खण्ड -- अ (बहुविकल्पीय प्रश्न)
उपभाग -- 1 (भौतिक विज्ञान)
UP Board Class 9th Science Annual Paper 2026
कक्षा 9वीं · विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा
खण्ड -- अ (बहुविकल्पीय प्रश्न)
उपभाग -- 1 (भौतिक विज्ञान)
निम्नलिखित में से अदिश राशि होगी --
(i) संवेग
(ii) त्वरण
(iii) चाल
(iv) वेग
उत्तर:
(iii) चाल
कारण: चाल केवल परिमाण को व्यक्त करती है, इसमें कोई दिशा नहीं होती है, अतः यह एक अदिश राशि है। जबकि संवेग, त्वरण और वेग सदिश राशियाँ हैं।
बल के आवेग का मात्रक है --
(i) न्यूटन
(ii) न्यूटन-मीटर
(iii) न्यूटन-सेकण्ड
(iv) न्यूटन/मीटर
उत्तर:
(iii) न्यूटन-सेकण्ड
कारण: बल का आवेग = बल × समय अंतराल = Newton × second (न्यूटन-सेकण्ड)।
किसी पिण्ड का द्रव्यमान दो गुना तथा वेग आधा करने पर उसकी गतिज ऊर्जा हो जाएगी --
(i) आधी
(ii) दो गुनी
(iii) चौथाई
(iv) अपरिवर्तित
उत्तर:
(i) आधी
कारण:
प्रारंभिक गतिज ऊर्जा, K₁ = (1)/(2) m v²
यदि नया द्रव्यमान m' = 2m तथा नया वेग v' = (v)/(2) हो, तो:
K₂ = (1)/(2) m' (v')² = (1)/(2) (2m) ((v)/(2))² = (1)/(2) (2m) · (v²)/(4) = (1)/(2) ((1)/(2) m v²) = (K₁)/(2)
अतः गतिज ऊर्जा प्रारंभिक मान की आधी हो जाएगी।
बल का मात्रक है --
(i) न्यूटन
(ii) न्यूटन-मीटर
(iii) न्यूटन-सेकण्ड
(iv) न्यूटन/मीटर
उत्तर:
(i) न्यूटन
कारण: S.I. पद्धति में बल का मात्रक न्यूटन (N) होता है (1 N = 1 kg·m/s²)।
एक मनुष्य का पृथ्वी पर भार 60 न्यूटन है। चन्द्रमा पर भार होगा --
(i) 60 न्यूटन
(ii) 30 न्यूटन
(iii) 20 न्यूटन
(iv) 10 न्यूटन
उत्तर:
(iv) 10 न्यूटन
कारण: चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का (1)/(6) भाग होता है।
अतः चन्द्रमा पर भार = (60)/(6) = 10 न्यूटन।
किसी मशीन द्वारा कार्य करने की दर को कहते हैं --
(i) सामर्थ्य
(ii) ऊर्जा
(iii) बल
(iv) संवेग
उत्तर:
(i) सामर्थ्य
कारण: कार्य करने की समय दर को सामर्थ्य या शक्ति (Power) कहते हैं (P = (W)/(t))।
किसी तरंग के लिए आवर्तकाल T तथा आवृत्ति n के बीच सम्बन्ध है --
(i) T = (1)/(n)
(ii) nT = 1
(iii) n² = (1)/(T)
(iv) T = (1)/(2)n
उत्तर:
(i) T = (1)/(n) अथवा (ii) nT = 1
कारण: आवर्तकाल (T) और आवृत्ति (n) एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं (T = (1)/(n) nT = 1)।
उपभाग -- 2 (रसायन विज्ञान)
कैल्शियम क्लोराइड का सूत्र द्रव्यमान है --
(i) 111
(ii) 108
(iii) 110
(iv) 115
उत्तर:
(i) 111
कारण:
कैल्शियम क्लोराइड का सूत्र = CaCl₂
Ca का परमाणु द्रव्यमान = 40 u
Cl का परमाणु द्रव्यमान = 35.5 u
सूत्र द्रव्यमान = 40 + (2 × 35.5) = 40 + 71 = 111 u।
किसी ताप पर जल का घनत्व अधिकतम होता है --
(i) 0^°C
(ii) 100^°C
(iii) 4^°C
(iv) 273 K
उत्तर:
(iii) 4^°C
कारण: जल के असामान्य प्रसार के कारण 4^°C ताप पर जल का आयतन न्यूनतम एवं घनत्व अधिकतम (1000 kg/m³) होता है।
निम्नलिखित में आयन है --
(i) Na
(ii) NaCl
(iii) Na⁺
(iv) कोई नहीं
उत्तर:
(iii) Na⁺
कारण: आवेशित परमाणु या परमाणुओं के समूह को आयन कहते हैं। Na⁺ एक धनआवेशित आयन (धनायन) है।
कैनाल रे की खोज किसने की ?
(i) ई० गोल्डस्टीन
(ii) जे० चैडविक
(iii) नील्स बोर
(iv) जे० जे० थॉमसन
उत्तर:
(i) ई० गोल्डस्टीन
कारण: सन् 1886 में ई० गोल्डस्टीन ने धनावेशित विकिरणों की खोज की जिन्हें उन्होंने 'कैनाल रे' नाम दिया।
पदार्थ की कौन-सी अवस्था विद्युत की सुचालक होती है --
(i) ठोस
(ii) द्रव
(iii) गैस
(iv) प्लाज्मा
उत्तर:
(iv) प्लाज्मा
कारण: प्लाज्मा अवस्था में स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन तथा आयन उपस्थित होते हैं, जिससे यह विद्युत की उत्तम सुचालक होती है।
निम्नलिखित में से कौन-सा उपधातु है --
(i) सोडियम
(ii) लोहा
(iii) ताँबा
(iv) आर्सेनिक
उत्तर:
(iv) आर्सेनिक
कारण: आर्सेनिक (As) में धातु एवं अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं, अतः यह एक उपधातु (Metalloid) है।
उपभाग -- 3 (जीव विज्ञान)
केन्द्रक के अलावा वह अंगक जिसमें डी.एन.ए. होता है --
(i) अन्त: प्रद्रव्यी जालिका
(ii) गॉलजी उपकरण
(iii) माइटोकॉन्ड्रिया
(iv) लाइसोसोम
उत्तर:
(iii) माइटोकॉन्ड्रिया
कारण: माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट (लवक) में अपना स्वयं का डी.एन.ए. (DNA) तथा राइबोसोम पाया जाता है।
तन्त्रिका ऊतक कहाँ नहीं पाए जाते हैं ?
(i) मस्तिष्क में
(ii) मेरुरज्जु में
(iii) कण्डराओं में
(iv) तन्त्रिका में
उत्तर:
(iii) कण्डराओं में
कारण: कण्डराएँ (Tendons) सघन रेशेदार संयोजी ऊतक का हिस्सा होती हैं जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ती हैं, ये तन्त्रिका ऊतक का भाग नहीं हैं।
कोशिका भित्ति मुख्यतः किसकी बनी होती है --
(i) प्रोटीन
(ii) पेक्टिन
(iii) सेलुलोस
(iv) सुक्रोस
उत्तर:
(iii) सेलुलोस
कारण: पादप कोशिका भित्ति मुख्य रूप से सेलुलोस नामक जटिल कार्बोहाइड्रेट की बनी होती है, जो कोशिका को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करती है।
केन्द्रक की खोज करने वाले वैज्ञानिक हैं --
(i) ऑल्टमैन
(ii) रॉबर्ट ब्राउन
(iii) मूलर
(iv) सिंगर
उत्तर:
(ii) रॉबर्ट ब्राउन
कारण: सन् 1831 में वैज्ञानिक रॉबर्ट ब्राउन ने कोशिका में केन्द्रक (Nucleus) की खोज की थी।
प्राणियों में आरेखित पेशियाँ पायी जाती हैं --
(i) पाद में
(ii) ग्रीवा में
(iii) नेत्र गोलक से लगी
(iv) मूत्राशय, आहारनाल में
उत्तर:
(iv) मूत्राशय, आहारनाल में
कारण: आरेखित (चिकनी/अनैच्छिक) पेशियाँ आंतरिक अंगों जैसे मूत्राशय, आहारनाल, रक्त वाहिकाओं आदि की भित्तियों में पाई जाती हैं।
आनुवंशिक सूचना का वाहक कौन है ?
(i) t-RNA
(ii) DNA
(iii) m-RNA
(iv) न्यूक्लियोप्रोटीन
उत्तर:
(ii) DNA
कारण: डी.एन.ए. (DNA) आनुवंशिक गुणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचाने वाला मुख्य वाहक एवं आनुवंशिक पदार्थ है।
निम्नलिखित में से किसमें परिपक्वता के समय केन्द्रक लोप नहीं होता है --
(i) सहचर कोशिकाएँ
(ii) लाल रुधिर कणिकाएँ
(iii) वाहिकाएँ
(iv) चालनी नलिका कोशिकाएँ
उत्तर:
(i) सहचर कोशिकाएँ
कारण: फ्लोएम की सहचर कोशिकाएँ (Companion cells) परिपक्व होने पर भी अपने केन्द्रक को बनाए रखती हैं, जबकि स्तनधारियों की परिपक्व आर.बी.सी., वाहिकाएँ एवं चालनी नलिका कोशिकाओं में केन्द्रक लुप्त हो जाता है।
खण्ड -- ब (वर्णनात्मक प्रश्न)
उपभाग -- 1 (भौतिक विज्ञान)
जब कोई गतिशील बस अचानक रुकती है तो आप आगे की ओर झुक जाते हैं और जब विरामावस्था से गतिशील होती है तो पीछे की ओर हो जाते हैं। क्यों ?
उत्तर:
यह घटना न्यूटन के गति के प्रथम नियम अर्थात जड़त्व के नियम (Law of Inertia) के कारण होती है:
1. चलती बस के अचानक रुकने पर:
जब बस गतिशील होती है, तो हमारा सम्पूर्ण शरीर भी बस के साथ गति की अवस्था में होता है। बस के अचानक रुकने पर हमारे शरीर का निचला भाग (जो बस की सीट/फर्श के संपर्क में होता है) तुरंत विराम अवस्था में आ जाता है, लेकिन ऊपरी भाग गति के जड़त्व (Inertia of Motion) के कारण गति की अवस्था में ही बने रहने का प्रयास करता है। इसीलिए हम आगे की ओर झुक जाते हैं।
2. विराम से बस के अचानक चलने पर:
जब बस स्थिर होती है, तो हमारा पूरा शरीर विराम अवस्था में होता है। बस के अचानक चलने पर शरीर का निचला हिस्सा बस के साथ गति में आ जाता है, जबकि ऊपरी हिस्सा विराम के जड़त्व (Inertia of Rest) के कारण अपनी स्थिर अवस्था में ही बना रहना चाहता है। इसीलिए हम पीछे की ओर झटका महसूस करते हैं।
एक किसान 10 मीटर की भुजा वाले एक वर्गाकार खेत की सीमा पर 40 सेकण्ड में चक्कर लगाता है। 2 मिनट 20 सेकण्ड के बाद किसान के विस्थापन का परिमाण क्या होगा ?
उत्तर:
दिया है:
- वर्गाकार खेत की भुजा (a) = 10 m
- खेत का परिमाप = 4 × 10 m = 40 m
- 1 चक्कर लगाने में लगा समय = 40 s
- कुल समय = 2 मिनट 20 सेकण्ड = (2 × 60) + 20 = 140 s
चक्करों की संख्या की गणना:
कुल चक्करों की संख्या = (कुल समय)/(एक चक्कर का समय) = (140)/(40) = 3.5 चक्कर
विस्थापन का परिमाण:
- 3 पूरे चक्कर लगाने के बाद किसान पुनः अपने प्रारंभिक बिंदु पर आ जाएगा (विस्थापन = 0)।
- अगले 0.5 (आधे) चक्कर में किसान प्रारंभिक बिंदु से वर्गाकार खेत के विकर्णतः सम्मुख (Opposite) कोने पर पहुँच जाएगा।
वर्गाकार खेत के विकर्ण की लंबाई:
विस्थापन = √(भुजा² + भुजा²) = √(10² + 10²) = √(100 + 100) = √(200) = 10√(2) m
10√(2) ≈ 10 × 1.414 = 14.14 m
उत्तर: 2 मिनट 20 सेकण्ड के बाद किसान के विस्थापन का परिमाण 10√(2) मीटर (या लगभग 14.14 मीटर) होगा।
सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु, हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती ?
उत्तर:
किसी वस्तु पर पृथ्वी द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल (भार) F = m · g होता है, जो वस्तु के द्रव्यमान (m) के अनुक्रमानुपाती होता है।
परंतु, न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार, गुरुत्व के कारण उत्पन्न त्वरण (a या g) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:
a = (F)/(m)
गुरुत्वाकर्षण बल का मान रखने पर:
g = (G · M · m)/(R² · m) = (G · M)/(R²)
यहाँ:
- G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक
- M = पृथ्वी का द्रव्यमान
- R = पृथ्वी की त्रिज्या
निष्कर्ष:
उपरोक्त सूत्र से स्पष्ट है कि गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान गिराई जाने वाली वस्तु के द्रव्यमान (m) पर निर्भर नहीं करता है। चूँकि भारी और हल्की दोनों वस्तुओं पर समान गुरुत्वीय त्वरण (g ≈ 9.8 m/s²) कार्य करता है, अतः वायु के प्रतिरोध की अनुपस्थिति (निर्वात) में दोनों वस्तुएँ एक ही दर से (एक साथ) नीचे गिरेंगी।
एक लैम्प 1000 जूल विद्युत ऊर्जा 10 सेकण्ड में व्यय करता है। इसकी शक्ति कितनी है ?
उत्तर:
दिया है:
- व्यय विद्युत ऊर्जा (W) = 1000 जूल
- समय (t) = 10 सेकण्ड
सूत्र:
शक्ति (P) = (कार्य या ऊर्जा (W))/(समय (t))
गणना:
P = (1000)/(10) = 100 वाट (W) या जूल/सेकण्ड
उत्तर: लैम्प की शक्ति 100 वाट (100 W) है।
अथवा (प्रश्न 4 के लिए विकल्प)
अदिश तथा सदिश राशियों से आप क्या समझते हैं? अदिश तथा सदिश राशियों में अन्तर लिखिए।
हल / Solution:
अदिश राशियाँ (Scalar Quantities):
वे भौतिक राशियाँ जिन्हें पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण (Magnitude) की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं, अदिश राशियाँ कहलाती हैं।
उदाहरण: दूरी, चाल, द्रव्यमान, समय, कार्य, घनत्व आदि।
सदिश राशियाँ (Vector Quantities):
वे भौतिक राशियाँ जिन्हें पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ-साथ दिशा (Direction) की भी आवश्यकता होती है तथा जो योग के त्रिभुज नियम का पालन करती हैं, सदिश राशियाँ कहलाती हैं।
उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग आदि।
अदिश तथा सदिश राशियों में अन्तर:
क्र. सं. अदिश राशि सदिश राशि
1. इन्हें व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है। इन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण एवं दिशा दोनों की आवश्यकता होती है।
2. इन्हें साधारण बीजगणितीय नियमों (जैसे जोड़, घटाव) द्वारा जोड़ा या घटाया जा सकता है। इन्हें जोड़ने या घटाने के लिए विशेष सदिश बीजगणित नियमों की आवश्यकता होती है।
3. दो अदिशों का गुणनफल सदैव अदिश होता है। दो सदिशों का गुणनफल अदिश अथवा सदिश हो सकता है।
4. उदाहरण: दूरी, चाल, ऊर्जा, ताप। उदाहरण: विस्थापन, वेग, बल, त्वरण।
उपभाग -- 2 (रसायन विज्ञान)
273 K पर बर्फ को ठण्डा करने पर तथा जल को इसी तापमान पर ठण्डा करने पर शीतलता का प्रभाव अधिक क्यों होता है? उबलते हुए जल अथवा भाप में से जलने की तीव्रता किसमें अधिक महसूस होती है?
उत्तर:
(क) 273 K (0^°C) पर बर्फ द्वारा अधिक शीतलता का कारण:
273 K पर बर्फ में समान ताप पर उपस्थित जल की तुलना में कम ऊष्मा होती है, क्योंकि बर्फ के पिघलने के लिए संगलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion = 3.34 × 10⁵ J/kg) की आवश्यकता होती है। जब बर्फ किसी वस्तु के संपर्क में आती है, तो वह वस्तु से इस गुप्त ऊष्मा को अवशोषित करती है, जिससे वस्तु का ताप तेजी से घटता है। अतः बर्फ द्वारा शीतलता का प्रभाव जल की तुलना में अधिक होता है।
(ख) उबलते जल अथवा भाप में जलने की तीव्रता:
उबलते हुए जल की तुलना में भाप से जलने की तीव्रता अधिक महसूस होती है।
कारण: 373 K (100^°C) पर भाप के कणों में उसी ताप पर उबलते जल के कणों की अपेक्षा वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (22.59 × 10⁵ J/kg) के रूप में अतिरिक्त ऊष्मा निहित होती है। अतः त्वचा के संपर्क में आने पर भाप अधिक ऊष्मा मुक्त करती है, जिससे जलन अधिक तीव्र होती है।
विलयन क्या है? इसके चार उदाहरण दीजिए। विलयन के गुणधर्मों का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
विलयन (Solution):
दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण (Homogeneous mixture) को विलयन कहते हैं। विलयन में विलेय (Solute) के कण विलायक (Solvent) में समान रूप से वितरित रहते हैं।
विलयन के चार उदाहरण:
1. शक्कर या नमक का जल में विलयन।
2. वातित पेय (Soda water / Cold drinks) — द्रव में गैस का विलयन।
3. टिंक्चर आयोडीन — अल्कोहल में आयोडीन का विलयन।
4. पीतल (Brass) — जस्ता (30%) और ताँबा (70%) का ठोस विलयन (मिश्रधातु)।
विलयन के मुख्य गुणधर्म:
1. समांगी प्रकृति: विलयन एक समांगी मिश्रण होता है।
2. कणों का आकार: विलेय के कणों का व्यास अत्यन्त सूक्ष्म (1 nm = 10⁻⁹ m से भी कम) होता है, जिन्हें नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता।
3. प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं: सूक्ष्म आकार के कारण विलयन के कण प्रकाश की किरण को प्रकीर्णित नहीं करते, अतः विलयन में प्रकाश का मार्ग दिखाई नहीं देता (टिंड़ल प्रभाव नहीं दर्शाता)।
4. स्थायित्व: विलेय के कणों को छानने की विधि द्वारा अलग नहीं किया जा सकता तथा शांत छोड़ देने पर भी विलेय के कण नीचे नहीं बैठते।
द्रव्यमान संरक्षण नियम अथवा द्रव्य की अविनाशिता का नियम क्या है? इसे सिद्ध करने के लिए एक प्रयोग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass):
इस नियम का प्रतिपादन वैज्ञानिक लेवोज़ियर (Lavoisier) ने सन् 1789 में किया था।
इस नियम के अनुसार: "किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।" अर्थात, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया के पूर्व अभिकारकों का कुल द्रव्यमान अभिक्रिया के पश्चात बने उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है।
अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = उत्पादों का कुल द्रव्यमान
नियम को सिद्ध करने का प्रयोग (लैंडोल्ट का प्रयोग):
1. उपकरण एवं रसायन: H-आकार की एक विशेष काँच की नली (लैंडोल्ट नली) लेते हैं।
2. प्रक्रिया:
- नली की एक भुजा में सिल्वर नाइट्रेट (AgNO₃) का विलयन तथा दूसरी भुजा में सोडियम क्लोराइड (NaCl) का विलयन भरते हैं।
- दोनों भुजियों को अलग-अलग रखते हुए नली के मुँह को सील कर देते हैं।
- इस अवस्था में पूरी नली का द्रव्यमान सावधानीपूर्वक तोल लेते हैं (मान लिया द्रव्यमान W₁ ग्राम)।
- अब नली को हिलाकर दोनों विलयनों को आपस में मिला देते हैं।
3. प्रेक्षण:
विलयन मिलते ही एक रासायनिक अभिक्रिया होती है और सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का सफेद अवक्षेप बनता है:
AgNO₃(aq) + NaCl(aq) → AgCl(s) + NaNO₃(aq)
अभिक्रिया पूर्ण होने के बाद नली का पुनः द्रव्यमान तोलते हैं (मान लिया द्रव्यमान W₂ ग्राम)।
4. परिणाम:
प्रयोग में पाया जाता है कि W₁ = W₂। इससे यह सिद्ध होता है कि रासायनिक परिवर्तन के दौरान द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
अथवा (प्रश्न 7 के लिए विकल्प)
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियाँ लिखिए। नील्स बोर ने इस सिद्धान्त की कमियों को किस प्रकार दूर किया।
हल / Solution:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियाँ:
1. परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या न कर पाना:
मैक्सवेल के विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत के अनुसार, यदि कोई आवेशित कण (इलेक्ट्रॉन) त्वरित गति से वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाता है, तो वह निरंतर ऊर्जा का विकिरण करेगा। ऊर्जा ह्रास के कारण इलेक्ट्रॉन की कक्षा छोटी होती जाएगी और अंततः वह नाभिक में गिर जाएगा, जिससे परमाणु का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। परंतु परमाणु स्थायी होता है।
2. इलेक्ट्रॉनिक संरचना का स्पष्ट न होना: यह मॉडल यह समझाने में असमर्थ रहा कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किस प्रकार व्यवस्थित हैं और उनकी ऊर्जाएँ क्या हैं।
नील्स बोर द्वारा कमियों का निवारण:
सन् 1913 में नील्स बोर ने क्वांटम सिद्धांत के आधार पर रदरफोर्ड मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए निम्नलिखित अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं:
1. विविक्त कक्षाएँ (Discrete Orbits): इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल कुछ निश्चित, अनुमति प्राप्त कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें 'विविक्त कक्षा' या 'ऊर्जा स्तर' (K, L, M, N...) कहते हैं।
2. ऊर्जा का विकिरण न होना: जब इलेक्ट्रॉन इन निश्चित कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, तो वे ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं। अतः परमाणु स्थायी रहता है।
3. ऊर्जा का परिवर्तन: इलेक्ट्रॉन केवल तभी ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन करते हैं जब वे एक ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर में कूदते हैं (Δ E = E₂ - E₁ = hν)।
उपभाग -- 3 (जीव विज्ञान)
कोशिका के अन्दर प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है? कोशिका झिल्ली को बनाने वाले लिपिड तथा प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?
उत्तर:
1. कोशिका के अन्दर प्रोटीन का संश्लेषण:
कोशिका के अन्दर प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम (Ribosomes) पर होता है। राइबोसोम को 'कोशिका की प्रोटीन फैक्टरी' भी कहा जाता है।
2. कोशिका झिल्ली हेतु लिपिड तथा प्रोटीन का संश्लेषण:
- प्रोटीन का संश्लेषण: खुरदुरी अन्तर्द्रव्यी जालिका (RER - Rough Endoplasmic Reticulum) की सतह पर लगे राइबोसोम द्वारा होता है।
- लिपिड (वसा) का संश्लेषण: चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका (SER - Smooth Endoplasmic Reticulum) द्वारा होता है।
नोट: इस प्रकार निर्मित लिपिड एवं प्रोटीन का उपयोग कोशिका झिल्ली के निर्माण (झिल्ली जीवात्-जनन / Membrane biogenesis) में किया जाता है।
पौधों में वाष्पोत्सर्जन के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पौधों के वायवीय भागों (मुख्यतः पत्तियों के रंध्रों/Stomata) द्वारा जल का वाष्प के रूप में बाहर निकलना वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कहलाता है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. रसारोहण (Ascent of Sap) तथा अवशोषण: वाष्पोत्सर्जन एक खिंचाव (Transpiration pull) उत्पन्न करता है, जिससे जड़ों द्वारा जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण तथा पौधों के ऊपरी भागों तक संवहन होता है।
2. तापक्रम नियंत्रण (Cooling Effect): वाष्पोत्सर्जन क्रिया के दौरान जल के वाष्पीकरण से पौधों की पत्तियों एवं आसपास का तापमान नियंत्रित रहता है और पौधे अत्यधिक गर्मी से बचते हैं।
3. जल का संतुलन: यह पौधे में जल की अतिरिक्त मात्रा को बाहर निकालकर जल का संतुलन बनाए रखता है।
4. यांत्रिक दृढ़ता: यह कोशिकाओं में स्फीति (Turgidity) बनाए रखने में मदद करता है।
फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियाँ तथा जैव नियन्त्रण क्यों अच्छा समझा जाता है?
उत्तर:
फसल सुरक्षा के लिए रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में निरोधक विधियाँ (Preventive methods) और जैव नियन्त्रण (Biological control) को निम्नलिखित कारणों से उत्तम माना जाता है:
1. पर्यावरण हितैषी (Environment Friendly): रासायनिक कीटनाशक मृदा, जल और वायु को प्रदूषित करते हैं, जबकि निरोधक एवं जैविक विधियाँ पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचातीं।
2. पारिस्थितिक संतुलन: जैव नियंत्रण में हानिरहित परभक्षियों या परजीवियों का उपयोग करके कीटों को नियंत्रित किया जाता है, जिससे खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता सुरक्षित रहती है।
3. मानव एवं पशु स्वास्थ्य की सुरक्षा: रसायनों का जहरीला अवशेष खाद्यान्नों, फल और सब्जियों के माध्यम से मानव शरीर में पहुँचकर गंभीर बीमारियाँ उत्पन्न करता है, जैव नियंत्रण से यह खतरा शून्य होता है।
4. प्रतिरोधकता से बचाव: कीड़े-मकोड़े समय के साथ रसायनों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Resistance) विकसित कर लेते हैं, लेकिन जैव नियंत्रण में यह समस्या नहीं होती।
5. किफायती: फसल चक्र अपनाना, प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करना और जैविक नियंत्रण दीर्घकालिक रूप से किसानों के लिए सस्ते और स्थायी उपाय हैं।
लवक क्या है? ये कितने प्रकार के होते हैं? हरित लवक की इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी संरचना एवं कार्य समझाइए।
उत्तर:
लवक (Plastid):
लवक केवल पादप कोशिकाओं एवं कुछ प्रोटिस्टा (जैसे युग्लीना) में पाए जाने वाले दोहरी झिल्ली युक्त कोशिकांग हैं। इनमें अपना स्वयं का DNA तथा राइबोसोम होता है।
लवक के प्रकार:
वर्णकों (Pigments) के आधार पर लवक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
1. अवर्णी लवक (Leucoplasts): रंगहीन लवक जो भोजन (स्टार्च, तेल, प्रोटीन) का संचयन करते हैं।
2. वर्णी लवक (Chromoplasts): रंगीन लवक (लाल, पीले, नारंगी) जो फूलों और फलों को रंग प्रदान करते हैं।
3. हरित लवक (Chloroplasts): हरे रंग के लवक जिनमें क्लोरोफिल पाया जाता है और ये प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
हरित लवक (Chloroplast) की इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी संरचना:
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखने पर हरित लवक में निम्नलिखित भाग दिखाई देते हैं:
1. आवरण (Envelope): यह दोहरी झिल्ली (बाहरी तथा आंतरिक झिल्ली) से घिरा होता है। दोनों झिल्लियों के बीच अंतर-झिल्ली अवकाश होता है।
2. स्ट्रोमा (Stroma): आंतरिक झिल्ली से घिरा पारदर्शी द्रव युक्त क्षेत्र स्ट्रोमा कहलाता है। इसमें प्रकाश-संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction) के एंजाइम, DNA, तथा 70S राइबोसोम उपस्थित होते हैं।
3. थाइलैकॉइड (Thylakoids) एवं ग्रैना (Grana): स्ट्रोमा में चपटी, झिल्लीदार थैलियों के ढेर जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें थाइलैकॉइड कहते हैं। थाइलैकॉइड के समूह को ग्रैनम (बहुवचन: ग्रैना) कहते हैं। ग्रैना में ही क्लोरोफिल (पर्णहरित) पाया जाता है।
4. स्ट्रोमा लैमिली: विभिन्न ग्रैना आपस में झिल्लीदार नलिकाओं द्वारा जुड़े होते हैं जिन्हें स्ट्रोमा लैमिली कहते हैं।
[ बाह्य झिल्ली ]
[ आंतरिक झिल्ली ]
[ स्ट्रोमा (द्रव भाग) ]
[ ग्रैनम (थाइलैकॉइड का ढेर) ] <--- क्लोरोफिल उपस्थित
हरित लवक के कार्य:
1. प्रकाश संश्लेषण: हरित लवक सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) की सहायता से कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण करते हैं। इसीलिए इन्हें 'कोशिका का रसोईघर' कहा जाता है।
2. ऑक्सीजन विमुक्ति: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में जीवनदायिनी ऑक्सीजन (O₂) गैस मुक्त करते हैं।
अथवा (प्रश्न 11 के लिए विकल्प)
फ्लोएम तथा जाइलम में अन्तर लिखिए।
हल / Solution:
जाइलम तथा फ्लोएम में अन्तर:
क्र. सं. लक्षण जाइलम (Xylem) फ्लोएम (Phloem)
1. मुख्य कार्य यह जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवणों का पौधे के अन्य भागों तक संवहन करता है। यह पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन (सर्करा/ऑर्गेनिक सॉल्यूट्स) को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
2. दिशा इसमें संवहन केवल एक दिशा में (नीचे से ऊपर की ओर) होता है (एकदिशीय)। इसमें संवहन दोनों दिशाओं में (ऊपर से नीचे तथा नीचे से ऊपर) होता है (द्विदिशीय)।
3. कोशिका प्रकृत इसकी अधिकांश कोशिकाएँ (वाहिकाएँ, वाहिनिकाएँ, काष्ठ रेशा) मृत होती हैं (केवल जाइलम मृदुतक जीवित है)। इसकी अधिकांश कोशिकाएँ (चालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदुतक) जीवित होती हैं (केवल फ्लोएम रेशा मृत है)।
4. घटक इसके प्रमुख घटक हैं: वाहिनिकाएँ (Tracheids), वाहिकाएँ (Vessels), जाइलम मृदुतक, तथा जाइलम रेशे। इसके प्रमुख घटक हैं: चालनी नलिकाएँ (Sieve tubes), सहचर कोशिकाएँ (Companion cells), फ्लोएम मृदुतक, तथा फ्लोएम रेशे।
5. यांत्रिक दृढ़ता यह पौधे को मुख्य रूप से यांत्रिक सहारा भी प्रदान करता है। यह यांत्रिक सहारा कम प्रदान करता है।