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UP Board Class 9 Board Paper 2026

कक्षा 9वीं · हिंदी · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

भारतेन्दु युग के लेखक नहीं हैं—

(A) प्रतापनारायण मिश्र

(B) बालकृष्ण भट्ट

(C) प्रेमचन्द

(D) लाला श्रीनिवासदास

उत्तर:

(C) प्रेमचन्द

(व्याख्या: प्रेमचन्द द्विवेदी युग तथा प्रेमचन्द युग के प्रमुख गद्यकार हैं, वे भारतेन्दु युग के लेखक नहीं हैं।)

प्रश्न 2.

द्विवेदी युग का नामकरण हुआ है—

(A) महावीरप्रसाद द्विवेदी के नाम पर

(B) जयशंकर प्रसाद के नाम पर

(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी के नाम पर

(D) रामकुमार वर्मा के नाम पर

उत्तर:

(A) महावीरप्रसाद द्विवेदी के नाम पर

प्रश्न 3.

'गिल्लू' विधा है—

(A) रेखाचित्र

(B) संस्मरण

(C) जीवनी

(D) कहानी

उत्तर:

(A) रेखाचित्र

(व्याख्या: 'गिल्लू' महादेवी वर्मा द्वारा लिखित प्रसिद्ध रेखाचित्र/संस्मरण है।)

प्रश्न 4.

'अंधेर नगरी' के रचनाकार हैं—

(A) प्रतापनारायण मिश्र

(B) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(C) रामकुमार वर्मा

(D) हरिकृष्ण प्रेमी

उत्तर:

(B) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

प्रश्न 5.

हिन्दी की प्रथम कहानी है—

(A) इन्दुमती

(B) ममता

(C) क्या लिखूँ

(D) कोई नहीं

उत्तर:

(A) इन्दुमती

(व्याख्या: किशोरीलाल गोस्वामी द्वारा रचित 'इन्दुमती' को हिन्दी की प्रथम कहानी माना जाता है।)

प्रश्न 6.

'रामचन्द्रिका' के रचनाकार हैं—

(A) सूरदास

(B) तुलसीदास

(C) केशवदास

(D) बिहारी

उत्तर:

(C) केशवदास

प्रश्न 7.

पूर्वमध्य काल किस काल को कहा जाता है?

(A) आदिकाल को

(B) भक्ति काल को

(C) रीतिकाल को

(D) आधुनिक काल

उत्तर:

(B) भक्ति काल को

प्रश्न 8.

निम्न में कौन-से छायावादी कवि हैं?

(A) जयशंकर प्रसाद

(B) महादेवी वर्मा

(C) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

(D) इनमें से सभी

उत्तर:

(D) इनमें से सभी

प्रश्न 9.

'उर्वशी' के रचनाकार हैं—

(A) डॉ० धर्मवीर भारती

(B) भवानीप्रसाद मिश्र

(C) रामधारी सिंह 'दिनकर'

(D) अज्ञेय

उत्तर:

(C) रामधारी सिंह 'दिनकर'

प्रश्न 10.

निम्न में भक्तिकालीन कवि हैं—

(A) कबीर

(B) जयशंकर प्रसाद

(C) बिहारी

(D) सुभद्रा कुमारी चौहान

उत्तर:

(A) कबीर

प्रश्न 11.

कठिन कार्य को करने का वर्णन जहाँ पर होता है वहाँ रस है—

(A) वीर

(B) शृंगार

(C) करुण

(D) हास्य

उत्तर:

(A) वीर

प्रश्न 12.

'सुरुचि सुवास सरस अनुरागा।' में अलंकार है—

(A) यमक

(B) अनुप्रास

(C) श्लेष

(D) उपमा

उत्तर:

(B) अनुप्रास

(व्याख्या: 'स' वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।)

प्रश्न 13.

किस छन्द के प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं?

(A) चौपाई

(B) दोहा

(C) सोरठा

(D) रोला

उत्तर:

(A) चौपाई

प्रश्न 14.

कौन-सी वर्तनी शुद्ध है?

(A) आपचारिक

(B) औपचारिक

(C) अपचारिक

(D) कोई नहीं

उत्तर:

(B) औपचारिक

प्रश्न 15.

'कुक्कुर' शब्द का तद्भव है—

(A) कार्य

(B) कुत्ता

(C) कुकर्म

(D) कुकर

उत्तर:

(B) कुत्ता

प्रश्न 16.

'मूल्यवान' का विलोम है—

(A) अमूल्य

(B) महँगी

(C) कीमती

(D) सस्ती

उत्तर:

(D) सस्ती (अथवा विकल्प में त्रुटि के अनुसार 'मूल्यहीन' का भाव)।

(व्याख्या: 'मूल्यवान'/कीमती का विलोम अर्थ 'सस्ती' अथवा 'मूल्यहीन' होता है।)

प्रश्न 17.

'उपराज' में समास है—

(A) अव्ययीभाव

(B) तत्पुरुष

(C) कर्मधारय

(D) द्विगु

उत्तर:

(A) अव्ययीभाव

(व्याख्या: पूर्व पद 'उप' अव्यय/उपसर्ग होने के कारण यहाँ अव्ययीभाव समास है।)

प्रश्न 18.

'नायकः' का सन्धि-विच्छेद है—

(A) नै + अकः

(B) नौ + अकः

(C) नय + अकः

(D) न + अकः

उत्तर:

(A) नै + अकः

(व्याख्या: अयादि सन्धि नियमानुसार 'नै + अकः = नायकः' बनता है।)

प्रश्न 19.

'रामैः' शब्द किस विभक्ति व वचन का रूप है?

(A) प्रथमा एकवचन

(B) तृतीया बहुवचन

(C) द्वितीया एकवचन

(D) चतुर्थी एकवचन

उत्तर:

(B) तृतीया बहुवचन

प्रश्न 20.

'कृ' धातु लङ् लकार प्रथम पुरुष एकवचन का रूप है—

(A) अकरोत्

(B) अकुर्वन्

(C) अकुर्वन्

(D) अकुरुथ

उत्तर:

(A) अकरोत्

प्रश्न 21.

अधोलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

"आज उस दिन की बात याद करके मुझे ग्लानि हो रही है, उसे प्रकट नहीं कर सकता। मैं उसे खोज निकालूँगा और पैरों पर गिरकर अपना अपराध क्षमा कराऊँगा। वह कुछ लेगा नहीं, यह जानता हूँ, उसका जन्म यशवर्षा करने के लिए हुआ है। उसकी सज्जनता ने मुझे ऐसा आदर्श दिखा दिया है जो अब से जीवन-पर्यन्त मेरे सामने रहेगा।"

(i) उपर्युक्त गद्यखण्ड के पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।

(ii) रेखांकित गद्यांश की व्याख्या कीजिए।

(iii) ग्लानि किसको हो रही है ?

उत्तर:

(i) पाठ एवं लेखक का नाम:

• पाठ का नाम: मन्त्र

• लेखक का नाम: मुंशी प्रेमचन्द

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

• रेखांकित अंश: "वह कुछ लेगा नहीं, यह जानता हूँ, उसका जन्म यशवर्षा करने के लिए हुआ है। उसकी सज्जनता ने मुझे ऐसा आदर्श दिखा दिया है जो अब से जीवन-पर्यन्त मेरे सामने रहेगा।"

• व्याख्या: डॉक्टर चड्ढा पश्चात्ताप की अग्नि में जलते हुए कहते हैं कि वे भगत (बूढ़े) के महान आचरण से अत्यंत प्रभावित हैं। वे जानते हैं कि भगत अपनी निष्काम सेवा के बदले में उनसे कोई धन या उपहार स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि उसका जन्म केवल दूसरों का कल्याण और यश अर्जित करने के लिए ही हुआ है। भगत के इस निस्वार्थ और सज्जनतापूर्ण व्यवहार ने डॉक्टर चड्ढा के सामने मानवता का एक ऐसा सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत कर दिया है, जो जीवन भर उनका मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।

(iii) उत्तर:

ग्लानि डॉक्टर चड्ढा को हो रही है।

अथवा

"किसी लकीर को मिटाये बिना छोटी बना देने का उपाय है बड़ी लकीर खींच देना। क्षुद्र अहम्मिकाओं और अर्थहीन संकीर्णताओं को क्षुद्रता सिद्ध करने के लिए तर्क और शास्त्रार्थ का मार्ग कदाचित् ठीक नहीं है। सही उपाय है बड़े सत्य को प्रत्यक्ष कर देना। गुरु नानक ने यही किया। उन्होंने जनता को बड़े से बड़े सत्य के सम्मुखीन कर दिया। हज़ारों दीये उस महाज्योति के सामने स्वयं फीके पड़ गये।"

(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

(iii) हज़ारों दीये किसके सामने स्वयं फीके पड़ गये ?

हल / Solution:

(i) पाठ एवं लेखक का नाम:

• पाठ का नाम: गुरु नानक देव

• लेखक का नाम: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

• रेखांकित अंश: "सही उपाय है बड़े सत्य को प्रत्यक्ष कर देना। गुरु नानक ने यही किया। उन्होंने जनता को बड़े से बड़े सत्य के सम्मुखीन कर दिया।"

• व्याख्या: लेखक का विचार है कि समाज में फैली छोटी-छोटी संकीर्णताओं, अज्ञानता और अहंकार को दूर करने के लिए केवल वाद-विवाद या शास्त्रार्थ करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सबसे उत्तम मार्ग यह है कि लोगों के समक्ष एक महान और व्यापक सत्य को प्रत्यक्ष रूप से प्रकट कर दिया जाए। गुरु नानक देव जी ने यही कल्याणकारी मार्ग अपनाया और जनता को ईश्वर तथा प्रेम के सर्वोच्च एवं व्यापक सत्य का साक्षात्कार कराया।

(iii) उत्तर:

हज़ारों दीये गुरु नानक देव जी रूपी महाज्योति (सर्वोच्च सत्य) के सामने स्वयं फीके पड़ गये।

प्रश्न 22.

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

(क)

"चारु चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में,

स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है, अवानि और अम्बर तल में।

पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से,

मानो झूम रहे हैं तरु भी, मंद पवन के झोंकों से॥"

(i) प्रस्तुत पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

(iii) 'चारु चन्द्र की चंचल किरणें' में कौन-सा अलंकार है ?

उत्तर:

(i) सन्दर्भ:

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के काव्य-खण्ड में संकलित एवं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'पंचवटी' शीर्षक कविता से उद्धृत है।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

• रेखांकित अंश: "चारु चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है, अवानि और अम्बर तल में।"

• व्याख्या: कवि पंचवटी की प्राकृतिक सुंदर छटा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सुंदर चंद्रमा की चंचल किरणें जल और थल (पृथ्वी) सब जगह क्रीड़ा करती हुई अत्यंत सुहावनी प्रतीत हो रही हैं। संपूर्ण पृथ्वी (अवनि) से लेकर आकाश (अम्बर) मंडल तक स्वच्छ तथा निर्मल चाँदनी बिछी हुई है, जिससे संपूर्ण वातावरण आलोकित और मनमोहक लग रहा है।

(iii) अलंकार:

'चारु चन्द्र की चंचल किरणें' में 'च' वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।

अथवा

(ख)

"इड़ा उठी, दिख पड़ा राज-पथ, धुंधली-सी छाया चलती,

वाणी में भी करुण वेदना, वह पुकार जैसी जलती।

शिथिल शरीर वसन विश्रृंखल, कबरी अधिक अधोर खुली,

छिन्न पत्र मकरन्द लुटी-सी, ज्यों मुरझायी हुई कली।"

(i) प्रस्तुत पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

(iii) इड़ा ने जब श्रद्धा को देखा तो उसकी दशा कैसी थी ?

हल / Solution:

(i) सन्दर्भ:

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के काव्य-खण्ड में संकलित तथा महाकवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित 'कामायनी' महाकाव्य के 'पुनर्मिलन' शीर्षक से अवतरित है।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या:

• रेखांकित अंश: "शिथिल शरीर वसन विश्रृंखल, कबरी अधिक अधोर खुली, छिन्न पत्र मकरन्द लुटी-सी, ज्यों मुरझायी हुई कली।"

• व्याख्या: कवि वर्णन करते हैं कि दुःखी और वियोग से व्याकुल श्रद्धा का शरीर अत्यंत शिथिल (थका हुआ) था। उसके वस्त्र अस्त-व्यस्त (विश्रृंखल) थे और उसके बालों की चोटी आधी खुली हुई थी। उसकी दयनीय अवस्था उस मुरझाई हुई कली की भाँति लग रही थी, जिसकी पंखुड़ियाँ बिखर गई हों और जिसका मकरंद (रस) पूरी तरह लुट चुका हो।

(iii) उत्तर:

इड़ा ने जब श्रद्धा को देखा तब श्रद्धा का शरीर अत्यंत थका हुआ (शिथिल) था, वस्त्र अस्त-व्यस्त थे, बालों की चोटी खुली हुई थी तथा उसकी वाणी में गहरी करुण वेदना थी। वह एक मुरझाई हुई कली के समान अत्यंत दुखियारी प्रतीत हो रही थी।

प्रश्न 23 (क).

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए—

(i) "विश्व विश्रुत: स्वामी विवेकानन्द: अस्यैव महाभागस्य शिष्य: आसीत्। तेन न केवलं भारतवर्षे अपितु पाश्चात्य देशेष्वपि व्यापकस्य मानव धर्मस्य डिण्डिमघोष: कृत:। तेन अन्त्यैश्च शिष्यै: जनानां कल्याणार्थं स्थाने-स्थाने रामकृष्ण सेवाश्रमा: स्थापिता:। ईश्वरानुभव: दुःखितानां जनानां सेवया पुष्यति, इति रामकृष्णस्य महान सन्देश:।"

उत्तर:

• सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'परमहंसः रामकृष्णः' पाठ से उद्धृत है।

• हिन्दी अनुवाद: विश्व-प्रसिद्ध स्वामी विवेकानन्द इन्हीं महापुरुष (परमहंस रामकृष्ण) के शिष्य थे। उन्होंने न केवल भारतवर्ष में, बल्कि पाश्चात्य (पश्चिमी) देशों में भी व्यापक मानव धर्म की दुंदुभि बजाई (डंका बजाया)। उन्होंने तथा उनके अन्य शिष्यों ने लोगों के कल्याण के लिए स्थान-स्थान पर रामकृष्ण सेवा आश्रमों की स्थापना की। "दुःखी लोगों की सेवा करने से ही ईश्वर का अनुभव पुष्ट (प्राप्त) होता है", यही रामकृष्ण का महान सन्देश है।

अथवा

(ii) "अनन्तरं श्रीकृष्णां गोपालैः सह वनं गत्वा गाः चारयति, तत्र च वेणुं वादयति, अनेन सर्वाः गावः गोपालाश्च सर्वाणि कार्याणि..."

हल / Solution:

• सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'गोपालः श्रीकृष्णः' शीर्षक पाठ से उद्धृत है।

• हिन्दी अनुवाद: इसके पश्चात् श्रीकृष्ण ग्वालों के साथ वन में जाकर गायों को चराते हैं और वहाँ बाँसुरी बजाते हैं, इससे सभी गायें और ग्वाले अपने सभी कार्यों को भूलकर उनके संगीत में लीन हो जाते हैं...

प्रश्न 23 (ख).

दिए गए संस्कृत पद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए—

"वरमेको गुणी पुत्रो न च मूर्खशतैरपि।

एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च तारागणैरपि॥"

उत्तर:

• सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'सुभाषितरत्नानि' पाठ से लिया गया है।

• हिन्दी अनुवाद: सैकड़ों मूर्ख पुत्रों की अपेक्षा एक गुणी (योग्य) पुत्र ही श्रेष्ठ होता है; जैसे अकेला चंद्रमा ही संपूर्ण अंधकार को नष्ट कर देता है, जबकि हज़ारों तारों के समूह मिलकर भी अंधकार को दूर नहीं कर पाते।

अथवा

"बुद्धिमान् नीतिमान् वाग्मी श्रीमाँच्छत्रुनिबर्हणः।

विपुलांसो महाबाहुः कम्बुग्रीवो महाहनुः॥"

हल / Solution:

• सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड में संकलित 'पुरुषोत्तमः रामः' शीर्षक पाठ से उद्धृत है।

• हिन्दी अनुवाद: (श्रीराम) बुद्धिमान, नीतिशास्त्र के ज्ञाता, वाक्पटु (सुंदर बोलने वाले), कान्तिमान (लक्ष्मीवान) और शत्रुओं का नाश करने वाले हैं। उनके कंधे चौड़े, भुजाएँ विशाल, गर्दन शंख के समान सुंदर तथा ठुड्डी पुष्ट है।

प्रश्न 24.

'दीपदान' एकांकी के आधार पर पन्नाधाय का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर:

डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा रचित 'दीपदान' एकांकी की मूल पात्र एवं नायिका पन्नाधाय हैं। पन्नाधाय का चरित्र त्याग, स्वामिभक्ति तथा कर्त्तव्यनिष्ठता का अमर प्रतीक है। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. अपूर्व स्वामिभक्त: पन्नाधाय मेवाड़ राजवंश के प्रति पूर्णतः समर्पित हैं। महाराणा संग्राम सिंह के वंशधर कुंवर उदयसिंह की रक्षा करना ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है।

2. त्याग और बलिदान की साक्षात मूरत: कुंवर उदयसिंह के प्राण बचाने के लिए पन्नाधाय ने अपने एकमात्र पुत्र 'चंदन' को उदयसिंह की शय्या पर सुला दिया और क्रूर बनवीर के हाथों अपने निर्दोष पुत्र का सहर्ष बलिदान होने दिया। ऐसा अनुपम त्याग इतिहास में विरला ही मिलता है।

3. अत्यंत साहसी और वीरांगना: बनवीर के प्रलोभनों और धमकियों के आगे पन्नाधाय तनिक भी विचलित नहीं होतीं। वे विषम परिस्थितियों में भी अपना धैर्य बनाए रखती हैं।

4. देशभक्त व दूरदर्शी: पन्नाधाय जानती हैं कि उदयसिंह केवल उनका स्वामी ही नहीं, बल्कि मेवाड़ का भावी कुलदीपक है। मेवाड़ के अस्तित्व की रक्षा हेतु उन्होंने अपने व्यक्तिगत पुत्र-मोह का त्याग कर दिया।

निष्कर्ष: पन्नाधाय का चरित्र भारतीय नारी के अमर त्याग, स्वामिभक्ति और कर्त्तव्यपरायणता का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करता है।

अथवा

'लक्ष्मी का स्वागत' एकांकी का सारांश लिखिए।

हल / Solution:

उपेंद्रनाथ 'अश्क' द्वारा रचित 'लक्ष्मी का स्वागत' एक प्रसिद्ध सामाजिक एवं मर्मस्पर्शी एकांकी है। इसमें समाज की दहेज-लोलुपता, रूढ़िवादिता और मानवीय संवेदनाओं के पतन को उभारा गया है।

एकांकी का सारांश:

रोशन का इकलौता पुत्र सुरेन्द्र गंभीर रूप से बीमार है। रोशन की पत्नी का हाल ही में देहांत हो चुका है। रोशन अपने बीमार बेटे का इलाज कराने के लिए तड़प रहा है, किंतु उसके माता-पिता को बच्चे की बीमारी या उसके प्राणों की कोई चिंता नहीं है। रोशन के माता-पिता अत्यंत स्वार्थी और धनलोलुप हैं। वे रोशन के दूसरे विवाह की तैयारियों में व्यस्त हैं क्योंकि उन्हें नए विवाह से भारी दहेज (लक्ष्मी के आगमन) की उम्मीद है।

रोशन अपने बेटे की रक्षा के लिए संघर्ष करता है, किंतु अंततः बच्चे की मृत्यु हो जाती है। इसके बावजूद उसके माता-पिता को कोई दुःख नहीं होता और वे शगुन व नगाड़ों के साथ रोशन के नए सगाई का स्वागत करते हैं। यह एकांकी धन-लिप्सा में अंधी हुई मानवीय क्रूरता पर करारा प्रहार करती है।

प्रश्न 25 (क).

दिए गए लेखकों में से किसी एक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना लिखिए।

(i) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

(ii) महादेवी वर्मा

(iii) धर्मवीर भारती

उत्तर:

(i) आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

• जीवन परिचय:

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 ई० में बलिया जिले के 'दुबे का छपरा' नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम पं० अनमोल द्विवेदी तथा माता का नाम श्रीमती ज्याेतिष्मती था। इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से साहित्य और ज्योतिषशास्त्र की शिक्षा प्राप्त की। ये शांतिनिकेतन, काशी हिंदू विश्वविद्यालय तथा पंजाब विश्वविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे। भारत सरकार ने इन्हें 'पद्म भूषण' की उपाधि से अलंकृत किया। सन् 1979 ई० में इनका निधन हो गया।

• प्रमुख रचना:

'अशोक के फूल' (निबंध संग्रह) / 'बाणभट्ट की आत्मकथा' (उपन्यास)।

प्रश्न 25 (ख).

दिए गए कवियों में से किसी एक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।

(i) मैथिलीशरण गुप्त

(ii) जयशंकर प्रसाद

(iii) कबीर दास

उत्तर:

(iii) कबीर दास

• जीवन परिचय:

संत कबीरदास का जन्म सन् 1398 ई० (संवत 1455) में काशी में हुआ था। जनश्रुति के अनुसार इनका जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था, जिसने लोकलाज के भय से इन्हें लहरतारा ताल के पास छोड़ दिया था। इनका पालन-पोषण 'नीरू' और 'नीमा' नामक जुलाहा दंपति ने किया। कबीर के गुरु स्वामी रामानंद थे। कबीर निरक्षर थे, किंतु साधु-संगत और देशाटन से इन्होंने व्यावहारिक व आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। कबीर भक्ति काल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि थे। सन् 1518 ई० में मगहर में इनका निधन हो गया।

• प्रमुख रचना:

'बीजक' (जिसके तीन भाग हैं— साखी, सबद, रमैनी)।

प्रश्न 26.

अपनी पाठ्य पुस्तक से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न पत्र में न आया हो।

उत्तर:

न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि।

व्यये कृते वर्धत एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥

प्रश्न 27.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों का उत्तर संस्कृत में दीजिए।

(i) क्रोधं केन जयेत् ?

(ii) स्वामी विवेकानन्दः कस्य शिष्यः आसीत् ?

(iii) रामदासः कुत्र निवसति ?

(iv) श्रीकृष्णः कः आसीत् ?

उत्तर:

(i) क्रोधं अक्रोधेन जयेत्।

(ii) स्वामी विवेकानन्दः परमहंसस्य रामकृष्णस्य शिष्यः आसीत्।

(iii) रामदासः नारायणपुरे निवसति।

(iv) श्रीकृष्णः लोकनायकः (वासुदेवस्य पुत्रः) आसीत्।

प्रश्न 28.

निम्नलिखित में से किसी एक मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।

(i) अंगूर खट्टे होना

(ii) गागर में सागर भरना

(iii) घड़ों पानी पड़ना

(iv) खून खौलना

उत्तर:

(ii) गागर में सागर भरना

• अर्थ: थोड़े से शब्दों में बहुत बड़ी या गहन बात कह देना।

• वाक्य प्रयोग: कविवर बिहारी जी ने अपने नीति और भक्ति के दोहों में गागर में सागर भर दिया है।

प्रश्न 29.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए।

(i) हम सब विद्यालय जाते हैं।

(ii) तुम यह पुस्तक पढ़ते हो।

(iii) वे सब कहाँ जाते हैं।

(iv) घोड़ा वहाँ दौड़ता है।

उत्तर:

(i) वयं विद्यालयं गच्छामः।

(ii) त्वम् एतां पुस्तकं पठसि।

(iii) ते कुत्र गच्छन्ति?

(iv) अश्वः तत्र धावति।

प्रश्न 30.

घर के विवाहोत्सव में सम्मिलित होने के लिए प्रधानाचार्य को अवकाश हेतु एक प्रार्थना पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,

श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,

डी०ए०वी० इण्टर कॉलेज,

प्रयागराज।

विषय: भ्राता के विवाहोत्सव हेतु तीन दिवस के अवकाश के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि मेरे बड़े भाई का शुभ विवाह दिनांक 15 मार्च 2026 को आयोजित होना निश्चित हुआ है। विवाह संबंधी घर के आवश्यक कार्यों एवं प्रबंधों में मेरी उपस्थिति अत्यंत अनिवार्य है। इस कारण मैं दिनांक 14 मार्च 2026 से 16 मार्च 2026 तक विद्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ हूँ।

अतः आपसे नम्र निवेदन है कि मुझे उक्त तीन दिनों का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।

सधन्यवाद।

भवदीय शिष्य,

नाम: अनिकेत शर्मा

कक्षा: 9 ('अ')

अनुक्रमांक: 12

दिनांक: 13 मार्च 2026

अथवा

शहर की सफाई हेतु मुख्य नगर अधिकारी को पत्र लिखिए!

हल / Solution:

सेवा में,

मुख्य नगर अधिकारी,

नगर निगम,

वाराणसी।

विषय: मोहल्ले में व्याप्त गंदगी एवं नियमित सफाई हेतु प्रार्थना पत्र।

महोदय,

मैं आपका ध्यान हमारे मोहल्ले (अशोक नगर, वार्ड क्र.-14) में व्याप्त अत्यधिक गंदगी और अव्यवस्था की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। पिछले दो सप्ताह से हमारे क्षेत्र में सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं। इसके कारण सड़कों के किनारे और नालियों में कचरे के ढेर लग गए हैं।

नालियों का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है तथा कचरा सड़ने के कारण तीव्र दुर्गंध फैल रही है। मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ जाने से डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियाँ फैलने की गंभीर आशंका बनी हुई है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारे मोहल्ले की नियमित सफाई हेतु कर्मचारियों को तुरंत कड़े निर्देश दें तथा क्षेत्र में कीटनाशक दवाओं व चूने के छिड़काव की समुचित व्यवस्था कराने की कृपा करें।

सधन्यवाद।

भवदीय,

समस्त क्षेत्रवासी

अशोक नगर, वाराणसी

दिनांक: 10 मार्च 2026