व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियों के प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ हैं, अतः यह चौपाई छन्द है।
प्रश्न 12.
'चारु चन्दर की चंचल किरणें।' में कौन-सा अलंकार है?
(A) अनुप्रास अलंकार
(B) रूपक अलंकार
(C) यमक अलंकार
(D) श्लेष अलंकार
उत्तर:
(A) अनुप्रास अलंकार
व्याख्या: इसमें 'च' वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।
प्रश्न 13.
सही वर्तनी का चयन कीजिए—
(A) संहार
(B) सनहार
(C) समहार
(D) संचार
उत्तर:
(A) संहार
व्याख्या: 'संहार' शब्द व्याकरणिक रूप से शुद्ध वर्तनी है।
प्रश्न 14.
'किरपा' शब्द का तत्सम है—
(A) कृपा
(B) क्रपा
(C) क्रिपा
(D) दया
उत्तर:
(A) कृपा
व्याख्या: 'किरपा' तद्भव रूप है और इसका संस्कृत/तत्सम रूप 'कृपा' है।
प्रश्न 15.
'अथ' का विलोम है—
(A) बाद
(B) अन्त
(C) इति
(D) शुरू
उत्तर:
(C) इति
व्याख्या: 'अथ' (आरम्भ) का विपरीतार्थक/विलोम शब्द 'इति' (समाप्त) होता है।
प्रश्न 16.
निम्न में अमृत का पर्यायवाची नहीं है—
(A) पीयूष
(B) सुधा
(C) अहं
(D) अमिय
उत्तर:
(C) अहं
व्याख्या: पीयूष, सुधा और अमिय अमृत के पर्यायवाची हैं, जबकि 'अहं' का अर्थ अहंकार होता है।
प्रश्न 17.
'नवरत्न' में समास है—
(A) द्विगु
(B) द्वन्द्व
(C) कर्मधारय
(D) बहुव्रीहि
उत्तर:
(A) द्विगु
व्याख्या: 'नवरत्न' (नौ रत्नों का समाहार) में प्रथम पद संख्यावाचक होने के कारण द्विगु समास है।
प्रश्न 18.
'प्रत्युपकार' में सन्धि है—
(A) यण् सन्धि
(B) वृद्धि सन्धि
(C) अयादि सन्धि
(D) दीर्घ सन्धि
उत्तर:
(A) यण् सन्धि
व्याख्या: प्रति + उपकार = प्रत्युपकार (इ + उ = यु), अतः यण् सन्धि है।
प्रश्न 19.
'रामाणाम्' शब्द में विभक्त एवं वचन है—
(A) द्वितीया विभक्ति, एकवचन
(B) तृतीया विभक्ति, एकवचन
(C) षष्ठी विभक्ति, बहुवचन
(D) सप्तमी विभक्ति, बहुवचन
उत्तर:
(C) षष्ठी विभक्ति, बहुवचन
व्याख्या: 'राम' शब्द रूप का षष्ठी विभक्ति, बहुवचन रूप 'रामाणाम्' होता है।
प्रश्न 20.
'गच्छेत्' किस लकार का रूप है?
(A) लट् लकार
(B) विधिलिङ्ग लकार
(C) लृट् लकार
(D) लोट् लकार
उत्तर:
(B) विधिलिङ्ग लकार
व्याख्या: 'गच्छेत्' गम (गच्छ्) धातु के विधिलिङ्ग लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है।
प्रश्न 21.
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
किसी का दिल दिखाए बिना, किसी पर आघात किए बिना, कुसंस्कारों को छिन्न करने को शक्ति रखने वाला, नई संजीवनी धारा से प्राणिमात्र को उल्लसित करने वाला यह संत मध्यकाल की ज्योतिष्क मण्डली में अपनी निराली शोभा से शरत् पूर्णिमा के पूर्णचन्दर की तरह ज्योतिष्मान् है।
आज उसकी याद आए बिना नहीं रह सकती। वह सब प्रकार से लोकोत्तर है उसका उपचार प्रेम और मैत्री है। उसका शास्त्र सहानुभूति और हित-चिन्ता है।
(क) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(ग) गुरु नानक के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
(क) पाठ का नाम: गुरु नानकदेव
लेखक का नाम: हजारीप्रसाद द्विवेदी
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक का कथन है कि संत गुरु नानकदेव जी का व्यक्तित्व अलौकिक और असाधारण था। उनके कार्य करने का ढंग मानवीय प्रेम पर आधारित था। वे समाज की बुराइयों को दूर करने के लिए किसी प्रकार के बल या हिंसा का प्रयोग नहीं करते थे। उनका एकमात्र साधन निष्कपट प्रेम, मैत्रीभाव, सहानुभूति तथा प्राणिमात्र के कल्याण की भावना थी।
(ग) गुरु नानकदेव जी के चरित्र की विशेषताएँ:
1. वे किसी का हृदय दुखाए बिना तथा बिना किसी पर प्रहार किए कुसंस्कारों को समाप्त करने में समर्थ थे।
2. उनका सम्पूर्ण जीवन प्रेम, भ्रातृभाव, सहानुभूति तथा प्राणिमात्र के हित-चिन्तन से ओत-प्रोत था।
प्रश्न 22.
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना,
उसके सम्मुख स्वच्छ शिला पर, धीर वीर निर्भीक मना,
जाग रहा यह कौन धनुर्धर, जबकि भुवन-भर सोता है?
भोगी कुसुमायुध योगी-सा, बना दृष्टिगत होता है।
(क) प्रस्तुत पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(ग) 'पंचवटी' और 'धनुर्धर' में कौन-सा समास है?
उत्तर:
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य-खण्ड में संकलित तथा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'पंचवटी' शीर्षक कविता से उद्धृत है।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या: कवि कहते हैं कि इस अर्द्धरात्रि के समय, जब सम्पूर्ण संसार गहरी नींद में सो रहा है, उस समय धनुष-बाण धारण किए हुए यह कौन पराक्रमी वीर पुरुष पहरा दे रहा है? यह अनुपम सुदर्शन पुरुष देखने में कामदेव के समान अति सुंदर एवं समस्त सुखों को भोगने योग्य जान पड़ता है, किन्तु इस समय वह किसी तपस्वी योगी की तरह एकाग्रचित्त और सजग होकर कर्तव्य-पथ पर डटा हुआ है।
(ग) 'पंचवटी' में द्विगु समास (पाँच वट वृक्षों का समूह) है तथा 'धनुर्धर' में बहुव्रीहि समास (धनुष को धारण करने वाला अर्थात् लक्ष्मण) है।
प्रश्न 23.
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए—
(ख) निम्नलिखित में से किसी एक श्लोक की सन्दर्भ-सहित हिन्दी में व्याख्या कीजिए—
वृत्तं यत्नेन संरक्षेत्, वित्तमायाति याति च।
अक्षीणो वित्ततः, क्षीणो, वृत्तस्तु हतोहतः॥
उत्तर:
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'परमहंसः रामकृष्णः' पाठ से गृहीत है।
अनुवाद: रामकृष्ण एक विलक्षण महापुरुष हुए। उनके विषय में महात्मा गान्धी ने कहा था—“परमहंस रामकृष्ण का जीवन-चरित्र धर्माचरण का व्यावहारिक विवरण है। उनका जीवन हमें ईश्वर के दर्शन की शक्ति प्रदान करता है। उनके वचन न केवल किसी के नीरस ज्ञान-वचन हैं, अपितु उनके जीवन-रूपी ग्रन्थ के पृष्ठ ही हैं। उनका जीवन अहिंसा का साक्षात् पाठ है।”
(ख) सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'सदाचारः' पाठ से उद्धृत है।
अनुवाद / व्याख्या: मनुष्य को अपने चरित्र की यत्नपूर्वक रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि धन तो आता है और चला जाता है। धन के नष्ट होने पर मनुष्य नष्ट नहीं माना जाता, किन्तु चरित्र नष्ट हो जाने पर मनुष्य पूर्णतः मृत समान हो जाता है।
प्रश्न 24.
'व्यवहार' एकांकी के प्रमुख युवा पात्र 'क्रान्तिचन्दर' का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर:
'व्यवहार' एकांकी के प्रमुख पात्र क्रान्तिचन्द्र का चरित्र-चित्रण:
सेठ गोविंददास द्वारा रचित 'व्यवहार' एकांकी में क्रान्तिचन्द्र एक प्रमुख एवं चेतन युवा पात्र है। उसकी चरित्रगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. आधुनिक एवं प्रगतिशील विचारों का युवक: क्रान्तिचन्द्र आधुनिक शिक्षा प्राप्त नवयुवक है। वह सामाजिक दिखावे, ढोंग और खोखले शिष्टाचार का कड़ा विरोधी है।
2. स्पष्टवादी एवं निर्भीक: वह अपनी बात को बेझिझक तथा निर्भीकता से प्रकट करता है। वह अपने मामा जी के कृत्रिम व्यवहार की निडरतापूर्वक आलोचना करता है।
3. बनावटीपन का विरोधी: क्रान्तिचन्द्र का मानना है कि मानव-व्यवहार में दिखावा या चाटुकारिता नहीं होनी चाहिए, बल्कि हृदय की सच्ची आत्मीयता होनी चाहिए।
4. आत्मीयता और प्रेम का पोषक: वह दिखावटी शिष्टाचार के स्थान पर वास्तविक प्रेम, सहानुभूति और आपसी सद्भाव को ही सच्चा व्यवहार मानता है।
प्रश्न 25.
(क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय एवं उनकी एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए—
(i) महादेवी वर्मा
(ii) धर्मवीर भारती
(iii) रवीन्दरनाथ टैगोर
(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय एवं उनकी एक प्रमुख रचना का नाम लिखिए—
(i) जयशंकर प्रसाद
(ii) मैथिलीशरण गुप्त
(iii) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
उत्तर:
(क) लेखक का जीवन-परिचय: धर्मवीर भारती
जीवन-परिचय: डॉ० धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसम्बर 1926 ई० को प्रयागराज (इलाहाबाद) के अतरसुइया मोहल्ले में हुआ था। इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम० ए० तथा पी-एच० डी० की उपाधि प्राप्त की। ये प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के कई वर्षों तक यशस्वी सम्पादक रहे। भारती जी ने निबन्ध, उपन्यास, काव्य, नाटक तथा कहानी जैसी विविध विधाओं में मौलिक साहित्य का सृजन किया। 4 सितम्बर 1997 ई० को इनका देहावसान हो गया।
प्रमुख रचना: 'गुनाहों का देवता' (उपन्यास)।
(ख) कवि का जीवन-परिचय: जयशंकर प्रसाद
जीवन-परिचय: छायावाद के प्रवर्तक महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई० में वाराणसी के प्रसिद्ध 'सुँघनी साहू' परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवीप्रसाद था। प्रसाद जी ने घर पर ही संस्कृत, हिन्दी, फ़ारसी और अंग्रेजी का गहन अध्ययन किया। इनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। अल्पायु में ही सन् 1937 ई० में क्षयरोग से पीड़ित होकर इनका स्वर्गवास हो गया।
प्रमुख रचना: 'कामायनी' (महाकाव्य)।
प्रश्न 26.
अपनी पाठ्य पुस्तक से कण्ठस्थ किया हुआ एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।
उत्तर:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए—
(i) कः वेदवेदाङ्गः तत्त्वज्ञः आसीत् ?
(ii) कस्य संसर्गः त्यजेत् ?
(iii) रामकृष्णस्य कः महान् सन्देशः ?
(iv) देवकी का आसीत् ?
उत्तर:
(i) श्रीरामः वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञः आसीत्।
(iv) देवकी श्रीकृष्णस्य माता आसीत्।
प्रश्न 28.
निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्ति में से किसी एक का अर्थ बताते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए—
(i) दुम दबाकर भागना।
(ii) दंग रह जाना।
(iii) दाँत खट्टे करना।
(iv) फूँक-फूँककर कदम रखना।
उत्तर:
(iii) दाँत खट्टे करना।
अर्थ: परास्त करना / बुरी तरह हराना।
वाक्य प्रयोग: भारतीय वीरों ने युद्धक्षेत्र में शत्रुओं के दाँत खट्टे कर दिए।
प्रश्न 29.
निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए—
(i) मैं सत्य बोलूँगा।
(ii) तुम क्यों रोते हो।
(iii) मैंने कल सर्प देखा।
(iv) विद्यालय के बगीचे में फूल है।
उत्तर:
(i) अहम् सत्यम् वदिष्यामि।
(ii) त्वम् किमर्थम् रोदिषि ?
प्रश्न 30.
अपने प्रधानाचार्य को आकस्मिक अवकाश हेतु एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय इण्टर कॉलेज,
उत्तर प्रदेश।
विषय: आकस्मिक अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि आज प्रातःकाल अचानक मेरा स्वास्थ्य अत्यधिक ख़राब हो गया है। मुझे तीव्र ज्वर हो जाने के कारण डॉक्टर ने विश्राम करने का परामर्श दिया है। अतः मैं आज विद्यालय आने में असमर्थ हूँ।
अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे आज का एक दिन का आकस्मिक अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।