(i) कवि का नाम: सुमित्रानंदन पंत
कविता/पद्यांश का नाम: नौका-विहार (काव्य संग्रह 'गुंजन' से)
(ii) संसार का क्रम जल-धारा के समान निरंतर चलायमान और शाश्वत है। जिस प्रकार नदी की धारा बहती रहती है, उसी प्रकार संसार में जीवन और मृत्यु का चक्र निरंतर चलता रहता है।
(iii) कवि ने जीवन के उद्गम, उसकी गति, उसके संगम, आकाश के नीले विस्तार, चंद्रमा की चाँदनी (रजत हास) तथा लहरों की क्रीड़ा को शाश्वत बताया है।
(iv) रजत हास: चंद्रमा की चाँदी जैसी सफेद हास्य/चमकती चाँदनी।
कर्णधार: नाव चलाने वाला / ईश्वर (संसार रूपी नाव का पतवार सँभालने वाला)।
(v) रेखांकित अंश की व्याख्या: कवि सुमित्रानंदन पंत कहते हैं कि गंगा की धारा में नौका-विहार करते हुए उन्हें यह परम सत्य अनुभूति हुई कि जीवन रूपी नाव का यह विहार भी शाश्वत है। इस क्षणिक संसार में अपने अमर अस्तित्व के ज्ञान को वे भूल गए थे, परंतु जीवन के इस शाश्वत प्रवाह के सत्य दर्शन ने उन्हें अमरत्व का बोध करा दिया है। जीवन क्षणभंगुर होकर भी अपनी अंतहीन धारा में अमर है।
अथवा
अलसता की सी लता
किन्तु कोमलता की वह कली
सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह
छाँह-सी अम्बर पथ से चली
नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,
नहीं होता कोई अनुराग -- राग -- आलाप,
नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं
सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप -- चुप -- चुप'
है गूँज रहा सब कहीं।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि एवं पद्यांश का नाम लिखिए।
(ii) कवि ने संध्या को किस रूप में चित्रित किया है?
(iii) अलसता की लता किसको कहा गया है?
(iv) अव्यक्त शब्द का अर्थ और विलोम शब्द लिखिए।
(v) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
हल / Solution:
(i) कवि का नाम: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
पद्यांश का नाम: संध्या सुंदरी
(ii) कवि ने संध्या को एक सुंदरी अप्सरा/नायिका के रूप में चित्रित किया है जो शांत वातावरण में धीरे-धीरे आकाश मार्ग से धरती की ओर उतर रही है।
(iii) अलसता की लता संध्या सुंदरी (संध्या रूपी नायिका) को कहा गया है।
(iv) अव्यक्त का अर्थ: जो स्पष्ट रूप से कहा न गया हो / अप्रकट।
अव्यक्त का विलोम शब्द: व्यक्त।
(v) रेखांकित अंश की व्याख्या: कवि कहते हैं कि संध्या के आगमन पर संपूर्ण सृष्टि में कोई शोर-शराबा या गीत-संगीत नहीं होता, अपितु चारों ओर केवल एक मौन और सर्वव्यापी शांति छाई रहती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति का हर कोना केवल 'चुप-चुप-चुप' का अव्यक्त संदेश दे रहा हो।