प्रश्न 1.
गुनाहों का देवता किसका उपन्यास है ?
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
(ख) धर्मवीर भारती
(ग) श्री राम शर्मा
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(ख) धर्मवीर भारती
व्याख्या: 'गुनाहों का देवता' धर्मवीर भारती का प्रसिद्ध उपन्यास है।
UP Board Class 9 Hindi Paper 2023
कक्षा 9वीं · हिंदी · 2023 · बोर्ड परीक्षा
गुनाहों का देवता किसका उपन्यास है ?
(क) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
(ख) धर्मवीर भारती
(ग) श्री राम शर्मा
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(ख) धर्मवीर भारती
व्याख्या: 'गुनाहों का देवता' धर्मवीर भारती का प्रसिद्ध उपन्यास है।
आधुनिक मीरा के नाम से कौन-सी लेखिका प्रसिद्ध हैं ?
(क) मीराबाई
(ख) रानी हाड़ा
(ग) पदमावती
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(घ) महादेवी वर्मा
व्याख्या: महादेवी वर्मा को उनकी वेदनामयी काव्य चेतना के कारण 'आधुनिक मीरा' कहा जाता है।
हरिवंशराय बच्चन की रचना है—
(क) यामा
(ख) चिदम्बरा
(ग) सरस्वती
(घ) क्या भूलूँ क्या याद करूँ
उत्तर:
(घ) क्या भूलूँ क्या याद करूँ
व्याख्या: 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध आत्मकथा है।
कामायनी के लेखक का नाम बताइए—
(क) धर्मवीर भारती
(ख) काका कालेलकर
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) मैथिलीशरण गुप्त
उत्तर:
(ग) जयशंकर प्रसाद
व्याख्या: 'कामायनी' जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित महाकाव्य है।
आदिकाल को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
(क) भक्तिकाल
(ख) रीतिकाल
(ग) वीरगाथाकाल
(घ) आधुनिक काल
उत्तर:
(ग) वीरगाथाकाल
व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने आदिकाल को 'वीरगाथाकाल' नाम दिया है।
मीराबाई किस काल की कवयित्री हैं ?
(क) आधुनिक काल
(ख) रीतिकाल
(ग) भक्तिकाल
(घ) आदिकाल
उत्तर:
(ग) भक्तिकाल
व्याख्या: मीराबाई सगुण भक्तिधारा की कृष्णभक्ति शाखा की कवयित्री हैं।
पृथ्वीराज रासो रचना है ?
(क) जायसी
(ख) चन्दबरदाई
(ग) जगनिक
(घ) नरपति नाल्ह
उत्तर:
(ख) चन्दबरदाई
व्याख्या: 'पृथ्वीराज रासो' आदिकालीन कवि चन्दबरदाई का प्रसिद्ध प्रबन्ध काव्य है।
सूरसागर के रचनाकार हैं—
(क) तुलसीदास
(ख) कबीरदास
(ग) सूरदास
(घ) जायसी
उत्तर:
(ग) सूरदास
व्याख्या: 'सूरसागर' महाकवि सूरदास की प्रसिद्ध काव्य रचना है।
लक्ष्मी का स्वागत एकांकी का नायक है—
(क) रोशन
(ख) अरुण
(ग) सुरेन्दर
(घ) पिता
उत्तर:
(क) रोशन
व्याख्या: उपेन्द्रनाथ अश्क द्वारा रचित एकांकी 'लक्ष्मी का स्वागत' का मुख्य पात्र (नायक) रोशन है।
कबीरदास के गुरु का नाम था—
(क) वल्लभाचार्य
(ख) नरहरिदास
(ग) रामानन्द
(घ) रामकृष्ण परमहंस
उत्तर:
(ग) रामानन्द
व्याख्या: कबीरदास के गुरु स्वामी रामानन्द थे।
तुलसीदास के बचपन का नाम था—
(क) तुकाराम
(ख) आत्माराम
(ग) सीताराम
(घ) रामबोला
उत्तर:
(घ) रामबोला
व्याख्या: जन्म लेते ही राम नाम बोलने के कारण तुलसीदास जी के बचपन का नाम रामबोला पड़ा।
चिदम्बरा के लिए किस लेखक को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला—
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
(ग) जयशंकर प्रसाद
(घ) प्रतापनारायण मिश्र
उत्तर:
(ख) सुमित्रानन्दन पन्त
व्याख्या: सुमित्रानन्दन पन्त को वर्ष 1968 में 'चिदम्बरा' काव्य संग्रह के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।
पर्यायवाची शब्दों को और किस नाम से जाना जाता है ?
(क) भिन्नार्थक शब्द
(ख) समानार्थी शब्द
(ग) श्रुतिसम
(घ) विपरीतार्थी शब्द
उत्तर:
(ख) समानार्थी शब्द
व्याख्या: समान अर्थ प्रकट करने वाले शब्दों को पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं।
रघुपति राघव राजा राम में कौन-सा अलंकार है ?
(क) यमक
(ख) अनुप्रास
(ग) श्लेष
(घ) रूपक
उत्तर:
(ख) अनुप्रास
व्याख्या: इसमें 'र' वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार है।
वीर रस का स्थायी भाव है ?
(क) भय
(ख) शोक
(ग) उत्साह
(घ) हास
उत्तर:
(ग) उत्साह
व्याख्या: वीर रस का स्थायी भाव 'उत्साह' होता है।
काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों को कहते हैं ?
(क) छन्द
(ख) अलंकार
(ग) रस
(घ) ये सभी
उत्तर:
(ख) अलंकार
व्याख्या: काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्त्वों या धर्मों को अलंकार कहते हैं।
मन्त्र कहानी के रचनाकार हैं—
(क) प्रेमचन्द
(ख) प्रतापनारायण मिश्र
(ग) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(घ) महादेवी वर्मा
उत्तर:
(क) प्रेमचन्द
व्याख्या: 'मन्त्र' मुंशी प्रेमचन्द जी की एक प्रसिद्ध कहानी है।
कागभुशुंडि किसे कहते हैं ?
(क) गिलहरी
(ख) कौआ
(ग) तोता
(घ) हंस
उत्तर:
(ख) कौआ
व्याख्या: कागभुशुंडि कौए को कहा जाता है।
कस्तूरबा गाँधी किसकी पत्नी थीं—
(क) राजीव गाँधी
(ख) संजय गाँधी
(ग) वरुण गाँधी
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर:
(घ) महात्मा गाँधी
व्याख्या: कस्तूरबा गाँधी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पत्नी थीं।
पंचवटी किसकी रचना है—
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
(ग) सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
(घ) हरिवंशराय बच्चन
उत्तर:
(ख) मैथिलीशरण गुप्त
व्याख्या: 'पंचवटी' राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का प्रसिद्ध खंडकाव्य है।
खण्ड 'ब' वर्णनात्मक प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश के नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(क) “किसी लकीर को मिटाये बिना छोटी बना देने का उपाय है बड़ी लकीर खींच देना। क्षुद्र अहमिकताओं और अर्थहीन संकीर्णताओं की क्षुद्रता सिद्ध करने के लिए तर्क और शास्त्रार्थ का मार्ग कदाचित् ठीक नहीं है, सही उपाय है बड़े सत्य को प्रत्यक्ष कर देना।”
(1) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(2) उपर्युक्त गद्यांश की व्याख्या कीजिए।
(3) किसी लकीर को मिटाये बिना छोटा कैसे किया जा सकता है।
उत्तर:
(1) पाठ का नाम: गुरु नानकदेव
लेखक का नाम: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
(2) गद्यांश की व्याख्या:
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी जी कहते हैं कि समाज में व्याप्त संकीर्ण विचारों, अहंकार तथा व्यर्थ के मतभेदों को समाप्त करने का सबसे उत्तम उपाय यह है कि उनके सामने एक महान और व्यापक सत्य को प्रस्तुत कर दिया जाए। जिस प्रकार किसी रेखा को मिटाए बिना उसके बगल में एक बड़ी रेखा खींच देने से वह रेखा स्वतः छोटी दिखाई देने लगती है, उसी प्रकार तर्क-वितर्क में समय नष्ट करने के बजाय बड़े सत्य और उच्च आदर्शों को प्रत्यक्ष प्रकट कर देने से तुच्छ भावनाएँ स्वयं समाप्त हो जाती हैं।
(3) किसी लकीर को मिटाये बिना उसके समानांतर एक बड़ी लकीर खींचकर उसे छोटा किया जा सकता है।
निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक पद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए तथा काव्यगत सौन्दर्यगत भी लिखिए।
(क) “जब मैं था तब हरि नही, अब हरि हैं मैं नाहिं
सब अंधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि”
उत्तर:
सन्दर्भ:
प्रस्तुत साखी हमारी पाठ्यपुस्तक के काव्य खंड में संकलित एवं संत कबीरदास द्वारा रचित 'साखी' शीर्षक पाठ से उद्धृत है।
व्याख्या:
कबीरदास जी कहते हैं कि जब तक मेरे भीतर 'मैं' अर्थात् अहंकार की भावना विद्यमान थी, तब तक मुझे ईश्वर (हरि) के दर्शन नहीं हुए। परंतु जैसे ही ज्ञान रूपी दीपक के माध्यम से मुझे अपने अंतःकरण में ईश्वर की सत्ता का साक्षात्कार हुआ, मेरा अहंकार पूर्णतः नष्ट हो गया। ज्ञान रूपी दीपक के आलोक में अज्ञान का समस्त अंधकार समाप्त हो गया और मुझे यह ज्ञान प्राप्त हो गया कि आत्मा और परमात्मा एक ही हैं।
काव्यगत सौन्दर्य:
1. भाषा: साधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी)।
2. शैली: मुक्तक शैली।
3. रस: शांत रस।
4. छंद: दोहा।
5. अलंकार: 'दीपक देख्या' में अनुप्रास अलंकार तथा 'अंधियारा' एवं 'दीपक' में प्रतीकात्मक/रूपक अलंकार है।
किन्हीं एक लेखक का जीवन परिचय लिखिए—
(i) प्रेमचन्द (ii) महादेवी वर्मा (iii) हजारी प्रसाद द्विवेदी
उत्तर:
(i) मुंशी प्रेमचन्द का जीवन परिचय:
जीवन परिचय:
उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई 1880 ई. को वाराणसी जिले के लमही नामक ग्राम में हुआ था। इनके बचपन का नाम धनपत राय था। इनके पिता का नाम मुंशी अजायब लाल तथा माता का नाम आनन्दी देवी था। अल्पायु में ही पिता का साया उठ जाने के कारण इनका जीवन संघर्षों में बीता। इन्होंने कठिन परिस्थितियों में बी.ए. की शिक्षा प्राप्त की और शिक्षा विभाग में डिप्टी निरीक्षक पद पर कार्य किया। गांधी जी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर इन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और साहित्य सेवा में जुट गए। 8 अक्टूबर 1936 ई. को इस महान साहित्यकार का निधन हो गया।
प्रमुख रचनाएँ:
1. उपन्यास: गोदान, गबन, सेवासदन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि।
2. कहानियां: पंच परमेश्वर, मंत्र, पूस की रात, ईदगाह (लगभग 300 कहानियां 'मानसरोवर' नाम से संकलित हैं)।
3. नाटक: कर्बला, संग्राम।
किन्हीं एक कवि का जीवन परिचय लिखिए—
(i) मैथिलीशरण गुप्त (ii) जयशंकर प्रसाद (iii) रहीमदास
उत्तर:
(ii) जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय:
जीवन परिचय:
छायावाद के प्रवर्तक महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई. में काशी के प्रसिद्ध 'सुँघनी साहू' परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवीप्रसाद था। प्रसाद जी की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई, जहाँ इन्होंने संस्कृत, हिंदी, फारसी और अंग्रेजी का अध्ययन किया। अल्पायु में ही माता-पिता तथा अग्रज का देहांत हो जाने से परिवार का उत्तरदायित्व इन पर आ पड़ा। व्यावसायिक कठिनाइयों और पारिवारिक संघर्षों का सामना करते हुए भी ये निरंतर साहित्य सृजन में लीन रहे। 15 नवंबर 1937 ई. को मात्र 48 वर्ष की आयु में क्षयरोग के कारण इनका देहावसान हो गया।
प्रमुख रचनाएँ:
1. महाकाव्य: कामायनी।
2. काव्य-ग्रंथ: आँसू, लहर, झरना, कानन-कुसुम।
3. नाटक: चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, अजातशत्रु।
4. कहानी संग्रह: आकाशदीप, आंधी, इंद्रजाल।
किसी एक संस्कृत पद्य का सन्दर्भ सहित अनुवाद कीजिए।
(क) “असतो मा सदगमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय
मृत्योर्माऽमृतं गमय”
उत्तर:
सन्दर्भ:
प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'वंदना' पाठ से उद्धृत है।
अनुवाद:
हे ईश्वर! मुझे असत्य (बुराई) से सत्य (अच्छाई) की ओर ले चलो। मुझे अंधकार (अज्ञान) से प्रकाश (ज्ञान) की ओर ले चलो। मुझे मृत्यु (अज्ञानता) से अमरता की ओर ले चलो।
किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए—
(i) श्री कृष्णस्य पितुः किम् नाम आसीत् ?
(ii) रामः कस्यां विद्यायां निपुणः आसीत् ?
(iii) रामकृष्ण परमहंसः कीदृशः पुरुषः आसीत् ?
उत्तर:
(i) श्री कृष्णस्य पितुः नाम वसुदेवः आसीत्।
(ii) रामः धनुर्विद्यायां (सर्वविद्यासु) निपुणः आसीत्।
निम्न दो शब्दों के विलोम शब्द लिखिये—
आज, दिन, साधारण, उपकार
उत्तर:
1. आज — कल
2. दिन — रात
निम्न शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए—
आकाश, कमल
उत्तर:
1. आकाश — गगन, अंबर
2. कमल — पंकज, नीरज
निम्न दो शब्दों के तत्सम शब्द लिखिए—
मोर, हाथ, फूल, सूरज
उत्तर:
1. मोर — मयूर
2. हाथ — हस्त
दीपदान एकांकी के आधार पर पन्ना धाय का चरित्र चित्रण लिखिये।
उत्तर:
डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा रचित 'दीपदान' एकांकी की मुख्य पात्रा पन्ना धाय है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति: पन्ना धाय त्याग की अनुपम मिसाल है। चित्तौड़ के कुल दीपक कुंवर उदयसिंह के प्राणों की रक्षा के लिए उसने अपने सगे पुत्र चंदन का सहर्ष बलिदान कर दिया।
2. स्वामिभक्त और कर्तव्यनिष्ठ: पन्ना धाय की स्वामिभक्ति अतुलनीय है। उसने महाराणा सांगा के पुत्र उदयसिंह की रक्षा करने का जो वचन दिया था, उसे अपने प्राणप्रिय पुत्र का त्याग करके भी पूर्ण निष्ठा से निभाया।
3. वीरांगना और साहसी: पन्ना बनवीर के प्रलोभन और भय के सामने नहीं झुकी। उसने अत्यंत धैर्य और चातुर्य के साथ बनवीर की क्रूर योजना को विफल किया।
निष्कर्षतः, पन्ना धाय भारतीय इतिहास में देशप्रेम, स्वामिभक्ति और अभूतपूर्व आत्मत्याग का अमर प्रतीक है।
अवकाश के लिए अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य जी को प्रार्थना पत्र लिखिये।
उत्तर:
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय,
सर्वोदय इंटर कॉलेज,
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)।
विषय: दो दिनों के अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मुझे कल रात्रि से अचानक तीव्र ज्वर (बुखार) आ गया है। चिकित्सक ने मुझे दो दिनों तक विश्राम करने का परामर्श दिया है। इस कारण मैं दिनांक 20 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक विद्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ हूँ।
अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे उक्त दो दिनों का अवकाश स्वीकृत करने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।
धन्यवाद!
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: क. ख. ग.
कक्षा: 9 'अ'
अनुक्रमांक: 12
दिनांक: 20 अक्टूबर 2023
वीर रस अथवा शृंगार रस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
वीर रस की परिभाषा:
युद्ध, कठिन कार्य अथवा धर्म-रक्षा के प्रसंग में हृदय में स्थित 'उत्साह' नामक स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के संयोग से परिपुष्ट होता है, तब वीर रस की निष्पत्ति होती है।
उदाहरण:
बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
दोहा छन्द अथवा चौपाई छन्द की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
दोहा छन्द की परिभाषा:
दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके प्रथम और तृतीय (विषम) चरणों में 13-13 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं। सम चरणों के अंत में गुरु-लघु का नियम होता है।
उदाहरण:
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
अव्ययी भाव समास का एक उदाहरण लिखिये।
उत्तर:
यथाशक्ति (विग्रह: शक्ति के अनुसार)
यहाँ प्रथम पद 'यथा' अव्यय है और समस्त पद अव्यय बन गया है।
किन्हीं दो शब्दों का सन्धि विच्छेद कीजिए—
(i) यद्यपि (b) रमेश (c) परमात्मा
उत्तर:
(i) यद्यपि = यदि + अपि (यण संधि)
(b) रमेश = रमा + ईश (गुण संधि)
यमक अलंकार अथवा अनुप्रास अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
अनुप्रास अलंकार की परिभाषा:
जहाँ काव्य में समान वर्णों (अक्षरों) की बार-बार आवृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण:
चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही थीं जल थल में।
(यहाँ 'च' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है।)
किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिये—
(क) अनुशासन (ख) पर्यावरण
(ग) भ्रष्टाचार (घ) कम्प्यूटर के लाभ
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण
रूपरेखा:
1. प्रस्तावना
2. पर्यावरण का अर्थ
3. पर्यावरण प्रदूषण के कारण
4. पर्यावरण संरक्षण के उपाय
5. उपसंहार
1. प्रस्तावना:
पर्यावरण हमारे जीवन का मूल आधार है। प्रकृति और मानव का संबंध अत्यंत गहरा है। स्वच्छ पर्यावरण के बिना स्वस्थ मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। परंतु आधुनिक युग में मानव की स्वार्थी प्रवृत्तियों के कारण पर्यावरण निरंतर दूषित होता जा रहा है।
2. पर्यावरण का अर्थ:
'पर्यावरण' दो शब्दों के मेल से बना है— 'परि' + 'आवरण'। परि का अर्थ है चारों ओर और आवरण का अर्थ है ढकने वाला। अर्थात् हमारे चारों ओर स्थित वायु, जल, मृदा, वनस्पति तथा जीव-जंतुओं का सम्मिलित वातावरण ही पर्यावरण कहलाता है।
3. पर्यावरण प्रदूषण के कारण:
आज औद्योगिक विकास, वनों की अंधाधुंध कटाई, वाहनों के अत्यधिक प्रयोग तथा प्लास्टिक के कचरे के कारण जल, वायु, ध्वनि और मृदा प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। विषैली गैसों और धुएँ के कारण जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
4. पर्यावरण संरक्षण के उपाय:
पर्यावरण की रक्षा के लिए अधिकाधिक पौधरोपण करना आवश्यक है। वनों की कटाई पर रोक लगाई जानी चाहिए। प्लास्टिक के उपयोग को बंद कर पुनः प्रयोग योग्य वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देना चाहिए।
5. उपसंहार:
पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, अपितु प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। 'वृक्षारोपण करें, पर्यावरण बचाएँ' के संदेश को अपनाकर ही हम अपनी भावी पीढ़ियों को एक स्वस्थ और सुरक्षित पृथ्वी प्रदान कर सकते हैं।