खण्ड - 'अ' / PART - 'A'
(बहुविकल्पीय प्रश्न / Multiple Choice Questions)
UP Board Class 12th सामान्य हिंदी Half Yearly Paper 2026 PPI Code
कक्षा 12वीं · हिंदी · 2026 · अर्धवार्षिक
खण्ड - 'अ' / PART - 'A'
(बहुविकल्पीय प्रश्न / Multiple Choice Questions)
(क) रानी केतकी की कहानी के लेखक कौन हैं-
(i) राजा लक्ष्मण सिंह
(ii) श्रद्धा राम फिल्लौरी
(iii) इंशा अल्ला खाँ
(iv) मुंशी सदासुख लाल
उत्तर:
(iii) इंशा अल्ला खाँ
(ख) सरस्वती पत्रिका के सम्पादककर्ता कौन थे-
(i) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ii) श्यामसुन्दर दास
(iii) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
(iv) हरदेव बाहरी
उत्तर: (i) महावीर प्रसाद द्विवेदी
(ग) चौरासी वैष्णवन की वार्ता के लेखक कौन हैं-
(i) विट्ठलनाथ
(ii) गोकुलनाथ
(iii) नाभादास
(iv) चतुर्भुजदास
उत्तर: (ii) गोकुलनाथ
(घ) बालकृष्ण भट्ट द्वारा सम्पादित पत्रिका है-
(i) कवि वचन सुधा
(ii) हिन्दी प्रदीप
(iii) विशाल भारत
(iv) साहित्य संदेश
उत्तर: (ii) हिन्दी प्रदीप
(ङ) 'शेखर एक जीवनी' के लेखक कौन हैं-
(i) जयशंकर प्रसाद
(ii) भीष्म साहनी
(iii) भगवतीचरण वर्मा
(iv) सच्चिदानन्द हीरानन्द अज्ञेय
उत्तर: (iv) सच्चिदानन्द हीरानन्द अज्ञेय
(क) तारसप्तक का प्रकाश वर्ष क्या है-
(i) 1954 ई.
(ii) 1943 ई.
(iii) 1938 ई.
(iv) 1936 ई.
उत्तर:
(ii) 1943 ई.
(ख) नयी कविता काव्य संकलन के सम्पादककर्ता कौन थे-
(i) रामेश्वर शुक्ल और डॉ. रामविलास शर्मा
(ii) डॉ. जगदीशगुप्त और रामस्वरूप चतुर्वेदी
(iii) बालकृष्ण शर्मा और रामधारी सिंह दिनकर
(iv) शिवमंगल सिंह सुमन
उत्तर: (ii) डॉ. जगदीशगुप्त और रामस्वरूप चतुर्वेदी
(ग) प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना कब हुई-
(i) 1943 ई. में
(ii) 1954 ई. में
(iii) 1938 ई. में
(iv) 1936 ई. में
उत्तर: (iv) 1936 ई. में
(घ) चिदम्बरा किसकी रचना है-
(i) महादेवी वर्मा
(ii) सुमित्रानन्दन पंत
(iii) माखनलाल चतुर्वेदी
(iv) मैथिलीशरण गुप्त
उत्तर: (ii) सुमित्रानन्दन पंत
(ङ) दीपशिखा किसकी रचना है-
(i) सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
(ii) महादेवी वर्मा
(iii) सुमित्रानन्दन पंत
(iv) जयशंकर प्रसाद
उत्तर: (ii) महादेवी वर्मा
खण्ड - 'ब' / PART - 'B'
दिए गये गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
[गद्यांश: जन का प्रवाह अनंत होता है...]
(i) पाठ का शीर्षक एवं लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर:
• शीर्षक: राष्ट्र का स्वरूप
• लेखक: डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल
(ii) गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: लेखक का कथन है कि राष्ट्रीय जन का जीवन सतत बहने वाली नदी की धारा के समान है। जिस प्रकार नदी निरंतर बहती हुई अनेक घाटों का निर्माण करती है, उसी प्रकार मनुष्य भी अपने निरंतर कर्म और कठिन परिश्रम द्वारा सभ्यता और संस्कृति के अनेक नए सोपानों एवं घाटों का निर्माण करता है।
(iii) सूर्य की रश्मियों का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर: सूर्य की रश्मियाँ नित्य प्रातःकाल पूरे भुवन (संसार) को अपने अमृत रूपी प्रकाश से भर देती हैं, जिसके कारण पृथ्वी पर जीवन बना रहता है।
(iv) 'घाटों का निर्माण' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'घाटों का निर्माण' का आशय मनुष्य द्वारा अपने सतत कर्म, श्रम और पुरुषार्थ के माध्यम से जीवन के विकास हेतु विभिन्न पड़ावों, सांस्कृतिक और सामाजिक उन्नति के साधनों को निर्मित करना है।
(v) 'सन्तत्-वाही' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'सन्तत्-वाही' का अर्थ 'निरंतर बहने वाला' या 'सदा प्रवाहित रहने वाला' होता है।
अथवा
[गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला...]
(i) प्रस्तुत गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर:
• पाठ का नाम: अशोक के फूल
• लेखक का नाम: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ii) गद्यांश के रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: लेखक कहते हैं कि कालिदास के साहित्य में अशोक के वृक्ष को जो अनुपम स्थान और सम्मान मिला, वह अद्वितीय है। जब सुंदरियाँ अपने कानों में अशोक के पुष्पों के आभूषण पहनती थीं, तो वे उनके कोमल गालों पर झूलते हुए तथा उनके लहराते काले केशों की शोभा को सौ गुना बढ़ा देते थे।
(iii) अशोक के फूल आने के सम्बंध में लेखक के क्या विचार हैं?
उत्तर: लेखक का मानना है कि कालिदास के साहित्य में वर्णित अशोक का फूल सुंदरियों के नूपुरयुक्त चरणों के मृदु आघात से खिलता था तथा कामदेव के इशारे पर वृक्षों की शाखाओं पर प्रस्फुटित हो उठता था।
(iv) किस फूल की सुन्दरता के कारण सुन्दरियाँ उन्हें अपने कानों का आभूषण बनाती हैं?
उत्तर: अशोक के फूल की सुंदरता के कारण सुंदरियाँ उन्हें अपने कानों का आभूषण (कर्णावतंस) बनाती हैं।
(v) संस्कृत के किस कवि ने अशोक को अपने साहित्य में स्थान दिया?
उत्तर: संस्कृत के महान कवि 'कालिदास' ने अशोक को अपने साहित्य में गौरवपूर्ण स्थान दिया।
दिए गये पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए–
[पद्यांश: मेरे प्यारे नव जलद से कंज से नेत्र वाले...]
(i) राधा किसके द्वारा कृष्ण को संदेश भिजवाती है?
उत्तर:
राधा पवन (हवा) को दूतिका बनाकर उसके माध्यम से श्रीकृष्ण को अपना संदेश भिजवाती हैं।
(ii) कृष्ण के सौंदर्य का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: श्रीकृष्ण नवीन जल से भरे मेघ (नव जलद) के समान श्याम वर्ण वाले और कमल (कंज) के समान विशाल एवं सुंदर नेत्रों वाले हैं।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: राधिकाजी पवन-दूतिका से कहती हैं कि मथुरा जाने के बाद श्रीकृष्ण पुनः लौटकर ब्रज नहीं आए और न ही उन्होंने कोई संदेश भेजा। उनके विरह-वियोग में मैं रो-रोकर व्याकुल एवं पागल सी हो रही हूँ।
(iv) राधा की मनोदशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर: राधा श्री कृष्ण के वियोग में अत्यधिक व्यथित, रो-रोकर कातर एवं बावरी (पागल) हो रही हैं। उनका हृदय अत्यंत दुःख से भरा हुआ है।
(v) उपयुक्त पद्यांश का शीर्षक और कवि का नाम लिखिए।
उत्तर:
• शीर्षक: पवन-दूतिका
• कवि: अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
अथवा
[पद्यांश: मुझे फूल मत मारो...]
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक एवं रचयिता का नाम लिखिए।
उत्तर:
• शीर्षक: गीत (साकेत से)
• रचयिता: मैथिलीशरण गुप्त
(ii) रेखांकित पंक्ति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: विरहिणी उर्मिला कामदेव से प्रार्थना करती हैं कि हे मदन! यदि तुममें बल (सामर्थ्य) है तो मेरे माथे पर सुशोभित इस सिंदूर-बिंदु को देखो, जो शिवजी के तीसरे नेत्र के समान प्रलयंकारी है और तुम्हें भस्म कर सकता है।
(iii) कवि ने 'अबला बाला वियोगिनी' को किसके लिए प्रयोग किया हैं?
उत्तर: 'अबला बाला वियोगिनी' शब्द का प्रयोग लक्ष्मण जी की पत्नी 'उर्मिला' के लिए किया गया है।
(iv) 'सिन्दूर बिन्दु' की तुलना किससे की गयी है ?
उत्तर: 'सिन्दूर बिन्दु' की तुलना भगवान शिव के तीसरे नेत्र ('हरनेत्र') से की गयी है।
(v) चरण-धूलि में कौन सा समास हैं ?
उत्तर: 'चरण-धूलि' (चरण की धूलि) में 'तत्पुरुष समास' (संबध तत्पुरुष समास) है।
(क) वासुदेवशरण अग्रवाल का साहित्यिक परिचय एवं रचनाएँ:
उत्तर:
• साहित्यिक परिचय: डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल हिंदी साहित्य में भारतीय संस्कृति, पुरातत्व और इतिहास के प्रकांड विद्वान एवं अनुसंधानकर्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने निबंध, शोध और संपादन के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया। वे निबंधकार और शोधकर्ता के रूप में हिंदी साहित्य में सर्वोच्च स्थान रखते हैं।
• प्रमुख रचनाएँ:
1. निबंध-संग्रह: 'पृथ्वीपुत्र', 'कल्पवृक्ष', 'मातृभूमि', 'कला और संस्कृति'।
2. शोध प्रबंध: 'पाणिनिकालीन भारतवर्ष'।
3. सम्पादन: 'पद्मावत' (मलिक मोहम्मद जायसी) की संजीवनी व्याख्या, 'हर्षचरित' का सांस्कृतिक अध्ययन।
(ख) जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक परिचय एवं रचनाएँ:
उत्तर:
• साहित्यिक परिचय: महाकवि जयशंकर प्रसाद छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। वे एक महान नाटककार, कथाकार, निबंधकार और युगप्रवर्तक कवि थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, दार्शनिकता और मानवीय संवेदनाओं का अनुपम संगम देखने को मिलता है।
• प्रमुख कृतियाँ:
1. काव्य ग्रंथ: 'कामायनी' (महाकाव्य), 'आँसू', 'लहर', 'झरना', 'कानन कुसुम'।
2. नाटक: 'चंद्रगुप्त', 'स्कंदगुप्त', 'ध्रुवस्वामिनी', 'अजातशत्रु'।
3. उपन्यास: 'कंकाल', 'तितली', 'इरावती' (अपूर्ण)।
4. कहानी संग्रह: 'छाया', 'प्रतिध्वनि', 'आकाशदीप', 'इंद्रजाल'।
'पंचलाइट' कहानी का सारांश:
उत्तर:
'पंचलाइट' फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध आंचलिक कहानी है।
1. कहानी की पृष्ठभूमि: महतो टोली के ग्रामीण अशिक्षित लोग रामनवमी के मेले से चंदा करके एक 'पंचलाइट' (पेट्रोमैक्स) खरीदते हैं। पंचलाइट के आने पर टोले में उत्साह का माहौल बन जाता है और पूजा-कीर्तन की तैयारी की जाती है।
2. समस्या: जब पंचलाइट जलाने का समय आता है, तो पता चलता है कि टोले में किसी को पेट्रोमैक्स जलाना नहीं आता। दूसरी टोली के लोग उनका उपहास उड़ाने लगते हैं, जिससे महतो टोली के पंचों का सम्मान दाँव पर लग जाता है।
3. समाधान: टोले की मुनरी नामक लड़की बताती है कि गोधन पंचलाइट जलाना जानता है। गोधन को पंचों ने मुनरी से प्रेम करने के कारण जात से बाहर (हुक्का-पानी बंद) कर रखा था।
4. निष्कर्ष: गाँव की प्रतिष्ठा बचाने के लिए पंच गोधन को बुलाते हैं। गोधन बिना स्पिरिट के नारियल के तेल से पंचलाइट जला देता है। पंचलाइट के जलते ही टोले में खुशी की लहर दौड़ जाती है। पंच गोधन का सारा गुनाह माफ कर देते हैं और उसे गले लगा लेते हैं। यह कहानी यह संदेश देती है कि आवश्यकता पड़ने पर सामाजिक रूढ़ियाँ टूट जाती हैं।
'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'कुन्ती' का चरित्रांकन:
उत्तर:
रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित 'रश्मिरथी' काव्य में कुंती एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण, सहृदय और वात्सल्यमयी पात्रा हैं। उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. ममतामयी माता: कुंती एक सहृदय और वत्सला माँ हैं। यद्यपि लोकलाज के भय से उन्होंने नवजात कर्ण का त्याग कर दिया था, किंतु उनके मन में कर्ण के प्रति सदैव अगाध वात्सल्य और वेदना बनी रही।
2. पश्चाताप से पीड़ित: कुंती अपने जीवन भर कर्ण के परित्याग के अपराध-बोध और पश्चाताप की अग्नि में जलती रहती हैं। जब महाभारत युद्ध अवश्यंभावी हो जाता है, तो वे स्वयं कर्ण के पास जाकर अपनी भूल स्वीकार करती हैं।
3. भावी संहार से भयभीत: कुंती पांडवों और कर्ण के बीच होने वाले विनाशकारी युद्ध से आशंकित हैं। वे अपने पुत्रों की रक्षा हेतु कुरुक्षेत्र के युद्ध से पूर्व कर्ण को पांडवों के पक्ष में लाने का विनम्र प्रयास करती हैं।
4. स्वाभिमानी एवं धीर-गंभीर नारी: कुंती एक विवेकशील एवं धीर नारी हैं। कर्ण के कड़वे वचनों को सहकर भी वे उसे मातृवत् स्नेह एवं आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
खण्ड - 'ख'
(क) संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित अनुवाद:
[गद्यांश: संस्कृत साहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः...]
उत्तर:
• संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'संस्कृतसाहित्यस्य अनुशीलनम्' (या 'संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्') पाठ से उद्धृत है।
• अनुवाद: संस्कृत साहित्य के आदिकवि वाल्मीकि, महर्षि व्यास, कविकुलगुरु कालिदास और अन्य भास, भारवि, भवभूति आदि महाकवि अपने ग्रंथरत्नों द्वारा आज भी पाठकों के हृदय में विराजमान हैं। यह भाषा हमारे द्वारा माता के समान सम्माननीय और वंदनीय है, क्योंकि भारत माता की स्वतंत्रता, गौरव, अखंडता और सांस्कृतिक एकता संस्कृत के द्वारा ही सुरक्षित रह सकती है। यह संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ है। इसलिए ठीक ही कहा गया है— "भाषाओं में मुख्य, मधुर और अलौकिक देववाणी (संस्कृत) है।"
अथवा
[गद्यांश: यथैवोपकरणवतां जीवनं तथैव ते जीवनं स्यात्...]
उत्तर:
• संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'आत्मज्ञ एव सर्वज्ञः' पाठ से उद्धृत है।
• अनुवाद: (याज्ञवल्क्य ने कहा—) जैसा साधन-संपन्न लोगों का जीवन होता है, वैसा ही तुम्हारा भी जीवन हो जाएगा। धन से अमरता की आशा नहीं है। उस मैत्रेयी ने कहा— जिससे मैं अमर न हो सकूँगी, उसका मैं क्या करूँगी? महाराज, आप जो केवल अमरता का साधन जानते हैं, वही मुझे बताएँ। याज्ञवल्क्य बोले— तुम हमारी प्रिया (पत्नी) रही हो और प्रिय बोल रही हो। आओ, बैठो, मैं तुम्हारे लिए अमरता के साधन की व्याख्या करूँगा।
(ख) संस्कृत पद्यांश का संदर्भ सहित अनुवाद:
[पद्यांश: अभूत् प्राची पिङ्गा रसपतिरिव प्राप्य कनकं...]
उत्तर:
• संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'सुभाषितरत्नानि' पाठ से उद्धृत है।
• अनुवाद: पूर्व दिशा स्वर्ण को प्राप्त करके पारे के समान पीली (स्वर्णमयी) हो गई है। मूर्खों की सभा में गँवार की तरह चंद्रमा कांतिहीन (निस्तेज) हो गया है। उद्यमहीन राजाओं की भांति तारे क्षण भर में क्षीण (गायब) हो गए हैं। और धनहीनों के गुणों की भाँति दीपक अब सुशोभित नहीं हो रहे हैं (अर्थात् बुझ गए हैं)।
अथवा
[पद्यांश: न मे रोचते भद्रं व उलूकस्याभिषेचनम्...]
उत्तर:
• संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'जातककथा' (उलूकजातकम्) पाठ से उद्धृत है।
• अनुवाद: (कौआ बोला—) इस उल्लू का राजा के रूप में राज्याभिषेक मुझे अच्छा नहीं लगता। इस अक्रोधित (बिना क्रोध वाले) उल्लू का मुँह तो देखो, क्रोधित होने पर इसका मुँह कैसा (भयानक) होगा!
निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों का अर्थ एवं वाक्य प्रयोग:
(क) आँखों का तारा होना
• अर्थ: अत्यधिक प्यारा होना।
• वाक्य प्रयोग: श्री रामचंद्र जी अपने माता-पिता की आँखों के तारे थे।
(ख) गागर में सागर भरना
• अर्थ: थोड़े शब्दों में बहुत बड़ी बात कहना।
• वाक्य प्रयोग: कविवर बिहारी जी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
(ग) अन्धे की लकड़ी होना
• अर्थ: एकमात्र सहारा होना।
• वाक्य प्रयोग: श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता के लिए अंधे की लकड़ी थे।
(घ) हाथ कंगन को आरसी क्या
• अर्थ: प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
• वाक्य प्रयोग: जब परीक्षा का परिणाम सामने है, तो बहस क्यों करते हो? हाथ कंगन को आरसी क्या।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर:
[गद्यांश 1: यह सत्य है कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर...]
(i) वरिष्ठ नागरिकों की वास्तविक समस्या क्या है?
उत्तर:
वरिष्ठ नागरिकों की वास्तविक समस्या शारीरिक व्याधियाँ न होकर उनकी 'मानसिक समस्या' है।
(ii) वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक रूप से अनुपयोगी क्यों मान लिया जाता है?
उत्तर: जैसे ही वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक उपयोगिता में कमी आती है, समाज उन्हें शारीरिक व मानसिक श्रम के अयोग्य मानकर सामाजिक रूप से भी अनुपयोगी मान लेता है।
(iii) वरिष्ठ नागरिक को क्या-क्या मानने से मानसिक पीड़ा होती है?
उत्तर: समाज एवं परिवार की नज़र में स्वयं को 'बोझ', 'अनुपयोगी' तथा 'फालतू' माने जाने से वरिष्ठ नागरिकों को तीव्र मानसिक पीड़ा होती है।
अथवा
[गद्यांश 2: वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर सर्वप्रथम अस्तित्व में आने वाले...]
(i) मंगल की सतह पर चट्टानों में किस तत्त्व की प्रधानता है?
उत्तर: मंगल ग्रह की सतह पर स्थित चट्टानों में 'लौह तत्त्व' की प्रधानता है।
(ii) मंगल ग्रह की मिट्टी किस कारण से लाल है?
उत्तर: मंगल की सतह पर स्थित लौह तत्त्वों में हवा की उपस्थिति के कारण जंग लगने की स्वाभाविक प्रक्रिया चलती है, जिसके कारण इस ग्रह की मिट्टी लाल है।
(iii) पृथ्वी पर सर्वप्रथम अस्तित्व में आने वाले एककोशकीय जीव कौन-कौन से हैं?
उत्तर: पृथ्वी पर सर्वप्रथम अस्तित्व में आने वाले एककोशकीय जीव 'अमीबा' एवं 'पैरामीशियम' हैं।
(क) सही शब्द-युग्म का अर्थ चयन:
(अ) वसन–व्यसन
उत्तर:
(2) वस्त्र और आदत
(ब) अंश-अंशु
उत्तर: (2) भाग और किरण
(ख) किसी एक शब्द के दो अर्थ:
(अ) अम्बर: आकाश, वस्त्र।
(ब) अलि: भौंरा, सखी।
(स) कनक: सोना, धतूरा।
(द) जलज: कमल, मोती।
(ग) वाक्यांशों के लिए एक शब्द:
(अ) जो ईश्वर में विश्वास करता है-
उत्तर: (4) आस्तिक
(ब) जानने की इच्छा रखने वाला-
उत्तर: (3) जिज्ञासु
(घ) किन्हीं दो वाक्यों का शुद्ध रूप:
(i) अशुद्ध: इस सरोवर में अनेकों कमल खिले हैं।
शुद्ध: इस सरोवर में अनेक कमल खिले हैं।
(ii) अशुद्ध: एक फूल की माला लाओ।
शुद्ध: फूलों की एक माला लाओ।
(iii) अशुद्ध: उसका प्राण निकलने वाला है।
शुद्ध: उसके प्राण निकलने वाले हैं।
(क) शृंगार अथवा करुण रस की परिभाषा एवं उदाहरण:
• शृंगार रस:
- परिभाषा: जहाँ नायक और नायिका के सौंदर्य तथा प्रेम संबंधी वर्णन का अनुभव होता है, वहाँ शृंगार रस होता है। इसका स्थायी भाव 'रति' है।
- उदाहरण:
"बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सोह करे, भौहन हँसै, दैन कहे नट जाय॥"
• अथवा करुण रस:
- परिभाषा: किसी प्रिय वस्तु, व्यक्ति के विनाश या अनिष्ट होने पर हृदय में जो शोक नामक स्थायी भाव उत्पन्न होता है, उसे करुण रस कहते हैं।
- उदाहरण:
"हे खग म्रग हे मधुकर श्रेनी।
तुम देखी सीता द्रगनैनी॥"
(ख) अनुप्रास अथवा यमक अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण:
• अनुप्रास अलंकार:
- परिभाषा: जहाँ समान वर्णों की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
- उदाहरण: "चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही थीं जल-थल में।"
• अथवा यमक अलंकार:
- परिभाषा: जहाँ एक ही शब्द बार-बार आए किंतु उसका अर्थ हर बार भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।
- उदाहरण: "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। वा खाये बौराय जग, या पाये बौराय॥"
(ग) दोहा अथवा चौपाई की परिभाषा एवं उदाहरण:
• दोहा छन्द:
- परिभाषा: यह अर्द्धसम मात्रिक छंद है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
- उदाहरण:
"श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥"
• अथवा चौपाई छन्द:
- परिभाषा: यह सम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं।
- उदाहरण:
"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥"
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रार्थना पत्र:
[शाखा प्रबन्धक को व्यवसाय हेतु ऋण प्राप्त करने के लिए प्रार्थना पत्र]
उत्तर:
सेवा में,
शाखा प्रबंधक,
भारतीय स्टेट बैंक,
मुख्य शाखा, कानपुर (उ.प्र.)।
विषय: स्कूल यूनिफॉर्म (ड्रेस) की दुकान हेतु ऋण प्राप्ति के संदर्भ में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैंने 'व्यावसायिक योग्यता प्रमाण-पत्र' प्राप्त कर लिया है और मैं आत्मनिर्भर बनने हेतु अपने नगर में स्कूल यूनिफॉर्म (ड्रेस) की एक दुकान खोलना चाहता हूँ। इस व्यवसाय को प्रारंभ करने हेतु कुल ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की प्रारंभिक पूँजी की आवश्यकता है, जिसमें से ₹50,000 की व्यवस्था मैंने स्वयं की है।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि प्रधानमंत्री रोजगार योजना (या स्वरोजगार योजना) के अंतर्गत मुझे शेष ₹1,50,000 (एक लाख पचास हजार रुपये) का ऋण आसान किस्तों पर प्रदान करने की कृपा करें। आवश्यक दस्तावेज पत्र के साथ संलग्न हैं।
धन्यवाद!
दिनांक: 01 अक्टूबर 2026
भवदीय,
अमित कुमार
पता: 123/4, सिविल लाइंस, कानपुर।
निबंध:
[विषय: पर्यावरण प्रदूषण की समस्या और समाधान]
उत्तर:
1. प्रस्तावना:
मानव जीवन के सुचारू संचालन के लिए शुद्ध पर्यावरण अत्यंत आवश्यक है। पर्यावरण दो शब्दों 'परि' + 'आवरण' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है चारों ओर से ढका हुआ। वर्तमान समय में विज्ञान और औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण में अवांछनीय तत्वों का समावेश हो गया है, जिसे 'पर्यावरण प्रदूषण' कहते हैं।
2. प्रदूषण के प्रमुख प्रकार:
• वायु प्रदूषण: वाहनों, कल-कारखानों के धुएँ से शुद्ध वायु दूषित हो रही है।
• जल प्रदूषण: नदियों में उद्योगों का रासायनिक कचरा तथा सीवर का पानी मिलने से जल दूषित हो रहा है।
• ध्वनि प्रदूषण: लाउडस्पीकर, वाहनों के हॉर्न और मशीनों का शोर मानसिक तनाव पैदा करता है।
• मृदा प्रदूषण: रासायनिक उर्वरकों और प्लास्टिक कचरे के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता नष्ट हो रही है।
3. प्रदूषण के कारण:
बढ़ती जनसंख्या, अंधाधुंध वनों की कटाई, अत्यधिक औद्योगिकीकरण और प्लास्टिक उत्पादों का असंतुलित उपयोग प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।
4. समाधान के उपाय:
• वृक्षारोपण: अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएँ ताकि वायुमंडल में ऑक्सीजन का संतुलन बना रहे।
• कचरा प्रबंधन: कारखानों के अवशिष्ट पदार्थों और सीवर के पानी को शोधित करके ही नदियों में बहाया जाए।
• पर्यावरण जागरूकता: जन-सामान्य को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए तथा प्लास्टिक बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए।
5. उपसंहार:
पर्यावरण सुरक्षा किसी एक व्यक्ति या सरकार की ज़िम्मेदारी न होकर संपूर्ण मानव जाति का सामूहिक कर्तव्य है। यदि हमने समय रहते पर्यावरण की रक्षा नहीं की, तो संपूर्ण सृष्टि का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।