Solution

UP Board Class 9th Science Half Yearly paper 2026 SZ Code

कक्षा 9वीं · विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक

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प्रश्न 1.

कोई कार एक समान रूप से त्वरित होकर 5 सेकंड में 18 किमी/घण्टा से 36 किमी/घण्टा की चाल प्राप्त करती है, ज्ञात कीजिए (i) कार का त्वरण (ii) उतने समय में चली गई दूरी।

उत्तर:

(i) कार का त्वरण:

दिया है:

प्रारम्भिक वेग u = 18 किमी/घण्टा = 18 × (5/18) = 5 मी/से

अन्तिम वेग v = 36 किमी/घण्टा = 36 × (5/18) = 10 मी/से

समय t = 5 सेकंड

ज्ञात सूत्र:

a = (v - u) / t

हल:

a = (10 - 5) / 5

a = 5 / 5

a = 1 मी/से²

अतः उत्तर:

कार का त्वरण 1 मी/से² है।

(ii) उतने समय में चली गई दूरी:

दिया है:

प्रारम्भिक वेग u = 5 मी/से

त्वरण a = 1 मी/से²

समय t = 5 सेकंड

ज्ञात सूत्र:

s = ut + (1/2)at²

हल:

s = (5 × 5) + (1/2) × 1 × (5)²

s = 25 + (1/2) × 25

s = 25 + 12.5

s = 37.5 मीटर

अतः उत्तर:

कार द्वारा 5 सेकंड में चली गई दूरी 37.5 मीटर है।

प्रश्न 2.

संतुलित तथा असंतुलित बलों के उदाहरण देकर समझाइए?

उत्तर:

1. संतुलित बल:

जब किसी वस्तु पर एक साथ कई बल कार्य कर रहे हों और उन सभी बलों का परिणामी बल शून्य (0) हो, तो उन बलों को संतुलित बल कहते हैं। संतुलित बल वस्तु की स्थिति (विराम अवस्था या गति की अवस्था) में कोई परिवर्तन नहीं करते, केवल वस्तु का आकार बदल सकते हैं।

उदाहरण:

- रस्साकशी के खेल में जब दोनों टीमें एक समान बल से रस्सी को विपरीत दिशाओं में खींचती हैं, तो रस्सी अपने स्थान से नहीं खिसकती, क्योंकि परिणामी बल शून्य होता है।

- मेज पर रखी पुस्तक पर नीचे की ओर कार्य करने वाला भार बल तथा ऊपर की ओर मेज द्वारा लगाया गया प्रतिक्रिया बल परस्पर बराबर और विपरीत होते हैं।

2. असंतुलित बल:

जब किसी वस्तु पर लगे सभी बलों का परिणामी बल शून्य न हो, तो उन बलों को असंतुलित बल कहते हैं। असंतुलित बल वस्तु की गति, चाल या दिशा में परिवर्तन उत्पन्न करते हैं।

उदाहरण:

- रस्साकशी के खेल में यदि एक टीम अधिक बल लगाती है, तो रस्सी उस टीम की ओर खिंच जाती है।

- रुकी हुई कार को जब पीछे से पर्याप्त धक्का दिया जाता है, तो असंतुलित बल के कारण कार गति में आ जाती है।

प्रश्न 3.

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण बल का नियम क्या है? सूत्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

उत्तर:

न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम:

इस नियम के अनुसार, ब्रह्माण्ड में किन्हीं दो पिण्डों के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उन पिण्डों के द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिण्डों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।

सूत्र द्वारा प्रदर्शन:

मान लीजिए m1 तथा m2 द्रव्यमान के दो पिण्ड एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं।

यदि उनके बीच कार्य करने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F है, तो नियम के अनुसार:

1. F ∝ m1 × m2

2. F ∝ 1 / r²

इन दोनों संबंधों को मिलाकर लिखने पर:

F ∝ (m1 × m2) / r²

या, F = G × (m1 × m2) / r²

यहाँ G एक आनुपातिकता स्थिरांक है जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं।

G का मान 6.67 × 10⁻¹¹ न्यूटन-मीटर²/किग्रा² होता है।

प्रश्न 4.

गति के तृतीय समीकरण v² = u² + 2as का निगमन कीजिए।

उत्तर:

गति के तृतीय समीकरण v² = u² + 2as का निगमन:

मान लीजिए किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग u है तथा एक समान त्वरण a से गति करते हुए t समय में s दूरी तय करने के बाद उसका अन्तिम वेग v हो जाता है।

गति के प्रथम समीकरण से:

v = u + at

t = (v - u) / a --- (समीकरण 1)

वस्तु द्वारा t समय में तय की गई दूरी (s):

s = (औसत वेग) × समय

s = [(u + v) / 2] × t --- (समीकरण 2)

समीकरण 2 में समीकरण 1 से t का मान रखने पर:

s = [(v + u) / 2] × [(v - u) / a]

बीजगणितीय सूत्र (A + B)(A - B) = A² - B² का उपयोग करने पर:

s = (v² - u²) / (2a)

तिरछा गुणा (Cross Multiplication) करने पर:

2as = v² - u²

या, v² = u² + 2as

इति सिद्धम्।

अथवा

प्रश्न 4.

न्यूटन के गति सम्बन्धी प्रथम नियम, द्वितीय नियम तथा तृतीय नियम का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

1. न्यूटन का गति सम्बन्धी प्रथम नियम (जड़त्व का नियम):

इस नियम के अनुसार, यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी और यदि वह एक समान चाल से सीधी रेखा में गतिमान है तो वह गतिमान ही रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए।

उदाहरण: चलती हुई बस के अचानक रुकने पर यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं।

2. न्यूटन का गति सम्बन्धी द्वितीय नियम (बल का नियम):

इस नियम के अनुसार, किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बाह्य बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा संवेग परिवर्तन उसी दिशा में होता है जिस दिशा में बल लगाया जाता है।

सूत्र: F = m × a (बल = द्रव्यमान × त्वरण)

उदाहरण: क्रिकेट खिलाड़ी गेंद को कैच करते समय अपने हाथों को पीछे की ओर खींच लेता है।

3. न्यूटन का गति सम्बन्धी तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम):

इस नियम के अनुसार, प्रत्येक क्रिया के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। अर्थात जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर उतना ही बल विपरीत दिशा में लगाती है।

उदाहरण: बंदूक से गोली चलाने पर बंदूक का पीछे की ओर झटका मारना।

प्रश्न 5.

टिप्पणी कीजिए-

(i) ऊर्ध्वपातन

(ii) संघनन

(iii) वाष्पन

(iv) गलनांक

उत्तर:

(i) ऊर्ध्वपातन:

वह प्रक्रिया जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे गैस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, तथा ठंडा करने पर वाष्प सीधे ठोस में बदल जाती है, ऊर्ध्वपातन कहलाती है।

उदाहरण: कपूर, अमोनियम क्लोराइड (नौशादर), नेफ्थलीन।

(ii) संघनन:

वह भौतिक प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ गैस या वाष्प अवस्था से ऊष्मा खोकर (ठंडा होकर) द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, संघनन कहलाती है।

उदाहरण: जलवाष्प का ठंडा होकर जल की बूंदों के रूप में बदलना (वर्षा होना)।

(iii) वाष्पन:

किसी द्रव के उसके क्वथनांक से कम ताप पर सतह से वाष्प में बदलने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं। वाष्पन केवल द्रव की सतह पर होता है और इससे शीतलता उत्पन्न होती है।

उदाहरण: गीले कपड़ों का सूखना, मिट्टी के घड़े में पानी का ठंडा रहना।

(iv) गलनांक:

वह निश्चित ताप जिस पर कोई ठोस पदार्थ वायुमण्डलीय दाब पर पिघलकर द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, उस पदार्थ का गलनांक कहलाता है।

उदाहरण: बर्फ का गलनांक 0°C होता है।

प्रश्न 6.

मिश्रण तथा यौगिक में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

मिश्रण तथा यौगिक में मुख्य चार अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. संगठन:

मिश्रण में दो या दो से अधिक तत्व या यौगिक किसी भी अनिश्चित अनुपात में मिले होते हैं।

यौगिक में दो या दो से अधिक तत्व एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं।

2. गुणधर्म:

मिश्रण अपने घटक पदार्थों के गुणों को प्रदर्शित करता है।

यौगिक के गुण उसके घटक तत्वों के गुणधर्मों से पूर्णतः भिन्न होते हैं।

3. पृथक्करण:

मिश्रण के घटकों को भौतिक विधियों (जैसे छानना, वाष्पीकरण, चुम्बक द्वारा) आसानी से अलग किया जा सकता है।

यौगिक के घटकों को केवल रासायनिक या वैद्युत-रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा ही अलग किया जा सकता है।

4. प्रकृति एवं गलनांक/क्वथनांक:

मिश्रण प्रायः विषमांगी (या समांगी) हो सकता है और इसका गलनांक तथा क्वथनांक निश्चित नहीं होता।

यौगिक सदैव समांगी होता है और इसका गलनांक तथा क्वथनांक निश्चित होता है।

प्रश्न 7.

उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए–

(क) द्रव्य के अविनाशिता का नियम

(ख) स्थिर अनुपात का नियम।

अथवा

ठोस, द्रव तथा गैस अवस्था को उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:

(क) द्रव्य के अविनाशिता का नियम (Law of Conservation of Mass):

नियम: इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्य (द्रव्यमान) को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। अर्थात् किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।

उदाहरण: जब 12 ग्राम कार्बन (C) को 32 ग्राम ऑक्सीजन (O₂) में पूर्णतः जलाया जाता है, तो 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) प्राप्त होती है।

C + O₂ → CO₂

अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = 12 ग्राम + 32 ग्राम = 44 ग्राम

उत्पाद का कुल द्रव्यमान = 44 ग्राम

अतः अभिक्रिया के पूर्व और पश्चात् द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।

(ख) स्थिर अनुपात का नियम (Law of Constant Proportions):

नियम: इस नियम के अनुसार, किसी भी शुद्ध रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में संयुक्त रहते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि से बनाया गया हो।

उदाहरण: जल (H₂O) को चाहे नदी, कुएँ, वर्षा या प्रयोगशाला किसी भी स्रोत से प्राप्त किया जाए, उसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के द्रव्यमानों का अनुपात सदैव 1 : 8 रहता है (2 ग्राम हाइड्रोजन : 16 ग्राम ऑक्सीजन = 1 : 8)।

अथवा

ठोस, द्रव तथा गैस अवस्था की व्याख्या:

1. ठोस अवस्था:

वह अवस्था जिसका आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं। इनके कणों के बीच अंतर-अणुक आकर्षण बल बहुत प्रबल होता है और कण एक-दूसरे के अत्यधिक निकट होते हैं।

उदाहरण: लकड़ी, लोहा, बर्फ, पत्थर।

2. द्रव अवस्था:

वह अवस्था जिसका आयतन निश्चित होता है परंतु आकार अनिश्चित होता है (यह उसी बर्तन का आकार ग्रहण कर लेता है जिसमें इसे रखा जाता है)। इनके कणों के बीच अंतर-अणुक बल ठोसों की तुलना में कम होता है।

उदाहरण: जल, दूध, तेल।

3. गैस अवस्था:

वह अवस्था जिसका न तो आकार निश्चित होता है और न ही आयतन। इनके कणों के बीच अंतर-अणुक बल नगण्य होता है और कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र गति करते हैं।

उदाहरण: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, वायु।

प्रश्न 8.

प्रोकेरियोटिक तथा यूकेरियोटिक कोशिका में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

प्रोकेरियोटिक तथा यूकेरियोटिक कोशिका में चार मुख्य अन्तर निम्नवत् हैं:

1. केन्द्रक की उपस्थिति: प्रोकेरियोटिक कोशिका में सुसंगठित केन्द्रक तथा केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है (केवल प्राथमिक केन्द्रकाभ होता है), जबकि यूकेरियोटिक कोशिका में सुसंगठित केन्द्रक तथा केन्द्रक झिल्ली उपस्थित होती है।

2. आकार: प्रोकेरियोटिक कोशिकाएँ सामान्यतः आकार में बहुत छोटी (1 से 10 माइक्रोमीटर) होती हैं, जबकि यूकेरियोटिक कोशिकाएँ आकार में बड़ी (10 से 100 माइक्रोमीटर) होती हैं।

3. कोशिकांग: प्रोकेरियोटिक कोशिका में झिल्लीयुक्त कोशिकांग जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गोल्जीकाय, अंतःप्रद्रव्यी जालिका आदि अनुपस्थित होते हैं, जबकि यूकेरियोटिक कोशिका में ये सभी कोशिकांग उपस्थित होते हैं।

4. राइबोसोम एवं गुणसूत्र: प्रोकेरियोटिक कोशिका में 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं तथा गुणसूत्र केवल एक और वृत्ताकार होता है, जबकि यूकेरियोटिक कोशिका में 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं और एक से अधिक रेखीय गुणसूत्र होते हैं।

प्रश्न 9.

लवक कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक की परिभाषा तथा उनके कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

लवक (Plastids) केवल पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं। यह मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:

1. हरितलवक (Chloroplast):

परिभाषा: हरे रंग के लवक जिनमें पर्णहरित (क्लोरोफिल) नामक हरा वर्णक पाया जाता है, उन्हें हरितलवक कहते हैं।

कार्य: यह सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा पौधों के लिए भोजन का निर्माण करता है। इसीलिए इसे कोशिका का रसोईघर भी कहते हैं।

2. वर्णीलवक (Chromoplast):

परिभाषा: हरे रंग को छोड़कर अन्य विभिन्न रंगों (जैसे लाल, पीला, नारंगी आदि) के लवकों को वर्णीलवक कहते हैं।

कार्य: यह पुष्पों तथा फलों को आकर्षक रंग प्रदान करता है, जिससे कीट आकर्षित होते हैं और परागण तथा बीज प्रकीर्णन में सहायता मिलती है।

3. अवर्णीलवक (Leucoplast):

परिभाषा: ये रंगहीन लवक होते हैं जो मुख्यतः पौधों के उन भागों में पाए जाते हैं जो सूर्य के प्रकाश से वंचित रहते हैं, जैसे जड़ें तथा भूमिगत तने।

कार्य: इसका मुख्य कार्य स्टार्च (मण्ड), वसा तथा प्रोटीन जैसे खाद्य पदार्थों का संचय करना है।

प्रश्न 10.

केन्द्रक की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए। केन्द्रक के कार्य लिखिए।

उत्तर:

केन्द्रक की संरचना:

केन्द्रक कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण केन्द्र है। इसकी संरचना के चार प्रमुख भाग हैं:

1. केन्द्रक कला (Nuclear Membrane): यह दोहरी झिल्ली वाली आवरण परत है जो केन्द्रक को कोशिकाद्रव्य से अलग करती है। इसमें सूक्ष्म छिद्र (केन्द्रक रंध्र) होते हैं।

2. केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm): यह केन्द्रक के अंदर भरा हुआ पारदर्शी, गाढ़ा एवं तरल पदार्थ है जिसमें क्रोमैटिन तथा केन्द्रिका तैरते रहते हैं।

3. केन्द्रिका (Nucleolus): केन्द्रक के अंदर एक या अधिक गोल, घनी संरचनाएँ पाई जाती हैं जो आर.एन.ए. और राइबोसोम का निर्माण करती हैं।

4. क्रोमैटिन धागे (Chromatin Threads): केन्द्रक द्रव्य में जाल के रूप में फैले हुए पतले धागेनुमा संरचनाएँ पाई जाती हैं, जो D.N.A. तथा प्रोटीन से बनी होती हैं। कोशिका विभाजन के समय ये गुणसूत्र का रूप ले लेते हैं।

चित्र का वर्णन (शब्दों में):

- आकृति: केन्द्रक एक गोलाकार अथवा अंडाकार दोहरी झिल्ली से घिरी हुई संरचना है।

- केन्द्रक कला: सबसे बाहरी आवरण के रूप में दोहरी दीवार है, जिसमें जगह-जगह छोटे छिद्र (केन्द्रक रंध्र) बने होते हैं।

- केन्द्रक द्रव्य: दोहरी झिल्ली के अंदर का मध्य भाग तरल पदार्थ से भरा हुआ है।

- केन्द्रिका: केन्द्रक के अंदर मध्य-बाएँ भाग में एक ठोस, गोल संरचना दर्शायी जाती है।

- क्रोमैटिन सञ्जाल: पूरे केन्द्रक द्रव्य के अंदर फैले हुए उलझे हुए धागेनुमा जाल के रूप में स्थित है।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

केन्द्रक के कार्य:

1. कोशिका का नियंत्रण: केन्द्रक कोशिका की सभी उपापचयी तथा जैविक क्रियाओं का नियंत्रण एवं नियमन करता है।

2. आनुवंशिक सूचनाओं का स्थानान्तरण: इसमें उपस्थित D.N.A. और गुणसूत्र माता-पिता के आनुवंशिक लक्षणों को संतान में पहुँचाते हैं।

3. कोशिका विभाजन: यह कोशिका विभाजन की प्रक्रिया को निर्देशित करता है।

प्रश्न 11.

(क) रेखित तथा अरेखित पेशी में तीन अन्तर लिखिए।

(ख) मृदूतक तथा स्थूलकोणऊतक में तीन अन्तर लिखिए।

अथवा

पादप तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर लिखिए।

उत्तर:

(क) रेखित तथा अरेखित पेशी में तीन अन्तर:

1. पट्टियों की उपस्थिति: रेखित पेशियों में एकांतर क्रम में गहरी तथा हल्की पट्टियाँ (धारियाँ) पाई जाती हैं, जबकि अरेखित पेशियों में ऐसी पट्टियाँ नहीं पाई जाती हैं।

2. नियंत्रण: रेखित पेशियाँ ऐच्छिक होती हैं (हमारी इच्छानुसार कार्य करती हैं), जबकि अरेखित पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं (हमारी इच्छा के अधीन नहीं होती हैं)।

3. संरचना: रेखित पेशी कोशिकाएँ बेलनाकार तथा बहुकेन्द्रकीय होती हैं, जबकि अरेखित पेशी कोशिकाएँ तर्कुरूपी (स्पिंडल आकार की) तथा एककेन्द्रकीय होती हैं।

(ख) मृदूतक तथा स्थूलकोणऊतक में तीन अन्तर:

1. कोशिका भित्ति: मृदूतक की कोशिका भित्ति पतली और सेल्यूलोज की बनी होती है, जबकि स्थूलकोणऊतक की कोशिका भित्ति कोनों पर पेक्टिन और सेल्यूलोज के जमाव के कारण मोटी होती है।

2. अंतर-कोशिकीय स्थान: मृदूतक में कोशिकाओं के बीच पर्याप्त अंतर-कोशिकीय स्थान होता है, जबकि स्थूलकोणऊतक में अंतर-कोशिकीय स्थान बहुत कम या अनुपस्थित होता है।

3. कार्य: मृदूतक मुख्य रूप से भोजन का संचय करता है, जबकि स्थूलकोणऊतक पौधों को यांत्रिक सहारा एवं लचीलापन प्रदान करता है।

अथवा

पादप तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर:

1. कोशिका भित्ति: पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के बाहर सेल्यूलोज की बनी दृढ़ कोशिका भित्ति पाई जाती है, जबकि जन्तु कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।

2. लवक: पादप कोशिका में हरितलवक तथा अन्य लवक उपस्थित होते हैं, जबकि जन्तु कोशिका में लवक अनुपस्थित होते हैं।

3. रसधानी: पादप कोशिका में एक बड़ी तथा स्थायी केन्द्रीय रसधानी होती है, जबकि जन्तु कोशिका में रसधानियाँ या तो अनुपस्थित होती हैं या बहुत छोटी होती हैं।

4. तारककाय: पादप कोशिका में तारककाय अनुपस्थित होता है, जबकि जन्तु कोशिका में तारककाय उपस्थित होता है।

5. आकार: पादप कोशिकाएँ सामान्यतः निश्चित आयताकार आकार की होती हैं, जबकि जन्तु कोशिकाएँ आकार में परिवर्तनशील और गोल या अनियमित होती हैं।

6. भोजन का संचय: पादप कोशिका में भोजन स्टार्च के रूप में संचित होता है, जबकि जन्तु कोशिका में भोजन ग्लाइकोजन के रूप में संचित होता है।

प्रश्न 12.

पारे का प्रतीक है–

(A) Ma

(B) Hg

(C) Pa

(D) P

उत्तर:

(B) Hg

व्याख्या: पारे (Mercury) का रासायनिक प्रतीक Hg है, जो इसके लैटिन नाम हाइड्राजिरम (Hydrargyrum) से लिया गया है।

प्रश्न 13.

मैग्नीशियम की संयोजकता 2, नाइट्रोजन की संयोजकता 3 है तो मैग्नीशियम नाइट्राइड का अणुसूत्र है–

(A) Mg₂N₂

(B) Mg₃N₂

(C) Mg₂N₂

(D) MgN

उत्तर:

सही विकल्प: (B) Mg₃N₂

व्याख्या: मैग्नीशियम (Mg) की संयोजकता 2 तथा नाइट्रोजन (N) की संयोजकता 3 का तिर्यक गुणा करने पर मैग्नीशियम नाइट्राइड का अणुसूत्र Mg₃N₂ प्राप्त होता है।

प्रश्न 14.

माइटोकाण्ड्रिया का सम्बन्ध होता है–

(A) श्वसन से

(B) जनन से

(C) उत्सर्जन से

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

सही विकल्प: (A) श्वसन से

व्याख्या: माइटोकाण्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन की प्रक्रिया होती है, जिससे ऊर्जा (ATP) का निर्माण होता है।

प्रश्न 15.

आनुवंशिक गुणों के वाहक होते हैं–

(A) डी. एन. ए.

(B) आर. एन. ए.

(C) गुणसूत्र

(D) राइबोसोम

उत्तर:

सही विकल्प: (C) गुणसूत्र

व्याख्या: गुणसूत्र कोशिका के केन्द्रक में स्थित होते हैं और जनकों से आनुवंशिक गुणों को सन्तान में पहुँचाने वाले वाहक का कार्य करते हैं।

प्रश्न 16.

प्रत्येक जीवधारी की सूक्ष्मतम संरचनात्मक इकाई है–

(A) कोशिका

(B) केन्द्रक

(C) राइबोसोम

(D) माइटोकाण्ड्रिया

उत्तर:

सही विकल्प: (A) कोशिका

व्याख्या: कोशिका सभी जीवधारियों की मौलिक सूक्ष्मतम संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई होती है।

प्रश्न 17.

केन्द्रक की खोज किसने की ?

(A) श्लीडन ने

(B) ब्राउन ने

(C) श्वान ने

(D) डचूव ने

उत्तर:

सही विकल्प: (B) ब्राउन ने

व्याख्या: कोशिका में केन्द्रक की खोज रोबर्ट ब्राउन ने वर्ष 1831 में की थी।

प्रश्न 18.

D.N.A. पाये जाते हैं–

(A) केन्द्रक में

(B) माइटोकाण्ड्रिया में

(C) हरित लवक में

(D) इन सभी में

उत्तर:

सही विकल्प: (D) इन सभी में

व्याख्या: DNA मुख्य रूप से कोशिका के केन्द्रक में पाया जाता है, परंतु माइटोकाण्ड्रिया और हरित लवक (प्लास्टिड) में भी उनका स्वयं का DNA उपस्थित होता है।

प्रश्न 19.

पत्तियों द्वारा भोज्य पदार्थों को पेड़ के विभिन्न भागों तक स्थानान्तरित किया जाता है-

(A) पैरेन्काइमा द्वारा

(B) जाइलम द्वारा

(C) फ्लोएम द्वारा

(D) स्क्लेरेन्काइमा द्वारा

उत्तर:

(C) फ्लोएम द्वारा

व्याख्या: पौधों में पत्तियों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण से निर्मित भोजन को पौधे के अन्य सभी अंगों तक पहुँचाने का कार्य फ्लोएम संवहन ऊतक करता है।

प्रश्न 20.

एपीथीलियम ऊतक का मुख्य कार्य है-

(A) रक्षा

(B) जनन

(C) संवहन

(D) उत्सर्जन

उत्तर:

(A) रक्षा

व्याख्या: एपीथीलियम (उपकला) ऊतक शरीर की बाहरी सतह तथा आंतरिक अंगों को आच्छादित करके उनकी बाह्य आघातों से रक्षा करता है।

प्रश्न 1.

कोई कार एक समान रूप से त्वरित होकर 5 सेकंड में 18 किमी/घण्टा से 36 किमी/घण्टा की चाल प्राप्त करती है, ज्ञात कीजिए (i) कार का त्वरण (ii) उतने समय में चली गई दूरी।

उत्तर:

दिया है:

समय (t) = 5 s

प्रारंभिक वेग (u) = 18 किमी/घण्टा = 18 × (5/18) = 5 मी/से

अंतिम वेग (v) = 36 किमी/घण्टा = 36 × (5/18) = 10 मी/से

ज्ञात सूत्र:

(i) त्वरण (a) = (v - u) / t

(ii) दूरी (s) = ut + (1/2)at²

हल:

(i) कार का त्वरण:

a = (10 - 5) / 5

a = 5 / 5

a = 1 मी/से²

(ii) उतने समय में चली गई दूरी:

s = (5 × 5) + (1/2) × 1 × (5)²

s = 25 + (1/2) × 25

s = 25 + 12.5

s = 37.5 मीटर

अतः उत्तर:

(i) कार का त्वरण 1 मी/से² है।

(ii) उतने समय में चली गई दूरी 37.5 मीटर है।

प्रश्न 2.

संतुलित तथा असंतुलित बलों के उदाहरण देकर समझाइए ?

उत्तर:

संतुलित बल:

जब किसी वस्तु पर एक साथ कई बल कार्य कर रहे हों और उन सभी बलों का परिणामी बल शून्य हो, तो उन बलों को संतुलित बल कहते हैं। संतुलित बल वस्तु की विरामावस्था या गति की अवस्था में परिवर्तन नहीं करते, केवल उसकी आकृति बदल सकते हैं।

उदाहरण:

1. रस्साकशी के खेल में जब दोनों टीमें बराबर बल लगाती हैं, तो रस्सी अपनी जगह पर स्थिर रहती है।

2. मेज पर रखी हुई पुस्तक पर नीचे की ओर कार्य करने वाला गुरुत्वाकर्षण बल तथा ऊपर की ओर मेज की प्रतिक्रिया बल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।

असंतुलित बल:

जब किसी वस्तु पर कार्य करने वाले बलों का परिणामी बल शून्य न हो, तो उन बलों को असंतुलित बल कहते हैं। असंतुलित बल वस्तु की चाल, गति की दिशा अथवा विरामावस्था में परिवर्तन लाते हैं।

उदाहरण:

1. रस्साकशी के खेल में जब एक टीम अधिक बल लगाती है, तो रस्सी उस टीम की ओर खिंच जाती है।

2. किसी स्थिर फुटबॉल को पैर से किक मारने पर असंतुलित बल के कारण वह गतिमान हो जाती है।

प्रश्न 3.

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण बल का नियम क्या है ? सूत्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

उत्तर:

न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम:

इस नियम के अनुसार, "ब्रह्मांड में किन्हीं दो पिंडों के मध्य कार्य करने वाला आकर्षण बल उन पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।" इस बल की दिशा दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होती है।

सूत्र द्वारा प्रदर्शन:

माना m1 तथा m2 द्रव्यमान के दो पिंड एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं।

नियम के अनुसार:

बल (F) अनुक्रमानुपाती m1 × m2

बल (F) व्युत्क्रमानुपाती 1 / r²

इन दोनों संबंधों को मिलाने पर:

F = G × (m1 × m2) / r²

यहाँ:

F = गुरुत्वाकर्षण बल (न्यूटन)

m1, m2 = पिंडों के द्रव्यमान (किग्रा)

r = पिंडों के बीच की दूरी (मीटर)

G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (जिसका मान 6.67 × 10⁻11 N m²/kg² होता है।)

प्रश्न 4.

गति के तृतीय समीकरण v² = u² + 2as का निगमन कीजिए।

अथवा

न्यूटन के गति सम्बन्धी प्रथम नियम, द्वितीय नियम तथा तृतीय नियम का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

गति के तृतीय समीकरण (v² = u² + 2as) का निगमन:

माना कि एक वस्तु प्रारंभिक वेग u से गति प्रारम्भ करती है तथा a एकसमान त्वरण के साथ t समय में s दूरी तय करके अंतिम वेग v प्राप्त करती है।

गति के प्रथम समीकरण से:

v = u + at

t = (v - u) / a ... (समीकरण 1)

हम जानते हैं कि:

औसत वेग = (u + v) / 2

तय की गई दूरी (s) = औसत वेग × समय

s = [(v + u) / 2] × t ... (समीकरण 2)

समीकरण 2 में समीकरण 1 से t का मान रखने पर:

s = [(v + u) / 2] × [(v - u) / a]

s = (v² - u²) / (2a)

त्रियक गुणा करने पर:

2as = v² - u²

v² = u² + 2as

यह गति का तृतीय समीकरण है।

अथवा

न्यूटन के गति सम्बन्धी नियम:

1. प्रथम नियम (जड़त्व का नियम):

इस नियम के अनुसार, "यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी, और यदि वह एकसमान चाल से सीधी रेखा में गतिमान है तो वह गतिमान ही रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए।"

उदाहरण: रुकी हुई बस के अचानक चलने पर उसमें बैठे यात्री पीछे की ओर गिर पड़ते हैं।

2. द्वितीय नियम (संवेग परिवर्तन का नियम):

इस नियम के अनुसार, "किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए बाह्य बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा संवेग परिवर्तन उसी दिशा में होता है जिस दिशा में बल लगाया जाता है।"

सूत्र: F = m × a (बल = द्रव्यमान × त्वरण)

उदाहरण: क्रिकेट खिलाड़ी कैच लेते समय गेंद के साथ अपने हाथों को पीछे खींचता है ताकि बल का प्रभाव कम हो।

3. तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम):

इस नियम के अनुसार, "प्रत्येक क्रिया की उसके बराबर परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।"

उदाहरण: बंदूक से गोली चलाने पर बंदूक पीछे की ओर झटका देती है।

प्रश्न 5.

टिप्पणी कीजिए–

(i) ऊर्ध्वपातन

(ii) संघनन

(iii) वाष्पन

(iv) गलनांक

उत्तर:

(i) ऊर्ध्वपातन:

वह भौतिक प्रक्रिया जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए सीधे गैस में बदल जाता है, तथा ठंडा करने पर गैस से सीधे ठोस में बदल जाता है, ऊर्ध्वपातन कहलाती है।

उदाहरण: कपूर, अमोनियम क्लोराइड (नौशादर)।

(ii) संघनन:

वह प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ गैस अवस्था से ठंडा होकर द्रव अवस्था में परिवर्तित होता है, संघनन कहलाती है।

उदाहरण: जलवाष्प का ठंडा होकर जल की बूंदों में बदलना।

(iii) वाष्पन:

गलनांक व क्वथनांक से कम किसी भी तापमान पर द्रव की सतह के कणों का वाष्प में बदलने की प्रक्रिया वाष्पन कहलाती है।

उदाहरण: गीले कपड़ों का सूखना तथा फर्श पर फैले पानी का उड़ जाना।

(iv) गलनांक:

वायुमंडलीय दाब पर वह निश्चित तापमान जिस पर कोई ठोस पदार्थ पिघलकर द्रव अवस्था में बदल जाता है, उस ठोस का गलनांक कहलाता है।

उदाहरण: बर्फ का गलनांक 0°C होता है।

प्रश्न 6.

मिश्रण तथा यौगिक में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

मिश्रण तथा यौगिक में चार प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. घटकों का अनुपात:

मिश्रण में अवयवी पदार्थ किसी भी अनिश्चित अनुपात में मिले हो सकते हैं।

यौगिक में अवयवी तत्व सदैव एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में रासायनिक रूप से जुड़े होते हैं।

2. गुणधर्म:

मिश्रण में उसके सभी घटक पदार्थों के गुण विद्यमान रहते हैं।

यौगिक के गुणधर्म उसके अवयवी तत्वों के गुणधर्मों से पूरी तरह भिन्न होते हैं।

3. पृथक्करण:

मिश्रण के घटकों को भौतिक विधियों (जैसे छानना, चुम्बक द्वारा, वाष्पीकरण आदि) द्वारा आसानी से अलग किया जा सकता है।

यौगिक के अवयवों को केवल रासायनिक या वैद्युत-रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा ही पृथक किया जा सकता है।

4. निर्माण में ऊर्जा परिवर्तन:

मिश्रण बनते समय प्रायः कोई ऊर्जा (ऊष्मा या प्रकाश) न तो अवशोषित होती है और न ही उत्सर्जित।

यौगिक के निर्माण में रासायनिक अभिक्रिया के कारण प्रायः ऊष्मा, प्रकाश अथवा विद्युत ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन होता है।

प्रश्न 7.

उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए–

(क) द्रव्य के अविनाशिता का नियम

(ख) स्थिर अनुपात का नियम।

उत्तर:

(क) द्रव्य के अविनाशिता का नियम (द्रव्यमान संरक्षण का नियम):

इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक या भौतिक परिवर्तन में द्रव्य (द्रव्यमान) को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। अर्थात किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों का कुल द्रव्यमान, अभिक्रिया के बाद प्राप्त उत्पादों के कुल द्रव्यमान के सदैव बराबर होता है।

उदाहरण: 12 ग्राम कार्बन को 32 ग्राम ऑक्सीजन के साथ पूरी तरह जलाने पर 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। यहाँ अभिकारकों का द्रव्यमान (12 + 32 = 44 ग्राम) उत्पाद के द्रव्यमान (44 ग्राम) के बराबर है।

(ख) स्थिर अनुपात का नियम:

इस नियम के अनुसार, प्रत्येक शुद्ध रासायनिक यौगिक में उसके अवयवी तत्व सदैव द्रव्यमान के एक निश्चित अनुपात में पाए जाते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत से प्राप्त किया गया हो या किसी भी विधि द्वारा बनाया गया हो।

उदाहरण: शुद्ध जल (H₂O) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदैव 1:8 होता है, चाहे वह नदी का जल हो, वर्षा का हो या प्रयोगशाला में निर्मित जल हो।

अथवा

प्रश्न 7 (अथवा).

ठोस, द्रव तथा गैस अवस्था को उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:

1. ठोस अवस्था:

पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसका आकार तथा आयतन दोनों निश्चित होते हैं, ठोस अवस्था कहलाती है। इसमें कण एक-दूसरे के बहुत पास होते हैं और अंतराणुक बल बहुत मजबूत होता है।

उदाहरण: लोहा, लकड़ी, पत्थर, बर्फ।

2. द्रव अवस्था:

पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसका आयतन निश्चित होता है परंतु आकार अनिश्चित होता है (जिस बर्तन में रखा जाए उसी का आकार ले लेता है), द्रव अवस्था कहलाती है। इसके कणों के बीच अंतराणुक बल ठोस से कम होता है।

उदाहरण: जल, दूध, सरसों का तेल, मिट्टी का तेल।

3. गैस अवस्था:

पदार्थ की वह भौतिक अवस्था जिसका न तो आकार निश्चित होता है और न ही आयतन निश्चित होता है, गैस अवस्था कहलाती है। इसके कणों के मध्य अंतराणुक आकर्षण बल नगण्य होता है और कण स्वतंत्र गति करते हैं।

उदाहरण: ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, वायु, जलवाष्प।

प्रश्न 8.

प्रोकेरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

प्रोकेरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका में चार अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. केंद्रक की उपस्थिति:

प्रोकेरियोटिक कोशिका में सुसंगठित केंद्रक (केंद्रक कला सहित) अनुपस्थित होता है।

यूकैरियोटिक कोशिका में केंद्रक झिल्ली से घिरा सुसंगठित केंद्रक उपस्थित होता है।

2. कोशिकांग:

प्रोकेरियोटिक कोशिका में झिल्लीयुक्त कोशिकांग (जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गोलगी काय, अंतर्द्रव्यी जालिका आदि) अनुपस्थित होते हैं।

यूकैरियोटिक कोशिका में सभी झिल्लीयुक्त कोशिकांग उपस्थित होते हैं।

3. राइबोसोम:

प्रोकेरियोटिक कोशिका में केवल 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।

यूकैरियोटिक कोशिका में 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।

4. गुणसूत्र की संरचना:

प्रोकेरियोटिक कोशिका में केवल एक वृत्ताकार गुणसूत्र होता है जिसमें हिस्टोन प्रोटीन नहीं होती।

यूकैरियोटिक कोशिका में एक से अधिक रेखीय गुणसूत्र पाए जाते हैं जिनमें हिस्टोन प्रोटीन उपस्थित होती है।

प्रश्न 9.

लवक कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक की परिभाषा तथा उनके कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

पादप कोशिकाओं में पाए जाने वाले लवक (Plastids) मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

1. अवर्णी लवक (ल्यूकोप्लास्ट):

परिभाषा: ये रंगहीन लवक होते हैं जो पौधों की उन कोशिकाओं में पाए जाते हैं जो सूर्य के प्रकाश से दूर रहती हैं, जैसे जड़ें और भूमिगत तने।

कार्य: इनका मुख्य कार्य पौधों में खाद्य पदार्थों जैसे स्टार्च, वसा तथा प्रोटीन का संग्रह (संचयन) करना है।

2. वर्णी लवक (क्रोमोप्लास्ट):

परिभाषा: ये हरे रंग को छोड़कर अन्य विभिन्न रंगों (जैसे लाल, पीले, नारंगी आदि) के लवक होते हैं। ये मुख्य रूप से पुष्पों की पंखुड़ियों तथा फलभित्ति में पाए जाते हैं।

कार्य: ये पुष्पों को सुंदर व आकर्षक रंग प्रदान करते हैं जिससे कीट परागण के लिए आकर्षित होते हैं, तथा फलों को रंग प्रदान करते हैं।

3. हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट):

परिभाषा: ये हरे रंग के लवक होते हैं जिनमें हरा वर्णक 'क्लोरोफिल' (पर्णहरित) पाया जाता है। ये मुख्य रूप से पत्तियों तथा पौधों के हरे भागों में उपस्थित होते हैं।

कार्य: इनका मुख्य कार्य सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा पौधों के लिए भोजन का निर्माण करना है। इसीलिए हरित लवक को 'कोशिका का रसोईघर' कहा जाता है।

प्रश्न 10.

केन्द्रक की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए। केन्द्रक के कार्य लिखिए।

उत्तर:

केन्द्रक की संरचना:

केन्द्रक कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण कोशिकांग है। यह प्रायः गोल या अण्डाकार होता है तथा कोशिका के लगभग मध्य में पाया जाता है। केन्द्रक की संरचना को निम्नलिखित मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है:

1. केन्द्रक कला: यह केन्द्रक को चारों ओर से घेरने वाली दोहरी झिल्ली होती है। इसमें छोटे-छोटे छिद्र पाए जाते हैं जिन्हें केन्द्रकीय रंध्र कहते हैं। इनके द्वारा केन्द्रक द्रव्य तथा कोशिका द्रव्य के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान होता है।

2. केन्द्रक द्रव्य: केन्द्रक झिल्ली के अन्दर भरा हुआ पारदर्शी, गाढ़ा एवं तरल पदार्थ केन्द्रक द्रव्य कहलाता है। इसमें प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल, एन्जाइम तथा खनिज लवण पाए जाते हैं।

3. केन्द्रिका: केन्द्रक के अन्दर एक या दो छोटी, गोल तथा घनी संरचनाएँ पाई जाती हैं, जिन्हें केन्द्रिका कहते हैं। यह आर.एन.ए. तथा राइबोसोम का निर्माण करती है।

4. क्रोमैटिन जालिका: केन्द्रक द्रव्य में पतले धागेनुमा संरचनाओं का एक उलझा हुआ जाल फैला होता है जिसे क्रोमैटिन जालिका कहते हैं। कोशिका विभाजन के समय ये धागे सघन होकर गुणसूत्र बनाते हैं। गुणसूत्रों पर आनुवंशिक इकाइयाँ अर्थात् जीन पाए जाते हैं।

चित्र का वर्णन:

1. बाहरी सीमा पर एक गोल दोहरी आवरण रेखा (केन्द्रक कला) होती है जिसमें बीच-बीच में सूक्ष्म छिद्र (केन्द्रकीय रंध्र) स्थित होते हैं।

2. आवरण के भीतर भरा हुआ द्रव (केन्द्रक द्रव्य) होता है।

3. केन्द्रक के मध्य भाग में एक सघन गोल पिण्ड (केन्द्रिका) स्थित होता है।

4. पूरे द्रव में फैले हुए पतले, उलझे धागे (क्रोमैटिन धागे) दिखाए जाते हैं।

केन्द्रक के कार्य:

1. केन्द्रक कोशिका की समस्त उपापचयी तथा जैविक क्रियाओं का नियन्त्रण एवं संचालन करता है, इसलिए इसे कोशिका का नियन्त्रण केन्द्र कहते हैं।

2. यह आनुवंशिक लक्षणों को डीएनए (DNA) के रूप में माता-पिता से सन्तानों में स्थानान्तरित करता है।

3. यह कोशिका विभाजन की प्रक्रिया को नियन्त्रित और निर्देशित करता है।

4. यह राइबोसोम और आर.एन.ए. के संश्लेषण में सहायक होता है।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

प्रश्न 11 (क).

रेखित तथा अरेखित पेशी में तीन अन्तर लिखिए।

उत्तर:

रेखित तथा अरेखित पेशी में तीन अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. संरचना तथा पट्टियाँ: रेखित पेशी तंतुओं में एकांतर क्रम में गहरी तथा हल्की पट्टियाँ (रेखाएँ) पाई जाती हैं, जबकि अरेखित पेशी तंतुओं में ऐसी पट्टियाँ नहीं पाई जाती हैं।

2. नियंत्रण: रेखित पेशियाँ ऐच्छिक होती हैं अर्थात् ये हमारी इच्छा के अनुसार कार्य करती हैं। अरेखित पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं अर्थात् इन पर हमारी इच्छा का नियंत्रण नहीं होता।

3. आकृति तथा केंद्रक: रेखित पेशी की कोशिकाएँ लंबी, बेलनाकार, अशाखित तथा बहुकेंद्रकीय होती हैं। अरेखित पेशी की कोशिकाएँ तर्कुरूपी (दोनों सिरों पर नुकीली) तथा एककेंद्रकीय होती हैं।

प्रश्न 11 (ख).

मृदूतक तथा स्थूलकोणऊतक में तीन अन्तर लिखिए।

उत्तर:

मृदूतक तथा स्थूलकोणऊतक में तीन अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. कोशिका भित्ति: मृदूतक की कोशिका भित्ति पतली होती है और मुख्य रूप से सेल्यूलोज़ की बनी होती है। स्थूलकोणऊतक की कोशिका भित्ति के कोनों पर पेक्टिन तथा सेल्यूलोज़ के जमाव के कारण मोटाई अधिक होती है।

2. अंतरकोशिकीय स्थान: मृदूतक कोशिकाओं के बीच में पर्याप्त अंतरकोशिकीय स्थान पाया जाता है, जबकि स्थूलकोणऊतक कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय स्थान बहुत कम या अनुपस्थित होता है।

3. मुख्य कार्य: मृदूतक का मुख्य कार्य भोजन का भंडारण तथा प्रकाश-संश्लेषण करना है। स्थूलकोणऊतक पौधों को यांत्रिक मजबूती तथा लचीलापन प्रदान करता है।

प्रश्न 11 (अथवा).

पादप तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर लिखिए।

उत्तर:

पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. कोशिका भित्ति: पादप कोशिका में प्लाज्मा झिल्ली के बाहर सेल्यूलोज़ की बनी दृढ़ कोशिका भित्ति पाई जाती है। जन्तु कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।

2. लवक (प्लास्टिड): पादप कोशिका में हरितलवक, वर्णीलवक तथा अवर्णीलवक उपस्थित होते हैं। जन्तु कोशिका में लवक अनुपस्थित होते हैं।

3. रसधानी (रिक्तिका): पादप कोशिका में एक बड़ी तथा स्थायी केंद्रीय रसधानी पाई जाती है। जन्तु कोशिका में रसधानियाँ बहुत छोटी तथा अस्थायी होती हैं या अनुपस्थित होती हैं।

4. तारककाय (सेंट्रोसोम): पादप कोशिका में तारककाय सामान्यतः अनुपस्थित होता है। जन्तु कोशिका में तारककाय उपस्थित होता है जो कोशिका विभाजन में सहायता करता है।

5. आकार एवं आकृति: पादप कोशिका का आकार निश्चित तथा प्रायः आयताकार या बहुभुजीय होता है। जन्तु कोशिका का आकार अनिश्चित तथा प्रायः गोल या वृत्ताकार होता है।

6. संचित भोजन: पादप कोशिका में संचित भोजन मण्ड (स्टार्च) के रूप में रहता है। जन्तु कोशिका में संचित भोजन ग्लाइकोजन तथा वसा के रूप में रहता है।