प्रश्न 1(a).
1 फर्मी बराबर होता है-
(a) 10⁻⁶ मीटर
(b) 10⁻⁹ मीटर
(c) 10⁻¹⁵ मीटर
(d) 10⁻⁸ मीटर
उत्तर:
. (c) 10⁻¹⁵ मीटर
UP Board Class 11th Physics Half Yearly Paper 2026 B Code
कक्षा 11वीं · भौतिक विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक
1 फर्मी बराबर होता है-
(a) 10⁻⁶ मीटर
(b) 10⁻⁹ मीटर
(c) 10⁻¹⁵ मीटर
(d) 10⁻⁸ मीटर
उत्तर:
. (c) 10⁻¹⁵ मीटर
शक्ति का विमीय सूत्र है-
(a) [ML²T⁻³]
(b) [ML²T⁻²]
(c) [MLT⁻³]
(d) [MLT⁻²]
उत्तर:
. (a) [ML²T⁻³]
यदि दो समान परिमाण P के सदिशों के परिणामी का परिमाण भी P हो, तो इन दोनों सदिशों के बीच का कोण होगा-
(a) 0°
(b) 60°
(c) 120°
(d) 90°
उत्तर:
. (c) 120°
न्यूटन का गति का प्रथम नियम व्यक्त करता है-
(a) ऊर्जा
(b) कार्य
(c) जड़त्व
(d) जड़त्व-आघूर्ण
उत्तर:
. (c) जड़त्व
निम्न में ऊर्जा का मात्रक नहीं है-
(a) जूल
(b) किलोवाट
(c) कैलोरी
(d) इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
उत्तर:
. (b) किलोवाट
किसी पिण्ड के जड़त्व-आघूर्ण तथा कोणीय त्वरण के गुणनफल को कहते हैं-
(a) कोणीय संवेग
(b) बल-आघूर्ण
(c) बल
(d) कार्य
उत्तर:
. (b) बल-आघूर्ण
दो सम्पर्क तलों के बीच घर्षण गुणांक 1/√3 है, उनके बीच घर्षण कोण क्या है ?
उत्तर:
.
घर्षण गुणांक (μ) और घर्षण कोण (θ) में सम्बन्ध:
μ = tan θ
1/√3 = tan θ
θ = 30°
इसलिए, घर्षण कोण 30° है।
क्या समान विमा वाले सदिश तथा अदिश को परस्पर जोड़ा जा सकता है ?
उत्तर:
.
नहीं, समान विमा होने पर भी एक सदिश राशि और एक अदिश राशि को आपस में नहीं जोड़ा जा सकता, क्योंकि सदिश राशियों में दिशा होती है जबकि अदिश राशियों में केवल परिमाण होता है।
पारसेक को प्रकाश वर्ष के पदों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
.
1 पारसेक (Parsec) = 3.08 × 10¹⁶ मीटर
1 प्रकाश वर्ष (Light Year) = 9.46 × 10¹⁵ मीटर
1 पारसेक = (3.08 × 10¹⁶) / (9.46 × 10¹⁵) प्रकाश वर्ष
1 पारसेक ≈ 3.26 प्रकाश वर्ष
घर्षण से होने वाली हानियाँ तथा लाभ बताइए।
उत्तर:
.
घर्षण के लाभ:
1. घर्षण के कारण ही हम पृथ्वी पर सीधे चल पाते हैं।
2. वाहनों में ब्रेक लगाने पर वे घर्षण के कारण ही रुकते हैं।
घर्षण की हानियाँ:
1. मशीनों के कल-पुर्ज़े आपस में रगड़ खाने से घिस जाते हैं।
2. घर्षण के कारण ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा ऊष्मा के रूप में व्यर्थ चला जाता है।
सिद्ध कीजिए कि (a + b)² = a²b² - (a · b)²
उत्तर:
.
सदिशों के क्रॉस गुणनफल (Vector Product) के परिमाण के वर्ग के लिए:
a × b ² = (a b sin θ)² = a² b² sin² θ
a × b ² = a² b² (1 - cos² θ)
a × b ² = a² b² - a² b² cos² θ
चूँकि (a · b) = a b cos θ,
इसलिए, a × b ² = a² b² - (a · b)²
एक समान त्वरण तथा असमान त्वरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. एक समान त्वरण (Uniform Acceleration):
यदि किसी वस्तु के वेग में समान समय-अंतरालों में समान परिवर्तन होता है, तो उसकी गति का त्वरण 'एक समान त्वरण' कहलाता है। (उदाहरण: गुरुत्व के अधीन स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु)।
2. असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration):
यदि किसी वस्तु के वेग में समान समय-अंतरालों में असमान परिवर्तन होता है, तो उसकी गति का त्वरण 'असमान त्वरण' या 'परिवर्ती त्वरण' कहलाता है। (उदाहरण: भीड़-भाड़ वाली सड़क पर चलती कार)।
न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम लिखिए। इसका एक उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
.
प्रथम नियम (जड़त्व का नियम):
यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है, तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी और यदि वह एक समान चाल से सीधी रेखा में गतिमान है, तो वह गतिमान ही रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाए।
उदाहरण:
रुकी हुई बस के एकाएक चलने पर उसमें बैठे यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं, क्योंकि यात्रियों के शरीर का निचला हिस्सा बस के साथ गति में आ जाता है जबकि ऊपरी हिस्सा जड़त्व के कारण विराम में रहने का प्रयास करता है।
मापन की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
मापन की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:
1. किसी भौतिक राशि का केवल अपनी ज्ञानेंद्रियों द्वारा सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है।
2. विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रयोगों, गणनाओं तथा निष्कर्षों को सार्वभौमिक और सटीक बनाने के लिए मानक मापन अनिवार्य है।
3. व्यापार और दैनिक जीवन की लेन-देन प्रक्रिया में एकरूपता बनाए रखने के लिए।
प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
.
1. प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision):
वह संघट्ट जिसमें निकाय की कुल रेखीय संवेग (Linear Momentum) और कुल गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) दोनों संरक्षित रहती हैं, प्रत्यास्थ संघट्ट कहलाता है। (उदाहरण: काँच की गोलियों या परमाणुओं की टक्कर)।
2. अप्रत्यास्थ संघट्ट (Inelastic Collision):
वह संघट्ट जिसमें कुल रेखीय संवेग तो संरक्षित रहता है, परंतु कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती, अप्रत्यास्थ संघट्ट कहलाता है। (उदाहरण: दो गाड़ियों की आपस में टक्कर)।
पलायन वेग तथा पलायन ऊर्जा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. पलायन वेग (Escape Velocity):
वह न्यूनतम वेग जिससे किसी पिंड को पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर जाता है और वापस कभी लौटकर नहीं आता, पलायन वेग (vₑ) कहलाता है।
2. पलायन ऊर्जा (Escape Energy):
पृथ्वी की सतह पर स्थित किसी पिंड को दी जाने वाली वह न्यूनतम ऊर्जा, जो पिंड को अनंत तक (गुरुत्वीय क्षेत्र से बाहर) भेजने के लिए आवश्यक होती है, पलायन ऊर्जा कहलाती है।
0.1 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड एक अक्ष के चारों ओर वृत्ताकार मार्ग में घूम रहा है। यदि पिण्ड की घूर्णन अक्ष से दूरी 0.5 मीटर हो, तो पिण्ड का घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
दिया है:
द्रव्यमान (m) = 0.1 kg
दूरी (r) = 0.5 m
जड़त्व-आघूर्ण (I) का सूत्र:
I = m × r²
I = 0.1 × (0.5)²
I = 0.1 × 0.25
I = 0.025 kg·m²
कोई लिफ्ट जिसका कुल द्रव्यमान (लिफ्ट + यात्रियों का 1800 किग्रा) है, ऊपर की ओर 2 मीटर/सेकण्ड की अचर चाल से गतिमान है। 4000 न्यूटन का घर्षण बल इसकी गति का विरोध करता है। लिफ्ट को मोटर द्वारा प्रदत्त न्यूनतम शक्ति का आकलन वाट और अश्व शक्ति में कीजिए। (g = 10.0 मीटर/सेकण्ड²)
उत्तर:
.
दिया है:
द्रव्यमान (m) = 1800 kg
वेग (v) = 2 m/s
घर्षण बल (F_f) = 4000 N
g = 10 m/s²
कुल नीचे की ओर बल (F) = गुरुत्वीय बल + घर्षण बल
F = (m × g) + F_f
F = (1800 × 10) + 4000
F = 18000 + 4000 = 22000 N
मोटर द्वारा आवश्यक शक्ति (P):
P = F × v
P = 22000 × 2
P = 44000 Watt
अश्व शक्ति (Horse Power) में:
1 HP = 746 Watt
P = 44000 / 746 ≈ 58.98 HP
उत्तर: शक्ति = 44000 Watt या 58.98 HP
मात्रक की विभिन्न प्रणालियों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
भौतिक राशियों के मापन के लिए निम्नलिखित मुख्य प्रणालियाँ हैं:
1. C.G.S. प्रणाली (Centimetre-Gram-Second):
इसमें लंबाई का मात्रक सेमी (cm), द्रव्यमान का ग्राम (g) और समय का सेकण्ड (s) होता है।
2. M.K.S. प्रणाली (Metre-Kilogram-Second):
इसमें लंबाई का मात्रक मीटर (m), द्रव्यमान का किग्रा (kg) और समय का सेकण्ड (s) होता है।
3. F.P.S. प्रणाली (Foot-Pound-Second):
इसमें लंबाई का मात्रक फुट (ft), द्रव्यमान का पाउंड (lb) और समय का सेकण्ड (s) होता है।
4. S.I. प्रणाली (International System of Units):
यह M.K.S. प्रणाली का विस्तृत रूप है, जिसमें 7 मूल मात्रक और 2 पूरक मात्रक शामिल हैं। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है।
स्थिति एवं विस्थापन सदिश को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
.
1. स्थिति सदिश (Position Vector):
किसी निर्देश तंत्र के मूल बिंदु के सापेक्ष किसी कण या वस्तु की स्थिति को व्यक्त करने वाला सदिश 'स्थिति सदिश' कहलाता है।
2. विस्थापन सदिश (Displacement Vector):
किसी निश्चित समय-अंतराल में किसी गतिमान कण की प्रारंभिक स्थिति से अंतिम स्थिति की ओर दिष्ट सदिश 'विस्थापन सदिश' कहलाता है। यह अंतिम स्थिति सदिश और प्रारंभिक स्थिति सदिश का अंतर होता है।
एक पद्धति में लम्बाई, द्रव्यमान एवं समय के मूल मात्रक क्रमशः 1 मीटर, 1 किग्रा तथा 1 मिनट हैं। इस पद्धति में एक बल का परिमाण 36 मात्रक है। विमीय विधि से बल का मान C.G.S. पद्धति में ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
बल का विमीय सूत्र = [M¹ L¹ T⁻²]
सूत्र: n₂ = n₁ × [M₁/M₂]¹ × [L₁/L₂]¹ × [T₁/T₂]⁻²
दी गई पद्धति (1):
n₁ = 36
M₁ = 1 kg = 1000 g
L₁ = 1 m = 100 cm
T₁ = 1 min = 60 s
C.G.S. पद्धति (2):
M₂ = 1 g
L₂ = 1 cm
T₂ = 1 s
मान रखने पर:
n₂ = 36 × [1000 g / 1 g]¹ × [100 cm / 1 cm]¹ × [60 s / 1 s]⁻²
n₂ = 36 × 1000 × 100 × (1/60)²
n₂ = 36 × 100000 × (1 / 3600)
n₂ = 3600000 / 3600
n₂ = 1000 dyne = 10³ C.G.S. मात्रक (dyne)
अथवा
गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा की परिभाषा लिखिए। पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र में रखे m द्रव्यमान के पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
.
परिभाषा:
किसी पिंड को अनंत से गुरुत्वीय क्षेत्र के भीतर किसी बिंदु तक लाने में गुरुत्वीय बल के विरुद्ध किए गए कार्य को उस बिंदु पर पिंड की 'गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा' कहते हैं।
व्यंजक:
माना पृथ्वी का द्रव्यमान M_e तथा त्रिज्या R_e है। पृथ्वी के केंद्र से x दूरी पर स्थित m द्रव्यमान के पिंड पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल:
F = G M_e m / x²
पिंड को सूक्ष्म दूरी dx विस्थापित करने में किया गया कार्य:
dW = F dx = (G M_e m / x²) dx
अनंत (∞) से r दूरी तक लाने में किया गया कुल कार्य (W):
W = ∫[∞ से r] (G M_e m / x²) dx
W = G M_e m [-1/x][∞ से r]
W = - G M_e m / r
यह कार्य ही गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (U) के रूप में संचित होता है:
U = - (G M_e m / r)
किसी पिण्ड के कोणीय संवेग तथा जड़त्व-आघूर्ण के बीच सम्बन्ध प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
.
माना r₁, r₂, ..., rₙ दूरियों पर स्थित m₁, m₂, ..., mₙ द्रव्यमानों वाले कणों से मिलकर बने निकाय का कोणीय वेग ω है।
प्रत्येक कण का रेखीय वेग v = r ω होता है।
i-वें कण का रेखीय संवेग pᵢ = mᵢ vᵢ = mᵢ rᵢ ω
i-वें कण का कोणीय संवेग Lᵢ = pᵢ × rᵢ = mᵢ rᵢ² ω
पूरे पिंड का कुल कोणीय संवेग (L):
L = L₁ + L₂ + ... + Lₙ
L = m₁ r₁² ω + m₂ r₂² ω + ... + mₙ rₙ² ω
L = (Σ mᵢ rᵢ²) ω
चूँकि जड़त्व-आघूर्ण I = Σ mᵢ rᵢ²,
इसलिए, L = I × ω
कोणीय संवेग = जड़त्व-आघूर्ण × कोणीय वेग
अथवा
दिखाइए कि पृथ्वी-तल से पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर ऊँचाई पर जाने पर गुरुत्वीय त्वरण 'g' का मान एक-चौथाई रह जाता है।
उत्तर:
.
पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण:
g = G M / R² --- (समीकरण 1)
पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण:
g' = G M / (R + h)² --- (समीकरण 2)
प्रश्न अनुसार ऊँचाई h = R (पृथ्वी की त्रिज्या के बराबर):
g' = G M / (R + R)²
g' = G M / (2R)²
g' = G M / (4R²)
समीकरण 1 से (G M / R² = g) रखने पर:
g' = g / 4
अतः, पृथ्वी तल से R ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण का मान प्रारंभिक मान का एक-चौथाई (1/4) रह जाता है।
एक बच्चा एक घर्षणहीन मेज पर रखी खिलौना गाड़ी जिसमें दो डिब्बे हैं, को 1.5 न्यूटन के बल से 30° का कोण बनाते हुए, लगाकर खींचता है। गणना कीजिए-
(i) 40 ग्राम के डिब्बे में उत्पन्न त्वरण
(ii) दोनों डिब्बों के मध्य जुड़ी भारहीन अवितान्य डोरी के मध्य तनाव
उत्तर:
.
[नोट: चित्र में दिए गए सामान्य प्रारूप के आधार पर दोनों डिब्बों का द्रव्यमान समान (m₁ = m₂ = 40 g) माना गया है।]
दिया है:
बल (F) = 1.5 N
कोण (θ) = 30°
डिब्बे का द्रव्यमान m₁ = m₂ = 40 g = 0.04 kg
कुल द्रव्यमान (M) = 0.04 + 0.04 = 0.08 kg
क्षैतिज बल का घटक (Fₓ) = F cos 30°
Fₓ = 1.5 × (√3 / 2) = 0.75 × 1.732 ≈ 1.299 N
(i) उत्पन्न त्वरण (a):
a = Fₓ / M
a = 1.299 / 0.08 ≈ 16.24 m/s²
(ii) डोरी में तनाव (T):
पीछे वाले डिब्बे पर लगने वाला बल = T = m₁ × a
T = 0.04 × 16.24 ≈ 0.65 N
अथवा
यदि कोई प्रक्षेप्य गुरुत्वीय क्षेत्र में क्षैतिज से कोण पर v वेग से प्रक्षेपित किया जाता है, तो सिद्ध कीजिए कि प्रक्षेप्य पथ एक परवलय होगा।
उत्तर:
.
माना एक पिंड को प्रारंभिक वेग u से क्षैतिज से θ कोण पर फेंका जाता है।
प्रारंभिक वेग के घटक:
क्षैतिज घटक (uₓ) = u cos θ
ऊर्ध्वाधर घटक (u_y) = u sin θ
t समय में क्षैतिज विस्थापन (x):
x = uₓ × t = (u cos θ) × t
⇒ t = x / (u cos θ) --- (समीकरण 1)
t समय में ऊर्ध्वाधर विस्थापन (y):
y = u_y t - (1/2) g t²
समीकरण 1 से t का मान रखने पर:
y = (u sin θ) × [x / (u cos θ)] - (1/2) g [x / (u cos θ)]²
y = x tan θ - [g / (2 u² cos² θ)] x²
माना A = tan θ तथा B = g / (2 u² cos² θ) [जो कि नियतांक हैं],
तो:
y = Ax - Bx²
यह समीकरण द्विघात समीकरण (Parabola) का रूप है, अतः प्रक्षेप्य का पथ परवलयाकार (Parabolic) होता है।
दर्शाइए कि मुक्त रूप से गिरता हुआ पिण्ड यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण के नियम की पुष्टि करता है।
उत्तर:
.
माना m द्रव्यमान का एक पिंड पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर स्थिति A से मुक्त रूप से गिरता है।
1. बिंदु A पर (ऊँचाई = h, वेग = 0):
स्थितिज ऊर्जा (PE) = mgh
गतिज ऊर्जा (KE) = 0
कुल ऊर्जा (E_A) = PE + KE = mgh + 0 = mgh
2. बिंदु B पर (x दूरी गिरने के बाद):
वेग v² = 2gx
गतिज ऊर्जा (KE) = (1/2) m v² = (1/2) m (2gx) = mgx
ऊँचाई = (h - x)
स्थितिज ऊर्जा (PE) = mg(h - x)
कुल ऊर्जा (E_B) = mgx + mg(h - x) = mgh
3. बिंदु C पर (पृथ्वी तल से ठीक टकराने से पूर्व):
वेग v² = 2gh
गतिज ऊर्जा (KE) = (1/2) m (2gh) = mgh
स्थितिज ऊर्जा (PE) = 0
कुल ऊर्जा (E_C) = mgh + 0 = mgh
निष्कर्ष:
प्रत्येक बिंदु पर कुल यांत्रिक ऊर्जा स्थिर (mgh) रहती है, जो यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम की पुष्टि करती है।
अथवा
पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर वृत्तीय कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए उपग्रह के कक्षीय वेग की गणना कीजिए।
उत्तर:
.
माना पृथ्वी का द्रव्यमान M_e, त्रिज्या R_e तथा उपग्रह का द्रव्यमान m है।
उपग्रह की पृथ्वी के केंद्र से दूरी (r) = R_e + h
उपग्रह को वृत्तीय कक्षा में घूमने के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल, गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा प्राप्त होता है:
(m v₀²) / r = (G M_e m) / r²
दोनों ओर से m और r निरस्त करने पर:
v₀² = (G M_e) / r
v₀ = √(G M_e / r)
r = R_e + h रखने पर:
v₀ = √[G M_e / (R_e + h)]
चूँकि पृथ्वी तल पर g = (G M_e) / R_e² ⇒ G M_e = g R_e²:
v₀ = √[(g R_e²) / (R_e + h)]
यही उपग्रह के कक्षीय वेग (Orbital Velocity) का सूत्र है।