Solution

UP Board Class 9 Hindi 2024 Paper Code A

कक्षा 9वीं · हिंदी · 2024 · बोर्ड परीक्षा

AI-generated solution. Verify important answers/calculations. · महत्वपूर्ण उत्तर एवं गणनाएँ स्वयं जाँच लें।

प्रश्न 1.

हिन्दी गद्य के प्राचीनतम प्रयोग मिलते हैं—

(A) राजस्थानी में (B) मैथिली में (C) बुन्देल खण्डी में (D) हरियाणवी में।

उत्तर:

(A) राजस्थानी में

व्याख्या: हिन्दी गद्य के प्राचीनतम प्रयोग राजस्थानी और ब्रजभाषा में मिलते हैं।

प्रश्न 2.

द्विवेदी युग की प्रसिद्ध पत्रिका है—

(A) हिन्दी प्रदीप (B) ब्राह्मण (C) सरस्वती (D) आनन्द-कादम्बिनी।

उत्तर:

(C) सरस्वती

व्याख्या: सरस्वती पत्रिका द्विवेदी युग की अत्यधिक प्रसिद्ध और प्रभावशाली पत्रिका थी, जिसका संपादन महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने किया।

प्रश्न 3.

प्रेमचन्द का उपन्यास नहीं है—

(A) त्याग पत्र (B) गोदान (C) सेवासदन (D) रंगभूमि।

उत्तर:

(A) त्याग पत्र

व्याख्या: त्याग पत्र जैनेन्द्र कुमार का प्रसिद्ध उपन्यास है, जबकि गोदान, सेवासदन और रंगभूमि मुंशी प्रेमचन्द जी के उपन्यास हैं।

प्रश्न 4.

'गुनाहों का देवता' के रचनाकार हैं—

(A) धर्मवीर भारती (B) विष्णु प्रभाकर (C) कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' (D) हजारी प्रसाद द्विवेदी।

उत्तर:

(A) धर्मवीर भारती

व्याख्या: गुनाहों का देवता डॉ० धर्मवीर भारती द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यास है।

प्रश्न 5.

दीपदान किस प्रकार की एकांकी है—

(A) सामाजिक (B) पौराणिक (C) ऐतिहासिक (D) समस्यात्मक।

उत्तर:

(C) ऐतिहासिक

व्याख्या: डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा रचित दीपदान एकांकी पन्ना धाय के अभूतपूर्व त्याग और बलिदान पर आधारित एक ऐतिहासिक एकांकी है।

प्रश्न 6.

वीर रस का स्थायी भाव होता है—

(A) उत्साह (B) क्रोध (C) ग्लानि (D) भय।

उत्तर:

(A) उत्साह

व्याख्या: वीर रस का स्थायी भाव उत्साह होता है।

प्रश्न 7.

विनय पत्रिका के रचयिता/रचनाकार हैं—

(A) तुलसीदास (B) अग्रदास (C) नाभादास (D) चतुर्भुजदास।

उत्तर:

(A) तुलसीदास

व्याख्या: विनय पत्रिका की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने ब्रजभाषा में की है।

प्रश्न 8.

उत्तर:

मध्यकाल को कहा जाता है—

(A) आधुनिक काल (B) रासोकाल (C) भक्तिकाल (D) रीतिकाल।

उत्तर:

(D) रीतिकाल

व्याख्या: हिन्दी साहित्य के इतिहास में उत्तर मध्यकाल को रीतिकाल के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 9.

आदिकाल का ग्रन्थ नहीं है—

(A) कीर्तिलता (B) बीसलदेव रासो (C) आल्हाखण्ड (D) पदमावत।

उत्तर:

(D) पदमावत।

व्याख्या: पदमावत भक्तिकाल की प्रेमाश्रयी सूफी काव्यधारा के प्रमुख कवि मलिक मोहम्मद जायसी का महाकाव्य है।

प्रश्न 10.

ज्ञानाश्रयी भक्तिशाखा के प्रतिनिधि कवि हैं—

(A) तुलसीदास (B) सूरदास (C) बिहारी (D) कबीरदास।

उत्तर:

(D) कबीरदास।

व्याख्या: संत कबीरदास भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख प्रतिनिधि कवि हैं।

प्रश्न 11.

'हे खग-मृग हे मधुकर श्रेणी।

तुम देखी सीता मृगनैनी॥'

—इन पंक्तियों में कौन-सा रस है—

(A) करुण रस (B) अद्भुत रस (C) वियोग शृंगार (D) शान्त रस।

उत्तर:

(C) वियोग शृंगार

व्याख्या: सीता हरण के पश्चात् श्री राम का पशु-पक्षियों से सीता जी के विषय में व्याकुल होकर पूछना वियोग शृंगार रस का सटीक उदाहरण है।

प्रश्न 12.

चौपाई के प्रत्येक चरण के अन्त में होते हैं—

(A) लघु-गुरु (B) लघु-लघु (C) गुरु-गुरु (D) गुरु-लघु।

उत्तर:

(C) गुरु-गुरु

व्याख्या: चौपाई के प्रत्येक चरण के अंत में दो गुरु (दीर्घ) वर्ण होना शुभ माना जाता है।

प्रश्न 13.

वर्णों की एक से अधिक आवृत्ति में अलंकार होता है—

(A) यमक (B) अनुप्रास (C) श्लेष (D) उपमा।

उत्तर:

(B) अनुप्रास

व्याख्या: जहाँ किसी वर्ण की आवृत्ति एक या एक से अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

प्रश्न 14.

अशुद्ध शब्द है—

(A) वरिष्ठ (B) कनिष्ठ (C) ज्येष्ठ (D) अभीष्ठ।

उत्तर:

(D) अभीष्ठ।

व्याख्या: व्याकरणिक दृष्टि से शुद्ध शब्द 'अभीष्ट' होता है, 'अभीष्ठ' नहीं।

प्रश्न 15.

'जेठ' शब्द का तत्सम शब्द है—

(A) ज्येष्ठ (B) श्रेष्ठ (C) काष्ठ (D) कोष्ठ।

उत्तर:

(A) ज्येष्ठ

व्याख्या: जेठ तद्भव शब्द है तथा इसका शुद्ध तत्सम रूप ज्येष्ठ होता है।

प्रश्न 16.

पूर्ण विराम का प्रयोग होता है—

(A) प्रश्न पूछने के लिये (B) सम्बोधन में (C) वाक्य के बीच में (D) वाक्य की समाप्ति पर।

उत्तर:

(D) वाक्य की समाप्ति पर।

व्याख्या: किसी साधारण कथन या वाक्य के पूरा हो जाने पर उसकी समाप्ति पर पूर्ण विराम (।) का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 17.

'सौभाग्य' का तद्भव होता है—

(A) सपना (B) सैकड़ा (C) सुहागा (D) सुहाग।

उत्तर:

(D) सुहाग।

व्याख्या: सौभाग्य तत्सम शब्द का तद्भव रूप सुहाग होता है।

प्रश्न 18.

'तथा + इति' में सन्धि होगी—

(A) तथैति (B) तथोति (C) तथैति (D) तथोेति।

उत्तर:

(A) तथैति

व्याख्या: तथा + इति की सन्धि से गुण सन्धि के नियमानुसार तथेति रूप बनता है, जिसे विकल्प में तथैति/तथेति दर्शाया गया है।

प्रश्न 19.

षष्ठी विभक्ति, बहुवचन में 'राम' का रूप होगा—

(A) रामाणाम् (B) रामस्य (C) रामयोः (D) रामेषु।

उत्तर:

(A) रामाणाम्

व्याख्या: राम शब्द अकारान्त पुल्लिंग की षष्ठी विभक्ति बहुवचन का रूप रामाणाम् (रामाणाम्) होता है।

प्रश्न 20.

'भू' धातु लङ् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन का रूप है—

(A) अभवत् (B) भवथ (C) अभवत (D) गच्छेम।

उत्तर:

(C) अभवत

व्याख्या: भू (भव्) धातु लङ् लकार मध्यम पुरुष बहुवचन का रूप अभवत (हलन्त रहित) बनता है।

प्रश्न 21.

दिये गये गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिये—

छोटा भाई रोता था और उसके रोने का तात्पर्य था कि मेरी मौत मुझे नीचे बुला रही है, यद्यपि वह शब्दों से न कहता था। वास्तव में मौत सजीव और नग्न रूप में कुएँ में बैठी थी, पर उस नग्न मौत से मुठभेड़ के लिए मुझे भी नग्न होना पड़ा। छोटा भाई भी नंगा हुआ। एक धोती मेरी, एक छोटे भाई की, एक चने खाली, दो कानों से बँधी हुई धोतियाँ-पाँच धोतियाँ और कुछ रस्सी मिलाकर कुएँ की गहराई के लिए काफी हुईं। हम लोगों ने धोतियों एक-दूसरी ने बाँधीं और खूब खींच-खींच कर आजमा लिया कि गाँठ कड़ी हैं या नहीं। अपनी ओर से कोई धोखे का काम नहीं रखा।

प्रश्न—

(क) प्रस्तुत गद्यांश का सन्दर्भ लिखिये।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिये।

(ग) छोटे भाई के रोने का क्या अर्थ था।

उत्तर:

(क) सन्दर्भ:

प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के गद्य-खण्ड में संकलित एवं पं० श्रीराम शर्मा द्वारा रचित 'स्मृति' नामक संस्मरण पाठ से उद्धृत है।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या:

लेखक बताते हैं कि कुएँ से चिट्ठियों को निकालने के लिए उन्होंने और उनके छोटे भाई ने अपने शरीर के ऊपरी वस्त्र उतार दिए। इसके उपरांत उन्होंने अपनी, अपने भाई की तथा घर की अतिरिक्त धोतियों एवं रस्सियों को आपस में जोड़कर एक लंबी रस्सी बनाई। कुएँ में उतरने से पूर्व लेखक ने धोतियों में लगाई गई प्रत्येक गाँठ को पूरी ताकत से खींचकर भली-भाँति जाँच लिया कि वे पक्की हैं या नहीं, जिससे कुएँ के भीतर उतरते समय किसी दुर्घटना या धोखे की गुंजाइश न रहे।

(ग) छोटे भाई के रोने का अर्थ:

छोटे भाई के रोने का अर्थ यह था कि कुएँ में विषैला साँप मौजूद था, अतः बड़े भाई का कुएँ में उतरना साक्षात् मृत्यु के मुँह में जाने जैसा था। वह अपने भाई को खतरे में नहीं डालना चाहता था।

प्रश्न 22.

दिये गये पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिये—

बंसी मेरे नैनन में नंदलाल।

मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल, अरूण, तिलक दिये भाल॥

मोहन मूरति साँवरि सूरति, नैना बने, बिसाल।

अधर-सुधा-रस मुरली, राजति, उर बैजंती-माल॥

छुद्र घण्टिका कटि-तट सोभित, नूपुर सबद रसाल।

मीरा प्रभु संतन सुखदाई, भक्त बछल गोपाल॥

प्रश्न—

(क) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिये।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिये।

(ग) उपर्युक्त पद्य में कौन सा अलंकार है।

उत्तर:

(क) सन्दर्भ:

प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य-खण्ड में संकलित मीराबाई द्वारा रचित 'पद' शीर्षक से उद्धृत है।

(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या:

मीराबाई श्री कृष्ण के अनुपम रूप का वर्णन करते हुए प्रार्थना करती हैं कि हे नंदलाल! आप मेरी आँखों में निवास कीजिए। आपके सिर पर मयूर पंखों का मुकुट, कानों में मछली के आकार के कुण्डल और माथे पर लाल चंदन का तिलक सुशोभित हो रहा है।

(ग) अलंकार:

प्रस्तुत पद में अनुप्रास अलंकार (जैसे 'मोर मुकुट मकराकृत', 'मोहन मूरति', 'साँवरि सूरति' आदि में वर्णों की आवृत्ति) तथा रूपक अलंकार है।

प्रश्न 23.

(क) निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिये—

परमसिद्धोऽपि सः सिद्धीनां प्रदर्शनं नोचितम् अमन्यत्। एकदा केनचित् भक्तेन कस्यचित् एवं वर्णितं, "असौ महात्मा पादुकाभ्यां नदीं तरति, इति महतो विस्मस्य विषयः।" परमहंस, रामकृष्णः मन्दम् अहसत् अवदत् च "अस्याः सिद्धेः मूल्यं पणद्वयमात्रम्, पणद्वयेन नौक्या सामान्यः जनः नदीं तरति। अनया सिद्ध्या केवलं पणद्वयस्य लाभो भवति। किं प्रयोजनं एतादृश्याः सिद्धेः प्रदर्शनेन।"

उत्तर:

सन्दर्भ:

प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'परमहंसः रामकृष्णः' पाठ से गृहीत है।

हिन्दी अनुवाद:

परम सिद्ध होने पर भी वे (रामकृष्ण परमहंस) सिद्धियों के प्रदर्शन को उचित नहीं मानते थे। एक बार किसी भक्त ने किसी के सम्बन्ध में इस प्रकार वर्णन किया कि "वे महात्मा खड़ाऊँ पहनकर नदी पार कर जाते हैं, यह बड़े आश्चर्य का विषय है।" परमहंस रामकृष्ण धीरे से हँसे और बोले, "इस सिद्धि का मूल्य केवल दो पैसे है। दो पैसे में तो नौका से साधारण मनुष्य भी नदी पार कर लेता है। इस सिद्धि से केवल दो पैसे का लाभ होता है। ऐसी सिद्धि के प्रदर्शन का क्या औचित्य या प्रयोजन है?"

प्रश्न 23.

(ख) निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिये—

(i) धर्मज्ञः सत्यसन्धश्च प्रजानां च हिते रतः।

यशस्वी ज्ञानसम्पन्नः शुचिर्वश्यः समाधिमान्॥

उत्तर:

सन्दर्भ:

प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'पुरुषोत्तमः रामः' पाठ से उद्धृत है।

हिन्दी अनुवाद:

श्री राम धर्म को जानने वाले, सत्यप्रतिज्ञ, प्रजा के हित में निरन्तर लगे रहने वाले, यशस्वी, ज्ञान से संपन्न, पवित्र, जितेन्द्रिय एवं एकाग्रचित्त हैं।

प्रश्न 24.

'नये मेहमान' एकांकी के शीर्षक होने पर अपने विचार व्यक्त कीजिये।

उत्तर:

उदयशंकर भट्ट द्वारा रचित 'नये मेहमान' एक व्यावहारिक पारिवारिक समस्या पर आधारित अत्यंत रोचक एकांकी है।

शीर्षक की सार्थकता एवं विचार:

1. कथावस्तु का केंद्र: एकांकी की संपूर्ण कथा विश्वनाथ के छोटे से मकान में अचानक आ धमकने वाले बिन बुलाए मेहमानों (बाबू लालचन्द और उनके पुत्र) के इर्द-गिर्द घूमती है।

2. समस्या की अभिव्यक्ति: आज के महानगरीय जीवन में कम स्थान और सीमित संसाधनों के बीच अचानक अतिथियों के आने से होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को 'नये मेहमान' शीर्षक पूर्णतः व्यक्त करता है।

3. व्यंग्यात्मकता एवं रोचकता: शीर्षक अत्यंत संक्षिप्त, कौतूहलवर्धक तथा एकांकी के मूल विषय वस्तु से सीधा जुड़ा हुआ है।

अतः 'नये मेहमान' शीर्षक पूर्णतः सटीक, उपयुक्त एवं सार्थक है।

प्रश्न 25.

(क) निम्नलिखित में से किसी एक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना लिखिये—

(i) पं० प्रताप नारायण मिश्र (ii) काका कालेलकर (iii) धर्मवीर भारती

उत्तर:

पं० प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय:

जीवन परिचय:

भारतेन्दु युग के प्रख्यात लेखक एवं निबंधकार पं० प्रताप नारायण मिश्र का जन्म सन् 1856 ई० में उन्नाव जिले के बैजेगाँव नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता पं० संकटा प्रसाद एक प्रसिद्ध ज्योतिषी थे। मिश्र जी ने घर पर ही संस्कृत, बंगला, अंग्रेजी और हिन्दी का अध्ययन किया। इन्होंने 'ब्राह्मण' नामक प्रसिद्ध पत्र का संपादन करके हिन्दी साहित्य की महान सेवा की। अपनी व्यंग्यात्मक एवं जीवंत शैली के लिए मिश्र जी विशेष रूप से जाने जाते हैं। मात्र 38 वर्ष की अल्पायु में सन् 1894 ई० में इनका देहावसान हो गया।

प्रमुख रचना:

'हठी हम्मीर' (नाटक) अथवा 'प्रताप पीयूष' (निबंध संग्रह)।

प्रश्न 25.

(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुये उनकी एक प्रमुख रचना लिखिये—

(i) कबीरदास (ii) रहीम दास (iii) जयशंकर प्रसाद

उत्तर:

कबीरदास का जीवन परिचय:

जीवन परिचय:

भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के महान संत-कवि कबीरदास का जन्म सन् 1398 ई० (संवत् 1455) में काशी में माना जाता है। इनका पालन-पोषण नीरू और नीमा नामक जुलाहा दंपति ने किया था। कबीरदास औपचारिक रूप से शिक्षित नहीं थे, किंतु साधु-संगति और लोक-अनुभव से उन्होंने अगाध ज्ञान प्राप्त किया। वे महान समाज सुधारक थे और उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, बाह्याचार एवं जाति-पांति का कड़ा विरोध किया। सन् 1518 ई० के लगभग मगहर में इनका निधन हो गया।

प्रमुख रचना:

'बीजक' (जिसमें साखी, सबद और रमैनी संकलित हैं)।

प्रश्न 26.

अपनी पाठ्यपुस्तक से याद किया हुआ कोई एक श्लोक लिखिये, जो इस प्रश्न-पत्र में न दिया गया हो।

उत्तर:

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥

प्रश्न 27.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों का उत्तर संस्कृत में दीजिये—

(i) मनुष्याणां भूषणं किम् अस्ति ?

(ii) रामस्य के विशिष्टाः गुणाः आसन् ?

(iii) अन्धकारे कः वार्यताम् ?

(iv) रामकृष्ण-सेवाश्रमः केन स्थापिता ?

उत्तर:

(i) मनुष्याणां भूषणं शीलम् अस्ति।

(iv) रामकृष्ण-सेवाश्रमः स्वामी विवेकानन्देन स्थापितः।

प्रश्न 28.

निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों में से किसी एक अर्थ बताते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) अक्ल पर पत्थर पड़ना

(ii) घी के दिये जलाना

(iii) जिसकी लाठी उसकी भैंस

(iv) अन्धों में काना राजा।

उत्तर:

(ii) घी के दिये जलाना

अर्थ: अत्यधिक प्रसन्नता प्रकट करना या अत्यधिक खुशी मनाना।

वाक्य प्रयोग: श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने घी के दिये जलाए।

प्रश्न 29.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिये—

(i) हे ईश्वर! हमारी रक्षा करो।

(ii) राममर्यादा पुरुषोत्तम थे।

(iii) विनय सदाचार से उत्पन्न होता है।

(iv) मनुष्य को परिश्रम करना चाहिये।

उत्तर:

(i) हे ईश्वर! अस्माकं रक्ष।

(iii) विनयः सदाचारात् उद्भवति।

प्रश्न 30.

विद्यालय में खेलकूद की समुचित व्यवस्था के लिए अपने प्रधानाचार्य की जो एक प्रार्थना-पत्र लिखिये।

उत्तर:

सेवा में,

श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,

राजकीय इण्टर कॉलेज,

मेरठ (उ० प्र०)।

विषय: विद्यालय में खेलकूद की समुचित व्यवस्था कराने हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9 का छात्र हूँ। हमारे विद्यालय में पठन-पाठन का वातावरण अत्यंत उत्तम है, किन्तु पिछले कुछ समय से खेलकूद की सामग्री तथा समुचित क्रीड़ा व्यवस्था का अभाव है। क्रीड़ा स्थल में क्रिकेट, फुटबॉल तथा वॉलीबॉल का आवश्यक सामान उपलब्ध नहीं है।

खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के साथ-साथ उनमें अनुशासन और समूह भावना का निर्माण करते हैं।

अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि विद्यालय में खेलकूद की नई सामग्री मंगवाने तथा खेल के मैदान की उचित व्यवस्था कराने की कृपा करें। इसके लिए हम सभी छात्र आपके आभारी रहेंगे।

धन्यवाद!

दिनांक: 15 मार्च 2024

भवदीय शिष्य,

अ क ख

कक्षा: 9 'अ'

अनुक्रमांक: 12