(क) द्रव्य के अविनाशिता का नियम (Law of Conservation of Mass):
नियम: इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्य (द्रव्यमान) को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। अर्थात् किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।
उदाहरण: जब 12 ग्राम कार्बन (C) को 32 ग्राम ऑक्सीजन (O₂) में पूर्णतः जलाया जाता है, तो 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) प्राप्त होती है।
C + O₂ → CO₂
अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = 12 ग्राम + 32 ग्राम = 44 ग्राम
उत्पाद का कुल द्रव्यमान = 44 ग्राम
अतः अभिक्रिया के पूर्व और पश्चात् द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
(ख) स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions):
नियम: इस नियम के अनुसार, किसी भी शुद्ध रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में संयुक्त रहते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो।
उदाहरण: जल (H₂O) को चाहे नदी, कुएँ, वर्षा या प्रयोगशाला किसी भी स्रोत से प्राप्त किया जाए, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमानों का अनुपात सदैव 1 : 8 रहता है (2 ग्राम हाइड्रोजन : 16 ग्राम ऑक्सीजन = 1 : 8)।
अथवा
ठोस, द्रव तथा गैस अवस्था की व्याख्या:
1. ठोस अवस्था:
वह अवस्था जिसका आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं। इनके कणों के बीच अंतर-अणुक आकर्षण बल बहुत प्रबल होता है और कण एक-दूसरे के अत्यधिक निकट होते हैं।
उदाहरण: लकड़ी, लोहा, बर्फ, पत्थर।
2. द्रव अवस्था:
वह अवस्था जिसका आयतन निश्चित होता है परंतु आकार अनिश्चित होता है (यह उसी बर्तन का आकार ग्रहण कर लेता है जिसमें इसे रखा जाता है)। इनके कणों के बीच अंतर-अणुक बल ठोसों की तुलना में कम होता है।
उदाहरण: जल, दूध, तेल।
3. गैस अवस्था:
वह अवस्था जिसका न तो आकार निश्चित होता है और न ही आयतन। इनके कणों के बीच अंतर-अणुक बल नगण्य होता है और कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र गति करते हैं।
उदाहरण: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, वायु।