अर्धवार्षिक परीक्षा, 2026
कक्षा-11
विषय-रसायन विज्ञान
1. सही विकल्प चुनकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए -
(क) 1.8 ग्राम जल में इलेक्ट्रॉनों की संख्या होगी -
(i) 6.022 × 10²³
(ii) 6.022 × 10²²
(iii) 6.022 × 10²¹
(iv) 6.022 × 10²⁴
उत्तर. (i) 6.022 × 10²³
(स्पष्टीकरण: H₂O के 1 मोल (18 ग्राम) में 10 × N_A इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः 1.8 ग्राम जल में = 0.1 मोल = 0.1 × 10 × N_A = 1 N_A = 6.022 × 10²³ इलेक्ट्रॉन होंगे।)
(ख) कार्बन परमाणु में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है -
(i) 1
(ii) 2
(iii) 3
(iv) 4
उत्तर. (ii) 2
(स्पष्टीकरण: C (Z = 6) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2pₓ¹ 2p_y¹ 2p_z⁰ होता है, अतः 2p उपकोश में 2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।)
(ग) निम्नलिखित सम-इलेक्ट्रॉनिक आयनों में सबसे छोटा आयन है -
(i) N³⁻
(ii) O²⁻
(iii) F⁻
(iv) Na⁺
उत्तर. (iv) Na⁺
(स्पष्टीकरण: सम-इलेक्ट्रॉनिक आयनों में नाभिकीय आवेश (प्रोटॉनों की संख्या) बढ़ने पर आयनिक त्रिज्या घटती है। Na⁺ में प्रोटॉनों की संख्या सबसे अधिक (11) है, अतः यह सबसे छोटा है।)
(घ) H₂S₂O₈, CrO₅ तथा K₂Cr₂O₇ में सल्फर तथा क्रोमियम की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः हैं -
(i) +6, +4, +6
(ii) +6, +6, +4
(iii) +6, -6, +4
(iv) -4, +6, +6
उत्तर. (i) +6, +6, +6
(स्पष्टीकरण: H₂S₂O₈ में परॉक्साइड बंध के कारण S की +6, CrO₅ में परॉक्साइड बंधों के कारण Cr की +6, तथा K₂Cr₂O₇ में Cr की +6 ऑक्सीकरण संख्या होती है।)
(ङ) निम्न में से किसकी त्रिज्या सबसे अधिक है ?
(i) Na⁺
(ii) O²⁻
(iii) F⁻
(iv) Cl⁻
उत्तर. (iv) Cl⁻
(स्पष्टीकरण: Cl⁻ तृतीय आवर्त (N=3) का आयन है जिसमें 3 कोश होते हैं, जबकि Na⁺, O²⁻, F⁻ द्वितीय आवर्त से संबंधित हैं और इनमें केवल 2 कोश होते हैं।)
2.
(क) द्रव्यमान संरक्षण के नियम का प्रतिपादन किस वैज्ञानिक ने किया ?
उत्तर.
द्रव्यमान संरक्षण के नियम का प्रतिपादन फ्रांसीसी रसायनशास्त्री 'ऐंटोनी लेवोज़ियर' (Antoine Lavoisier) ने 1789 में किया था।
(ख) परमाणु क्रमांक 29 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर.
परमाणु क्रमांक 29 (कॉपर, Cu) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (पूर्णपूरित d-उपकोश के स्थायित्व के कारण):
Cu (29) = 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d¹⁰ 4s¹ (या [Ar] 3d¹⁰ 4s¹)
(ग) K₄[Fe(CN)₆] में Fe की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर.
माना Fe की ऑक्सीकरण संख्या = x
4(+1) + x + 6(-1) = 0
4 + x - 6 = 0
x - 2 = 0
x = +2
अतः Fe की ऑक्सीकरण संख्या +2 है।
(घ) मेण्डलीफ का मूल आवर्त नियम लिखिए।
उत्तर.
मेण्डलीफ का मूल आवर्त नियम:
"तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों (Atomic Weights) के आवर्ती फलन होते हैं।"
3.
(क) आयनिक बन्ध किसे कहते हैं ?
उत्तर.
दो विपरीत आवेशित परमाणुओं के बीच एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण (Transfer of electrons) से बनने वाले रासायनिक बंध को 'आयनिक बन्ध' या 'वैद्युत संयोजक बन्ध' कहते हैं।
उदाहरण: Na + Cl → Na⁺ + Cl⁻ → NaCl
(ख) दे-ब्रॉग्ली द्वैतीयक सिद्धान्त का समीकरण लिखिए ।
उत्तर.
दे-ब्रॉग्ली समीकरण के अनुसार, द्रव्यमान 'm' और वेग 'v' (संवेग p) से गतिमान किसी सूक्ष्म कण से संबद्ध तरंगदैर्ध्य (λ) निम्नलिखित होती है:
λ = h / (mv) या λ = h / p
(जहाँ h = प्लांक नियतांक)
(ग) क्षारीय मृदा तत्व क्या होते हैं ?
उत्तर.
आवर्त सारणी के वर्ग 2 (Group 2) में स्थित तत्वों (Be, Mg, Ca, Sr, Ba, Ra) को 'क्षारीय मृदा तत्व' (Alkaline Earth Metals) कहते हैं। इनके ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं तथा मृदा (मिट्टी) में पाए जाते हैं।
(घ) हाइड्रोजन बन्ध का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर.
उदाहरण: जल (H₂O) के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बंध।
जल में ऑक्सीजन परमाणु पर आंशिक ऋण आवेश (δ-) और हाइड्रोजन परमाणु पर आंशिक धन आवेश (δ+) होने के कारण अणुओं में परस्पर हाइड्रोजन आबंध बनता है:
... H - O - H ··· H - O - H ··· H - O - H ...
4.
(क) ग्लूकोस (C₆H₁₂O₆) अणु का आण्विक द्रव्यमान परिकलित कीजिए।
उत्तर.
C, H तथा O के परमाणु भार क्रमशः 12, 1 तथा 16 amu होते हैं।
C₆H₁₂O₆ का आण्विक द्रव्यमान = (6 × 12) + (12 × 1) + (6 × 16)
= 72 + 12 + 96
= 180 u (या amu)
(ख) 2d तथा 3f-उपकोश क्यों सम्भव नहीं होते ? समझाइए ।
उत्तर.
द्विगंशी क्वांटम संख्या (l) का मान मुख्य क्वांटम संख्या (n) पर निर्भर करता है (l = 0 से n-1 तक)।
1. 2d उपकोश के लिए: n = 2, अतः l के संभावित मान 0 (s) और 1 (p) हैं। d-उपकोश के लिए l = 2 की आवश्यकता होती है, जो n = 2 के लिए संभव नहीं है।
2. 3f उपकोश के लिए: n = 3, अतः l के संभावित मान 0 (s), 1 (p) और 2 (d) हैं। f-उपकोश के लिए l = 3 होना चाहिए, जो n = 3 के लिए सम्भव नहीं है।
(ग) उपसहसंयोजी यौगिक के लक्षण लिखिए।
उत्तर.
उपसहसंयोजी यौगिकों के प्रमुख लक्षण:
1. इनमें एक केंद्रीय धातु आयन होता है जो लिगैंडों द्वारा एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Loan pair) ग्रहण करके उपसहसंयोजक बंध बनाता है।
2. ये जलीय विलयन में पूर्णतः आयनित नहीं होते और अपनी पहचान बनाए रखते हैं।
3. ये जटिल आयन (Complex ions) बनाते हैं।
4. ये यौगिक दिशात्मक (Directional) प्रकृति के होते हैं तथा समावयवता (Isomerism) प्रदर्शित करते हैं।
(घ) अर्द्ध अभिक्रिया किसे कहते हैं ? उदाहरण द्वारा समझाइए ।
उत्तर.
1. परिभाषा:
किसी भी रेडॉक्स (ऑक्सीकरण-अपचयन) अभिक्रिया के उस भाग को जो केवल ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन त्यागना) या केवल अपचयन (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना) को व्यक्त करता है, 'अर्द्ध अभिक्रिया' (Half Reaction) कहते हैं।
2. उदाहरण:
रेडॉक्स अभिक्रिया: Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu
• ऑक्सीकरण अर्द्ध अभिक्रिया: Zn → Zn²⁺ + 2e⁻
• अपचयन अर्द्ध अभिक्रिया: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu
5.
(क) तत्व तथा यौगिक में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर.
गुण तत्व (Element) यौगिक (Compound)
परिभाषा तत्व वह शुद्ध पदार्थ है जो एक ही प्रकार के परमाणुओं से बना होता है। यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है जो दो या अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात में संयोजन से बनता है।
विभाजन इसे भौतिक या रासायनिक विधियों द्वारा अन्य पदार्थों में तोड़ा नहीं जा सकता। इसे रासायनिक विधियों द्वारा इसके अवयवी तत्वों में विभक्त किया जा सकता है।
गुणधर्म इसके गुण इसके परमाणुओं के समान होते हैं। इसके गुण इसके अवयवी तत्वों के गुणों से बिल्कुल भिन्न होते हैं।
उदाहरण हाइड्रोजन (H₂), ऑक्सीजन (O₂), लोहा (Fe)। जल (H₂O), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)।
(ख) कोबाल्ट (Z = 27) का इलेक्ट्रॉन विन्यास लिखिए एवं उसमें उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए।
उत्तर.
1. कोबाल्ट (Co, Z = 27) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁷ 4s² (या [Ar] 3d⁷ 4s²)
2. अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या:
3d उपकोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं (कक्षकों में युग्मन के पश्चात):
d-कक्षक: [↑↓] [↑↓] [↑] [↑] [↑]
अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 3
(ग) निम्नलिखित अभिक्रियाओं में H₂O₂ किसमें ऑक्सीकारक तथा किसमें अपचायक का कार्य करता है ?
(i) Cl₂ + H₂O₂ ⟶ 2HCl + O₂ ↑
(ii) 2KI + H₂O₂ ⟶ 2KOH + I₂ ↑
उत्तर.
(i) Cl₂ + H₂O₂ ⟶ 2HCl + O₂:
यहाँ Cl₂ का Cl⁻ में अपचयन हो रहा है तथा H₂O₂ का O₂ में ऑक्सीकरण हो रहा है। अतः इस अभिक्रिया में H₂O₂ अपचायक (Reducing Agent) का कार्य करता है।
(ii) 2KI + H₂O₂ ⟶ 2KOH + I₂:
यहाँ I⁻ का I₂ में ऑक्सीकरण हो रहा है तथा H₂O₂ का OH⁻ में अपचयन हो रहा है। अतः इस अभिक्रिया में H₂O₂ ऑक्सीकारक (Oxidizing Agent) का कार्य करता है।
(घ) निम्न पर टिप्पणी लिखिए -
(i) आयनन त्रिज्या
(ii) आयनन विभव
उत्तर.
(i) आयनन त्रिज्या (Ionic Radius):
किसी आयन के नाभिक के केंद्र से उसके बाह्यतम इलेक्ट्रॉन मेघ (Electron cloud) के उस बिंदु तक की दूरी जहाँ तक नाभिक का प्रभाव रहता है, 'आयनन त्रिज्या' कहलाती है। धनायन की त्रिज्या मूल परमाणु से छोटी तथा ऋणायन की त्रिज्या मूल परमाणु से बड़ी होती है।
(ii) आयनन विभव (Ionization Potential / Enthalpy):
किसी विलगित (isolated) गैसीय अवस्था वाले परमाणु के बाह्यतम कोश से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को 'आयनन विभव' या 'आयनन एन्थैल्पी' कहते हैं। इसे eV या kJ/mol में मापा जाता है।
6.
(क) कक्ष तथा कक्षक में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (या दिए गए प्रश्न में: आण्विक कक्षकों एवं परमाण्विक कक्षकों में अन्तर)
उत्तर.
परमाण्विक कक्षक (Atomic Orbital) तथा आण्विक कक्षक (Molecular Orbital) में अंतर:
1. परमाण्विक कक्षक केवल एक परमाणु के नाभिक से प्रभावित होता है (एककेंद्रकीय), जबकि आण्विक कक्षक दो या दो से अधिक नाभिकों से प्रभावित होता है (बहुकेंद्रकीय)।
2. परमाण्विक कक्षक को s, p, d, f द्वारा दर्शाया जाता है, जबकि आण्विक कक्षक को σ, π, δ आदि द्वारा दर्शाया जाता है।
3. परमाण्विक कक्षकों का स्थायित्व कम होता है, जबकि बंधी आण्विक कक्षकों (BMO) का स्थायित्व अधिक होता है।
4. परमाण्विक कक्षक स्वतंत्र परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को व्यक्त करते हैं, जबकि आण्विक कक्षक अणु के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को व्यक्त करते हैं।
अथवा
(क) हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
उत्तर.
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धान्त (Heisenberg's Uncertainty Principle):
"किसी सूक्ष्म गतिमान कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) की सही स्थिति (Position) और उसके सही संवेग (Momentum) का एक साथ यथार्थ (निश्चित) निर्धारण करना असंभव है।"
गणितीय व्यंजक:
Δx × Δp ≥ h / (4π) या Δx × (m · Δv) ≥ h / (4π)
जहाँ:
• Δx = स्थिति में अनिश्चितता
• Δp = संवेग में अनिश्चितता
• Δv = वेग में अनिश्चितता
• m = कण का द्रव्यमान, h = प्लांक नियतांक
(ख) निम्नलिखित यौगिकों में N की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए।
NO, N₂O₃, N₂O₄, HNO₂, HNO₃
उत्तर.
1. NO में: x + (-2) = 0 => x = +2
2. N₂O₃ में: 2x + 3(-2) = 0 => 2x - 6 = 0 => x = +3
3. N₂O₄ में: 2x + 4(-2) = 0 => 2x - 8 = 0 => x = +4
4. HNO₂ में: +1 + x + 2(-2) = 0 => x - 3 = 0 => x = +3
5. HNO₃ में: +1 + x + 3(-2) = 0 => x - 5 = 0 => x = +5
अथवा
(ख) s-ब्लॉक तत्व किसे कहते हैं ? s-ब्लॉक तत्वों के लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर.
1. परिभाषा:
वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के s-उपकोश में प्रवेश करता है, 's-ब्लॉक के तत्व' कहलाते हैं। (इसमें वर्ग 1 तथा वर्ग 2 आते हैं)।
2. सामान्य लक्षण:
• इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns¹⁻² होता है।
• ये अत्यंत मुलायम, कम गलनांक एवं क्वथनांक वाली धातुएं होती हैं।
• इनकी आयनन ऊर्जा बहुत कम होती है, जिससे ये अत्यधिक क्रियाशील और प्रबल अपचायक होते हैं।
• ये मुख्य रूप से आयनिक यौगिक बनाते हैं तथा ज्वाला परीक्षण में विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं।
7.
(क) कक्षकों के संकरण से क्या अभिप्राय है? किसी एक संकरण को उदाहरण देकर समझाइए ।
उत्तर.
1. संकरण (Hybridization) की परिभाषा:
"जब किसी परमाणु के लगभग समान ऊर्जा वाले दो या अधिक कक्षक आपस में मिश्रित होकर समान ऊर्जा और समान आकार के उतने ही नए कक्षक बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।"
2. sp² संकरण का उदाहरण:
जब एक s तथा दो p कक्षक आपस में मिश्रित होकर समान ऊर्जा के 3 sp² संकर कक्षक बनाते हैं, तो इसे sp² संकरण कहते हैं।
उदाहरण: BCl₃ (बोरॉन ट्राइक्लोराइड)
• B (Z = 5) का उत्तेजित विन्यास: 1s² 2s¹ 2pₓ¹ 2p_y¹
• इसमें एक 2s और दो 2p कक्षक संकरित होकर 3 sp² कक्षक बनाते हैं जो 120° के कोण पर त्रिकोणीय समतलीय (Trigonal Planar) आकृति में व्यवस्थित होते हैं।
अथवा
(क) निम्न पर टिप्पणी लिखिए -
(i) इलेक्ट्रॉन मेघ
(ii) परमाणु कक्षक
उत्तर.
(i) इलेक्ट्रॉन मेघ (Electron Cloud):
परमाणु के नाभिक के चारों ओर का वह त्रि-आयामी (3D) धुंधला सा क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना सबसे अधिक होती है, उसे 'इलेक्ट्रॉन मेघ' कहते हैं। क्वांटम यांत्रिकी के अनुसार इलेक्ट्रॉन किसी निश्चित वृत्ताकार पथ पर न घूमकर नाभिक के चारों ओर एक मेघ के रूप में फैला रहता है।
(ii) परमाणु कक्षक (Atomic Orbital):
परमाणु के नाभिक के चारों ओर स्थित वह त्रि-आयामी स्थान जहाँ किसी निश्चित ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता अधिकतम (लगभग 95%) होती है, 'परमाणु कक्षक' कहलाता है। यह मुख्यतः s, p, d, f प्रकार के होते हैं।
(ख) मेण्डलीफ की आवर्त सारणी की उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
उत्तर.
मेण्डलीफ की आवर्त सारणी की प्रमुख उपयोगिताएँ:
1. तत्वों का क्रमबद्ध एवं सरल अध्ययन: तत्वों को आवर्तों व वर्गों में व्यवस्थित करने से सभी तत्वों और उनके यौगिकों के गुणों का अध्ययन सरल हो गया।
2. नए तत्वों की भविष्यवाणी: मेण्डलीफ ने आवर्त सारणी में कुछ स्थान रिक्त छोड़े थे और उन अज्ञात तत्वों (उदा. एका-ऐल्युमिनियम अर्थात गैलियम, एका-सिलिकॉन अर्थात जर्मेनियम) के गुणों की सटीक भविष्यवाणी की थी।
3. परमाणु भारों के संशोधन में सहायता: संदेहपूर्ण परमाणु भार वाले कई तत्वों (जैसे Be, In, U आदि) के परमाणु भारों को सुधारा जा सका।
अथवा
(ख) शुद्ध क्रिस्टलीय कॉपर सल्फेट (CuSO₄·5H₂O) में कॉपर, सल्फर, ऑक्सीजन तथा जल की द्रव्यमान प्रतिशतता ज्ञात कीजिए। (Cu=63.5, S=32, O=16, H=1)
उत्तर.
1. CuSO₄·5H₂O का अणुभार परिकलन:
Cu = 63.5
S = 32
O = 4 × 16 = 64
5H₂O = 5 × (2 × 1 + 16) = 5 × 18 = 90
कुल अणुभार = 63.5 + 32 + 64 + 90 = 249.5 g/mol
2. द्रव्यमान प्रतिशतता (Mass Percentage):
• कॉपर (Cu) % = (63.5 / 249.5) × 100 = 25.45%
• सल्फर (S) % = (32 / 249.5) × 100 = 12.82%
• ऑक्सीजन (O, केवल सल्फेट में) % = (64 / 249.5) × 100 = 25.65%
• जल (5H₂O) % = (90 / 249.5) × 100 = 36.07%
(नोट: यदि कुल ऑक्सीजन (4+5=9 O) का प्रतिशत पूछा जाए: (9 × 16 / 249.5) × 100 = 57.71%)