Solution

UP Board Class 12th Physics Half Yearly Paper 2026 Set 2

कक्षा 12वीं · भौतिक विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक

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प्रश्न 1 (क).

वैद्युत क्षेत्र के विपरीत वैद्युत द्विध्रुव को 180^° के कोण से घुमाने में किया गया कार्य होगा—

(i) 2pE

(ii) 0

(iii) pE

(iv) -pE

उत्तर:

वैद्युत क्षेत्र E में वैद्युत द्विध्रुव को θ₁ = 0^° से θ₂ = 180^° तक घुमाने में किया गया कार्य:

W = pE( θ₁ - θ₂) = pE( 0^° - 180^°) = pE(1 - (-1)) = 2pE

सही उत्तर: (i) 2pE

प्रश्न 1 (ख).

जब संधारित्र की प्लेटों पर आवेश बढ़ाया जाता है, तब—

(i) धारिता बढ़ती है

(ii) प्लेटों के बीच विभवान्तर बढ़ता है

(iii) प्लेटों के बीच विभवान्तर घटता है

(iv) प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र अपरिवर्तित रहता है

उत्तर:

संधारित्र के लिए Q = C · V V = (Q)/(C) होता है। नियत धारिता C के लिए आवेश Q बढ़ाने पर प्लेटों के बीच विभवान्तर V बढ़ता है।

सही उत्तर: (ii) प्लेटों के बीच विभवान्तर बढ़ता है

प्रश्न 1 (ग).

1√(μ₀ ₀) का मात्रक है—

(i) न्यूटन/कूलॉम

(ii) वेबर/मीटर²

(iii) फैरड

(iv) मीटर/सेकण्ड

उत्तर:

1√(μ₀ ₀) = c (निर्वात में प्रकाश की चाल)। अतः इसका मात्रक वेग/चाल का मात्रक अर्थात् मीटर/सेकण्ड होता है।

सही उत्तर: (iv) मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 1 (घ).

निर्वात में किसी प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 6400 है। जल में उसकी तरंगदैर्घ्य होगी (जल का अपवर्तनांक = 4/3)—

(i) 6000 (ii) 5800 (iii) 4800 (iv) 5000 हल / Solution:

दी गई जानकारी (Given):

• निर्वात में तरंगदैर्घ्य λ = 6400 * जल का अपवर्तनांक μ = (4)/(3)

सूत्र (Formula):

λ' = (λ)/(μ)

मान रखने पर (Substitution):

λ' = (6400)/(4/3) = (6400 × 3)/(4)

गणना (Calculation):

λ' = 1600 × 3 = 4800 सही उत्तर: (iii) 4800

उत्तर:

यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।

प्रश्न 1 (ङ).

हाइगेन्स के तरंग सिद्धान्त के अनुसार प्रकाश तरंगें हैं—

(i) वैद्युत चुम्बकीय तरंगें

(ii) यांत्रिक तरंगें

(iii) द्रव्य तरंगें

(iv) परिवर्तनीय

उत्तर:

हाइगेन्स के मूल तरंग सिद्धान्त के अनुसार प्रकाश को ईथर माध्यम में संचरित होने वाली अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंगें माना गया था।

सही उत्तर: (ii) यांत्रिक तरंगें

प्रश्न 1 (च).

यदि व्यतिकरण करने वाली दो तरंगों की तीव्रताओं का अनुपात 16 : 9 है तो व्यतिकरण प्रतिरूप में महत्तम एवं न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात है—

(i) 4 : 3

(ii) 49 : 1

(iii) 25 : 7

(iv) 256 : 81

उत्तर:

दी गई जानकारी (Given):

(I₁)/(I₂) = (16)/(9)

सूत्र (Formula):

(A₁)/(A₂) = √((I₁)/(I₂)) = √((16)/(9)) = (4)/(3)

I_ I_ = ((A₁ + A₂)/(A₁ - A₂))²

गणना (Calculation):

I_ I_ = ((4 + 3)/(4 - 3))² = ((7)/(1))² = (49)/(1)

सही उत्तर: (ii) 49 : 1

प्रश्न 2 (क).

वैद्युत द्विध्रुव के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर:

वैद्युत द्विध्रुव के दो उदाहरण निम्नवत हैं:

1. जल का अणु (H₂O)

2. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का अणु (HCl)

प्रश्न 2 (ख).

विभव प्रवणता की परिभाषा दीजिए।

उत्तर:

विभव प्रवणता (Potential Gradient):

वैद्युत क्षेत्र की दिशा में दूरी के साथ विभव में परिवर्तन की दर को विभव प्रवणता कहते हैं।

विभव प्रवणता = -(dV)/(dx)

इसका SI मात्रक वोल्ट/मीटर (V/m) होता है।

प्रश्न 2 (ग).

विशिष्ट चालकता का मात्रक तथा विमा लिखिए।

उत्तर:

• मात्रक: ओम⁻¹ मीटर⁻¹ (Ω⁻¹ m⁻¹) या सीमेन्स/मीटर (S·m⁻¹)

• विमा: [M⁻¹L⁻³T³A²]

प्रश्न 2 (घ).

तरंगाग्र किसे कहते हैं?

उत्तर:

तरंगाग्र (Wavefront):

किसी माध्यम में खींचा गया वह काल्पनिक पृष्ठ जिस पर स्थित सभी कण कम्पन की समान कला (same phase) में होते हैं, तरंगाग्र कहलाता है।

प्रश्न 2 (ङ).

परावर्तक दूरदर्शी की विशेषताएं लिखिए।

उत्तर:

परावर्तक दूरदर्शी की दो प्रमुख विशेषताएं निम्न हैं:

1. इसमें बड़े द्वारक वाले अवतल दर्पण का उपयोग होता है, जिससे अपवर्तक दूरदर्शी की तुलना में अधिक चमकीला प्रतिबिम्ब प्राप्त होता है।

2. इसमें लेन्सों के न होने के कारण वर्ण विपथन (Chromatic Aberration) का दोष पूर्णतः समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 2 (च).

दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य किसे कहते हैं?

उत्तर:

दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य (de Broglie Wavelength):

गतिमान द्रव्य कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि) के साथ सम्बद्ध तरंगों को द्रव्य तरंगें कहते हैं। इन तरंगों की तरंगदैर्घ्य को दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य (λ) कहते हैं।

λ = (h)/(p) = (h)/(mv)

जहाँ h प्लांक नियतांक, m कण का द्रव्यमान तथा v उसका वेग है।

प्रश्न 3 (क).

ओमीय तथा अन-ओमीय प्रतिरोधों के लिए वोल्टता (V) तथा धारा (I) के बीच ग्राफ खींचिए।

उत्तर:

1. ओमीय प्रतिरोध (Ohmic Resistance):

• ऐसे चालक जो ओम के नियम का पूर्णतः पालन करते हैं (जैसे ताँबे का तार)।

• इसका V-I ग्राफ मूल बिन्दु से होकर जाने वाली एक सीधी रेखा प्राप्त होती है।

ग्राफ: V (y-अक्ष) बनाम I (x-अक्ष) → मूल बिंदु से गुजरती सीधी रेखा

2. अन-ओमीय प्रतिरोध (Non-Ohmic Resistance):

• ऐसे परिपथ जो ओम के नियम का पालन नहीं करते (जैसे टॉर्च का बल्ब, जंक्शन डायोड)।

• इसका V-I ग्राफ एक वक्र (Non-linear Curve) प्राप्त होता है।

प्रश्न 3 (ख).

ऐम्पियर का परिपथीय नियम क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

ऐम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law):

किसी बंद समतल वक्र (लूप) की सीमा के अनुदिश चुम्बकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन, उस बंद लूप द्वारा परिबद्ध कुल धारा I का μ₀ गुना होता है।

B · d l = μ₀ I

जहाँ:

• B = चुम्बकीय क्षेत्र

• d l = परिपथ की लम्बाई का अल्पांश

• μ₀ = निर्वात की चुम्बकशीलता (4π × 10⁻⁷ T·m/A)

• I = बंद परिपथ से गुजरने वाली कुल धारा

प्रश्न 3 (ग).

उत्तल लेन्स के प्रथम फोकस की परिभाषा लिखिए।

उत्तर:

उत्तल लेन्स का प्रथम फोकस (F₁):

उत्तल लेन्स की मुख्य अक्ष पर स्थित वह निश्चित बिन्दु, जिससे होकर जाने वाली प्रकाश किरणें लेन्स से अपवर्तित होने के पश्चात मुख्य अक्ष के समानान्तर हो जाती हैं, उत्तल लेन्स का प्रथम फोकस कहलाता है।

प्रश्न 3 (घ).

काँच और जल के निरपेक्ष अपवर्तनांक 3/2 तथा 4/3 हैं। काँच और जल में प्रकाश की चाल का अनुपात ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी (Given):

• काँच का अपवर्तनांक n_g = (3)/(2)

• जल का अपवर्तनांक n_w = (4)/(3)

सूत्र (Formula):

माध्यम में प्रकाश की चाल v = (c)/(n)

(v_g)/(v_w) = (n_w)/(n_g)

मान रखने पर (Substitution):

(v_g)/(v_w) = (4/3)/(3/2)

गणना (Calculation):

(v_g)/(v_w) = (4 × 2)/(3 × 3) = (8)/(9)

अंतिम उत्तर (Final Answer):

काँच और जल में प्रकाश की चालों का अनुपात 8 : 9 है।

प्रश्न 4 (क).

वैद्युत विभव तथा वैद्युत विभवान्तर से क्या तात्पर्य है? इनके मात्रक लिखिए।

उत्तर:

1. वैद्युत विभव (Electric Potential):

• अनंत से किसी एकांक धनावेश को वैद्युत क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिन्दु पर वैद्युत विभव कहते हैं।

• सूत्र: V = (W)/(q₀)

• मात्रक: वोल्ट (Volt) या जूल/कूलॉम (J/C)

2. वैद्युत विभवान्तर (Electric Potential Difference):

• वैद्युत क्षेत्र में एकांक धनावेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन दो बिन्दुओं के बीच वैद्युत विभवान्तर कहते हैं।

• सूत्र: Δ V = V_B - V_A = (W)/(q₀)

• मात्रक: वोल्ट (Volt) या जूल/कूलॉम (J/C)

प्रश्न 4 (ख).

वैद्युत फ्लक्स ऋणात्मक तथा धनात्मक कब होता है?

उत्तर:

वैद्युत फ्लक्स _E = E · d A = E dA θ होता है।

1. धनात्मक वैद्युत फ्लक्स:

• जब वैद्युत बल रेखाएं पृष्ठ से बाहर निकलती हैं (θ < 90^°, विशेषतः θ = 0^°), तब वैद्युत फ्लक्स धनात्मक होता है।

2. ऋणात्मक वैद्युत फ्लक्स:

• जब वैद्युत बल रेखाएं पृष्ठ में प्रवेश करती हैं (90^° < θ ≤ 180^°, विशेषतः θ = 180^°), तब वैद्युत फ्लक्स ऋणात्मक होता है।

प्रश्न 4 (ग).

हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन 5.0 × 10⁻¹¹ मीटर त्रिज्या की कक्षा में 2 × 10⁶ मीटर/सेकण्ड की चाल से गति कर रहा है। परमाणु का चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी (Given):

• त्रिज्या r = 5.0 × 10⁻¹¹ m

• चाल v = 2 × 10⁶ m/s

• इलेक्ट्रॉन का आवेश e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C

सूत्र (Formula):

चुम्बकीय आघूर्ण M = I × A = ((e)/(T)) × (π r²) = ((e v)/(2π r)) × π r² = (1)/(2) e v r

मान रखने पर (Substitution):

M = (1)/(2) × (1.6 × 10⁻¹⁹) × (2 × 10⁶) × (5.0 × 10⁻¹¹)

गणना (Calculation):

M = 0.8 × 10⁻¹⁹ × 2 × 10⁶ × 5.0 × 10⁻¹¹

M = 8.0 × 10⁻²⁴ A·m²

अंतिम उत्तर (Final Answer):

परमाणु का चुम्बकीय आघूर्ण 8.0 × 10⁻²⁴ A·m² (ऐम्पीयर-मीटर²) है।

प्रश्न 4 (घ).

किसी धातु का कार्यफलन 1.8 eV है। प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन के लिए इसका देहली तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी (Given):

• कार्यफलन W = 1.8 eV = 1.8 × 1.6 × 10⁻¹⁹ J = 2.88 × 10⁻¹⁹ J

• प्लांक नियतांक h = 6.6 × 10⁻³⁴ J·s

• प्रकाश की चाल c = 3 × 10⁸ m/s

सूत्र (Formula):

W = (hc)/(λ₀) λ₀ = (hc)/(W)

मान रखने पर (Substitution):

λ₀ = 6.6 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸2.88 × 10⁻¹⁹

गणना (Calculation):

λ₀ = 19.8 × 10⁻²⁶2.88 × 10⁻¹⁹ = 6.875 × 10⁻⁷ m = 6875 अंतिम उत्तर (Final Answer):

देहली तरंगदैर्घ्य λ₀ = 6.875 × 10⁻⁷ m या 6875 है।

प्रश्न 4 (ङ).

व्यतिकरण तथा विवर्तन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

गुण व्यतिकरण (Interference) विवर्तन (Diffraction)

उत्पत्ति दो पृथक्कृत कला-सम्बद्ध स्रोतों से आने वाली दो प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण से होता है। एक ही तरंगाग्र के विभिन्न बिन्दुओं से चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाओं के बीच अध्यारोपण से होता है।

दीप्त फ्रिंजों की तीव्रता सभी दीप्त (bright) फ्रिंजों की तीव्रता समान होती है। केन्द्रीय उच्छिष्ट की तीव्रता अधिकतम होती है तथा अन्य उच्छिष्टों की तीव्रता तेजी से घटती है।

फ्रिंज चौड़ाई सामान्यतः सभी फ्रिंजों की चौड़ाई समान होती है। फ्रिंज चौड़ाई समान नहीं होती (केन्द्रीय उच्छिष्ट अन्य की तुलना में दोगुना चौड़ा होता है)।

प्रश्न 5 (क).

संलग्न चित्र में प्रदर्शित परिपथ में व्हीटस्टोन सेतु में सन्धि B व सन्धि D के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी (Given):

चित्रानुसार:

• R_AB = 1 Ω, R_BC = 1 Ω

• R_AD = 1.5 Ω, R_DC = 1 Ω

• कुल विभव V_AC = E = 2 V

गणना (Calculation):

1. ऊपरी शाखा ABC में:

• कुल प्रतिरोध R₁ = 1 + 1 = 2 Ω

• धारा I₁ = V_ACR₁ = (2)/(2) = 1 A

• बिन्दु A और B के बीच विभवान्तर:

V_A - V_B = I₁ × R_AB = 1 × 1 = 1 V

2. निचली शाखा ADC में:

• कुल प्रतिरोध R₂ = 1.5 + 1 = 2.5 Ω

• धारा I₂ = V_ACR₂ = (2)/(2.5) = 0.8 A

• बिन्दु A और D के बीच विभवान्तर:

V_A - V_D = I₂ × R_AD = 0.8 × 1.5 = 1.2 V

3. B तथा D के बीच विभवान्तर (V_B - V_D):

V_B - V_D = (V_A - V_D) - (V_A - V_B)

V_B - V_D = 1.2 V - 1.0 V = 0.2 V

अंतिम उत्तर (Final Answer):

सन्धि B तथा D के बीच विभवान्तर 0.2 V है।

प्रश्न 5 (ख).

सेल के वैद्युत वाहक बल से क्या तात्पर्य है? किसी सेल के वैद्युत वाहक बल का मान किस पर निर्भर करता है?

उत्तर:

• वैद्युत वाहक बल (EMF): एकांक आवेश को पूरे परिपथ में (सेल सहित) प्रवाहित करने में सेल द्वारा दी गई कुल ऊर्जा को सेल का वैद्युत वाहक बल (E) कहते हैं। E = (W)/(q)।

• निर्भरता:

1. इलेक्ट्रोडों (प्लेटों) के पदार्थ/प्रकृति पर।

2. वैद्युत अपघट्य (electrolyte) की प्रकृति तथा सान्द्रता पर।

3. तापक्रम पर।

(नोट: सेल का EMF प्लेटों के क्षेत्रफल या उनके बीच की दूरी पर निर्भर नहीं करता।)

प्रश्न 5 (ग).

बायो–सेवर्ट के नियम का उल्लेख कीजिए। सूत्र भी लिखिए।

उत्तर:

बायो–सेवर्ट का नियम (Biot–Savart Law):

किसी धारावाही चालक के लघु अल्पांश (Δ l) द्वारा किसी बिन्दु P पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र Δ B:

1. चालक में प्रवाहित धारा I के समानुपाती होता है (Δ B ∝ I)।

2. अल्पांश की लम्बाई Δ l के समानुपाती होता है (Δ B ∝ Δ l)।

3. अल्पांश तथा अल्पांश को बिन्दु से मिलाने वाली रेखा के बीच के कोण के θ के समानुपाती होता है (Δ B ∝ θ)।

4. बिन्दु की अल्पांश से दूरी r के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है (Δ B ∝ (1)/(r²))।

सूत्र (Formula):

Δ B = (μ₀)/(4π) (I Δ l θ)/(r²)

जहाँ (μ₀)/(4π) = 10⁻⁷ T·m/A एक आनुपातिक नियतांक है।

प्रश्न 5 (घ).

एक वस्तु का प्रतिबिम्ब, वस्तु से 40 सेमी दूरी पर बनता है जब एक लेन्स को इनके ठीक बीच में रखा जाता है। लेन्स की क्षमता ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दी गई जानकारी (Given):

वस्तु और प्रतिबिम्ब के बीच की कुल दूरी = 40 cm

चूँकि लेन्स को वस्तु व प्रतिबिम्ब के ठीक मध्य में रखा गया है:

• वस्तु की दूरी u = -20 cm = -0.2 m

• प्रतिबिम्ब की दूरी v = +20 cm = +0.2 m

सूत्र (Formula):

(1)/(f) = (1)/(v) - (1)/(u)

क्षमता P = (1)/(f(मीटर में))

मान रखने पर (Substitution):

(1)/(f) = (1)/(20) - (-(1)/(20)) = (1)/(20) + (1)/(20) = (2)/(20) = (1)/(10) cm⁻¹

f = +10 cm = +0.1 m

गणना (Calculation):

P = (1)/(+0.1) = +10 D

अंतिम उत्तर (Final Answer):

लेन्स की क्षमता +10 D (डायोप्टर) है।

प्रश्न 5 (ङ).

हाइगेन्स के तरंग सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

हाइगेन्स का तरंग सिद्धान्त (Huygens' Wave Theory):

1. प्रकाश तरंग रूप में: प्रकाश स्रोत से प्रकाश तरंगों के रूप में उत्सर्जित होकर सभी दिशाओं में प्रकाश की चाल से संचरित होता है।

2. ईथर माध्यम: हाइगेन्स ने माना कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में एक सर्वव्यापी, काल्पनिक, भारहीन तथा अत्यधिक प्रत्यास्थ माध्यम 'ईथर' फैला हुआ है, जिसके माध्यम से प्रकाश तरंगें संचरित होती हैं।

3. दृष्टि संवेदना: जब ये तरंगें हमारी आँख की रेटिना पर गिरती हैं, तो हमें वस्तुओं के दिखाई देने की संवेदना होती है।

4. रंगों का कारण: प्रकाश के भिन्न-भिन्न रंगों का कारण प्रकाश तरंगों की भिन्न-भिन्न तरंगदैर्घ्य होना है।

प्रश्न 6.

यंग के द्विक रेखा छिद्र के प्रयोग की सहायता से फ्रिंज की चौड़ाई का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

अथवा

स्थिर वैद्युतिकी में गॉस की प्रमेय का उल्लेख कीजिए तथा इसे सिद्ध कीजिए।

उत्तर:

(मुख्य प्रश्न का उत्तर: यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग से फ्रिंज चौड़ाई का व्यंजक)

1. मानना:

दो कला-सम्बद्ध प्रकाश स्रोत S₁ तथा S₂ परस्पर d दूरी पर स्थित हैं। पर्दा स्रोतों से D दूरी पर रखा है। पर्दे के केन्द्र O से x दूरी पर बिन्दु P पर व्यतिकरण फ्रिंज बनती है।

2. पथांतर (Path Difference):

S₂P² - S₁P² = [D² + (x + (d)/(2))²] - [D² + (x - (d)/(2))²] = 2xd

(S₂P - S₁P)(S₂P + S₁P) = 2xd

चूँकि d D तथा x D, S₂P + S₁P ≈ 2D मान सकते हैं।

पथांतर Δ x = S₂P - S₁P = (xd)/(D)

3. दीप्त फ्रिंज (Bright Fringe) के लिए:

Δ x = nλ (xₙ d)/(D) = nλ xₙ = (n D λ)/(d)

4. फ्रिंज चौड़ाई (β):

दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी फ्रिंज चौड़ाई कहलाती है:

β = xₙ - xₙ₋₁ = (n D λ)/(d) - ((n-1) D λ)/(d) = (Dλ)/(d)

(अथवा का उत्तर: गॉस की प्रमेय)

• कथन (Statement):

किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स ( _E), उस पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश q का (1)/( ₀) गुना होता है।

_E = E · d A = (q)/( ₀)

• उपपत्ति (Proof):

माना बिन्दु आवेश +q एक बंद पृष्ठ S के भीतर स्थित है। पृष्ठ पर एक अल्पांश क्षेत्र d A लेते हैं।

अल्पांश से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स:

d _E = E · d A = E dA θ

कूलाम के नियम से, E = (1)/(4π ₀) (q)/(r²)

d _E = (1)/(4π ₀) (q)/(r²) dA θ = (q)/(4π ₀) dΩ

जहाँ dΩ = (dA θ)/(r²) घन कोण है।

संपूर्ण बंद पृष्ठ के लिए समाकलन करने पर ( dΩ = 4π):

_E = d _E = (q)/(4π ₀) (4π) = (q)/( ₀)

इति सिद्धम्।

प्रश्न 7.

द्रव्य तरंगें क्या हैं? दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।

अथवा

संधारित्र की परिभाषा दीजिए। दर्शाए गए चित्र में परिपथ के प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

(मुख्य प्रश्न का उत्तर: द्रव्य तरंगें एवं दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य)

• द्रव्य तरंगें (Matter Waves):

दी-ब्रॉग्ली की परिकल्पना के अनुसार, जब कोई द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि) गतिमान होता है तो वह तरंग की भाँति व्यवहार करता है। इस गतिमान कण से सम्बद्ध तरंग को द्रव्य तरंग कहते हैं।

• दे-ब्रॉग्ली सूत्र का व्युत्पन्न:

आइंस्टाइन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण के अनुसार, फोटॉन की ऊर्जा:

E = mc²

प्लांक की क्वांटम परिकल्पना के अनुसार, फोटॉन की ऊर्जा:

E = hν = (hc)/(λ)

दोनों की तुलना करने पर:

mc² = (hc)/(λ) mc = (h)/(λ)

चूँकि p = mc (फोटॉन का संवेग है):

p = (h)/(λ) λ = (h)/(p)

यदि m द्रव्यमान का कण v वेग से गतिमान हो, तो उसका संवेग p = mv होगा:

λ = (h)/(mv)

(अथवा का उत्तर: संधारित्र तथा परिपथ में आवेश)

• संधारित्र की परिभाषा:

संधारित्र एक ऐसा समायोजन है जिसमें किसी चालक के आकार में परिवर्तन किए बिना उस पर पर्याप्त मात्रा में आवेश संचित किया जा सकता है। (C = (Q)/(V))

• परिपथ के प्रत्येक संधारित्र पर आवेश:

चित्रानुसार, 20 V DC स्रोत से संधारित्र पूर्णतः आवेशित हो जाते हैं और DC के लिए खुला परिपथ (Open Circuit) की भाँति कार्य करते हैं। अतः 10 Ω प्रतिरोध से कोई स्थायी धारा प्रवाहित नहीं होगी।

1. बायाँ पथ (6 μF तथा 12 μF श्रेणीक्रम में):

• तुल्य धारिता C₁ = (6 × 12)/(6 + 12) = (72)/(18) = 4 μF

• श्रेणीक्रम में आवेश समान होता है:

Q₁ = C₁ × V = 4 μF × 20 V = 80 μC

• 6 μF पर आवेश = 80 μC

• 12 μF पर आवेश = 80 μC

2. दायाँ पथ (3 μF तथा 4 μF श्रेणीक्रम में):

• तुल्य धारिता C₂ = (3 × 4)/(3 + 4) = (12)/(7) μF

• श्रेणीक्रम में आवेश समान होता है:

Q₂ = C₂ × V = (12)/(7) μF × 20 V = (240)/(7) μC ≈ 34.29 μC

• 3 μF पर आवेश = (240)/(7) μC (≈ 34.29 μC)

• 4 μF पर आवेश = (240)/(7) μC (≈ 34.29 μC)

प्रश्न 8.

तरंगाग्र क्या होता है? हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त से तरंगों के अपवर्तन की व्याख्या कीजिए।

अथवा

मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के लिए वैद्युत धारा के पद में व्यंजक प्राप्त कीजिए।

उत्तर:

(मुख्य प्रश्न का उत्तर: हाइगेन्स के सिद्धान्त द्वारा अपवर्तन की व्याख्या)

• तरंगाग्र: समान कला में कम्पन करने वाले कणों का काल्पनिक पृष्ठ तरंगाग्र कहलाता है।

• अपवर्तन की व्याख्या:

1. माना AB एक समतल तरंगाग्र माध्यम-1 में चाल v₁ से आकर अपवर्तक पृष्ठ ZZ' पर कोण i पर आपतित होता है।

2. माना तरंगाग्र के सिरे B को पृष्ठ के बिन्दु A' तक पहुँचने में t समय लगता है, तो BA' = v₁ t।

3. इसी t समय में बिन्दु A से द्वितीयक तरंगिका द्वितीय माध्यम में चाल v₂ से AB' = v₂ t दूरी तय करती है।

4. समकोण त्रिभुज Δ ABA' में:

i = (BA')/(AA') = (v₁ t)/(AA')

5. समकोण त्रिभुज Δ AB'A' में:

r = (AB')/(AA') = (v₂ t)/(AA')

6. दोनों का अनुपात लेने पर:

( i)/( r) = (v₁ t / AA')/(v₂ t / AA') = (v₁)/(v₂) = स्थिरांक = ₁n₂

यह स्नेल का अपवर्तन का नियम है।

(अथवा का उत्तर: अनुगमन वेग तथा वैद्युत धारा में सम्बन्ध)

1. माना किसी चालक तार की लम्बाई L, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A तथा एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n है।

2. चालक का आयतन = A · L

3. चालक में कुल मुक्त इलेक्ट्रॉन = n · A · L

4. कुल आवेश Q = n · A · L · e

5. यदि इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग (अपवाह वेग) v_d हो, तो इलेक्ट्रॉनों द्वारा चालक को पार करने में लगा समय:

t = (L)/(v_d)

6. वैद्युत धारा की परिभाषा से:

I = (Q)/(t) = (n A L e)/(L / v_d)

I = n e A v_d

प्रश्न 9.

बायो–सेवर्ट नियम के आधार पर किसी धारावाही चालक से उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का परिकलन कीजिए।

अथवा

किसी उत्तल–गोलीय पृष्ठ पर प्रकाश के अपवर्तन के लिए सूत्र (n)/(v) - (1)/(u) = (n-1)/(R) स्थापित कीजिए। प्रयुक्त प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।

उत्तर:

(मुख्य प्रश्न का उत्तर: धारावाही वृत्ताकार कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र)

1. माना R त्रिज्या की एक वृत्ताकार कुण्डली में I धारा प्रवाहित हो रही है।

2. बायो-सेवर्ट नियम के अनुसार, इसके किसी छोटे अल्पांश Δ l द्वारा केन्द्र O पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र:

Δ B = (μ₀)/(4π) (I Δ l 90^°)/(R²) = (μ₀)/(4π) (I Δ l)/(R²)

3. सम्पूर्ण कुण्डली के कारण केन्द्र पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र B:

B = Σ Δ B = (μ₀ I)/(4π R²) Σ Δ l

4. पूरे वृत्ताकार पाश की परिधि Σ Δ l = 2π R:

B = (μ₀ I)/(4π R²) (2π R) = (μ₀ I)/(2R)

(अथवा का उत्तर: उत्तल गोलीय पृष्ठ से अपवर्तन का सूत्र)

1. माना एक उत्तल गोलीय अपवर्तक पृष्ठ का ध्रुव P, वक्रता केन्द्र C तथा वक्रता त्रिज्या R है। सघन माध्यम का अपवर्तनांक n है।

2. मुख्य अक्ष पर रखी वस्तु O से किरण अपवर्तित होकर I पर प्रतिबिम्ब बनाती है। आपतन कोण i तथा अपवर्तन कोण r हैं।

3. स्नेल के नियम से छोटे कोणों के लिए:

( i)/( r) ≈ (i)/(r) = n i = n r

4. माना अक्ष से बने कोण क्रमशः α, β, γ हैं। त्रिभुज के बहिष्कोण प्रमेय से:

i = α + γ

γ = r + β r = γ - β

5. मान रखने पर:

α + γ = n(γ - β) α + nβ = (n-1)γ

6. कोण छोटे होने पर (α ≈ α = (-y)/(u), β ≈ β = (y)/(v), γ ≈ γ = (-y)/(R)):

(-y)/(u) + n((y)/(v)) = (n-1)((-y)/(R))

दोनों पक्षों को y से विभाजित करने तथा पुनर्व्यवस्थित करने पर:

(n)/(v) - (1)/(u) = (n-1)/(R)

इति सिद्धम्।