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UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2026 SET 2

कक्षा 11वीं · रसायन विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1(क).

अनिश्चितता के सिद्धान्त के अनुसार-

(i) Δx × Δp = h / (6π)

(ii) E = mc²

(iii) λ = h / p

(iv) Δx × Δp ≥ h / (4π)

उत्तर:

. (iv) Δx × Δp ≥ h / (4π)

प्रश्न 1(ख).

1s² इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाला तत्व उपस्थित होगा-

(i) s-ब्लॉक में

(ii) p-ब्लॉक में

(iii) d-ब्लॉक में

(iv) f-ब्लॉक में

उत्तर:

. (i) s-ब्लॉक में

प्रश्न 1(ग).

20°C पर AgCl की विलेयता 1 × 10⁻⁵ मोल/लीटर है। AgCl का विलेयता गुणनफल होगा-

(i) 10⁻¹⁰

(ii) 1.435 × 10⁻³

(iii) 2 × 10⁻⁵

(iv) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

. (i) 10⁻¹⁰

[गणना: Ksp = s² = (1 × 10⁻⁵)² = 10⁻¹⁰]

प्रश्न 1(घ).

निम्न में से कौन-सी धातु एक से अधिक ऑक्सीकरण अवस्था प्रकट करती है?

(i) Na

(ii) Mg

(iii) Al

(iv) Fe

उत्तर:

. (iv) Fe

प्रश्न 1(ङ).

C₃H₆O प्रदर्शित करता है-

(i) मध्यावयवता

(ii) क्रियात्मक समूह समावयवता

(iii) स्थान समावयवता

(iv) चलावयवता

उत्तर:

. (ii) क्रियात्मक समूह समावयवता

प्रश्न 1(च).

कौन-सा यौगिक जल-अपघटन पर मेथेन देता है?

(i) CaC₂

(ii) CH₃Br

(iii) Al₄C₃

(iv) C₂H₅MgBr

उत्तर:

. (iii) Al₄C₃

प्रश्न 2(क).

CaCO₃ के 20 ग्राम में मोलों की संख्या की गणना कीजिए।

उत्तर:

.

CaCO₃ का मोलर द्रव्यमान = 40 + 12 + (3 × 16) = 100 g/mol

मोलों की संख्या (n) = भार / मोलर द्रव्यमान

n = 20 g / 100 g/mol = 0.2 मोल

प्रश्न 2(ख).

आयनिक समीकरण Br₂ + OH⁻ → Br⁻ + BrO₃⁻ + H₂O में ऑक्सीकारक तथा अपचायक बताइए।

उत्तर:

.

इस अभिक्रिया में Br₂ का अपचयन Br⁻ में (ऑक्सीकरण संख्या 0 से -1) तथा ऑक्सीकरण BrO₃⁻ में (ऑक्सीकरण संख्या 0 से +5) होता है।

• ऑक्सीकारक: Br₂

• अपचायक: Br₂

(यह एक असमानुपातन या Disproportionation अभिक्रिया है।)

प्रश्न 2(ग).

साम्य स्थिरांक को परिभाषित कीजिए।

उत्तर:

.

किसी उत्क्रमणीय रासायनिक अभिक्रिया में स्थिर ताप पर, अग्र अभिक्रिया के वेग स्थिरांक (K_f) और पश्च अभिक्रिया के वेग स्थिरांक (K_b) के अनुपात को साम्य स्थिरांक (K_eq) कहते हैं।

प्रश्न 2(घ).

बॉयर अभिकर्मक क्या है? इसका उपयोग किस प्रकार के यौगिकों की पहचान करने में किया जाता है?

उत्तर:

.

• बॉयर अभिकर्मक: 1% ठंडा तथा क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) का विलयन बॉयर अभिकर्मक कहलाता है।

• उपयोग: इसका उपयोग कार्बनिक यौगिकों में असंतृप्तता (द्वि-आबंध अथवा त्रि-आबंध, जैसे एल्कीन और एल्काइन) की पहचान करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 3(क).

कक्ष और कक्षक पदों में क्या विभिन्नता है?

उत्तर:

.

1. कक्ष (Orbit): यह नाभिक के चारों ओर का वह निश्चित वृत्ताकार पथ है जिसमें इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते हैं।

2. कक्षक (Orbital): यह नाभिक के चारों ओर का वह त्रिआयामी (3D) क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन पाए जाने की प्रायिकता (संभावना) अधिकतम होती है।

प्रश्न 3(ख).

NH₃ की आकृति किस प्रकार की होती है?

उत्तर:

.

अमोनिया (NH₃) अणु की आकृति त्रिकोणीय पिरामिडी (Trigonal Pyramidal) होती है। इसका संकरण sp³ होता है तथा एक एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) की उपस्थिति के कारण इसकी आकृति विकृत पिरामिडी हो जाती है।

प्रश्न 3(ग).

एन्ट्रॉपी को परिभाषित कीजिए।

उत्तर:

.

एन्ट्रॉपी किसी ऊष्मागतिकीय निकाय (system) में उपस्थित अव्यवस्था (randomness or disorder) की माप है। इसे 'S' से प्रदर्शित किया जाता है। निकाय की अव्यवस्था बढ़ने पर एन्ट्रॉपी का मान बढ़ता है।

प्रश्न 3(घ).

दो संक्रमण तत्वों के नाम तथा सूत्र लिखिए।

उत्तर:

.

1. आयरन (Iron) - Fe

2. कॉपर (Copper) - Cu

प्रश्न 4(क).

ऑक्सीकरण तथा अपचयन अभिक्रियाओं में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. ऑक्सीकरण (Oxidation):

• इसमें ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का निष्कासन होता है।

• इसमें इलेक्ट्रॉन का त्याग (Loss of electrons) होता है।

• ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि होती है।

2. अपचयन (Reduction):

• इसमें हाइड्रोजन का योग या ऑक्सीजन का निष्कासन होता है।

• इसमें इलेक्ट्रॉन का ग्रहण (Gain of electrons) होता है।

• ऑक्सीकरण संख्या में कमी होती है।

प्रश्न 4(ख).

प्रेरणिक प्रभाव पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

जब किसी कार्बन श्रृंखला में कोई इलेक्ट्रॉन-आकर्षी (EWG) या इलेक्ट्रॉन-प्रतिकर्षी (ERG) समूह जुड़ता है, तो σ-बॉन्ड के इलेक्ट्रॉनों का एक दिशा में आंशिक विस्थापन हो जाता है। इस प्रभाव को प्रेरणिक प्रभाव (Inductive Effect) कहते हैं।

• -I प्रभाव: NO₂, Cl, F आदि इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूहों द्वारा प्रदर्शित होता है।

• +I प्रभाव: -CH₃, -C₂H₅ आदि एल्किल समूहों द्वारा प्रदर्शित होता है।

प्रश्न 4(ग).

(i). सम्भवन ऊष्मा पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

स्थिर ताप तथा दाब पर किसी यौगिक के एक मोल को उसके घटक तत्वों से मानक अवस्था में बनाने में होने वाले एनैल्पी परिवर्तन को उसकी सम्भवन ऊष्मा (Heat of Formation) कहते हैं।

प्रश्न 4(ग).

(ii). उदासीनीकरण ऊष्मा पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

तनुकृत विलयन में 1 ग्राम तुल्यांक अम्ल को 1 ग्राम तुल्यांक क्षार द्वारा पूर्णतः उदासीन करने पर मुक्त हुई ऊष्मा को उदासीनीकरण ऊष्मा (Heat of Neutralization) कहते हैं। तीव्र अम्ल तथा तीव्र क्षार के लिए इसका मान सदैव -57.1 kJ (-13.7 kcal) होता है।

प्रश्न 4(घ).

3.6 Å तरंगदैर्ध्य लम्बाई वाले एक फोटॉन के द्रव्यमान की गणना कीजिए।

उत्तर:

.

λ = 3.6 Å = 3.6 × 10⁻¹⁰ m

h = 6.626 × 10⁻³⁴ kg m² s⁻¹

c = 3 × 10⁸ m s⁻¹

डी-ब्रोग्ली सूत्र से, λ = h / (m × c) ⇒ m = h / (λ × c)

m = (6.626 × 10⁻³⁴) / (3.6 × 10⁻¹⁰ × 3 × 10⁸)

m = 6.626 × 10⁻³⁴ / 1.08 × 10⁻1

m = 6.135 × 10⁻³³ kg

प्रश्न 5(क).

वैद्युत संयोजी यौगिकों के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

वैद्युत संयोजी (आयनिक) यौगिकों के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

1. ये यौगिक विपरीत आवेशित आयनों के बीच तीव्र स्थिर-वैद्युत आकर्षण बल द्वारा जुड़े होते हैं।

2. इनके गलनांक (Melting Point) तथा क्वथनांक (Boiling Point) अति उच्च होते हैं।

3. ये सामान्यतः ठोस तथा कठोर होते हैं।

4. ये गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत के सुचालक होते हैं।

5. ये जल जैसे ध्रुवीय विलायकों में विलेय तथा अध्रुवीय विलायकों में अविलेय होते हैं।

प्रश्न 5(ख).

वेग स्थिरांक तथा साम्य स्थिरांक में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. वेग स्थिरांक (Rate Constant):

• यह किसी अभिक्रिया की दर और अभिकारकों की सांद्रता के बीच का संबंध स्थिरांक है।

• यह केवल अग्र या पश्च अभिक्रिया के वेग को दर्शाता है।

• इसका मान केवल ताप पर निर्भर करता है।

2. साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant):

• यह अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग स्थिरांकों का अनुपात (K_f / K_b) है।

• यह साम्यावस्था पर उत्पादों और अभिकारकों की सांद्रता के अनुपात को दर्शाता है।

• इसका मान ताप तथा अभिक्रिया की स्टॉइकीयोमीट्री पर निर्भर करता है।

प्रश्न 5(ग).

(i). CH₃-CH₂-CO-Cl का IUPAC नाम लिखिए।

उत्तर:

. Propanoyl chloride (प्रोपेनॉयल क्लोराइड)

प्रश्न 5(ग).

(ii). CH₃-CH₂-CH₂OH का IUPAC नाम लिखिए।

उत्तर:

. Propan-1-ol (प्रोपेन-1-ऑल)

प्रश्न 5(ग).

(iii). C₂H₅OC₂H₅ का IUPAC नाम लिखिए।

उत्तर:

. Ethoxyethane (इथॉक्सीएथेन)

प्रश्न 5(ग).

(iv). CH₃-CH₂NH₂ का IUPAC नाम लिखिए।

उत्तर:

. Ethanamine (एथेनामीन)

प्रश्न 5(घ).

ओजोनीकरण से आप क्या समझते हैं? एक उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

.

जब किसी असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे एल्कीन) की अभिक्रिया ओजोन (O₃) के साथ कराई जाती है, तो ओजोनाइड (Ozonide) बनता है। इस ओजोनाइड का जस्ता (Zn) और जल (H₂O) की उपस्थिति में अपचयन कराने पर कार्बोनिल यौगिक (एल्डिहाइड या कीटोन) प्राप्त होते हैं। इस प्रक्रिया को ओजोनीकरण (Ozonolysis) कहते हैं।

उदाहरण:

एथीन (CH₂=CH₂) ओजोन के साथ क्रिया करके एथीन ओजोनाइड बनाता है, जो Zn/H₂O से अपघटित होकर फॉर्मैल्डिहाइड (HCHO) के दो अणु देता है।

CH₂=CH₂ + O₃ → C₂H₄O₃ (ओजोनाइड) --(Zn/H₂O)--> 2 HCHO + H₂O₂

प्रश्न 6(क).

सिग्मा तथा पाई आबन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर:

.

1. सिग्मा (σ) आबन्ध:

यह आबन्ध दो परमाण्विक कक्षकों के उनके अक्षों पर एक-दूसरे के सिरों (Head-on overlap) से अतिव्यापन के कारण बनता है। यह एक मजबूत आबन्ध होता है।

उदाहरण: H₂ अणु में 1s-1s कक्षकों के अतिव्यापन से σ-आबन्ध बनता है।

2. पाई (π) आबन्ध:

यह आबन्ध दो परमाण्विक कक्षकों के पाशर्विक (Sideways or Lateral overlap) अतिव्यापन के कारण बनता है। यह एक कमजोर आबन्ध होता है।

उदाहरण: एथीन (CH₂=CH₂) अणु में एक σ-आबन्ध और एक π-आबन्ध उपस्थित होता है।

अथवा

प्रश्न 6(क).

सम तथा विषम विदलन को उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर:

.

1. सम विदलन (Homolytic Fission):

जब सहसंयोजक आबन्ध इस प्रकार टूटता है कि आबन्ध के दोनों इलेक्ट्रॉन दोनों आबंधित परमाणुओं पर समान रूप से एक-एक बँट जाते हैं, तो इसे सम विदलन कहते हैं। इससे 'मुक्त मूलक' (Free Radicals) बनते हैं।

उदाहरण: Cl - Cl --(प्रकाश)--> Cl• + Cl•

2. विषम विदलन (Heterolytic Fission):

जब सहसंयोजक आबन्ध इस प्रकार टूटता है कि आबन्ध का इलेक्ट्रॉन युग्म किसी एक ही अधिक विद्युतऋणात्मक परमाणु पर चला जाता है, तो इसे विषम विदलन कहते हैं। इससे धनायन तथा ऋणायन बनते हैं।

उदाहरण: CH₃ - Cl → CH₃⁺ + Cl⁻

प्रश्न 6(ख).

वैद्युत वियोजन (आयनन) सिद्धान्त को समझाइए।

उत्तर:

.

आर्हेनियस के वैद्युत वियोजन सिद्धान्त की मुख्य अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं:

1. जब किसी वैद्युत अपघट्य को जल या ध्रुवीय विलायक में घोला जाता है, तो वह दो प्रकार के आवेशित कणों में विभक्त हो जाता है जिन्हें आयन कहते हैं (धनायन तथा ऋणायन)।

2. विलयन में उपस्थित कुल धनावेशों की संख्या कुल ऋणावेशों की संख्या के बराबर होती है, जिससे विलयन विद्युत उदासीन रहता है।

3. आयनन एक उत्क्रमणीय प्रक्रिया है और अनावेशित अणुओं तथा आयनों के मध्य एक साम्यावस्था स्थापित हो जाती है।

4. पदार्थ के भौतिक एवं रासायनिक गुण उसके विलयन में उपस्थित आयनों पर निर्भर करते हैं।

अथवा

प्रश्न 6(ख).

निम्नलिखित समीकरण को ऑक्सीकरण संख्या विधि द्वारा सन्तुलित कीजिए-

Cr₂O₇²⁻ + I⁻ + H⁺ → Cr³⁺ + I₂ + H₂O

उत्तर:

.

सन्तुलित समीकरण प्राप्त करने के चरण:

1. Cr₂O₇²⁻ में Cr की ऑक्सीकरण संख्या +6 से घटकर +3 होती है (कमी = 3 प्रति atom, कुल कमी = 6)।

2. I⁻ में I की ऑक्सीकरण संख्या -1 से बढ़कर 0 होती है (वृद्धि = 1 प्रति atom, 2 I⁻ से I₂ बनने पर वृद्धि = 2)।

3. इलेक्ट्रॉन संतुलन के लिए I⁻ पद को 3 से गुणा करते हैं:

Cr₂O₇²⁻ + 6 I⁻ + H⁺ → 2 Cr³⁺ + 3 I₂ + H₂O

4. O और H परमाणु संतुलित करने पर:

Cr₂O₇²⁻ + 6 I⁻ + 14 H⁺ → 2 Cr³⁺ + 3 I₂ + 7 H₂O

प्रश्न 7(क).

अभिक्रिया C(s) + 2H₂(g) → CH₄(g) की सम्भवन ऊष्मा (ΔH) की गणना कीजिए।

उत्तर:

.

दिए गए समीकरण:

(i) C(s) + O₂(g) → CO₂(g), ΔH₁ = -393.7 kJ

(ii) H₂(g) + ½ O₂(g) → H₂O(l), ΔH₂ = -285.7 kJ

(iii) CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(l), ΔH₃ = -890.3 kJ (नोट: दहन ऊष्मा ऋणात्मक होती है)

समीकरण (ii) को 2 से गुणा करके समीकरण (i) में जोड़ने तथा फिर उसमें से समीकरण (iii) को घटाने पर:

ΔH = ΔH₁ + 2(ΔH₂) - ΔH₃

ΔH = -393.7 + 2(-285.7) - (-890.3)

ΔH = -393.7 - 571.4 + 890.3

ΔH = -965.1 + 890.3

ΔH = -74.8 kJ/mol

अथवा

प्रश्न 7(क).

ऑफबाऊ सिद्धान्त क्या है? इस सिद्धान्त की सहायता से विभिन्न कक्षकों की ऊर्जा का क्रम कैसे जानेंगे?

उत्तर:

.

• ऑफबाऊ सिद्धान्त: जर्मन भाषा में 'आफबाऊ' का अर्थ है 'निर्माण करना'। इस सिद्धान्त के अनुसार, परमाणुओं के कक्षकों में इलेक्ट्रॉन उनकी ऊर्जा के बढ़ते क्रम में प्रवेश करते हैं। अर्थात् इलेक्ट्रॉन पहले न्यूनतम ऊर्जा वाले कक्षक में जाता है और उसके भरने के बाद ही उच्च ऊर्जा वाले कक्षक में प्रवेश करता है।

• ऊर्जा का क्रम जानने का नियम (n+l नियम):

1. जिस कक्षक के लिए (n + l) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा कम होती है तथा इलेक्ट्रॉन पहले उसमें जाता है।

2. यदि दो कक्षकों के लिए (n + l) का मान समान हो, तो जिस कक्षक के लिए मुख्य क्वांटम संख्या (n) का मान कम होगा, उसकी ऊर्जा कम होगी।

कक्षकों की ऊर्जा का बढ़ता क्रम:

1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s < 4d < 5p < 6s...

प्रश्न 7(ख).

बेन्जीन की नाइट्रीकरण, सल्फोनीकरण, हैलोजनीकरण, फ्रीडल-क्राफ्ट अभिक्रिया, ऐसोटीलीकरण अभिक्रिया के रासायनिक समीकरण लिखिए।

उत्तर:

.

1. नाइट्रीकरण (Nitration):

C₆H₆ + HNO₃ --(सांद्र H₂SO₄, 50-60°C)--> C₆H₅NO₂ (नाइट्रोबेन्जीन) + H₂O

2. सल्फोनीकरण (Sulfonation):

C₆H₆ + H₂SO₄ (सधूम) --(डेल्टा)--> C₆H₅SO₃H (बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल) + H₂O

3. हैलोजनीकरण (Halogenation):

C₆H₆ + Cl₂ --(निर्जल FeCl₃)--> C₆H₅Cl (क्लोरोबेन्जीन) + HCl

4. फ्रीडल-क्राफ्ट ऐल्किलीकरण (Friedel-Crafts Alkylation):

C₆H₆ + CH₃Cl --(निर्जल AlCl₃)--> C₆H₅CH₃ (टॉलुईन) + HCl

5. ऐसिटिलीकरण / फ्रीडल-क्राफ्ट ऐसिलीकरण (Acylation):

C₆H₆ + CH₃COCl --(निर्जल AlCl₃)--> C₆H₅COCH₃ (ऐसिटोफीनोन) + HCl

अथवा

प्रश्न 7(ख).

आवर्तसारणी के किन-किन वर्गों के तत्वों को s-ब्लॉक के तत्व कहते हैं और क्यों? s-ब्लॉक तत्वों के मुख्य अभिलक्षणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

.

• s-ब्लॉक के तत्व: आवर्त सारणी के वर्ग-1 (अल्काली धातुएँ) तथा वर्ग-2 (अल्कालाइन मृदा धातुएँ) के तत्वों को s-ब्लॉक के तत्व कहते हैं।

• कारण: क्योंकि इन तत्वों के बाह्यतम कोश का अंतिम इलेक्ट्रॉन s-उपकोश (s-subshell) में प्रवेश करता है। (सामान्य विन्यास: ns¹⁻²)।

• मुख्य अभिलक्षण:

1. ये धातुएँ अत्यंत मुलायम होती हैं और इनके गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं।

2. ये अत्यधिक क्रियाशील होती हैं तथा प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाई जातीं।

3. इनकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान बहुत कम होता है।

4. ये प्रबल अपचायक (reducing agents) होती हैं।

5. ये मुख्यतः आयनिक यौगिक बनाती हैं तथा ज्वाला परीक्षण में विशिष्ट रंग प्रदान करती हैं।