प्रश्न 1(क).
यदि घर्षण कोण cos⁻¹(4/5) हो तो स्थैतिक घर्षण गुणांक का मान होगा-
(a) 3/5
(b) 2/3
(c) 3/4
(d) 4/5
उत्तर:
सही विकल्प: (c) 3/4
व्याख्या: घर्षण कोण θ = cos⁻¹(4/5) से tan θ = 3/4 प्राप्त होता है, तथा स्थैतिक घर्षण गुणांक μ = tan θ = 3/4 है।
up board class 11th physics annual paper2026 A Code
कक्षा 11वीं · भौतिक विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा
यदि घर्षण कोण cos⁻¹(4/5) हो तो स्थैतिक घर्षण गुणांक का मान होगा-
(a) 3/5
(b) 2/3
(c) 3/4
(d) 4/5
उत्तर:
सही विकल्प: (c) 3/4
व्याख्या: घर्षण कोण θ = cos⁻¹(4/5) से tan θ = 3/4 प्राप्त होता है, तथा स्थैतिक घर्षण गुणांक μ = tan θ = 3/4 है।
यदि a = At + B में, a त्वरण तथा t समय है, A/B का विमीय सूत्र होगा-
(a) [M⁰ L T⁻¹]
(b) [M⁰ L⁰ T⁻¹]
(c) [M⁰ L⁻¹ T⁻¹]
(d) [M⁰ L⁻¹ T]
उत्तर:
सही विकल्प: (b) [M⁰ L⁰ T⁻¹]
व्याख्या: विमीय विश्लेषण से [A] = [L T⁻³] तथा [B] = [L T⁻²] प्राप्त होता है, अतः [A/B] = [T⁻¹] अर्थात [M⁰ L⁰ T⁻¹] होगा।
एक उपग्रह पृथ्वी (त्रिज्या Rₑ) के अति समीप वृत्तीय कक्षा में परिक्रमण कर रहा है। इसकी कक्षीय चाल है-
(a) √(Rₑg)
(b) √(2Rₑg)
(c) √(Rₑg/2)
(d) (Rₑg)²
उत्तर:
सही विकल्प: (a) √(Rₑg)
व्याख्या: पृथ्वी के अति समीप परिक्रमण करने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल v = √(g Rₑ) होती है।
दो ध्वनि स्रोत एक साथ बजने पर 0.25 सेकण्ड में 2 विस्पन्द उत्पन्न करते हैं। उनकी आवृत्तियों में अन्तर है-
(a) 2
(b) 4
(c) 8
(d) 1
उत्तर:
सही विकल्प: (c) 8
व्याख्या: प्रति सेकण्ड विस्पन्दों की संख्या = 2 / 0.25 = 8 Hz है, जो दोनों स्रोतों की आवृत्तियों का अन्तर दर्शाती है।
बॉयल का नियम लागू होता है-
(a) रुद्धोष्म प्रक्रम पर
(b) समतापीय प्रक्रम पर
(c) समदाबी प्रक्रम पर
(d) समआयतनिक प्रक्रम पर
उत्तर:
सही विकल्प: (b) समतापीय प्रक्रम पर
व्याख्या: बॉयल के नियम में गैस का ताप स्थिर रहता है, अतः यह नियम समतापीय प्रक्रम पर लागू होता है।
विशिष्ट ऊष्मा का मात्रक है-
(a) कैलोरी/ग्राम
(b) जूल/°C
(c) कैलोरी/किग्रा - °C
(d) जूल/किग्रा
उत्तर:
सही विकल्प: (c) कैलोरी/किग्रा - °C
व्याख्या: विशिष्ट ऊष्मा c = Q / (m × ΔT) होती है, जिसका S.I. या व्यावहारिक मात्रक कैलोरी/किग्रा - °C होता है।
ऊष्मा चालकता गुणांक का मात्रक लिखिए।
उत्तर:
ऊष्मा चालकता गुणांक का SI मात्रक वाट/मीटर-केल्विन (W/m-K) या जूल/(मीटर-सेकण्ड-केल्विन) होता है।
किन दशाओं में किसी पिण्ड पर बल लगाने पर बल के द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा ?
उत्तर:
बल द्वारा किया गया कार्य W = F s cos θ होता है। यह कार्य निम्नलिखित दशाओं में शून्य होगा:
1. जब पिण्ड का विस्थापन शून्य हो (s = 0)।
2. जब बल तथा विस्थापन परस्पर लम्बवत् हों (θ = 90°)।
गैस अणुओं के औसत मुक्त पथ का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
गैस अणुओं के औसत मुक्त पथ (λ) का सूत्र:
λ = 1 / (√2 π n d²)
जहाँ:
λ = औसत मुक्त पथ
n = एकांक आयतन में अणुओं की संख्या
d = गैस के अणु का व्यास
सरल आवर्त गति का उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
सूक्ष्म आयाम के लिए सरल लोलक की गति तथा स्प्रिंग से लटके पिण्ड की दोलनी गति सरल आवर्त गति का उदाहरण है।
विक्षुब्ध प्रवाह का क्या अर्थ है?
उत्तर:
जब किसी द्रव का प्रवाह वेग उसके क्रान्तिक वेग से अधिक हो जाता है, तो द्रव का प्रवाह धारारेखीय न रहकर अनियमित एवं अशांत हो जाता है। द्रव के इस प्रकार के प्रवाह को विक्षुब्ध प्रवाह कहते हैं।
उपग्रह की कक्षीय चाल का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वी के समीप परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कक्षीय चाल (v₀) का सूत्र:
v₀ = √(g R_e) अथवा v₀ = √(G M_e / R_e)
जहाँ:
v₀ = उपग्रह की कक्षीय चाल
g = गुरुत्वीय त्वरण
R_e = पृथ्वी की त्रिज्या
G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक
M_e = पृथ्वी का द्रव्यमान
किसी पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
किसी पिण्ड का द्रव्यमान केन्द्र वह बिन्दु होता है जिस पर पिण्ड का सम्पूर्ण द्रव्यमान केन्द्रित माना जा सकता है। जब पिण्ड पर कोई बाह्य बल लगाया जाता है, तो पिण्ड की स्थानान्तरीय गति इस प्रकार होती है मानो सम्पूर्ण बाह्य बल उसी बिन्दु पर लगा हो और पिण्ड का समस्त द्रव्यमान उसी बिन्दु पर निहित हो।
किसी तार पर 1.5 किग्रा-भार लगाने पर उसकी लम्बाई में वृद्धि 1% होती है। तार में रेखीय विकृति की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
लम्बाई में प्रतिशत वृद्धि = 1%
लम्बाई में परिवर्तन / प्रारम्भिक लम्बाई = 1 / 100
ज्ञात सूत्र:
रेखीय विकृति = लम्बाई में परिवर्तन / प्रारम्भिक लम्बाई
हल:
रेखीय विकृति = 1 / 100 = 0.01
अतः उत्तर:
तार में रेखीय विकृति का मान 0.01 है। (विकृति एक विमाहीन तथा मात्रकहीन राशि है।)
ऊष्मा चालन की अचर अथवा स्थायी अवस्था का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ऊष्मा चालन की प्रक्रिया में जब किसी छड़ के एक सिरे को गर्म किया जाता है, तो प्रारम्भ में छड़ के प्रत्येक भाग का ताप समय के साथ बढ़ता है (प्रारम्भिक या परिवर्ती अवस्था)।
कुछ समय बाद एक ऐसी अवस्था आती है जब छड़ के प्रत्येक परिच्छेद का ताप समय के साथ स्थिर हो जाता है और बढ़ना बन्द हो जाता है। इस अवस्था को ऊष्मा चालन की अचर अथवा स्थायी अवस्था कहते हैं। इस अवस्था में छड़ का कोई भी भाग ऊष्मा का अवशोषण नहीं करता, बल्कि प्राप्त सम्पूर्ण ऊष्मा को अपने से अगले भाग को स्थानान्तरित कर देता है।
एकसमान परिमाण के 3 न्यूटन के दो बल किसी वस्तु पर θ कोण पर लगे हैं। यदि इन दोनों का परिणामी बल भी 3 न्यूटन हो, तो कोण θ का मान क्या होगा ?
उत्तर:
दिया है:
पहला बल (F1) = 3 न्यूटन
दूसरा बल (F2) = 3 न्यूटन
परिणामी बल (R) = 3 न्यूटन
ज्ञात सूत्र:
R² = F1² + F2² + 2 × F1 × F2 × cos θ
हल:
सूत्र में मान रखने पर:
(3)² = (3)² + (3)² + 2 × (3) × (3) × cos θ
9 = 9 + 9 + 18 × cos θ
9 = 18 + 18 × cos θ
9 - 18 = 18 × cos θ
-9 = 18 × cos θ
cos θ = -9 / 18
cos θ = -1 / 2
चूँकि cos 120° = -1 / 2
अतः θ = 120°
अतः उत्तर:
कोण θ का मान 120° होगा।
(क)
पृथ्वी तल से कितना नीचे जाने पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण का आधा हो जाएगा ? (पृथ्वी की त्रिज्या Re = 6400 किमी)
उत्तर:
दिया है:
पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण = g
गहराई d पर गुरुत्वीय त्वरण g' = g / 2
पृथ्वी की त्रिज्या Re = 6400 किमी
ज्ञात सूत्र:
g' = g (1 - d / Re)
हल:
g / 2 = g (1 - d / Re)
1 / 2 = 1 - d / Re
d / Re = 1 - 1 / 2
d / Re = 1 / 2
d = Re / 2
d = 6400 / 2
d = 3200 किमी
अतः उत्तर:
पृथ्वी तल से 3200 किमी नीचे जाने पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण का आधा हो जाएगा।
(ख)
गुप्त ऊष्मा कितने प्रकार की होती है? प्रत्येक प्रकार को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गुप्त ऊष्मा मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
1. गलन की गुप्त ऊष्मा:
नियत ताप (गलनांक) पर किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान को ठोस अवस्था से पूर्णतः द्रव अवस्था में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा को गलन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
उदाहरण: बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा 80 कैलोरी/ग्राम (अथवा 3.36 × 10⁵ जूल/किग्रा) होती है।
2. वाष्पन की गुप्त ऊष्मा:
नियत ताप (क्वथनांक) पर किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान को द्रव अवस्था से पूर्णतः वाष्प अवस्था में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा को वाष्पन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
उदाहरण: जल की वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 540 कैलोरी/ग्राम (अथवा 2.26 × 10⁶ जूल/किग्रा) होती है।
(ग)
ऊष्मा गतिकी का प्रथम नियम लिखिए तथा प्रयुक्त संकेतों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ऊष्मा गतिकी का प्रथम नियम:
यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। इसके अनुसार, जब किसी निकाय को ऊष्मा दी जाती है, तो वह ऊष्मा दो भागों में प्रयुक्त होती है — पहला भाग निकाय की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि करने में तथा दूसरा भाग निकाय द्वारा बाह्य कार्य करने में।
गणितीय रूप:
dQ = dU + dW
प्रयुक्त संकेतों का अर्थ:
dQ = निकाय को दी गई अथवा निकाय से ली गई ऊष्मा की मात्रा।
dU = निकाय की आंतरिक ऊर्जा में होने वाला परिवर्तन।
dW = निकाय द्वारा अथवा निकाय पर किया गया कार्य।
(घ)
सदिश योग का त्रिभुज नियम समझाइए।
उत्तर:
सदिश योग का त्रिभुज नियम:
यदि दो सदिशों को परिमाण और दिशा में किसी त्रिभुज की दो क्रमागत (एक ही क्रम में ली गई) भुजाओं द्वारा निरूपित किया जाए, तो उनका परिणामी सदिश परिमाण और दिशा में उस त्रिभुज की तीसरी भुजा द्वारा विपरीत क्रम में निरूपित होता है।
यदि दो सदिश A तथा B हैं, तो उनका परिणामी सदिश R = A + B होगा।
चित्र विवरण:
1. रूपरेखा: एक समतल त्रिभुज PQR।
2. प्रथम सदिश A: बाएँ से दाएँ क्षैतिज दिशा में भुजा PQ द्वारा निरूपित।
3. द्वितीय सदिश B: बिंदु Q से प्रारंभ होकर ऊपर की ओर भुजा QR द्वारा निरूपित।
4. परिणामी सदिश R: बिंदु P से बिंदु R की ओर विपरीत क्रम में भुजा PR द्वारा निरूपित।
परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।
(ङ)
संरक्षी बलों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
संरक्षी बलों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. पथ पर अनिर्भरता: संरक्षी बल द्वारा किसी कण को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य केवल प्रारंभिक तथा अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, कण के गमन पथ पर नहीं।
2. बंद पथ में शून्य कार्य: किसी बंद पथ (closed loop) में संरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है।
3. स्थितिज ऊर्जा से संबंध: संरक्षी बल के अंतर्गत निकाय की स्थितिज ऊर्जा को परिभाषित किया जा सकता है, जहाँ F = - (dU/dx) होता है।
4. यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण: केवल संरक्षी बलों के प्रभाव में निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) सदैव नियत रहती है।
5. उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण बल, स्थिर वैद्युत बल और कमानी (स्प्रिंग) का बल संरक्षी बल के उदाहरण हैं।
(क)
1 लीटर जल पर दाब में कितना अन्तर किया जाए कि वह 0.10% में संपीड़ित हो जाए ?
उत्तर:
दिया है:
जल का प्रारम्भिक आयतन V = 1 लीटर
आयतन में भिन्नात्मक परिवर्तन ΔV / V = 0.10 / 100 = 10⁻³
जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक B = 2.2 × 10⁹ N/m²
ज्ञात सूत्र:
B = ΔP / (ΔV / V)
दाब में अन्तर ΔP = B × (ΔV / V)
हल:
ΔP = (2.2 × 10⁹) × (10⁻³)
ΔP = 2.2 × 10⁶ N/m²
अतः उत्तर:
दाब में आवश्यक अन्तर 2.2 × 10⁶ N/m² (या Pa) है।
(ख)
किस ताप पर किसी गैस के अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा 27°C ताप पर गतिज ऊर्जा की 1/3 होगी ?
उत्तर:
दिया है:
प्रारम्भिक ताप T1 = 27°C = 27 + 273 = 300 K
अंतिम गतिज ऊर्जा E2 = (1/3) E1
ज्ञात सूत्र:
गैस के अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा E = (3/2) k T
अर्थात् E ∝ T
E1 / E2 = T1 / T2
हल:
E1 / ((1/3) E1) = 300 / T2
3 = 300 / T2
T2 = 300 / 3 = 100 K
सैलसियस पैमाने पर ताप t2 = 100 - 273 = -173°C
अतः उत्तर:
100 K (या -173°C) ताप पर गैस के अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा 27°C पर गतिज ऊर्जा की 1/3 होगी।
(ग)
सरल आवर्त गति की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
सरल आवर्त गति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. यह एक आवर्ती तथा दोलनी गति होती है जो एक निश्चित माध्य स्थिति के दोनों ओर सीधी रेखा में होती है।
2. कण पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल (या उत्पन्न त्वरण) सदैव माध्य स्थिति से कण के विस्थापन के समानुपाती होता है (a ∝ -x)।
3. त्वरण की दिशा सदैव माध्य स्थिति की ओर होती है।
4. माध्य स्थिति (x = 0) पर कण का विस्थापन शून्य, त्वरण शून्य तथा वेग अधिकतम होता है।
5. चरम स्थितियों पर कण का विस्थापन अधिकतम, वेग शून्य तथा त्वरण अधिकतम होता है।
(घ)
यदि उपग्रह का परिक्रमण काल T तथा ग्रह का माध्य घनत्व ϱ हो तो सिद्ध कीजिए T²ϱ एक नियतांक होगा ?
उत्तर:
दिया है:
उपग्रह का परिक्रमण काल T, ग्रह का घनत्व ϱ, ग्रह की त्रिज्या R, गुरुत्वीय नियतांक G।
ज्ञात सूत्र:
ग्रह के अति समीप परिक्रमा करते उपग्रह का परिक्रमण काल:
T = 2 π √(R³ / (G M))
जहाँ M = ग्रह का द्रव्यमान = आयतन × घनत्व = (4/3) π R³ ϱ
हल:
M का मान परिक्रमण काल के सूत्र में रखने पर:
T = 2 π √[ R³ / (G × (4/3) π R³ ϱ) ]
T = 2 π √[ 3 / (4 π G ϱ) ]
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
T² = 4 π² × [ 3 / (4 π G ϱ) ]
T² = (3 π) / (G ϱ)
T² ϱ = (3 π) / G
चूँकि 3, π तथा G सभी अचर मान हैं, अतः:
T² ϱ = नियतांक
अतः उत्तर:
T² ϱ एक नियतांक है। इति सिद्धम्।
(ङ)
गैसों के अणुगति सिद्धान्त की परिकल्पनाएं लिखिए।
उत्तर:
गैसों के अणुगति सिद्धान्त की मुख्य परिकल्पनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. प्रत्येक गैस अति सूक्ष्म कणों से मिलकर बनी होती है जिन्हें अणु कहते हैं। एक ही गैस के सभी अणु सर्वसम होते हैं।
2. गैस के अणु दृढ़, अति सूक्ष्म तथा पूर्णतः प्रत्यास्थ गोले माने जाते हैं।
3. अणुओं का वास्तविक आयतन गैस द्वारा घेरे गए कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है।
4. गैस के अणु सभी सम्भव दिशाओं में अनियत (यादृच्छिक) गति करते रहते हैं।
5. अणुओं की आपस में तथा बर्तन की दीवारों से होने वाली टक्करें पूर्णतः प्रत्यास्थ होती हैं, जिससे कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है।
6. दो क्रमिक टक्करों के बीच अणु सरल रेखा में गति करता है तथा टक्कर में लगा समय दो टक्करों के बीच के समय की तुलना में नगण्य होता है।
7. अणुओं के बीच कोई अंतर-अणुक आकर्षण या प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता है।
गैस में ध्वनि की चाल पर दाब के प्रभाव का सूत्र निगमित कीजिए।
उत्तर:
लाप्लास के अनुसार गैस में ध्वनि की चाल का सूत्र:
v = √(γ P / ρ)
जहाँ γ = विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात (Cp/Cv), P = दाब, तथा ρ = घनत्व।
दाब के प्रभाव का निगमन:
यदि T परम ताप पर गैस का द्रव्यमान M तथा आयतन V हो, तो घनत्व ρ = M / V।
घनत्व का मान चाल के सूत्र में रखने पर:
v = √(γ P / (M / V))
v = √(γ P V / M)
आदर्श गैस समीकरण P V = R T (एक मोल गैस के लिए) से:
v = √(γ R T / M)
निष्कर्ष:
1. व्यंजक v = √(γ R T / M) में दाब P का पद उपस्थित नहीं है।
2. स्थिर ताप पर यदि दाब P बदला जाता है, तो आयतन V और घनत्व ρ उसी अनुपात में बदल जाते हैं, जिससे अनुपात (P / ρ) स्थिर रहता है।
3. अतः स्थिर ताप पर दाब परिवर्तन का गैस में ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
(अथवा)
एकसमान छड़ के द्रव्यमान केन्द्र के लिए व्यंजक निगमित कीजिए।
उत्तर:
मान लीजिए M द्रव्यमान तथा L लम्बाई की एकसमान छड़ X-अक्ष पर स्थित है, जिसका एक सिरा मूल बिन्दु O (x = 0) तथा दूसरा सिरा x = L पर है।
छड़ का रेखीय द्रव्यमान घनत्व:
λ = M / L
मूल बिन्दु O से x दूरी पर dx लम्बाई का एक सूक्ष्म अल्पांश लेते हैं।
अल्पांश का द्रव्यमान:
dm = λ dx = (M / L) dx
द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति का सूत्र:
x_cm = (1 / M) ∫ x dm (सीमा x = 0 से x = L)
dm का मान रखने पर:
x_cm = (1 / M) ∫ x · (M / L) dx (0 से L तक)
x_cm = (1 / L) ∫ x dx (0 से L तक)
समाकलन करने पर:
∫ x dx = [x² / 2] (0 से L तक) = L² / 2
मान रखने पर:
x_cm = (1 / L) × (L² / 2) = L / 2
अतः उत्तर:
एकसमान छड़ का द्रव्यमान केन्द्र उसकी लम्बाई के मध्य बिन्दु (x = L/2) पर स्थित होता है।
सरल आवर्त गति करने वाले किसी कण की सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
मान माना m द्रव्यमान का एक कण a आयाम तथा w कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति कर रहा है। साम्य स्थिति से x विस्थापन पर कण का वेग v = w × √(a² - x²) होता है।
1. गतिज ऊर्जा (K):
K = (1/2) × m × v²
K = (1/2) × m × w² × (a² - x²)
2. स्थितिज ऊर्जा (U):
कण पर लगने वाला प्रत्ययन बल F = - m × w² × x होता है।
कण को साम्य स्थिति से x विस्थापन तक विस्थापित करने में किया गया कार्य ही उसकी स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
U = (1/2) × m × w² × x²
3. सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा (E):
E = K + U
E = (1/2) × m × w² × (a² - x²) + (1/2) × m × w² × x²
E = (1/2) × m × w² × a² - (1/2) × m × w² × x² + (1/2) × m × w² × x²
E = (1/2) × m × w² × a²
अतः सरल आवर्त गति करने वाले कण की सम्पूर्ण यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है तथा यह आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है।
अथवा
कार्य ऊर्जा प्रमेय का कथन लिखिए तथा इसे सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
कथन:
किसी बल द्वारा किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
अर्थात्, W = ΔK = K₂ - K₁ = (1/2) × m × v² - (1/2) × m × u²
उपपत्ति (नियत बल के लिए):
माना m द्रव्यमान की एक वस्तु पर नियत बल F लगाने से उसमें a त्वरण उत्पन्न होता है और s विस्थापन के बाद उसका वेग u से बदलकर v हो जाता है।
गति के तृतीय समीकरण से:
v² = u² + 2as
2as = v² - u²
as = (v² - u²) / 2
समीकरण के दोनों पक्षों में m से गुणा करने पर:
m × a × s = (1/2) × m × (v² - u²)
न्यूटन के द्वितीय नियम से F = m × a तथा बल द्वारा किया गया कार्य W = F × s होता है।
अतः
W = (1/2) × m × v² - (1/2) × m × u²
W = K₂ - K₁
W = ΔK
इति सिद्धम्।
केशिकात्व से क्या तात्पर्य है? किसी केशनली में जल के उन्नयन (h) के लिए केशनली की आन्तरिक त्रिज्या (r) तथा पृष्ठ तनाव (s) के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
केशिकात्व:
अत्यंत बारीक छिद्र वाली काँच की पतली नली को केशनली कहते हैं। केशनली को किसी द्रव में सीधा डुबोने पर द्रव के नली में ऊपर चढ़ने अथवा नीचे उतरने की घटना को केशिकात्व कहते हैं।
जल के उन्नयन (h) का व्यंजक:
माना r आन्तरिक त्रिज्या की एक केशनली को s पृष्ठ तनाव तथा d घनत्व वाले जल में ऊर्ध्वाधर डुबोया जाता है। जल केशनली में h ऊँचाई तक चढ़ जाता है।
1. पृष्ठ तनाव बल का घटक:
द्रव के मेनिस्कस की परिधि (2 × π × r) पर पृष्ठ तनाव बल F कार्य करता है।
स्पर्श कोण θ होने पर इस बल का ऊर्ध्वाधर घटक s × cos(θ) ऊपर की ओर कार्य करता है।
अतः ऊपर की ओर लगने वाला कुल ऊर्ध्वाधर बल = s × cos(θ) × 2 × π × r
2. चढ़े हुए द्रव स्तम्भ का भार:
के नली में चढ़े द्रव का आयतन V = π × r² × h
द्रव का द्रव्यमान m = V × d = π × r² × h × d
द्रव स्तम्भ का भार W = m × g = π × r² × h × d × g
3. संतुलन की स्थिति में:
ऊपर की ओर कुल बल = नीचे की ओर द्रव स्तम्भ का भार
s × cos(θ) × 2 × π × r = π × r² × h × d × g
इससे h का मान प्राप्त होता है:
h = (2 × s × cos(θ)) / (r × d × g)
जल तथा स्वच्छ काँच के लिए स्पर्श कोण θ = 0° होता है, अत: cos(0°) = 1:
h = (2 × s) / (r × d × g)
यही केशनली में जल के उन्नयन का व्यंजक है।
अथवा
दो वेक्टरों A व B के योग और अन्तर परिमाण में बराबर हैं, अर्थात् A + B = A - B तो सिद्ध कीजिए कि वेक्टर A व B परस्पर लम्बवत् हैं।
उत्तर:
दिया है:
A + B = A - B
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
A + B ² = A - B ²
हम जानते हैं कि किसी वेक्टर के परिमाण का वर्ग उसके स्वयं के साथ अदिश गुणनफल के बराबर होता है:
(A + B) . (A + B) = (A - B) . (A - B)
अदिश गुणनफल करने पर:
A . A + A . B + B . A + B . B = A . A - A . B - B . A + B . B
चूँकि A . A = A², B . B = B² तथा A . B = B . A:
A² + 2(A . B) + B² = A² - 2(A . B) + B²
दोनों पक्षों से A² और B² निरस्त करने पर:
2(A . B) = - 2(A . B)
4(A . B) = 0
A . B = 0
यदि दो शून्यतर वेक्टरों का अदिश (डॉट) गुणनफल शून्य होता है, तो वे परस्पर लम्बवत् होते हैं:
A × B × cos(θ) = 0
cos(θ) = 0
θ = 90°
अतः वेक्टर A व B परस्पर लम्बवत् हैं।
इति सिद्धम्।
ऐसे सूत्र का निगमन कीजिए जो गैस की दो विशिष्ट ऊष्माओं के अन्तर को स्पष्ट करता है।
उत्तर:
गैस की दो मुख्य विशिष्ट ऊष्माएँ स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cp) तथा स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cv) होती हैं। इन दोनों के अन्तर का सूत्र Cp - Cv = R होता है, जिसे मेयर का सूत्र कहते हैं।
निगमन:
माना 1 मोल आदर्श गैस ली गई है।
1. स्थिर आयतन पर:
गैस का ताप dT बढ़ाने के लिए दी गई ऊष्मा dQ = Cv × dT होती है।
स्थिर आयतन पर आयतन में परिवर्तन dV = 0 होने से किया गया कार्य dW = P × dV = 0 होगा।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम dQ = dU + dW से:
Cv × dT = dU + 0
dU = Cv × dT (समीकरण 1)
2. स्थिर दाब पर:
गैस का ताप dT बढ़ाने के लिए दी गई ऊष्मा dQ = Cp × dT होती है।
इस स्थिति में किया गया कार्य dW = P × dV होगा।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम dQ = dU + dW से:
Cp × dT = dU + P × dV (समीकरण 2)
समीकरण 1 से dU का मान समीकरण 2 में रखने पर:
Cp × dT = Cv × dT + P × dV
(Cp - Cv) × dT = P × dV (समीकरण 3)
1 मोल आदर्श गैस के लिए अवस्था समीकरण:
P × V = R × T
स्थिर दाब पर दोनों पक्षों का अवकलन करने पर:
P × dV = R × dT
P × dV का यह मान समीकरण 3 में रखने पर:
(Cp - Cv) × dT = R × dT
दोनों ओर से dT निरस्त करने पर:
Cp - Cv = R
यही सूत्र गैस की दो विशिष्ट ऊष्माओं के अन्तर को स्पष्ट करता है।
अथवा
किसी ठोस के रेखीय प्रसार गुणांक, क्षेत्रीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
माना किसी ठोस का रेखीय प्रसार गुणांक = α, क्षेत्रीय प्रसार गुणांक = β, तथा आयतन प्रसार गुणांक = γ है।
1. रेखीय प्रसार गुणांक (α) तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) में सम्बन्ध:
माना 1 इकाई भुजा का एक वर्गाकार ठोस फलक है।
प्रारम्भिक क्षेत्रफल A₁ = 1 × 1 = 1
ताप में 1 °C की वृद्धि करने पर भुजा की लम्बाई L = 1 + α हो जाती है।
नया क्षेत्रफल A₂ = (1 + α)² = 1 + 2α + α²
चूँकि α का मान अत्यंत सूक्ष्म होता है, अतः α² को नगण्य मानने पर:
A₂ = 1 + 2α
क्षेत्रफल में वृद्धि ΔA = A₂ - A₁ = (1 + 2α) - 1 = 2α
क्षेत्रीय प्रसार गुणांक की परिभाषा से β = ΔA / (A₁ × ΔT) = 2α
अतः β = 2α (समीकरण 1)
2. रेखीय प्रसार गुणांक (α) तथा आयतन प्रसार गुणांक (γ) में सम्बन्ध:
माना 1 इकाई भुजा का एक घनाकार ठोस है।
प्रारम्भिक आयतन V₁ = 1 × 1 × 1 = 1
ताप में 1 °C की वृद्धि करने पर प्रत्येक भुजा की लम्बाई L = 1 + α हो जाती है।
नया आयतन V₂ = (1 + α)³ = 1 + 3α + 3α² + α³
α² तथा α³ को नगण्य मानने पर:
V₂ = 1 + 3α
आयतन में वृद्धि ΔV = V₂ - V₁ = (1 + 3α) - 1 = 3α
आयतन प्रसार गुणांक की परिभाषा से γ = ΔV / (V₁ × ΔT) = 3α
अतः γ = 3α (समीकरण 2)
3. तीनों प्रसार गुणांकों में सम्बन्ध:
समीकरण 1 तथा समीकरण 2 से:
α = β / 2 = γ / 3
अर्थात्
α : β : γ = 1 : 2 : 3
अतः ठोस के रेखीय प्रसार गुणांक, क्षेत्रीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक का अनुपात 1 : 2 : 3 होता है।