खण्ड (अ)
Solution
UP Board Class 9 Hindi Half Yearly Paper 2026 (New)
कक्षा 9वीं · हिंदी · 2026 · अर्धवार्षिक
प्रश्न 1.
भारतेन्दु युग कब से कब तक माना जाता है ?
(1) 1868 से 1900 ई० तक
(2) 1900 से 1922 ई० तक
(3) 1850 से 1900 ई० तक
(4) 1870 से 1930 ई० तक
उत्तर:
. (1) 1868 से 1900 ई० तक
प्रश्न 2.
हिन्दी का प्रथम नाटक माना जाता है-
(1) नहुष
(2) चन्द्रगुप्त
(3) अजातशत्रु
(4) स्कन्दगुप्त
उत्तर:
. (1) नहुष
प्रश्न 3.
'मेरा जीवन प्रवाह' रचना है-
(1) वियोगी हरि
(2) जयशंकर प्रसाद
(3) रामचंद्र शुक्ल
(4) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
उत्तर:
. (1) वियोगी हरि
प्रश्न 4.
आदिकाल की भाषा क्या थी-
(1) डिंगल और पिंगल
(2) केवल डिंगल
(3) केवल पिंगल
(4) अवधी
उत्तर:
. (1) डिंगल और पिंगल
प्रश्न 5.
खड़ी बोली गद्य के जनक माने जाते हैं-
(1) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
(2) चंदरबरदाई
(3) जगनिक
(4) रामचंद्र शुक्ल
उत्तर:
. (1) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
प्रश्न 6.
किस युग को हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग माना जाता है ?
(1) वीरगाथा काल
(2) भक्तिकाल
(3) रीतिकाल
(4) आधुनिककाल
उत्तर:
. (2) भक्तिकाल
प्रश्न 7.
हिन्दी का प्रथम कवि किसे माना जाता है ?
(1) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
(2) चंदरबरदाई
(3) सरहप्पा
(4) कबीरदास
उत्तर:
. (3) सरहप्पा
प्रश्न 8.
प्रेममार्गी शाखा के प्रमुख कवि कौन हैं?
(1) मलिक मोहम्मद जायसी
(2) कबीरदास
(3) तुलसीदास
(4) सूरदास
उत्तर:
. (1) मलिक मोहम्मद जायसी
प्रश्न 9.
'कविवचन सुधा' पत्रिका के संपादक थे-
(1) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
(2) मुंशी प्रेमचंद
(3) बालकृष्ण भट्ट
(4) प्रताप नारायण मिश्र
उत्तर:
. (1) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
प्रश्न 10.
शृंगार रस का स्थायी भाव है-
(1) रति
(2) हास
(3) शोक
(4) क्रोध
उत्तर:
. (1) रति
प्रश्न 11.
'मेरी भव बाधा हरौ राधा नागरि सोई। जा तन की झाई परे, स्याम हरित द्युति होई ।।' इन पंक्तियों में कौन सा छंद प्रयुक्त हुआ है ?
(1) रोला
(2) दोहा
(3) सोरठा
(4) चौपाई
उत्तर:
. (3) सोरठा
प्रश्न 12.
'सभा के चबूतरे पर बैठे चार चोर चबर-चबर चरबन चबात हैं।' उपरोक्त पंक्तियों में कौन सा अलंकार है ?
(1) यमक
(2) अनुप्रास
(3) उत्प्रेक्षा
(4) श्लेष
उत्तर:
. (2) अनुप्रास
प्रश्न 13.
'विराम' का अर्थ है-
(1) झुकाव
(2) ठहराव
(3) पूर्ण विराम
(4) बढ़ना
उत्तर:
. (2) ठहराव
प्रश्न 14.
'यथाशक्ति' शब्द में समास है-
(1) तत्पुरुष
(2) अव्ययीभाव
(3) द्विगु
(4) कर्मधारय
उत्तर:
. (2) अव्ययीभाव
प्रश्न 15.
सदन, गेह किसके पर्यायवाची हैं ?
(1) रात के
(2) घर के
(3) खेल के
(4) आग के
उत्तर:
. (2) घर के
प्रश्न 16.
'नरेशः' शब्द में सन्धि है-
(1) दीर्घ सन्धि
(2) गुण सन्धि
(3) यण सन्धि
(4) अयादि सन्धि
उत्तर:
. (2) गुण सन्धि
प्रश्न 17.
'चौदह' शब्द का तत्सम है-
(1) द्वादश
(2) चतुर्दश
(3) त्रयोदश
(4) एकादश
उत्तर:
. (2) चतुर्दश
प्रश्न 18.
'आकाश' शब्द का विलोम है-
(1) जमीन
(2) पाताल
(3) धरती
(4) धरा
उत्तर:
. (2) पाताल
प्रश्न 19.
ख्याली 'पुलाव पकाना' मुहावरे का अर्थ है-
(1) असम्भव कल्पनाओं से आनंदित होना
(2) रंग जमाना
(3) अक्ल के घोड़े दौड़ाना
(4) तीन पाँच करना
उत्तर:
. (1) असम्भव कल्पनाओं से आनंदित होना
प्रश्न 20.
'गच्छामि' रूप है गम धातु का-
(1) लट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन
(2) लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
(3) लृट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन
(4) लङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
उत्तर:
. (1) लट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन
खंड (ब)
प्रश्न 21.
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
पहला गद्यांश: "यदि हम वैद्य होते तो कफ और पित्त के सहवर्ती वात की व्याख्या करते... परस्पर हृदयस्थ भाव को प्रकाशित करती रहती है।"
• प्रश्न 21(a)(1). प्रस्तुत गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
• उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के गद्य खंड में संकलित तथा भारतेंदु युग के प्रसिद्ध निबंधकार बालकृष्ण भट्ट द्वारा रचित 'बातचीत' नामक निबंध से लिया गया है।
• प्रश्न 21(a)(2). किन दोनों विषयों में लेखक को एक बात का भी प्रयोजन नहीं है?
• उत्तर: लेखक को वैद्यक शास्त्र (कफ, पित्त और वात) तथा भूगोल शास्त्र (जल-वात का वर्णन) इन दोनों विषयों से एक बात कहने का भी कोई प्रयोजन नहीं है。
• प्रश्न 21(a)(3). रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
• उत्तर: लेखक कहते हैं कि हम तो केवल ऐसी साधारण बातचीत के विषय में लिखना चाहते हैं जो हमारे और आपके आपस में बातचीत (संभाषण) करते समय मुख से निकल-निकलकर एक-दूसरे के हृदय के अंदर छिपे हुए भावों को प्रकट करती रहती है。
अथवा (दूसरा गद्यांश): "सभ्य संसार इतना निर्मम, इतना कठोर है... सदैव तैयार रहते थे।"
• प्रश्न 21(b)(1). उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
• उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के गद्य खंड में संकलित पाठ 'महादेवी वर्मा' द्वारा रचित संस्मरण 'गिल्लू' (अथवा रेखाचित्र 'भगत की कंजूसी' / गद्य पाठ) से लिया गया है (यह गद्यांश महादेवी वर्मा जी द्वारा रचित संस्मरणात्मक रेखाचित्र 'गिल्लू' या उनके अन्य रेखाचित्र 'स्मृति की रेखाएँ' / 'बदलू माका' / गद्य संकलन से है)।
• प्रश्न 21(b)(2). रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
• उत्तर: लेखिका कहती हैं कि समाज के पुराने और पारंपरिक संस्कारों वाले लोग वे होते थे जो दूसरों के दुःख-दर्द में हमेशा मदद के लिए आगे रहते थे; जैसे- कहीं आग लग जाने पर बुझाने, किसी मृतक को कंधा देने, किसी का उजड़ता हुआ छप्पर उठाने या आपसी कलह व झगड़े को शांत कराने में अपनी ओर से सदैव तत्पर रहते थे。
• प्रश्न 21(b)(3). भगत को किस बात का मर्मभेदी अनुभव अब तक नहीं हुआ था?
• उत्तर: भगत को इस बात का मर्मभेदी अनुभव अब तक नहीं हुआ था कि यह तथाकथित सभ्य संसार कितना निर्मम, निष्ठुर और कठोर है。
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 22.
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
पहला पद्यांश: "प्रभुजी तुम चन्दन हम पानी... ऐसी भक्ति करै रैदासा ।।"
• प्रश्न 22(a)(1). उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
• उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के काव्य खंड में संकलित संत रैदास द्वारा रचित 'पद' (रैदास के पद) से अवतरित है।
• प्रश्न 22(a)(2). रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
• उत्तर: संत रैदास कहते हैं कि हे प्रभु! यदि आप चंदन के समान पवित्र और सुगंधित हैं, तो मैं उस चंदन में घिसने वाले पानी के समान हूँ। जिस प्रकार चंदन की महक पानी के अंग-अंग में समा जाती है, उसी प्रकार आपकी भक्ति मेरे रोम-रोम में बस गई है。
• प्रश्न 22(a)(3). रैदास जी की भक्ति किस भाव की है?
• उत्तर: रैदास जी की भक्ति दास्य भाव (स्वामी और दास के संबंध की) है。
अथवा (दूसरा पद्यांश): "झूठे सुख को सुख कहै, मानत है मन मोद... कछु मुख में कछु गोद ।।"
• प्रश्न 22(b)(1). उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
• उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य खंड में संकलित संत कबीरदास द्वारा रचित 'साखी' शीर्षक से लिया गया है।
• प्रश्न 22(b)(2). रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
• उत्तर: कबीरदास जी कहते हैं कि यह संसार नश्वर और काल के मुख में समाया हुआ है। मनुष्य जीवन के झूठे और क्षणिक सुखों को ही वास्तविक सुख मानकर मन में प्रसन्न होता रहता है, जबकि काल रूपी अजगर या काल का चक्र हर पल मनुष्य को निगलने के लिए आगे बढ़ रहा है。
• प्रश्न 22(b)(3). आदमी क्या सोचकर प्रसन्न होता रहता है?
• उत्तर: आदमी इस संसार के झूठे, क्षणिक भोग-विलासों और सांसारिक सुखों को ही स्थायी सुख मानकर प्रसन्न होता रहता है。
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 23(क).
निम्न संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए –
• गद्यांश: "सतां सज्जनानाम् आचारः सदाचारः... शिष्टं व्यवहारं कुर्वन्ति।"
• संदर्भ: यह गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'संस्कृत खंड' के 'सदाचारः' नामक पाठ से लिया गया है।
• हिंदी अनुवाद: सत्पुरुषों या सज्जनों का आचरण ही सदाचार कहलाता है। जो लोग ऐसा ही विचार करते हैं और वैसा ही आचरण करते हैं, वे ही सज्जन होते हैं। सज्जन जैसा आचरण करते हैं, वैसा ही आचरण सदाचार होता है। सदाचार के द्वारा ही सज्जन लोग अपनी इंद्रियों को वश में करके सभी के साथ शिष्ट (सभ्य) व्यवहार करते हैं।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 23(ख).
निम्न संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए -
• पद्यांश: "तेजोऽसि तेजो मयि धेहि । वीर्यमसि वीर्य मयि धेहि..."
• संदर्भ: यह श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'वन्दना' पाठ से लिया गया है।
• हिंदी अनुवाद: हे ईश्वर! आप तेज स्वरूप हैं, मुझमें तेज धारण कीजिए (तेज प्रदान कीजिए)। आप पराक्रम स्वरूप हैं, मुझमें पराक्रम धारण कीजिए। आप बल स्वरूप हैं, मुझमें बल धारण कीजिए। आप ओज स्वरूप हैं, मुझमें ओज धारण कीजिए।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 24.
'दीपदान' एकांकी की नायिका पद्मावती का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर:
.
डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा रचित 'दीपदान' एकांकी की प्रमुख पात्र और नायिका पन्ना धाय (प्रश्न में पद्मावती का उल्लेख है, अतः पन्ना धाय या पद्धावती का संदर्भ) त्याग, कर्तव्यपरायणता और बलिदान की सजीव मूर्ति हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. अपूर्व स्वामी-भक्ति: पन्ना धाय मेवाड़ के राजवंश के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है। वह अपने कुँवर उदयसिंह की रक्षा के लिए अपने ही इकलौते पुत्र चंदन का बलिदान दे देती है।
2. कर्तव्यपरायण और दृढ़निश्चयी: वह जानती है कि बनवीर क्रूर और अत्याचारी है, इसलिए वह राजकुमार उदयसिंह को बचाने के लिए कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटती।
3. साहसी और संयमी: संकट के समय भी वह घबराती नहीं है, बल्कि अत्यंत धैर्य और साहस के साथ परिस्थिति का सामना करती है।
4. मातृ-हृदय और त्याग: एक माता होते हुए भी वह देश और राजवंश की रक्षा को अपने व्यक्तिगत मोह से ऊपर रखती है। उनका त्याग भारतीय इतिहास में अद्वितीय है।
प्रश्न 25(क).
निम्न लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी किसी एक रचना का उल्लेख कीजिए -
प्रेमचंद
• जीवन परिचय: उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू-फारसी में प्राप्त की और अध्यापन कार्य करते हुए लेखन कार्य आरंभ किया। उन्होंने हिंदी गद्य और कथा साहित्य को एक नई दिशा दी। उनका अधिकांश जीवन आर्थिक संघर्षों में बीता और 20 जुलाई 1936 को उनका निधन हो गया।
• रचना: 'गोदान' (उपन्यास)।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 25(ख).
निम्न कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उनकी किन्हीं दो रचनाओं का उल्लेख कीजिए -
रैदास
• जीवन परिचय: संत रैदास (संत रविदास) भक्तिकाल की निर्गुण धारा (ज्ञानमार्गी/संत काव्यधारा) के प्रमुख कवियों में से एक हैं। इनका जन्म सन 1388 (विमर्शानुसार) में वाराणसी में हुआ था। ये रामानंद जी के शिष्य माने जाते हैं। इनकी वाणी में सरल भक्ति, सामाजिक समरसता और आत्म-ज्ञान का संदेश मिलता है। इनका निधन लगभग सन 1518 में हुआ।
• रचनाएँ:
1. 'रैदास की वाणी' (पद संग्रह)
2. गुरु ग्रंथ साहिब में इनके पद संकलित हैं।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 26.
अपनी पाठ्य पुस्तक से कण्ठस्थ किया हुआ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो।
उत्तर:
.
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्।।
प्रश्न 27.
निम्न प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए -
• (1) कः मनुष्याणां भूषणं अस्ति?
• उत्तर: विनयः मनुष्याणां भूषणम् अस्ति।
• (3) क्रोधं केन जयेत्?
• उत्तर: क्रोधं अक्रीधेन (अक्रोधेन) जयेत्।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 28.
निम्न में से किन्हीं दो मुहावरों व लोकोक्तियों का अर्थ बताते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए -
1. फूले न समाना (बहुत अधिक प्रसन्न होना):
• वाक्य प्रयोग: कक्षा 9 की वार्षिक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर रोहन फूला नहीं समाया।
2. अंधे की लकड़ी (एकमात्र सहारा):
• वाक्य प्रयोग: श्रवण कुमार अपने वृद्ध माता-पिता के लिए अंधे की लकड़ी था।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 29.
निम्न में से किन्हीं दो वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए -
1. विनय ही मनुष्यों का आभूषण है।
• संस्कृत अनुवाद: विनयः एव मनुष्याणां भूषणम् अस्ति।
2. रामदास नारायणपुर में रहता है।
• संस्कृत अनुवाद: रामदासः नारायणपुरे निवसति।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 30.
शुल्क मुक्ति (फीस माफी) हेतु अपने प्रधानाचार्य को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
.
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,
[विद्यालय का नाम],
[स्थान/शहर का नाम]।
विषय: शुल्क मुक्ति (फीस माफी) हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9 'अ' का एक नियमित छात्र हूँ। मेरे पिताजी एक साधारण कृषक/कर्मचारी हैं, जिनकी मासिक आय बहुत कम है। इस महँगाई के दौर में परिवार का भरण-पोषण करना ही कठिन हो गया है, जिसके कारण वे मेरे विद्यालय का मासिक शुल्क देने में असमर्थ हैं।
मैं अपनी कक्षा में हमेशा अच्छे अंक प्राप्त करता हूँ और खेलकूद तथा अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहता हूँ। पढ़ने की मेरी तीव्र इच्छा है।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि मेरी पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेरा पूर्ण शुल्क माफ करने की कृपा करें, ताकि मैं अपनी आगे की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रख सकूं।
सधन्यवाद!
आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: [आपका नाम]
कक्षा: 9 'अ'
अनुक्रमांक: [रोल नंबर]
दिनांक: [आज की दिनांक]