खण्ड-'अ' (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11 Chemistry Annual Paper 2025 A Code
कक्षा 11वीं · रसायन विज्ञान · 2025 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
चक्रण क्वाण्टम संख्या से ज्ञात होता है -
(a) इलेक्ट्रॉन की दिशा
(b) कक्षकों का आकार
(c) नाभिकीय स्थायित्व
(d) इलेक्ट्रॉनों का ऊर्जा स्तर
उत्तर:
. (a) इलेक्ट्रॉन की दिशा
(स्पष्टीकरण: चक्रण क्वाण्टम संख्या (s) इलेक्ट्रॉन के अपने अक्ष पर घूर्णन (चक्रण) की दिशा - दक्षिणावर्त या वामावर्त को दर्शाती है।)
प्रश्न 1(ख).
कार्बन परमाणु में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है-
(a) 1
(b) 4
(c) 3
(d) 2
उत्तर:
. (d) 2
(स्पष्टीकरण: C (Z = 6) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2pₓ¹ 2p_y¹ 2p_z⁰ होता है, अतः 2p उपकोश में 2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।)
प्रश्न 1(ग).
अभिक्रिया N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ के साम्य स्थिरांक (K_c) का मात्रक है-
(a) मोल¹ लीटर¹
(b) मोल² लीटर²
(c) मोल⁻² लीटर²
(d) मोल⁻² लीटर⁻¹
उत्तर:
. (c) मोल⁻² लीटर²
(स्पष्टीकरण: K_c = [NH₃]² / ([N₂][H₂]³) => (mol/L)² / [(mol/L) (mol/L)³] = (mol/L)⁻² = mol⁻² L²)
प्रश्न 1(घ).
H₂O का अणुभार है-
(a) 17
(b) 18
(c) 40
(d) 56
उत्तर:
. (b) 18
(स्पष्टीकरण: H₂O का अणुभार = 2 × 1 + 16 = 18)
प्रश्न 1(ङ).
K₄[Fe(CN)₆] में Fe की ऑक्सीकरण संख्या है -
(a) +2
(b) +3
(c) +4
(d) 0
उत्तर:
. (a) +2
(स्पष्टीकरण: 4(+1) + x + 6(-1) = 0 => 4 + x - 6 = 0 => x = +2)
प्रश्न 1(च).
ऐथेनोइक अम्ल का सूत्र है-
(a) HCOOH
(b) C₂H₅OH
(c) CH₃COOH
(d) CH₃-O-CH₃
उत्तर:
. (c) CH₃COOH
खण्ड-'ब' (वर्णनात्मक प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
0.2 मोल CO₂ में कितने ग्राम CO₂ उपस्थित है ?
उत्तर:
.
CO₂ का अनुभार (Molar Mass) = 12 + 2 × 16 = 44 g/mol
ग्राम में मात्रा (w) = मोल की संख्या (n) × अणुभार (M)
w = 0.2 × 44 = 8.8 ग्राम
प्रश्न 2(ख).
sp³ संकरण में बन्ध कोण कितना होता है ?
उत्तर:
.
sp³ संकरण में बन्ध कोण 109°28' (या 109.5°) होता है।
प्रश्न 2(ग).
सक्रिय द्रव्यमान किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
किसी पदार्थ की प्रति लीटर विलयन में घुली हुई मोलों की संख्या को उसका 'सक्रिय द्रव्यमान' (Active Mass) या मोलर सांद्रता कहते हैं।
सूत्र: सक्रिय द्रव्यमान = (ग्राम में भार) / (अणुभार × आयतन लीटर में) [मात्रक: मोल/लीटर]
प्रश्न 2(घ).
बेयर अभिकर्मक का उपयोग किसके परीक्षण में किया जाता है ?
उत्तर:
.
बेयर अभिकर्मक (ठंडा व तनु क्षारीय KMnO₄ का विलयन) का उपयोग कार्बनिक यौगिकों में 'असंतृप्तता' (Unsaturation - द्वि-बंध या त्रि-बंध की उपस्थिति) के परीक्षण के लिए किया जाता है।
प्रश्न 3(क).
क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
.
क्रोमियम (Cr, परमाणु क्रमांक = 24) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अर्धपूरित (half-filled) कक्षकों के स्थायित्व के कारण अपवाद स्वरूप निम्न होता है:
Cr (24) = 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ 4s¹ (या [Ar] 3d⁵ 4s¹)
प्रश्न 3(ख).
d-ब्लॉक के तत्वों को कितना श्रेणियों में बाँटा गया है ? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
.
d-ब्लॉक के तत्वों को 4 श्रेणियों में बाँटा गया है:
1. 3d श्रेणी (प्रथम संक्रमण श्रेणी): Sc (21) से Zn (30)
2. 4d श्रेणी (द्वितीय संक्रमण श्रेणी): Y (39) से Cd (48)
3. 5d श्रेणी (तृतीय संक्रमण श्रेणी): La (57), Hf (72) से Hg (80)
4. 6d श्रेणी (चतुर्थ संक्रमण श्रेणी): Ac (89), Rf (104) से Cn (112) [अपूर्ण/नवीन तत्व]
प्रश्न 3(ग).
H₂S₂O₈ में S की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
H₂S₂O₈ (मार्शल अम्ल) में 2 ऑक्सीजन परमाणु परॉक्साइड बंध (-O-O-) में होते हैं।
मान माना S की ऑक्सीकरण संख्या = x
2(+1) + 2(x) + 6(-2) + 2(-1) = 0
2 + 2x - 12 - 2 = 0
2x - 12 = 0
2x = +12
x = +6
अतः H₂S₂O₈ में सल्फर (S) की ऑक्सीकरण संख्या +6 है।
प्रश्न 3(घ).
कार्बनायन के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
.
कार्बनायन (Carbanion - ऋण आवेशित कार्बन युक्त समूह):
1. मेथिल कार्बनायन (CH₃⁻)
2. एथिल कार्बनायन (CH₃CH₂⁻)
प्रश्न 4(क).
गुणित अनुपात के नियम को उदाहरण सहित समझाइए ।
उत्तर:
.
1. नियम (Law of Multiple Proportions):
"जब दो तत्व आपस में संयोग करके दो या दो से अधिक यौगिक बनाते हैं, तो एक तत्व के भिन्न-भिन्न भार जो दूसरे तत्व के निश्चित भार से संयोग करते हैं, परस्पर एक सरल गुणित अनुपात में होते हैं।"
2. उदाहरण:
कार्बन (C) और ऑक्सीजन (O) मिलकर दो यौगिक CO और CO₂ बनाते हैं।
• CO में: 12 ग्राम C, 16 ग्राम O से संयोग करता है।
• CO₂ में: 12 ग्राम C, 32 ग्राम O से संयोग करता है।
यहाँ C के निश्चित भार (12 ग्राम) से जुड़ने वाले ऑक्सीजन के भारों का अनुपात = 16 : 32 = 1 : 2 (जो कि एक सरल अनुपात है)।
प्रश्न 4(ख).
समआयन प्रभाव किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. परिभाषा:
किसी दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के विलयन में समान आयन वाला कोई प्रबल वैद्युत-अपघट्य मिलाने पर दुर्बल वैद्युत-अपघट्य का वियोजन (आयनन) और कम हो जाता है। इस परिघटना को 'समआयन प्रभाव' (Common Ion Effect) कहते हैं।
2. उदाहरण:
एसिटिक अम्ल (CH₃COOH - दुर्बल) के विलयन में सोडियम एसिटेट (CH₃COONa - प्रबल) मिलाने पर विलयन में CH₃COO⁻ आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे ली-शातेलिए के नियमानुसार CH₃COOH का आयनन घट जाता है।
प्रश्न 4(ग).
ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए ।
उत्तर:
.
1. परिभाषा:
वह अभिक्रिया जिसमें एक पदार्थ का ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन की हानि / ऑक्सीजन का जुड़ना) तथा दूसरे पदार्थ का अपचयन (इलेक्ट्रॉन की प्राप्ति / ऑक्सीजन की कमी) एक साथ होता है, उसे 'ऑक्सीकरण-अपचयन' या 'रेडॉक्स अभिक्रिया' (Redox Reaction) कहते हैं।
2. उदाहरण:
CuO + H₂ ⎯Δ→ Cu + H₂O
• CuO का Cu में 'अपचयन' होता है (ऑक्सीजन का ह्रास)।
• H₂ का H₂O में 'ऑक्सीकरण' होता है (ऑक्सीजन का योग)।
प्रश्न 4(घ).
निम्न के IUPAC नाम लिखिए -
(a) (CH₃)₂NH
(b) CH₃-C(Br)₂-CH₂-CH₃
(c) CH₃-CH₂-CONH₂
उत्तर:
.
(a) N-मेथिलमेथेनामाइन (N-Methylmethanamine)
(b) 2,2-डाइब्रोमोब्यूटेन (2,2-Dibromobutane)
(c) प्रोपेनामाइड (Propanamide)
प्रश्न 5(क).
वैद्युत संयोजक बन्ध को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
.
1. परिभाषा:
दो परमाणुओं के बीच एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनने वाले रासायनिक बंध को 'वैद्युत संयोजक बन्ध' या 'आयनिक बन्ध' (Electrovalent / Ionic Bond) कहते हैं।
2. उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl) का बनना
• Na (2, 8, 1) अपना 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na⁺ बनता है।
• Cl (2, 8, 7) वह 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनता है।
• Na⁺ + Cl⁻ → NaCl (स्थिर वैद्युत आकर्षण बल द्वारा जुड़े रहते हैं)।
प्रश्न 5(ख).
मूल आवर्त सारणी के लाभ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
मेंडलीव की मूल आवर्त सारणी के मुख्य लाभ:
1. तत्वों के अध्ययन में सुगमता: तत्वों को वर्गों और आवर्तों में विभाजित करने से उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों का अध्ययन सरल हो गया।
2. नए तत्वों की खोज में प्रेरणा: सारणी में छोड़े गए रिक्त स्थानों से नए तत्वों (जैसे- एका-ऐल्युमिनियम अर्थात गैलियम) की खोज तथा गुणों की भविष्यवाणी में मदद मिली।
3. सही परमाणु भारों के निर्धारण में सहायता: कुछ तत्वों (जैसे- बेरिलियम Be, इरिडियम आदि) के संदेहास्पद परमाणु भारों को संशोधित किया जा सका।
प्रश्न 5(ग).
टिण्ड्ल प्रभाव को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. परिभाषा:
जब प्रकाश पुंज को किसी कोलाइडी विलयन में से प्रवाहित किया जाता है, तो कोलाइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering) हो जाता है, जिससे प्रकाश का मार्ग चमकीला दिखाई देने लगता है। इस परिघटना को 'टिण्ड्ल प्रभाव' (Tyndall Effect) कहते हैं।
2. उदाहरण:
• अंधेरे कमरे में छोटे छिद्र से आते हुए प्रकाश में धूल के कणों का चमकना।
• घने जंगलों में छत्रक (Canopy) से सूर्य की किरणों का छनकर आना।
प्रश्न 5(घ).
निम्न पर टिप्पणी लिखिए -
(a) योगात्मक अभिक्रिया
(b) विलोपन अभिक्रिया
उत्तर:
.
(a) योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction):
वे अभिक्रियाएँ जिनमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर केवल एक उत्पाद बनाते हैं और कोई अन्य उप-उत्पाद नहीं बनता, योगात्मक अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। (प्रायः असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों में पाई जाती है।)
उदाहरण: CH₂=CH₂ + H₂ ⎯(Ni/Δ)→ CH₃-CH₃ (एथेन)
(b) विलोपन अभिक्रिया (Elimination Reaction):
वे अभिक्रियाएँ जिनमें किसी अणु के दो निकटवर्ती परमाणुओं या समूहों का निष्कासन होता है, जिससे अणु में असंतृप्तता (द्वि-बंध/त्रि-बंध) उत्पन्न होती है, विलोपन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: CH₃-CH₂-OH ⎯(सांद्र H₂SO₄/170°C)→ CH₂=CH₂ + H₂O
प्रश्न 6(क).
आधुनिक आवर्त नियम क्या है ? आधुनिक आवर्त सारणी की विशेषताओं तथा कमियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
1. आधुनिक आवर्त नियम (Moseley's Law):
"तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों (Atomic Numbers) के आवर्ती फलन होते हैं।"
2. आधुनिक आवर्त सारणी की विशेषताएँ:
• यह तत्वों के मौलिक गुण 'परमाणु क्रमांक' पर आधारित है।
• इसमें तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु क्रमांक के क्रम में रखा गया है।
• समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्वों को एक ही वर्ग में रखा गया है।
• तत्वों को s, p, d और f चार ब्लॉकों में विभाजित किया गया है।
3. कमियाँ:
• हाइड्रोजन का स्थान: हाइड्रोजन को वर्ग 1 और वर्ग 17 दोनों के गुणों से समानता के बावजूद निश्चित स्थान नहीं मिला।
• लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स को मुख्य आवर्त सारणी के बाहर नीचे रखा गया है।
• हीलियम (1s²) का विन्यास s-ब्लॉक का है, किंतु इसे p-ब्लॉक (अक्रिय गैसों) के साथ रखा गया है।
अथवा
प्रश्न 6(क).
समआयन प्रभाव क्या है ? गुणात्मक विश्लेषण में समआयन प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. समआयन प्रभाव:
दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के विलयन में समान आयन युक्त प्रबल वैद्युत-अपघट्य मिलाने पर दुर्बल वैद्युत-अपघट्य का आयनन दब (घट) जाता है।
2. गुणात्मक विश्लेषण (Qualitative Analysis) में उपयोग:
• द्वितीय समूह के धनायनों का अवक्षेपण:
H₂S गैस के साथ HCl (प्रबल) मिलाया जाता है। HCl से प्राप्त H⁺ आयन के समआयन प्रभाव के कारण H₂S का आयनन कम हो जाता है, जिससे केवल द्वितीय समूह के कटायनों के सल्फाइड (जैसे CuS, PbS) अवक्षेपित होते हैं जिनकी विलेयता गुणनफल कम होती है।
• तृतीय समूह के धनायनों का अवक्षेपण:
NH₄OH के साथ NH₄Cl मिलाया जाता है। NH₄⁺ के समआयन प्रभाव से OH⁻ की सांद्रता नियंत्रित रहती है, जिससे केवल तृतीय समूह के हाइड्रॉक्साइड [Al(OH)₃, Fe(OH)₃] अवक्षेपित होते हैं।
प्रश्न 6(ख).
कक्ष तथा कक्षक में अन्तर स्पष्ट कीजिए। S, P, तथा d कक्षकों की आकृति एवं विन्यास को समझाइए ।
उत्तर:
.
1. कक्ष (Orbit) तथा कक्षक (Orbital) में अन्तर:
• कक्ष: नाभिक के चारों ओर का वह निश्चित वृत्ताकार पथ जिसमें इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाता है (2D अवधारणा)।
• कक्षक: नाभिक के चारों ओर का वह त्रि-आयामी (3D) क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन पाए जाने की प्रायिकता अधिकतम होती है।
2. s, p, तथा d कक्षकों की आकृति व विन्यास:
• s-कक्षक:
- आकृति: गोलाकार (Spherical) और अदैशिक।
- विन्यास: इसमें केवल 1 कक्षक होता है (l = 0, m = 0)।
• p-कक्षक:
- आकृति: डम्बलाकार (Dumbbell shaped)।
- विन्यास: इसमें 3 कक्षक (pₓ, p_y, p_z) होते हैं, जो परस्पर लंबवत् अक्षों पर स्थित होते हैं।
• d-कक्षक:
- आकृति: द्विडम्बलाकार (Double Dumbbell shaped)।
- विन्यास: इसमें 5 कक्षक (dₓy, d_yz, d_zx, d_(x²-y²), d_z²) होते हैं।
अथवा
प्रश्न 6(ख).
सम-विदलन तथा विषम-विदलन को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. सम-विदलन (Homolytic Cleavage):
जब सहसंयोजी बंध इस प्रकार टूटता है कि बंध का एक-एक इलेक्ट्रॉन दोनों बंधित परमाणुओं के पास चला जाता है, तो इसे सम-विदलन कहते हैं। इससे 'मुक्त मूलक' (Free Radicals) बनते हैं।
उदाहरण: Cl - Cl ⎯(प्रकाश/UV)→ Cl• + Cl• (क्लोरीन मुक्त मूलक)
2. विषम-विदलन (Heterolytic Cleavage):
जब सहसंयोजी बंध इस प्रकार टूटता है कि बंध के दोनों इलेक्ट्रॉन अधिक विद्युत-ऋणात्मक परमाणु के पास चले जाते हैं, तो इसे विषम-विदलन कहते हैं। इससे 'धनायन' और 'ऋणायन' (आयन) बनते हैं।
उदाहरण: CH₃ - Cl → CH₃⁺ (कार्बोधनायन) + Cl⁻ (क्लोराइड आयन)
प्रश्न 7(क).
बेन्जीन बनाने की दो विधियाँ लिखिए। इसके प्रमुख गुण तथा उपयोग लिखिए। सम्बन्धित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
.
1. बेन्जीन बनाने की विधियाँ:
(i) फिनोल के निर्जलीकरण द्वारा:
फिनोल को जिंक रज (Zn dust) के साथ आसवित करने पर बेन्जीन बनती है।
C₆H₅OH + Zn ⎯Δ→ C₆H₆ + ZnO
(ii) सोडियम बेन्जोएट के सोडालाइम द्वारा शुष्क आसवन से:
C₆H₅COONa + NaOH ⎯(CaO/Δ)→ C₆H₆ + Na₂CO₃
2. प्रमुख गुण:
• यह एक रंगहीन, ज्वलनशील द्रव है।
• यह इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं (जैसे- नाइट्रोकरण) दर्शाती है।
C₆H₆ + HNO₃ ⎯(सांद्र H₂SO₄)→ C₆H₅NO₂ (नाइट्रोबेन्जीन) + H₂O
3. उपयोग:
• प्रयोगशाला में विलायक के रूप में।
• डाइ, औषधि एवं बहुलकों के निर्माण में।
अथवा
प्रश्न 7(क).
ऑक्सीकरण संख्या विधि द्वारा संतुलित कीजिए -
FeCl₃ + H₂S ⟶ FeCl₂ + 2HCl + S
उत्तर:
.
दिए गए समीकरण को ऑक्सीकरण संख्या विधि से संतुलित करना:
1. ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन पहचानें:
• Fe (+3 से +2): 1 इकाई की कमी (अपचयन)
• S (-2 से 0): 2 इकाई की वृद्धि (ऑक्सीकरण)
2. ऑक्सीकरण व अपचयन में परिवर्तन बराबर करना:
FeCl₃ की तरफ 2 से गुणा करेंगे ताकि Fe की कमी 2 हो जाए।
2FeCl₃ + H₂S ⟶ 2FeCl₂ + HCl + S
3. अन्य परमाणुओं (Cl तथा H) को संतुलित करना:
बाएँ पक्ष में Cl = 6 है, अतः दाएँ पक्ष में 2HCl लिखेंगे।
संतुलित समीकरण:
2FeCl₃ + H₂S ⟶ 2FeCl₂ + 2HCl + S
प्रश्न 7(ख).
20°C पर PbSO₄ की जल में विलेयता 0.0303 ग्राम/लीटर है तो इसी ताप पर इसके विलेयता गुणनफल की गणना कीजिए। (PbSO₄ का अणुभार = 303)
उत्तर:
.
1. विलेयता को मोल/लीटर (S) में बदलना:
S = (ग्राम/लीटर में विलेयता) / अणुभार
S = 0.0303 / 303 = 1 × 10⁻⁴ मोल/लीटर
2. PbSO₄ का आयनन:
PbSO₄(s) ⇌ Pb²⁺(aq) + SO₄²⁻(aq)
[Pb²⁺] = S, [SO₄²⁻] = S
3. विलेयता गुणनफल (K_sp) की गणना:
K_sp = [Pb²⁺][SO₄²⁻] = S × S = S²
K_sp = (1 × 10⁻⁴)² = 1 × 10⁻⁸
उत्तर: PbSO₄ का विलेयता गुणनफल = 1 × 10⁻⁸ मोल²/लीटर²
अथवा
प्रश्न 7(ख).
एक कार्बनिक यौगिक में C, H तथा N का भारत्मक अनुपात 9 : 1 : 3.5 है। यदि यौगिक का अणुभार 122 है, तो यौगिक का मूलानुपाती सूत्र तथा आण्विक सूत्र क्या है ? (H=1, C=12, N=14)
उत्तर:
.
1. मूलानुपाती सूत्र (Empirical Formula) की गणना:
तत्व भार अनुपात परमाणु भार मोलो की आपेक्षिक संख्या सरलतम अनुपात
C 9 12 9 / 12 = 0.75 0.75 / 0.25 = 3
H 1 1 1 / 1 = 1.00 1.00 / 0.25 = 4
N 3.5 14 3.5 / 14 = 0.25 0.25 / 0.25 = 1
मूलानुपाती सूत्र = C₃H₄N
2. आण्विक सूत्र (Molecular Formula) की गणना:
• मूलानुपाती सूत्र भार = (3 × 12) + (4 × 1) + (1 × 14) = 36 + 4 + 14 = 54
• अणुभार = 122 (प्रश्न अनुसार)
• n = अणुभार / मूलानुपाती सूत्र भार = 122 / 54 ≈ 2.26 ≈ 2 (या निकटतम पूर्णांक 2)
अणु सूत्र = n × (मूलानुपाती सूत्र) = 2 × (C₃H₄N) = C₆H₈N₂
उत्तर:
• मूलानुपाती सूत्र = C₃H₄N
• आण्विक सूत्र = C₆H₈N₂