(मुख्य प्रश्न का उत्तर: द्रव्य तरंगें एवं दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य)
• द्रव्य तरंगें (Matter Waves):
दी-ब्रॉग्ली की परिकल्पना के अनुसार, जब कोई द्रव्य कण (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि) गतिमान होता है तो वह तरंग की भाँति व्यवहार करता है। इस गतिमान कण से सम्बद्ध तरंग को द्रव्य तरंग कहते हैं।
• दे-ब्रॉग्ली सूत्र का व्युत्पन्न:
आइंस्टाइन के द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण के अनुसार, फोटॉन की ऊर्जा:
E = mc²
प्लांक की क्वांटम परिकल्पना के अनुसार, फोटॉन की ऊर्जा:
E = hν = (hc)/(λ)
दोनों की तुलना करने पर:
mc² = (hc)/(λ) mc = (h)/(λ)
चूँकि p = mc (फोटॉन का संवेग है):
p = (h)/(λ) λ = (h)/(p)
यदि m द्रव्यमान का कण v वेग से गतिमान हो, तो उसका संवेग p = mv होगा:
λ = (h)/(mv)
(अथवा का उत्तर: संधारित्र तथा परिपथ में आवेश)
• संधारित्र की परिभाषा:
संधारित्र एक ऐसा समायोजन है जिसमें किसी चालक के आकार में परिवर्तन किए बिना उस पर पर्याप्त मात्रा में आवेश संचित किया जा सकता है। (C = (Q)/(V))
• परिपथ के प्रत्येक संधारित्र पर आवेश:
चित्रानुसार, 20 V DC स्रोत से संधारित्र पूर्णतः आवेशित हो जाते हैं और DC के लिए खुला परिपथ (Open Circuit) की भाँति कार्य करते हैं। अतः 10 Ω प्रतिरोध से कोई स्थायी धारा प्रवाहित नहीं होगी।
1. बायाँ पथ (6 μF तथा 12 μF श्रेणीक्रम में):
• तुल्य धारिता C₁ = (6 × 12)/(6 + 12) = (72)/(18) = 4 μF
• श्रेणीक्रम में आवेश समान होता है:
Q₁ = C₁ × V = 4 μF × 20 V = 80 μC
• 6 μF पर आवेश = 80 μC
• 12 μF पर आवेश = 80 μC
2. दायाँ पथ (3 μF तथा 4 μF श्रेणीक्रम में):
• तुल्य धारिता C₂ = (3 × 4)/(3 + 4) = (12)/(7) μF
• श्रेणीक्रम में आवेश समान होता है:
Q₂ = C₂ × V = (12)/(7) μF × 20 V = (240)/(7) μC ≈ 34.29 μC
• 3 μF पर आवेश = (240)/(7) μC (≈ 34.29 μC)
• 4 μF पर आवेश = (240)/(7) μC (≈ 34.29 μC)