खण्ड-अ [ वस्तुनिष्ठ प्रश्न ]
Solution
UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2026 A Code
कक्षा 11वीं · रसायन विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
निम्न में से कौन-से परमाणु क्रमांक वाले तत्वों का युग्म S-ब्लॉक तत्वों को दर्शाता है ?
(a) 7, 15
(b) 6, 12
(c) 9, 17
(d) 3, 4
उत्तर:
. (d) 3, 4
[स्पष्टीकरण: Li (Z=3, 1s² 2s¹) तथा Be (Z=4, 1s² 2s²) दोनों s-ब्लॉक के तत्व हैं।]
प्रश्न 1(ख).
1.7 ग्राम अमोनिया गैस में अमोनिया के मोलों की संख्या है-
(a) 1
(b) 0.01
(c) 0.1
(d) 0.5
उत्तर:
. (c) 0.1
[गणना: NH₃ का मोलर द्रव्यमान = 17 g/mol; मोल (n) = 1.7 / 17 = 0.1 मोल]
प्रश्न 1(ग).
सही सम्बन्ध चुनिए -
(a) Q_p = -ΔH
(b) Q_v = ΔH
(c) Q_p = ΔE
(d) Q_v = ΔE
उत्तर:
. (d) Q_v = ΔE
[स्पष्टीकरण: स्थिर आयतन पर अवशोषित ऊष्मा (Q_v) आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (ΔE) के बराबर होती है।]
प्रश्न 1(घ).
0.001 N-H₂SO₄ विलयन की pH होगी -
(a) 2
(b) 6
(c) 13
(d) 3
उत्तर:
. (d) 3
[गणना: [H⁺] = 0.001 N = 10⁻³ N; pH = -log[H⁺] = -log(10⁻³) = 3]
प्रश्न 1(ङ).
स्थान समावयवता प्रदर्शित करते हैं-
(a) ऐल्केन
(b) ऐल्कीन
(c) ऐल्डिहाइड
(d) मोनो कार्बोक्सिलिक अम्ल
उत्तर:
. (b) ऐल्कीन
[स्पष्टीकरण: ऐल्कीन में द्वि-आबंध का स्थान बदलकर स्थान समावयवता दर्शाई जा सकती है, जैसे ब्यूिट-1-ईन तथा ब्यूिट-2-ईन।]
प्रश्न 1(च).
बेन्जीन पर सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन की अभिक्रिया से बनता है -
(a) पिक्रिक अम्ल
(b) क्लोरोपिक्रिन
(c) नाइट्रोमेथेन
(d) गैमेक्सीन
उत्तर:
. (d) गैमेक्सीन
[स्पष्टीकरण: C₆H₆ + 3Cl₂ --(hν)--> C₆H₆Cl₆ (गैमेक्सीन / बेन्जीन हेक्साक्लोराइड)]
खण्ड-ख [ वर्णनात्मक प्रश्न ]
प्रश्न 2(क).
डाल्टन का परमाणुवाद क्या है ?
उत्तर:
.
डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त के मुख्य बिन्दु निम्नलिखित हैं:
1. प्रत्येक पदार्थ अत्यंत सूक्ष्म और अविभाज्य कणों से मिलकर बना है जिन्हें 'परमाणु' कहते हैं।
2. एक ही तत्व के सभी परमाणु आकार, द्रव्यमान तथा गुणों में पूर्णतः समान होते हैं।
3. भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु रासायनिक अभिक्रियाओं में सरल पूर्णांक अनुपात में संयोग करके यौगिक अणु बनाते हैं।
प्रश्न 2(ख).
द्विगंशी क्वाण्टम संख्या किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
वह क्वाण्टम संख्या जो उपकोश (Subshell) की आकृति तथा इलेक्ट्रॉन के कक्षकीय कोणीय संवेग को प्रदर्शित करती है, उसे द्विगंशी क्वाण्टम संख्या (Azimuthal Quantum Number) कहते हैं। इसे 'l' से प्रदर्शित किया जाता है। इसके मान 0 से (n-1) तक होते हैं (जहाँ n मुख्य क्वाण्टम संख्या है)।
प्रश्न 2(ग).
[Ni(CO)₄] में Ni की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
मान लीजिए Ni की ऑक्सीकरण संख्या = x
चूँकि CO एक उदासीन लिगैंड है, अतः CO का आवेश = 0
x + 4(0) = 0
x + 0 = 0
x = 0
अतः [Ni(CO)₄] में Ni की ऑक्सीकरण संख्या 0 है।
प्रश्न 2(घ).
स्थान समावयवता को उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
.
जब दो या दो से अधिक यौगिकों के अणुसूत्र समान हों, परंतु उनमें उपस्थित क्रियात्मक समूह, द्वि-आबंध या त्रि-आबंध की स्थान (Position) भिन्न-भिन्न हो, तो उन्हें स्थान समावयवी कहते हैं।
उदाहरण: C₄H₈ के समावयवी-
1. CH₃-CH₂-CH=CH₂ (ब्यूिट-1-ईन)
2. CH₃-CH=CH-CH₃ (ब्यूिट-2-ईन)
प्रश्न 3(क).
रासायनिक साम्य के दो लक्षण लिखिए।
उत्तर:
.
1. रासायनिक साम्य एक गतिज (Dynamic) अवस्था है, जिसमें अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग परस्पर बराबर होते हैं।
2. साम्यावस्था केवल बंद पात्र में ही प्राप्त की जा सकती है तथा इस पर उत्प्रेरक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
प्रश्न 3(ख).
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम लिखिए।
उत्तर:
.
केल्विन-प्लांक के अनुसार: "ऐसी कोई मशीन बनाना संभव नहीं है जो चक्रीय प्रक्रिया में कार्य करते हुए किसी एक ही ऊष्मा स्रोत से ऊष्मा लेकर उसे पूर्णतः कार्य में बदल दे, बिना किसी अन्य निकाय में परिवर्तन किए।"
(अथवा क्लॉसियस के अनुसार: ऊष्मा स्वयं कम ताप वाली वस्तु से अधिक ताप वाली वस्तु की ओर प्रवाहित नहीं हो सकती।)
प्रश्न 3(ग).
दो p-ब्लॉक तत्वों के नाम तथा सूत्र लिखिए।
उत्तर:
.
1. नाइट्रोजन (Nitrogen) - N
2. ऑक्सीजन (Oxygen) - O
प्रश्न 3(घ).
CH₂=CH₂ का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
. Eth-1-ene (एथीन)
प्रश्न 4(क).
(i). विलयन ऊष्मा पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
स्थिर ताप और दाब पर जब एक मोल पदार्थ को विलायक की इतनी मात्रा में घोला जाता है कि और अधिक विलायक मिलाने पर कोई ऊष्मा परिवर्तन न हो, तो इस प्रक्रिया में होने वाले एनैल्पी परिवर्तन को 'विलयन ऊष्मा' (Heat of Solution) कहते हैं।
प्रश्न 4(क).
(ii). उदासीनीकरण ऊष्मा पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
तनुकृत विलयन में 1 ग्राम तुल्यांक अम्ल को 1 ग्राम तुल्यांक क्षार द्वारा पूर्णतः उदासीन करने पर मुक्त होने वाली ऊष्मा को 'उदासीनीकरण ऊष्मा' कहते हैं। प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के लिए इसका मान सदैव -57.1 kJ (या -13.7 kcal) होता है।
प्रश्न 4(ख).
क्रोमेटोग्राफी का एक उदाहरण देते हुए इसके सिद्धान्त का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
.
• सिद्धान्त: क्रोमेटोग्राफी (वर्णलेखन) अधिशोषण या वितरण के भिन्न-भिन्न अनुपातों पर आधारित पृथक्कीकरण की तकनीक है। इसमें एक स्थिर प्रावस्था (Stationary Phase) तथा एक गतिमान प्रावस्था (Mobile Phase) होती है। मिश्रण के घटक गतिमान प्रावस्था के साथ प्रवाहित होते समय स्थिर प्रावस्था पर अपनी भिन्न-भिन्न अधिशोषण क्षमता के कारण अलग-अलग दरों पर गति करते हैं और पृथक हो जाते हैं।
• उदाहरण: स्तंभ क्रोमेटोग्राफी (Column Chromatography) या कागज़ क्रोमेटोग्राफी (Paper Chromatography) द्वारा पौधों के निष्कर्षण से वर्णकों (जैसे क्लोरोफिल, कैरोटीन) को पृथक करना।
प्रश्न 4(ग).
(i). आयनन विभव पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
किसी गैसीय पृथक्कृत उदासीन परमाणु के बाह्यतम कोश से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को 'आयनन विभव' (Ionization Potential) या आयनन एनैल्पी कहते हैं। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर इसका मान बढ़ता है तथा वर्ग में नीचे जाने पर घटता है।
प्रश्न 4(ग).
(ii). इलेक्ट्रॉन बन्धुता पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
किसी गैसीय पृथक्कृत उदासीन परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाने में मुक्त होने वाली ऊर्जा को उसकी 'इलेक्ट्रॉन बन्धुता' (Electron Affinity) कहते हैं। आवर्त सारणी में हैलोजन (जैसे Cl) की इलेक्ट्रॉन बन्धुता सर्वाधिक होती है।
प्रश्न 4(घ).
4.4 ग्राम CO₂ में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
1. CO₂ का मोलर द्रव्यमान = 12 + 2(16) = 44 g/mol
2. CO₂ के मोलों की संख्या = 4.4 g / 44 g/mol = 0.1 मोल
3. CO₂ अणुओं की संख्या = 0.1 × 6.022 × 10²³ = 6.022 × 10²² अणु
4. 1 अणु CO₂ में 2 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं।
अतः, O-परमाणुओं की संख्या = 2 × 6.022 × 10²² = 1.2044 × 10²³ परमाणु
प्रश्न 5(क).
सह संयोजी यौगिकों के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
.
1. ये यौगिक इलेक्ट्रॉनों की समान साझेदारी से बनते हैं।
2. इनके गलनांक और क्वथनांक आयनिक यौगिकों की तुलना में कम होते हैं।
3. ये सामान्यतः जल (ध्रुवीय विलायक) में अविलेय तथा कार्बनिक विलायकों (अध्रुवीय) में विलेय होते हैं।
4. गलित अवस्था या जलीय विलयन में ये विद्युत के कुचालक होते हैं (आयन न होने के कारण)।
प्रश्न 5(ख).
(i). CH₃-O-CH₃ का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
. Methoxymethane (मेथॉक्सीमेथेन)
प्रश्न 5(ख).
(ii). CH₃COOCH₃ का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
. Methyl ethanoate (मेथिल एथेनोएट)
प्रश्न 5(ख).
(iii). CH₃-CO-CH₂-CH₃ का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
. Butan-2-one (ब्यूटेन-2-ऑन)
प्रश्न 5(ख).
(iv). CH₃-CH₂-COCl का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
. Propanoyl chloride (प्रोपेनॉयल क्लोराइड)
प्रश्न 5(ग).
20°C पर PbSO₄ की जल में विलेयता 0.0303 ग्राम/लीटर है। इसी ताप पर इसके विलेयता गुणनफल की गणना कीजिए। (PbSO₄ का अणुभार 303 है)
उत्तर:
.
1. मोलेरिटी में विलेयता (s) = 0.0303 g/L / 303 g/mol = 1 × 10⁻⁴ मोल/लीटर
2. PbSO₄ ⇌ Pb²⁺ + SO₄²⁻
K_sp = [Pb²⁺] [SO₄²⁻] = s × s = s²
3. K_sp = (1 × 10⁻⁴)² = 1 × 10⁻⁸ मोल²/लीटर²
प्रश्न 5(घ).
कोश तथा कक्षक में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. कोश (Orbit):
• यह नाभिक के चारों ओर का वह निश्चित वृत्ताकार पथ है जिसमें इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते हैं।
• इसे 2n² द्वारा दर्शाया जाता है।
• इसकी आकृति केवल वृत्ताकार होती है।
2. कक्षक (Orbital):
• यह नाभिक के चारों ओर का वह त्रिआयामी (3D) क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन पाए जाने की प्रायिकता अधिकतम होती है।
• एक कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन (विपरीत चक्रण के) रह सकते हैं।
• इनकी आकृतियाँ भिन्न-भिन्न होती हैं (s-गोलाकार, p-डंबलाकार आदि)।
प्रश्न 6(क).
ओस्टवाल्ड के तनुता नियम का उल्लेख कीजिए एवं इसका सूत्र निर्धारित कीजिए।
उत्तर:
.
• नियम: ओस्टवाल्ड के तनुता नियम के अनुसार, "किसी दुर्बल वैद्युत अपघट्य के वियोजन की मात्रा (α) उसकी तनुता (V) के वर्गमूल के समानुपाती होती है, या उसकी सांद्रता (C) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।"
• व्युत्पत्ति:
माना एक दुर्बल एक-क्षारीय अम्ल HA का प्रारंभिक सांद्रण C मोल/लीटर है और वियोजन की मात्रा α है:
HA ⇌ H⁺ + A⁻
प्रारंभ में: C 0 0
साम्य पर: C(1-α) Cα Cα
साम्य स्थिरांक K_a = [H⁺] [A⁻] / [HA]
K_a = (Cα × Cα) / [C(1-α)] = C α² / (1 - α)
चूँकि दुर्बल अपघट्य के लिए α << 1 होता है, अतः (1 - α) ≈ 1
K_a = C α² ⇒ α = √(K_a / C)
यदि V = 1/C (तनुता) हो, तो α = √(K_a × V)
अथवा
प्रश्न 6(क).
कक्षकों के संकरण से क्या अभिप्राय है ? किसी एक संकरण को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
.
• संकरण (Hybridization): जब लगभग समान ऊर्जा वाले दो या दो से अधिक परमाण्विक कक्षक आपस में मिलकर समान ऊर्जा और समान आकृति के उतने ही नए कक्षक बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।
• उदाहरण (sp³ संकरण):
जब एक s-कक्षक और तीन p-कक्षक मिलकर 4 नए sp³ संकरित कक्षक बनाते हैं, तो इसे sp³ संकरण कहते हैं।
उदा: मेथेन (CH₄) अणु में केंद्रीय कार्बन परमाणु sp³ संकरित होता है। इसकी आकृति चतुष्फलकीय (Tetrahedral) होती है तथा बंध कोण 109°28' होता है।
प्रश्न 6(ख).
हैस के स्थिर ऊष्मा संकलन के नियम की व्याख्या कीजिए। इस नियम के कुछ प्रमुख अनुप्रयोगों को समझाइए।
उत्तर:
.
• हैस का नियम: "यदि कोई रासायनिक परिवर्तन एक पद में हो या कई पदों में, संपूर्ण प्रक्रिया में होने वाला कुल एनैल्पी/ऊष्मा परिवर्तन सदैव समान रहता है।"
A → Z : ΔH
A → B → C → Z : ΔH₁ + ΔH₂ + ΔH₃
अतः ΔH = ΔH₁ + ΔH₂ + ΔH₃
• प्रमुख अनुप्रयोग:
1. उन अभिक्रियाओं की सम्भवन ऊष्मा / दहन ऊष्मा की गणना करना जो प्रत्यक्ष रूप से प्रयोगशाला में ज्ञात नहीं की जा सकतीं।
2. मंद अभिक्रियाओं के ऊष्मा परिवर्तन की गणना करना।
3. एलोट्रॉपिक परिवर्तनों (जैसे ग्रेफाइट से हीरा) की ऊष्मा ज्ञात करना।
अथवा
प्रश्न 6(ख).
नाभिक स्नेही अभिकर्मक को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
• नाभिक स्नेही अभिकर्मक (Nucleophilic Reagents / Nucleophiles): वे इलेक्ट्रॉन-धनी अभिकर्मक होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की क्षमता रखते हैं और अणु के धन-आवेशित केंद्र (नाभिक) पर आक्रमण करते हैं। इन्हें Nu⁻ से प्रदर्शित किया जाता है। ये लुईस क्षार की भाँति कार्य करते हैं।
• उदाहरण:
1. ऋणावेशित आयन: OH⁻, CN⁻, Cl⁻, Br⁻, RO⁻
2. एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म युक्त उदासीन अणु: NH₃, H₂O, R-OH, R-NH₂
प्रश्न 7(क).
समावयवता किसे कहते हैं। विभिन्न प्रकार की समावयवता का वर्णन उदाहरण द्वारा कीजिए।
उत्तर:
.
• परिभाषा: वे यौगिक जिनके अणुसूत्र समान होते हैं, परंतु उनके भौतिक और रासायनिक गुण भिन्न-भिन्न होते हैं, समावयवी कहलाते हैं और इस परिघटना को समावयवता (Isomerism) कहते हैं।
• समावयवता के प्रकार:
1. संरचनात्मक समावयवता (Structural Isomerism):
• श्रृंखला समावयवता: CH₃-CH₂-CH₂-CH₃ (ब्यूटेन) तथा CH₃-CH(CH₃)-CH₃ (2-मेथिलप्रोपेन)।
• स्थान समावयवता: ब्यूिट-1-ईन तथा ब्यूिट-2-ईन।
• क्रियात्मक समूह समावयवता: C₂H₆O से C₂H₅OH (एल्कोहॉल) तथा CH₃-O-CH₃ (ईथर)।
2. त्रिविम समावयवता (Stereoisomerism):
• ज्यामितीय समावयवता: सिस-ब्यूिट-2-ईन तथा ट्रांस-ब्यूिट-2-ईन।
• प्रकाशिक समावयवता: लैक्टिक अम्ल (d- और l- रूप)।
अथवा
प्रश्न 7(क).
(i). प्रेरणिक प्रभाव पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
जब किसी कार्बन श्रृंखला में कोई इलेक्ट्रॉन-आकर्षी या इलेक्ट्रॉन-प्रतिकर्षी समूह जुड़ा होता है, तो σ-बॉन्ड के इलेक्ट्रॉनों का एक दिशा में आंशिक विस्थापन हो जाता है। इसे प्रेरणिक प्रभाव (Inductive Effect) कहते हैं। यह एक स्थाई प्रभाव है।
• -I प्रभाव: -NO₂, -CN, -Cl (इलेक्ट्रॉन खींचते हैं)।
• +I प्रभाव: -CH₃, -C₂H₅ (इलेक्ट्रॉन धकेलते हैं)।
प्रश्न 7(क).
(ii). इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
किसी बहु-आबंध (द्वि-आबंध या त्रि-आबंध) युक्त यौगिक पर जब कोई आक्रमणकारी अभिकर्मक (Reagent) आता है, तो π-इलेक्ट्रॉन युग्म किसी एक परमाणु पर पूरी तरह स्थानांतरित हो जाता है। इसे इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव (+E / -E) कहते हैं। यह एक अस्थायी प्रभाव है जो अभिकर्मक की उपस्थिति में ही होता है।
प्रश्न 7(ख).
ऑफबाऊ सिद्धान्त क्या है ? इस सिद्धान्त की सहायता से विभिन्न कक्षकों की ऊर्जा का क्रम कैसे जानेंगे ?
उत्तर:
.
• ऑफबाऊ सिद्धान्त: जर्मन भाषा के शब्द 'आफबाऊ' का अर्थ है 'रचना करना'। इस सिद्धान्त के अनुसार, परमाणुओं के कक्षकों में इलेक्ट्रॉन उनकी ऊर्जा के बढ़ते क्रम में प्रवेश करते हैं।
• ऊर्जा का क्रम (n+l नियम):
1. जिस कक्षक के लिए (n + l) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा कम होती है।
2. यदि दो कक्षकों के लिए (n + l) का मान समान हो, तो जिसके लिए मुख्य क्वांटम संख्या (n) का मान कम होगा, उसकी ऊर्जा कम होगी।
कक्षकों की ऊर्जा का क्रम:
1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s < 4d < 5p < 6s...
अथवा
प्रश्न 7(ख).
निम्न की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए-
(i) K₂CrO₄ में Cr की
(ii) NaOCl में Cl की
(iii) NO₃⁻ में N की
(iv) HPO₃²⁻ में P की
(v) H₂S₂O₈ में S की
उत्तर:
.
(i) K₂CrO₄ में Cr की:
2(+1) + x + 4(-2) = 0 ⇒ 2 + x - 8 = 0 ⇒ x = +6
(ii) NaOCl में Cl की:
(+1) + (-2) + x = 0 ⇒ -1 + x = 0 ⇒ x = +1
(iii) NO₃⁻ में N की:
x + 3(-2) = -1 ⇒ x - 6 = -1 ⇒ x = +5
(iv) HPO₃²⁻ में P की:
(+1) + x + 3(-2) = -2 ⇒ 1 + x - 6 = -2 ⇒ x = +3
(v) H₂S₂O₈ में S की:
इस यौगिक में पेरोक्साइड आबंध (-O-O-) की उपस्थिति के कारण 2 ऑक्सीजन परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या -1 तथा शेष 6 की -2 होती है:
2(+1) + 2(x) + 6(-2) + 2(-1) = 0
2 + 2x - 12 - 2 = 0 ⇒ 2x = 12 ⇒ x = +6