प्रश्न 1(1).
180g में मोलों की संख्या है :
(a) 180
(b) 1000
(c) 100
(d) 10
उत्तर:
. (d) 10
(स्पष्टीकरण: मोलों की संख्या = (भार)/(अणुभार), यदि 180g जल (H₂O) है, तो जल का अणुभार = 18 g/mol, अतः मोल =(180)/(18) = 10.)
UP Board Class 12th Chemistry Half Yearly Paper 2026 ZH(109)
कक्षा 12वीं · रसायन विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक
180g में मोलों की संख्या है :
(a) 180
(b) 1000
(c) 100
(d) 10
उत्तर:
. (d) 10
(स्पष्टीकरण: मोलों की संख्या = (भार)/(अणुभार), यदि 180g जल (H₂O) है, तो जल का अणुभार = 18 g/mol, अतः मोल =(180)/(18) = 10.)
अणुसंख्य गुणधर्म है :
(a) पृष्ठ तनाव
(b) श्यानता
(c) परासरण दाब
(d) ये सभी
उत्तर:
. (c) परासरण दाब
(स्पष्टीकरण: परासरण दाब, वाष्प दाब का अवनमन, क्वथनांक में उन्नयन और हिमांक में अवनमन अणुसंख्य गुणधर्म हैं.)
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का मात्रक है :
(a) mol L⁻¹sec⁻¹
(b) sec⁻¹
(c) mol⁻¹L~sec⁻¹
(d) mol L⁻¹
उत्तर:
. (b) sec⁻¹
प्राथमिक ऐल्कोहॉल है :
(a) CH₃OH
(b) H₃PO₄
(c) BF₃N
(d) COCl₂
उत्तर:
. (a) CH₃OH
आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल प्राप्त किया जा सकता है :
(a) मेथनॉल द्वारा
(b) एथनॉल द्वारा
(c) प्रोपेनॉल-1 द्वारा
(d) प्रोपेनॉल-2 द्वारा
उत्तर:
. (d) प्रोपेनॉल-2 द्वारा
Cu²⁺ में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है :
(a) 2
(b) 3
(c) 1
(d) 4
उत्तर:
. (c) 1
(स्पष्टीकरण: Cu (Z = 29) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d¹⁰ 4s¹ होता है। अत: Cu²⁺ का विन्यास [Ar] 3d⁹ होगा, जिसमें 3d कक्षक में केवल 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है.)
मोललता को परिभाषित कीजिये।
उत्तर:
.
किसी विलायक के 1 kg (1000 g) में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोललता (Molality) कहते हैं.
सूत्र: मोललता (m) = (विलेय के मोलों की संख्या)/(विलायक का द्रव्यमान (kg में))
आदर्श विलयन क्या है?
उत्तर:
.
वे विलयन जो सांद्रता की सभी सीमाओं पर राउल्ट के नियम (Raoult's Law) का पालन करते हैं, आदर्श विलयन कहलाते हैं. इसके लिए Δ H_mixing = 0 और Δ V_mixing = 0 होता है.
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई तथा व्यंजक लिखिये।
उत्तर:
.
• व्यंजक: k = (2.303)/(t) ₁₀(a)/(a-x)
• इकाई: (समय)⁻¹ अर्थात sec⁻¹ या min⁻¹
(i). निम्नलिखित का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कीजिये – Cu²⁺
उत्तर:
.
Cu²⁺ (Z = 27 प्रभावी इलेक्ट्रॉनों के साथ):
1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁹ या [Ar]₁₈ 3d⁹.
(ii). निम्नलिखित का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कीजिये – Cr³⁺
उत्तर:
.
Cr³⁺ (Z = 21 प्रभावी इलेक्ट्रॉनों के साथ):
1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d³ या [Ar]₁₈ 3d³.
संक्रमण धातुओं की दो विशेषता लिखिये।
उत्तर:
.
1. ये परिवर्ती संयोजकता (Variable Valency) प्रदर्शित करते हैं.
2. इनके यौगिक सामान्यतः रंगीन (Coloured ions/compounds) होते हैं.
गैल्वेनिक सेल तथा वैद्युत अपघटनी सेल में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
.
• गैल्वेनिक सेल: यह रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है. इसमें एनोड ऋणात्मक और कैथोड धनात्मक होता है.
• वैद्युत अपघटनी सेल: यह विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है. इसमें एनोड धनात्मक और कैथोड ऋणात्मक होता है.
46g एथनॉल को 54g जल में मिलाया जाता है। एथनॉल तथा जल के मोल अंशों की गणना कीजिये।
उत्तर:
.
• एथनॉल (C₂H₅OH) का मोलर द्रव्यमान = 2 × 12 + 6 × 1 + 16 = 46 g/mol
• एथनॉल के मोल (n₁) = (46)/(46) = 1 मोल
• जल (H₂O) का मोलर द्रव्यमान = 2 × 1 + 16 = 18 g/mol
• जल के मोल (n₂) = (54)/(18) = 3 मोल
• कुल मोल = 1 + 3 = 4
• एथनॉल का मोल अंश: X_ethanol = (1)/(4) = 0.25
• जल का मोल अंश: X_water = (3)/(4) = 0.75
लैन्थेनाइड के उपयोग लिखिये।
उत्तर:
.
1. इनका उपयोग मिश्रधातुओं (जैसे- मिश् मेटल) के निर्माण में होता है, जिसका उपयोग बुलेट और शेल्स बनाने में किया जाता है.
2. लैन्थेनाइड ऑक्साइड्स का उपयोग पेट्रोलियम क्रैकिंग में उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है.
(i). संरचना बनाइये – 2-chloro-2-methylpropane
उत्तर:
.
CH₃ - C(Cl)(CH₃) - CH₃
(ii). संरचना बनाइये – 2-bromobutane
उत्तर:
.
CH₃ - CH(Br) - CH₂ - CH₃
राइमट-टीमन अभिक्रिया क्या है?
उत्तर:
.
जब फीनॉल की क्रिया क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) तथा जलीय NaOH के साथ 340 K ताप पर की जाती है, तो सैलिसिल्डिहाइड बनता है। इस अभिक्रिया को रीमर-टीमन (Riemer-Tiemann) अभिक्रिया कहते हैं.
वुर्ट्ज अभिक्रिया (Wurtz reaction) को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
.
जब ऐल्किल हैलाइड की शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु के साथ क्रिया कराई जाती है, तो उच्च ऐल्केन बनते हैं.
• उदाहरण: 2CH₃Cl + 2Na ⇌Dry Ether CH₃-CH₃ + 2NaCl (एथेन)
सैत्जेफ नियम क्या है?
उत्तर:
.
इस नियम के अनुसार, विहाइड्रोhalogenation अभिक्रिया में मुख्य उत्पाद वह ऐल्कीन होता है जिसमें द्विआबंध से जुड़े कार्बन पर एल्किल समूहों की संख्या अधिक होती है (अर्थात अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद होती है).
(i). निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिये – जिप्सम
उत्तर:
.
CaSO₄ · 2H₂O
(ii). निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिये – इसपम (Epsom salt)
उत्तर:
.
MgSO₄ · 7H₂O
(iii). निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिये – हरा कसीस
उत्तर:
.
FeSO₄ · 7H₂O
(iv). निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिये – नीला थोथा
उत्तर:
.
CuSO₄ · 5H₂O
इलेक्ट्रोड विभव एवं सेल वैद्युत वाहक बल को परिभाषित लिखिये।
उत्तर:
.
• इलेक्ट्रोड विभव: किसी धातु की छड़ को जब उसी धातु के आयनों के विलयन में डुबोया जाता है, तो धातु और विलयन के मध्य उत्पन्न विभव को इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं.
• सेल वैद्युत वाहक बल (EMF): किसी सेल के दोनों इलेक्ट्रोडों के इलेक्ट्रोड विभवों का अंतर जब सेल से कोई धारा न ली जा रही हो, सेल का विद्युत वाहक बल कहलाता है.
नर्नेस्ट समीकरण को लिखिये।
उत्तर:
.
E = E^° - (RT)/(nF) ([Product])/([Reactant])
या E = E^° - (0.0591)/(n) ([Metal])/([Metal ion]) (298 K पर)
श्मिट अभिक्रिया (Schmidt Reaction) लिखिये।
उत्तर:
.
जब कार्बोक्सिलिक अम्ल की क्रिया हाइड्राजोइक अम्ल (HN₃) के साथ सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में कराई जाती है, तो प्राथमिक ऐमीन बनती है और CO₂ गैस निकलती है.
• RCOOH + HN₃ ⇌H₂SO₄ RNH₂ + N₂ + CO₂
S_N1 एवं S_N2 अभिक्रिया की क्रियाविधि की समझाइये।
उत्तर:
.
• S_N1 (एकाणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया): यह दो चरणों में पूरी होती है। पहले चरण में कार्बोधनायन (carbocation) बनता है जो धीमा और दर-निर्धारक चरण है, और दूसरे चरण में नाभिकस्नेही आक्रमण करता है. यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है.
• S_N2 (द्विअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया): यह एक ही पद में संपन्न होती है जिसमें संक्रमण अवस्था बनती है। इसमें आक्रमण पीछे से होता है जिससे विन्यास का प्रतिलोभन (Inversion of configuration) होता है. यह द्वितीय कोटि की अभिक्रिया है.
अथवा
ऐल्किल हैलाइड बनाने की चार विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर.
1. ऐल्कोहॉल से: ऐल्कोहॉल की क्रिया HX (जैसे ZnCl₂/HCl) या PCl₅ या SOCl₂ के साथ कराने पर ऐल्किल हैलाइड बनते हैं.
• ROH + HCl ⇌ZnCl₂ RCl + H₂O
2. हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन) पर हैलोजन अम्लों के योग से: मार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार.
• CH₃-CH=CH₂ + HBr → CH₃-CH(Br)-CH₃
3. हैलोजन विनिमय द्वारा (फिंकेलस्टीन अभिक्रिया): सोडियम आयोडाइड की शुष्क एसीटोन में उपस्थिति में ऐल्किल क्लोराइड/ब्रमाइड से.
• R-Cl + NaI → R-I + NaCl
4. हंसडीिकर अभिक्रिया द्वारा: वसा अम्लों के सिल्वर लवण की ब्रोमीन के साथ कार्बन टेट्राक्लोराइड में क्रिया द्वारा.
• RCOOAg + Br₂ ⇌CCl₄ R-Br + CO₂ + AgBr
लैन्थेनाइड आकुंचन क्या है? इसके कारण एवं परिणाम का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
.
• परिभाषा: लैन्थेनाइड श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ आयनिक तथा परमाणु त्रिज्याओं में क्रमिक नियमित कमी होती है, जिसे लैन्थेनाइड आकुंचन (Lanthanide Contraction) कहते हैं.
• कारण: 4f कक्षकों का परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) बहुत कमजोर होता है, जिससे नाभिकीय आवेश बढ़ता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन अधिक आकर्षण महसूस करते हैं.
• परिणाम: द्वितीय और तृतीय संक्रमण श्रेणियों के तत्वों (जैसे Zr और Hf) की आमाप (Sizes) लगभग समान हो जाती हैं.
संक्रमण तत्व को समझाइये एवं गुण भी लिखिये।
उत्तर:
.
• परिभाषा: वे तत्व जिनके परमाणु या आयन में d-कक्षक अपूर्ण रूप से भरे होते हैं, संक्रमण तत्व (d-ब्लॉक तत्व) कहलाते हैं.
• प्रमुख गुण:
1. उत्प्रेरकीय गुण (Catalytic properties) प्रदर्शित करते हैं.
2. संकर यौगिकों (Complex compounds) का निर्माण करते हैं.
अथवा
45g एथिलीन ग्लाइकोल (C₂H₆O₂) को 600g जल में मिलाया गया। विलयन के हिमांक में अवनमन एवं हिमांक की गणना कीजिये। (K_f = 1.86 K kg mol⁻¹)
उत्तर.
• विलेय (C₂H₆O₂) का द्रव्यमान (w₂) = 45 g, मोलर द्रव्यमान (M₂) = 2×12 + 6×1 + 2×16 = 62 g/mol
• विलायक (जल) का द्रव्यमान (w₁) = 600 g = 0.6 kg
• सूत्र: Δ T_f = (K_f × w₂ × 1000)/(M₂ × w₁)
• Δ T_f = (1.86 × 45 × 1000)/(62 × 600) = (83700)/(37200) = 2.25 K (हिमांक में अवनमन)
• विलयन का हिमांक = 0^°C - 2.25^°C = -2.25^°C (या 270.90 K)
(i). निम्नलिखित के IUPAC नाम लिखिये – 1,3-Dimethylbenzene
उत्तर:
.
1,3-Dimethylbenzene (या m-Xylene)
(ii). निम्नलिखित के IUPAC नाम लिखिये – 2-Methylpropan-2-ol
उत्तर:
.
2-Methylpropan-2-ol
(iii). निम्नलिखित के IUPAC नाम लिखिये – CH₃ - CH₂ - CH₂ - C(=O) - CH₃
उत्तर:
.
Pentan-2-one
(iv). निम्नलिखित के IUPAC नाम लिखिये – CH₃ - CH(OH) - CH₂ - CH(OH) - CH₃
उत्तर:
.
Pentane-2,4-diol
अथवा
निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिये –
(i) DDT
(ii) CCl₄
(iii) CHCl₃
उत्तर.
• (i) DDT (डाइक्लोरोडाइफेनिलट्राइक्लोरोएथेन): यह एक शक्तिशाली कीटनाशक है. क्लोरल और क्लोरोबेन्जीन की सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में संघनन से बनता है. पर्यावरण में यह आसानी से विघटित नहीं होता.
• (ii) CCl₄ (कार्बन टेट्राक्लोराइड): यह एक रंगहीन, अज्वलनशील द्रव है. इसका उपयोग विलायक (solvent) के रूप में, शुष्क धुलाई (dry cleaning) और अग्निशामक (Pyrene) के रूप में होता है.
• (iii) CHCl₃ (क्लोरोफॉर्म): यह मीठी गंध वाला एक भारी द्रव है. पहले इसका उपयोग निश्चेतक (Anesthetic) के रूप में होता था. हवा और सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर यह अत्यधिक विषैली गैस फॉस्जीन (COCl₂) बनाता है.