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UP Board Class 11th Physics Half Yearly Paper 2026 A Code

कक्षा 11वीं · भौतिक विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक

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Half Yearly Examination – 2026

Subject: Physics (भौतिक विज्ञान) Class XI

[Maximum Marks: 70] [Time: 3.15 Hours]

Note: First 15 minutes are allotted for the candidates to read the question paper.

Instructions:

(i) First 15 minutes are allotted for the candidates to read the question paper.

(ii) There are five sections in this question paper: 'A', 'B', 'C', 'D', 'E'.

(iii) All questions are compulsory.

(iv) Marks allotted to each question are given against it.

(v) Symbols used in the question paper have their usual meanings.

Section – A (खण्ड – अ)

प्रश्न 1.

Multiple Choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न):

(क) एक पैरालेक्टिक सेकण्ड किसका मात्रक है-

(i) दूरी

(ii) समय

(iii) आवृत्ति

(iv) वेग

उत्तर:

(i) दूरी

Explanation: पैरालेक्टिक सेकण्ड (पारसेक/Parsec) खगोलीय दूरी को मापने का मात्रक है। 1 पारसेक ≈ 3.08 × 10¹⁶ मीटर होता है।

(ख) कोणीय व रेखीय संवेगों के अनुपात की विमाएँ हैं-

(i) [M⁰ L T⁰]

(ii) [M L T⁻¹]

(iii) [M L² T⁻¹]

(iv) [M⁻¹ L⁻¹ T⁻¹]

उत्तर:

(i) [M⁰ L T⁰]

Explanation: कोणीय संवेग की विमा = [M L² T⁻¹] तथा रेखीय संवेग की विमा = [M L T⁻¹] होती है।

अनुपात = [M L² T⁻¹] / [M L T⁻¹] = [M⁰ L T⁰] (जो कि दूरी की विमा है)।

(ग) निम्न में सदिश राशि है-

(i) द्रव्यमान

(ii) विद्युत धारा

(iii) दाब

(iv) वेग

उत्तर:

(iv) वेग

Explanation: वेग में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं तथा यह सदिश योग के नियमों का पालन करता है, अतः यह एक सदिश राशि है।

(घ) बल का मात्रक है-

(i) न्यूटन

(ii) न्यूटन - मीटर

(iii) न्यूटन × सेकण्ड

(iv) किग्रा-मीटर/सेकण्ड

उत्तर:

(i) न्यूटन

Explanation: SI पद्धति में बल का मात्रक न्यूटन (N) या किग्रा-मीटर/सेकण्ड² होता है।

(ङ) यदि किसी पिण्ड का संवेग दुगना हो जाए तो इसकी गतिज ऊर्जा बढ़ेगी-

(i) 400%

(ii) 100%

(iii) 300%

(iv) 200%

उत्तर:

(iii) 300%

Explanation: गतिज ऊर्जा K = p² / (2m). यदि संवेग p' = 2p हो जाए, तो नयी गतिज ऊर्जा K' = (2p)² / (2m) = 4K होगी।

वृद्धि % = [(K' - K) / K] × 100 = [(4K - K) / K] × 100 = 300%।

(च) S.I. पद्धति में जड़त्व-आघूर्ण का मात्रक है-

(i) किग्रा/मीटर²

(ii) किग्रा-मीटर²

(iii) किग्रा-मीटर

(iv) किग्रा-मीटर/सेकण्ड²

उत्तर:

(ii) किग्रा-मीटर²

Explanation: जड़त्व आघूर्ण का सूत्र I = m r² होता है, अतः इसका SI मात्रक किग्रा-मीटर² (kg·m²) है।

Section – B (खण्ड – ब)

प्रश्न 2.

Very Short Answer Questions (अतिलघु उत्तरीय प्रश्न):

(क) 1 सेकण्ड में कितने माइक्रो सेकण्ड होते हैं?

उत्तर:

1 सेकण्ड में 10⁶ (10 लाख) माइक्रो सेकण्ड होते हैं।

(1 सेकण्ड = 10⁶ μs)

(ख) वेग प्रवणता की विमा लिखिए।

उत्तर:

वेग प्रवणता = वेग परिवर्तन / दूरी = (m/s) / m = s⁻¹

विमीय सूत्र: [M⁰ L⁰ T⁻¹] या [T⁻¹]

(ग) क्या दो सदिशों का अदिश गुणन ऋणात्मक हो सकता है?

उत्तर:

हाँ, दो सदिशों का अदिश गुणनफल (A⃗ · B⃗ = A B cos θ) ऋणात्मक हो सकता है, जब उनके बीच का कोण θ अधिक कोण (90° < θ ≤ 180°) हो।

(घ) 1 न्यूटन बल से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:

1 न्यूटन वह बल है जो 1 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु में 1 मीटर/सेकण्ड² का त्वरण उत्पन्न कर दे।

(1 N = 1 kg × 1 m/s²)

(ङ) 1 अश्व-शक्ति को वाट में व्यक्त कीजिए।

उत्तर:

1 अश्व-शक्ति (1 Horsepower / HP) = 746 वाट (Watt)।

(च) गुरुत्वीय त्वरण (g) व गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) में सम्बन्ध लिखिए।

उत्तर:

g = (G M) / R²

जहाँ g = गुरुत्वीय त्वरण, G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक, M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या।

Section – C (खण्ड – स)

प्रश्न 3.

Short Answer Questions - Type I (लघु उत्तरीय प्रश्न - I):

(क) दो पृष्ठों के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक ज्ञात कीजिए जबकि घर्षण कोण 30° है।

उत्तर:

घर्षण कोण (λ) तथा स्थैतिक घर्षण गुणांक (μₛ) में सम्बन्ध:

μₛ = tan λ

यहाँ λ = 30° दिया गया है:

μₛ = tan 30° = 1 / √3 ≈ 0.577

Explanation: दोनों पृष्ठों के बीच स्थैतिक घर्षण गुणांक 1/√3 (या 0.577) होगा।

(ख) किन परिस्थितियों में (A⃗ · B⃗)² = A² B² होगा?

उत्तर:

अदिश गुणनफल: A⃗ · B⃗ = A B cos θ

दोनों पक्षों का वर्ग करने पर: (A⃗ · B⃗)² = A² B² cos² θ

(A⃗ · B⃗)² = A² B² होने के लिए:

cos² θ = 1 ⇒ cos θ = ±1

⇒ θ = 0° या 180°

स्थिति: जब दोनों सदिश समांतर (Parallel) हों या प्रति-समांतर (Anti-parallel) हों।

(ग) प्रकाश वर्ष किसे कहते हैं?

उत्तर:

• परिभाषा: प्रकाश द्वारा निर्वात में एक वर्ष में तय की गई कुल दूरी को 'प्रकाश वर्ष' (Light Year) कहते हैं। यह दूरी का मात्रक है।

• मान: 1 प्रकाश वर्ष = 9.46 × 10¹⁵ मीटर।

(घ) घर्षण बल से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:

• तात्पर्य: जब दो वस्तुएं परस्पर संपर्क में होकर एक-दूसरे के सापेक्ष गति करती हैं या गति करने का प्रयास करती हैं, तो उनके संपर्क तल पर एक विरोधी बल कार्य करता है जो गति का विरोध करता है। इस बल को 'घर्षण बल' कहते हैं।

Section – D (खण्ड – द)

प्रश्न 4.

Short Answer Questions - Type II (लघु उत्तरीय प्रश्न - II):

(क) दो वेक्टरों के वेक्टर गुणनफल को परिभाषित कीजिए।

उत्तर:

• परिभाषा: दो सदिशों का वेक्टर (सदिश) गुणनफल वह सदिश राशि है जिसका परिमाण दोनों सदिशों के परिमाणों तथा उनके बीच के कोण की ज्या (sine) के गुणनफल के बराबर होता है, और इसकी दिशा दोनों सदिशों के तल के लम्बवत होती है।

• गणितीय सूत्र:

A⃗ × B⃗ = (A B sin θ) n̂

जहाँ A और B सदिशों के परिमाण हैं, θ उनके बीच का कोण है, तथा n̂ लम्बवत् दिशा में एकांक सदिश है।

(ख) विराम और गति की अवस्था को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

1. विराम अवस्था (State of Rest): यदि समय के साथ किसी वस्तु की स्थिति अपने चारों ओर के वातावरण या प्रेक्षक के सापेक्ष नहीं बदलती है, तो वस्तु विराम में कहलाती है।

उदाहरण: मेज पर रखी पुस्तक।

2. गति अवस्था (State of Motion): यदि समय के साथ किसी वस्तु की स्थिति अपने चारों ओर के वातावरण या प्रेक्षक के सापेक्ष निरन्तर बदलती है, तो वस्तु गति में कहलाती है।

उदाहरण: सड़क पर दौड़ती हुई कार।

प्रश्न 8.

संगामी बलों से क्या तात्पर्य है? संगामी बलों के सन्तुलन की विवेचना कीजिए।

उत्तर:

• संगामी बल (Concurrent Forces):

यदि किसी वस्तु पर कार्य करने वाले दो या दो से अधिक बलों की क्रिया-रेखाएं (lines of action) एक ही बिंदु से होकर गुजरती हों, तो उन्हें 'संगामी बल' कहते हैं।

• संगामी बलों का सन्तुलन (Equilibrium):

यदि किसी बिंदु पर कार्य करने वाले सभी संगामी बलों का परिणामी (vector sum) शून्य हो, तो वह निकाय सन्तुलन की अवस्था में कहलाता है।

गणितीय व्यंजक:

F₁⃗ + F₂⃗ + F₃⃗ + ... + Fₙ⃗ = 0 या ∑F⃗ = 0

घटकों के रूप में:

∑Fₓ = 0, ∑Fᵧ = 0, ∑F₂ = 0

लामी की प्रमेय (Lami's Theorem):

यदि तीन संगामी बल F₁⃗, F₂⃗, F₃⃗ एक बिंदु पर कार्य करके उसे संतुलन में रखते हैं, तो:

F₁ / sin α = F₂ / sin β = F₃ / sin γ

(जहाँ α, β, γ बलों के बीच के विपरीत कोण हैं)।

OR (अथवा)

10 मीटर ऊँची मीनार की चोटी से एक गेंद क्षैतिज से 30° के कोण पर ऊपर की ओर किस वेग से फेंकी जाए कि गेंद मीनार के आधार के 17.3 मीटर की दूरी पर जाकर पृथ्वी तल से टकराए? (g = 10 मीटर/सेकण्ड²)

उत्तर:

दिया है:

मीनार की ऊँचाई h = -10 m (नीचे की ओर)

प्रक्षेपण कोण θ = 30°

क्षैतिज परास x = 17.3 m ≈ 10√3 m

g = 10 m/s²

माना प्रारंभिक वेग = u m/s

क्षैतिज गति के लिए:

क्षैतिज वेग vₓ = u cos 30° = u (√3 / 2)

समय t = x / vₓ = (10√3) / [u (√3 / 2)] = 20 / u सेकण्ड

ऊर्ध्वाधर गति के लिए:

प्रारंभिक ऊर्ध्वाधर वेग uᵧ = u sin 30° = u / 2

गति का द्वितीय समीकरण: y = uᵧ t - (1/2) g t²

मान रखने पर:

-10 = (u / 2) (20 / u) - (1/2) (10) (20 / u)²

-10 = 10 - 5 (400 / u²)

-20 = - 2000 / u²

u² = 2000 / 20 = 100

u = 10 मीटर/सेकण्ड

Explanation: गेंद को 10 मीटर/सेकण्ड के प्रारंभिक वेग से फेंका जाना चाहिए।

प्रश्न 9.

कार्य–ऊर्जा प्रमेय का कथन लिखिए तथा इसे सिद्ध कीजिए।

उत्तर:

• कथन (Work-Energy Theorem):

किसी बल द्वारा किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य, उस वस्तु की गतिज ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है।

अर्थात: W = ΔK = K_final - K_initial

• सिद्ध करना (Proof):

माना m द्रव्यमान की वस्तु पर नियत बल F लगाने पर उसमें त्वरण a उत्पन्न होता है तथा उसका वेग u से बढ़कर v हो जाता है।

गति के तृतीय समीकरण से:

v² = u² + 2 a s ⇒ a s = (v² - u²) / 2

किया गया कार्य W = F × s = (m a) s = m (a s)

a s का मान रखने पर:

W = m [ (v² - u²) / 2 ]

W = (1/2) m v² - (1/2) m u²

W = K_final - K_initial

W = ΔK

इति सिद्धम।

OR (अथवा)

पृथ्वी के समीप परिक्रमा कर रहे उपग्रह की बन्धन ऊर्जा का सूत्र प्राप्त कीजिए।

उत्तर:

• बन्धन ऊर्जा (Binding Energy):

वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी उपग्रह को अपनी कक्षा छोड़कर अनंत पर पलायन करने के लिए आवश्यक होती है, उपग्रह की 'बन्धन ऊर्जा' कहलाती है।

• व्यंजक का निगमन:

माना M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या, m = उपग्रह का द्रव्यमान।

पृथ्वी के अति समीप परिक्रमा कर रहे उपग्रह के लिए:

1. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy):

U = - (G M m / R)

2. कक्षीय वेग vₒ = √(G M / R)

गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy):

K = (1/2) m vₒ² = (1/2) m (G M / R) = G M m / (2R)

3. उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (Total Energy E):

E = K + U

E = [G M m / (2R)] - [G M m / R]

E = - G M m / (2R)

बन्धन ऊर्जा (Binding Energy B.E.):

बन्धन ऊर्जा कुल ऊर्जा के ऋणात्मक मान के बराबर होती है (B.E. = -E):

B.E. = + G M m / (2R)

चूँकि g = G M / R² ⇒ G M = g R²:

B.E. = (g R² m) / (2R) = (1/2) m g R

यह पृथ्वी के समीप परिक्रमा कर रहे उपग्रह की बन्धन ऊर्जा का अभीष्ट सूत्र है।