प्रश्न 1.
निम्नलिखित में अदिश राशि है-
(a) विस्थापन
(b) त्वरण
(c) दूरी
(d) बल
उत्तर:
(c) दूरी
व्याख्या: दूरी में केवल परिमाण होता है, कोई निश्चित दिशा नहीं होती, इसलिए यह अदिश राशि है।
UP Board Class 9th Science Half Yearly Paper 2026 B Code
कक्षा 9वीं · विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा
निम्नलिखित में अदिश राशि है-
(a) विस्थापन
(b) त्वरण
(c) दूरी
(d) बल
उत्तर:
(c) दूरी
व्याख्या: दूरी में केवल परिमाण होता है, कोई निश्चित दिशा नहीं होती, इसलिए यह अदिश राशि है।
गतिमान पिण्ड के चाल-समय ग्राफ के ढलान से क्या पता चलता है-
(a) चाल
(b) त्वरण
(c) वेग
(d) दूरी
उत्तर:
(b) त्वरण
व्याख्या: चाल-समय रेखा का ढाल समय के साथ चाल में परिवर्तन की दर अर्थात त्वरण को प्रदर्शित करता है।
वृत्ताकार गति में निम्न में से कौनसी भौतिक राशि एक समान स्थिर रह सकती है-
(a) चाल
(b) वेग
(c) त्वरण
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(a) चाल
व्याख्या: एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर रहती है, जबकि गति की दिशा बदलने के कारण वेग तथा त्वरण परिवर्तित होते रहते हैं।
बल F तथा संवेग परिवर्तन Δp में सम्बंध है-
(a) F = Δp × Δt
(b) F × Δp = Δt
(c) F × (Δp/Δt) = 0
(d) Δp = F × Δt
उत्तर:
(d) Δp = F × Δt
व्याख्या: न्यूटन के द्वितीय नियमानुसार बल F = Δp / Δt होता है, अतः संवेग परिवर्तन Δp = F × Δt होगा।
बल का S.I. मात्रक है-
(a) मी/से²
(b) मी/से
(c) किग्रा मी/से²
(d) किग्रा × से.
उत्तर:
(c) किग्रा मी/से²
व्याख्या: सूत्र F = m × a के अनुसार बल का S.I. मात्रक किग्रा मी/से² (न्यूटन) होता है।
रॉकेट निम्नलिखित में से किसके संरक्षण के नियम पर आधारित है-
(a) द्रव्यमान के
(b) ऊर्जा के
(c) संवेग के
(d) वेग के
उत्तर:
(c) संवेग के
व्याख्या: रॉकेट की गति रेखीय संवेग संरक्षण के सिद्धान्त पर कार्य करती है।
यदि दो पिण्डों के बीच दूरी दो गुनी कर दी जाये तो उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल होगा-
(a) दो गुना
(b) आधा
(c) एक चौथाई
(d) कोई परिवर्तन नहीं
उत्तर:
(c) एक चौथाई
व्याख्या: गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए दूरी दोगुनी करने पर बल घटकर एक चौथाई रह जाता है।
निम्नलिखित में से किस पदार्थ का ऊर्ध्वपातन हो जाता है-
(a) नमक
(b) चीनी
(c) अमोनिया क्लोराइड
(d) सोडियम क्लोराइड
उत्तर:
(c) अमोनिया क्लोराइड
व्याख्या: अमोनियम क्लोराइड ठोस अवस्था से बिना द्रव में बदले सीधे गैस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है।
किसमें अन्तराअणुक स्थान सर्वाधिक होता है-
(a) ठोस में
(b) द्रव में
(c) गैस में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) गैस में
व्याख्या: गैस के कणों के मध्य न्यूनतम आकर्षण बल होने के कारण उनके बीच अन्तरआण्विक स्थान सबसे अधिक होता है।
निम्नलिखित में मिश्रण है-
(a) वायु
(b) जल
(c) मिट्टी
(d) नाइट्रोजन
उत्तर:
(a) वायु
व्याख्या: वायु विभिन्न गैसों (नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि) का एक समांगी मिश्रण है।
निम्नलिखित में कोलायडी विलयन नहीं है-
(a) गोंद
(b) दूध
(c) नमक का जलीय विलयन
(d) रुधिर
उत्तर:
(c) नमक का जलीय विलयन
व्याख्या: नमक का जल में घोल एक वास्तविक समांगी विलयन है, कोलायडी विलयन नहीं।
नाइट्रोजन का संकेत है-
(a) Ni
(b) Na
(c) N
(d) Ne
उत्तर:
(c) N
व्याख्या: नाइट्रोजन तत्व का रासायनिक प्रतीक N होता है।
नमक का रासायनिक सूत्र है-
(a) NaOH
(b) NaCl
(c) Na₂CO₃
(d) Na₂SO₄
उत्तर:
(b) NaCl
व्याख्या: साधारण नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड है तथा इसका सूत्र NaCl है।
माइटोकाण्ड्रिया का सम्बन्ध होता है-
(a) श्वसन से
(b) जनन से
(c) उत्सर्जन से
(d) पाचक एन्जाइमों से
उत्तर:
(a) श्वसन से
व्याख्या: माइटोकाण्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन की क्रिया सम्पन्न होती है और ऊर्जा मुक्त होती है।
प्रत्येक जीवधारी की सूक्ष्मतम संरचनात्मक इकाई है-
(a) कोशिका
(b) माइटोकाण्ड्रिया
(c) राइबोसोम
(d) केन्द्रक
उत्तर:
(a) कोशिका
व्याख्या: कोशिका सभी सजीवों की सबसे छोटी संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई होती है।
टमाटर का लाल रंग किसके कारण होता है-
(a) हरित लवक
(b) वर्णीलवक
(c) अवर्णीलवक
(d) प्लास्टीडोम
उत्तर:
(b) वर्णीलवक
व्याख्या: टमाटर का लाल रंग वर्णीलवक में उपस्थित लाइकोपीन नामक वर्णक के कारण होता है।
कोशिका की खोज किसने की-
(a) रॉबर्ट हुक ने
(b) रॉबर्ट ब्राउन ने
(c) रॉबर्ट टेलर ने
(d) कार्ल लिने ने
उत्तर:
(a) रॉबर्ट हुक ने
व्याख्या: सन् 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क की पतली काट में मृत कोशिकाओं की खोज की थी।
मृदूतक कोशिकाओं का आकार होता है-
(a) गोल
(b) अण्डाकार
(c) बहुभुजाकार
(d) इनमें से सभी
उत्तर:
(d) इनमें से सभी
व्याख्या: मृदूतक (पैरेंकाइमा) कोशिकाएं व्याससमयी, गोल, अण्डाकार या बहुभुजाकार हो सकती हैं।
स्टोमेटा निम्नलिखित की एपिडर्मिस में होते हैं-
(a) तना
(b) जड़
(c) पत्ती
(d) मूलरोम
उत्तर:
(c) पत्ती
व्याख्या: स्टोमेटा (रंध्र) मुख्यतः पौधों की पत्तियों की बाह्य त्वचा (एपिडर्मिस) में उपस्थित होते हैं।
दृढ़ोतक रेशे पाये जाते हैं-
(a) पटसन में
(b) अलसी में
(c) भांग एवं नारियल के रेशों में
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(d) उपरोक्त सभी
व्याख्या: दृढ़ोतक (स्क्लेरेनकाइमा) की मोटी भित्ति वाली कोशिकाएं पटसन, अलसी, भांग और नारियल के छिलकों में पाई जाती हैं।
खण्ड 'ब' (वर्णनात्मक प्रश्न)
उपखण्ड 'क' (भौतिक विज्ञान)
एक वस्तु विराम अवस्था से 8 मी/से² के त्वरण से चलती है। वस्तु को 160 मी/से का वेग प्राप्त करने में कितना समय लगेगा तथा इतने समय में वह कितनी दूरी तय करेगी?
उत्तर:
दिया है:
प्रारम्भिक वेग (u) = 0 मी/से (क्योंकि वस्तु विराम अवस्था में है)
त्वरण (a) = 8 मी/से²
अन्तिम वेग (v) = 160 मी/से
ज्ञात सूत्र:
गति का प्रथम समीकरण: v = u + at
गति का तृतीय समीकरण: v² = u² + 2as
हल:
समय (t) की गणना:
v = u + at
160 = 0 + (8 × t)
160 = 8t
t = 160 / 8
t = 20 सेकण्ड
दूरी (s) की गणना:
v² = u² + 2as
(160)² = (0)² + 2 × 8 × s
25600 = 16s
s = 25600 / 16
s = 1600 मीटर
अतः उत्तर:
वस्तु को 160 मी/से का वेग प्राप्त करने में 20 सेकण्ड का समय लगेगा तथा इतने समय में वह 1600 मीटर की दूरी तय करेगी।
संतुलित तथा असंतुलित बलों को उदाहरण देकर समझाइए?
उत्तर:
संतुलित बल:
जब किसी वस्तु पर एक साथ कई बल कार्य कर रहे हों और उन सभी बलों का परिणामी बल शून्य हो, तो उन्हें संतुलित बल कहते हैं। संतुलित बल वस्तु की विराम अवस्था या गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं करते।
उदाहरण:
रस्साकशी के खेल में जब दोनों टीमें बराबर बल लगाकर रस्सी को खींचती हैं, तो परिणामी बल शून्य होता है और रस्सी अपनी जगह स्थिर रहती है।
असंतुलित बल:
जब किसी वस्तु पर लगे सभी बलों का परिणामी बल शून्य न हो, तो उन्हें असंतुलित बल कहते हैं। असंतुलित बल वस्तु की चाल, गति की दिशा या स्थिति में परिवर्तन लाते हैं।
उदाहरण:
स्थिर गेंद को किक मारने पर गेंद पर असंतुलित बल कार्य करता है, जिससे वह गतिमान हो जाती है।
उत्प्लावन बल किसे कहते हैं? लोहे से बना जलयान तैरता है, परन्तु लोहे की कील पानी में डूब जाती है क्यों? समझाइए।
उत्तर:
उत्प्लावन बल:
जब किसी वस्तु को किसी द्रव में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो द्रव उस वस्तु पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है। इस ऊर्ध्वमुखी बल को उत्प्लावन बल (उत्क्षेप) कहते हैं।
कारण:
लोहे की कील का आयतन बहुत कम होता है। इसके द्वारा विस्थापित जल का भार कील के अपने भार से कम होता है, जिससे उस पर लगने वाला उत्प्लावन बल कील के भार को सम्भाल नहीं पाता और कील पानी में डूब जाती है।
इसके विपरीत, लोहे का जलयान इस प्रकार खोखला और बड़े आकार का बनाया जाता है कि वह अपने भार से अधिक जल विस्थापित करता है। जलयान द्वारा विस्थापित जल का भार (उत्प्लावन बल) जलयान के कुल भार से अधिक होता है, जिसके कारण विशाल जलयान पानी पर तैरता रहता है।
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण बल का नियम क्या है? गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मान मात्रक सहित लिखिए।
उत्तर:
न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम:
किन्हीं दो पिण्डों के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
यदि m₁ तथा m₂ द्रव्यमान के दो पिण्ड एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हों, तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल (F):
F = G × (m₁ × m₂) / r²
जहाँ G एक आनुपातिक नियतांक है, जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं।
G का मान तथा मात्रक:
मान: G = 6.67 × 10⁻¹¹ न्यूटन मीटर²/किग्रा²
मात्रक: न्यूटन मीटर²/किग्रा² (N m²/kg²)
अथवा
स्पष्ट कीजिए-
(i) न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम
(ii) न्यूटन का गति विषयक द्वितीय नियम
(iii) न्यूटन का गति विषयक तृतीय नियम
उत्तर:
(i) न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम:
प्रत्येक वस्तु अपनी विराम अवस्था या एकसमान सरल रेखीय गति की अवस्था को तब तक बनाए रखती है, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए। इसे जड़त्व का नियम भी कहते हैं।
(ii) न्यूटन का गति विषयक द्वितीय नियम:
किसी वस्तु के संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए असंतुलित बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा यह परिवर्तन बल की दिशा में होता है।
सूत्र: F = m × a (बल = द्रव्यमान × त्वरण)
(iii) न्यूटन का गति विषयक तृतीय नियम:
प्रत्येक क्रिया के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है। अर्थात जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर विपरीत दिशा में उतना ही बल लगाती है। इसे क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम कहते हैं।
उपखण्ड 'ख' (रसायन विज्ञान)
निम्नलिखित की परिभाषाएँ लिखिए-
(i) गलनांक
(ii) हिमांक
(iii) संघनन
(iv) ऊर्ध्वपातन
उत्तर:
(i) गलनांक:
वह निश्चित ताप जिस पर कोई ठोस पदार्थ वायुमंडलीय दाब पर पिघलकर द्रव अवस्था में बदल जाता है, उस पदार्थ का गलनांक कहलाता है। जैसे- बर्फ का गलनांक 0°C है।
(ii) हिमांक:
वह निश्चित ताप जिस पर कोई द्रव पदार्थ वायुमंडलीय दाब पर जमकर ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है, उस द्रव का हिमांक कहलाता है। जैसे- जल का हिमांक 0°C है।
(iii) संघनन:
वह प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ वाष्प या गैस अवस्था से ठंडा होकर द्रव अवस्था में परिवर्तित होता है, संघनन कहलाती है।
(iv) ऊर्ध्वपातन:
वह भौतिक प्रक्रिया जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रव में बदले सीधे गैस में परिवर्तित हो जाता है तथा ठंडा करने पर गैस से सीधे ठोस में बदल जाता है, ऊर्ध्वपातन कहलाती है। जैसे- अमोनियम क्लोराइड, कपूर।
विलयन, विलायक, विलेय तथा संतृप्त विलयन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
1. विलयन:
दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को विलयन कहते हैं। जैसे- पानी और चीनी का घोल।
2. विलायक:
विलयन का वह घटक जो अधिक मात्रा में उपस्थित होता है तथा जो दूसरे घटक को अपने में घोलता है, विलायक कहलाता है। जैसे- जल।
3. विलेय:
विलयन का वह घटक जो कम मात्रा में होता है तथा विलायक में घुलता है, विलेय कहलाता है। जैसे- नमक या चीनी।
4. संतृप्त विलयन:
किसी निश्चित ताप पर बना वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की और अधिक मात्रा नहीं घोली जा सकती, संतृप्त विलयन कहलाता है।
मिश्रण तथा यौगिक में छः अन्तर लिखिए।
उत्तर:
मिश्रण तथा यौगिक में छः मुख्य अन्तर निम्नलिखित हैं:
1. संगठन: मिश्रण में घटक किसी भी अनुपात में मिले होते हैं, जबकि यौगिक में तत्व एक निश्चित भार अनुपात में संयुक्त होते हैं।
2. गुणधर्म: मिश्रण अपने अवयवों के गुणों को दर्शाता है, जबकि यौगिक के गुण उसके अवयवी तत्वों के गुणों से पूर्णतः भिन्न होते हैं।
3. पृथक्करण: मिश्रण के घटकों को साधारण भौतिक विधियों (जैसे छानना, वाष्पीकरण) से अलग किया जा सकता है, जबकि यौगिक के अवयवों को केवल रासायनिक या विद्युत-रासायनिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है।
4. नया पदार्थ: मिश्रण के बनने में कोई नया पदार्थ नहीं बनता, जबकि यौगिक बनने पर एक नया पदार्थ बनता है।
5. गलनांक एवं क्वथनांक: मिश्रण का गलनांक और क्वथनांक निश्चित नहीं होता, जबकि यौगिक का गलनांक और क्वथनांक निश्चित होता है।
6. ऊर्जा परिवर्तन: मिश्रण बनने में प्रायः ऊर्जा (ऊष्मा या प्रकाश) का लेन-देन नहीं होता, जबकि यौगिक बनते समय ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है।
अथवा
(क) क्वथन तथा वाष्पन में तीन अन्तर लिखिए।
(ख) परमाणु तथा अणु में तीन अन्तर लिखिए।
उत्तर:
(क) क्वथन तथा वाष्पन में तीन अन्तर:
1. ताप: क्वथन एक निश्चित ताप (क्वथनांक) पर होता है, जबकि वाष्पन प्रत्येक ताप पर निरंतर होता रहता है।
2. क्षेत्र: क्वथन सम्पूर्ण द्रव में से होता है, जबकि वाष्पन केवल द्रव की सतह पर होता है।
3. शीतलता: क्वथन से शीतलता उत्पन्न नहीं होती, जबकि वाष्पन के कारण शीतलता उत्पन्न होती है।
(ख) परमाणु तथा अणु में तीन अन्तर:
1. अस्तित्व: परमाणु स्वतंत्र अवस्था में प्रायः नहीं रह सकता (उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर), जबकि अणु स्वतंत्र अवस्था में रह सकता है।
2. विभाजन: परमाणु किसी तत्व का अविभाज्य सूक्ष्मतम कण माना जाता है जो रासायनिक क्रिया में भाग लेता है, जबकि अणु दो या अधिक परमाणुओं के मिलने से बनता है।
3. रासायनिक अभिक्रिया: परमाणु सीधे रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं, जबकि अणु अभिक्रिया में भाग लेने से पूर्व परमाणुओं में टूटते हैं।
उपखण्ड 'ग' (जीव विज्ञान)
माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का पावर हाउस क्यों कहते हैं?
उत्तर:
माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का पावर हाउस (ऊर्जा गृह) इसलिए कहते हैं क्योंकि:
1. इसमें कोशिकीय श्वसन की प्रक्रिया सम्पन्न होती है जिसमें भोजन (ग्लूकोज) का ऑक्सीकरण होता है।
2. ऑक्सीकरण के फलस्वरूप अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
3. यह ऊर्जा कोशिका में ATP (एडेनोसिन ट्राईफॉस्फेट) के रूप में संचित रहती है।
4. कोशिका की विभिन्न जैविक क्रियाओं के सम्पादन हेतु ATP के रूप में ऊर्जा यहीं से प्राप्त होती है।
संयोजी ऊतक किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं? रुधिर की संरचना तथा कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
संयोजी ऊतक:
शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों को आपस में जोड़ने, सहारा देने तथा आच्छादित करने वाले ऊतकों को संयोजी ऊतक कहते हैं।
प्रकार:
संयोजी ऊतक मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:
1. लचकदार या वास्तविक संयोजी ऊतक (जैसे- अंतराली ऊतक, वसामय ऊतक, कण्डरा, स्नायु)।
2. कंकाली संयोजी ऊतक (जैसे- अस्थि और उपास्थि)।
3. तरल या संवहन संयोजी ऊतक (जैसे- रुधिर और लसीका)।
रुधिर की संरचना:
रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक है। इसके मुख्य दो भाग होते हैं:
1. प्लाज्मा: यह रुधिर का लगभग 55% भाग बनाने वाला हल्का पीला, क्षारीय द्रव है जिसमें जल, प्रोटीन और लवण होते हैं।
2. रुधिर कोशिकाएं: यह शेष 45% भाग बनाती हैं जो तीन प्रकार की होती हैं:
- लाल रुधिर कणिकाएं (RBC): हीमोग्लोबिन युक्त, जो ऑक्सीजन संवहन करती हैं।
- श्वेत रुधिर कणिकाएं (WBC): शरीर की रोगों से सुरक्षा करती हैं।
- प्लेटलेट्स: रक्त का थक्का जमने में सहायता करती हैं।
रुधिर के कार्य:
1. यह शरीर में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पोषक तत्वों तथा हार्मोन का परिवहन करता है।
2. यह हानिकारक उत्सर्जी पदार्थों को वृक्क तक पहुँचाता है।
3. यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है तथा रोगाणुओं से रक्षा करता है।
केन्द्रक की संरचना का सचित्र वर्णन करते हुए केन्द्रक के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
केन्द्रक की संरचना:
केन्द्रक कोशिका का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है। इसकी संरचना के मुख्य चार भाग हैं:
1. केन्द्रक कला (केन्द्रक झिल्ली): यह दोहरी झिल्ली वाली सीमा है जो केन्द्रक को घेरे रहती है। इसमें छोटे-छोटे केन्द्रक छिद्र होते हैं।
2. केन्द्रक द्रव्य: केन्द्रक के अंदर भरा गाढ़ा, पारदर्शी द्रव है जिसमें प्रोटीन, एंजाइम तथा न्यूक्लिक अम्ल होते हैं।
3. केन्द्रिका: केन्द्रक के अंदर पाई जाने वाली एक छोटी, सघन, गोल रचना है जो RNA तथा राइबोसोम का निर्माण करती है।
4. क्रोमैटिन जालिका: केन्द्रक द्रव्य में धागे जैसी उलझी हुई रचनाओं का जाल होता है जो कोशिका विभाजन के समय स्पष्ट गुणसूत्रों के रूप में दिखाई देता है। गुणसूत्रों पर आनुवंशिक इकाई 'जीन' स्थित होते हैं।
केन्द्रक के कार्य:
1. यह कोशिका की सभी उपापचयी तथा जैविक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
2. यह आनुवंशिक लक्षणों को जनक से संतति में स्थानांतरित करता है।
3. यह कोशिका विभाजन की प्रक्रिया को निर्देशित करता है।
पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में छह अन्तर लिखिए।
उत्तर:
पादप कोशिका तथा जन्तु कोशिका में छः अन्तर निम्नलिखित हैं:
1. कोशिका भित्ति: पादप कोशिका में सेलुलोज की बनी कोशिका भित्ति पाई जाती है, जबकि जन्तु कोशिका में कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।
2. लवक: पादप कोशिका में हरित लवक तथा अन्य लवक पाए जाते हैं, जबकि जन्तु कोशिका में लवक अनुपस्थित होते हैं।
3. रसधानी (रिक्तिका): पादप कोशिका में एक बड़ी तथा केंद्रीय रसधानी होती है, जबकि जन्तु कोशिका में रसधानियाँ बहुत छोटी या अनुपस्थित होती हैं।
4. तारककाय: पादप कोशिका में तारककाय (सेंट्रोसोम) अनुपस्थित होता है, जबकि जन्तु कोशिका में तारककाय उपस्थित होता है।
5. आकार: पादप कोशिका का आकार प्रायः आयताकार तथा निश्चित होता है, जबकि जन्तु कोशिका का आकार अनिश्चित तथा वृत्ताकार होता है।
6. संचित भोजन: पादप कोशिका में भोजन स्टार्च (मण्ड) के रूप में संचित रहता है, जबकि जन्तु कोशिका में भोजन ग्लाइकोजन तथा वसा के रूप में संचित होता है।
अथवा
अन्तर स्पष्ट कीजिए-
(i) अस्थि तथा उपास्थि
(ii) जाइलम तथा फ्लोएम
(iii) कण्डरा तथा स्नायु
उत्तर:
(i) अस्थि तथा उपास्थि में अन्तर:
1. अस्थि कठोर, मजबूत तथा लचकहीन होती है जिसकी आधात्री में कैल्शियम व फास्फोरस के लवण होते हैं, जबकि उपास्थि कोमल तथा लचीली होती है जिसकी आधात्री कॉन्ड्रिन प्रोटीन की बनी होती है।
2. अस्थि शरीर को कंकाली ढांचा प्रदान करती है, जबकि उपास्थि अस्थियों के जोड़ों को चिकना बनाती है (जैसे- नाक, कान की अस्थियाँ)।
(ii) जाइलम तथा फ्लोएम में अन्तर:
1. जाइलम जड़ों द्वारा सोखे गए जल एवं खनिज लवणों का संवहन पौधे के ऊपरी भागों तक करता है, जबकि फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
2. जाइलम में पदार्थों का परिवहन केवल ऊपर की ओर (एकदिशीय) होता है, जबकि फ्लोएम में परिवहन ऊपर तथा नीचे दोनों दिशाओं में होता है।
(iii) कण्डरा तथा स्नायु में अन्तर:
1. कण्डरा (टेंडन) मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है, जबकि स्नायु (लिगामेंट) एक अस्थि को दूसरी अस्थि से जोड़ता है।
2. कण्डरा मजबूत तथा कम लचीला (अप्रत्यास्थ) होता है, जबकि स्नायु अत्यधिक लचीला तथा प्रत्यास्थ होता है।