणुओं में विभाजित होते हैं।

3. विभाजन: परमाणु को सामान्य रासायनिक विधियों द्वारा विभाजित नहीं किया जा सकता, जबकि अणु को रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा उसके घटक परमाणुओं में विभाजित किया जा सकता है।

4. संरचना: परमाणु इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से मिलकर बनता है, जबकि अणु दो या दो से अधिक परमाणुओं के रासायनिक संयोजन से बनता है।

प्रश्न 7.

यौगिक तथा मिश्रण में छह अन्तर लिखिए।

उत्तर:

यौगिक तथा मिश्रण में छह मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. संगठन: यौगिक में तत्व द्रव्यमान के अनुसार एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित होते हैं, जबकि मिश्रण में अवयव किसी भी अनिश्चित अनुपात में मिले होते हैं।

2. गुणधर्म: यौगिक के गुण उसके घटक तत्वों के गुणों से पूरी तरह भिन्न होते हैं, जबकि मिश्रण अपने सभी घटक पदार्थों के गुणों को प्रदर्शित करता है।

3. पृथक्करण: यौगिक के घटकों को भौतिक विधियों द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता, जबकि मिश्रण के घटकों को सरल भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है।

4. रासायनिक बंध: यौगिक के निर्माण में तत्वों के बीच रासायनिक बंध बनते हैं, जबकि मिश्रण में अवयवों के बीच कोई रासायनिक बंध नहीं बनते।

5. ऊर्जा परिवर्तन: यौगिक के बनने में ऊष्मा या प्रकाश के रूप में ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन होता है, जबकि मिश्रण बनने में सामान्यतः कोई ऊर्जा परिवर्तन नहीं होता।

6. गलनांक एवं क्वथनांक: यौगिक का गलनांक तथा क्वथनांक निश्चित होता है, जबकि मिश्रण का गलनांक तथा क्वथनांक निश्चित नहीं होता।

प्रश्न 7.

(अथवा)

द्रव्य क्या है? द्रव्य की ठोस, द्रव तथा गैस अवस्था को उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:

द्रव्य:

प्रत्येक वह वस्तु जो स्थान घेरती है, जिसमें द्रव्यमान होता है तथा जिसका अनुभव हम अपनी ज्ञानेंद्रियों द्वारा कर सकते हैं, द्रव्य (पदार्थ) कहलाती है। जैसे- जल, हवा, लोहा आदि।

द्रव्य की तीनों अवस्थाएँ:

1. ठोस अवस्था:

द्रव्य की वह अवस्था जिसका आकार तथा आयतन दोनों निश्चित होते हैं, ठोस कहलाती है। ठोस के कणों के बीच अंतराणुक आकर्षण बल अत्यधिक होता है तथा कणों के बीच स्थान नगण्य होता है।

उदाहरण: लोहा, पत्थर, लकड़ी, बर्फ।

2. द्रव अवस्था:

द्रव्य की वह अवस्था जिसका आयतन निश्चित होता है परंतु आकार अनिश्चित होता है, द्रव कहलाती है। द्रव उसी बर्तन का आकार ग्रहण कर लेता है जिसमें इसे रखा जाता है।

उदाहरण: जल, दूध, तेल, पारा।

3. गैस अवस्था:

द्रव्य की वह अवस्था जिसका न तो आकार निश्चित होता है और न ही आयतन निश्चित होता है, गैस कहलाती है। इसके कणों के बीच अंतराणुक आकर्षण बल नगण्य होता है और कण सभी दिशाओं में गति के लिए स्वतंत्र होते हैं।

उदाहरण: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, वायु, जलवाष्प।

प्रश्न 8.

प्रोकेरियोंटिक तथा यूकेरियोंटिक कोशिकाओं में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

प्रोकेरियोंटिक तथा यूकेरियोंटिक कोशिकाओं में चार मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. केन्द्रक: प्रोकेरियोंटिक कोशिका में सुसंगठित केन्द्रक तथा केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है, जबकि यूकेरियोंटिक कोशिका में स्पष्ट केन्द्रक झिल्ली से घिरा सुसंगठित केन्द्रक उपस्थित होता है।

2. कोशिकांग: प्रोकेरियोंटिक कोशिका में झिल्लीयुक्त कोशिकांग जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय आदि अनुपस्थित होते हैं, जबकि यूकेरियोंटिक कोशिका में ये सभी कोशिकांग उपस्थित होते हैं।

3. राइबोसोम: प्रोकेरियोंटिक कोशिका में 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं, जबकि यूकेरियोंटिक कोशिका में 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।

4. गुणसूत्र: प्रोकेरियोंटिक कोशिका में केवल एक वृत्ताकार गुणसूत्र पाया जाता है, जबकि यूकेरियोंटिक कोशिका में एक से अधिक रेखीय गुणसूत्र पाए जाते हैं।

प्रश्न 9.

लाइसोसोम क्या है? इसके कोई तीन कार्य लिखिए।

उत्तर:

लाइसोसोम:

लाइसोसोम कोशिका में पाए जाने वाले एकल झिल्लीयुक्त गोल कोशिकांग हैं, जिनमें शक्तिशाली पाचक एंजाइम भरे होते हैं। इन्हें कोशिका की 'आत्मघाती थैली' भी कहा जाता है क्योंकि कोशिका के क्षतिग्रस्त या मृत होने पर ये फट जाते हैं और अपने ही एंजाइमों द्वारा कोशिका का पाचन कर देते हैं।

लाइसोसोम के तीन प्रमुख कार्य:

1. बाह्य पदार्थों का पाचन: यह कोशिका में प्रवेश करने वाले बाहरी हानिकारक पदार्थों जैसे जीवाणु तथा विषाणु को नष्ट करके कोशिका की सुरक्षा करता है।

2. कोशिकीय सफाई: यह कोशिका के टूटे-फूटे या पुराने मृत कोशिकांगों का पाचन करके कोशिका को स्वच्छ रखता है।

3. आत्मघाती पाचन: अत्यधिक क्षतिग्रस्त या वृद्ध हो चुकी कोशिका को पचाकर नष्ट करता है ताकि नई कोशिकाओं का निर्माण हो सके।

प्रश्न 10.

न्यूरॉन की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर:

न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) की संरचना तथा वर्णन:

न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मौलिक संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। यह शरीर की सबसे लंबी कोशिका होती है जो संवेदी संकेतों को विद्युत-रासायनिक आवेग के रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाती है।

न्यूरॉन के मुख्य तीन भाग होते हैं:

1. साइटॉन (कोशिकाकाय):

यह न्यूरॉन का केंद्रीय मुख्य भाग है जिसमें कोशिकाद्रव्य तथा एक बड़ा, स्पष्ट केन्द्रक पाया जाता है। इसमें निसल कणिकाएँ उपस्थित होती हैं।

2. डेंड्राइट्स:

साइटॉन से निकलने वाले छोटे तथा शाखित प्रवर्धों को डेंड्राइट्स कहते हैं। ये अन्य कोशिकाओं से संवेदी सूचनाएँ ग्रहण करके साइटॉन तक लाते हैं।

3. एक्सॉन:

साइटॉन से निकला एक लंबा, बेलनाकार प्रवर्ध एक्सॉन कहलाता है। यह आवेगों को साइटॉन से दूर ले जाकर अगली तंत्रिका कोशिका या पेशी तक पहुँचाता है। एक्सॉन पर माइलिन आवरण की परत चढ़ी होती है।

चित्र का विवरण:

- आकृति/रूपरेखा: न्यूरॉन एक लंबी, तंतुमय और शाखित संरचना के रूप में होती है जिसका ऊपरी भाग ताराकार होता है।

- केन्द्र में: ताराकार साइटॉन के मध्य में एक गोल, स्पष्ट केन्द्रक स्थित होता है।

- ऊपर एवं चारों ओर: साइटॉन के ऊपरी और बाहरी किनारों से अनेक छोटी, धागे जैसी शाखित संरचनाएँ निकलती हैं जिन्हें डेंड्राइट्स कहते हैं।

- नीचे की ओर: साइटॉन के निचले सिरे से एक मोटा और लंबा बेलनाकार प्रवर्ध निकलता है जिसे एक्सॉन कहते हैं।

- सबसे नीचे: एक्सॉन का अंतिम सिरा छोटी-छोटी शाखित घुंडियों (Axon terminals) में विभाजित रहता है।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

प्रश्न 11.

(क)

अस्थि तथा उपास्थि में तीन अन्तर लिखिए।

उत्तर:

अस्थि तथा उपास्थि में तीन मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. संरचना और कठोरता:

अस्थि की मैट्रिक्स कठोर और अमोड़ होती है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम और फास्फोरस के लवणों से बनी होती है।

उपास्थि की मैट्रिक्स लचीली और मुलायम होती है, जो कॉन्ड्रिन नामक प्रोटीन से बनी होती है।

2. रुधिर वाहिकाएँ:

अस्थि में रुधिर वाहिकाएँ पाई जाती हैं, जिससे इसमें रक्त का संचार होता है।

उपास्थि में रुधिर वाहिकाओं का अभाव होता है।

3. कोशिका प्रकार:

अस्थि की कोशिकाओं को ओस्टियोसाइट्स कहा जाता है।

उपास्थि की कोशिकाओं को कॉन्ड्रोसाइट्स कहा जाता है।

प्रश्न 11.

(ख)

स्नायु तथा कण्डरा में तीन अन्तर लिखिए।

उत्तर:

स्नायु (Ligament) तथा कण्डरा (Tendon) में तीन मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. जोड़ने का कार्य:

स्नायु एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ने का कार्य करती है।

कण्डरा मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ने का कार्य करती है।

2. लचीलापन एवं मजबूती:

स्नायु अत्यधिक लचीली तथा लोचदार होती है।

कण्डरा सीमित लचीली तथा अत्यधिक मजबूत और सुदृढ़ होती है।

3. तंतु की संरचना:

स्नायु में पीले लोचदार तंतु अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

कण्डरा में श्वेत कोलाजन तंतु समानांतर बंडलों में पाए जाते हैं।

अथवा

प्रश्न 11.

पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर लिखिए।

उत्तर:

पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में छः मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. कोशिका भित्ति:

पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के बाहर सेल्यूलोज की बनी सुदृढ़ कोशिका भित्ति पाई जाती है।

जन्तु कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है, केवल प्लाज्मा झिल्ली पाई जाती है।

2. लवक (प्लास्टिड):

पादप कोशिका में हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट) तथा अन्य लवक उपस्थित होते हैं।

जन्तु कोशिका में लवक पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं।

3. रसधानी (वेक्यूओल):

पादप कोशिका में एक बड़ी तथा स्थायी केंद्रीय रसधानी पाई जाती है।

जन्तु कोशिका में रसधानियाँ या तो अनुपस्थित होती हैं या आकार में बहुत छोटी तथा अस्थायी होती हैं।

4. तारककाय (सेंट्रोसोम):

उच्च पादप कोशिकाओं में तारककाय अनुपस्थित होता है।

जन्तु कोशिका में तारककाय उपस्थित होता है, जो कोशिका विभाजन में सहायता करता है।

5. आकार तथा आकृति:

पादप कोशिकाएँ आकार में बड़ी तथा निश्चित (आयताकार या चौकोर) होती हैं।

जन्तु कोशिकाएँ आकार में छोटी तथा अनिश्चित (प्रायः गोलाकार या अण्डाकार) होती हैं।

6. संचित भोजन:

पादप कोशिकाओं में संचित भोजन मण्ड (स्टार्च) के रूप में होता है।

जन्तु कोशिकाओं में संचित भोजन ग्लाइकोजन तथा वसा के रूप में होता है।