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UP Board Class 9 Hindi 2025 Paper Code B

कक्षा 9वीं · हिंदी · 2025 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

हिन्दी का पहला समाचार-पत्र है—

(A) प्रजामित्र (B) उदन्त मार्तण्ड

(C) समाचार सुधा वर्षण (D) सरस्वती

उत्तर:

(B) उदन्त मार्तण्ड

व्याख्या: पंडित जुगलकिशोर शुक्ल द्वारा 1826 ई. में कलकत्ता से प्रकाशित 'उदन्त मार्तण्ड' हिन्दी का प्रथम समाचार-पत्र है।

प्रश्न 2.

'सुखसागर' के लेखक हैं—

(A) लल्लूलाल (B) मुंशी सदासुखलाल

(C) इंशा अल्लाखाँ (D) सदल मिश्र

उत्तर:

(B) मुंशी सदासुखलाल

व्याख्या: 'सुखसागर' की रचना मुंशी सदासुखलाल 'नियाज़' ने की थी।

प्रश्न 3.

भारतेन्दु युग से पूर्व के गद्य-लेखक हैं—

(A) राधाकृष्णन (B) बालमुकुन्द गुप्त

(C) राजा शिवप्रसाद 'सितारेहिन्द' (D) प्रताप नारायण मिश्र

उत्तर:

(C) राजा शिवप्रसाद 'सितारेहिन्द'

व्याख्या: राजा शिवप्रसाद 'सितारेहिन्द' भारतेन्दु-पूर्व युग के प्रमुख हिन्दी गद्य लेखक हैं।

प्रश्न 4.

वीरगाथाकाल के ग्रंथों को कहा जाता है—

(A) साखी (B) सबद (C) बीझुकार (D) रासो

उत्तर:

(D) रासो

व्याख्या: वीरगाथाकाल में रचित प्रबन्ध काव्य ग्रंथों को 'रासो' साहित्य (जैसे पृथ्वीराज रासो) कहा जाता है।

प्रश्न 5.

'कामायनी' की विधा है—

(A) खण्डकाव्य (B) कहानी-संग्रह (C) महाकाव्य (D) उपन्यास

उत्तर:

(C) महाकाव्य

व्याख्या: 'कामायनी' जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित हिन्दी का सुप्रसिद्ध महाकाव्य है।

प्रश्न 6.

'ज्ञानाश्रयी शाखा' के प्रमुख कवि हैं—

(A) तुलसीदास (B) सूरदास (C) बिहारी (D) कबीरदास

उत्तर:

(D) कबीरदास

व्याख्या: कबीरदास निर्गुण भक्ति धारा की ज्ञानाश्रयी (संत काव्य) शाखा के प्रमुख कवि हैं।

प्रश्न 7.

यातायात के लिखित संकेतों में सम्मिलित हैं—

(A) मील के पत्थर (B) होर्डिंग द्वारा दिशा-निर्देश

(C) गन्तव्यों का ज्ञान कराना (D) उपर्युक्त सभी

उत्तर:

(D) उपर्युक्त सभी

व्याख्या: मील के पत्थर, दिशा-निर्देशन और गन्तव्य स्थान की जानकारी देने वाले बोर्ड ये सभी लिखित यातायात संकेतों के अंतर्गत आते हैं।

प्रश्न 8.

यातायात संकेतों को कितनी श्रेणी में प्रदर्शित करते हैं—

(A) दो (B) तीन (C) चार (D) पाँच

उत्तर:

(B) तीन

व्याख्या: यातायात संकेतों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों (आदेशात्मक, चेतावनी और सूचनात्मक) में वर्गीकृत किया जाता है।

प्रश्न 9.

वीर रस का स्थायी भाव होता है—

(A) भय (B) आश्चर्य (C) ग्लानि (D) उत्साह

उत्तर:

(D) उत्साह

व्याख्या: वीर रस का स्थायी भाव 'उत्साह' होता है।

प्रश्न 10.

किस छन्द के सभी चरणों में एक समान 16-16 मात्राएँ होती हैं—

(A) रोला (B) बरवै (C) दोहा (D) चौपाई

उत्तर:

(D) चौपाई

व्याख्या: चौपाई एक सममात्रिक छन्द है, जिसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं।

प्रश्न 11.

वर्णों की एक से अधिक आवृत्ति में अलंकार होता है—

(A) यमक (B) अनुप्रास (C) श्लेष (D) उपमा

उत्तर:

(B) अनुप्रास

व्याख्या: जहाँ समान वर्णों की बार-बार आवृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

प्रश्न 12.

'औपचारिक' शब्द की सही वर्तनी है—

(A) औपचारिक (B) ओपनारौक (C) औपनचारिक (D) उपचारिक

उत्तर:

(A) औपचारिक

व्याख्या: व्याकरण की दृष्टि से 'उपचार + इक = औपचारिक' शुद्ध वर्तनी है।

प्रश्न 13.

'भाई' का तत्सम शब्द है—

(A) भाउ (B) भ्रात (C) भाय (D) भ्राता

उत्तर:

(D) भ्राता

व्याख्या: तद्भव शब्द 'भाई' का शुद्ध तत्सम रूप 'भ्राता' है।

प्रश्न 14.

'प्राचीन' शब्द का विलोम है—

(A) पुराना (B) नया (C) अर्वाचीन (D) नवजात

उत्तर:

(C) अर्वाचीन

व्याख्या: 'प्राचीन' (पुराना) का सही विलोम शब्द 'अर्वाचीन' (नवीन) होता है।

प्रश्न 15.

'गंगा' का विलोम शब्द है—

(A) सरयू (B) भागीरथी (C) माता (D) व्योम

उत्तर:

(D) व्योम

व्याख्या: विकल्पों में 'व्योम' (आकाश) शब्द भू-तल पर प्रवाहित 'गंगा' नदी के संदर्भ में सुदूर विपरीत प्राकृतिक तत्त्व को दर्शाता है।

प्रश्न 16.

तत्पुरुष समास में कौन-सा पद प्रधान होता है—

(A) दूसरा (B) पहला (C) दोनों (D) कोई नहीं

उत्तर:

(A) दूसरा

व्याख्या: तत्पुरुष समास में उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान होता है।

प्रश्न 17.

'राजर्षि' का सन्धि-विच्छेद होगा—

(A) रा + जर्षिः (B) राजा + ऋषि (C) राज + र्षिः (D) राज + ऋः

उत्तर:

(B) राजा + ऋषि

व्याख्या: राजा + ऋषि = राजर्षि (गुण स्वर सन्धि)।

प्रश्न 18.

'गंगा + उदकम्' में सन्धि होकर बनेगा—

(A) गंगेदकम् (B) गंगोदकम् (C) गंगुदकम् (D) गंगादकम्

उत्तर:

(B) गंगोदकम्

व्याख्या: आ + उ के मेल से 'ओ' बनता है, अतः 'गंगा + उदकम् = गंगोदकम्'।

प्रश्न 19.

'राम' शब्द का चतुर्थी विभक्ति, बहुवचन का रूप है—

(A) रामेभ्यः (B) रामैः (C) रामाभ्याम् (D) रामिभः

उत्तर:

(A) रामेभ्यः

व्याख्या: अकारान्त पुल्लिंग 'राम' शब्द का चतुर्थी विभक्ति बहुवचन रूप 'रामेभ्यः' बनता है।

प्रश्न 20.

'करोमि' किस धातु, लकार और वचन का रूप है—

(A) 'गम्' धातु, लोट्लकार, एकवचन (B) 'कृ' धातु, लट्लकार, एक वचन

(C) 'भू' धातु, लोट्लकार, एकवचन (D) 'कृ' धातु, विधिलिङ्लकार, द्विवचन

उत्तर:

(B) 'कृ' धातु, लट्लकार, एक वचन

व्याख्या: 'करोमि' कृ (करना) धातु के लट्लकार (वर्तमान काल) उत्तम पुरुष एकवचन का रूप है।

प्रश्न 21.

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

बात का तत्त्व समझना हर एक का काम नहीं है और दूसरों की समझ पर आधिपत्य जमा योग्य बात गढ़ सकना भी ऐसो-वैसों का साहस नहीं है। बड़े-बड़े विज्ञवरों तथा महा-महा कवीश्वरों के जीवन के बात के समझने में व्यतीत हो जाते हैं। सहृदयगण की बात आनन्द के आगे सारा संसार तुच्छ जँचता है। बालकों की तोतली बातें, सुन्दरियों की मीठी-मीठी बातें सत्कवियों की रसीली बातें सुवक्ताओं की प्रभावशाली बातें जिनके को और का और न कर दें उसे पशु नहीं पाषाण खण्ड कहना चाहिये।

प्रश्न—(अ) गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिये।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिये।

(स) ऐसे-वैसों का क्या साहस नहीं है?

उत्तर:

(अ) पाठ का नाम: बात

लेखक का नाम: प्रतापनारायण मिश्र

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या:

लेखक पंडित प्रतापनारायण मिश्र का कथन है कि नन्हे बालकों की तुतलाती निष्छल बातें, सुंदर स्त्रियों की मधुर बातें, श्रेष्ठ कवियों की रसमयी रचनाएँ और कुशल वक्ताओं के प्रभावशाली ओजस्वी भाषण ऐसे जादू के समान होते हैं जो श्रोता के चित्त को पूरी तरह बदल देते हैं। यदि कोई मनुष्य इन सरस बातों से प्रभावित और द्रवीभूत नहीं होता, तो वह पशुता से भी नीचे गिर चुका है; उसे सचेतन प्राणी न मानकर कठोर, चेतनाहीन पत्थर का टुकड़ा ही कहना चाहिए।

(स) दूसरों की बुद्धि और समझ पर अपना पूर्ण प्रभाव व आधिपत्य स्थापित कर सके, ऐसी प्रभावशाली एवं तत्त्वपूर्ण बात गढ़ना साधारण (ऐसे-वैसों) व्यक्तियों का काम नहीं है।

अथवा

यह कागभुशुण्डि भी विचित्र पक्षी है—एक साथ समादरित अनादरित, अति सम्मानित अति अवमानित। हमारे बेचारे पुरखे न गरुड़ के रूप में आ सकते हैं, न मयूर के, न हंस के। उन्हें पितरपक्ष में हमसे कुछ पाने के लिये काक बनकर ही अवतीर्ण होना पड़ता है। इतना ही नहीं, हमारे दूरस्थ प्रियजनों को भी अपने आने का मधु सन्देश इनके कर्कश स्वर में ही देना पड़ता है। दूसरी ओर हम कौआ और काँव-काँव करने के की अवमानना के अर्थ में ही प्रयुक्त करते हैं।

प्रश्न—(अ) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिये।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिये।

(स) कौआ हमारे समाज मे किस प्रकार समादरित है?

उत्तर:

(अ) पाठ का नाम: गिलू

लेखिका का नाम: महादेवी वर्मा

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या:

लेखिका महादेवी वर्मा कहती हैं कि भारतीय समाज में कौए की स्थिति अत्यंत विचित्र है। उसे एक ही समय पर अत्यधिक सम्मान और घोर अनादर दोनों प्राप्त होते हैं। जहाँ श्राद्ध पक्ष में उसे आदर से आमंत्रित किया जाता है, वहीं आम दिनों में उसकी कर्कश काँव-काँव के कारण उसे तिरस्कृत किया जाता है।

(स) कौआ हमारे समाज में इस प्रकार समादरित है क्योंकि हमारे दिवंगत पूर्वज पितृपक्ष में गरुड़, हंस या मोर बनकर नहीं आते; उन्हें तर्पण और भोजन प्राप्त करने के लिए कौआ बनकर ही धरती पर आना पड़ता है। इसके अलावा, दूर रहने वाले प्रियजनों के आगमन का शुभ संदेश भी कौए के माध्यम से ही प्राप्त समझा जाता है।

प्रश्न 22.

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिये—

बसौ मेरे नैनन में नन्दला।

मोहिन मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल॥

अधर सुधा रस मुरली राजति, उर बैंजंती माल॥

क्षुद्र घटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाला।

मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त बछल गोपाल॥

प्रश्न—(अ) प्रस्तुत पद्यांश की कवि और कविता का नाम लिखिये।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिये।

(स) 'सुधा' के दो पर्यायवाची शब्द लिखिये।

उत्तर:

(अ) कवयित्री का नाम: मीराबाई

कविता (शीर्षक) का नाम: पदावली

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या:

कवयित्री मीराबाई कहती हैं कि श्री कृष्ण के सुंदर होंठों पर अमृत-रस बरसाने वाली मुरली सुशोभित हो रही है और उनके विशाल वक्षस्थल पर वैजयंती के फूलों की माला शोभायमान है। उनकी कमर में बँधी करधनी की छोटी-छोटी घंटियाँ तथा चरणों में बँधे नूपुर (घुंघरू) अत्यंत रसमय एवं मधुर ध्वनि उत्पन्न कर रहे हैं।

(स) 'सुधा' के दो पर्यायवाची शब्द:

1. अमृत

2. पीयूष

अथवा

चारु चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल-थल में,

स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है, अवनि और अम्बर-तल में।

पुलक प्रकट करती है, धरती है, हरित तृणों की नोको से,

मानो झूम रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से॥

प्रश्न—(अ) कवि और कविता का नाम लिखिये।

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिये।

(स) धरती किस माध्यम से अपना पुलक प्रकट कर रही है?

उत्तर:

(अ) कवि का नाम: मैथिलीशरण गुप्त

कविता का नाम: पंचवटी

(ब) रेखांकित अंश की व्याख्या:

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पंचवटी की सुंदर प्राकृतिक रात का वर्णन करते हुए कहते हैं कि चंद्रमा की सुंदर चंचल किरणें जल और थल में सर्वत्र क्रीड़ा कर रही हैं। पृथ्वी से लेकर संपूर्ण आकाश-मण्डल तक निर्मल, स्वच्छ चाँदनी की चादर बिछी हुई है।

(स) धरती हरी-भरी घास के तिनकों की नोकों के माध्यम से अपनी प्रसन्नता और पुलक (रोमांच) प्रकट कर रही है।

प्रश्न 23.

(क)

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिये—

विपिनः धर्मदाः सम्पत्तिम् अभिलषन् वर्षम् एकं यथोक्तम् अनुष्ठानम् अकरोत्। नित्यं प्रातः जागरणेन तस्य स्वास्थ्यम् अवर्धत। तेन नियमेन पोषिताः पशवः स्वस्थाः, सबलाः, च जाताः, गावः महिष्यः च प्रचुरं दुग्धम् अयच्छन्। तदानी तस्य कर्मकाराः अपि कृषिकार्ये सन्नद्धाः अभवन्। अतः तस्मिन् वर्षे क्षेत्रेषु प्रभूतम् अन्नम् उत्पन्नं गृह च धनधान्यपूर्णं जातम्।

अथवा

परमसिद्धोऽपिसः सिद्धीनां प्रदर्शनं नोचितम् अमन्यत् एकदा केन चित् भक्तेन कस्मिश्चित् महिमा एव वर्णितः "असौ महात्मा पादुकाभ्यां नदीं तरति इति महता विस्मयस्य विषयः।" परमहंसः रामकृष्णः मन्दम् अहसत् अवदत् च "अस्याः सिद्धेः मूल्यं पणद्वयमात्रम्, पणद्वयेन नौक्या सामान्यो न जनः नदीं तरति। अनया सिद्ध्या केवलं पणद्वयस्य लाभो भवति। किं प्रयोजनम् एतादृशाः सिद्धेः प्रदर्शनेन।"

उत्तर:

(प्रथम गद्यांश का सन्दर्भ एवं अनुवाद)

सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिन्दी' के संस्कृत खण्ड के 'पुरुषार्थः' (सदाचारः) नामक पाठ से गृहीत है।

अनुवाद: विपिन ने धर्म से प्राप्त धन-सम्पत्ति की इच्छा रखते हुए एक वर्ष तक नियमानुसार अनुष्ठान (कठिन परिश्रम) किया। प्रतिदिन प्रातःकाल समय से जागने के कारण उसका स्वास्थ्य उत्तम हो गया। उसके द्वारा नियमपूर्वक पाले-पोसे गए पशु स्वस्थ और बलवान हो गए; गायों तथा भैंसों ने प्रचुर मात्रा में दूध दिया। उस समय उसके मज़दूर एवं सेवक भी कृषि-कार्य में पूरी तत्परता से लग गए। अतः उस वर्ष उसके खेतों में अत्यधिक अन्न उत्पन्न हुआ और उसका घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया।

अथवा

(द्वितीय गद्यांश का सन्दर्भ एवं अनुवाद)

सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'परमहंसः रामकृष्णः' नामक पाठ से उद्धृत है।

अनुवाद: परम सिद्ध होते हुए भी वे (रामकृष्ण परमहंस) अपनी सिद्धियों का प्रदर्शन करना उचित नहीं मानते थे। एक बार किसी भक्त ने किसी महात्मा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा— "वे महात्मा खड़ाऊँ पहनकर नदी तैरकर पार कर जाते हैं, यह बड़े आश्चर्य की बात है।" यह सुनकर परमहंस रामकृष्ण धीरे से मुस्कुराए और बोले— "इस सिद्धि का मूल्य केवल दो पैसे है। दो पैसे देकर तो कोई भी सामान्य व्यक्ति नाव से नदी पार कर लेता है। इस सिद्धि से केवल दो पैसे का ही लाभ होता है। ऐसी व्यर्थ सिद्धि का प्रदर्शन करने का क्या प्रयोजन?"

प्रश्न 23.

(ख)

निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित अर्थ लिखिये।

प्रजापतिसमः श्रीमान् धाता रिपुनिषदनः।

रक्षिता जीवलोकस्य धर्मस्य परिरक्षिता॥

अथवा

अक्रोधेन जयेत् क्रोधमसाधुं साधुना जयेत्।

जयेत् कदर्यं दानेन जयेत् सत्येन चानृतम्॥

उत्तर:

(प्रथम पद्यांश का सन्दर्भ एवं अर्थ)

सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'पुरुषोत्तमः रामः' नामक पाठ से उद्धृत है।

अर्थ: श्रीराम प्रजापति (ब्रह्मा) के समान समस्त प्रजा का पालन करने वाले, कान्तिमान, संसार को धारण करने वाले, शत्रुओं का नाश करने वाले, समस्त जीव-लोक की रक्षा करने वाले तथा सनातन धर्म की विशेष रूप से रक्षा करने वाले हैं।

अथवा

(द्वितीय पद्यांश का सन्दर्भ एवं अर्थ)

सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'सुभाषितरत्नानि' नामक पाठ से उद्धृत है।

अर्थ: मनुष्य को अक्रोध (शान्ति एवं सहनशीलता) से क्रोध को जीतना चाहिए, दुष्टता को सज्जनता से जीतना चाहिए, कंजूस को दान से जीतना चाहिए और असत्य (झूठ) को सत्य से जीतना चाहिए।

प्रश्न 24.

'लक्ष्मी का स्वागत' एकांकी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिये।

अथवा

'नए मेहमान' की कथावस्तु (कथानक) अपने शब्दों में लिखिये।

उत्तर:

'लक्ष्मी का स्वागत' एकांकी के प्रमुख पात्र 'रोशन' का चरित्र-चित्रण:

उपेन्द्रनाथ 'अश्क' द्वारा रचित 'लक्ष्मी का स्वागत' एकांकी का मुख्य पात्र रोशन है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नवत् हैं:

1. सच्चा एवं स्नेही पिता: रोशन अपने बीमार पुत्र सुरेन्द्र से अगाध स्नेह करता है। वह अपने बेटे का जीवन बचाने के लिए डॉक्टरों और दवाओं का प्रबन्ध करने में जी-जान लगा देता है।

2. कुरीतियों एवं दहेज-प्रथा का विरोधी: रोशन पुरानी संकीर्ण मान्यताओं और दहेज-लोभी मानसिकता का प्रबल विरोधी है। पत्नी की मृत्यु के तुरंत बाद दूसरा विवाह कराने के माता-पिता के प्रस्ताव को वह दृढ़तापूर्वक ठुकरा देता है।

3. वेदना व मानसिक द्वंद्व से घिरा नवयुवक: रोशन अपनी स्वर्गीय पत्नी के वियोग में दुःखी है और साथ ही अपने इकलौते बीमार बच्चे के जीवन को लेकर अत्यंत चिंतित और असहाय स्थिति में है।

4. पारिवारिक संवेदनहीनता से पीड़ित: उसके माता-पिता बीमार बच्चे का इलाज कराने के बजाय रोशन के दूसरे विवाह और दहेज (लक्ष्मी) के स्वागत की चिंता करते हैं, जिससे रोशन का हृदय आहत होता है।

अथवा

'नए मेहमान' एकांकी की कथावस्तु (कथानक):

कन्हैयालाल प्रभाकर द्वारा रचित 'नए मेहमान' एकांकी में आधुनिक महानगरों में रहने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों की आवास समस्या और बिना पूर्व सूचना के आ जाने वाले अपरिचित अतिथियों से उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों का जीवंत एवं व्यंग्यात्मक चित्रण किया गया है।

विश्वनाथ अपने परिवार के साथ एक छोटे से दो कमरों के मकान में रहते हैं। भीषण गर्मी की रात में जब पूरा परिवार थका-हारा सोने की तैयारी कर रहा होता है, तभी अचानक दो अपरिचित मेहमान (बाबू नन्हेमल और उनका भांजा) आ धमकते हैं। वे गलत पते पर विश्वनाथ के घर पहुँचते हैं और उन्हें अपना परिचित समझकर सहजता से बैठ जाते हैं। विश्वनाथ की पत्नी किरण और बच्चे भोजन एवं सोने की जगह के अभाव के कारण बेहद परेशान हो जाते हैं। विश्वनाथ आतिथ्य-धर्म का पालन करने का प्रयास करते हैं। अंत में, जब मेहमानों को अहसास होता है कि वे गलत मकान में आ गए हैं, तब वे चले जाते हैं। यह एकांकी एकाएक उत्पन्न हुई अव्यवस्था को बड़े ही रोचक और यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 25.

(क)

निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना लिखिये—

(a) रवीन्द्रनाथ टैगोर (b) महादेवी वर्मा (c) धर्मवीर भारती

उत्तर:

लेखक: डॉ. धर्मवीर भारती

जीवन-परिचय:

आधुनिक हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसम्बर 1926 ई. को प्रयागराज (इलाहाबाद) के अतरसुइया मोहल्ले में हुआ था। इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। कुछ समय तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करने के पश्चात इन्होंने मुंबई से प्रकाशित प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' का वर्षों तक कुशल संपादन किया। 4 सितम्बर 1997 ई. को इस महान साहित्यकार का निधन हो गया।

प्रमुख रचना:

गुनाहों का देवता (उपन्यास)।

प्रश्न 25.

(ख)

निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना लिखिये—

(a) कबीरदास (b) मैथिलीशरण गुप्त (c) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

उत्तर:

कवि: संत कबीरदास

जीवन-परिचय:

भक्ति काल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि संत कबीरदास का जन्म संवत् 1455 (सन 1398 ई.) में काशी में हुआ था। किंवदंती के अनुसार एक विधवा ब्राह्मणी ने लोक-लाज के भय से इन्हें लहरतारा ताल के पास छोड़ दिया था, जहाँ से नीरू और नीमा नामक जुलाहा दम्पत्ति ने इन्हें लाकर इनका पालन-पोषण किया। कबीरदास निरक्षर थे, किंतु स्वामी रामानंद के शिष्य बनकर इन्होंने उच्च ज्ञान और भक्ति प्राप्त की। इन्होंने समाज में फैले बाह्याचारों, जाति-पांति और अंधविश्वासों का जमकर विरोध किया। संवत् 1575 (सन 1518 ई.) में मगहर में इनका निधन हुआ।

प्रमुख रचना:

बीजक (साखी, सबद और रमैनी का संकलन)।

प्रश्न 26.

अपनी पाठ्य पुस्तक से याद किया हुआ कोई एक श्लोक लिखिये, जो इस प्रश्न पत्र में न दिया गया हो।

उत्तर:

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥

प्रश्न 27.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों का उत्तर संस्कृत में दीजिये—

(a) रामदासः कुत्र निवसति ?

(b) कीदृशं मार्गः सर्वोत्तम भवति।

(c) कंस कीदृशः शासकः आसीत् ?

(d) सज्जनाः के भवन्ति ?

उत्तर:

(a) रामदासः नारायणपुरे निवसति।

(c) कंसः अत्याचारी शासकः आसीत्।

प्रश्न 28.

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों में से किसी एक का अर्थ बताते हुये अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिये—

(a) उल्टी गंगा बहाना (b) नौ-दो ग्यारह होना

(c) अपना हाथ जगन्नाथ (d) चोर-चोर मौसेरे भाई

उत्तर:

(b) नौ-दो ग्यारह होना

अर्थ: भाग जाना।

वाक्य प्रयोग: पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनते ही सभी चोर सामान छोड़कर नौ-दो ग्यारह हो गए।

प्रश्न 29.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिये—

(a) विनय सदाचार से उत्पन्न होता है।

(b) माता-पिता का आदर करो।

(c) तालाब में कमल खिलते हैं।

(d) नेहा कल विद्यालय जायेगी।

उत्तर:

(a) विनयः सदाचारात् सम्भवति (उत्पद्यते)।

(d) नेहा श्वः विद्यालयम् गमिष्यति।

प्रश्न 30.

अपने प्रधानाचार्य जी को स्थानान्तरण प्रमाण पत्र (टी. सी.) हेतु एक प्रार्थना पत्र लिखिये।

अथवा

स्वयं बीमार पड़ने पर अवकाश हेतु अपने प्रधानाचार्य जी को एक प्रार्थना पत्र लिखिये।

उत्तर:

स्थानान्तरण प्रमाण पत्र (टी. सी.) हेतु प्रार्थना पत्र:

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय,

राजकीय इण्टर कॉलेज,

मेरठ।

महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि मेरे पिता जी का सरकारी सेवा से स्थानान्तरण मेरठ से लखनऊ हो गया है। हमारा पूरा परिवार अब लखनऊ में ही स्थायी रूप से निवास करेगा। मेरी आगे की शिक्षा भी अब लखनऊ के ही किसी विद्यालय में संपन्न होगी।

अतः आपसे नम्र प्रार्थना है कि मुझे विद्यालय का स्थानान्तरण प्रमाण पत्र (टी. सी.) तथा चरित्र प्रमाण पत्र निर्गत करने की कृपा करें, ताकि मैं नए विद्यालय में समय पर प्रवेश प्राप्त कर सकूँ।

इसके लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।

दिनांक: 15 मार्च 2025

आपका आज्ञाकारी शिष्य,

रोहन कुमार

कक्षा: 9 'अ'

अनुक्रमांक: 12