• कथन (Work-Energy Theorem):
किसी बल द्वारा किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य, उस वस्तु की गतिज ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है।
अर्थात: W = ΔK = K_final - K_initial
• सिद्ध करना (Proof):
माना m द्रव्यमान की वस्तु पर नियत बल F लगाने पर उसमें त्वरण a उत्पन्न होता है तथा उसका वेग u से बढ़कर v हो जाता है।
गति के तृतीय समीकरण से:
v² = u² + 2 a s ⇒ a s = (v² - u²) / 2
किया गया कार्य W = F × s = (m a) s = m (a s)
a s का मान रखने पर:
W = m [ (v² - u²) / 2 ]
W = (1/2) m v² - (1/2) m u²
W = K_final - K_initial
W = ΔK
इति सिद्धम।
OR (अथवा)
पृथ्वी के समीप परिक्रमा कर रहे उपग्रह की बन्धन ऊर्जा का सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
• बन्धन ऊर्जा (Binding Energy):
वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी उपग्रह को अपनी कक्षा छोड़कर अनंत पर पलायन करने के लिए आवश्यक होती है, उपग्रह की 'बन्धन ऊर्जा' कहलाती है।
• व्यंजक का निगमन:
माना M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या, m = उपग्रह का द्रव्यमान।
पृथ्वी के अति समीप परिक्रमा कर रहे उपग्रह के लिए:
1. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy):
U = - (G M m / R)
2. कक्षीय वेग vₒ = √(G M / R)
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy):
K = (1/2) m vₒ² = (1/2) m (G M / R) = G M m / (2R)
3. उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (Total Energy E):
E = K + U
E = [G M m / (2R)] - [G M m / R]
E = - G M m / (2R)
बन्धन ऊर्जा (Binding Energy B.E.):
बन्धन ऊर्जा कुल ऊर्जा के ऋणात्मक मान के बराबर होती है (B.E. = -E):
B.E. = + G M m / (2R)
चूँकि g = G M / R² ⇒ G M = g R²:
B.E. = (g R² m) / (2R) = (1/2) m g R
यह पृथ्वी के समीप परिक्रमा कर रहे उपग्रह की बन्धन ऊर्जा का अभीष्ट सूत्र है।