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Up Board Class 9th Half yearly Paper 2026 Set 2

कक्षा 9वीं · हिंदी · 2026 · अर्धवार्षिक

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प्रश्न 1.

हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास है –

(i) भाग्यवती (ii) परीक्षा गुरू (iii) गोदान (iv) पुनर्नवा

उत्तर:

(ii) परीक्षा गुरू

व्याख्या: लाला श्रीनिवास दास द्वारा रचित 'परीक्षा गुरु' को हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास माना जाता है।

प्रश्न 2.

खड़ी बोली गद्य के जनक हैं –

(i) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (ii) जयशंकर प्रसाद (iii) निराला (iv) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

(i) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

व्याख्या: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी को आधुनिक हिन्दी साहित्य एवं खड़ी बोली गद्य का जनक माना जाता है।

प्रश्न 3.

बात निबन्ध के लेखक हैं –

(i) प्रतापनारायण मिश्र (ii) रामचन्दर शुक्ल (iii) श्याम सुंदर दास (iv) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

(i) प्रतापनारायण मिश्र

व्याख्या: 'बात' शीर्षक निबन्ध के लेखक प्रतापनारायण मिश्र हैं।

प्रश्न 4.

हंस नामक पत्रिका का प्रकाशन किया था –

(i) प्रेमचन्द (ii) हजारी प्रसाद द्विवेदी (iii) महावीर प्रसाद द्विवेदी (iv) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

(i) प्रेमचन्द

व्याख्या: 'हंस' पत्रिका का सम्पादन एवं प्रकाशन मुंशी प्रेमचन्द जी ने किया था।

प्रश्न 5.

कबीर की रचना है –

(i) साखी (ii) सबद (iii) रमैनी (iv) उपर्युक्त सभी

उत्तर:

(iv) उपर्युक्त सभी

व्याख्या: कबीरदास की मुख्य रचना 'बीजक' के तीन भाग साखी, सबद और रमैनी हैं।

प्रश्न 6.

मीराबाई किस काल की कवियत्री हैं –

(i) आदिकाल (ii) भक्तिकाल (iii) रीतिकाल (iv) आधुनिक काल

उत्तर:

(ii) भक्तिकाल

व्याख्या: मीराबाई भक्तिकाल की सगुण भक्ति धारा की कृष्णभक्ति शाखा की प्रमुख कवयित्री हैं।

प्रश्न 7.

रहीम जी की भाषा थी –

(i) अवधी (ii) ब्रज (iii) भोजपुरी (iv) मैथिली

उत्तर:

(ii) ब्रज

व्याख्या: रहीम जी की मुख्य काव्य भाषा ब्रजभाषा रही है।

प्रश्न 8.

हिन्दी का प्रथम कवि है –

(i) सरहपा (ii) शबरपा (iii) जगनिक (iv) कोई नहीं

उत्तर:

(i) सरहपा

व्याख्या: राहुल सांकृत्यायन के अनुसार सरहपा को हिन्दी का प्रथम कवि माना गया है।

प्रश्न 9.

गुरुनानक देव निबन्ध के लेखक हैं –

(i) रामचन्दर शुक्ल (ii) हजारी प्रसाद द्विवेदी (iii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (iv) कोई नहीं

उत्तर:

(ii) हजारी प्रसाद द्विवेदी

व्याख्या: 'गुरु नानक देव' नामक निबन्ध के लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं।

प्रश्न 10.

दीपदान एकांकी में पात्रों की संख्या है –

(i) पाँच (ii) सात (iii) आठ (iv) नौ

उत्तर:

(ii) सात

व्याख्या: डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा रचित 'दीपदान' एकांकी में कुल 7 पात्र (कुँवर उदयसिंह, पन्ना धाय, सोना, सामन्त बनवीर, चम्पा, कीरत बारी, धात्री) हैं।

प्रश्न 11.

छायावाद युग के प्रवर्तक हैं –

(i) जयशंकर प्रसाद (ii) मैथिलीशरण (iii) महादेवी वर्मा (iv) कोई नहीं

उत्तर:

(i) जयशंकर प्रसाद

व्याख्या: छायावादी काव्यधारा के प्रवर्तक जयशंकर प्रसाद जी माने जाते हैं।

प्रश्न 12.

भारतेन्दु की रचना है –

(i) भारत दुर्दशा (ii) उर्वशी (iii) झरना (iv) लोकायतन

उत्तर:

(i) भारत दुर्दशा

व्याख्या: 'भारत दुर्दशा' भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की प्रसिद्ध नाट्य रचना है।

प्रश्न 13.

मैथिलीशरण गुप्त किस युग के कवि हैं –

(i) भारतेन्दु युग (ii) द्विवेदी युग (iii) छायावादी युग (iv) प्रयोगवादी युग

उत्तर:

(ii) द्विवेदी युग

व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त जी द्विवेदी युग के प्रमुख राष्ट्रकवि हैं।

प्रश्न 14.

नीहार क्या है –

(i) कहानी संकलन (ii) उपन्यास (iii) कविता संकलन (iv) रेखाचित्र

उत्तर:

(iii) कविता संकलन

व्याख्या: 'नीहार' महादेवी वर्मा जी का प्रथम कविता संकलन है।

प्रश्न 15.

वीर रस का स्थायी भाव है –

(i) शोक (ii) उत्साह (iii) क्रोध (iv) भय

उत्तर:

(ii) उत्साह

व्याख्या: वीर रस का स्थायी भाव 'उत्साह' होता है।

प्रश्न 16.

चौपाई के प्रत्येक चरण में मात्राएँ हैं –

(i) 16 (ii) 14 (iii) 12 (iv) 11

उत्तर:

(i) 16

व्याख्या: चौपाई एक सममात्रिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं।

प्रश्न 17.

जेठ का तत्सम है –

(i) ज्येष्ठ (ii) श्रेष्ठ (iii) बड़ा (iv) लघु

उत्तर:

(i) ज्येष्ठ

व्याख्या: तद्भव शब्द 'जेठ' का शुद्ध तत्सम रूप 'ज्येष्ठ' है।

प्रश्न 18.

तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए अलंकार है –

(i) उपमा अलंकार (ii) श्लेष अलंकार (iii) अनुप्रास अलंकार (iv) रूपक अलंकार

उत्तर:

(iii) अनुप्रास अलंकार

व्याख्या: इस पंक्ति में 'त' वर्ण की पुनरावृत्ति बार-बार हुई है, इसलिए अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 19.

हर्ष का विलोम है –

(i) वर्ष (ii) विषाद (iii) खुशी (iv) कोई नहीं

उत्तर:

(ii) विषाद

व्याख्या: 'हर्ष' का विलोम शब्द 'विषाद' होता है।

प्रश्न 20.

गृह, सदन, गेह पर्यायवाची हैं –

(i) गत (ii) घर (iii) खेल (iv) कोई नहीं

उत्तर:

(ii) घर

व्याख्या: गृह, सदन तथा गेह शब्द 'घर' के पर्यायवाची हैं।

प्रश्न 21.

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(क) यदि हम वैद्य होते तो कफ और पित्त की सहवर्ती बात की व्याख्या करते तथा भूगोलवेत्ता होते तो किसी देश के जल वात का वर्णन करते किन्तु दोनों विषयों में से हमें एक बात कहने का प्रयोजन नहीं है।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

(iii) प्रयोजन के पर्यायवाची लिखिए।

उत्तर:

(i) शीर्षक: बात (लेखक: प्रतापनारायण मिश्र)

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

लेखक कहते हैं कि यदि वे पेशे से चिकित्सक (वैद्य) होते तो शरीर में वात, कफ और पित्त सम्बन्धी त्रिदोषों तथा उनसे होने वाले रोगों की चर्चा करते। अथवा यदि वे भूगोलशास्त्र के ज्ञाता होते तो किसी देश की जलवायु और भौगोलिक वातावरण का वर्णन करते। परन्तु यहाँ उनका उद्देश्य इन वैज्ञानिक या चिकित्सीय विषयों पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि साधारण बातचीत के माध्यम से मानव जीवन और भाषा की महत्ता को प्रकट करना है।

(iii) प्रयोजन के पर्यायवाची: उद्देश्य, लक्ष्य, हेतु, मतलब।

(ख) गुरु के जीवन काल में उनका प्रभाव सूर्य के समान फैलने लगा था उनके मन में किसी के प्रति राग या द्वेष नहीं था उन्होंने किसी की निंदा नहीं की और एक परमात्मा को छोड़कर किसी की स्तुति भी नहीं की।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

(iii) गुरु के पर्यायवाची लिखिए।

उत्तर:

(i) शीर्षक: गुरु नानक देव (लेखक: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी)

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

लेखक कहते हैं कि गुरु नानक देव जी के महान व्यक्तित्व तथा पावन उपदेशों का प्रभाव उनके जीवन काल में ही सूर्य के प्रकाश की भाँति चारों ओर व्यापक रूप से फैलने लगा था। उनके मन में समाज के किसी भी व्यक्ति के प्रति न तो कोई आसक्ति या पक्षपात था और न ही किसी के प्रति ईर्ष्या अथवा शत्रुता का भाव था।

(iii) गुरु के पर्यायवाची: शिक्षक, आचार्य, मार्गदर्शक, उपाध्याय।

प्रश्न 22.

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

सत गुरु हम सँ रीझि करि, एक कहा प्रसंग।

बरस्या बादल प्रेम का, भीजि गया सब अंग॥

(i) प्रस्तुत दोहे का संदर्भ लिखिए।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

(iii) बादल के पर्यायवाची शब्द लिखिए।

उत्तर:

(i) संदर्भ: प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य खण्ड में संकलित तथा कबीरदास जी द्वारा रचित 'साखी' शीर्षक कविता से उद्धृत है।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

कबीरदास जी कहते हैं कि सद्गुरु ने मेरी सच्ची सेवा और भक्ति से प्रसन्न होकर मुझे ईश्वर भक्ति का एक ऐसा गूढ़ उपदेश दिया, जिससे मेरे हृदय में ईश्वर-प्रेम का मेघ उमड़ पड़ा। उस प्रेम-रूपी जल की ऐसी वर्षा हुई कि मेरा सम्पूर्ण शरीर और आत्मा ईश्वर के अलौकिक प्रेम रस में सराबोर हो गए।

(iii) बादल के पर्यायवाची शब्द: मेघ, जलधर, घन, पयोद।

प्रश्न 23.

(क) निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित अनुवाद कीजिए–

सतां सज्जनानाम् आचारः सदाचारः। ये जनाः सद् एव विचारयन्ति, सद् एव आचरन्ति च, ते एव सज्जनाः भवन्ति। सज्जनाः यथा आचरन्ति तथैवाचरणं सदाचारः भवति।

उत्तर:

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'सदाचारः' पाठ से लिया गया है।

अनुवाद:

श्रेष्ठ (सज्जन) पुरुषों का आचरण ही सदाचार कहलाता है। जो लोग सत्य ही सोचते हैं और सत्य का ही आचरण करते हैं, वे ही सज्जन होते हैं। सज्जन पुरुष जैसा आचरण करते हैं, वैसा ही आचरण करना सदाचार होता है।

(ख) निम्नलिखित संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का संदर्भ सहित अनुवाद कीजिए –

यतोयततः समीहसे,

ततो नोऽभयं कुरु,

शन्नः कुरु प्रजाभ्यो

अभयं नः पशुभ्यः॥

उत्तर:

संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'वन्दना' पाठ से उद्धृत है।

अनुवाद:

हे ईश्वर! आप जिस-जिस स्थान/दिशा से चाहते हैं, उस-उस स्थान से हमें निर्भय कर दीजिए। हमारी प्रजा (संतानों) का कल्याण कीजिए तथा हमारे पशुओं को भी निर्भय (भयमुक्त) कीजिए।

प्रश्न 24.

दीपदान एकांकी के कथा संगठन पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर:

डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा रचित 'दीपदान' एकांकी का कथा संगठन अत्यंत सुगठित, रोचक, गतिशील तथा नाटकीयता से परिपूर्ण है।

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: एकांकी की कथा चित्तौड़ की ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जहाँ मेवाड़ के भावी उत्तराधिकारी कुँवर उदयसिंह के प्राणों की रक्षा पन्ना धाय द्वारा की जाती है।

2. कौतूहल एवं द्वंद्व: कथा की शुरुआत बनवीर के कुचक्र (रास-रंग और दीपदान उत्सव का आयोजन) से होती है। बनवीर कुँवर उदयसिंह की हत्या करके निष्कंटक राज्य प्राप्त करना चाहता है।

3. चरमोत्कर्ष: जब बनवीर नग्न तलवार लेकर कुँवर उदयसिंह के कक्ष में आता है, तब पन्ना धाय अपने सोए हुए निरपराध पुत्र चन्दन को उदयसिंह की शय्या पर सुला देती है। बनवीर चन्दन को ही उदयसिंह समझकर उसकी हत्या कर देता है।

4. उद्देश्यपूर्ण अंत: पन्ना धाय के महान त्याग, स्वामिभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा से एकांकी का कथा संगठन अत्यंत मार्मिक एवं प्रभावोत्पादक बन पड़ता है। इसमें संकलन-त्रयी (समय, स्थान और कार्य की एकता) का पूर्ण निर्वाह किया गया है।

प्रश्न 25.

(क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक का जीवन परिचय एवं रचनाएं लिखिए।

(i) प्रतापनारायण मिश्र (ii) प्रेमचन्द (iii) महादेवी वर्मा

उत्तर:

(ii) मुंशी प्रेमचन्द

जीवन परिचय:

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई सन् 1880 ई० को वाराणसी जिले के लमही नामक ग्राम में हुआ था। इनके बचपन का नाम धनपत राय था। इनके पिता का नाम मुंशी अजायब लाल तथा माता का नाम आनन्दी देवी था। निर्धनता और पारिवारिक संघर्षों के बीच इन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की तथा अध्यापक व सब-डिप्टी इंस्पेक्टर के पद पर कार्य किया। बाद में महात्मा गांधी जी के आह्वान पर सरकारी नौकरी छोड़ दी और पूर्णतः साहित्य सेवा में लग गए। इन्होंने 'हंस' और 'मर्यादा' पत्रिकाओं का कुशल सम्पादन किया। 8 अक्टूबर सन् 1936 ई० को महान कथाकार का निधन हो गया।

प्रमुख रचनाएँ:

उपन्यास: गोदान, गबन, सेवासदन, कर्मभूमि, निर्मला, रंगभूमि।

कहानी संग्रह: मानसरोवर (आठ भागों में), जिसमें पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, कफ़न आदि प्रसिद्ध कहानियाँ हैं।

नाटक: कर्बला, संग्राम, प्रेम की वेदी।

(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक का जीवन परिचय एवं रचनाएं लिखिए।

(i) कबीरदास (ii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (iii) मैथिलीशरण गुप्त

उत्तर:

(i) कबीरदास

जीवन परिचय:

संत कबीरदास जी का जन्म संवत् 1455 (सन् 1398 ई०) में काशी में हुआ माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार इनका जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था, जिसने लोकलाज के भय से इन्हें लहरतारा ताल के पास छोड़ दिया था। नीरू और नीमा नामक जुलाहा दम्पति ने इनका पालन-पोषण किया। इनके गुरु स्वामी रामानन्द जी थे। कबीर निरक्षर थे, किन्तु महान विचारक और समाज सुधारक थे। इन्होंने समाज में व्याप्त बाह्याडंबरों, अंधविश्वासों तथा छुआछूत का कड़ा विरोध किया। संवत् 1575 (सन् 1518 ई०) में मगहर में इनका देहावसान हो गया।

प्रमुख रचनाएँ:

कबीरदास जी की मुख्य रचना 'बीजक' है, जिसके तीन भाग हैं:

1. साखी: दोहा छंद में रचित कबीर की साखियाँ।

2. सबद: गेय पद जिसमें कबीर के दार्शनिक विचार हैं।

3. रमैनी: चौपाई एवं दोहा छंद में ईश्वर-विषयक विचार।

प्रश्न 26.

अपनी पाठ्य पुस्तक से कंठस्थ किया हुआ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो।

उत्तर:

वरमेको गुणी पुत्रो न च मूर्खशतान्यपि।

एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च तारागणैरपि॥

प्रश्न 27.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए –

(i) क्रोधं केन जयेत ?

(ii) सज्जनाः के भवन्ति।

(iii) सिद्धिमन्त्रः किम् अस्ति।

उत्तर:

(i) अक्रोधेन क्रोधं जयेत।

(ii) ये जनाः सद् एव विचारयन्ति, सद् एव आचरन्ति च, ते एव सज्जनाः भवन्ति।

प्रश्न 28.

निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ बताते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए–

(i) अपने पैरों पर खड़ा होना

(ii) अक्ल चकराना

(iii) आसमान से तारे तोड़ना

(iv) ऊँट के मुँह में जीरा

उत्तर:

(iv) ऊँट के मुँह में जीरा

अर्थ: आवश्यकता से बहुत कम वस्तु मिलना।

वाक्य प्रयोग: पहलवान रमेश को भोजन में केवल दो रोटियाँ मिलना तो ऊँट के मुँह में जीरे के समान है।

प्रश्न 29.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए–

(i) वह कठिन परिश्रम करता है।

(ii) सूर्य पूर्व से निकलता है।

(iii) तुम दोनों पढ़ते हो।

(iv) वे दोनों बाजार जाते हैं।

उत्तर:

(i) सः कठिनं परिश्रमं करोति।

(ii) सूर्यः पूर्वे उदेति। (अथवा: सूर्यः पूर्वस्यां दिशि उदयति।)

प्रश्न 30.

शुल्क मुक्ति हेतु प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए।

अथवा

विद्यालय के प्रधानाचार्य को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,

श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय,

राजकीय इण्टर कॉलेज,

मेरठ।

विषय: शिक्षण शुल्क मुक्ति हेतु प्रार्थना पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9-अ का छात्र हूँ। मेरे पिता जी एक छोटे किसान हैं। अतिवृष्टि के कारण इस वर्ष फसल नष्ट हो जाने से हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। पिता जी की मासिक आय इतनी कम है कि वे परिवार के पालन-पोषण के साथ-साथ मेरी शिक्षा का व्यय वहन करने में असमर्थ हैं।

मैं अपनी कक्षा में सदैव प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होता आया हूँ तथा विद्यालय की पाठ्येतर गतिविधियों में भी निरंतर भाग लेता रहता हूँ। मैं अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रखना चाहता हूँ।

अतः आपसे नम्र निवेदन है कि मुझे पूर्ण शिक्षण शुल्क से मुक्ति प्रदान करने की कृपा करें, जिससे मेरी शिक्षा में बाधा न आए। इस कृपा के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।

सधन्यवाद।

दिनांक: 15 अक्टूबर 2026

आपका आज्ञाकारी छात्र,

नाम: क० ख० ग०

कक्षा: 9 'अ'

अनुक्रमांक: 12