Solution

UP Board Class 11th Physics Half Yearly paper 2026 YP Code

कक्षा 11वीं · भौतिक विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक

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Half Yearly Examination – 2026

Subject: Physics (भौतिक विज्ञान) Class XI

[Maximum Marks: 70] [Time: 3.15 Hours]

Note: First 15 minutes are allotted for the candidates to read the question paper.

Instructions:

1. All questions are compulsory.

2. This question paper contains 5 Sections: A, B, C, D, and E.

3. Marks allotted to each question are given against it.

4. Symbols used in the question paper have their usual meanings.

Section – A (खण्ड – अ)

प्रश्न 1.

Multiple Choice Questions (बहुविकल्पीय प्रश्न):

(क) एक पिण्ड विरामावस्था से चलना प्रारम्भ करके गति के 8 वें सेकण्ड में 1.2 मीटर की दूरी तय करता है। पिण्ड में त्वरण का परिमाण है-

(i) 0.2 मी./से.²

(ii) 0.16 मी./से.²

(iii) 0.08 मी./से.²

(iv) 0.225 मी./से.²

उत्तर:

(i) 0.2 मी./से.²

Explanation: n-वें सेकण्ड में तय की गई दूरी का सूत्र: Sₙ = u + (a/2)(2n - 1)

विरामावस्था के लिए u = 0, n = 8, तथा S₈ = 1.2 मी.

1.2 = 0 + (a/2)(2 × 8 - 1)

1.2 = (a/2)(15)

1.2 = 7.5 × a

a = 1.2 / 7.5 = 0.16 ... (सुधार: 1.2 / 7.5 = 0.16 मी./से.²)

अतः सही उत्तर ऑप्शन (ii) 0.16 मी./से.² है।

(ख) A⃗ = î + ĵ तथा B⃗ = î - ĵ के बीच कोण है-

(i) 45°

(ii) 90°

(iii) -45°

(iv) 180°

उत्तर:

(ii) 90°

Explanation: दो सदिशों का अदिश गुणनफल (A⃗ · B⃗) = (1)(1) + (1)(-1) = 1 - 1 = 0.

चूँकि A⃗ · B⃗ = A⃗ B⃗ cos θ = 0, इसलिए cos θ = 0 ⇒ θ = 90°.

(ग) स्थानान्तरीय गति में न्यूटन का तृतीय नियम प्राप्त किया जा सकता है-

(i) न्यूटन के गति विषयक प्रथम नियम से

(ii) द्रव्यमान संरक्षण के नियम से

(iii) न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से

(iv) ऊर्जा संरक्षण के नियम से

उत्तर:

(iii) न्यूटन के गति विषयक द्वितीय नियम से

Explanation: न्यूटन का द्वितीय नियम गति का मूल नियम (Real Law of Motion) है, जिससे प्रथम और तृतीय दोनों नियम व्युत्पादित किए जा सकते हैं।

(घ) पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट में संरक्षित रहते हैं-

(i) संवेग व स्थितिज ऊर्जा

(ii) संवेग व गतिज ऊर्जा

(iii) केवल संवेग

(iv) केवल गतिज ऊर्जा

उत्तर:

(ii) संवेग व गतिज ऊर्जा

Explanation: पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट (Perfectly Elastic Collision) में निकाय का रेखीय संवेग (Linear Momentum) और कुल गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) दोनों संरक्षित रहते हैं।

(ङ) द्रव्यमान m तथा त्रिज्या r वाली किसी वृत्तीय डिस्क का इसके व्यास के परितः जड़त्व-आघूर्ण होता है-

(i) m r²

(ii) (1/2) m r²

(iii) (1/4) m r²

(iv) (3/4) m r²

उत्तर:

(iii) (1/4) m r²

Explanation: वृत्तीय डिस्क का इसके मुख्य अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण (1/2) mr² होता है। सममितता तथा लम्बवत् अक्षों की प्रमेय के अनुसार, व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण (1/4) mr² होता है।

(च) ग्रहों की गति से सम्बन्धित केपलर का तृतीय नियम है-

(i) T ∝ r

(ii) T² ∝ r

(iii) T² ∝ r³

(iv) T³ ∝ r³/²

उत्तर:

(iii) T² ∝ r³

Explanation: केपलर के परिक्रमण काल के नियमानुसार, किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग (T²) सूर्य से उसकी औसत दूरी के घन (r³) के समानुपाती होता है (T² ∝ r³ या T ∝ r³/²)।

Section – B (खण्ड – ब)

प्रश्न 2.

Very Short Answer Questions (अतिलघु उत्तरीय प्रश्न):

(क) केपलर का ग्रहों सम्बन्धी तृतीय नियम का गणितीय रूप क्या है?

उत्तर:

केपलर के तृतीय नियम का गणितीय रूप:

T² ∝ r³ या T² = K r³

जहाँ T = परिक्रमण काल, r = कक्षा की अर्ध-दीर्घ अक्ष (औसत दूरी), तथा K एक नियतांक है।

(ख) जड़त्व आघूर्ण का मात्रक M.K.S. पद्धति में लिखिए।

उत्तर:

जड़त्व आघूर्ण (I = m r²) का M.K.S. (SI) पद्धति में मात्रक 'किग्रा·मीटर²' (kg·m²) होता है।

(ग) कार्य का S.I. तथा C.G.S. पद्धति में मात्रक लिखिए।

उत्तर:

• S.I. पद्धति में मात्रक: जूल (Joule) या न्यूटन-मीटर (N·m)

• C.G.S. पद्धति में मात्रक: अर्ग (Erg) या डाइन-सेमी (Dyne·cm)

(घ) बल के S.I. पद्धति तथा C.G.S पद्धति में मात्रकों के बीच सम्बन्ध बताइए।

उत्तर:

S.I. पद्धति में बल का मात्रक 'न्यूटन' तथा C.G.S. पद्धति में 'डाइन' होता है।

इनके बीच सम्बन्ध: 1 न्यूटन = 10⁵ डाइन (1 N = 10⁵ dyne).

(ङ) प्रक्षेप्य के उड्डयन-काल के लिए सूत्र लिखिए।

उत्तर:

प्रक्षेप्य के उड्डयन-काल (Time of Flight) का सूत्र:

T = (2 u sin θ) / g

जहाँ u = प्रारंभिक वेग, θ = प्रक्षेपण कोण, तथा g = गुरुत्वीय त्वरण।

(च) एक वस्तु एक समान वेग से चल रही है। इसके त्वरण का मान बताइए।

उत्तर:

एक समान वेग से गतिमान वस्तु के त्वरण का मान शून्य (0) होता है, क्योंकि वेग परिवर्तन की दर ही त्वरण कहलाती है।

Section – C (खण्ड – स)

प्रश्न 3.

Short Answer Questions - Type I (लघु उत्तरीय प्रश्न - I):

(क) 1.065 × 10⁴ सेकण्ड का केवल तीन सार्थक अंकों तक पूर्णांकन कीजिए।

उत्तर:

दी गई संख्या: 1.065 × 10⁴

इसे 3 सार्थक अंकों तक पूर्णांकित (Round off) करना है।

• तीसरा सार्थक अंक '6' है और इसके बाद का अंक '5' है।

• नियम के अनुसार, यदि हटाया जाने वाला अंक 5 हो और उससे पहला अंक सम हो, तो उसमें कोई परिवर्तन नहीं होता।

अतः 3 सार्थक अंकों में उत्तर: 1.06 × 10⁴ सेकण्ड होगा।

(ख) प्रक्षेप्य पथ किस प्रकार का होता है? क्या यह पथ ऋजुरेखीय हो सकता है?

उत्तर:

1. प्रक्षेप्य पथ का प्रकार: प्रक्षेप्य का पथ परवलयाकार (Parabolic) होता है।

2. ऋजुरेखीय होना: हाँ, यदि वस्तु को ऊर्ध्वाधर ऊपर या नीचे (θ = 90° या θ = 0°) फेंका जाए, तो उसका पथ ऋजुरेखीय (Straight line) होता है।

(ग) किसी मशीन की शक्ति से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:

• तात्पर्य: किसी मशीन द्वारा कार्य करने की दर को उसकी शक्ति (Power) कहते हैं।

• सूत्र: P = W / t (शक्ति = कार्य / समय)

• मात्रक: इसका S.I. मात्रक 'वाट' (Watt) या 'जूल/सेकण्ड' होता है। (व्यावहारिक मात्रक अश्व शक्ति/Horsepower भी है, 1 HP = 746 W)।

(घ) उपग्रह किसे कहते हैं?

उत्तर:

• परिभाषा: वे आकाशीय या कृत्रिम पिण्ड जो किसी ग्रह के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में निरन्तर परिक्रमा करते रहते हैं, उन्हें 'उपग्रह' (Satellite) कहते हैं।

• उदाहरण: चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है, जबकि आर्यभट्ट, इनसैट (INSAT) आदि कृत्रिम उपग्रह हैं।

Section – D (खण्ड – द)

प्रश्न 4.

Short Answer Questions - Type II (लघु उत्तरीय प्रश्न - II):

(क) सूत्र E = hν में, E फोटॉन की ऊर्जा, ν आवृत्ति तथा h प्लांक-नियतांक है। h की विमा ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

समीकरण: E = h ν ⇒ h = E / ν

• E (ऊर्जा) का विमीय सूत्र = [M L² T⁻²]

• ν (आवृत्ति = 1/समय) का विमीय सूत्र = [T⁻¹]

h का विमीय सूत्र:

[h] = [M L² T⁻²] / [T⁻¹]

[h] = [M L² T⁻¹]

Explanation: प्लांक-नियतांक (h) का विमीय सूत्र [M L² T⁻¹] होता है।

(ख) उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि विराम एवं गति अवस्थाएँ परस्पर सापेक्ष हैं।

उत्तर:

विराम तथा गति निरपेक्ष (Absolute) नहीं बल्कि सापेक्ष (Relative) अवधारणाएँ हैं।

उदाहरण:

यदि आप किसी चलती हुई ट्रेन के डिब्बे में बैठे हैं:

1. डिब्बे में बैठे अन्य सह-यात्रियों के सापेक्ष आप 'विराम अवस्था' में हैं।

2. लेकिन प्लेटफ़ॉर्म या ट्रेन के बाहर खड़े व्यक्ति के सापेक्ष आप ट्रेन के वेग से 'गतिमान अवस्था' में हैं।

निष्कर्ष: कोई वस्तु एक ही समय में एक प्रेक्षक के लिए विराम में और दूसरे प्रेक्षक के लिए गति में हो सकती है, अतः विराम एवं गति अवस्थाएँ सापेक्ष हैं।

(ग) असंरक्षी बलों की विशेषताएं लिखिए।

उत्तर:

असंरक्षी बल (Non-Conservative Forces) की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

1. किया गया कार्य पथ पर निर्भर करता है (यह प्रारंभिक एवं अंतिम स्थितियों पर ही केवल निर्भर नहीं होता)।

2. एक पूर्ण बंद परिपथ (Closed Loop) में असंरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य शून्य नहीं होता है।

3. इन बलों के विरुद्ध किया गया कार्य स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित नहीं होता, बल्कि ऊष्मा या ध्वनि के रूप में क्षय हो जाता है।

4. उदाहरण: घर्षण बल (Friction force) तथा श्यान बल (Viscous force)।

(घ) सिद्ध कीजिए कि कोणीय संवेग के परिवर्तन की समय दर, लगाए गए बल आघूर्ण के बराबर होती है।

उत्तर:

उपपत्ति (Proof):

माना m द्रव्यमान का एक कण r त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर गति कर रहा है।

कण का कोणीय संवेग: L = I ω (या L⃗ = r⃗ × p⃗)

समय t के सापेक्ष अवकलन करने पर:

dL / dt = d/dt (I ω)

dL / dt = I (dω / dt)

हम जानते हैं कि कोणीय त्वरण α = dω / dt होता है:

dL / dt = I α

चूँकि टॉर्क/बल आघूर्ण τ = I α होता है:

dL / dt = τ

अर्थात, dL / dt = τ (कोणीय संवेग परिवर्तन की दर = बल आघूर्ण)। इति सिद्धम।

(ङ) कृत्रिम उपग्रह के कक्षीय वेग तथा पलायन वेग में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।

उत्तर:

1. पृथ्वी सतह के समीप कक्षीय वेग (Orbital Velocity, vₒ):

vₒ = √(g Rₑ)

2. पृथ्वी सतह से पलायन वेग (Escape Velocity, vₑ):

vₑ = √(2 g Rₑ)

3. सम्बन्ध स्थापित करना:

vₑ = √2 × √(g Rₑ)

vₑ = √2 vₒ या vₒ = vₑ / √2

निष्कर्ष: पलायन वेग, कक्षीय वेग का √2 गुणा (लगभग 1.414 गुना) होता है।

प्रश्न 5.

Short Answer Questions - Type II Continued (लघु उत्तरीय प्रश्न - II जारी):

(क) दरवाजों में हत्था कब्जों से दूर क्यों लगाया जाता है?

उत्तर:

बल आघूर्ण का सूत्र: τ = F × r (बल × घूर्णन अक्ष से लम्बवत् दूरी)।

जब दरवाज़े का हत्था (Handle) कब्जों से अधिकतम दूरी (r) पर लगाया जाता है, तो r का मान बढ़ जाता है। दूरी r अधिक होने के कारण कम बल (F) लगाने पर भी पर्याप्त बल आघूर्ण (τ) उत्पन्न हो जाता है, जिससे दरवाज़ा आसानी से खुल या बंद हो जाता है।

(ख) प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट से क्या तात्पर्य है?

उत्तर:

1. प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision):

वह संघट्ट जिसमें निकाय का कुल रेखीय संवेग और कुल गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं, प्रत्यास्थ संघट्ट कहलाता है। (उदाहरण: काँच की गोलियों या परमाणु कणों का संघट्ट)।

2. अप्रत्यास्थ संघट्ट (Inelastic Collision):

वह संघट्ट जिसमें निकाय का रेखीय संवेग तो संरक्षित रहता है, परन्तु कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती (ऊष्मा, प्रकाश या ध्वनि में क्षय हो जाती है), अप्रत्यास्थ संघट्ट कहलाता है। (उदाहरण: दो वाहनों की टक्कर)।

(ग) प्रक्षेप्य के उड्डयन काल (T) की परिभाषा एवं सूत्र लिखिए।

उत्तर:

• परिभाषा: प्रक्षेप्य को फेंकने के बिन्दु से लेकर अपनी पूरी उड़ान पूरी करके समतल पर वापस लौटने में लगा कुल समय 'उड्डयन काल' (Time of Flight) कहलाता है।

• सूत्र:

T = (2 u sin θ) / g

जहाँ u = प्रारंभिक वेग, θ = क्षैतिज से प्रक्षेपण कोण, तथा g = गुरुत्वीय त्वरण।

(घ) यदि â तथा b̂ एकांक सदिश हो तो सिद्ध कीजिए कि sin(θ/2) = 1/2 â - b̂ , जहाँ θ सदिश â और b̂ के बीच का कोण है।

उत्तर:

उपपत्ति (Proof):

दो एकांक सदिशों â और b̂ के लिए: â = 1, b̂ = 1.

परिणामी सदिश के वर्ग का सूत्र:

â - b̂ ² = (â - b̂) · (â - b̂)

â - b̂ ² = â ² + b̂ ² - 2 â b̂ cos θ

â - b̂ ² = 1 + 1 - 2(1)(1) cos θ

â - b̂ ² = 2 - 2 cos θ = 2 (1 - cos θ)

त्रिकोणमितीय सर्वसमिका 1 - cos θ = 2 sin²(θ/2) का प्रयोग करने पर:

â - b̂ ² = 2 × [2 sin²(θ/2)]

â - b̂ ² = 4 sin²(θ/2)

दोनों ओर वर्गमूल लेने पर:

â - b̂ = 2 sin(θ/2)

⇒ sin(θ/2) = (1/2) â - b̂

इति सिद्धम।

(ङ) एकसमान चाल तथा परिवर्ती चाल में अन्तर बताइए।

उत्तर:

1. एकसमान चाल (Uniform Speed):

यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में (चाहे वे समय अंतराल कितने ही छोटे क्यों न हों) समान दूरी तय करती है, तो उसकी चाल को 'एकसमान चाल' कहते हैं।

2. परिवर्ती चाल (Variable Speed):

यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में भिन्न-भिन्न (असमैन) दूरी तय करती है, तो उसकी चाल को 'परिवर्ती चाल' कहते हैं।

Section – E (खण्ड – य)

प्रश्न 6.

Long Answer Questions (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न):

विभिन्न वस्तुओं के मापित द्रव्यमान 1.0 किग्रा, 245 ग्राम, 54 मिग्रा तथा 6.32 ग्राम है। इन वस्तुओं के कुल द्रव्यमान के योग को उचित सार्थक अंकों में लिखिए।

उत्तर:

सभी द्रव्यमानों को एक ही इकाई (किग्रा) में परिवर्तित करने पर:

• m₁ = 1.0 kg (दशमलव के 1 स्थान तक)

• m₂ = 245 g = 0.245 kg

• m₃ = 54 mg = 0.000054 kg

• m₄ = 6.32 g = 0.00632 kg

कुल योग (Total Mass M):

M = 1.0 + 0.245 + 0.000054 + 0.00632

M = 1.251374 kg

सार्थक अंकों के नियमानुसार:

योगफल में दशमलव के बाद केवल उतने ही अंक रखे जाते हैं जितने कि सबसे कम दशमलव स्थान वाली माप (1.0 kg, जिसमें दशमलव के बाद 1 स्थान है) में हैं।

अतः उचित सार्थक अंकों में उत्तर = 1.3 किग्रा (या 1.3 kg) होगा।

OR (अथवा)

दो वेक्टर P⃗ तथा Q⃗ का परिणामी वेक्टर R⃗ है। वेक्टर Q⃗ की दिशा उलट देने पर परिणामी वेक्टर S⃗ हो जाता है। तो सिद्ध कीजिए कि: R² + S² = 2(P² + Q²)

उत्तर:

उपपत्ति (Proof):

1. जब P⃗ तथा Q⃗ के बीच कोण θ है, तो उनके परिणामी R⃗ के परिमाण का वर्ग:

R² = P² + Q² + 2 P Q cos θ --- (समीकरण 1)

2. यदि Q⃗ की दिशा उलट दी जाए (-Q⃗ कर दी जाए), तो उनके बीच का कोण (180° - θ) हो जाएगा। नए परिणामी S⃗ के परिमाण का वर्ग:

S² = P² + Q² + 2 P Q cos(180° - θ)

चूँकि cos(180° - θ) = -cos θ:

S² = P² + Q² - 2 P Q cos θ --- (समीकरण 2)

3. समीकरण (1) तथा समीकरण (2) को जोड़ने पर:

R² + S² = (P² + Q² + 2 P Q cos θ) + (P² + Q² - 2 P Q cos θ)

R² + S² = 2 P² + 2 Q²

R² + S² = 2(P² + Q²)

इति सिद्धम।

प्रश्न 7.

स्थैतिक घर्षण बल तथा गतिक घर्षण बल से क्या तात्पर्य है? उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर:

• स्थैतिक घर्षण बल (Static Friction Force):

जब दो वस्तुएं परस्पर संपर्क में विराम अवस्था में होती हैं और एक वस्तु को दूसरी पर खिसकाने के लिए बल लगाया जाता है, तो संपर्क तल पर गति का विरोध करने वाले बल को 'स्थैतिक घर्षण बल' (fₛ) कहते हैं।

उदाहरण: किसी भारी अलमारी को ज़मीन पर खिसकाने का प्रयास करना, लेकिन अत्यधिक घर्षण के कारण अलमारी का अपनी जगह से न हिलना।

• गतिक घर्षण बल (Kinetic Friction Force):

जब एक वस्तु दूसरी वस्तु के पृष्ठ पर वास्तव में फिसलने या गति करने लगती है, तो गति के दौरान कार्य करने वाले विरोधी बल को 'गतिक घर्षण बल' (fₖ) कहते हैं।

उदाहरण: चलती हुई कार पर ब्रेक लगाने पर सड़कों और टायरों के बीच कार्य करने वाला बल जो कार को रोकता है।

OR (अथवा)

एक कण बल F = (5 - 3x + 2x²) न्यूटन के अधीन x-अक्ष के अनुदिश x = 0 से x = 4 मीटर तक चलता है। बल द्वारा किये गये कार्य की गणना कीजिए।

उत्तर:

परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य (W):

W = ∫[from x₁ to x₂] F dx

दिए गए मान:

F = 5 - 3x + 2x²

x₁ = 0, x₂ = 4 m

समीकरण में मान रखकर समाकलन करने पर:

W = ∫[from 0 to 4] (5 - 3x + 2x²) dx

W = [ 5x - (3 x² / 2) + (2 x³ / 3) ][from 0 to 4]

उच्च सीमा (x = 4) रखने पर:

W = [ 5(4) - (3/2)(4)² + (2/3)(4)³ ] - 0

W = [ 20 - (3/2)(16) + (2/3)(64) ]

W = [ 20 - 24 + (128 / 3) ]

W = -4 + 42.67

W = 38.67 जूल (या 116 / 3 J)

Explanation: बल द्वारा किया गया कुल कार्य 38.67 जूल है।

प्रश्न 8.

एक समान छड़ के द्रव्यमान केन्द्र के लिए व्यंजक निगमन कीजिए।

उत्तर:

मान लीजिए L लम्बाई तथा M कुल द्रव्यमान की एकसमान पतली छड़ x-अक्ष पर x = 0 से x = L तक स्थित है।

• छड़ का एकांक लम्बाई का द्रव्यमान (रेखीय द्रव्यमान घनत्व λ):

λ = M / L

• मूलबिंदु से x दूरी पर dx लम्बाई का एक सूक्ष्म द्रव्यमान अवयव (dm) लें:

dm = λ dx = (M / L) dx

• द्रव्यमान केंद्र की स्थिति (X_cm) का सूत्र:

X_cm = (1 / M) ∫[from 0 to L] x dm

X_cm = (1 / M) ∫[from 0 to L] x (M / L) dx

X_cm = (1 / L) ∫[from 0 to L] x dx

X_cm = (1 / L) [ x² / 2 ][from 0 to L]

X_cm = (1 / L) [ L² / 2 - 0 ]

X_cm = L / 2

निष्कर्ष: एकसमान छड़ का द्रव्यमान केंद्र छड़ की मध्य-लम्बाई (L/2) पर स्थित होता है।

OR (अथवा)

किसी कण पर आरोपित बल F⃗ = (3î + 4ĵ - 5k̂) कण में विस्थापन d⃗ = (5î + 4ĵ + 3k̂) उत्पन्न करता है। ज्ञात कीजिए-

(i) बल द्वारा कृत कार्य

(ii) बल F⃗ तथा विस्थापन के बीच का कोण

(iii) बल F⃗ का d⃗ पर प्रक्षेप।

उत्तर:

(i) बल द्वारा कृत कार्य (W):

W = F⃗ · d⃗

W = (3î + 4ĵ - 5k̂) · (5î + 4ĵ + 3k̂)

W = (3)(5) + (4)(4) + (-5)(3)

W = 15 + 16 - 15 = 16 जूल

(ii) F⃗ तथा d⃗ के बीच का कोण (θ):

F⃗ = √(3² + 4² + (-5)²) = √(9 + 16 + 25) = √50 = 5√2

d⃗ = √(5² + 4² + 3²) = √(25 + 16 + 9) = √50 = 5√2

cos θ = (F⃗ · d⃗) / ( F⃗ d⃗ )

cos θ = 16 / (5√2 × 5√2)

cos θ = 16 / (25 × 2) = 16 / 50 = 0.32

θ = cos⁻¹(0.32)

(iii) बल F⃗ का d⃗ पर प्रक्षेप (Projection of F⃗ on d⃗):

प्रक्षेप = (F⃗ · d⃗) / d⃗

प्रक्षेप = 16 / (5√2) = (16√2) / 10 = 1.6√2 इकाई

प्रश्न 9.

पलायन वेग से क्या तात्पर्य है? पृथ्वी तल से किसी पिण्ड के पलायन वेग का सूत्र स्थापित कीजिए।

उत्तर:

• तात्पर्य: वह न्यूनतम वेग जिससे किसी पिण्ड को पृथ्वी की सतह से ऊपर फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाता है और कभी वापस नहीं लौटता, 'पलायन वेग' (Escape Velocity, vₑ) कहलाता है।

• सूत्र स्थापना:

माना Mₑ पृथ्वी का द्रव्यमान, Rₑ त्रिज्या तथा m पिण्ड का द्रव्यमान है।

पृथ्वी सतह पर पिण्ड की कुल प्रारम्भिक ऊर्जा:

E = (1/2) m vₑ² - (G Mₑ m / Rₑ)

जब पिण्ड अनंत पर पहुँच जाता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा दोनों शून्य हो जाती हैं:

E_अनंत = 0

ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार:

(1/2) m vₑ² - (G Mₑ m / Rₑ) = 0

(1/2) m vₑ² = G Mₑ m / Rₑ

vₑ² = (2 G Mₑ) / Rₑ

vₑ = √[(2 G Mₑ) / Rₑ]

चूँकि पृथ्वी सतह पर g = (G Mₑ) / Rₑ² ⇒ G Mₑ = g Rₑ²:

vₑ = √[(2 g Rₑ²) / Rₑ]

vₑ = √(2 g Rₑ)

यह पृथ्वी तल से पलायन वेग का अभीष्ट सूत्र है।

OR (अथवा)

कार्य-ऊर्जा प्रमेय का कथन लिखिए तथा इसे सिद्ध कीजिए।

उत्तर:

• कथन (Work-Energy Theorem):

किसी बल द्वारा किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य, उस वस्तु की गतिज ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है।

अर्थात: W = ΔK = K_final - K_initial

• सिद्ध करना (Proof):

माना m द्रव्यमान की वस्तु पर बल F लगाने पर उसमें त्वरण a उत्पन्न होता है तथा उसका वेग u से बढ़कर v हो जाता है।

गति के तृतीय समीकरण से:

v² = u² + 2 a s

v² - u² = 2 a s

a s = (v² - u²) / 2

न्यूटन के द्वितीय नियम से बल F = m a:

किया गया कार्य W = F × s = (m a) × s = m (a s)

a s का मान रखने पर:

W = m [ (v² - u²) / 2 ]

W = (1/2) m v² - (1/2) m u²

W = K_final - K_initial

W = ΔK

इति सिद्धम।