खण्ड-अ (बहुविकल्पीय प्रश्न / O.M.R. शीट)
उपखण्ड-क
UP Board Class 11th Physics Half Yearly Paper 2026
कक्षा 11वीं · भौतिक विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक
खण्ड-अ (बहुविकल्पीय प्रश्न / O.M.R. शीट)
उपखण्ड-क
समतल दर्पण की फोकस दूरी होती है-
(क) शून्य
(ख) अनन्त
(ग) 25 सेमी
(घ) -25 सेमी
उत्तर:
. (ख) अनन्त
इलेक्ट्रॉन पर आवेश होता है-
(क) -1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम
(ख) +1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम
(ग) -1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम
(घ) +1.6 × 10⁰ कूलॉम
उत्तर:
. (क) -1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम
ऐम्पियर-सेकण्ड मात्रक है-
(क) विभव का
(ख) धारा का
(ग) ऊर्जा का
(घ) आवेश का
उत्तर:
. (घ) आवेश का
फोकस दूरी (f) एवं वक्रता त्रिज्या (r) के बीच सम्बन्ध है-
(क) f = r
(ख) f = 1/r
(ग) 2f = r
(घ) f = 2r
उत्तर:
. (ग) 2f = r
यदि एक प्रकाश किरण दो माध्यमों के सीमा पृष्ठ पर समकोण पर आपतित होती है, तो अपवर्तन कोण का मान होगा-
(क) 0°
(ख) 45°
(ग) 60°
(घ) 90°
उत्तर:
. (क) 0°
यदि 7 सेमी ऊँची वस्तु 8 सेमी की फोकस दूरी के उत्तल लेन्स से 12 सेमी की दूरी पर रखी है, तो प्रतिबिम्ब की स्थिति होगी-
(क) 24 सेमी
(ख) 34 सेमी
(ग) 12 सेमी
(घ) 16 सेमी
उत्तर:
. (क) 24 सेमी
(गणना: 1/f = 1/v - 1/u ⇒ 1/8 = 1/v - 1/(-12) ⇒ 1/v = 1/8 - 1/12 = 1/24 ⇒ v = 24 सेमी)
पाँच प्रतिरोधकों, जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 2 ओम है, इनका उपयोग करके कितना अधिकतम प्रतिरोध बनाया जा सकता है-
(क) 2/5 ओम
(ख) 10 ओम
(ग) 5 ओम
(घ) 1 ओम
उत्तर:
. (ख) 10 ओम
(गणना: श्रेणीक्रम में R_max = 5 × 2 = 10 ओम)
उपखण्ड-ख
25°C ताप पर जल का आयनिक गुणनफल होता है-
(क) 10¹⁴
(ख) 10⁻¹⁴
(ग) 10¹²
(घ) 10⁻¹²
उत्तर:
. (ख) 10⁻¹⁴
[निम्न में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करती है]-
(क) Zn
(ख) Ag
(ग) Mg
(घ) Na
उत्तर:
. (क) Zn (तथा Mg, Na भी विस्थापित कर सकती हैं; सामान्यतः जस्ता/Zn उत्तर के रूप में प्रयुक्त होता है)
उपखण्ड-ग
फ्लोएम द्वारा भोजन का स्थानान्तरण होता है-
(क) सुक्रोज के रूप में
(ख) प्रोटीन के रूप में
(ग) हार्मोन्स के रूप में
(घ) वसा के रूप में
उत्तर:
. (क) सुक्रोज के रूप में
कोशिकीय प्रक्रमों में ऊर्जा मुद्रा है-
(क) माइटोकॉण्ड्रिया
(ख) ग्लूकोज
(ग) ATP
(घ) पाइरुवेट
उत्तर:
. (ग) ATP
खण्ड-ब (वर्णनात्मक प्रश्न)
उपखण्ड-क
निकट दृष्टि दोष किसे कहते हैं? इस दोष का निवारण किस प्रकार किया जाता है ? किरण आरेख द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
निकट दृष्टि दोष (Myopia):
वह दृष्टि दोष जिसमें मनुष्य को पास की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, परन्तु दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं, निकट दृष्टि दोष कहलाता है। इसमें दूर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटीना पर न बनकर उससे पहले ही बन जाता है।
कारण:
1. नेत्र लेन्स की वक्रता बढ़ जाना, जिससे फोकस दूरी कम हो जाती है।
2. नेत्र के गोले का व्यास (लंबाई) बढ़ जाना।
निवारण:
इस दोष के निवारण के लिए उपयुक्त फोकस दूरी वाले अवतल लेन्स (Concave Lens) के चश्मे का प्रयोग किया जाता है, जो अनंत से आने वाली किरणों को अपसारित करके उनका प्रतिबिम्ब रेटीना पर बना देता है।
[किरण आरेख विवरण:
1. दोषयुक्त नेत्र: दूर से आती समांतर किरणें रेटीना से पहले एक बिंदु पर मिलती हैं।
2. निवारण आरेख: अवतल लेन्स लगाने पर आने वाली किरणें थोड़ा अपसारित होकर ठीक रेटीना पर केंद्रित होती हैं।]
अवतल दर्पण के ध्रुव एवं फोकस के मध्य रखी वस्तु के प्रतिबिम्ब निर्माण को किरण आरेख द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव (P) तथा मुख्य फोकस (F) के बीच रखा जाता है:
प्रतिबिम्ब की स्थितियाँ एवं प्रकृति:
1. स्थिति: दर्पण के पीछे।
2. आकार: वस्तु से बड़ा (आवर्धित)।
3. प्रकृति: आभासी तथा सीधा (Virtual and Erect)।
किरण आरेख विवरण:
• मुख्य अक्ष पर ध्रुव P और फोकस F के बीच वस्तु AB स्थित है।
• A से मुख्य अक्ष के समांतर चलने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद फोकस F से होकर जाती है।
• A से वक्रता केंद्र C की ओर जाने वाली किरण परावर्तन के पश्चात उसी मार्ग पर वापस लौटती है।
• पीछे की ओर बढ़ाने पर ये दोनों किरणें बिंदु A' पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। अतः A'B' वस्तु AB का आभासी व सीधा प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है।
मानव नेत्र की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
मानव नेत्र के मुख्य भाग:
1. दृढ़ पटल (Sclera): नेत्र का सबसे बाहरी श्वेत एवं अपारदर्शी आवरण जो नेत्र के आंतरिक भागों की सुरक्षा करता है।
2. कॉर्निया (Cornea): दृढ़ पटल के सामने का उभरा हुआ पारदर्शी भाग, जिससे होकर प्रकाश नेत्र में प्रवेश करता है।
3. परितारिका (Iris): कॉर्निया के पीछे स्थित रंगीन अपारदर्शी पर्दा, जो नेत्र में जाने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है।
4. पुतली (Pupil): आइरिस के मध्य में स्थित एक छोटा छिद्र, जो अधिक प्रकाश में सिकुड़ता है और कम प्रकाश में फैल जाता है।
5. नेत्र लेन्स (Eye Lens): पुतली के पीछे स्थित द्वि-उत्तल (Biconvex) पारदर्शी लचीला लेन्स जो वस्तु का उल्टा और वास्तविक प्रतिबिम्ब रेटीना पर बनाता है।
6. दृष्टिपटल (Retina): नेत्र का सबसे आंतरिक प्रकाश-संवेदी पर्दा, जिस पर वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है।
एक मोटरबाइक पर, पीछे से आ रहे किसी अन्य वाहन को देखने के लिए, 2 मी. वक्रता त्रिज्या का एक उत्तल दर्पण लगा है। बाइक के पीछे से आ रहे एक वाहन जिसकी दूरी मोटर बाइक से किसी समय 4 मीटर की है, तो गणना करके बताइए कि उसका प्रतिबिम्ब दर्पण में कितनी दूरी पर और कहाँ दिखेगा ? किरण आरेख बनाकर भी समझाइए।
उत्तर:
.
दिया है:
वक्रता त्रिज्या (R) = +2 m
फोकस दूरी (f) = R / 2 = +1 m
वस्तु की दूरी (u) = -4 m
दर्पण सूत्र से:
1/f = 1/v + 1/u
1/1 = 1/v + 1/(-4)
1 = 1/v - 1/4
1/v = 1 + 1/4
1/v = 5/4
v = 4/5 = +0.8 m (या 80 सेमी)
प्रतिबिम्ब की प्रकृति एवं स्थिति:
प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 0.8 मीटर (80 सेमी) की दूरी पर, आभासी, सीधा तथा आकार में वस्तु से छोटा बनेगा।
[किरण आरेख विवरण: उत्तल दर्पण के मुख्य अक्ष पर -4 m पर रखी वस्तु से चलने वाली किरणें परावर्तित होकर दर्पण के पीछे +0.8 m पर फोकस F से पहले आभासी सीधा प्रतिबिम्ब बनाती हैं।]
अथवा
ओम का नियम क्या है? इसके सत्यापन के लिए आवश्यक प्रयोग का वर्णन परिपथ आरेख बनाकर कीजिए।
उत्तर:
.
ओम का नियम (Ohm's Law):
यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे ताप, दाब आदि) परिवर्तित न हों, तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवान्तर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है।
V ∝ I ⇒ V = R × I
(जहाँ R एक नियतांक है, जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।)
सत्यापन का प्रयोग:
1. आवश्यक उपकरण: बैटरी, कुंजी, धारा नियंत्रक (Rheostat), एमीटर, वोल्टमीटर तथा नाइक्रोम का तार।
2. परिपथ संयोजन: नाइक्रोम के तार के श्रेणीक्रम में एमीटर, बैटरी, कुंजी तथा धारा नियंत्रक जोड़ते हैं और तार के समांतर क्रम में वोल्टमीटर लगाते हैं।
3. कार्यविधि: प्लग में कुंजी लगाकर धारा नियंत्रक द्वारा परिपथ में धारा का मान बदलते हैं और प्रत्येक स्थिति में एमीटर (I) तथा वोल्टमीटर (V) के पाठ्यांक नोट करते हैं।
4. निष्कर्ष: V और I के बीच ग्राफ खींचने पर एक सरल रेखा प्राप्त होती है, जो यह सिद्ध करती है कि V/I = नियतांक है। अतः ओम का नियम सत्यापित होता है।
उपखण्ड-ख
मैग्नीशियम रिबन को नाइट्रोजन गैस की उपस्थिति में जलाने पर मैग्नीशियम नाइट्राइड निर्मित होता है।
उत्तर:
.
3Mg (s) + N₂ (g) → Mg₃N₂ (s)
एथेनॉल को एथेनोइक अम्ल के साथ सांद्र H₂SO₄ की उपस्थिति में एथिल एसीटेट का बनना।
उत्तर:
.
CH₃COOH (aq) + C₂H₅OH (aq) --(सांद्र H₂SO₄)--> CH₃COOC₂H₅ (aq) + H₂O (l)
एथीन की वायु की उपस्थिति में दहन क्रिया द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड, जल, ऊष्मा तथा प्रकाश का उत्पन्न होना।
उत्तर:
.
C₂H₄ (g) + 3O₂ (g) → 2CO₂ (g) + 2H₂O (l) + ऊष्मा + प्रकाश
773K पर अभिक्रिया द्वारा अमोनिया गैस बनाना।
उत्तर:
.
N₂ (g) + 3H₂ (g) --(773 K, Fe/Mo)--> 2NH₃ (g)
प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम तथा अणुसूत्र लिखिए। इस पर ऊष्मा के प्रभाव का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
रासायनिक नाम: कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (Calcium Sulphate Hemihydrate)
अणुसूत्र: CaSO₄·½H₂O (या (CaSO₄)₂·H₂O)
ऊष्मा का प्रभाव:
प्लास्टर ऑफ पेरिस को 200°C से अधिक ताप (लगभग 400°C) पर गर्म करने पर यह अपना संपूर्ण क्रिस्टलन जल त्याग देता है और निर्जल कैल्शियम सल्फेट (CaSO₄) में बदल जाता है, जिसे 'मृत तापित प्लास्टर' (Dead Burnt Plaster) कहते हैं।
CaSO₄·½H₂O --(ऊष्मा)--> CaSO₄ + ½H₂O
रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं? किन्हीं दो उदाहरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
परिभाषा:
वह प्रक्रिया जिसमें एक या एक से अधिक पदार्थ (अभिकारक) आपस में पुनर्व्यवस्थित होकर बिल्कुल भिन्न नए गुणों वाले पदार्थों (उत्पाद) का निर्माण करते हैं, रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण:
1. मैग्नीशियम का दहन:
2Mg + O₂ → 2MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइड का बनना)
2. प्रकाश संश्लेषण:
6CO₂ + 6H₂O --(सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल)--> C₆H₁₂O₆ + 6O₂
एथिल ऐल्कोहल की चार रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए और इसके तीन उपयोगों को भी लिखिए।
उत्तर:
.
चार रासायनिक अभिक्रियाएँ:
1. सोडियम से अभिक्रिया:
2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa (सोडियम एथॉक्साइड) + H₂ ↑
2. निर्जलीकरण (सांद्र H₂SO₄ के साथ 170°C पर):
C₂H₅OH --(सांद्र H₂SO₄, 170°C)--> C₂H₄ (एथीन) + H₂O
3. एस्टरीकरण (एसिटिक अम्ल के साथ):
C₂H₅OH + CH₃COOH --(सांद्र H₂SO₄)--> CH₃COOC₂H₅ + H₂O
4. क्षारीय KMnO₄ द्वारा ऑक्सीकरण:
C₂H₅OH + 2[O] --(क्षारीय KMnO₄)--> CH₃COOH + H₂O
तीन उपयोग:
1. प्रयोगशाला में अभिकर्मक तथा कार्बनिक विलायक के रूप में।
2. औषधियों, टिंचर आयोडीन तथा सिरप बनाने में।
3. शराब एवं पेय पदार्थों के निर्माण में।
अथवा
निम्न पर टिप्पणी लिखिए-
(क) साबुन
(ख) ग्लैशियम ऐसीटिक अम्ल
(ग) संक्षारण
(घ) मिश्रधातु
उत्तर:
.
(क) साबुन (Soap):
उच्च वसीय अम्लों (जैसे स्टेयरिक, पामिटिक या ओलिक अम्ल) के सोडियम या पोटैशियम लवणों को साबुन कहते हैं। यह वसा या तेल की क्षार (NaOH/KOH) से साबुनीकरण (Saponification) प्रक्रिया द्वारा प्राप्त होता है।
(ख) ग्लैशियम ऐसीटिक अम्ल (Glacial Acetic Acid):
100% शुद्ध और जलरहित ऐसीटिक अम्ल (Ethanoic Acid) को 'ग्लैशियम ऐसीटिक अम्ल' कहते हैं। इसका गलनांक 16.6°C (290 K) होता है, जिसके कारण यह ठंडे मौसम में जमकर बर्फ या ग्लेशियर की तरह जम जाता है।
(ग) संक्षारण (Corrosion):
जब कोई धातु अपने आसपास अम्ल, नमी, वायु आदि के संपर्क में आती है, तो उसकी ऊपरी सतह धीरे-धीरे नष्ट होने लगती है। इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। (उदाहरण: लोहे पर जंग लगना, चाँदी का काला पड़ना)।
(घ) मिश्रधातु (Alloy):
दो या दो से अधिक धातुओं अथवा धातु एवं अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। यह धातुओं की कठोरता, संक्षारण रोधकता और सामर्थ्य बढ़ाने के लिए बनाई जाती है। (उदाहरण: पीतल = Cu + Zn, कांसा = Cu + Sn)।
उपखण्ड-ग
ऑक्सीश्वसन तथा अनाक्सीश्वसन में अन्तर बताइए।
उत्तर:
.
1. ऑक्सीजन की उपस्थिति: ऑक्सीश्वसन O₂ की उपस्थिति में होता है, जबकि अनाक्सीश्वसन O₂ की अनुपस्थिति में होता है।
2. अंतिम उत्पाद: ऑक्सीश्वसन के अंतिम उत्पाद CO₂ तथा H₂O हैं; अनाक्सीश्वसन के उत्पाद एथिल ऐल्कोहल/लैक्टिक अम्ल तथा CO₂ हैं।
3. ऊर्जा का उत्पादन: ऑक्सीश्वसन में अत्यधिक ऊर्जा (38 ATP) मुक्त होती है; अनाक्सीश्वसन में बहुत कम ऊर्जा (2 ATP) मुक्त होती है।
4. स्थान: ऑक्सीश्वसन कोशिकाद्रव्य एवं माइटोकॉण्ड्रिया दोनों में होता है; अनाक्सीश्वसन केवल कोशिकाद्रव्य में होता है।
रसांकुर तथा सूक्ष्मांकुर में अन्तर बताइए।
उत्तर:
.
1. आकार एवं स्थान: रसांकुर (Villi) क्षुद्रांत्र (छोटी आँत) की आंतरिक भित्ति पर स्थित अंगुलीनुमा बड़ी प्रवर्ध संरचनाएँ हैं, जबकि सूक्ष्मांकुर (Microvilli) रसांकुरों की उपकला कोशिकाओं की सतह पर स्थित अत्यंत सूक्ष्म प्रवर्ध हैं।
2. दृश्यता: रसांकुर नग्न आँखों या साधारण सूक्ष्मदर्शी से दिखते हैं; सूक्ष्मांकुर केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखे जा सकते हैं।
3. कार्य: रसांकुर अवशोषण के लिए सतह का क्षेत्रफल बढ़ाते हैं, जबकि सूक्ष्मांकुर उस अवशोषण सतह को कई गुना अत्यधिक सूक्ष्म स्तर पर बढ़ा देते हैं।
मानव हृदय की अनुदैध्य काट का नामांकित चित्र बनाइये तथा उसकी संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
संरचना का वर्णन:
मानव हृदय एक पेशीय, पंपिंग अंग है जो चार वेश्मों (Chambers) में विभाजित होता है:
1. अलिंद (Atria): ऊपरी दो पतली भित्ति वाले वेश्म - दायाँ अलिंद तथा बायाँ अलिंद।
2. निलय (Ventricles): निचले दो मोटी पेशीय भित्ति वाले वेश्म - दायाँ निलय तथा बायाँ निलय।
3. कपाट (Valves): अलिंद-निलय के बीच त्रिवलनी (Tricuspid) तथा द्विवलनी (Bicuspid/Mitral) कपाट स्थित होते हैं, जो रुधिर को केवल एक ही दिशा में प्रवाहित होने देते हैं।
4. महाशिरा एवं महाधमनी: दाएँ अलिंद में अशुद्ध (विऑक्सीजनित) रुधिर महाशिरा द्वारा आता है, जबकि बाएँ अलिंद में फुफ्फुसीय शिरा द्वारा शुद्ध (ऑक्सीजनित) रुधिर आता है। बाएँ निलय से महाधमनी द्वारा शुद्ध रुधिर पूरे शरीर में भेजा जाता है।
[चित्र विवरण: चार Chambers (दायाँ/बायाँ अलिंद व निलय), त्रिवलनी व द्विवलनी कपाट, महाशिरा, महाधमनी तथा फुफ्फुसीय धमनियों का नामांकित आरेख।]
आनुवंशिकता की परिभाषा लिखिए। आनुवंशिकता के जनक कौन थे ? स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
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आनुवंशिकता (Heredity):
माता-पिता के शारीरिक एवं मानसिक लक्षण (Anatomic & Physiological Traits) का संतति (संतान) में पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होने की प्रक्रिया को 'आनुवंशिकता' कहते हैं।
आनुवंशिकता के जनक:
ग्रेगर जॉन मेंडेल (Gregor Johann Mendel)।
स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment):
इस नियम के अनुसार, जब दो या दो से अधिक जोड़ी विकल्पी लक्षणों (Dihybrid Cross) वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो किसी एक लक्षण की वंशानुगति दूसरे लक्षण की वंशानुगति से पूर्णतः स्वतंत्र होती है। अर्थात् प्रत्येक लक्षण के कारक (जीन) स्वतंत्र रूप से पृथक एवं अपव्यूहित होकर नए युग्मक बनाते हैं।
उदाहरण (द्विसंकर संकरण):
गोल व पीले बीज (RRYY) वाले पौधे का झुर्रीदार व हरे बीज (rryy) वाले पौधे से क्रॉस कराने पर F₁ पीढ़ी में सभी गोल-पीले पौधे प्राप्त होते हैं। F₂ पीढ़ी में स्व-परागण कराने पर चार प्रकार के लक्षण-प्ररूप 9 : 3 : 3 : 1 के अनुपात में प्राप्त होते हैं:
1. गोल-पीले = 9
2. गोल-हरे = 3
3. झुर्रीदार-पीले = 3
4. झुर्रीदार-हरे = 1