वार्षिक परीक्षा, 2026
कक्षा-11
विषय-रसायन विज्ञान
1. सही विकल्प चुनकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए -
(क) परमाणु कक्षक है-
(a) परमाणु में इलेक्ट्रॉन का गोलपथ
(b) इलेक्ट्रॉन का दीर्घ वृत्ताकार कक्ष
(c) नाभिक के चारों तरफ का त्रिविमीय क्षेत्र
(d) क्षेत्र जिसमें इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की सम्भावना सबसे अधिक है
उत्तर. (d) क्षेत्र जिसमें इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की सम्भावना सबसे अधिक है
(ख) निम्न में से किसका आकार सबसे बड़ा है-
(a) N³⁻
(b) O²⁻
(c) C⁴⁺
(d) F⁻
उत्तर. (a) N³⁻
(स्पष्टीकरण: सम-इलेक्ट्रॉनिक आयनों में ऋण आवेश बढ़ने से प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है, जिससे आयन का आकार बढ़ जाता है।)
(ग) एक जलीय विलयन का pH मान 3 है। इसका [OH⁻] है-
(a) 10⁻¹¹
(b) 10⁻⁷
(c) 10⁻³
(d) 10⁻¹⁴
उत्तर. (a) 10⁻¹¹
(स्पष्टीकरण: pH = 3 => [H⁺] = 10⁻³ M. जल का आयनिक गुणनफल K_w = [H⁺][OH⁻] = 10⁻¹⁴. अतः [OH⁻] = 10⁻¹⁴ / 10⁻³ = 10⁻¹¹ M.)
(घ) [Cr(H₂O)₄Cl₂]⁺ आयन में Cr की ऑक्सीकरण संख्या है-
(a) 3
(b) 1
(c) 6
(d) 5
उत्तर. (a) 3
(स्पष्टीकरण: x + 4(0) + 2(-1) = +1 => x - 2 = 1 => x = +3)
(ङ) ऐल्कीन में हैलोजन अम्लों का योग है-
(a) न्यूक्लियोफिलिक योग
(b) इलेक्ट्रोफिलिक योग
(c) मुक्त मूलक
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर. (b) इलेक्ट्रोफिलिक योग
(च) C₆H₆ + (HNO₃ + H₂SO₄) ⟶ X + (Cl₂ / FeCl₃) ⟶ Y
उपयुक्त अभिक्रिया में Y है-
(a) 4-नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन
(b) 1-नाइट्रोक्लोरो बेन्जीन
(c) 3-नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर. (c) 3-नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन
(स्पष्टीकरण: बेन्जीन के नाइटीकरण से नाइट्रोबेन्जीन (X) बनता है। -NO₂ समूह m-निर्देशी (meta-directing) होता है, अतः क्लोरीनीकरण पर 3-नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन (m-नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन) बनता है।)
2.
(क) एथेन (C₂H₆) के तीन मोलों में कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर.
C₂H₆ के 1 मोल में C परमाणुओं के मोल = 2
अतः C₂H₆ के 3 मोलों में C परमाणुओं के मोल = 3 × 2 = 6 मोल।
(ख) एसीटीलीन (C₂H₂) अणु में कितने सिग्मा तथा पाई-बन्ध पाए जाते हैं।
उत्तर.
संरचना: H - C ≡ C - H
• सिग्मा (σ) बन्धों की संख्या = 3 (दो C-H और एक C-C)
• पाई (π) बन्धों की संख्या = 2 (C ≡ C त्रि-बन्ध में)
(ग) एन्थैल्पी को परिभाषित कीजिए।
उत्तर.
किसी ऊष्मागतिकीय निकाय (System) की कुल ऊष्मा सामग्री (Heat Content) को 'एन्थैल्पी' (H) कहते हैं।
यह निकाय की आंतरिक ऊर्जा (U) तथा दाब-आयतन ऊर्जा (PV) के योग के बराबर होती है:
H = U + PV
(घ) आधुनिक आवर्त नियम को लिखिए।
उत्तर.
आधुनिक आवर्त नियम (मोजले का नियम):
"तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों (Atomic Numbers) के आवर्ती फलन होते हैं।"
3.
(क) नोडल तल से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर.
परमाणु कक्षक में नाभिक के चारों ओर स्थित वह तल जहाँ इलेक्ट्रॉन पाए जाने की प्रायिकता (Probability) शून्य होती है (अर्थात Ψ² = 0), 'नोडल तल' (Nodal Plane) कहलाता है।
4.
(क) निम्न की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए-
(i) MnO₄²⁻ में Mn की
(ii) H₂S₂O₈ में S की
(iii) CaCO₃ में C की
उत्तर.
(i) MnO₄²⁻ में Mn की:
x + 4(-2) = -2 => x - 8 = -2 => x = +6
(ii) H₂S₂O₈ में S की:
H₂S₂O₈ में मार्शल अम्ल संरचना होती है जिसमें एक परॉक्साइड आबंध (-O-O-) होता है।
2(+1) + 2(x) + 6(-2) + 2(-1) = 0
2 + 2x - 12 - 2 = 0 => 2x = 12 => x = +6
(iii) CaCO₃ में C की:
(+2) + x + 3(-2) = 0 => 2 + x - 6 = 0 => x = +4
(ख) कार्बोमापन (Carbon Dating / Carbon Estimations) को उदाहरण द्वारा समझाइए। (अथवा कार्बधात्विक / कार्बोकैल्शियम यौगिक अवधारणा)
उत्तर.
रेडियोऐक्टिव कार्बन-14 (C-14) की अर्द्ध-आयु का उपयोग करके प्राचीन कार्बनिक अवशेषों (जैसे जीवाश्म, लकड़ी, अस्थियाँ) की आयु ज्ञात करने की विधि को 'कार्बन डेटिंग' (Carbomapan/Carbon Dating) कहते हैं।
उदाहरण: जीवित जीवों में C-12 और C-14 का अनुपात स्थिर रहता है। मृत्यु के पश्चात C-14 का क्षय होने लगता है। अवशेष में बचे C-14 की मात्रा मापकर वस्तु की आयु परिकलित कर ली जाती है।
(ग) निम्न पर टिप्पणी लिखिए -
(i) दहन ऊष्मा
(ii) विलयन ऊष्मा
उत्तर.
(i) दहन ऊष्मा (Heat of Combustion):
किसी पदार्थ के 1 मोल को ऑक्सीजन के आधिक्य में पूर्णतया जलाने (दहन करने) पर जितनी ऊष्मा मुक्त होती है, उसे उस पदार्थ की 'दहन ऊष्मा' कहते हैं। यह सदैव ऊष्माक्षेपी (ΔH = -ve) होती है।
(ii) विलयन ऊष्मा (Heat of Solution):
जब किसी पदार्थ के 1 मोल को विलायक की पर्याप्त मात्रा में घोला जाता है ताकि और अधिक विलायक मिलाने पर कोई ऊष्मा परिवर्तन न हो, तो इस प्रक्रिया में होने वाले एन्थैल्पी परिवर्तन को 'विलयन ऊष्मा' कहते हैं।
(घ) Cu⁺ आयन प्रति-चुम्बकीय है, जबकि Cu²⁺ आयन अनु-चुम्बकीय है, क्यों ? समझाइए।
उत्तर.
• Cu (Z = 29) का विन्यास: [Ar] 3d¹⁰ 4s¹
• Cu⁺ आयन विन्यास: [Ar] 3d¹⁰ 4s⁰
Cu⁺ के 3d उपकोश में सभी 10 इलेक्ट्रॉन युग्मित (Paired) हैं। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन न होने के कारण Cu⁺ प्रति-चुम्बकीय (Diamagnetic) होता है।
• Cu²⁺ आयन विन्यास: [Ar] 3d⁹ 4s⁰
Cu²⁺ के 3d उपकोश में 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (Unpaired electron) उपस्थित होता है, जिसके कारण यह अनु-चुम्बकीय (Paramagnetic) होता है।
5.
(क) सहसंयोजी यौगिकों के लक्षणों को लिखिए।
उत्तर.
सहसंयोजी यौगिकों के प्रमुख लक्षण:
1. ये यौगिक परमाणुओं के मध्य इलेक्ट्रॉनों की समान साझेदारी (Sharing) से बनते हैं।
2. इनके गलनांक (Melting Point) और क्वथनांक (Boiling Point) आयनिक यौगिकों की तुलना में कम होते हैं।
3. ये जल जैसे ध्रुवीय विलायकों में प्रायः अविलेय तथा कार्बनिक विलायकों (जैसे बेन्जीन, ईथर) में विलेय होते हैं।
4. ये विद्युत के कुचालक होते हैं (क्योंकि इनमें मुक्त आयन नहीं होते)।
5. इनमें बंध दिशात्मक (Directional) होते हैं, अतः ये समावयवता (Isomerism) प्रदर्शित करते हैं।
(ख) 1 × 10⁻⁸ M HCl विलयन के pH मान की गणना कीजिए।
उत्तर.
HCl एक तीव्र अम्ल है: [H⁺]_(HCl) = 10⁻⁸ M
चूँकि अम्ल अत्यंत तनु है, अतः जल के स्वतः आयनन से प्राप्त [H⁺] = 10⁻⁷ M की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
कुल [H⁺] = [H⁺]_(HCl) + [H⁺]_(H₂O)
= 10⁻⁸ + 10⁻⁷
= 10⁻⁷ (0.1 + 1) = 1.1 × 10⁻⁷ M
pH = -log[H⁺]
pH = -log(1.1 × 10⁻⁷)
= 7 - log(1.1)
= 7 - 0.0414
= 6.958 (या ~6.96)
(ग) निम्न के IUPAC नाम लिखिए -
(i) CH₃-C(Br)₂-CH₂-CH₃
(ii) CH₂(OH)-CH₂(OH)
(iii) CH₃-CO-CH₃
(iv) (CH₃CO)₂O
उत्तर.
(i) 2,2-डाइब्रोमोब्यूटेन (2,2-Dibromobutane)
(ii) एथेन-1,2-डाईऑल (Ethane-1,2-diol)
(iii) प्रोपेन-2-ओन (Propan-2-one / Propanone)
(iv) एथेनोइक एनहाइड्राइड (Ethanoic anhydride)
(घ) सैटजैफ नियम को उदाहरण द्वारा समझाइए ।
उत्तर.
1. नियम:
जब किसी एल्किल हैलाइड के विलोपन (Dehydrohalogenation) से दो अलग-अलग ऐल्कीन बनने की संभावना होती है, तो मुख्य उत्पाद (Main Product) वह ऐल्कीन होती है जिसमें द्वि-बंध (Double bond) वाले कार्बन परमाणुओं पर एल्किल समूहों की संख्या अधिक होती है।
2. उदाहरण:
2-ब्रोमोब्यूटेन की alcoholic KOH के साथ क्रिया कराने पर:
CH₃-CH₂-CH(Br)-CH₃ + alc. KOH ⟶
• ब्यूेट-2-ईन (CH₃-CH=CH-CH₃) ⟶ 81% (मुख्य उत्पाद)
• ब्यूेट-1-ईन (CH₃-CH₂-CH=CH₂) ⟶ 19% (अल्प उत्पाद)
6.
(क) कक्षकों के संकरण से क्या अभिप्राय है? किसी एक संकरण को उदाहरण द्वारा समझाइए ।
उत्तर.
1. संकरण की परिभाषा:
जब किसी परमाणु के लगभग समान ऊर्जा वाले विभिन्न कक्षक परस्पर मिश्रित होकर समान ऊर्जा तथा समान आकृति के नए कक्षक बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को 'संकरण' (Hybridization) कहते हैं।
2. sp³ संकरण का उदाहरण:
जब एक s तथा तीन p कक्षक मिलकर समान ऊर्जा के 4 sp³ संकर कक्षक बनाते हैं।
उदाहरण: मीथेन (CH₄)
C (Z = 6) का उत्तेजित विन्यास: 1s² 2s¹ 2pₓ¹ 2p_y¹ 2p_z¹
चारों संकर कक्षक 109°28' कोण पर समचतुष्फलकीय (Tetrahedral) रूप में व्यवस्थित होते हैं और H के 1s कक्षकों के साथ अतिव्यापन करके 4 σ-बंध बनाते हैं।
अथवा
(क) इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर.
1. परिभाषा:
यह एक अस्थायी प्रभाव है। किसी बहु-बंध (Double or Triple bond) युक्त कार्बनिक यौगिक में आक्रमणकारी अभिकर्मक (Attacking Reagent) की उपस्थिति में पाई (π) इलेक्ट्रॉनों का एक परमाणु से दूसरे परमाणु पर पूर्ण स्थानांतरण हो जाता है।
2. उदाहरण:
कार्बोनिल समूह (>C=O) पर नाभिकस्नेही (Reagent) के आक्रमण के समय π-इलेक्ट्रॉन अधिक ऋणविद्युती ऑक्सीजन परमाणु पर स्थानांतरित हो जाते हैं:
C = O + Reagent ⟶ >C⁺ - O⁻
(ख) निम्नलिखित यौगिकों में N की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए-
(i) NO
(ii) N₂O₃
(iii) N₂O₄
(iv) HNO₂
(v) HNO₃
उत्तर.
(i) NO: x + (-2) = 0 => x = +2
(ii) N₂O₃: 2x + 3(-2) = 0 => 2x = 6 => x = +3
(iii) N₂O₄: 2x + 4(-2) = 0 => 2x = 8 => x = +4
(iv) HNO₂: +1 + x + 2(-2) = 0 => x - 3 = 0 => x = +3
(v) HNO₃: +1 + x + 3(-2) = 0 => x - 5 = 0 => x = +5
अथवा
(ख) विलेयता तथा विलेयता गुणनफल में अन्तर लिखिए। किसी द्विअंगी वैद्युत-अपघट्य के लिए इनमें सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर.
1. अंतर:
• विलेयता (Solubility - S): निश्चित ताप पर विलायक की निश्चित मात्रा में घुले हुए विलेय की अधिकतम ग्राम या मोल में मात्रा है।
• विलेयता गुणनफल (K_sp): स्थिर ताप पर अल्प विलेय लवण के संतृप्त विलयन में उसके आयनों की सांद्रताओं का गुणनफल होता है।
2. द्विअंगी (Binary) वैद्युत-अपघट्य AB के लिए संबंध:
मान लवण AB संतृप्त विलयन में आयनित होता है:
AB(s) ⇌ A⁺(aq) + B⁻(aq)
यदि विलेयता = S mol/L है, तो:
[A⁺] = S, [B⁻] = S
विलेयता गुणनफल K_sp = [A⁺] × [B⁻] = S × S
K_sp = S² या S = √(K_sp)
7.
(क) ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के आधार पर एन्ट्रॉपी की व्याख्या कीजिए।
उत्तर.
1. एन्ट्रॉपी (Entropy - S):
एन्ट्रॉपी किसी निकाय की अव्यवस्था (Disorder/Randomness) का माप है।
2. द्वितीय नियम और एन्ट्रॉपी:
ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के अनुसार: "ब्रह्मांड की कुल एन्ट्रॉपी निरंतर बढ़ रही है।"
किसी स्वतः प्रक्रम (Spontaneous Process) या प्राकृतिक प्रक्रम के लिए ब्रह्मांड में एन्ट्रॉपी परिवर्तन सदैव धनात्मक होता है:
ΔS_total = ΔS_system + ΔS_surroundings > 0
ऊष्मागतिकीय रूप से: dS = dQ_rev / T
अथवा
(क) क्वाण्टम संख्याएँ क्या हैं? यह कितने प्रकार की होती हैं? प्रत्येक प्रकारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर.
1. परिभाषा:
वे संख्याएँ जो परमाणु में इलेक्ट्रॉन की स्थिति, ऊर्जा, कक्षक के आकार, दिशा और चक्रण की पूरी जानकारी देती हैं, 'क्वाण्टम संख्याएँ' (Quantum Numbers) कहलाती हैं।
2. प्रकार (4 प्रकार):
• मुख्य क्वाण्टम संख्या (n): यह इलेक्ट्रॉन के मुख्य ऊर्जा स्तर या कोश (Shell) को दर्शाती है (n = 1, 2, 3...)।
• द्विगंशी क्वाण्टम संख्या (l): यह उपकोश (Subshell) और कक्षक की आकृति को दर्शाती है (l = 0 से n-1 तक)।
• चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या (m): यह कक्षक के त्रिविमीय विन्यास (Orientation) को दर्शाती है (m = -l से +l तक)।
• चक्रण क्वाण्टम संख्या (s): यह इलेक्ट्रॉन के अपने अक्ष पर चक्रण की दिशा को दर्शाती है (s = +½ या -½)।
(ख) बेन्जीन के खुले सूत्र तथा अनुनाद संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर.
1. खुले सूत्र की सीमा व केकुले संरचना:
बेन्जीन (C₆H₆) एक चक्रीय (Cyclic) अणु है। इसके खुले शृंखला वाले सूत्र संभव नहीं हैं क्योंकि यह असंतृप्त होते हुए भी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ आसानी से देता है। केकुले ने 6 कार्बन की वलय वाली संरचना दी जिसमें एकांतर एकल और द्वि-बंध (C=C) होते हैं।
2. अनुनाद संरचना (Resonance Structures):
बेन्जीन दो केकुले अनुनादी संरचनाओं (Resonance structures) का संकर (Hybrid) है।
• संरचना I: 1, 3, 5 स्थितियों पर द्विबंध
• संरचना II: 2, 4, 6 स्थितियों पर द्विबंध
अनुनाद के कारण बेन्जीन के सभी C-C बंधों की लंबाई समान (1.39 Å) होती है, जो एकल बंध (1.54 Å) और द्विबंध (1.34 Å) के मध्य होती है।
अथवा
(ख) मेण्डलीफ की मूल आवर्त सारणी की उपयोगिता तथा कमियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर.
1. उपयोगिता (Advantages):
• तत्वों का व्यवस्थित अध्ययन: तत्वों को उनके गुणों के आधार पर वर्गों व आवर्तों में वर्गीकृत किया गया।
• अज्ञात तत्वों की भविष्यवाणी: जर्मेनियम, गैलियम आदि अज्ञात तत्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़े गए।
• परमाणु भार संशोधन: Be, U आदि तत्वों के गलत परमाणु भारों का संशोधन किया गया।
2. कमियाँ (Limitations):
• हाइड्रोजन का स्थान: H को क्षार धातुओं (वर्ग I) तथा हैलोजनों (वर्ग VII) दोनों के साथ गुण मिलने पर भी निश्चित स्थान नहीं मिला।
• समस्थानिकों का स्थान: समस्थानिकों (Isotopes) का परमाणु भार अलग होते हुए भी उनके लिए अलग स्थान नहीं था।
• असम्मत युग्म (Anomalous pairs): अधिक परमाणु भार वाले तत्वों को कम भार वाले तत्वों से पहले रखा गया (जैसे Ar (39.9) को K (39.1) से पहले)।