यूपी बोर्ड कक्षा - 9 हिन्दी वार्षिक परीक्षा 2024
(पेपर कोड - C)
सम्पूर्ण हल (Solution)
खण्ड - 'अ' (बहुविकल्पीय प्रश्न)
UP Board Class 9 Hindi 2024 Paper Code C
कक्षा 9वीं · हिंदी · 2024 · बोर्ड परीक्षा
यूपी बोर्ड कक्षा - 9 हिन्दी वार्षिक परीक्षा 2024
(पेपर कोड - C)
सम्पूर्ण हल (Solution)
खण्ड - 'अ' (बहुविकल्पीय प्रश्न)
भारतेन्दु युग के प्रसिद्ध कहानीकार हैं-
(i) राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह (ii) विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक'
(iii) जयशंकर प्रसाद (iv) अम्बिकादत्त व्यास
उत्तर:
(iv) अम्बिकादत्त व्यास
'द्विवेदी युग' का नामकरण हुआ है-
(i) महावीरप्रसाद द्विवेदी के नाम पर (ii) हजारीप्रसाद द्विवेदी के नाम पर
(iii) जयशंकरप्रसाद के नाम पर (iv) रामकुमार वर्मा के नाम पर
उत्तर:
(i) महावीरप्रसाद द्विवेदी के नाम पर
'कवि-वचन सुधा' के सम्पादक थे-
(i) प्रतापनारायण मिश्र (ii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(iii) प्रेमचन्द (iv) बालकृष्ण भट्ट
उत्तर:
(ii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
'मन्त्र' कहानी के कहानीकार हैं-
(i) महादेवी वर्मा (ii) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(iii) कमलेश्वर (iv) प्रेमचन्द
उत्तर:
(iv) प्रेमचन्द
हिन्दी का प्रथम महाकाव्य है-
(i) खुमान रासो (ii) साहित्य लहरी
(iii) पृथ्वीराज रासो (iv) साकेत
उत्तर:
(iii) पृथ्वीराज रासो
'बीजक' रचनाओं का संकलन है-
(i) मंझन (ii) गुरुनानक
(iii) रामानन्द (iv) कबीर
उत्तर:
(iv) कबीर
हिन्दी-साहित्य के किस काल को 'पूर्व मध्यकाल' कहा जाता है-
(i) आदिकाल (ii) भक्तिकाल
(iii) रीतिकाल (iv) आधुनिक काल
उत्तर:
(ii) भक्तिकाल
आदिकाल का ग्रन्थ नहीं है-
(i) कीर्तिलता (ii) बीसलदेव रासो
(iii) आल्हखण्ड (iv) पदमावत
उत्तर:
(iv) पदमावत
'सूरसागर' के रचनाकार हैं-
(i) तुलसीदास (ii) कबीरदास
(iii) सूरदास (iv) जायसी
उत्तर:
(iii) सूरदास
निम्नांकित में रामभक्तिशाखा के कवि कौन नहीं है-
(i) तुलसीदास (ii) चतुर्भुजदास
(iii) अग्रदास (iv) नाभादास
उत्तर:
(ii) चतुर्भुजदास
जहाँ पर शब्दों की पुनरावृत्ति हो और उनके अर्थ भी अलग-अलग हों, वहाँ पर अलंकार होता है-
(i) श्लेष (ii) उपमा
(iii) उत्प्रेक्षा (iv) यमक
उत्तर:
(iv) यमक
किस समास में पूर्वपद अव्यय होता है-
(i) कर्मधारय समास (ii) द्विगु समास
(iii) तत्पुरुष समास (iv) अव्ययीभाव समास
उत्तर:
(iv) अव्ययीभाव समास
अर्द्धविराम चिन्ह है-
(i) (:) (ii) (;)
(iii) (,) (iv) (!)
उत्तर:
(ii) (;)
'कुक्कुर' शब्द का तद्भव है-
(i) कुकर (ii) कुकर्म
(iii) कुत्ते (iv) कार्य
उत्तर:
(iii) कुत्ते
'अस्त' का विलोम शब्द है-
(i) निकलना (ii) उगना
(iii) चमकना (iv) उदय
उत्तर:
(iv) उदय
'कनक' शब्द किसका पर्यायवाची नहीं है-
(i) सोना (ii) चाँदी
(iii) गेहूँ (iv) धतूरा
उत्तर:
(ii) चाँदी
'शीतर्तुः' का सन्धि-विच्छेद होगा-
(i) शीतः+तुः (ii) शीत+रतुः
(iii) शी+तर्तुः (iv) शीत ऋतुः
उत्तर:
(iv) शीत + ऋतुः
'हरौ' में विभक्ति और वचन है-
(i) प्रथमा विभक्ति, एकवचन (ii) प्रथमा विभक्ति, बहुवचन
(iii) सप्तमी विभक्ति, एकवचन(iv) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन
उत्तर:
(iii) सप्तमी विभक्ति, एकवचन
'गच्छेयुः' किस लकार का रूप है-
(i) लट् लकार (ii) लोट् लकार
(iii) विधिलिङ् लकार (iv) लङ् लकार
उत्तर:
(iii) विधिलिङ् लकार
'गम्' धातु, लट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप है-
(i) गच्छति (ii) गच्छामि
(iii) गच्छसि (iv) गच्छेत्
उत्तर:
(ii) गच्छामि
खण्ड - 'ब' (वर्णनात्मक प्रश्न)
गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर:
(क) गद्यांश: "हमारे देश में बहुतेरे सामाजिक नेता हैं जो समाज-सुधार के नाम पर केवल कोरा उपदेश ही दिया करते हैं..."
उत्तर:
i) रेखांकित अंश की व्याख्या:
'वास्तव में सामाजिक कार्य उपदेश से नहीं, कार्य-रूप में परिणत करने से सिद्ध होता है।'
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि केवल बड़ी-बड़ी बातें या उपदेश देने से समाज का कल्याण या सुधार नहीं होता। सच्चा समाज-सुधार वही है जब दिए गए उपदेशों को स्वयं अपने आचरण और व्यावहारिक जीवन में उतारा जाए।
ii) उपदेश सुनने वाले संगीत प्रेमी की स्थिति कैसी होती है ?
उत्तर: उपदेश सुनने वाले संगीत प्रेमी की स्थिति उस श्रोता के समान होती है जो संगीत सुनते समय तो आनंद में लीन हो जाता है, परंतु संगीत समाप्त होते ही सब कुछ भूल जाता है और उसके जीवन में कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं आता।
iii) भरने वाला युवक कौन था ?
उत्तर: प्रस्तुत पाठ्यांश के अनुसार, उपदेशों से परे हटकर वास्तविक रूप से कार्य करने में विश्वास रखने वाला युवक एक निष्ठावान समाज-सेवी था।
-- अथवा --
गद्यांश: "वही हरा-भरा मैदान था, वही सुनहरी चाँदनी एक निःशब्द संगीत की भाँति प्रकृति पर छाई हुई थी..."
उत्तर:
i) पाठ और लेखक का नाम:
पाठ का नाम: मन्त्र
लेखक का नाम: मुंशी प्रेमचन्द
ii) चाँदनी के निःशब्द संगीत के छाने का आशय:
आशय: चारों तरफ बिखरी सुनहरी चाँदनी प्रकृति में एक अत्यंत शांत, नीरव और मधुर संगीत का आभास करा रही थी।
iii) हास्य की ध्वनि के स्थान पर करूण-क्रन्दन और अश्रु-प्रवाह क्यों था ?
उत्तर: क्योंकि डॉ. चड्ढा के पुत्र कैलाश को जहरीले साँप ने काट लिया था, जिससे उत्सव की खुशियाँ शोक और चीख-पुकार में बदल गईं।
पद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर:
पद्यांश: "पांयो जी मैं तो राम रतन धन पायो..."
उत्तर:
i) मीरा ने कौन-सा धन प्राप्त किया है ?
उत्तर: मीरा ने 'राम-रत्न' (ईश्वर भक्ति रूपी अनमोल रत्न) रूपी धन प्राप्त किया है।
ii) मीरा को सतगुरु ने कौन-सी अनमोल वस्तु दी है और उसका उन्होंने क्या किया ?
उत्तर: सतगुरु ने मीरा को राम-नाम रूपी अनमोल ज्ञान/भक्ति दी है, जिसे मीरा ने गुरु की विशेष कृपा मानकर सहर्ष अपना लिया है।
iii) भवसागर को तरने का मीरा के पास कौन-सा साधन है ?
उत्तर: भवसागर से पार उतरने के लिए मीरा के पास उनके सतगुरु द्वारा खेई जाने वाली 'सत्य की नाव' (राम-नाम भक्ति) रूपी साधन है।
-- अथवा --
पद्यांश: "माँ जल दे, कुछ प्यासे होंगे, क्या बैठी कर रही यहाँ ?..."
उत्तर:
i) सूना मंडप मुखर कैसे हो गया ?
उत्तर: बालिका (इड़ा/मानव) की करुणाभरी एवं वात्सल्यपूर्ण पुकार से सूना मंडप गूँज उठा।
ii) जंगल में छोटा सा परिवार कैसे बन गया ?
उत्तर: श्रद्धा, मानव और इड़ा के मिलन तथा आपसी आत्मीयता एवं प्रेम के कारण निर्जन स्थान में भी एक छोटा सा परिवार बन गया।
iii) 'श्रद्धा का संगीत बना' का क्या आशय है ?
उत्तर: इसका आशय यह है कि श्रद्धा के वचनों और उसकी उपस्थिति से वातावरण में अपूर्व शांति, मधुरता और आनंदमयी संगीत का संचार हो गया।
संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित हिन्दी अनुवाद:
गद्यांश 1: "परमहंसस्य रामकृष्णस्य जीवनचरितं धर्मचरणस्य प्रायोगिकं विवरणं विद्यते..."
संदर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'परमहंसः रामकृष्णः' नामक पाठ से उद्धृत है।
अनुवाद:
परमहंस रामकृष्ण का जीवन-चरित धर्म के आचरण का व्यावहारिक (प्रायोगिक) विवरण है। उनका जीवन हमें ईश्वर दर्शन की शक्ति प्रदान करता है। उनके वचन केवल किसी के नीरस ज्ञान-वचन नहीं हैं, बल्कि उनकी जीवन-रूपी पुस्तक के पृष्ठ ही हैं। उनका जीवन अहिंसा का साक्षात पाठ है।
-- अथवा --
गद्यांश 2: "यदा अयं बालः एव आसीत् तदा कंसः तं हन्तुं क्रमशः बहून् राक्षसान् प्रेषयत्..."
संदर्भ:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'गोपालकः श्रीकृष्णः' पाठ से लिया गया है।
अनुवाद:
जब यह बालक ही थे, तब कंस ने इन्हें मारने के लिए क्रम से बहुत से राक्षसों को भेजा, परंतु श्रीकृष्ण ने अपनी कुशलता और वीरता से उन सभी का वध कर दिया। उन्होंने न केवल राक्षसों से, बल्कि अन्य विपत्तियों से भी गोकुलवासियों की रक्षा की। एक बार वर्षा ऋतु में गोकुल में यमुना का जल तेजी से बढ़ने लगा, तब श्रीकृष्ण ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए सभी गोकुलवासियों की रक्षा की। इसी प्रकार जलती हुई आग से उन्होंने सभी पशुओं और ग्वालों की रक्षा की। इस प्रकार निरंतर गोकुलवासियों के कष्टों को दूर करते हुए वे उनके हृदय में बस गए।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
संस्कृत पद्यांश (श्लोक) का संदर्भ सहित हिन्दी अनुवाद:
श्लोक 1:
"सत्यव्रतं सत्यपरं त्रिसत्यं, सत्यस्य योनिं निहितं च सत्ये ।
सत्यस्य सत्यम् ऋतसत्यनेत्रं, सत्यात्मकं त्वां शरणं प्रपन्ना ॥"
संदर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'वन्दना' नामक पाठ से उद्धृत है।
अनुवाद:
हे ईश्वर! आप सत्य का व्रत धारण करने वाले हैं, सत्य में तत्पर रहने वाले हैं, तीनों कालों (भूत, वर्तमान, भविष्य) में सत्य हैं, सत्य के उत्पत्ति स्थान हैं, सत्य में ही स्थित रहने वाले हैं, सत्यों के भी सत्य हैं और ऋत (वास्तविक सत्य) तथा सत्य के नेत्र हैं। हे सत्यात्मक ईश्वर! हम आपकी शरण में आए हैं।
-- अथवा --
श्लोक 2:
"सत्याधारस्तपस्तैलं दयावर्तीः क्षमा शिखा ।
अन्धकारे प्रवेष्टव्ये दीपो यत्नेन वार्यताम् ॥"
संदर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड के 'सुभाषितरत्नानि' पाठ से उद्धृत है।
अनुवाद:
सत्य रूपी आधार वाला, तप रूपी तेल वाला, दया रूपी बत्ती वाला और क्षमा रूपी लौ वाला ज्ञान रूपी दीपक लेकर अज्ञान रूपी अंधकार में प्रवेश करते समय उस दीपक को यत्नपूर्वक संभालकर रखना चाहिए।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
'दीपदान' एकांकी की मुख्य पात्रा 'पन्ना धाय' का चरित्र-चित्रण:
उत्तर:
डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा रचित 'दीपदान' एकांकी की मुख्य पात्रा 'पन्ना धाय' हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. देशभक्त एवं स्वामिभक्त: पन्ना धाय मेवाड़ के राजवंश के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित एवं निष्ठावान हैं।
2. अपूर्व त्यागी व बलिदानी: मेवाड़ के कुलदीप कुंवर उदयसिंह के प्राणों की रक्षा के लिए उन्होंने अपने सगे पुत्र चंदन का बलिदान दे दिया।
3. नीतिमती एवं बुद्धिमती: बनवीर के षड्यंत्र को समझकर उन्होंने चतुराई से कुंवर उदयसिंह को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया।
निष्कर्ष: पन्ना धाय त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और स्वामिभक्ति की अनुपम प्रतिमूर्ति हैं।
लेखक का जीवन-परिचय एवं रचना:
मुंशी प्रेमचन्द:
जीवन-परिचय: मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी जिले के लमही गाँव में हुआ था। इनके बचपन का नाम धनपत राय था। इन्होंने अपनी रचनाओं में ग्रामीण समाज, किसानों तथा आम जनता के जीवन की समस्याओं का सजीव चित्रण किया है। 8 अक्टूबर 1936 को इस महान साहित्यकार का निधन हो गया।
रचना: 'मन्त्र' (कहानी), 'गोदान' (उपन्यासा)।
-- अथवा --
महादेवी वर्मा:
जीवन-परिचय: महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 में फर्रुखाबाद (उ.प्र.) में हुआ था। ये छायावाद की प्रमुख कवयित्री एवं गद्यकार हैं। इन्हें 'आधुनिक मीरा' भी कहा जाता है।
रचना: 'गिलु' (स्मरण/कहानी), 'यम' (काव्य संग्रह)।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
कवि का जीवन-परिचय एवं रचना:
कबीरदास:
जीवन-परिचय: भक्तिकाल के निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के संत कवि कबीरदास का जन्म सन् 1398 ई. में काशी में हुआ माना जाता है। इनका पालन-पोषण नीरू और नीमा नामक जुलाहा दंपत्ति ने किया। इनकी वाणी का संग्रह 'बीजक' कहलाता है। सन् 1518 ई. में मगहर में इनका निधन हुआ।
रचना: 'बीजक' (साखी, सबद, रमैनी)।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
पाठ्य पुस्तक से कण्ठस्थ किया हुआ श्लोक:
उत्तर:
"सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥"
संस्कृत प्रश्नों के उत्तर (किन्हीं दो के):
(i) भक्तः ईश्वरं कि याचते ?
उत्तर:
म्: भक्तः ईश्वरं तेजोमयं, बलमयं, ओजमयं च याचयति।
(ii) रामः कस्मिन् कार्यरतः ?
उत्तरम्: रामः सर्वभूतहिते (लोकहिते) निरतः आसीत्।
(iii) कीदृशो मार्गः सर्वोत्तमः भवति ?
उत्तरम्: सत्यस्य मार्गः सर्वोत्तमः भवति।
(iv) कंसः कीदृशः शासकः आसीत् ?
उत्तरम्: कंसः अत्याचारि शासकः आसीत्।
मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ (अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग):
(i) कान में तेल डालना
अर्थ: सुनकर भी अनसुना करना / कोई ध्यान न देना।
वाक्य-प्रयोग: मैंने श्याम को परीक्षा के लिए कई बार समझाया, पर वह कान में तेल डालकर बैठा है।
(ii) लकीर का फकीर होना
अर्थ: पुरानी रीति-रिवाज पर ही अड़े रहना।
वाक्य-प्रयोग: वैज्ञानिक युग में भी पुरानी कुरीतियों को मानना लकीर का फकीर होना है।
(iii) अन्धी पीसे कुत्ते खाय
अर्थ: असावधानी के कारण किसी की मेहनत का लाभ किसी अन्य द्वारा उठाना।
वाक्य-प्रयोग: दुकान मालिक की लापरवाही के कारण नौकरों ने सारा धन हड़प लिया, वही हुआ - अंधी पीसे कुत्ते खाय।
(iv) थोथा चना बाजे घना
अर्थ: कम योग्यता वाला व्यक्ति अधिक डींगें मारता है।
वाक्य-प्रयोग: रमेश को ज्ञान कुछ नहीं है पर बातें बड़ी-बड़ी करता है; सच ही कहा है- थोथा चना बाजे घना।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
संस्कृत में अनुवाद (किन्हीं दो वाक्यों का):
(i) दान से कीर्ति बढ़ती है।
अनुवाद: दानेन कीर्तिः वर्धते।
(ii) तुम कल बाजार जाओगे।
अनुवाद: त्वम् श्वः आपणम् गमिष्यसि।
(iii) तुम्हारा नाम क्या है ?
अनुवाद: तव नाम किम् अस्ति ?
(iv) राम के लिए नमस्कार है।
अनुवाद: रामाय नमः।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रार्थना-पत्र:
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय,
[अपने विद्यालय का नाम एवं पता]
विषय: दो दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मुझे कल रात्रि से सहसा ज्वर (बुखार) आ गया है। चिकित्सक ने मुझे दो दिन तक विश्राम करने की सलाह दी है। इस कारण मैं विद्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ हूँ।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि मुझे दिनांक [दिनांक] से [दिनांक] तक दो दिनों का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।
सधन्यवाद।
भवदीय शिष्य,
नाम: [आपका नाम]
कक्षा: 9 ('अ')
अनुक्रमांक: [रोल नंबर]
दिनांक: [आज की तिथि]
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।