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Up Board Class 12th Hindi Board Exam paper 2026 302(BG)

कक्षा 12वीं · हिंदी · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

क) 'शुक्ल युग' के निबन्धकार नहीं हैं:

(i) गुलाबराय

(ii) राहुल सांकृत्यायन

(iii) अध्यापक पूर्ण सिंह

(iv) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'

उत्तर:

(iii) अध्यापक पूर्ण सिंह (अध्यापक पूर्ण सिंह द्विवेदी युग के प्रसिद्ध निबन्धकार हैं।)

ख) हिन्दी एकांकी के जनक माने जाते हैं:

(i) विष्णु प्रभाकर

(ii) भुवनेश्वर प्रसाद

(iii) लक्ष्मीनारायण मिश्र

(iv) रामकुमार वर्मा

हल / Solution:

(iv) रामकुमार वर्मा

ग) 'चंपारण में महात्मा गाँधी' जीवनीपरक कृति के लेखक हैं:

(i) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

(ii) अमृत राय

(iii) डॉ. रामविलास शर्मा

(iv) संपूर्णानन्द

हल / Solution:

(i) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

घ) 'हर्षचरित का सांस्कृतिक अध्ययन' कृति किस गद्य-विधा की रचना है?

(i) निबन्ध

(ii) आलोचना

(iii) यात्रावृत्तान्त

(iv) कहानी

हल / Solution:

(ii) आलोचना

ङ) इनमें से लेखक और उसकी कृति का एक विकल्प सुमेलित नहीं है, वह है:

(i) जैनेन्द्र कुमार – 'पूर्वोदय'

(ii) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' – 'बाजे पायलिया के घुँघरू'

(iii) हजारीप्रसाद द्विवेदी – 'राष्ट्रजीवन की समस्याएँ'

(iv) हरिशंकर परसाई – 'तब की बात और थी'

हल / Solution:

(iii) हजारीप्रसाद द्विवेदी – 'राष्ट्रजीवन की समस्याएँ'

प्रश्न 2.

क) 'द्विवेदी-युग' के कवि नहीं हैं:

(i) गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'

(ii) रामनरेश त्रिपाठी

(iii) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

(iv) माखनलाल चतुर्वेदी

उत्तर:

(iv) माखनलाल चतुर्वेदी

ख) 'स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है।' – यह कथन इनमें से किस काव्यआन्दोलन के लिए कहा गया है?

(i) 'छायावाद'

(ii) 'प्रगतिवाद'

(iii) 'प्रयोगवाद'

(iv) 'नई कविता'

हल / Solution:

(i) 'छायावाद'

ग) इनमें से प्रगतिवादी कवि नहीं हैं:

(i) नागार्जुन

(ii) त्रिलोचन शास्त्री

(iii) केदारनाथ अग्रवाल

(iv) गिरजाकुमार माथुर

हल / Solution:

(iv) गिरजाकुमार माथुर

घ) 'तारसप्तक' के कवियों को 'राहों का अन्वेषी' कहा है:

(i) गजानन माधव मुक्तिबोध ने

(ii) भारतभूषण अग्रवाल ने

(iii) प्रभाकर माचवे ने

(iv) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने

हल / Solution:

(iv) सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' ने

ङ) मैथिलीशरण गुप्त की काव्यकृति नहीं है:

(i) 'यशोधरा'

(ii) 'रजतशिखर'

(iii) 'जयभारत'

(iv) 'विष्णुप्रिया'

हल / Solution:

(ii) 'रजतशिखर' (यह सुमित्रानन्दन पन्त की रचना है।)

प्रश्न 3.

निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

राष्ट्र का तीसरा अंग जन की संस्कृति है। मनुष्यों ने युगों–युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास–प्रश्वास है। बिना संस्कृति के जन की कल्पना कबन्धमात्र है, संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है। संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि संभव है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन के साथ–साथ जन की संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थान है। यदि भूमि और जन अपनी संस्कृति से विरहित कर दिये जायें, तो राष्ट्र का लोप समझना चाहिए।

(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।

उत्तर:

• पाठ का नाम: राष्ट्र का स्वरूप

• लेखक का नाम: डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

हल / Solution:

व्याख्या: लेखक का कथन है कि संस्कृति मानव जीवन का मस्तिष्करूप अंग है। जिस प्रकार मस्तिष्क के बिना मनुष्य का शरीर निष्प्राण (कबन्ध) मात्र रह जाता है, उसी प्रकार संस्कृति से रहित जन (मनुष्य) का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं रह जाता। संस्कृति ही मनुष्य के विचार, विवेक तथा जीवन-मूल्यों का संचालन करती है।

(iii) मनुष्य के जीवन की श्वास–प्रश्वास क्या है?

हल / Solution:

मनुष्यों ने युगों-युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास-प्रश्वास है।

(iv) राष्ट्र का लोप कब समझना चाहिए?

हल / Solution:

यदि भूमि और जन को अपनी संस्कृति से विरहित (अलग) कर दिया जाए, तो राष्ट्र का लोप समझना चाहिए।

(v) राष्ट्र की वृद्धि कैसे संभव है?

हल / Solution:

संस्कृति के विकास और अभ्युदय (उन्नति) के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि संभव है।

अथवा

अशोक–वृक्ष की पूजा इन्हीं गन्धर्वों और यक्षों की देन है। प्राचीन साहित्य में इस वृक्ष की पूजा के उत्सवों का बड़ा सरस वर्णन मिलता है। असल पूजा अशोक की नहीं, बल्कि उसके अधिष्ठाता कंदर्प–देवता की होती थी। इसे 'मदनोत्सव' कहते थे। महाराज भोज के 'सरस्वती–कण्ठाभरण' से जान पड़ता है कि यह उत्सव त्रयोदशी के दिन होता था। 'मालविकाग्निमित्र' और 'रत्नावली' में इस उत्सव का बड़ा सरस–मनोहर वर्णन मिलता है। मैं जब अशोक के लाल स्तबकों को देखता हूँ, तो मुझे वह पुराना वातावरण प्रत्यक्ष दिखायी दे जाता है।

(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए।

हल / Solution:

• पाठ का नाम: अशोक के फूल

• लेखक का नाम: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

(ii) अशोक–वृक्ष की पूजा किसकी देन है?

हल / Solution:

अशोक-वृक्ष की पूजा गन्धर्वों और यक्षों की देन है।

(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

हल / Solution:

व्याख्या: लेखक कहते हैं कि प्राचीन समय में जो अशोक-वृक्ष की पूजा की जाती थी, वह केवल बाह्य रूप से वृक्ष की पूजा थी; वास्तव में वह पूजा अशोक-वृक्ष में निवास करने वाले एवं उसके अधिष्ठाता देवता कामदेव (कंदर्प) की होती थी।

(iv) 'मदनोत्सव' किसे कहते हैं?

हल / Solution:

अशोक-वृक्ष तथा उसके अधिष्ठाता देवता कामदेव (कंदर्प) की पूजा के उत्सव को 'मदनोत्सव' कहते हैं।

(v) 'सरस्वती–कण्ठाभरण' किसकी रचना है?

हल / Solution:

'सरस्वती-कण्ठाभरण' महाराज भोज की रचना है।

प्रश्न 4.

निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

कबहुँ होत सत चंद कबहुँ प्रगटत दुरि भाजत ।

पवन गवन बस बिंब रूप जल में बहु साजत ॥

मनु ससि भरि अनुराग जमुन जल लोटत डोलै ।

कै तरंग की डोर हिंडोरनि करति कलोलै ॥

कै बालगुड़ी नभ में उड़ी सोहत इत-उत धावती ।

कै अवगाहत डोलत कोऊ ब्रजरमनी जल आवती ॥

(i) उपर्युक्त पद्यांश के पाठ एवं रचयिता का नाम लिखिए।

उत्तर:

• पाठ का नाम: यमुना-छवि

• रचयिता का नाम: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

हल / Solution:

व्याख्या: कवि कहते हैं कि यमुना के जल में चंद्रमा का प्रतिबिम्ब ऐसा प्रतीत होता है मानो चंद्रमा अत्यधिक प्रेम से भरकर यमुना के जल में लोट रहा हो या फिर ऐसा लगता है मानो यमुना जल की लहरों रूपी डोरी से बंधकर झूला झूलते हुए क्रीड़ा कर रहा हो।

(iii) 'मनु ससि भरि अनुराग जमुन जल लोटत डोलै ।' इस पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार का नाम लिखिए।

हल / Solution:

उत्प्रेक्षा अलंकार ('मनु' वाचक शब्द के प्रयोग के कारण)।

(iv) 'बालगुड़ी' तथा 'हिंडोरनि' शब्द का अर्थ लिखिए।

हल / Solution:

• बालगुड़ी: छोटी पतंग (बालक की पतंग)

• हिंडोरनि: झूला (झूले पर)

(v) 'अवगाहन' यह शब्द किस शब्द का पर्यायवाची शब्द है?

हल / Solution:

'अवगाहन' शब्द स्नान करने, डुबकी लगाने अथवा जल-क्रीड़ा करने का पर्यायवाची शब्द है।

अथवा

सामने टिकते नहीं वनराज, पर्वत डोलते हैं,

काँपता है कुंडली मारे समय का ब्याल,

मेरी बाँह में मारुत, गरुड़, गजराज का बल है ।

मर्त्य मानव की विजय का तूर्य हूँ मैं,

उर्वशी ! अपने समय का सूर्य हूँ मैं ।

अंध तम के भाल पर पावक जलाता हूँ,

बादलों के सीस पर स्यंदन चलाता हूँ ।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के पाठ और कवि का नाम लिखिए।

हल / Solution:

• पाठ का नाम: पुरुरवा (उर्वशी)

• कवि का नाम: रामधारी सिंह 'दिनकर'

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

हल / Solution:

व्याख्या: राजा पुरुरवा उर्वशी से अपने सामर्थ्य का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे उर्वशी! मैं मरणशील मानव की विजय का जयघोष (तूर्य/रणभेरी) हूँ तथा मैं अपने युग का प्रतापी सूर्य हूँ जो अज्ञान व अंधकार को नष्ट करने में समर्थ है।

(iii) राजा पुरुरवा अपने मन की स्थिति का वर्णन किससे कर रहे हैं?

हल / Solution:

राजा पुरुरवा अपने मन की स्थिति और अपने पराक्रम का वर्णन देव-अप्सरा 'उर्वशी' से कर रहे हैं।

(iv) 'ब्याल' और 'स्यंदन' शब्द का अर्थ लिखिए।

हल / Solution:

• ब्याल: सर्प (साँप)

• स्यंदन: रथ

(v) 'मारुत' और 'पावक' किसके पर्यायवाची शब्द हैं?

हल / Solution:

• मारुत: पवन / वायु / हवा का

• पावक: अग्नि / आग का

प्रश्न 5.

क) निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए:

(शब्द-सीमा: अधिकतम 80 शब्द)

(i) वासुदेवशरण अग्रवाल

(ii) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'

(iii) हरिशंकर परसाई

उत्तर:

(i) डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल

जीवन-परिचय:

डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल का जन्म सन् 1904 ई. में मेरठ जिले के खेड़ा ग्राम में हुआ था। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए. तथा डी.लिट्. की उपाधि प्राप्त की। ये काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भारती महाविद्यालय में पुरातत्व एवं प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे। संस्कृत, प्राकृत एवं पुरातत्व के इस प्रकांड विद्वान का सन् 1967 ई. में निधन हो गया।

प्रमुख कृतियाँ:

• निबन्ध-संग्रह: 'राष्ट्र का स्वरूप', 'पृथ्वीपुत्र', 'माता भूमि', 'कल्पवृक्ष', 'वाग्धारा'।

• शोध एवं सम्पादन: 'पाणिनिकालीन भारतवर्ष', 'पद्मावत' का संजीवनी भाष्य तथा 'हर्षचरित का सांस्कृतिक अध्ययन'।

ख) निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताएँ लिखिए:

(शब्द-सीमा: अधिकतम 80 शब्द)

(i) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

(ii) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

(iii) महादेवी वर्मा

हल / Solution:

(iii) महादेवी वर्मा

जीवन-परिचय:

छायावाद की प्रमुख स्तम्भ महादेवी वर्मा का जन्म सन् 1907 ई. में फर्रूखाबाद (उ.प्र.) में हुआ था। ये प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्या एवं कुलपति रहीं। इन्हें 'यामा' कृति पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। सन् 1987 ई. में इनका निधन हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ एवं कृतियाँ:

महादेवी जी को 'आधुनिक युग की मीरा' कहा जाता है। आपकी काव्य-रचनाओं में रहस्यवाद, विरह की वेदना, प्रकृति-सौंदर्य और अतिशय भावुकता का सुंदर समन्वय है।

• प्रमुख काव्य-कृतियाँ: 'निहार', 'रश्मि', 'नीरजा', 'सांध्यगीत', 'दीपशिखा', 'यामा'।

• गद्य-रचनाएँ: 'अतीत के चलचित्र', 'स्मृति की रेखाएँ', 'पथ के साथी'।

प्रश्न 6.

'लाटी' अथवा 'कर्मनाशा की हार' कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्रचित्रण कीजिए।

(शब्द-सीमा: अधिकतम 80 शब्द)

अथवा

'पंचलाइट' अथवा 'बहादुर' कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:

'पंचलाइट' कहानी का उद्देश्य:

फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा लिखित 'पंचलाइट' एक आंचलिक कहानी है। इस कहानी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समाज की निरक्षरता, रूढ़िवादिता, वर्ग-भेद तथा जातिगत संकीर्णता पर प्रकाश डालते हुए यह संदेश देना है कि अति-आवश्यकता एवं जन-कल्याण के सामने सामाजिक रूढ़ियाँ, प्रतिष्ठा और जाति-पाँति के नियम व्यर्थ हो जाते हैं।

कहानी में महतो टोले के लोग पंचलाइट खरीद लाते हैं, किन्तु उसे जलाना कोई नहीं जानता। अंत में सजाया गया युवक 'गोधन' ही पंचलाइट जलाकर टोले की प्रतिष्ठा बचाता है, जिससे उसकी सभी भूलें क्षमा कर दी जाती हैं। इस प्रकार, यह कहानी स्पष्ट करती है कि सामूहिकता, भाइचारा और व्यावहारिक आवश्यकता सामाजिक कुरीतियों से ऊपर हैं।

प्रश्न 7.

स्वपठित खण्डकाव्य के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए:

(शब्द-सीमा: अधिकतम 80 शब्द)

क) 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'कर्ण' का चरित्र चित्रण कीजिए।

अथवा 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य की विशेषताएँ लिखिए।

ख) 'त्यागपथी' खण्डकाव्य के आधार पर सम्राट 'हर्षवर्धन' का चित्रांकन कीजिए।

अथवा 'त्यागपथी' खण्डकाव्य की सामान्य विशेषताएँ उद्घाटित कीजिए।

ग) 'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य के आधार पर 'दशरथ' की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

अथवा 'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए।

घ) 'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' का चरित्रचित्रण कीजिए।

अथवा 'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य के आधार पर 'साइमन कमीशन' के बहिष्कार की घटना पर प्रकाश डालिए।

ङ) 'सत्य की जीत' खण्डकाव्य की विशेषताएँ लिखिए।

अथवा 'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर 'दुःशासन' का चरित्रचित्रण कीजिए।

च) 'आलोक वृत्त' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' का चित्रांकन कीजिए।

अथवा 'आलोक वृत्त' खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

(क) 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'कर्ण' का चरित्र-चित्रण:

रामधारी सिंह 'दिनकर' रचित 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य का नायक कर्ण है। कर्ण के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. महान दानी व उदार: कर्ण अत्यधिक दानवीर हैं। वे अपने द्वार से किसी को खाली हाथ नहीं लौटने देते; यहाँ तक कि इन्द्र को अपने प्राण-रक्षक कवच और कुण्डल भी दान में दे देते हैं।

2. सच्चा मित्र: कर्ण दुर्योधन का निस्वार्थ एवं निष्ठावान मित्र हैं। श्रीकृष्ण व कुंती के प्रलोभन देने पर भी वे मित्रधर्म का त्याग नहीं करते।

3. अतुलित पराक्रमी: कर्ण एक महान धनुर्धर व वीर योद्धा हैं, जो अपने पुरुषार्थ के बल पर समाज में स्थान बनाते हैं।

4. जाति-प्रथा का विरोधी: सूत-पुत्र कहे जाने पर कर्ण जातिगत भेदभाव का मुखर विरोध करते हैं और कर्म को श्रेष्ठ मानते हैं।

खण्ड – 'ख'

प्रश्न 8.

क) निम्नलिखित संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:

संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षिर्व्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भासभारविभवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नैः अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते। इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च, यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं, गौरवम्, अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वञ्च संस्कृतैनैव सुरक्षितं शक्यन्ते। इयं संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठ चास्ति। ततः सुष्ठूक्तम् 'भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाणभारती' इति।

उत्तर:

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'संस्कृत दिग्दर्शिका' के 'संस्कृतसाहित्यस्य वैशिष्ट्यम्' (या 'संस्कृतभाषायाः महत्वम्') नामक पाठ से उद्धृत है।

हिन्दी अनुवाद:

संस्कृत साहित्य के आदिकवि वाल्मीकि, महर्षि व्यास, कविकुलगुरु कालिदास तथा अन्य भास, भारवि, भवभूति आदि महाकवि अपने ग्रन्थ-रत्नों के द्वारा आज भी पाठकों के हृदय में विराजमान हैं। यह भाषा हमारे द्वारा माता के समान सम्माननीय और वन्दनीय है, क्योंकि भारत माता की स्वतन्त्रता, गौरव, अखण्डता और सांस्कृतिक एकता संस्कृत के द्वारा ही सुरक्षित हो सकती है। यह संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ है। इसीलिए ठीक ही कहा गया है— "भाषाओं में मुख्य, मधुर और दिव्य देववाणी (संस्कृत) है।"

अथवा

यदा अयं षोडशवर्षदेशीयः आसीत् तदास्य कनीयसी भगिनी विषूचिकया पञ्चत्वं गता। वर्षत्रयानन्तरमस्य पितृव्योऽपि दिवङ्गतः। द्वयोरनयोः मृत्युं दृष्ट्वा आसीदस्य मनसि–कथमहं कथं वायं लोकः मृत्युभयात् मुक्तः स्यािदित चिन्तयतः एवास्य हृदि सहसैव वैराग्यप्रदीपः प्रज्वलितः। एकस्मिन् दिवसे अस्तङ्गते भगवति भास्वति मूलशङ्करः गृहमत्यजत्। समदशवर्षाणि यावत् अमरत्वप्राप्त्युपायं चिन्तयन् मूलशङ्करः ग्रामाद्ग्रामं, नगरान्नगरं, वनाद्वनं, पर्वतात् पर्वतमभ्रमत् परं नाविन्दतातितरां तृप्तिम्।

हल / Solution:

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक 'संस्कृत दिग्दर्शिका' के 'महर्षिः दयानन्दः' नामक पाठ से उद्धृत है।

हिन्दी अनुवाद:

जब यह (महर्षि दयानन्द) सोलह वर्ष की आयु के थे, तब इनकी छोटी बहन हैजे (विषूचिका) से मृत्यु को प्राप्त हो गई। तीन वर्ष के पश्चात् इनके चाचा भी स्वर्गवासी हो गए। इन दोनों की मृत्यु देखकर इनके मन में विचार आया— "मैं कैसे और यह संसार किस प्रकार मृत्यु के भय से मुक्त हो?" ऐसा सोचते हुए ही इनके हृदय में सहसा वैराग्य का दीपक प्रज्वलित हो उठा। एक दिन भगवान सूर्य के अस्त होने पर मूलशंकर (दयानन्द) ने घर छोड़ दिया। पन्द्रह वर्षों तक अमरता की प्राप्ति का उपाय सोचते हुए मूलशंकर गाँव-गाँव, नगर-नगर, वन-वन तथा पर्वत-पर्वत घूमते रहे, किन्तु अत्यधिक तृप्ति (शांति) प्राप्त नहीं कर सके।

ख) निम्नलिखित संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:

प्रजानां विनयाधानाद्रक्षणाद्भरणादपि।

स पिता पितरस्तासां केवलं जन्महेतवः॥

हल / Solution:

सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक 'संस्कृत दिग्दर्शिका' के 'नृपतिर्दिलीपः' (या 'सद्द्वृत्तम्') नामक पाठ से उद्धृत है।

हिन्दी अनुवाद:

प्रजा को विनय की शिक्षा देने, उनकी रक्षा करने तथा उनका पालन-पोषण करने के कारण राजा (दिलीप) ही उनकी प्रजा का वास्तविक पिता था, जबकि उनके माता-पिता तो केवल उनके जन्म के कारण थे।

अथवा

निन्दन्तु नीतिनिपुणा यदि वा स्तुवन्तु

लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्।

अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा

न्याय्यात् पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः॥

हल / Solution:

सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्य-पुस्तक 'संस्कृत दिग्दर्शिका' के 'सुभाषितरत्नानि' नामक पाठ से उद्धृत है।

हिन्दी अनुवाद:

नीति में निपुण व्यक्ति चाहे निन्दा करें या प्रशंसा करें, लक्ष्मी आए या स्वेच्छा से चली जाए, मृत्यु आज ही हो जाए या युगों के बाद हो; धैर्यवान पुरुष न्याय के मार्ग से एक कदम भी विचलित नहीं होते हैं।

प्रश्न 9.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए:

क) मैत्रेयी कस्य पत्नी आसीत्?

ख) हंसराजः स्वदुहितरं कस्मै अददात्?

ग) मालवीयः कुत्र अध्यापनम् आरब्धवान्?

घ) कृष्णः कस्य समीपे दौत्येन गतः?

उत्तर:

(किन्हीं दो के उत्तर):

क) मैत्रेयी याज्ञवल्क्यस्य पत्नी आसीत्।

ख) हंसराजः स्वदुहितरं हंसपोतकाय अददात्।

प्रश्न 10.

क) 'शृंगार' रस अथवा 'करुण' रस की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

करुण रस:

परिभाषा: जहाँ इष्ट वस्तु या प्रिय व्यक्ति के विनाश, वियोग या अनिष्ट के कारण हृदय में स्थित 'शोक' नामक स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के संयोग से रस रूप में परिणत होता है, वहाँ 'करुण रस' होता है।

उदाहरण:

मनि खोये भुजंग सी जननी, फन सा पटक रही थी सीस।

अन्धी आज बनाकर हमको, किया न्याय तुमने जगदीश॥

ख) 'रूपक' अलंकार अथवा 'प्रतीप' अलंकार की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।

हल / Solution:

रूपक अलंकार:

परिभाषा: जहाँ उपमेय में उपमान का अभेद (आरोप) किया जाता है, वहाँ 'रूपक अलंकार' होता है।

उदाहरण:

चरण-कमल बंदौ हरि राई।

ग) 'सोरठा' छन्द अथवा 'इन्द्रवज्रा' छन्द की उदाहरण-सहित परिभाषा दीजिए।

हल / Solution:

सोरठा छन्द:

परिभाषा: सोरठा एक अर्धसम मात्रिक छन्द है। यह दोहा छन्द का उल्टा होता है। इसके प्रथम और तृतीय (विषम) चरणों में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विषम चरणों के अंत में तुक मिलती है।

उदाहरण:

जो सुमिरत सिधि होइ, गन नायक करिबर बदन।

करहु अनुग्रह सोइ, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥

प्रश्न 11.

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए:

(i) प्राकृतिक आपदाएँ : कारण और निवारण

(ii) विज्ञान वरदान है या अभिशाप

(iii) साहित्य और संस्कृति

(iv) योग – दिवस की प्रासंगिकता

(v) भारतीय कृषक की समस्याएँ।

उत्तर:

(ii) विज्ञान : वरदान या अभिशाप

रूपरेखा:

1. प्रस्तावना

2. विज्ञान के वरदान स्वरूप विविध क्षेत्र

3. विज्ञान : अभिशाप के रूप में

4. उपसंहार

1. प्रस्तावना:

आज का युग विज्ञान का युग है। मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान ने अपने कदम जमा लिए हैं। विज्ञान ने मानव की कल्पनाओं को साकार कर दिखाया है और असंभव को संभव बना दिया है।

2. विज्ञान के वरदान स्वरूप विविध क्षेत्र:

• यातायात के क्षेत्र में: बस, रेलगाड़ी, हवाई जहाज आदि साधनों ने दूरियों को समाप्त कर दिया है।

• संचार के क्षेत्र में: मोबाइल, इंटरनेट, ई-मेल द्वारा क्षण भर में सन्देश पहुँचे जा सकते हैं।

• चिकित्सा के क्षेत्र में: असाध्य बीमारियों का इलाज संभव हुआ है तथा असीम जीवन-रक्षक दवाइयाँ उपलब्ध हैं।

• कृषि व उद्योग: आधुनिक मशीनों, उर्वरकों और साधनों से उत्पादन कई गुना बढ़ गया है।

3. विज्ञान : अभिशाप के रूप में:

यदि विज्ञान का अनुचित प्रयोग किया जाए, तो यह भयंकर विनाशकारी सिद्ध होता है। परमाणु बम, हाइड्रोजन बम और रासायनिक हथियार पूरी मानवता को नष्ट करने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त बढ़ता प्रदूषण और मशीनीकरण के कारण बेरोजगारी भी विज्ञान के दुष्परिणाम हैं।

4. उपसंहार:

वास्तव में विज्ञान स्वयं में न वरदान है न अभिशाप। यह मनुष्य के प्रयोग पर निर्भर करता है। यदि इसका उपयोग जन-कल्याण के लिए हो तो यह वरदान है, और यदि विनाश के लिए हो तो अभिशाप। मानव जाति को विवेकपूर्ण ढंग से विज्ञान का उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न 12.

क) i) 'प्रेजते' का सन्धि – विच्छेद है:

(A) प्रे + जते

(B) प्रेज + ते

(C) प्र + एजते

(D) प्रेय + ते

उत्तर:

(C) प्र + एजते (एङि पररूपम् सूत्र से)

ii) 'कश्चित्' का सन्धि – विच्छेद है:

(A) कस् + चित्

(B) कष् + चित्

(C) कस + चित्

(D) कः + चित्

हल / Solution:

(D) कः + चित् (विसर्ग सन्धि से)

iii) 'निस्तारणम्' का सन्धि – विच्छेद है:

(A) निस्ता + रणम्

(B) निस्त + कारणम्

(C) निस + तारणम्

(D) निः + तारणम्

हल / Solution:

(D) निः + तारणम्

ख) i) 'निर्दोष' शब्द में समास है:

(A) कर्मधारय

(B) बहुव्रीहि

(C) अव्ययीभाव

(D) द्वन्द्व

हल / Solution:

(C) अव्ययीभाव (दोषस्य अभावः)

ii) 'त्रिनेत्रः' शब्द में समास है:

(A) बहुव्रीहि

(B) तत्पुरुष

(C) अव्ययीभाव

(D) कर्मधारय

हल / Solution:

(A) बहुव्रीहि (त्रीणि नेत्राणि यस्य सः - शिवः)

प्रश्न 13.

क) i) 'श्रुत्वा' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है:

(A) क्त

(B) क्त्वा

(C) क्त्व

(D) मतुप

उत्तर:

(B) क्त्वा (श्रु + क्त्वा)

ii) 'रूपवान्' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है:

(A) मतुप्

(B) वतुप्

(C) अनीयार्

(D) तव्यत्

हल / Solution:

(A) मतुप् (रूप + मतुप्)

ख) i) 'येनाङ्गविकारः' का उदाहरण है:

(A) छात्रेण सह शिक्षकः गच्छति ।

(B) सः शिरसा खल्वाटः ।

(C) तस्मै श्रीगुरवे नमः ।

(D) नदीनां गङ्गा श्रेष्ठ ।

हल / Solution:

(B) सः शिरसा खल्वाटः ।

ii) 'षष्ठी शेषे' का उदाहरण है:

(A) सः विद्यालयं प्रति गच्छति ।

(B) पुत्रेण सह पिता गच्छति ।

(C) सुग्रीवः रामस्य सखा आसीत् ।

(D) दैत्येभ्यः हरिः अलम् ।

हल / Solution:

(C) सुग्रीवः रामस्य सखा आसीत् ।

प्रश्न 14.

अपने मोहल्ले की गन्दी नालियों की सफाई के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को एक पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,

स्वास्थ्य अधिकारी,

नगर निगम,

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)।

विषय: मोहल्ले की गन्दी नालियों की समुचित सफाई हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

मैं आपका ध्यान अशोक नगर (प्रयागराज) मोहल्ले की नारकीय स्थिति की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ। हमारे मोहल्ले में नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य फैल गया है।

नालियाँ कचरे से पूरी तरह पट चुकी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। इसके कारण उठने वाली भयंकर दुर्गन्ध से क्षेत्रवासियों का जीना दूभर हो गया है। जगह-जगह रुके हुए पानी में मच्छर और रोगाणु पनप रहे हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया आदि संक्रामक बीमारियाँ फैलने की तीव्र आशंका बनी हुई है।

अतः आपसे नम्र निवेदन है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए हमारे मोहल्ले की नालियों की अविलम्ब सफाई कराने तथा कीटनाशक दवाइयों (ब्लीचिंग पाउडर आदि) का छिड़काव कराने की कृपा करें।

धन्यवाद!

भवदीय,

समस्त निवासीगण

अशोक नगर, प्रयागराज।

दिनांक: 22 फरवरी 2026