बल आघूर्ण का सूत्र: τ = F × r (बल × घूर्णन अक्ष से लम्बवत् दूरी)।
जब दरवाज़े का हत्था (Handle) कब्जों से अधिकतम दूरी (r) पर लगाया जाता है, तो r का मान बढ़ जाता है। दूरी r अधिक होने के कारण कम बल (F) लगाने पर भी पर्याप्त बल आघूर्ण (τ) उत्पन्न हो जाता है, जिससे दरवाज़ा आसानी से खुल या बंद हो जाता है।
(ख) प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
1. प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision):
वह संघट्ट जिसमें निकाय का कुल रेखीय संवेग और कुल गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं, प्रत्यास्थ संघट्ट कहलाता है। (उदाहरण: काँच की गोलियों या परमाणु कणों का संघट्ट)।
2. अप्रत्यास्थ संघट्ट (Inelastic Collision):
वह संघट्ट जिसमें निकाय का रेखीय संवेग तो संरक्षित रहता है, परन्तु कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती (ऊष्मा, प्रकाश या ध्वनि में क्षय हो जाती है), अप्रत्यास्थ संघट्ट कहलाता है। (उदाहरण: दो वाहनों की टक्कर)।
(ग) प्रक्षेप्य के उड्डयन काल (T) की परिभाषा एवं सूत्र लिखिए।
उत्तर:
• परिभाषा: प्रक्षेप्य को फेंकने के बिन्दु से लेकर अपनी पूरी उड़ान पूरी करके समतल पर वापस लौटने में लगा कुल समय 'उड्डयन काल' (Time of Flight) कहलाता है।
• सूत्र:
T = (2 u sin θ) / g
जहाँ u = प्रारंभिक वेग, θ = क्षैतिज से प्रक्षेपण कोण, तथा g = गुरुत्वीय त्वरण।
(घ) यदि â तथा b̂ एकांक सदिश हो तो सिद्ध कीजिए कि sin(θ/2) = 1/2 â - b̂ , जहाँ θ सदिश â और b̂ के बीच का कोण है।
उत्तर:
उपपत्ति (Proof):
दो एकांक सदिशों â और b̂ के लिए: â = 1, b̂ = 1.
परिणामी सदिश के वर्ग का सूत्र:
â - b̂ ² = (â - b̂) · (â - b̂)
â - b̂ ² = â ² + b̂ ² - 2 â b̂ cos θ
â - b̂ ² = 1 + 1 - 2(1)(1) cos θ
â - b̂ ² = 2 - 2 cos θ = 2 (1 - cos θ)
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका 1 - cos θ = 2 sin²(θ/2) का प्रयोग करने पर:
â - b̂ ² = 2 × [2 sin²(θ/2)]
â - b̂ ² = 4 sin²(θ/2)
दोनों ओर वर्गमूल लेने पर:
â - b̂ = 2 sin(θ/2)
⇒ sin(θ/2) = (1/2) â - b̂
इति सिद्धम।
(ङ) एकसमान चाल तथा परिवर्ती चाल में अन्तर बताइए।
उत्तर:
1. एकसमान चाल (Uniform Speed):
यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में (चाहे वे समय अंतराल कितने ही छोटे क्यों न हों) समान दूरी तय करती है, तो उसकी चाल को 'एकसमान चाल' कहते हैं।
2. परिवर्ती चाल (Variable Speed):
यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में भिन्न-भिन्न (असमैन) दूरी तय करती है, तो उसकी चाल को 'परिवर्ती चाल' कहते हैं।
Section – E (खण्ड – य)