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Up Board Class 12th Hindi Board Exam Paper 2026 301(BF)

कक्षा 12वीं · हिंदी · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

क) 'रानी केतकी की कहानी' के लेखक हैं –

(i) मुंशी सदा सुखलाल

(ii) इंशा अल्लाहखाँ

(iii) राजा लक्ष्मण सिंह

(iv) श्रद्धा राम फिल्लौरी

ख) भारतेन्दु हरिश्चन्दर द्वारा प्रकाशित पत्रिका है –

(i) 'कल्पना'

(ii) 'सरस्वती'

(iii) 'कवि वचन सुधा'

(iv) 'हिन्दी प्रदीप'

ग) खड़ीबोली की गद्य की प्रथम रचना है –

(i) 'गोरा बादल की कथा'

(ii) 'कृष्णावतार स्वरूप का निर्णय'

(iii) 'वर्ण रत्नाकर'

(iv) 'भाषा योगवाशिष्ठ'

घ) 'रसकलश' कृति के रचियता हैं –

(i) जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'

(ii) अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

(iii) मैथिली शरण गुप्त

(iv) सियाराम शरण गुप्त

ङ) 'वेदना की प्रतिमूर्ति' किस कवयित्री को कहा जाता है ?

(i) लक्ष्मीबाई को

(ii) मैत्रेयी पुष्पा को

(iii) महादेवी वर्मा को

(iv) सुभद्राकुमारी चौहान को

उत्तर:

क) (ii) इंशा अल्लाहखाँ

ख) (iii) 'कवि वचन सुधा'

ग) (i) 'गोरा बादल की कथा'

घ) (ii) अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

ङ) (iii) महादेवी वर्मा को

प्रश्न 3.

निम्नलिखित में से किसी एक गद्यांश के नीचे अंकित पाँचों प्रश्नों के उत्तर दीजिए ।

गद्यांश 1:

"भाषा को साधारण इकाई शब्द है । शब्द के अभाव में भाषा का अस्तित्व दुरुह है । यदि भाषा में विकासशीलता शुरू होती है, तो शब्दों के स्तर पर ही दैनंदिन सामाजिक व्यवहारों में हम कई ऐसे नवीन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जो अंग्रेजी, अरबी, फारसी आदि विदेशी भाषाओं से उधार लिये गए हैं । वैसे ही नये शब्दों का गठन भी अनजाने में अनायास ही होता है । ये शब्द, अर्थात् उन विदेशी भाषाओं से सीधे अविकृत ढंग से उधार लिये गए शब्द, भले ही कामचलाऊ माध्यम से प्रयुक्त हों, साहित्यिक दायरे में कदापि ग्रहणीय नहीं ।"

(i) पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए ।

(ii) भाषा की साधारण इकाई क्या है ?

(iii) भाषा का अस्तित्व किसके अभाव में दुरुह है ?

(iv) दैनिक जीवन में व्यवहार में प्रयोग किए जानेवाले नवीन शब्द कहाँ से लिये गये हैं ?

(v) विदेशी भाषाओं से उधार लिये गये शब्दों की क्या स्थिति होती है ?

अथवा

गद्यांश 2:

"वह दूसरों की निन्दा करके ऐसा अनुभव करता है, कि वे सब निकृष्ट हैं और वह उनसे अच्छा है । उसके अहं की इससे तुष्टि होती है । बड़ी लकीर को कुछ मिटाकर छोटी लकीर बड़ी बनती है । ज्यों – ज्यों कर्म क्षीण होता है, त्यों त्यों निंदा की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है । कठिन कर्म ही ईर्ष्या, द्वेष और उनसे उत्पन्न निंदा को मारता है । इन्दर बड़ा ईर्ष्यालु माना जाता है, क्योंकि वह निठल्ला है । स्वर्ग में देवताओं को बिना उगाया अन्न, बे बनाया महल और बिना बोये फल मिलते हैं । अकर्मण्यता में उन्हें अप्रतिष्ठित होने का भय बना रहता है ।"

(i) पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए ।

(ii) दूसरों की निन्दा करके व्यक्ति क्या अनुभव करता है ?

(iii) निंदा की प्रवृत्ति कब बढ़ती है ?

(iv) ईर्ष्या – द्वेष को कौन मारता है ?

(v) इन्दर को लेखक ने किस रूप में प्रस्तुत किया है ?

उत्तर:

प्रथम गद्यांश के उत्तर:

(i) पाठ का शीर्षक: भाषा और आधुनिकता

लेखक का नाम: प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी

(ii) भाषा की साधारण इकाई शब्द है।

(iii) भाषा का अस्तित्व शब्दों के अभाव में दुरुह (कठिन) है।

(iv) दैनिक जीवन के सामाजिक व्यवहार में प्रयोग किए जाने वाले नवीन शब्द अंग्रेजी, अरबी, फारसी आदि विदेशी भाषाओं से उधार लिये गये हैं।

(v) विदेशी भाषाओं से सीधे अविकृत (बिना परिवर्तन) ढंग से उधार लिये गए शब्द यद्यपि कामचलाऊ माध्यम के रूप में प्रयुक्त होते हैं, किन्तु वे साहित्यिक दायरे में कदापि स्वीकार्य/ग्रहणीय नहीं होते हैं।

अथवा (द्वितीय गद्यांश के उत्तर):

(i) पाठ का शीर्षक: निंदा रस

लेखक का नाम: हरिशंकर परसाई

(ii) दूसरों की निंदा करके व्यक्ति यह अनुभव करता है कि अन्य सभी लोग निकृष्ट (खराब) हैं और वह स्वयं उनसे श्रेष्ठ व अच्छा है। इससे उसके अहंकार को संतुष्टि मिलती है।

(iii) जैसे-जैसे व्यक्ति का कर्म क्षीण (कमज़ोर) होता जाता है, वैसे-वैसे उसमें निंदा करने की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है।

(iv) कठिन कर्म ही ईर्ष्या, द्वेष और उनसे उत्पन्न निंदा की प्रवृत्ति को नष्ट करता है।

(v) लेखक ने इन्द्र (इन्दर) को अत्यधिक ईर्ष्यालु और निठल्ला (अकर्मण्य) प्रस्तुत किया है, जिसे बिना परिश्रम स्वर्ग में सब सुविधाएँ मिलने के कारण सदा अपने पद से अप्रतिष्ठित/च्युत होने का डर बना रहता है।

प्रश्न 4.

निम्नलिखित में से किसी एक पद्यांश के नीचे अंकित पाँचों प्रश्न के उत्तर दीजिए ।

पद्यांश 1:

"यही आता है इस मन में ,

छोड़ धाम – धन जाकर मैं भी रहूँ उसी वन में ।

प्रिय के व्रत में विघ्न न डालूँ, रहूँ निकट भी दूर,

व्यथा रहे, पर साथ साथ हो समाधान भरपूर ॥

हर्ष डूबा हो रोदन में ,

यही आता है इस मन में ।"

(i) कविता का शीर्षक और रचनाकार का नाम लिखिए ।

(ii) वियोगिनी क्या छोड़ने की बात कह रही है ?

(iii) वियोगिनी कहाँ रहने की बात करती है ?

(iv) किसके व्रत में विघ्न न डालने की बात कह रही है ?

(v) 'व्यथा रहे पर साथ साथ हो समाधान भरपूर' का आशय स्पष्ट कीजिए ।

अथवा

पद्यांश 2:

"मृदुल होठों का हिमजल – हास

उड़ा जाता निःश्वास समीर;

सरल भौंहों का शरदाकाश

घेर लेते घन, घिर गंभीर ।

शून्य साँसों का विधुर – वियोग

छुड़ाता अधर मधुर संयोग,

मिलन के पल केवल दो, चार,

विरह के कल्प अपार !"

(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।

(ii) वृद्धावस्था की गहरी साँसें किसे उड़ा देती हैं ?

(iii) 'मिलन के पल केवल दो चार' में कौनसा अलंकार है ?

(iv) इस पद्यांश में कौनसा रस है ?

(v) रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर:

प्रथम पद्यांश के उत्तर:

(i) कविता का शीर्षक: गीत (साकेत के नवम सर्ग से)

रचनाकार का नाम: मैथिलीशरण गुप्त

(ii) वियोगिनी (उर्मिला) अपना राजमहल, घर-द्वार (धाम) और धन-वैभव छोड़ने की बात कह रही है।

(iii) वियोगिनी उसी वन में जाकर रहने की बात करती है जहाँ उसके प्रिय (लक्ष्मण) निवास कर रहे हैं।

(iv) वियोगिनी अपने प्रिय (पति लक्ष्मण) के कर्तव्य-व्रत/तपस्या में विघ्न न डालने की बात कह रही है।

(v) आशय: उर्मिला कहती है कि भले ही उसे प्रिय के वियोग की पीड़ा (व्यथा) सहनी पड़े, किन्तु प्रिय के आसपास रहने और उन्हें दूर से देखने से उसके मन को शांति और संतोष का पूरा समाधान प्राप्त होता रहेगा।

अथवा (द्वितीय पद्यांश के उत्तर):

(i) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'काव्यांजलि' में संकलित एवं सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता 'परिवर्तन' से उद्धृत है।

(ii) वृद्धावस्था की दुखभरी और गहरी साँसें कोमल होठों की ओस-कणों जैसी मुस्कान (हिमजल-हास) को उड़ा देती हैं।

(iii) 'मिलन के पल केवल दो चार' में अनुप्रास एवं विरोधाभास/रूपक अलंकार है।

(iv) प्रस्तुत पद्यांश में शांत रस (तथा करुण भावना) निहित है।

(v) रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या: कवि सुमित्रानंदन पंत परिवर्तन की निष्ठुरता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि इस नश्वर संसार में जीवन में सुख और मिलन के क्षण तो केवल दो-चार पल के लिए ही आते हैं, जबकि दुःख, वियोग और विरह की समयावधि युगों (कल्पों) जैसी अत्यंत लंबी और अपार प्रतीत होती है।

प्रश्न 5.

क) निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए । (3 + 2 = 5)

(i) डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी

(ii) डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

(iii) जैनेन्द्र कुमार

उत्तर:

(i) डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी:

• जीवन परिचय: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 ई. में बलिया जिले के 'दुबे का छपरा' नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम अनमोल द्विवेदी तथा माता का नाम ज्योतिषमती था। इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 'ज्योतिषाचार्य' की उपाधि प्राप्त की। ये शांतिनिकेतन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा पंजाब विश्वविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे। भारत सरकार ने इन्हें 'पद्मभूषण' की उपाधि से अलंकृत किया। 19 मई 1979 ई. को इनका निधन हो गया।

• साहित्यिक योगदान एवं कृतियाँ: द्विवेदी जी निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक एवं शोधकर्ता के रूप में हिन्दी साहित्य में मूर्धन्य स्थान रखते हैं।

• निबंध संग्रह: अशोक के फूल, कुटज, विचार और वितर्क, कल्पलता, आलोक पर्व।

• उपन्यास: बाणभट्ट की आत्मकथा, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा, चारु चंद्रलेख।

• आलोचना: कबीर, सूर साहित्य, हिन्दी साहित्य की भूमिका, हिन्दी साहित्य का आदिकाल।

प्रश्न 5.

ख) निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन परिचय देते हुए उसकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए । (3 + 2 = 5)

(i) जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'

(ii) जयशंकर प्रसाद

(iii) रामधारी सिंह 'दिनकर'

उत्तर:

(ii) जयशंकर प्रसाद:

• जीवन परिचय: छायावाद के प्रवर्तक महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई. में काशी के प्रसिद्ध 'सुँघनी साहू' वैश्य परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवीप्रसाद था। बाल्यकाल में ही माता-पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण इनकी शिक्षा का प्रबंध घर पर ही हुआ, जहाँ इन्होंने संस्कृत, हिन्दी, फ़ारसी और अंग्रेजी का अध्ययन किया। 15 नवंबर 1937 ई. को मात्र 48 वर्ष की अल्पायु में इनका निधन हो गया।

• साहित्यिक विशेषताएँ:

1. छायावाद के आधार स्तंभ: प्रसाद जी छायावादी काव्यधारा के जनक हैं। इनके काव्य में प्रेम, सौंदर्य, राष्ट्रप्रेम तथा आध्यात्मिक चिंतन का अद्भुत संगम है।

2. प्रकृति चित्रण: इन्होंने प्रकृति का चेतन, मानवीकृत एवं रहस्यात्मक रूपों में सजीव चित्रण किया है।

3. प्रमुख कृतियाँ:

• महाकाव्य: कामायनी (छायावाद की अनुपम कृति)।

• काव्य ग्रन्थ: आँसू, लहर, झरना, कानन-कुसुम।

• नाटक: चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, अजातशत्रु।

प्रश्न 6.

'पंचलाइट' अथवा 'कर्मनाशा की हार' कहानी के मुख्य पात्र का चरित्र चित्रण कीजिए । (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द) (5)

अथवा

'बहादुर' कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए ।

उत्तर:

'पंचलाइट' कहानी के मुख्य पात्र 'गोधन' का चरित्र चित्रण:

फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा रचित 'पंचलाइट' कहानी का मुख्य पात्र 'गोधन' है। उसकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. सच्चा एवं कुशल ग्रामीण युवक: गोधन महतो टोली का एक सीधा-साधा ग्रामीण युवक है। वह पेट्रोमैक्स (पंचलाइट) जलाने की विद्या जानता है, जो पूरे टोले में किसी और को नहीं आती।

2. प्रेमी हृदय: वह मुनरी से प्रेम करता है और उसके घर के सामने से 'सलीमा का गाना' गाकर निकलता है, जिसके कारण पंचायत उस पर दंड लगाती है।

3. स्वाभिमानी एवं उदार मन का: जब महतो टोली की प्रतिष्ठा दाँव पर लगती है, तो वह पुरानी बातें भूलकर पंचलाइट जलाने के लिए तैयार हो जाता है।

4. सामूहिक प्रतिष्ठा का रक्षक: गोधन अपनी कुशलता से पंचलाइट जलाकर अपनी जाति और टोले का मान-सम्मान बचा लेता है, जिससे पंच उसके सारे गुनाह माफ कर देते हैं।

प्रश्न 7.

स्वपठित खण्डकाव्य के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए । (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द) (5)

(नोट: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों हेतु निर्धारित खण्डकाव्यों में से अपने जनपद अनुसार किसी एक का उत्तर दिया जाता है।)

क) 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'श्रीकृष्‍ण' का चरित्रांकन कीजिए ।

उत्तर:

रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर श्रीकृष्ण का चरित्र चित्रण:

1. अलौकिक एवं दूरदर्शी कूटनीतिज्ञ: श्रीकृष्ण महाभारत युद्ध को टालने का हर संभव प्रयास करते हैं। वे पाण्डवों के दूत बनकर शांति-संदेश लेकर कौरव सभा में जाते हैं।

2. न्याय एवं धर्म के रक्षक: श्रीकृष्ण सदा न्याय और सत्य का पक्ष लेते हैं। वे जानते हैं कि पांडव धर्म पर हैं, इसलिए उनका मार्गदर्शन करते हैं।

3. विराट् रूपधारी: जब दुर्योधन उन्हें बंदी बनाने का प्रयास करता है, तब वे अपना विकराल एवं विराट् रूप प्रकट कर सभा को चकित कर देते हैं।

4. कर्ण के प्रशंसक व उदार: वे कर्ण की दानवीरता और योग्यता के सच्चे प्रशंसक हैं और उसे पांडव पक्ष में लाने का विनम्र प्रयास करते हैं।

प्रश्न 8.

क) निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का सन्दर्भसहित अनुवाद कीजिए । (2 + 5 = 7)

"त्रयोदशवर्षप्रापवतोऽस्य मूलशंकराय पिता शिवरात्रि व्रतमाचरितुम् अकथयत् । पितुराज्ञानुसारं मूलशंकर: सर्वमपि व्रत विधानमकरोत् राित्र शिवालये स्वपित्रा समं सर्वान् निदिरतान् विलोक्य स्वयं जागिरतोऽतिष्ठत् िशविलङ्गस्य चोपरि मूषिकमेकमितस्त: विचरन्तं दृष्ट्वा शङ्कितमानस: सत्यं शिवं सुन्दरं लोकशङ्करं शङ्करं साक्षात्कर्तुं हृदि निश्चितवान् । ततः प्रभृत्येव शिवरात्रे : उत्सव: ऋषिबोधोत्स्व: इति नाम्ना श्रीमद्दयानन्दानुयायिनाम् आर्यसमाजिनामन्ध्ये प्रसिद्धोऽभूत् ।"

अथवा

"हिन्दी – संस्कृताङ्गलभाषासु अस्य समान: अधिकार: आसीत् । हिन्दी – हिन्दूहिन्दुस्थानानामुत्थानाय अयं निरन्तरं प्रयत्नमकरोत् । शिक्षयैव देशे समाजे च नवीन: प्रकाश: उदेति, अतः श्रीमालवीय: वाराणस्यां काशी विश्वविद्यालयस्य संस्थापनमकरोत् । अस्य निर्माणाय अयं जनान् धनम् अयाचत जनाश्च महत्यस्मिन् ज्ञानयज्ञे प्रभूतं धनमस्मै प्रायच्छन्, तेन निर्मितोऽयं विशाल: विश्वविद्यालय: भारतीयां दानशीलताया : श्रीमालवीयस्य यशस: च प्रतिमूर्तिरिव विभाति ।"

उत्तर:

प्रथम गद्यांश का सन्दर्भ व अनुवाद:

• सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'महर्षिः दयानन्दः' पाठ से उद्धृत है।

• अनुवाद: तेरह वर्ष की आयु प्राप्त होने पर इनके (महर्षि दयानन्द के) पिता ने मूलशंकर से शिवरात्रि का व्रत करने के लिए कहा। पिता की आज्ञानुसार मूलशंकर ने व्रत का सारा विधान पूरा किया। रात्रि में शिवालय में अपने पिता के साथ सभी को सोया हुआ देखकर वे स्वयं जागते रहे। शिवलिंग के ऊपर एक चूहे को इधर-उधर घूमते हुए देखकर शंकित मन वाले मूलशंकर ने सत्य, शिव, सुन्दर और कल्याणकारी शंकर का साक्षात् दर्शन करने का हृदय में निश्चय किया। तब से ही शिवरात्रि का उत्सव 'ऋषिबोधोत्सव' इस नाम से श्रीमद् दयानन्द के अनुयायियों और आर्यसमाजियों के मध्य प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 8.

ख) निम्नलिखित श्लोकों का सन्दर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए । (2 + 5 = 7)

"अत्यन्त – सुख – सञ्चारा मध्याह्ने स्पर्शतः सुखाः ।

दिवसाः सुभगािदत्‍याः छायासलिलदुर्भगाः ॥"

अथवा

"सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम् ।

वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः ॥"

उत्तर:

द्वितीय श्लोक (अथवा) का सन्दर्भ व अनुवाद:

• सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत-खण्ड के 'सुभाषितरत्नानि' पाठ से लिया गया है।

• अनुवाद: बिना विचार किए अचानक (सहसा) कोई कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि अज्ञानता (अविवेक) परम आपत्तियों का स्थान होती है। भली-भाँति विचार करके कार्य करने वाले व्यक्ति का, गुणों की लोभी धन-संपत्तियाँ (लक्ष्मी) स्वयं ही वरण (चयन) कर लेती हैं।

प्रश्न 9.

निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए । (2 + 2 = 4)

क) खलस्य विद्या किमर्थं भवति ?

ख) नृपः दिलीपः कीदृशः शासकः आसीत् ?

ग) वसन्‍तकाले वृक्षाः कीदृशाः भविन्‍ति ?

घ) का भाषा सवासर् ुभाषासु प्रािचनतमा श्रे ष्‍ठ अिस्‍त ?

उत्तर:

क) खलस्य विद्या विवादाय भवति।

घ) संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठ च अस्ति।

(वैकल्पिक ख एवं ग के उत्तर:)

ख) नृपः दिलीपः प्रजापालकः, धर्मज्ञः, सर्वगुणसम्पन्नः च शासकः आसीत्।

ग) वसन्तकाले वृक्षाः पुष्पिताः, पल्लविताः च भवन्ति।

प्रश्न 10.

क) 'शृंगार' रस अथवा 'हास्य' रस की परिभाषा देते हुए एक उदाहरण दीजिए । (1 + 1 = 2)

उत्तर:

'हास्य' रस:

• परिभाषा: जब विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारी भावों के संयोग से 'हास' नामक स्थायी भाव पुष्ट होता है, तो वहाँ हास्य रस की निष्पत्ति होती है।

• उदाहरण:

"विन्ध्य के वासी उदासी तपोव्रतधारी महा बिनु नारि दुखारे।

गोतम तीय तरी तुलसी सो कथा सुनि भे मुनिबृंद सुखारे॥"

ख) 'उत्प्रेक्षा' अथवा 'अतिशयोक्ति' अलंकार की परिभाषा देते हुए एक उदाहरण दीजिए । (1 + 1 = 2)

हल / Solution:

'उत्प्रेक्षा' अलंकार:

• परिभाषा: जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसमें मनहु, मानो, जनु, जानो आदि वाचक शब्दों का प्रयोग होता है।

• उदाहरण:

"सोहत ओढ़े पीतु पटु, सलोने गात।

मनौ नीलमनि सैल पर, आपतु पर्यो प्रभात॥"

ग) 'कुण्डलिनी' अथवा 'बरवै' छन्द की परिभाषा लिखिए एवं एक उदाहरण दीजिए । (1 + 1 = 2)

हल / Solution:

'बरवै' छन्द:

• परिभाषा: यह अर्धसम मात्रिक छन्द है। इसके प्रथम और तृतीय (विषम) चरणों में 12-12 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में 7-7 मात्राएँ होती हैं। सम चरणों के अंत में जगण (।) या तगण (।।) होता है।

• उदाहरण:

"चम्पक हरवा अंग मिलि, अधिक सुहाय। (12 + 7 = 19 मात्राएँ)

जानि परै सिय हिये हेरि, जब कुम्हिलाय॥" (12 + 7 = 19 मात्राएँ)

प्रश्न 11.

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए । (2 + 7 = 9)

क) पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियाँ ।

ख) वर्तमान युग की दिशा और दशा ।

ग) जातिवादी जनगणना की प्रासंगिकता ।

घ) विद्यार्थी और राजनीति ।

ङ) भारत में किसानों की समस्या ।

उत्तर:

निबंध: पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियाँ

1. प्रस्तावना:

पर्यावरण हमारी जीवनदायिनी जननी है। जल, वायु, मृदा, और वनस्पति मिलकर पृथ्वी पर जीवन का संतुलन बनाते हैं। किंतु आधुनिकता, औद्योगिक विकास और मानवीय स्वार्थों के कारण आज पर्यावरण पर भारी संकट मंडरा रहा है।

2. मुख्य चुनौतियाँ:

• बढ़ता प्रदूषण: जल, वायु और मृदा प्रदूषण के कारण शुद्ध हवा और पानी दुर्लभ होते जा रहे हैं।

• वनों की कटाई (वनोन्मूलन): कंक्रीट के जंगल बसाने के लिए अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं।

• ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिवर्तन: तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघल रहे हैं तथा बेमौसम अतिवृष्टि व अनावृष्टि की समस्याएँ बढ़ रही हैं।

• प्लास्टिक कचरा: प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग जल स्रोतों और मृदा की उर्वरता को नष्ट कर रहा है।

3. समाधान के उपाय:

• व्यापक स्तर पर 'वृक्षारोपण' आंदोलन चलाया जाए।

• सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का अधिकतम उपयोग हो।

• प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध और अपशिष्ट प्रबंधन का सही क्रियान्वयन किया जाए।

4. उपसंहार:

पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। जब तक 'प्रकृति रक्षति रक्षिता' का भाव मन में नहीं होगा, मानव सभ्यता का अस्तित्व खतरे में रहेगा।

प्रश्न 12.

क) i) सज्‍जन : का सन्धि-विच्छेद है – (1)

अ) सत् + जन:

ब) सज् + जन:

स) सद् + जन:

द) स + जन:

ii) भानूदय : का सन्धि-विच्छेद है – (1)

अ) भान + उदय:

ब) भानो + दय:

स) भानू + उदय:

द) भानु + दय:

iii) गीश्‍चरित में कौन सी सन्धि है ? (1)

अ) स्वर सन्धि

ब) विसर्ग सन्धि

स) दीर्घ सन्धि

द) व्यञ्जन सन्धि

उत्तर:

i) अ) सत् + जन:

ii) द) भानु + उदय:

iii) ब) विसर्ग सन्धि (गीः + चरति)

प्रश्न 12.

ख) निम्नलिखित में से किसी एक शब्द का विग्रह करके समास का नाम लिखिए । (1 + 1 = 2)

i) उपग्रामम्

ii) गदाहस्‍त:

iii) श्‍वेताम्‍बरं

उत्तर:

i) उपग्रामम्

• विग्रह: ग्रामस्य समीपम्

• समास का नाम: अव्ययीभाव समास

प्रश्न 13.

छात्र बैंक में खाता खुलवाने के लिए एक प्रार्थना पत्र बैंक प्रबन्धक के नाम लिखिए । (2 + 6 = 8)

अथवा

निर्धन छात्र की आर्थिक सहायता हेतु छात्र सहायता कोष से सहायता हेतु विद्यालय के प्रधानाचार्य को एक आवेदन पत्र लिखिए ।

उत्तर:

खाता खुलवाने हेतु बैंक प्रबंधक को प्रार्थना पत्र:

सेवा में,

शाखा प्रबंधक जी,

भारतीय स्टेट बैंक,

मुख्य शाखा, मेरठ (उ.प्र.)।

विषय: छात्र बचत खाता खुलवाने हेतु प्रार्थना पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं राजकीय इंटर कॉलेज, मेरठ की कक्षा 12 का छात्र हूँ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मिलने वाली छात्रवृत्ति योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु मुझे आपके बैंक में एक 'छात्र बचत खाता' (Savings Account) खुलवाना आवश्यक है।

मैंने खाता खोलने हेतु आवश्यक सभी दस्तावेज़ (जैसे- आधार कार्ड, विद्यालय पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो) इस प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न कर दिए हैं।

अतः आपसे नम्र निवेदन है कि मेरा छात्र बचत खाता खोलने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।

धन्यवाद!

संलग्नक:

1. आधार कार्ड की छायाप्रति

2. विद्यालय पहचान पत्र की छायाप्रति

3. नवीनतम फोटो

भवदीय,

अक्षय कुमार

कक्षा: 12 (अ)

दिनांक: 15 मार्च 2026

प्रश्न 14.

क) निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द का प्रत्यय लिखिए । (1)

i) खािदत्‍वा

ii) दृष्‍ट्वा

iii) पुत्रवती

उत्तर:

i) खादित्वा → प्रत्यय: क्त्वा (त्वा)

प्रश्न 14.

ख) निम्नलिखित में से किसी एक शब्द के धातु एवं प्रत्यय के योग को स्पष्ट कीजिए । (1)

i) गन्‍तव्‍य

ii) ज्ञात्‍वा

iii) दातव्‍य

उत्तर:

i) गन्तव्य → गम् (धातु) + तव्यत् (प्रत्यय)

प्रश्न 14.

ग) रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति एवं तत्सम्बन्धी नियम का उल्लेख कीजिए । (1 + 1 = 2)

i) तड़ागं पिरतः वृक्षाः सिन्‍त ।

ii) रामेण सह सीता वनम् गच्‍छित ।

iii) गंगा िहमालयात् िनसरित ।

उत्तर:

i) तड़ागं

• प्रयुक्त विभक्ति: द्वितीया विभक्ति

• नियम/सूत्र: 'अभितः परितः समया निकषा हा प्रतियोगेऽपि' सूत्र के अनुसार 'परितः' (चारों ओर) शब्द के योग में 'तड़ागम्' पद में द्वितीया विभक्ति प्रयुक्त हुई है।