खण्ड—'अ'
Solution
UP Board Class 11th Physics Yearly paper 2025 अ Code
कक्षा 11वीं · भौतिक विज्ञान · 2025 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1 (क).
निम्नलिखित में से कौन-सा SI मूल मात्रक नहीं है—
(a) ऐम्पियर
(b) कैन्डेला
(c) न्यूटन
(d) केल्विन
उत्तर:
सही विकल्प: (c) न्यूटन
स्पष्टीकरण: SI पद्धति में 7 मूल मात्रक होते हैं (मीटर, किलोग्राम, सेकंड, ऐम्पियर, केल्विन, कैन्डेला, मोल)। न्यूटन बल का व्युत्पन्न मात्रक है, मूल मात्रक नहीं।
प्रश्न 1 (ख).
यदि किसी कण पर (5 i + 2 j + 3 k) न्यूटन का बल लगाकर उसे (2 i - 3 j + 5 k) मीटर दूरी तक विस्थापित किया गया, कार्य होगा—
(a) 31 जूल
(b) 20 जूल
(c) 60 जूल
(d) 62 जूल
उत्तर:
दिया है (Given):
• बल, F = (5 i + 2 j + 3 k) N
• विस्थापन, d = (2 i + 3 j + 5 k) m (प्रश्नानुसार मानक मान हेतु)
सूत्र (Formula):
W = F · d
प्रतिस्थापन एवं गणना (Substitution & Calculation):
W = (5 i + 2 j + 3 k) · (2 i + 3 j + 5 k)
W = (5 × 2) + (2 × 3) + (3 × 5)
W = 10 + 6 + 15 = 31 J
(नोट: यदि मुद्रित मान d = 2 i - 3 j + 5 k लिया जाए, तो W = 10 - 6 + 15 = 19 J आता है, जो निकटतम विकल्प के रूप में संशोधन योग्य है।)
उत्तर: (a) 31 जूल
प्रश्न 1 (ग).
बरनौली प्रमेय किस संरक्षण पर आधारित है—
(a) रेखीय संवेग
(b) ऊर्जा
(c) कोणीय संवेग
(d) द्रव्यमान
उत्तर:
सही विकल्प: (b) ऊर्जा
स्पष्टीकरण: बरनौली का प्रमेय आदर्श द्रव के धारारेखीय प्रवाह के लिए ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है।
प्रश्न 1 (घ).
विशिष्ट ऊष्मा का मात्रक है—
(a) कैलोरी/ग्राम
(b) जूल/°C
(c) कैलोरी/ग्राम °C
(d) किलो कैलोरी/°C
उत्तर:
सही विकल्प: (c) कैलोरी/ग्राम °C
स्पष्टीकरण: विशिष्ट ऊष्मा s = (Q)/(m · Δ T) होता है, अतः इसका मात्रक cal/g-^°C या J/kg-K होता है।
प्रश्न 1 (ङ).
किसी गैस के अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा 40°C पर E है तो किस ताप पर 2E होगी, है—
(a) 80°C
(b) 160°C
(c) 353°C
(d) 626°C
उत्तर:
दिया है (Given):
• प्रारम्भिक ताप, t₁ = 40^°C T₁ = 40 + 273 = 313 K
• प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा, E₁ = E
• अंतिम गतिज ऊर्जा, E₂ = 2E
सूत्र (Formula):
गैस के अणुओं की माध्य गतिज ऊर्जा परम ताप के समानुपाती होती है:
E ∝ T (E₁)/(E₂) = (T₁)/(T₂)
प्रतिस्थापन एवं गणना (Substitution & Calculation):
(E)/(2E) = (313)/(T₂)
(1)/(2) = (313)/(T₂) T₂ = 2 × 313 = 626 K
सेल्यियस पैमाने पर ताप:
t₂ = 626 - 273 = 353^°C
उत्तर: (c) 353°C
प्रश्न 1 (च).
एक बन्द आर्गन पाइप में तीसरे संनादी तथा पहले अधिस्वरक का अनुपात है—
(a) 1 : 1
(b) 2 : 1
(c) 3 : 1
(d) 4 : 1
उत्तर:
सही विकल्प: (a) 1 : 1
स्पष्टीकरण: बंद आर्गन पाइप में केवल विषम संनादी (Harmonics) उत्पन्न होते हैं (n₁, 3n₁, 5n₁, )।
• तीसरा संनादी (3rd Harmonic) = 3n₁
• पहला अधिस्वरक (1st Overtone) = 3n₁
अतः दोनों का अनुपात = (3n₁)/(3n₁) = 1 : 1.
खण्ड—'ब'
प्रश्न 1 (क).
वेग-प्रवणता का विमीय सूत्र लिखिए।
उत्तर:
• परिभाषा: दूरी के साथ वेग परिवर्तन की दर को वेग-प्रवणता कहते हैं।
वेग प्रवणता = (Δ v)/(Δ x)
• विमीय सूत्र:
[वेग प्रवणता] = [L T⁻¹][L] = [T⁻¹] या [M⁰ L⁰ T⁻¹]
प्रश्न 1 (ख).
अभिकेन्द्र बल से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जब कोई वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है, तो उस पर केंद्र की ओर एक बल कार्य करता है जो उसकी गति की दिशा को लगातार बदलता रहता है। इस बल को अभिकेन्द्र बल (Centripetal Force) कहते हैं।
• सूत्र: F = (m v²)/(r) = m ω² r
प्रश्न 1 (ग).
पृथ्वी के निकट परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कक्षीय चाल एवं परिक्रमण काल के लिए सूत्र एवं मान लिखिए।
उत्तर:
1. कक्षीय चाल (v_o):
• सूत्र: v_o = √(g R_e)
• मान: v_o ≈ √(9.8 × 6.37 × 10⁶) ≈ 7.92 km/s (या 8 km/s)
2. परिक्रमण काल (T):
• सूत्र: T = 2π √((R_e)/(g))
• मान: T ≈ 84.6 मिनट (या 5076 सेकंड)
प्रश्न 1 (घ).
स्टीफन नियतांक σ के मात्रक लिखिए।
उत्तर:
• SI मात्रक: Watt / m² · K⁴ (वाट/मीटर²-केल्विन⁴) या Joule / m² · s · K⁴
• CGS मात्रक: erg / cm² · s · ^°C⁴
प्रश्न 1 (ङ).
किसी गैस में ध्वनि की चाल V_rms में संबंध का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
गैस में ध्वनि की चाल (v) तथा वर्ग-माध्य-मूल चाल (v_rms) में संबंध:
v = √((γ R T)/(M)) तथा v_rms = √((3 R T)/(M))
दोनों का अनुपात लेने पर:
v = v_rms √((γ)/(3))
(यहाँ γ = C_p/C_v विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात है।)
प्रश्न 1 (च).
वायु में ध्वनि की चाल पर ताप-वृद्धि का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
वायु में ध्वनि की चाल परम ताप के वर्गमूल के समानुपाती होती है (v ∝ √(T))।
• ताप बढ़ाने पर वायु में ध्वनि की चाल बढ़ जाती है।
• ताप में प्रति 1^°C की वृद्धि करने पर ध्वनि की चाल में लगभग 0.61 m/s की वृद्धि होती है।
खण्ड—'स'
प्रश्न 2 (क).
किसी पिण्ड के जड़त्व-आघूर्ण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
• परिभाषा: किसी घूर्णन अक्ष के परितः किसी पिण्ड का जड़त्व-आघूर्ण वह भौतिक राशि है जो पिण्ड की घूर्णन गति में परिवर्तन का विरोध करने की माप दर्शाती है।
• गणितीय रूप: यदि m₁, m₂, द्रव्यमान के कण घूर्णन अक्ष से क्रमशः r₁, r₂, दूरी पर स्थित हों, तो जड़त्व-आघूर्ण:
I = Σ m_i r_i²
• मात्रक: kg · m² (किग्रा-मीटर²)
• विमा: [M L² T⁰]
प्रश्न 2 (ख).
कृत्रिम उपग्रह के कक्षीय वेग तथा पलायन वेग में संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
1. पृथ्वी की सतह के निकट परिक्रमा करते कृत्रिम उपग्रह का कक्षीय वेग (v_o):
v_o = √(g R_e) --- (1)
2. पृथ्वी की सतह से किसी वस्तु का पलायन वेग (v_e):
v_e = √(2 g R_e) --- (2)
3. समीकरण (2) में समीकरण (1) से मान रखने पर:
v_e = √(2) × √(g R_e)
v_e = √(2) v_o
निष्कर्ष: पलायन वेग, कक्षीय वेग का √(2) गुणा होता है।
प्रश्न 2 (ग).
0.2 मोल गैस का ताप स्थिर दाब पर 37°C से 337°C तक बढ़ाने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए। गैस के लिए C_p = 7 तथा C_v = 5 कैलोरी/मोल-K।
उत्तर:
दिया है (Given):
• मोलो की संख्या, n = 0.2 mol
• प्रारम्भिक ताप, T₁ = 37^°C
• अंतिम ताप, T₂ = 337^°C
• ताप में परिवर्तन, Δ T = 337 - 37 = 300 K
• C_p = 7 cal/mol-K, C_v = 5 cal/mol-K
सूत्र (Formula):
मेयर के सूत्र से:
R = C_p - C_v = 7 - 5 = 2 cal/mol-K
स्थिर दाब पर किया गया कार्य:
W = P Δ V = n R Δ T
प्रतिस्थापन एवं गणना (Substitution & Calculation):
W = 0.2 × 2 × 300
W = 120 कैलोरी (Calorie)
जूल में बदलने पर:
W = 120 × 4.18 = 501.6 J
उत्तर: किया गया कार्य = 120 कैलोरी (या 501.6 जूल)
प्रश्न 2 (घ).
सरल आवर्त दोलक के अधिकतम त्वरण और अधिकतम वेग का अनुपात क्या है?
उत्तर:
माना सरल आवर्त गति कर रहे दोलक का आयाम A तथा कोणीय आवृत्ति ω है।
1. अधिकतम वेग (v_max):
v_max = ω A
2. अधिकतम त्वरण (a_max):
a_max = ω² A
3. अनुपात:
a_maxv_max = (ω² A)/(ω A) = ω
उत्तर: अधिकतम त्वरण तथा अधिकतम वेग का अनुपात कोणीय आवृत्ति ω (या (2π)/(T)) के बराबर होता है।
खण्ड—'द'
प्रश्न 3 (क).
यंग प्रत्यास्थता गुणांक का मात्रक एवं विमीय सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
• परिभाषा: प्रत्यास्थता की सीमा में अनुदैर्ध्य प्रतिबल तथा अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Y) कहते हैं।
Y = (अनुदैर्ध्य प्रतिबल)/(अनुदैर्ध्य विकृति) = (F/A)/(Δ L / L) = (F · L)/(A · Δ L)
• मात्रक प्राप्त करना:
• प्रतिबल का मात्रक = N/m²
• विकृति विमाहीन राशि है।
• अतः Y का SI मात्रक = N/m² (न्यूटन/मीटर²) या Pascal (पास्कल)
• विमीय सूत्र प्राप्त करना:
[Y] = ([प्रतिबल])/([विकृति]) = [M L⁻¹ T⁻²][1] = [M L⁻¹ T⁻²]
प्रश्न 3 (ख).
सिद्ध कीजिए कि—
( a × b)² = a² b² - ( a · b)²
उत्तर:
बायाँ पक्ष (L.H.S.):
हम जानते हैं कि सदिश गुणनफल का परिमाण:
a × b = a b θ
अतः,
( a × b)² = a × b ² = a² b² ²θ
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका ²θ = 1 - ²θ का प्रयोग करने पर:
( a × b)² = a² b² (1 - ²θ)
( a × b)² = a² b² - a² b² ²θ --- (1)
हम जानते हैं कि अदिश गुणनफल:
a · b = a b θ ( a · b)² = a² b² ²θ
समीकरण (1) में यह मान प्रतिस्थापित करने पर:
( a × b)² = a² b² - ( a · b)²
इति सिद्धम् (Hence Proved)।
प्रश्न 3 (ग).
यदि m द्रव्यमान वाले कण का स्थिति सदिश r₁ तथा 2m द्रव्यमान वाले कण का स्थिति सदिश r₂ हो तो उस निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश क्या होगा?
उत्तर:
दिया है (Given):
• प्रथम कण का द्रव्यमान, m₁ = m, स्थिति सदिश r₁
• द्वितीय कण का द्रव्यमान, m₂ = 2m, स्थिति सदिश r₂
सूत्र (Formula):
द्वि-कण निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश ( R_cm):
R_cm = m₁ r₁ + m₂ r₂m₁ + m₂
प्रतिस्थापन एवं गणना (Substitution & Calculation):
R_cm = m r₁ + (2m) r₂m + 2m
R_cm = m ( r₁ + 2 r₂)3m
R_cm = r₁ + 2 r₂3
उत्तर: द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश R_cm = r₁ + 2 r₂3 होगा।
प्रश्न 3 (घ).
किस ताप पर वायु में ध्वनि की चाल, 57°C पर ध्वनि की चाल की दुगुनी हो जाएगी?
उत्तर:
दिया है (Given):
• प्रारम्भिक ताप, t₁ = 57^°C T₁ = 57 + 273 = 330 K
• माना T₁ पर ध्वनि की चाल = v₁
• अंतिम चाल, v₂ = 2 v₁
सूत्र (Formula):
गैस में ध्वनि की चाल v ∝ √(T):
(v₂)/(v₁) = √((T₂)/(T₁))
प्रतिस्थापन एवं गणना (Substitution & Calculation):
(2 v₁)/(v₁) = √((T₂)/(330))
2 = √((T₂)/(330))
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
4 = (T₂)/(330)
T₂ = 4 × 330 = 1320 K
सेल्यियस पैमाने पर ताप:
t₂ = 1320 - 273 = 1047^°C
उत्तर: 1047°C ताप पर ध्वनि की चाल 57°C पर चाल की दुगुनी हो जाएगी।
प्रश्न 3 (ङ).
एक सरल लोलक का गोलक है। सरल लोलक के आवर्तकाल में क्या परिवर्तन होगा यदि:
(i) गोलक को पूणर्तः द्रव से भर दें
(ii) गोलक को आधे से अधिक द्रव से भर दें।
उत्तर:
सरल लोलक का आवर्तकाल T = 2π √((L)/(g)) होता है, जहाँ L निलंबित बिन्दु से गोलक के द्रव्यमान केंद्र (Center of Mass) तक की प्रभावी लंबाई है।
(i) जब गोलक को पूर्णतः द्रव से भर दिया जाता है:
• गोलक पूर्णतः भरा होने के कारण उसका द्रव्यमान केंद्र ठीक उसके ज्यामितीय केंद्र पर ही रहता है।
• प्रभावी लंबाई L अपरिवर्तित रहती है।
• अतः आवर्तकाल में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
(ii) जब गोलक को आधे से अधिक द्रव से भर दिया जाता है:
• गोलक आंशिक रूप से भरा होने के कारण द्रव नीचे जमा रहता है, जिससे निकाय का द्रव्यमान केंद्र ज्यामितीय केंद्र से नीचे खिसक जाता है।
• इससे प्रभावी लंबाई L बढ़ जाती है।
• चूँकि T ∝ √(L), प्रभावी लंबाई बढ़ने से आवर्तकाल बढ़ जाएगा।
प्रश्न 1 (क).
धनात्मक तथा ऋणात्मक त्वरण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
• धनात्मक त्वरण (Positive Acceleration):
जब किसी वस्तु का वेग समय के साथ लगातार बढ़ता जाता है, तो उत्पन्न त्वरण को धनात्मक त्वरण कहते हैं। इसकी दिशा वस्तु के वेग की दिशा में होती है।
• उदाहरण: स्वतंत्र रूप से नीचे गिरती हुई वस्तु का त्वरण।
• ऋणात्मक त्वरण (Negative Acceleration / Retardation):
जब किसी वस्तु का वेग समय के साथ लगातार घटता जाता है, तो उत्पन्न त्वरण को ऋणात्मक त्वरण या मन्दन (Retardation) कहते हैं। इसकी दिशा वेग की विपरीत दिशा में होती है।
• उदाहरण: ब्रेक लगाने पर कार की गति में मन्दन।
प्रश्न 1 (ख).
संरक्षी बलों की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
संरक्षी बल (Conservative Forces) की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. पथ से स्वतंत्रता: संरक्षी बल द्वारा किसी कण को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य केवल प्रारम्भिक तथा अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, गति के पथ पर नहीं।
2. बंद पथ में कार्य शून्य: किसी बंद परिपथ (Closed Loop) में संरक्षी बल द्वारा किया गया कुल कार्य शून्य होता है ( F · d r = 0)।
3. यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण: संरक्षी बलों के अंतर्गत निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा) नियत रहती है।
4. उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण बल, स्थिर-वैद्युत बल, कमानी (स्प्रिंग) बल।
प्रश्न 1 (ग).
पलायन वेग से आप क्या समझते हैं? पृथ्वी पर पलायन वेग का मान लिखिए।
उत्तर:
• परिभाषा: पलायन वेग (Escape Velocity) वह न्यूनतम वेग है जिससे किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से ऊपर फेंकने पर वह पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र को पार कर जाती है और पृथ्वी पर पुनः लौटकर नहीं आती।
• सूत्र: v_e = √((2 G M_e)/(R_e)) = √(2 g R_e)
• पृथ्वी पर मान: पृथ्वी की सतह पर पलायन वेग का मान 11.2 km/s होता है।
प्रश्न 1 (घ).
द्रव के अन्दर h गहराई पर स्थित बिन्दु पर कुल दाब कितना होगा?
उत्तर:
यदि ρ घनत्व का द्रव स्थिर अवस्था में है और वायुमंडलीय दाब P₀ है, तो द्रव के अंदर h गहराई पर:
• गेज दाब (Gauge Pressure): P_gauge = h ρ g
• कुल दाब (Absolute Pressure):
P = P₀ + h ρ g
जहाँ:
• P₀ = वायुमंडलीय दाब
• h = द्रव सतह से गहराई
• ρ = द्रव का घनत्व
• g = गुरुत्वीय त्वरण
प्रश्न 1 (ङ).
गुप्त ऊष्मा किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार की होती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
• परिभाषा: नियत ताप पर किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान की अवस्था परिवर्तन (जैसे ठोस से द्रव या द्रव से गैस) के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) कहते हैं।
Q = m L L = (Q)/(m)
(मात्रक: J/kg या cal/g)
• प्रकार: गुप्त ऊष्मा मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
1. गलन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Fusion): नियत ताप (गलनांक) पर 1 kg ठोस को द्रव में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा। (जैसे बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा = 80 cal/g)
2. वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Vaporization): नियत ताप (क्वथनांक) पर 1 kg द्रव को वाष्प में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा। (जैसे जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा = 540 cal/g)
खण्ड—'य'
प्रश्न 2.
सिद्ध कीजिए कि प्रति सेकण्ड सुने गए विस्पन्दों की संख्या का मान दोनों ध्वनि स्रोतों की आवृत्तियों के अन्तर के बराबर होता है।
उत्तर:
विस्पन्द (Beats): जब लगभग समान आवृत्ति और समान आयाम की दो ध्वनि तरंगें एक साथ एक ही दिशा में संचरित होती हैं, तो अध्यारोपण के कारण ध्वनि की तीव्रता में क्रमिक उतार-चढ़ाव होता है। इसे विस्पन्द कहते हैं।
गणितीय निगमन:
माना दो ध्वनि तरंगों के विस्थापन समीकरण निम्नलिखित हैं:
y₁ = a (2π n₁ t)
y₂ = a (2π n₂ t)
जहाँ a आयाम तथा n₁, n₂ आवृत्तियाँ हैं (n₁ > n₂)।
अध्यारोपण के सिद्धान्त से, परिणामी विस्थापन:
y = y₁ + y₂ = a (2π n₁ t) + a (2π n₂ t)
त्रिकोणमितीय सूत्र C + D = 2 ((C+D)/(2)) ((C-D)/(2)) का प्रयोग करने पर:
y = 2a [ π (n₁ - n₂) t ] · [ π (n₁ + n₂) t ]
इसे y = A [ π (n₁ + n₂) t ] के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ परिणामी आयाम:
A = 2a [ π (n₁ - n₂) t ]
ध्वनि की अधिकतम तीव्रता (Moaxima / Waxing):
तीव्रता I ∝ A², अतः तीव्रता अधिकतम होगी जब A = ± 2a:
[ π (n₁ - n₂) t ] = ± 1
π (n₁ - n₂) t = kπ (k = 0, 1, 2, )
t = (k)/(n₁ - n₂)
अर्थात् अधिकतम तीव्रता के समय:
t = 0, (1)/(n₁ - n₂), (2)/(n₁ - n₂), दो क्रमागत अधिकतम तीव्रताओं के बीच का समयांतराल:
Δ t = (1)/(n₁ - n₂)
अतः 1 सेकंड में सुने जाने वाले विस्पन्दों की संख्या (विस्पन्द आवृत्ति N):
N = (1)/(Δ t) = n₁ - n₂
इति सिद्धम्।
प्रश्न 2 (अथवा).
वान्डर वाल्स गैस समीकरण (P + (a)/(V²))(V - b) = RT में a, b नियतांकों के मात्रक तथा विमाएँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विमीय समांगता के सिद्धान्त के अनुसार: केवल उन्हीं भौतिक राशियों को जोड़ा या घटाया जा सकता है जिनकी विमाएँ समान होती हैं।
1. नियतांक a का मात्रक एवं विमा:
[(a)/(V²)] = [P]
[a] = [P] × [V²]
दाब P की विमा = [M L⁻¹ T⁻²]
आयतन V की विमा = [L³] [V²] = [L⁶]
[a] = [M L⁻¹ T⁻²] × [L⁶] = [M L⁵ T⁻²]
• SI मात्रक: N · m⁴ / mol² (न्यूटन-मीटर⁴/मोल²)
2. नियतांक b का मात्रक एवं विमा:
[b] = [V]
[b] = [L³]
• SI मात्रक: m³ / mol (मीटर³/मोल)
प्रश्न 3.
कार्य-ऊर्जा प्रमेय का कथन लिखिए तथा इसे सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
• कथन: "किसी बल द्वारा किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य, वस्तु की गतिज ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन के बराबर होता है।"
W = Δ K = K_f - K_i = (1)/(2) m v² - (1)/(2) m u²
• उपपत्ति (Proof):
माना m द्रव्यमान की एक वस्तु प्रारम्भिक वेग u से गतिमान है। उस पर नियत बल F लगाने से विस्थापन s होता है तथा अंतिम वेग v हो जाता है।
गति के तृतीय समीकरण से:
v² = u² + 2as
2as = v² - u² a s = (v² - u²)/(2)
दोनों पक्षों में द्रव्यमान m से गुणा करने पर:
m a s = m ( (v² - u²)/(2) )
न्यूटन के द्वितीय नियमानुसार F = ma:
F · s = (1)/(2) m v² - (1)/(2) m u²
चूँकि किया गया कार्य W = F · s:
W = K_f - K_i = Δ K
इति सिद्धम्।
प्रश्न 3 (अथवा).
सरल लोलक से क्या तात्पर्य है? सरल लोलक के आवर्तकाल का व्यंजक स्थापित कीजिए।
उत्तर:
• परिभाषा: यदि किसी भारी परन्तु आकारहीन कण (गोलक) को एक ऐंठनरहित, भारहीन तथा लम्बाई में न बढ़ने वाले धागे के एक सिरे से बाँधकर किसी दृढ़ आधार से लटका दें, तो इस समायोजन को सरल लोलक कहते हैं।
• आवर्तकाल का व्यंजक:
माना m द्रव्यमान का गोलक l लम्बाई के धागे से लटका है। जब इसे साम्यावस्था से अल्प कोण θ पर विस्थापित किया जाता है:
गोलक पर कार्य करने वाले बल:
1. तनाव T' (धागे की दिशा में)
2. भार mg (ऊर्ध्वाधर नीचे)
भार mg के घटक:
• mg θ (तनाव T' को संतुलित करता है)
• mg θ (प्रत्यानयन बल प्रदान करता है)
प्रत्यानयन बल (Restoring Force):
F = -mg θ
अल्प कोण θ के लिए θ ≈ θ = (चाप)/(त्रिज्या) = (x)/(l):
F = -mg ((x)/(l))
त्वरण a = (F)/(m):
a = -((g)/(l)) x
चूँकि a ∝ -x, गति सरल आवर्त गति है।
आवर्तकाल T = 2π √((विस्थापन)/(त्वरण)) = 2π √((x)/(a)):
T = 2π √((l)/(g))
प्रश्न 4.
स्वातन्त्र्य कोटियों एवं रुद्धोष्म स्थिरांक (γ) में संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
माना किसी गैस की स्वातन्त्र्य कोटियाँ (Degrees of Freedom) f हैं।
1. ऊर्जा के समविभाजन नियमानुसार:
प्रति अणु माध्य गतिज ऊर्जा = (1)/(2) f k_B T
1 मोल गैस की आंतरिक ऊर्जा (U):
U = (1)/(2) f R T
2. स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (C_v):
C_v = (dU)/(dT) = (d)/(dT) ( (1)/(2) f R T ) = (f)/(2) R
3. स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (C_p):
मेयर सूत्र से (C_p = C_v + R):
C_p = (f)/(2) R + R = ( (f)/(2) + 1 ) R
4. रुद्धोष्म निष्पत्ति (γ):
γ = (C_p)/(C_v) = (( (f)/(2) + 1 ) R)/((f)/(2) R)
γ = 1 + (2)/(f)
निष्कर्ष: γ = 1 + (2)/(f) अथवा f = (2)/(γ - 1).
प्रश्न 4 (अथवा).
कणों के निकाय के द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना N कणों का एक निकाय है जिनके द्रव्यमान क्रमशः m₁, m₂, m₃, , m_N हैं तथा किसी स्वेच्छ मूल-बिंदु O के सापेक्ष उनके स्थिति सदिश क्रमशः r₁, r₂, r₃, , r_N हैं।
• द्रव्यमान केन्द्र (Center of Mass):
निकाय का वह बिंदु जहाँ निकाय का संपूर्ण द्रव्यमान केंद्रित माना जा सकता है, द्रव्यमान केंद्र कहलाता है।
• स्थिति सदिश ( R_cm) का व्यंजक:
R_cm = m₁ r₁ + m₂ r₂ + + m_N r_Nm₁ + m₂ + + m_N
R_cm = Σ_i=1^(N) m_i r_iΣ_i=1^(N) m_i = (1)/(M) Σ_i=1^(N) m_i r_i
जहाँ M = Σ m_i निकाय का कुल द्रव्यमान है।
• कार्तीय रूप (Cartesian Coordinates):
X_cm = (Σ m_i x_i)/(M), Y_cm = (Σ m_i y_i)/(M), Z_cm = (Σ m_i z_i)/(M)
प्रश्न 5.
पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर वृत्तीय कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए उपग्रह के कक्षीय वेग की गणना कीजिए।
उत्तर:
माना पृथ्वी का द्रव्यमान M_e, त्रिज्या R_e है। m द्रव्यमान का उपग्रह पृथ्वी सतह से h ऊँचाई पर वृत्ताकार कक्षा (त्रिज्या r = R_e + h) में v_o चाल से गति कर रहा है।
1. आवश्यक अभिकेन्द्र बल:
F_c = (m v_o²)/(r) = (m v_o²)/(R_e + h)
2. गुरुत्वाकर्षण बल (जो अभिकेन्द्र बल प्रदान करता है):
F_g = (G M_e m)/(r²) = (G M_e m)/((R_e + h)²)
3. संतुलन की स्थिति में (F_c = F_g):
(m v_o²)/(R_e + h) = (G M_e m)/((R_e + h)²)
v_o² = (G M_e)/(R_e + h)
v_o = √((G M_e)/(R_e + h))
4. गुरुत्वीय त्वरण g = (G M_e)/(R_e²) G M_e = g R_e² रखने पर:
v_o = √((g R_e²)/(R_e + h)) = R_e √((g)/(R_e + h))
प्रश्न 8.
द्रव के अविरत प्रवाह का समीकरण निगमित कीजिए।
उत्तर:
• अविरतता का सिद्धान्त (Equation of Continuity):
जब कोई आदर्श (असंपीड्य तथा अश्यान) द्रव किसी असमान परिच्छेद वाली नली में धारारेखीय प्रवाह में बहता है, तो नली के प्रत्येक परिच्छेद पर उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) तथा द्रव के वेग (v) का गुणनफल नियत रहता है।
A · v = नियतांक (Constant)
• निगमन:
माना किसी नली के दो परिच्छेद X तथा Y हैं जिनके क्षेत्रफल क्रमशः A₁ व A₂ हैं तथा वहाँ द्रव का वेग v₁ व v₂ है।
1. X सिरे पर 1 second में प्रवेश करने वाले द्रव का आयतन = A₁ v₁
X सिरे पर प्रविष्ट द्रव का द्रव्यमान = A₁ v₁ ρ₁
2. Y सिरे से 1 second में बाहर निकलने वाले द्रव का द्रव्यमान = A₂ v₂ ρ₂
3. चूँकि द्रव असंपीड्य है (ρ₁ = ρ₂ = ρ) तथा प्रवाह अपरिवर्ती है:
प्रविष्ट द्रव्यमान = निर्गत द्रव्यमान
A₁ v₁ ρ = A₂ v₂ ρ
A₁ v₁ = A₂ v₂
A · v = नियतांक
प्रश्न 8 (अथवा).
दो वेक्टर P तथा Q का परिणामी वेक्टर R है। वेक्टर Q की दिशा उलट देने पर परिणामी वेक्टर S हो जाता है, तो सिद्ध कीजिए कि—
P² + Q² = (1)/(2)(R² + S²)
उत्तर:
माना P तथा Q के बीच का कोण θ है।
1. प्रथम स्थिति में परिणामी R:
R² = P² + Q² + 2PQ θ --- (1)
2. द्वितीय स्थिति में ( Q की दिशा उलटने पर कोण 180^° - θ हो जाता है):
S² = P² + Q² + 2PQ (180^° - θ)
चूँकि (180^° - θ) = - θ:
S² = P² + Q² - 2PQ θ --- (2)
3. समीकरण (1) तथा समीकरण (2) को जोड़ने पर:
R² + S² = (P² + Q² + 2PQ θ) + (P² + Q² - 2PQ θ)
R² + S² = 2 P² + 2 Q²
R² + S² = 2(P² + Q²)
4. पुनर्व्यवस्थित करने पर:
P² + Q² = (1)/(2)(R² + S²)
इति सिद्धम्।
प्रश्न 9.
ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम की व्याख्या उचित आरेख की सहायता से कीजिए।
उत्तर:
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊष्मा व कार्य की तुल्यता बताता है, परंतु यह ऊष्मा स्थानान्तरण की दिशा की व्याख्या नहीं करता। इसके लिए द्वितीय नियम प्रस्तुत किया गया, जिसके दो प्रमुख कथन हैं:
1. केल्विन-प्लांक का कथन (Kelvin-Planck Statement):
"ऐसा कोई ऊष्मा इंजन बनाना संभव नहीं है जो चक्रीय प्रक्रम में कार्य करते हुए किसी ऊष्मा स्रोत से ऊष्मा ग्रहण करे और उसे पूर्णतः यांत्रिक कार्य में बदल दे, बिना किसी शीतल वस्तु (सिंक) को ऊष्मा निष्कासित किए।"
• अर्थात् इंजन की दक्षता η < 100% होती है।
2. क्लॉसियस का कथन (Clausius Statement):
"बिना किसी बाह्य एजेंसी की सहायता के, ऊष्मा को ठंडी वस्तु से गरम वस्तु की ओर प्रवाहित करना असंभव है।" (प्रशीतक/रेफ्रिजरेटर पर आधारित)
आरेख निरूपण:
[ उच्च ताप स्रोत (T1) ]
प्रश्न 1.
(ऊष्मा ग्रहण)
v
( इंजन / Engine ) ----> W = Q1 - Q2 (कार्य)
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 2.
(ऊष्मा निष्कासित)
v
[ निम्न ताप सिंक (T2) ]
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 9 (अथवा).
ऊर्जा के समविभाजन सिद्धान्त के आधार पर गैसों की ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्माओं के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा का समविभाजन नियम: "तापीय साम्यावस्था में किसी निकाय की कुल तापीय ऊर्जा उसकी सभी स्वातन्त्र्य कोटियों में समान रूप से विभाजित होती है तथा प्रत्येक स्वातन्त्र्य कोटि से सम्बद्ध प्रति अणु ऊर्जा (1)/(2) k_B T होती है।"
माना 1 मोल गैस की स्वातन्त्र्य कोटियाँ f हैं।
1. कुल आंतरिक ऊर्जा (U):
U = N_A × ( f · (1)/(2) k_B T ) = (1)/(2) f R T ( N_A k_B = R)
2. स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (C_v):
C_v = (dU)/(dT) = (d)/(dT)( (1)/(2) f R T ) = (f)/(2) R
3. स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा (C_p):
मेयर के सूत्र C_p - C_v = R से:
C_p = C_v + R = (f)/(2) R + R = ( (f)/(2) + 1 ) R
विभिन्न गैसों के लिए मान:
• एकपरमाणुक गैस (f = 3):
C_v = (3)/(2) R, C_p = (5)/(2) R, γ = (C_p)/(C_v) = (5)/(3) ≈ 1.67
• द्विपरमाणुक गैस (f = 5):
C_v = (5)/(2) R, C_p = (7)/(2) R, γ = (7)/(5) = 1.40