Solution

UP Board Class 12th Samany Hindi Board Exam Paper 2026 302(BN)

कक्षा 12वीं · हिंदी · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

क) 'पतितों के देश में' रचना है :

(i) राहुल सांकृत्यायन की

(ii) रामवृक्ष बेनीपुरी की

(iii) हजारी प्रसाद द्विवेदी की

(iv) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' की

उत्तर:

(ii) रामवृक्ष बेनीपुरी की

ख) संपूर्णानन्द द्वारा सम्पादित पत्रिका है :

(i) धर्मयुग

(ii) हंस

(iii) सरस्वती

(iv) मर्यादा

हल / Solution:

(iv) मर्यादा

ग) 'भाग्यवती' उपन्यास के लेखक हैं :

(i) मुंशी प्रेमचन्द

(ii) अमृतलाल नागर

(iii) श्रद्धाराम फुल्लौरी

(iv) रामप्रसाद निरंजनी

हल / Solution:

(iii) श्रद्धाराम फुल्लौरी

घ) हजारी प्रसाद द्विवेदी 'पद्मभूषण' उपाधि से सम्मानित हुए :

(i) 1963 में

(ii) 1959 में

(iii) 1957 में

(iv) 1950 में

हल / Solution:

(iii) 1957 में

ङ) निम्नलिखित साहित्यकारों में नाटककार हैं :

(i) रामचन्द्र शुक्ल

(ii) डॉ. नगेन्द्र

(iii) मोहन राकेश

(iv) महादेवी वर्मा

हल / Solution:

(iii) मोहन राकेश

प्रश्न 2.

क) मैथिलीशरण द्वारा रचित कृति है :

(i) रसकलश

(ii) दानलीला

(iii) प्रदक्षिणा

(iv) अतिमा

उत्तर:

(iii) प्रदक्षिणा

ख) 'रामधारी सिंह दिनकर' की रचना है :

(i) पृथ्वीपुत्र

(ii) स्वर्ण किरण

(iii) परशुराम की प्रतीक्षा

(iv) ऐसा कोई घर आपने देखा है

हल / Solution:

(iii) परशुराम की प्रतीक्षा

ग) 'छायावाद' की विशेषता है :

(i) इतिवृत्तात्मकता

(ii) सौन्दर्य एवं प्रेम

(iii) शृंगारिक भावना

(iv) उपदेशात्मक वृत्ति

हल / Solution:

(ii) सौन्दर्य एवं प्रेम

घ) 'छायावाद' युग में लिखी गई रचना है :

(i) प्रेम माधुरी

(ii) उद्धवशतक

(iii) चित्राधार

(iv) सूरसारावली

हल / Solution:

(iii) चित्राधार

ङ) महाकवि भूषण की रचना है :

(i) चिदम्बरा

(ii) यामा

(iii) छत्रसाल दशक

(iv) दीपशिखा

हल / Solution:

(iii) छत्रसाल दशक

प्रश्न 3.

दिए गए गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

पृथ्वी और आकाश के अन्तराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गंभीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए के समान हैं।

विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अथक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए। हमारा यह ध्येय हो कि राष्ट्र में जितने हाथ हैं, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।

(ii) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।

(iii) राष्ट्रीय चेतना में भौतिक ज्ञान-विज्ञान के महत्त्व को रेखांकित कीजिए।

(iv) लेखक ने राष्ट्र की सुप्त अवस्था कब तक स्वीकार की है?

(v) विज्ञान और श्रम के संयोग से राष्ट्र प्रगति के पथ पर कैसे अग्रसर हो सकता है?

उत्तर:

(i) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'सामान्य हिंदी' के गद्य-भाग में संकलित एवं डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल द्वारा लिखित 'राष्ट्र का स्वरूप' नामक पाठ से उद्धृत है।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक का कथन है कि राष्ट्र की समृद्धि और विकास के लिए वैज्ञानिक ज्ञान तथा मानवीय उद्योग (परिश्रम) का तालमेल अत्यंत आवश्यक है। इन दोनों के सहयोग से ही राष्ट्र के भौतिक आधार को समृद्ध एवं सुदृढ़ रूप प्रदान किया जा सकता है। यह निर्माण-कार्य पूरे उत्साह, प्रसन्नता और निरंतर कठिन परिश्रम के साथ किया जाना चाहिए। हमारा मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि देश का प्रत्येक नागरिक (हर एक हाथ) इस राष्ट्र-निर्माण के कार्य में अपनी भूमिका निभाए और कोई भी व्यक्ति कार्यविहीन या खाली न रहे।

(iii) राष्ट्रीय चेतना में भौतिक ज्ञान-विज्ञान का महत्त्व इसलिए है क्योंकि पृथ्वी, आकाश तथा समुद्र में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी और उनका उचित उपयोग करके ही राष्ट्र का आर्थिक एवं भौतिक विकास संभव है।

(iv) लेखक ने राष्ट्र की सुप्त (सोई हुई) अवस्था तब तक स्वीकार की है जब तक राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में प्रकृति और उसके संसाधनों के प्रति जिज्ञासा की नई किरणें नहीं फूटतीं।

(v) विज्ञान और श्रम (उद्यम) के संयोग से, प्रसन्नता, उत्साह और निरंतर परिश्रम करते हुए देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र-निर्माण में सहभागी बनाकर राष्ट्र को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया जा सकता है।

अथवा

ईर्ष्या-द्वेष से प्रेरित निंदा भी होती है, लेकिन इसमें वह मजा नहीं जो मिशनरी भाव से निंदा करने में आता है। इस प्रकार का निंदक बड़ा दुःखी होता है। ईर्ष्या-द्वेष से चौबीसों घंटे जलता है, और निंदा का जल छिड़क कर कुछ शान्ति अनुभव करता है। ऐसा निंदक बड़ा दयनीय होता है। अपनी अक्षमता से पीड़ित वह बेचारा दूसरे की सक्षमता के चाँद को देखकर सारी रात स्वान जैसा भौंकता है। ईर्ष्या-द्वेष से प्रेरित निंदा करनेवाले को कोई दंड देने की जरूरत नहीं है, वह निंदक बेचारा स्वयं दंडित होता है। आप चैन से सोइये और वह जलन के कारण सो नहीं पाता। उसे और क्या दण्ड चाहिए?

निरन्तर अच्छे काम करते जाने से उसका दंड भी सख्त होता जाता है। जैसे एक कवि ने अच्छी कविता लिखी, ईर्ष्याग्रस्त निंदक को कष्ट होगा। अब अगर एक और अच्छी लिख दी, तो उसका कष्ट दुगुना हो जाएगा।

(i) उपर्युक्त गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम लिखिए।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

(iii) निंदा कितने प्रकार की होती है?

(iv) मिशनरी भाव से निंदा करने से क्या मिलता है?

(v) ईर्ष्या-द्वेष से प्रेरित निंदक किस कारण सो नहीं पाता?

हल / Solution:

(i) लेखक का नाम: हरिशंकर परसाई

पाठ का नाम: निंदा रस

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या: लेखक कहते हैं कि निंदा प्रायः दो प्रकार की होती है—एक ईर्ष्या-द्वेष के कारण तथा दूसरी 'मिशनरी भाव' (एक उद्देश्य या व्यवसाय के रूप में) से की जाने वाली। ईर्ष्याजन्य निंदा की तुलना में मिशनरी भाव से की जाने वाली निंदा में निंदक को एक विशेष प्रकार का आनंद प्राप्त होता है, क्योंकि वह इसे अपना कर्तव्य मानकर बिना किसी निजी द्वेष के भी निरंतर करता रहता है।

(iii) गद्यांश के अनुसार निंदा मुख्यतः दो प्रकार की होती है—एक ईर्ष्या-द्वेष से प्रेरित निंदा तथा दूसरी मिशनरी (व्यावसायिक) भाव से की जाने वाली निंदा।

(iv) मिशनरी भाव से निंदा करने वाले को निंदा करने में एक विशेष प्रकार का मजा (आनंद/आत्मसंतोष) मिलता है।

(v) ईर्ष्या-द्वेष से प्रेरित निंदक दूसरों की उन्नति, सक्षमता और सफलता को देखकर उत्पन्न जलन (ईर्ष्या) के कारण रात भर सो नहीं पाता।

प्रश्न 4.

दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

ज्यों ज्यों लगती नाव पार

उर में आलोकित शत विचार!

इस धारा सा ही जग का क्रम

शाश्वत इस जीवन का उदगम्

शाश्वत है गति, शाश्वत संगम

शाश्वत नभ का नीला विकास,

शाश्वत शशिका यह रजत हास,

शाश्वत लघु लहरों का विलास

हे जगजीवन के कर्णधार!

चिर जन्म मरण के आर-पार,

शाश्वत जीवन-नौका विहार।

मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान,

जीवन का यह शाश्वत प्रमाण

करता मुझको अमरत्व दान!

(i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि एवं पद्यांश का नाम लिखिए।

(ii) जग का क्रम किस प्रकार का है?

(iii) किन-किन तथ्यों को शाश्वत बताया गया है?

(iv) रजत हास और कर्णधार का क्या अर्थ है?

(v) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

(i) कवि का नाम: सुमित्रानंदन पंत

कविता/पद्यांश का नाम: नौका-विहार (काव्य संग्रह 'गुंजन' से)

(ii) संसार का क्रम जल-धारा के समान निरंतर चलायमान और शाश्वत है। जिस प्रकार नदी की धारा बहती रहती है, उसी प्रकार संसार में जीवन और मृत्यु का चक्र निरंतर चलता रहता है।

(iii) कवि ने जीवन के उद्गम, उसकी गति, उसके संगम, आकाश के नीले विस्तार, चंद्रमा की चाँदनी (रजत हास) तथा लहरों की क्रीड़ा को शाश्वत बताया है।

(iv) रजत हास: चंद्रमा की चाँदी जैसी सफेद हास्य/चमकती चाँदनी।

कर्णधार: नाव चलाने वाला / ईश्वर (संसार रूपी नाव का पतवार सँभालने वाला)।

(v) रेखांकित अंश की व्याख्या: कवि सुमित्रानंदन पंत कहते हैं कि गंगा की धारा में नौका-विहार करते हुए उन्हें यह परम सत्य अनुभूति हुई कि जीवन रूपी नाव का यह विहार भी शाश्वत है। इस क्षणिक संसार में अपने अमर अस्तित्व के ज्ञान को वे भूल गए थे, परंतु जीवन के इस शाश्वत प्रवाह के सत्य दर्शन ने उन्हें अमरत्व का बोध करा दिया है। जीवन क्षणभंगुर होकर भी अपनी अंतहीन धारा में अमर है।

अथवा

अलसता की सी लता

किन्तु कोमलता की वह कली

सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह

छाँह-सी अम्बर पथ से चली

नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,

नहीं होता कोई अनुराग -- राग -- आलाप,

नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं

सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप -- चुप -- चुप'

है गूँज रहा सब कहीं।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि एवं पद्यांश का नाम लिखिए।

(ii) कवि ने संध्या को किस रूप में चित्रित किया है?

(iii) अलसता की लता किसको कहा गया है?

(iv) अव्यक्त शब्द का अर्थ और विलोम शब्द लिखिए।

(v) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

हल / Solution:

(i) कवि का नाम: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

पद्यांश का नाम: संध्या सुंदरी

(ii) कवि ने संध्या को एक सुंदरी अप्सरा/नायिका के रूप में चित्रित किया है जो शांत वातावरण में धीरे-धीरे आकाश मार्ग से धरती की ओर उतर रही है।

(iii) अलसता की लता संध्या सुंदरी (संध्या रूपी नायिका) को कहा गया है।

(iv) अव्यक्त का अर्थ: जो स्पष्ट रूप से कहा न गया हो / अप्रकट।

अव्यक्त का विलोम शब्द: व्यक्त।

(v) रेखांकित अंश की व्याख्या: कवि कहते हैं कि संध्या के आगमन पर संपूर्ण सृष्टि में कोई शोर-शराबा या गीत-संगीत नहीं होता, अपितु चारों ओर केवल एक मौन और सर्वव्यापी शांति छाई रहती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति का हर कोना केवल 'चुप-चुप-चुप' का अव्यक्त संदेश दे रहा हो।

प्रश्न 5.

क) निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए : (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)

(i) वासुदेव शरण अग्रवाल

(ii) हजारी प्रसाद द्विवेदी

(iii) प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी

उत्तर:

(i) वासुदेव शरण अग्रवाल

साहित्यिक परिचय:

डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल हिंदी साहित्य में भारतीय संस्कृति, पुरातात्विक अनुसंधान और इतिहास के विद्वान लेखक एवं शोधकर्ता के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने प्राचीन भारतीय साहित्य, संस्कृति तथा पुरातात्विक विषयों पर गंभीर शोध कार्य किया। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति की गौरवमयी झांकी तथा विचारप्रधान गद्य शैली के दर्शन होते हैं। वे निबंधकार, संपादक तथा टीकाकार के रूप में अत्यंत मूर्धन्य स्थान रखते हैं।

प्रमुख रचनाएँ:

• निबंध-संग्रह: 'राष्ट्र का स्वरूप', 'पृथ्वीपुत्र', 'कल्पवृक्ष', 'मातृभूमि', 'कला और संस्कृति'।

• शोध एवं संपादन: 'पाणिनिकालीन भारतवर्ष', 'पद्मावत' की संजीवनी व्याख्या, 'हर्षचरित का सांस्कृतिक अध्ययन'।

ख) निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए :

(i) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'

(ii) मैथिलीशरण गुप्त

(iii) जयशंकर प्रसाद

हल / Solution:

(iii) जयशंकर प्रसाद

साहित्यिक परिचय:

जयशंकर प्रसाद छायावादी काव्यधारा के प्रवर्तक एवं प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने अपने काव्य में सौंदर्य, प्रेम, राष्ट्रप्रेम, दर्शन तथा मानवीय चेतना की सूक्ष्म अनुभूतियों का उत्कृष्ट चित्रण किया है। वे एक महान कवि होने के साथ-साथ नाटककार, उपन्यासकार एवं निबंधकार भी थे। 'कामायनी' महाकाव्य उनकी अक्षय कीर्ति का आधार स्तंभ है, जिसमें उन्होंने मानव चेतना के विकास का दार्शनिक निरूपण किया है।

प्रमुख रचनाएँ:

• महाकाव्य: 'कामायनी'।

• काव्य-ग्रंथ: 'आँसू', 'लहर', 'झरना', 'कामायनी', 'चित्राधार', 'कानन कुसुम'।

• अन्य: 'स्कंदगुप्त', 'चंद्रगुप्त', 'ध्रुवस्वामिनी' (नाटक); 'तितली', 'कंकाल' (उपन्यास)।

प्रश्न 6.

'बहादुर' कहानी का सारांश अपनी भाषा में लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)

उत्तर:

अमरकांत द्वारा लिखित 'बहादुर' एक मध्यमवर्गीय परिवार में नौकर के प्रति अमानवीय व्यवहार की कहानी है। नेपाल का एक १२ वर्ष का बालक 'बहादुर' माँ की पिटाई से तंग आकर लेखक अमरकांत के घर नौकर बन जाता है। प्रारंभ में परिवार के लोग उसकी प्रशंसा करते हैं, परंतु धीरे-धीरे लेखक की पत्नी निर्मला और पुत्र किशोर उसके साथ दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और मारपीट करने लगते हैं।

एक दिन रिश्तेदार द्वारा चोरी का झूठा आरोप लगाए जाने पर बहादुर का दिल टूट जाता है और वह बिना बताए अपना सामान छोड़कर घर चला जाता है। उसके जाने के बाद पूरा परिवार अपनी भूल पर पछताता है। यह कहानी मध्यमवर्गीय मानसिकता एवं बाल-श्रम के दर्द को उजागर करती है।

अथवा

'पंचलाइट' कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।

हल / Solution:

फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा रचित 'पंचलाइट' एक आंचलिक कहानी है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समाज में व्याप्त अशिक्षा, अंधविश्वास तथा जातिगत संकीर्णता पर प्रकाश डालते हुए यह दिखाना है कि आवश्यकता पड़ने पर व्यक्ति की योग्यता और उसकी उपयोगिता रूढ़िवादी सामाजिक नियमों तथा जातिगत प्रतिष्ठा से अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

कहानी में महतो टोली के लोग पंचलाइट (पेट्रोमैक्स) खरीद लाते हैं, परंतु उसे जलाना कोई नहीं जानता। अंततः बिरादरी से बेदखल गोधन ही अपनी कुशलता से पंचलाइट जलाता है, जिससे टोली के सभी लोग उसका अपराध क्षमा कर देते हैं। इस प्रकार लेखक ने यह संदेश दिया है कि सामूहिकता, भाईचारा और व्यक्ति का गुण-कौशल सामाजिक कुरीतियों एवं संकीर्णताओं से ऊपर होता है।

प्रश्न 7.

(i) 'मुक्तियज्ञ' खण्ड काव्य की संक्षिप्त कथा अपने शब्दों में लिखिए।

अथवा

'मुक्तियज्ञ' के नायक गाँधीजी का चरित्र-चित्रण कीजिए।

(ii) 'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर दुःशासन का चरित्र-चित्रण कीजिए।

अथवा

'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर द्रौपदी चीर हरण का वृत्तान्त लिखिए।

(iii) 'रश्मिरथी' खण्ड काव्य के आधार पर कुन्ती का चरित्र-चित्रण कीजिए।

अथवा

'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर पंचम सर्ग की कथा का वर्णन कीजिए।

(iv) 'त्यागपथी' खण्डकाव्य के आधार पर द्वितीय सर्ग की कथा का उल्लेख कीजिए।

अथवा

'त्यागपथी' खण्डकाव्य के आधार पर नारी पात्र राज्यश्री का चरित्र-चित्रण कीजिए।

(v) 'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य की कथा वस्तु संक्षेप में लिखिए।

अथवा

'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य के नायक श्रवणकुमार का चरित्र-चित्रण कीजिए।

(vi) 'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य के आधार पर गाँधीजी का चरित्र-चित्रण कीजिए।

अथवा

'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:

(खंडकाव्य - उत्तर प्रदेश के जनपदों के अनुसार कोई एक प्रश्न):

(v) 'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य के नायक श्रवणकुमार का चरित्र-चित्रण:

डॉ. शिवबालक शुक्ल द्वारा रचित 'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य के नायक श्रवणकुमार हैं। उनके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. आदर्श एवं परम पितृभक्त: श्रवणकुमार अपने अंध माता-पिता के परम भक्त हैं। वे उन्हें काँवर में बैठाकर तीर्थ यात्रा पर ले जाते हैं और उनकी सेवा को ही अपना सबसे बड़ा धर्म मानते हैं।

2. सत्यवादी एवं धर्मनिष्ठ: श्रवणकुमार के विचारों में सत्य, दया और अहिंसा का भाव कूट-कूट कर भरा है। वे कभी झूठ नहीं बोलते और आश्रम-संस्कृति के वाहक हैं।

3. सरल एवं निष्कपट स्वाभाव: वे अत्यंत शांत और निष्कपट स्वभाव के हैं। सरयू तट पर बाण लगने पर भी वे राजा दशरथ के प्रति कोई क्रोध व्यक्त नहीं करते, बल्कि अपने प्यासे माता-पिता की चिंता करते हैं।

4. संयम और क्षमाशील: अंत समय में भी वे दशरथ को क्षमा कर देते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे उनके वृद्ध माता-पिता को जल पहुँचा दें।

प्रश्न 8.

(क) दिए गए संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससंदर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

संस्कृत साहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षि व्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भास भारवि भवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नैः अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते। इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च यतो भारतमातुः स्वातंत्र्यं गौरवं अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वं च संस्कृतेनैव सुरक्षितुं शक्यन्ते। इयं संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठ चास्ति।

ततः सुष्ठुक्तम् -- 'भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाणभारती'।

उत्तर:

संदर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'सामान्य हिंदी' के संस्कृत-भाग के 'संस्कृतसाहित्यस्य वैशिष्ट्यम्' (या 'संस्कृतभाषायाः महत्त्वम्') पाठ से उद्धृत है।

अनुवाद:

संस्कृत साहित्य के आदिकवि वाल्मीकि, महर्षि व्यास, कवि कुल गुरु कालिदास और अन्य भास, भारवि, भवभूति आदि महाकवि अपने ग्रन्थ-रत्नों के द्वारा आज भी पाठकों के हृदय में विराजमान हैं। यह भाषा हमारे द्वारा माता के समान सम्माननीय और वंदनीय है, क्योंकि भारत माता की स्वतंत्रता, गौरव, अखंडता और सांस्कृतिक एकता संस्कृत के द्वारा ही सुरक्षित रह सकती है। यह संस्कृत भाषा सभी भाषाओं में सबसे प्राचीन और श्रेष्ठ है।

इसलिए ठीक ही कहा गया है—"भाषाओं में मुख्य, मधुर और दिव्य देववाणी (संस्कृत) है।"

अथवा

यथैवोपकरणवतां जीवनं तथैव ते जीवनं स्यात्। अमृतत्वस्य तु नाशास्ति वित्तेन इति। सा मैत्रेयी उवाच -- येनाहं नामृतास्यामं किमहं तेन कुर्याम्। यदेव भगवान केवलममृतत्व साधनं जानाति, तदेव मे ब्रूहि। याज्ञवल्क्य उवाच -- प्रिया नः सती त्वं प्रियं भाषसे। एहि उपविश, व्याख्यास्यामि ते अमृतत्वस्य साधनम्।

हल / Solution:

संदर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'सामान्य हिंदी' के संस्कृत-भाग के 'आत्मज्ञ एव सर्वज्ञः' पाठ से उद्धृत है।

अनुवाद:

(याज्ञवल्क्य ने कहा—) जैसा साधन-संपन्न (धनाढ्य) लोगों का जीवन होता है, वैसा ही तुम्हारा भी जीवन हो जाएगा। धन से अमरता की आशा नहीं है। उस मैत्रेयी ने कहा—जिससे मैं अमर न हो सकूँगी, उसका मैं क्या करूँगी? हे भगवन्! आप अमरता का जो केवल एक साधन जानते हैं, वही मुझसे कहिए। याज्ञवल्क्य ने कहा—तुम हमारी प्रिया होने के कारण प्रिय बोल रही हो। आओ, बैठो, मैं तुम्हारे सामने अमरता के साधन की व्याख्या करूँगा।

(ख) दिए गए श्लोकों में से किसी एक का ससंदर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

विद्या विवादाय धनं मदाय

शक्तिः परेषां परिपीडनाय।

खलस्य साधोः विपरीतमेतज्

ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय॥

हल / Solution:

संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक 'सामान्य हिंदी' के संस्कृत-भाग में संकलित 'सुभाषितरत्नानि' पाठ से उद्धृत है।

अनुवाद:

दुष्ट व्यक्ति की विद्या वाद-विवाद (झगड़े) के लिए, धन घमंड (मद) के लिए और शक्ति दूसरों को पीड़ित करने (सताने) के लिए होती है। इसके विपरीत, सज्जन व्यक्ति की विद्या ज्ञान के लिए, धन दान के लिए और शक्ति दूसरों की रक्षा करने के लिए होती है।

अथवा

"जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः।

स हेतुः सर्वविद्यानां धनस्य धर्मस्य च॥"

हल / Solution:

संदर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक 'सामान्य हिंदी' के संस्कृत-भाग के 'सुभाषितरत्नानि' पाठ से उद्धृत है।

अनुवाद:

पानी की एक-एक बूंद गिरने से घड़ा धीरे-धीरे भर जाता है। यही नियम (सिद्धांत) समस्त विद्याओं, धर्म और धन का संचय करने का कारण है (अर्थात् निरंतर थोड़े-थोड़े प्रयास से ही विद्या, धर्म और धन एकत्र होते हैं)।

प्रश्न 9.

निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :

(i) उल्टी गंगा बहाना

(ii) ओखली में सिर देना

(iii) काठ का उल्लू

(iv) खून खौलना

उत्तर:

(iv) खून खौलना

• अर्थ: अत्यधिक क्रोधित होना / बहुत गुस्सा आना।

• वाक्य प्रयोग: निर्दोष बच्चे पर अत्याचार होते देखकर रोहन का खून खौल उठा।

प्रश्न 10.

अपठित गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मस्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मनुष्य को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।

(ii) शिक्षा को मनुष्य के लिए क्यों अनिवार्य माना गया है?

(iii) सभी वैभव प्राप्त व्यक्ति कब तक सुख नहीं प्राप्त कर सकता ?

उत्तर:

(i) शीर्षक: शिक्षा का महत्त्व एवं आत्मिक ज्ञान (या 'शिक्षा और मानव विकास')।

(ii) शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है क्योंकि यह अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है, जीवन के रहस्यों को प्रकट करती है, पहचान दिलाती है तथा मस्तिष्क और शरीर का सही प्रयोग करना सिखाती है।

(iii) संसार के सभी वैभव व सुख-साधन प्राप्त व्यक्ति भी तब तक वास्तविक सुख प्राप्त नहीं कर सकता जब तक कि उसे आत्मिक ज्ञान प्राप्त न हो जाए।

अथवा

जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं-- जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता-असफलता निर्भर है -- जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा -- स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता--असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

(ii) मानव मन की तुलना किससे की गई है और क्यों?

(iii) जीवन में कौन सफलता प्राप्त कर सकता है ?

हल / Solution:

(i) उचित शीर्षक: जीवन में सही चुनाव का महत्त्व (या 'संगति और विवेक का महत्त्व')।

(ii) मानव मन की तुलना 'पानी' (जल) से की गई है, क्योंकि जिस प्रकार पानी स्वाभाविक रूप से नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मानव मन भी बुराइयों की ओर शीघ्रता से आकृष्ट होकर भागता है।

(iii) जीवन में वही व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है जो उपयुक्त समय पर सही चुनाव (जैसे अच्छी संगति, परिश्रम और विवेकपूर्ण निर्णय) करना जानता है।

प्रश्न 11.

क) निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ चयन करके लिखिए :

(i) तरंग -- तुरंग

(अ) हाथी और घोड़ा

(ब) अस्थिपंजर और निर्धन

(स) लहर और घोड़ा

(द) तेज आवाज और धीमी आवाज

उत्तर:

(स) लहर और घोड़ा

(ii) भवन -- भुवन

(अ) घर -- संसार

(ब) होना -- भूमि

(स) व्यापक -- संसार

(द) होनी -- अनहोनी

हल / Solution:

(अ) घर -- संसार

ख) निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए :

(i) नाग

(ii) नाक

(iii) द्विज

(iv) मित्र

हल / Solution:

(iii) द्विज:

1. ब्राह्मण

2. पक्षी (या दाँत)

ग) निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द का चयन करके लिखिए :

(i) जो पढ़ना -- लिखना जानता हो

(अ) विद्वान्

(ब) पंडित

(स) साक्षर

(द) छात्र

हल / Solution:

(स) साक्षर

(ii) वंदना करने योग्य

(अ) स्तुति

(ब) प्रार्थना

(स) देवता

(द) वंदनीय

हल / Solution:

(द) वंदनीय

घ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए :

(i) घर के सामानों को रख दो

(ii) मेरे को फल ले आओ

(iii) पक्षी पेड़ में है

(iv) शिक्षक ने छात्र की प्रशंसा की

हल / Solution:

(ii) शुद्ध वाक्य: मेरे लिए फल ले आओ।

(iii) शुद्ध वाक्य: पक्षी पेड़ पर है।

प्रश्न 12.

क) 'करुण' रस अथवा 'शृंगार' रस की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए।

उत्तर:

करुण रस:

• परिभाषा: जब किसी प्रिय वस्तु, व्यक्ति आदि के अनिष्ट, विनाश या वियोग से हृदय में उत्पन्न 'शोक' नामक स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव के संयोग से रस रूप में परिणत होता है, तब वहाँ 'करुण रस' होता है।

• उदाहरण:

"मणि खोए भुजंग सी जननी, फन सा पटक रही थी शीश।

अंधा बना आज मुझको, किया न्याय तुमने जगदीश॥"

ख) 'रूपक' अथवा 'अनुप्रास' अलंकार का लक्षण एवं उदाहरण लिखिए।

हल / Solution:

अनुप्रास अलंकार:

• लक्षण: जहाँ काव्य में वर्णों (व्यंजनों) की आवृत्ति एक से अधिक बार एक ही क्रम में होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

• उदाहरण:

"तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।"

ग) 'चौपाई' अथवा 'दोहा' छंद की परिभाषा लिखकर उदाहरण भी लिखिए।

हल / Solution:

चौपाई छंद:

• परिभाषा: यह सम-मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में १६-१६ मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।) और तगण (॥) का प्रयोग वर्जित है।

• उदाहरण:

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥"

प्रश्न 13.

बैंक प्रबंधक के नाम एक आवेदन -- पत्र लिखिए, जिसमें किसी व्यवसाय को स्थापित करने हेतु ऋण की माँग की गई हो।

उत्तर:

सेवा में,

शाखा प्रबंधक,

भारतीय स्टेट बैंक,

मुख्य शाखा, मेरठ (उ.प्र.)।

विषय: स्वरोजगार/व्यवसाय (कंप्यूटर सर्विस सेंटर) स्थापित करने हेतु ऋण प्राप्ति के संबंध में आवेदन-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि मैंने वर्ष 2024 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से बी.एससी. (कंप्यूटर साइंस) की परीक्षा उत्तीर्ण की है। वर्तमान में मैं बेरोजगार हूँ तथा अपना स्वयं का 'कंप्यूटर बिक्री एवं सर्विस सेंटर' शुरू करके स्वरोजगार स्थापित करना चाहता हूँ।

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए कुल ₹ 3,00,000 (तीन लाख रुपये) की आवश्यकता है, जिसमें से ₹ 50,000 की धनराशि मैं स्वयं लगा रहा हूँ। शेष ₹ 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) के ऋण की मुझे आवश्यकता है।

अतः आपसे नम्र निवेदन है कि प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत मुझे उक्त व्यवसाय हेतु ₹ 2,50,000 का ऋण प्रदान करने की कृपा करें। आवश्यक दस्तावेज (शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट) आवेदन-पत्र के साथ संलग्न हैं।

धन्यवाद!

संलग्नक: उपर्युक्त सभी दस्तावेज।

दिनांक: 15 मार्च 2026

भवदीय,

अमित कुमार

पता: 124, नया बाजार, मेरठ।

प्रश्न 14.

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए :

(i) अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम।

(ii) महिला सशक्तिकरण की उपयोगिता।

(iii) बेरोजगारी की समस्या और समाधान।

(iv) मेरा प्रिय खेल।

(v) नयी शिक्षानीति की विशेषताएँ।

उत्तर:

(iii) बेरोजगारी की समस्या और समाधान

रूपरेखा:

1. प्रस्तावना

2. बेरोजगारी का अर्थ एवं स्वरूप

3. बेरोजगारी के मुख्य कारण

4. बेरोजगारी के दुष्परिणाम

5. समाधान के उपाय

6. उपसंहार

1. प्रस्तावना:

आज भारत के समक्ष विद्यमान अनेक सामाजिक-आर्थिक समस्याओं में 'बेरोजगारी' सबसे विकराल और गंभीर समस्या है। किसी भी देश की युवा शक्ति उसकी रीढ़ होती है, परंतु जब योग्य और शिक्षित युवाओं को उनकी क्षमता के अनुसार कार्य नहीं मिलता, तो देश का विकास अवरुद्ध हो जाता है।

2. बेरोजगारी का अर्थ एवं स्वरूप:

बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति काम करने के लिए इच्छुक और शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम होते हुए भी रोजगार पाने में असमर्थ रहता है। भारत में शिक्षित बेरोजगारी, अदृश्य (प्रच्छन्न) बेरोजगारी तथा मौसमी बेरोजगारी के रूप में यह समस्या फैली हुई है।

3. बेरोजगारी के मुख्य कारण:

• जनसंख्या वृद्धि: देश की तीव्र जनसंख्या वृद्धि रोजगार के अवसरों की तुलना में बहुत अधिक है।

• दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली: हमारी पारंपरिक शिक्षा प्रणाली व्यावहारिक और व्यावसायिक न होकर केवल सैद्धांतिक अधिक है।

• कुटीर एवं लघु उद्योगों का पतन: मशीनीकरण और आधुनिक उद्योगों के कारण पारंपरिक गृह उद्योग समाप्त हो रहे हैं।

• कृषि पर अत्यधिक निर्भरता: देश की बहुत बड़ी आबादी आज भी केवल कृषि पर निर्भर है, जहाँ मौसमी बेरोजगारी पाई जाती है।

4. बेरोजगारी के दुष्परिणाम:

बेरोजगारी से युवाओं में मानसिक तनाव, निराशा और कुंठा फैलती है। इसके कारण अपराध, चोरी, नशे की लत तथा सामाजिक अशांति में वृद्धि होती है। देश की जनशक्ति का सदुपयोग न होने से आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ जाती है।

5. समाधान के उपाय:

• व्यावसायिक व कौशलाधारित शिक्षा: शिक्षा को रोजगारपरक और तकनीकी कौशल (Skill-based) से जोड़ा जाना चाहिए।

• लघु व कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन: सरकार को ग्रामीण एवं सूक्ष्म उद्योगों को कम ब्याज पर ऋण तथा संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।

• जनसंख्या नियंत्रण: बेरोजगारी पर लगाम लगाने के लिए जनसंख्या वृद्धि को संतुलित करना अनिवार्य है।

• स्वरोजगार योजनाएँ: 'स्टार्ट-अप इंडिया', 'मेक इन इंडिया' तथा मुद्रा योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र युवाओं तक पारदर्शी तरीके से पहुँचना चाहिए।

6. उपसंहार:

बेरोजगारी केवल एक व्यक्ति की नहीं, अपितु पूरे राष्ट्र की समस्या है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर इस दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे। जब देश का प्रत्येक युवा अपनी क्षमता का सही उपयोग कर सकेगा, तभी भारत एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बन पाएगा।