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UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2025 APP Code

कक्षा 11वीं · रसायन विज्ञान · 2024 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

1. C6H12O6 ग्लूकोज का सम्भावित मूलानुपाती सूत्र होता है -

(A) CHO

(B) CHO2

(C) CH2O

(D) CH3O

उत्तर:

सही विकल्प: (C) CH2O

व्याख्या: ग्लूकोज का अणुसूत्र C6H12O6 है। इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या का सरलतम अनुपात 6 : 12 : 6 = 1 : 2 : 1 है। अतः इसका मूलानुपाती सूत्र CH2O है।

प्रश्न 2.

2. एक उदासीन परमाणु बना होता है -

(A) केवल प्रोटॉन

(B) केवल इलेक्ट्रॉन

(C) प्रोटॉन + न्यूट्रॉन

(D) प्रोटॉन + न्यूट्रॉन + इलेक्ट्रॉन

उत्तर:

सही विकल्प: (D) प्रोटॉन + न्यूट्रॉन + इलेक्ट्रॉन

व्याख्या: एक उदासीन परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन स्थित होते हैं और नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते हैं।

प्रश्न 3.

3. कैथोड किरणों में होते हैं -

(A) इलेक्ट्रॉन

(B) प्रोटॉन

(C) न्यूट्रॉन

(D) उपरोक्त कोई नहीं

उत्तर:

सही विकल्प: (A) इलेक्ट्रॉन

व्याख्या: कैथोड किरणें ऋणावेशित सूक्ष्म कणों का प्रवाह होती हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन कहा जाता है।

प्रश्न 4.

4. निम्नलिखित में से कौन सही सम्बन्ध है -

(A) λ = E / V

(B) E = mc²

(C) λ = h / mv

(D) Δx × Δp = h / 4π

उत्तर:

सही विकल्प: (C) λ = h / mv

व्याख्या: दे ब्रॉग्ली समीकरण के अनुसार किसी गतिशील कण की तरंगदैर्ध्य λ = h / mv होती है, जहाँ h प्लांक स्थिरांक, m द्रव्यमान तथा v वेग है।

प्रश्न 5.

5. d उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है -

(A) 2

(B) 6

(C) 10

(D) 14

उत्तर:

सही विकल्प: (C) 10

व्याख्या: d उपकोश में कुल 5 कक्षक होते हैं और प्रत्येक कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन समा सकते हैं, इसलिए d उपकोश में अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 6.

6. K कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है -

(A) 2

(B) 3

(C) 4

(D) 1

उत्तर:

सही विकल्प: (A) 2

व्याख्या: K कोश के लिए मुख्य क्वांटम संख्या n = 1 होती है। किसी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2n² होती है, अतः 2(1)² = 2 इलेक्ट्रॉन।

प्रश्न 1.

(वर्णनात्मक).

1. (क) s, p, d, f में इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या होगी?

(ख) हुण्ड का नियम लिखिए?

(ग) रासायनिक साम्यावस्था एक गतिशील साम्य है। स्पष्ट कीजिए।

(घ) CH3COOH, CH3CH2COOH का IUPAC पद्धति के नाम लिखिए।

(ङ) अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया को उदाहरण द्वारा समझाइए।

(च) द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम लिखिए।

(छ) हाइड्रोजन आबन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर:

(क) s, p, d, f उपकोशों में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या:

s उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2

p उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 6

d उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 10

f उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 14

(ख) हुण्ड का अधिकतम बहुफलता का नियम:

किसी भी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक नहीं होता है, जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए। साथ ही, इन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का चक्रण समानान्तर होना चाहिए।

(ग) रासायनिक साम्यावस्था एक गतिशील साम्य है:

साम्यावस्था पर अग्र अभिक्रिया का वेग और प्रतीप (पश्च) अभिक्रिया का वेग आपस में बराबर होता है। इस अवस्था में अभिक्रिया रुकती नहीं है, बल्कि दोनों दिशाओं में समान वेग से लगातार चलती रहती है। चूंकि अभिकारकों और उत्पादों की सांद्रता स्थिर रहती है परन्तु अभिक्रिया निरंतर जारी रहती है, इसलिए इसे गतिशील साम्य कहते हैं।

(घ) IUPAC नाम:

1. CH3COOH का IUPAC नाम: एथेनोइक अम्ल (Ethanoic acid)

2. CH3CH2COOH का IUPAC नाम: प्रोपेनोइक अम्ल (Propanoic acid)

(ङ) अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया:

ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जो केवल एक ही दिशा में (केवल अग्र दिशा में) संपन्न होती हैं तथा जिनमें अभिकारक लगभग पूर्णतः उत्पादों में बदल जाते हैं, अनुत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

उदाहरण: AgNO3 + NaCl -> AgCl + NaNO3 (सिल्वर क्लोराइड का सफेद अवक्षेप बनता है जो पुनः अभिकारकों में नहीं बदलता।)

(च) द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम:

गुलडबर्ग तथा वागे के अनुसार, "स्थिर ताप पर किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर अभिकारकों के सक्रिय द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होती है।"

यदि अभिक्रिया A + B -> उत्पाद हो, तो:

अभिक्रिया की दर r ∝ [A] [B]

या r = k [A] [B] (जहाँ k वेग स्थिरांक है।)

(छ) हाइड्रोजन आबन्ध:

जब हाइड्रोजन परमाणु किसी अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व (जैसे F, O, N) से सहसंयोजक आबन्ध द्वारा जुड़ा होता है, तो आबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक विद्युत-ऋणात्मक परमाणु की ओर विस्थापित हो जाता है। इससे हाइड्रोजन पर आंशिक धनावेश आ जाता है। यह धनावेशित हाइड्रोजन परमाणु पास के दूसरे अणु के विद्युत-ऋणात्मक परमाणु को एक दुर्बल आकर्षण बल द्वारा आकर्षित करता है, जिसे हाइड्रोजन आबन्ध कहते हैं।

उदाहरण: जल (H2O) के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबन्ध:

... H - O - H ... H - O - H ... H - O - H ...

प्रश्न 2.

(वर्णनात्मक).

2. (क) द्विध्रुव आघूर्ण किसे कहते हैं? उदाहरण द्वारा समझाइए?

(ख) सिग्मा आबन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए?

(ग) पाई आबन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए।

(घ) संकरण को उदाहरण द्वारा समझाइए?

(ङ) बोर का परमाणु मॉडल समझाइए?

(च) इलेक्ट्रॉन की तरंग एवं कणीय प्रकृति को समझाने वाले प्रयोग की व्याख्या कीजिए?

(छ) निम्नलिखित में से अवस्था फलनों और पथ फलनों की पहचान कीजिए? एंट्रॉपी, एन्थैल्पी, ऊष्मा, ताप

उत्तर:

(क) द्विध्रुव आघूर्ण:

किसी ध्रुवीय सहसंयोजक अणु में किसी एक परमाणु पर उपस्थित आवेश के परिमाण (q) तथा दोनों आवेशों के केन्द्रों के बीच की दूरी (d) के गुणनफल को द्विध्रुव आघूर्ण (μ) कहते हैं।

सूत्र: μ = q × d

इसकी इकाई देबाई (Debye, D) होती है।

उदाहरण: HCl अणु में हाइड्रोजन पर आंशिक धनावेश तथा क्लोरीन पर आंशिक ऋणावेश होने के कारण इसका द्विध्रुव आघूर्ण 1.03 D होता है।

(ख) सिग्मा (σ) आबन्ध:

जब दो परमाणुओं के कक्षक अपनी अंतर-नाभिकीय अक्ष पर एक-दूसरे से आमने-सामने (अक्षीय अतिव्यापन) करते हैं, तो बने आबन्ध को सिग्मा आबन्ध कहते हैं। यह एक मजबूत आबन्ध होता है।

उदाहरण: H2 अणु का निर्माण, जिसमें दो हाइड्रोजन परमाणुओं के 1s कक्षक अक्षीय अतिव्यापन करते हैं।

(ग) पाई (π) आबन्ध:

जब दो परमाणुओं के p-कक्षक अंतर-नाभिकीय अक्ष के लम्बवत् पार्श्वीय अतिव्यापन करते हैं, तो बने आबन्ध को पाई आबन्ध कहते हैं। यह सिग्मा आबन्ध से दुर्बल होता है।

उदाहरण: एथिलीन (C2H4) अणु में दो कार्बन परमाणुओं के बीच एक सिग्मा आबन्ध के साथ एक पाई आबन्ध उपस्थित होता है।

(घ) संकरण (Hybridization):

जब किसी परमाणु के लगभग समान ऊर्जा वाले दो या दो से अधिक कक्षक आपस में मिलकर समान ऊर्जा और समान आकृति वाले उतने ही नए कक्षक बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।

उदाहरण: मेथेन (CH4) अणु के निर्माण में कार्बन का एक 2s तथा तीन 2p कक्षक मिलकर 4 समान sp³ संकर कक्षक बनाते हैं।

(ङ) बोर का परमाणु मॉडल:

1. परमाणु के केन्द्र में एक छोटा धनावेशित नाभिक होता है।

2. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा वाली वृत्ताकार कक्षाओं (K, L, M, N) में घूमते हैं।

3. इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग mvr = nh / 2π होता है।

4. जब तक इलेक्ट्रॉन अपनी निश्चित कक्षा में रहता है, वह ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण नहीं करता।

5. बाहर से ऊर्जा मिलने पर इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर में चला जाता है तथा वापस आते समय निश्चित आवृत्ति का प्रकाश उत्सर्जित करता है।

(च) इलेक्ट्रॉन की द्वैत प्रकृति (कणीय एवं तरंग प्रकृति):

1. कणीय प्रकृति: इलेक्ट्रॉन की कणीय प्रकृति की पुष्टि प्रकाश-वैद्युत प्रभाव तथा कॉम्पटन प्रभाव द्वारा होती है। जब इलेक्ट्रॉन किसी पर्दे से टकराते हैं तो चमक उत्पन्न करते हैं जो कण होने का प्रमाण है।

2. तरंग प्रकृति: इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति की पुष्टि डेविसन तथा जर्मर के प्रयोग द्वारा हुई, जिसमें इलेक्ट्रॉनों के पुंज का निकिल क्रिस्टल द्वारा विवर्तन देखा गया। विवर्तन केवल तरंगों का गुण है।

(छ) पहचान:

अवस्था फलन: एंट्रॉपी, एन्थैल्पी, ताप

पथ फलन: ऊष्मा

प्रश्न 3.

3. मेथेन की चतुष्फलकीय संरचना बनाइए तथा इसमें H - C - H कोण का मान भी लिखिए?

उत्तर:

चित्र:

केन्द्रीय कार्बन परमाणु sp3हाइड्रोजन परमाणुहाइड्रोजन परमाणुहाइड्रोजन परमाणुH-C-H कोण 109.5 degree
मेथेन CH4 की चतुष्फलकीय संरचना

लिखित उत्तर:

1. मेथेन (CH4) अणु में केन्द्रीय कार्बन परमाणु sp³ संकरित अवस्था में होता है।

2. कार्बन के चार sp³ संकर कक्षक अंतरिक्ष में एक समचतुष्फलक के चार कोनों की ओर निर्देशित रहते हैं।

3. प्रत्येक sp³ संकर कक्षक हाइड्रोजन के 1s कक्षक के साथ अतिव्यापन करके C-H सिग्मा आबन्ध बनाता है।

4. मेथेन अणु में H - C - H आबन्ध कोण का मान 109.5° (या 109° 28') होता है।

5. इसकी ज्यामिति पूर्णतः समचतुष्फलकीय (Tetrahedral) होती है।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

अथवा

आवर्त सारणी के दीर्घ स्वरूप को तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से सम्बन्धित कीजिए। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी को कितने भागों में बाँटा गया है? प्रत्येक भाग का वर्णन कीजिए?

उत्तर:

1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आवर्त सारणी का सम्बन्ध:

आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है:

- आवर्त की संख्या: तत्व के बाह्यतम कोश की मुख्य क्वांटम संख्या (n) उसके आवर्त को व्यक्त करती है।

- वर्ग की संख्या: बाह्यतम कोश में उपस्थित संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या से तत्व का वर्ग निर्धारित होता है।

2. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी का वर्गीकरण:

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी को 4 मुख्य ब्लॉकों में बाँटा गया है:

(i) s-ब्लॉक के तत्व:

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन s-उपकोश में प्रवेश करता है। इनका सामान्य विन्यास ns¹⁻² होता है। इसमें वर्ग 1 (क्षार धातुएँ) और वर्ग 2 (क्षारीय मृदा धातुएँ) के तत्व शामिल हैं।

(ii) p-ब्लॉक के तत्व:

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन p-उपकोश में प्रवेश करता है। इनका सामान्य विन्यास ns² np¹⁻⁶ होता है। इसमें वर्ग 13 से 18 तक के तत्व (धातुएँ, उपधातुएँ, अधातुएँ तथा उत्कृष्ट गैसें) आते हैं।

(iii) d-ब्लॉक के तत्व (संक्रमण तत्व):

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश से ठीक अंदर वाले कोश के d-उपकोश में भरता है। इनका सामान्य विन्यास (n-1)d¹⁻¹⁰ ns¹⁻² होता है। ये वर्ग 3 से 12 तक स्थित हैं।

(iv) f-ब्लॉक के तत्व (आंतरिक संक्रमण तत्व):

वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन (n-2) के f-उपकोश में प्रवेश करता है। इनका सामान्य विन्यास (n-2)f¹⁻¹⁴ (n-1)d⁰⁻¹ ns² होता है। इन्हें आवर्त सारणी के नीचे दो क्षैतिज पंक्तियों में रखा गया है (लैन्थेनाइड और ऐक्टिनाइड श्रेणियाँ)।

प्रश्न 4.

4. भाप आसवन विधि को सिद्धान्त सहित समझाइए?

उत्तर:

भाप आसवन विधि (Steam Distillation):

1. सिद्धान्त:

भाप आसवन विधि का प्रयोग ऐसे कार्बनिक पदार्थों के शोधन के लिए किया जाता है जो:

- जल में सर्वथा अघुलनशील होते हैं।

- भाप के साथ वाष्पशील होते हैं।

- अपने क्वथनांक पर या उससे पहले अपघटित हो जाते हैं।

डाल्टन के आंशिक दाब के नियमानुसार, जब दो अघुलनशील द्रवों (जल + कार्बनिक द्रव) का मिश्रण गर्म किया जाता है, तो मिश्रण का कुल वाष्प दाब P = P1 + P2 होता है (जहाँ P1 जल का वाष्प दाब तथा P2 द्रव का वाष्प दाब है)।

जब कुल वाष्प दाब P वायुमंडलीय दाब (760 mm Hg) के बराबर हो जाता है, तो मिश्रण उबलने लगता है। चूंकि P1 + P2 = 760 mm है, इसलिए P2 का मान 760 mm से कम होता है। अतः कार्बनिक द्रव अपने सामान्य क्वथनांक से बहुत कम ताप पर ही उबलकर वाष्पीकृत हो जाता है और अपघटित होने से बच जाता है।

2. उपयोग:

ऐनिलीन (Aniline), नाइट्रोबेन्जीन, तारपीन का तेल आदि का शोधन भाप आसवन विधि द्वारा किया जाता है।

अथवा

निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए—

(i) विलोपन अभिक्रियाएँ

(ii) संक्षारण

उत्तर:

(i) विलोपन अभिक्रियाएँ (Elimination Reactions):

ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें किसी अणु के दो पास वाले परमाणुओं या समूहों का निष्कासन होता है और अणु में असंतृप्तता (द्वि-आबन्ध या त्रि-आबन्ध) उत्पन्न होती है, विलोपन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

उदाहरण: एथिल ऐल्कोहॉल को सांद्र H2SO4 के साथ 170°C ताप पर गर्म करने पर जल का एक अणु निकल जाता है और एथिलीन बनती है:

CH3-CH2-OH -> CH2=CH2 + H2O (170°C पर, सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में)

(ii) संक्षारण (Corrosion):

वायुमंडल की नमी, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य गैसों की क्रिया द्वारा धातुओं का धीरे-धीरे नष्ट होना अथवा उनके अवांछनीय यौगिकों (जैसे ऑक्साइड, कार्बोनेट) में बदलना संक्षारण कहलाता है।

उदाहरण: लोहे पर जंग लगना (Fe2O3·xH2O का बनना), तांबे की सतह पर हरे रंग की परत जमना तथा चांदी का काला पड़ना।

रोकथाम के उपाय: जस्तीकरण (Galvanization), पेंट या ग्रीस लगाना तथा विद्युत लेपन।

प्रश्न 5.

5. संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त के आधार पर CH4 व C2H2 अणु के विरचन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त (VBT) के आधार पर अणुओं का विरचन:

1. मेथेन (CH4) अणु का विरचन:

- कार्बन परमाणु का सामान्य विन्यास: 1s² 2s² 2px¹ 2py¹ 2pz⁰

- उत्तेजित अवस्था में विन्यास: 1s² 2s¹ 2px¹ 2py¹ 2pz¹

- संकरण: कार्बन का एक 2s तथा तीन 2p कक्षक आपस में मिलकर समान ऊर्जा वाले 4 sp³ संकर कक्षक बनाते हैं। ये चारों कक्षक समचतुष्फलक के चार कोनों की ओर 109.5° कोण पर स्थित होते हैं।

- आबन्ध निर्माण: कार्बन के ये चारों sp³ संकर कक्षक चार हाइड्रोजन परमाणुओं के 1s कक्षकों के साथ अक्षीय अतिव्यापन करके 4 C-H सिग्मा (σ) आबन्ध बनाते हैं।

- ज्यामिति: समचतुष्फलकीय (Tetrahedral)।

2. एसिटिलीन (C2H2) अणु का विरचन:

- उत्तेजित अवस्था में प्रत्येक कार्बन का विन्यास: 1s² 2s¹ 2px¹ 2py¹ 2pz¹

- संकरण: प्रत्येक कार्बन का एक 2s तथा एक 2p कक्षक संकरित होकर 2 sp संकर कक्षक बनाते हैं जो 180° के कोण पर रेखीय रूप में स्थित होते हैं। 2py तथा 2pz कक्षक असंकरित रहते हैं।

- C-C एवं C-H σ-आबन्ध: दोनों कार्बन परमाणुओं के एक-एक sp संकर कक्षक के अतिव्यापन से C-C σ-आबन्ध बनता है। दूसरा sp संकर कक्षक H के 1s कक्षक से अतिव्यापन करके C-H σ-आबन्ध बनाता है।

- π-आबन्ध निर्माण: दोनों कार्बन परमाणुओं पर उपस्थित दो असंकरित p-कक्षक (2py तथा 2pz) आपस में पार्श्वीय अतिव्यापन करके दो C-C π-आबन्ध बनाते हैं।

- ज्यामिति: रेखीय (Linear)। दोनों कार्बन के बीच त्रि-आबन्ध (C≡C) होता है जिसमें एक σ और दो π आबन्ध होते हैं।

अथवा

क्या होता है जब ?

(i) टालुईन की क्षारीय KMnO4 से क्रिया करते हैं?

(ii) एसिटिलीन को रक्त तप्त नली पर प्रवाहित करते हैं

(iii) निर्जलीय AlCl3 की उपस्थिति में बेन्जीन को एसिटिल क्लोराइड के साथ गर्म करते हैं।

उत्तर:

(i) जब टालुईन की क्रिया क्षारीय KMnO4 से करते हैं:

टालुईन की पार्श्व मेथिल श्रृंखला ऑक्सीकृत हो जाती है और बेन्जोइक अम्ल बनता है।

अभिक्रिया समीकरण:

C6H5CH3 + 3[O] -> C6H5COOH + H2O (क्षारीय KMnO4 की उपस्थिति में)

(ii) जब एसिटिलीन को रक्त तप्त नली पर प्रवाहित करते हैं:

एसिटिलीन के तीन अणु आपस में बहुलीकृत होकर बेन्जीन का निर्माण करते हैं।

अभिक्रिया समीकरण:

3 C2H2 -> C6H6 (रक्त तप्त लोहे की नली, 600°C ताप पर)

(iii) जब निर्जलीय AlCl3 की उपस्थिति में बेन्जीन को एसिटिल क्लोराइड के साथ गर्म करते हैं:

यह फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण अभिक्रिया है, जिससे ऐसिटोफीनोन बनता है।

अभिक्रिया समीकरण:

C6H6 + CH3COCl -> C6H5COCH3 + HCl (निर्जलीय AlCl3 की उपस्थिति में)

प्रश्न 7.

दीर्घाकार आवर्त सारणी तत्वों को कितने ऊर्ध्वाधर स्तम्भों में बाँटा गया हैं-

(A) 8

(B) 10

(C) 9

(D) 18

उत्तर:

सही विकल्प: (D) 18

व्याख्या: दीर्घाकार आवर्त सारणी में तत्वों को 18 ऊर्ध्वाधर स्तम्भों (वर्गों या समूहों) में विभाजित किया गया है।

प्रश्न 8.

s ब्लॉक के तत्वों के समूह हैं-

(A) I A, II A

(B) I B, II B

(C) III B, IV B

(D) VI B, VII A

उत्तर:

सही विकल्प: (A) I A, II A

व्याख्या: s-ब्लॉक के अंतर्गत आवर्त सारणी के प्रथम दो समूह I A (क्षार धातुएँ) और II A (क्षारीय मृदा धातुएँ) आते हैं।

प्रश्न 9.

आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त निम्नलिखित में से किसको व्यक्त करता है?

(A) परमाणु क्रमांक

(B) परमाणु द्रव्यमान

(C) मुख्य क्वांटम संख्या

(D) द्विगंशी क्वांटम संख्या

उत्तर:

सही विकल्प: (C) मुख्य क्वांटम संख्या

व्याख्या: आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त संख्या (Period number) बाह्यतम संयोजी कोश की मुख्य क्वांटम संख्या (n) को व्यक्त करती है।

प्रश्न 10.

न्यूनतम आयनिक त्रिज्या होगी-

(A) N³⁻

(B) B³⁺

(C) O²⁻

(D) F⁻

उत्तर:

सही विकल्प: (B) B³⁺

व्याख्या: B³⁺ आयन पर उच्च धनावेश होने के कारण इसका प्रभावी नाभिकीय आवेश सबसे अधिक होता है तथा कोशों की संख्या भी कम होती है, जिससे इसकी आयनिक त्रिज्या न्यूनतम होती है।

प्रश्न 11.

तत्व जो धनायन नहीं बना सकता-

(A) H

(B) Cu

(C) F

(D) Ca

उत्तर:

सही विकल्प: (C) F

व्याख्या: फ्लोरीन (F) आवर्त सारणी का सर्वाधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है, जो केवल इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (F⁻) बनाता है और कभी धनायन नहीं बनाता।

प्रश्न 12.

हैलोजन क्रियाशीलता का सही क्रम है-

(A) F > Cl > Br > I

(B) I > Br > Cl > F

(C) F > Br > Cl > I

(D) Cl > I > Br > F

उत्तर:

सही विकल्प: (A) F > Cl > Br > I

व्याख्या: हैलोजन समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने तथा विद्युतऋणात्मकता घटने के कारण क्रियाशीलता घटती है, अतः क्रियाशीलता का सही क्रम F > Cl > Br > I है।

प्रश्न 13.

कैल्शियम के संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या है -

(A) 2

(B) 4

(C) 6

(D) 8

उत्तर:

सही विकल्प: (A) 2

व्याख्या: कैल्शियम (परमाणु क्रमांक = 20) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 8, 2 होता है, अतः इसके बाह्यतम (संयोजी) कोश में 2 इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 14.

जालक ऊर्जा सर्वाधिक होगी -

(A) LiBr

(B) LiI

(C) LiCl

(D) LiF

उत्तर:

सही विकल्प: (D) LiF

व्याख्या: आयनों का आकार जितना छोटा होता है, जालक ऊर्जा उतनी ही अधिक होती है; फ्लोराइड आयन का आकार सबसे छोटा होने के कारण LiF की जालक ऊर्जा सर्वाधिक होगी।

प्रश्न 15.

जहाँ बर्फ पिघलती है, तो इसकी एंट्रॉपी -

(A) घटती है

(B) बढ़ती है

(C) शून्य हो जाती है

(D) स्थिर रहती है

उत्तर:

सही विकल्प: (B) बढ़ती है

व्याख्या: बर्फ (ठोस) के पिघलकर जल (द्रव) में बदलने पर कणों की अव्यवस्था (यादृच्छिकता) बढ़ती है, जिससे एंट्रॉपी में वृद्धि होती है।

प्रश्न 16.

निम्नलिखित में से किसकी एंट्रॉपी सबसे कम होती है -

(A) ठोस

(B) द्रव

(C) गैस

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

सही विकल्प: (A) ठोस

व्याख्या: ठोस अवस्था में कण अत्यधिक क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित स्थिति में होते हैं, अतः इनमें अव्यवस्था न्यूनतम होने के कारण एंट्रॉपी सबसे कम होती है।

प्रश्न 17.

कपूर को वाष्पीकृत करने पर इसकी एंट्रॉपी -

(A) घटती है

(B) बढ़ती है

(C) स्थिर रहती है

(D) शून्य हो जाती है

उत्तर:

सही विकल्प: (B) बढ़ती है

व्याख्या: वाष्पीकरण के दौरान पदार्थ वाष्प (गैस) अवस्था में बदलता है, जिससे अणुओं की गतिशीलता और अव्यवस्था बढ़ती है, अतः एंट्रॉपी बढ़ती है।

प्रश्न 18.

वेग स्थिरांक ताप बढ़ाने पर -

(A) घटेगा

(B) बढ़ेगा

(C) अपरिवर्तित रहेगा

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

सही विकल्प: (B) बढ़ेगा

व्याख्या: ताप बढ़ाने पर अणुओं की गतिज ऊर्जा तथा प्रभावी टक्करों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे अभिक्रिया का वेग स्थिरांक बढ़ता है।

प्रश्न 19.

जल के अणु में, ऑक्सीजन के संयोजी कोश में कितने इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं।

(A) 2

(B) 4

(C) 6

(D) 8

उत्तर:

सही विकल्प: (B) 4

व्याख्या: जल (H₂O) के अणु में ऑक्सीजन परमाणु के संयोजी कोश में कुल 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं (2 आबंधी युग्म और 2 एकाकी युग्म), जिससे कुल 4 इलेक्ट्रॉन युग्म बनते हैं।

प्रश्न 20.

निम्न में से उदासीन जलीय विलयन होता है-

(A) KCl

(B) CH₃COONa

(C) Na₂CO₃

(D) NH₄Cl

उत्तर:

सही विकल्प: (A) KCl

व्याख्या: KCl प्रबल अम्ल (HCl) और प्रबल क्षार (KOH) से बना लवण है, इसलिए इसका जलीय विलयन उदासीन होता है।

प्रश्न 1.

(क)

s, p, d, f में इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या होगी ?

उत्तर:

विभिन्न उपकोशों में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या निम्नलिखित होती है:

1. s उपकोश: अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन (1 कक्षक)

2. p उपकोश: अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉन (3 कक्षक)

3. d उपकोश: अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन (5 कक्षक)

4. f उपकोश: अधिकतम 14 इलेक्ट्रॉन (7 कक्षक)

किसी उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2(2l + 1) सूत्र द्वारा ज्ञात की जाती है, जहाँ l दिगंशी क्वांटम संख्या है।

प्रश्न 1.

(ख)

हुण्ड का नियम लिखिए ?

उत्तर:

हुण्ड का अधिकतम बहुलता का नियम:

इस नियम के अनुसार, "किसी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन (Pairing) तब तक नहीं होता है, जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए अर्थात सभी कक्षक अयुग्मित न हो जाएँ।"

साथ ही, सभी अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का चक्रण समानांतर होता है।

उदाहरण:

नाइट्रोजन (N, परमाणु क्रमांक = 7) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:

1s², 2s², 2px¹, 2py¹, 2pz¹

यहाँ 2p उपकोश के तीनों कक्षकों में पहले एक-एक इलेक्ट्रॉन प्रवेश करता है, उसके बाद ही युग्मन संभव होता है।

प्रश्न 1.

(ग)

रासायनिक साम्यावस्था एक गतिशील साम्य है। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

रासायनिक साम्यावस्था को गतिशील साम्य कहा जाता है क्योंकि साम्यावस्था प्राप्त होने पर अभिक्रिया रुकती नहीं है। इस अवस्था में अग्र अभिक्रिया का वेग तथा प्रतीप अभिक्रिया का वेग परस्पर बराबर हो जाता है।

अग्र अभिक्रिया का वेग = प्रतीप अभिक्रिया का वेग

इस अवस्था में अभिकारक तथा उत्पाद की सांद्रताएँ समय के साथ स्थिर रहती हैं, परंतु सूक्ष्म (आणविक) स्तर पर दोनों विपरीत अभिक्रियाएँ समान दर से निरन्तर चलती रहती हैं। इसलिए रासायनिक साम्य एक गतिशील साम्य होता है।

प्रश्न 1.

(घ)

CH3COOH, CH3CH2COOH का IUPAC पद्धति के नाम लिखिए।

उत्तर:

1. CH3COOH

यौगिक में 2 कार्बन परमाणु हैं तथा मुख्य क्रियात्मक समूह कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH) है।

IUPAC नाम: एथेनोइक अम्ल (Ethanoic acid)

2. CH3CH2COOH

यौगिक में 3 कार्बन परमाणु हैं तथा मुख्य क्रियात्मक समूह कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH) है।

IUPAC नाम: प्रोपेनोइक अम्ल (Propanoic acid)

प्रश्न 1.

(ङ)

अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया को उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर:

अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया:

वह रासायनिक अभिक्रिया जो केवल एक ही दिशा (अग्र दिशा) में संपन्न होती है तथा जिसमें अभिकारक पूर्णतः उत्पादों में परिवर्तित हो जाते हैं, अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया कहलाती है। इन अभिक्रियाओं को समीकरण में एक ही दिशा वाले तीर (→) द्वारा दर्शाया जाता है।

समीकरण:

AgNO3 + NaCl → AgCl↓ + NaNO3

व्याख्या:

सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) और सोडियम क्लोराइड (NaCl) की अभिक्रिया से सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का अवक्षेप बनता है। यह अभिक्रिया केवल अग्र दिशा में होती है और उत्पाद पुनः मूल अभिकारक नहीं बनाते हैं।

प्रश्न 1.

(च)

द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम लिखिए।

उत्तर:

द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम:

यह नियम गुल्डबर्ग तथा वागे द्वारा प्रतिपादित किया गया था।

इस नियम के अनुसार, "स्थिर ताप पर किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर अभिकारकों के सक्रिय द्रव्यमानों (मोलर सांद्रताओं) के गुणनफल के समानुपाती होती है।"

यदि एक सामान्य अभिक्रिया निम्न हो:

A + B ⇌ C + D

अभिक्रिया की दर (r) ∝ [A] [B]

अर्थात r = k [A] [B]

जहाँ [A] तथा [B] अभिकारकों के सक्रिय द्रव्यमान हैं और k अभिक्रिया का वेग स्थिरांक है।

प्रश्न 1.

(छ)

हाइड्रोजन आबन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर:

हाइड्रोजन आबन्ध:

जब हाइड्रोजन परमाणु किसी अत्यधिक ऋणविद्युती तत्व (जैसे F, O, या N) से सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है, तो साझा इलेक्ट्रॉन युग्म ऋणविद्युती परमाणु की ओर विस्थापित हो जाता है। इससे हाइड्रोजन पर आंशिक धनावेश तथा ऋणविद्युती परमाणु पर आंशिक ऋणावेश आ जाता है। इस प्रकार एक अणु का धनावेशित हाइड्रोजन परमाणु दूसरे अणु के ऋणविद्युती परमाणु के साथ एक दुर्बल आकर्षण बल द्वारा बंध जाता है, जिसे हाइड्रोजन आबन्ध कहते हैं। इसे बिंदुदार रेखा (...) द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

उदाहरण:

जल (H2O) के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबन्ध:

... H - O - H ... H - O - H ... H - O - H ...

H H H

व्याख्या:

जल में ऑक्सीजन की उच्च ऋणविद्युतता के कारण एक जल अणु का हाइड्रोजन परमाणु दूसरे जल अणु के ऑक्सीजन परमाणु से आकर्षण बल द्वारा जुड़कर जल को द्रव अवस्था प्रदान करता है।

प्रश्न 2(क).

द्विध्रुव आघूर्ण किसे कहते हैं ? उदाहरण द्वारा समझाइए ?

उत्तर:

किसी ध्रुवीय सहसंयोजक अणु में किसी एक ध्रुव के आवेश के परिमाण तथा दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी के गुणनफल को द्विध्रुव आघूर्ण (Dipole Moment) कहते हैं। इसे μ से प्रदर्शित करते हैं।

सूत्र:

द्विध्रुव आघूर्ण (μ) = आवेश (q) × दूरी (d)

द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक डिबाई (Debye, D) होता है।

1 D = 3.3359 × 10⁻³⁰ C m

उदाहरण:

1. हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) अणु:

HCl अणु में क्लोरीन की विद्युतऋणात्मकता हाइड्रोजन से अधिक होती है। इसके कारण आबंध के इलेक्ट्रॉन युग्म क्लोरीन की ओर विस्थापित हो जाते हैं, जिससे H पर आंशिक धनावेश (δ+) तथा Cl पर आंशिक ऋणावेश (δ-) आ जाता है। यह एक ध्रुवीय अणु है और इसका द्विध्रुव आघूर्ण 1.03 D होता है।

2. जल (H₂O) अणु:

जल के अणु की आकृति मुड़ी हुई (V-आकार) होती है। इसमें दोनों O-H आबंधों के द्विध्रुव आघूर्ण एक ही दिशा में परिणामी आघूर्ण उत्पन्न करते हैं, जिससे H₂O का कुल द्विध्रुव आघूर्ण 1.85 D होता है।

प्रश्न 2(ख).

सिग्मा आबन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए ?

उत्तर:

जब दो परमाणुओं के संयोजी कक्षक अपने अंतरानाभिकीय अक्ष पर एक-दूसरे के साथ अंतःछोर या अक्षीय अतिव्यापन करते हैं, तो बने सहसंयोजक आबंध को सिग्मा (σ) आबंध कहते हैं। सिग्मा आबंध पाई (π) आबंध की तुलना में अधिक मजबूत और स्थायी होता है।

अतिव्यापन के प्रकार:

1. s-s अतिव्यापन

2. s-p अतिव्यापन

3. p-p अक्षीय अतिव्यापन

उदाहरण:

हाइड्रोजन (H₂) अणु का बनना:

हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s¹ होता है। जब दो हाइड्रोजन परमाणु परस्पर समीप आते हैं, तो उनके 1s कक्षक अंतरानाभिकीय अक्ष पर अक्षीय अतिव्यापन करके एक सिग्मा (σ) आबंध बनाते हैं:

H(1s¹) + H(1s¹) → H - H (σ आबंध)

प्रश्न 2(ग).

पाई आबन्ध को उदाहरण द्वारा समझाइए।

उत्तर:

जब दो परमाणुओं के p-कक्षक अंतरानाभिकीय अक्ष के लंबवत रहकर पार्श्वीय अतिव्यापन करते हैं, तो बने सहसंयोजक आबंध को पाई (π) आबंध कहते हैं।

मुख्य विशेषताएँ:

1. पाई आबंध केवल तब बनता है जब परमाणुओं के मध्य पहले से एक सिग्मा (σ) आबंध उपस्थित हो।

2. पाई आबंध सिग्मा आबंध की तुलना में दुर्बल होता है।

उदाहरण:

ऑक्सीजन (O₂) अणु का बनना:

ऑक्सीजन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2px² 2py¹ 2pz¹ होता है।

जब दो ऑक्सीजन परमाणु परस्पर जुड़ते हैं, तो उनके 2py कक्षक अक्षीय अतिव्यापन करके एक सिग्मा (σ) आबंध बनाते हैं। तत्पश्चात् उनके 2pz कक्षक पार्श्वीय अतिव्यापन करके एक पाई (π) आबंध बनाते हैं।

इस प्रकार O₂ अणु में एक σ आबंध और एक π आबंध (O = O) उपस्थित होता है।

प्रश्न 2(घ).

संकरण को उदाहरण द्वारा समझाइए ?

उत्तर:

किसी परमाणु के संयोजी कोश में लगभग समान ऊर्जा वाले विभिन्न परमाणु कक्षकों के आपस में मिश्रित होकर समान ऊर्जा एवं समान आकृति वाले नए कक्षकों का निर्माण करने की प्रक्रिया को संकरण (Hybridization) कहते हैं। निर्मित नए कक्षकों को संकर कक्षक कहते हैं।

उदाहरण: sp³ संकरण (मेथेन, CH₄ अणु का बनना)

व्याख्या:

कार्बन की सामान्य अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 1s² 2s² 2px¹ 2py¹ 2pz⁰

उत्तेजित अवस्था में विन्यास: 1s² 2s¹ 2px¹ 2py¹ 2pz¹

उत्तेजित अवस्था में कार्बन का एक 2s कक्षक तथा तीन 2p कक्षक (2px, 2py, 2pz) आपस में संकरित होकर समान ऊर्जा वाले 4 sp³ संकर कक्षक बनाते हैं। ये चारों संकर कक्षक समचतुष्फलकीय रूप से 109° 28' के कोण पर व्यवस्थित रहते हैं।

ये 4 sp³ संकर कक्षक 4 हाइड्रोजन परमाणुओं के 1s कक्षकों के साथ अतिव्यापन करके 4 σ (C - H) आबंध बनाते हैं। अतः CH₄ अणु की आकृति चतुष्फलकीय होती है।

प्रश्न 2(ङ).

बोर का परमाणु मॉडल समझाइए ?

उत्तर:

नील्स बोर ने सन् 1913 में रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियों को दूर करने के लिए प्लांक के क्वांटम सिद्धांत के आधार पर अपना परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया। बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य अभिगृहीत निम्नलिखित हैं:

1. परमाणु के केंद्र में एक धनावेशित नाभिक होता है तथा इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं। इन कक्षाओं को मुख्य ऊर्जा स्तर या कोश (K, L, M, N...) कहते हैं।

2. इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग (mvr), h / (2π) का पूर्ण गुणज होता है:

mvr = n h / (2π)

(जहाँ m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, v = वेग, r = कक्षा की त्रिज्या, h = प्लांक स्थिरांक, n = 1, 2, 3... मुख्य क्वांटम संख्या)

3. निश्चित कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण नहीं करते हैं। इन कक्षाओं को स्थिर कक्षाएँ (Stationary orbits) कहते हैं।

4. जब परमाणु को बाहर से ऊर्जा दी जाती है, तो इलेक्ट्रॉन ऊर्जा अवशोषित करके उच्च ऊर्जा स्तर में चला जाता है। जब वह वापस निम्न ऊर्जा स्तर में लौटता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन विकिरण के रूप में करता है:

ΔE = E₂ - E₁ = hν

प्रश्न 2(च).

इलेक्ट्रॉन की तरंग एवं कणीय प्रकृति को समझाने वाले प्रयोग की व्याख्या कीजिए ?

उत्तर:

इलेक्ट्रॉन की द्वैती प्रकृति (Dual nature of electron) के अनुसार इलेक्ट्रॉन कण तथा तरंग दोनों की भाँति व्यवहार करता है। इसे निम्नलिखित प्रयोगों द्वारा समझा जा सकता है:

1. कणीय प्रकृति को दर्शाने वाला प्रयोग:

इलेक्ट्रॉन की कणीय प्रकृति को कैथोड किरणों के प्रभाव से सिद्ध किया जाता है।

प्रयोग: जब कैथोड किरणों (इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह) के मार्ग में एक हल्का पैडल पहिया रखा जाता है, तो वह पहिया घूमने लगता है। यह स्पष्ट करता है कि इलेक्ट्रॉन में द्रव्यमान (m) तथा संवेग (p = mv) होता है, जो इसकी कणीय प्रकृति को प्रमाणित करता है। इसके अलावा प्रकाश-वैद्युत प्रभाव भी कणीय प्रकृति को सिद्ध करता है।

2. तरंग प्रकृति को दर्शाने वाला प्रयोग:

इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति को डेविसन तथा जर्मर प्रयोग (Davisson and Germer Experiment) द्वारा सिद्ध किया गया।

प्रयोग: जब एक तीव्रगामी इलेक्ट्रॉन पुंज को निकल (Ni) के क्रिस्टल पर आपतित कराया गया, तो इलेक्ट्रॉन का विवर्तन प्राप्त हुआ। विवर्तन केवल तरंगों का गुण है। क्रिस्टल द्वारा प्राप्त विवर्तन प्रारूप की सहायता से जब इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य ज्ञात की गई, तो वह डी-ब्रॉग्ली सूत्र (λ = h / mv) द्वारा प्राप्त मान के बिल्कुल समान पाई गई। इससे इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति पूर्णतः सिद्ध होती है।

प्रश्न 2(छ).

निम्नलिखित में से अवस्था फलनों और पथ फलनों की पहचान कीजिए ? एंट्रॉपी, एन्थैल्पी, ऊष्मा, ताप

उत्तर:

अवस्था फलन (State Functions):

वे ऊष्मागतिक गुण जो केवल निकाय की प्रारंभिक और अंतिम अवस्था पर निर्भर करते हैं, उस पथ पर नहीं जिससे वह अवस्था प्राप्त की गई है।

दिए गए विकल्पों में से अवस्था फलन हैं:

1. एंट्रॉपी (Entropy)

2. एन्थैल्पी (Enthalpy)

3. ताप (Temperature)

पथ फलन (Path Functions):

वे ऊष्मागतिक गुण जो उस पथ या प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं जिसके द्वारा परिवर्तन होता है।

दिए गए विकल्पों में से पथ फलन है:

1. ऊष्मा (Heat)

प्रश्न 3.

मेथेन की चतुष्फलकीय संरचना बनाइए तथा इसमें H − C − H कोण का मान भी लिखिए?

उत्तर:

चित्र:

केंद्रीय कार्बन (C)शीर्ष हाइड्रोजन (H)वामावर्त हाइड्रोजन (H)दक्षिणावर्त हाइड्रोजन (H)
मेथेन (CH4) की चतुष्फलकीय संरचना

लिखित उत्तर:

1. मेथेन (CH₄) अणु में केंद्रीय कार्बन परमाणु sp³ संकरित अवस्था में होता है।

2. कार्बन परमाणु के संयोजी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो 4 हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ 4 सिग्मा (σ) सहसंयोजक बंध बनाते हैं।

3. इन चारों बंधों के बीच न्यूनतम प्रतिकर्षण रखने के लिए चारों हाइड्रोजन परमाणु एक सम-चतुष्फलक के चारों शीर्षों पर स्थित होते हैं।

4. मेथेन अणु में H − C − H कोण का मान 109.5° (या 109° 28') होता है।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

प्रश्न 3 (अथवा).

आवर्त सारणी के दीर्घ स्वरूप को तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से सम्बन्धित कीजिए। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी को कितने भागों में बाँटा गया है? प्रत्येक भाग का वर्णन कीजिए?

उत्तर:

आवर्त सारणी के दीर्घ स्वरूप और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में सम्बन्ध:

1. आवर्त (Period): किसी तत्व का मुख्य क्वांटम संख्या (n) मान उसके आवर्त की संख्या को प्रदर्शित करता है।

2. वर्ग (Group): बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा विन्यास तत्व के वर्ग को निर्धारित करता है।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी का विभाजन:

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी को 4 प्रमुख भागों (ब्लॉकों) में बाँटा गया है:

1. s-ब्लॉक (s-Block):

जिन तत्वों में अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के s-उपकोश में प्रवेश करता है, वे s-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns¹ से ns²

इसमें वर्ग 1 (क्षार धातुएं) तथा वर्ग 2 (क्षारीय मृदा धातुएं) शामिल हैं।

2. p-ब्लॉक (p-Block):

जिन तत्वों में अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के p-उपकोश में प्रवेश करता है, वे p-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: ns² np¹ से ns² np⁶

इसमें वर्ग 13 से वर्ग 18 तक के तत्व आते हैं (धातु, अधातु, उपधातु तथा उत्कृष्ट गैसें)।

3. d-ब्लॉक (d-Block) / संक्रमण तत्व:

जिन तत्वों में अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम से ठीक पहले (n-1) कोश के d-उपकोश में भरता है, वे d-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: (n-1)d¹⁻¹⁰ ns¹⁻²

इसमें वर्ग 3 से वर्ग 12 तक के तत्व आते हैं।

4. f-ब्लॉक (f-Block) / अंतर-संक्रमण तत्व:

जिन तत्वों में अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम से तीसरे (n-2) कोश के f-उपकोश में भरता है, वे f-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं।

सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: (n-2)f¹⁻¹⁴ (n-1)d⁰⁻¹ ns²

इसे आवर्त सारणी के नीचे दो क्षैतिज पंक्तियों में रखा गया है: लैंथेनाइड (4f) तथा ऐक्टिनाइड (5f)।

प्रश्न 4.

भाप आसवन विधि को सिद्धान्त सहित समझाइए?

उत्तर:

भाप आसवन (Steam Distillation):

भाप आसवन एक ऐसी पृथक्करण एवं शोधन विधि है जिसका उपयोग उन कार्बनिक द्रवों के शुद्धिकरण के लिए किया जाता है जो जल में अघुलनशील होते हैं, भाप के साथ वाष्पशील होते हैं तथा अपने क्वथनांक पर अपघटित हो जाते हैं (जैसे ऐनिलीन, नाइट्रोबेन्जीन, टारपीन का तेल आदि)।

सिद्धान्त:

1. जब जल में अघुलनशील किसी वाष्पशील कार्बनिक द्रव (A) में जल (B) की भाप प्रवाहित की जाती है, तो कुल वाष्प दाब (P) दोनों द्रवों के आंशिक वाष्प दाबों के योग के बराबर होता है:

P = Pₐ + Pᵦ

2. मिश्रण तब उबलने लगता है जब कुल वाष्प दाब (P) वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है।

3. चूंकि Pₐ + Pᵦ = P (वायुमंडलीय दाब), इसलिए Pₐ और Pᵦ दोनों ही वायुमंडलीय दाब से कम होते हैं।

4. अतः मिश्रण दोनों द्रवों के सामान्य क्वथनांकों से कम ताप पर ही उबलने लगता है। इससे कार्बनिक द्रव अपने क्वथनांक से कम ताप पर बिना अपघटित हुए भाप के साथ आसवित हो जाता है।

प्रश्न 4 (अथवा).

निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए—

(i) विलोपन अभिक्रियाएँ

(ii) संक्षारण

उत्तर:

(i) विलोपन अभिक्रियाएँ (Elimination Reactions):

वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें किसी संतृप्त यौगिक के अणु से दो समीपवर्ती परमाणु या समूह निकल जाते हैं और असंतृप्तता (द्विबंध या त्रिबंध) उत्पन्न होती है, विलोपन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

सन्तुलित समीकरण:

CH₃-CH₂-Br + KOH (ऐल्कोहॉली) → CH₂=CH₂ + KBr + H₂O

(ऐथिल ब्रोमाइड + पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड → ऐथीन + पोटैशियम ब्रोमाइड + जल)

शर्त: ऐल्कोहॉली KOH की उपस्थिति में गर्म करना।

(ii) संक्षारण (Corrosion):

वायुमंडल की नमी, ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड आदि गैसों की उपस्थिति में धातुओं की सतह का धीरे-धीरे अनैच्छिक रासायनिक यौगिकों (जैसे ऑक्साइड, कार्बोनेट, सल्फाइड) में बदलकर नष्ट होना संक्षारण कहलाता है।

उदाहरण: लोहे पर जंग (Rust) लगना।

सन्तुलित समीकरण:

4Fe + 3O₂ + 2xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O

(लोहा + ऑक्सीजन + जल vapor → सजल फेरिक ऑक्साइड / जंग)

शर्त: नमी (जल) एवं वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति।

प्रश्न 5.

संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त के आधार पर CH4 व C2H2 अणु के विरचन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

1. मेथेन (CH₄) अणु का विरचन:

कार्बन (Z = 6) की इलेक्ट्रॉनिक स्थिति:

आद्य अवस्था: 1s² 2s² 2px¹ 2py¹ 2pz⁰

उत्तेजित अवस्था: 1s² 2s¹ 2px¹ 2py¹ 2pz¹

कार्बन का एक 2s और तीन 2p कक्षक संकरित होकर 4 समान sp³ संकर कक्षक बनाते हैं।

ये 4 sp³ संकर कक्षक 4 हाइड्रोजन परमाणुओं के 1s कक्षकों के साथ सम्मुख अतिव्यापन (head-on overlap) करके 4 सिग्मा बंध (sp³-s σ-bond) बनाते हैं।

परिणामस्वरूप मेथेन की आकृति चतुष्फलकीय होती है तथा बंध कोण 109.5° होता है।

2. ऐसिटिलीन (C₂H₂) अणु का विरचन:

उत्तेजित अवस्था में कार्बन विन्यास: 1s² 2s¹ 2px¹ 2py¹ 2pz¹

प्रत्येक कार्बन परमाणु का एक 2s तथा एक 2p कक्षक संकरित होकर 2 sp संकर कक्षक बनाते हैं, जबकि 2py और 2pz कक्षक असंकरित रहते हैं।

बंध निर्माण प्रक्रिया:

(i) दोनों कार्बन परमाणुओं के एक-एक sp संकर कक्षक आपस में अतिव्यापन करके C-C सिग्मा बंध (sp-sp σ-bond) बनाते हैं।

(ii) दोनों कार्बन परमाणुओं के दूसरे sp संकर कक्षक H के 1s कक्षक से अतिव्यापन करके दो C-H सिग्मा बंध (sp-s σ-bond) बनाते हैं।

(iii) दोनों कार्बन परमाणुओं के असंकरित 2py और 2pz कक्षक आपस में पार्श्वीय अतिव्यापन (sideways overlap) करके 2 पाई बंध (π-bonds) बनाते हैं।

अतः C₂H₂ अणु में C≡C त्रिबंध (1 σ + 2 π) होता है और इसकी ज्यामिति रेखीय (180°) होती है।

प्रश्न 5 (अथवा).

क्या होता है जब ?

(i) टालुईन की क्षारीय KMnO4 से क्रिया करते हैं?

(ii) एसिटिलीन को रक्त तप्त नली पर प्रवाहित करते हैं

(iii) निर्जलीय AlCl3 की उपस्थिति में बेन्जीन को एसिटिल क्लोराइड के साथ गर्म करते हैं।

उत्तर:

(i) जब टालुईन की क्षारीय KMnO₄ से क्रिया करते हैं:

टालुईन की मिथाइल पार्श्व श्रृंखला ऑक्सीकृत होकर बेन्जोइक अम्ल बनाती है।

सन्तुलित समीकरण:

C₆H₅CH₃ + 3[O] (क्षारीय KMnO₄, ताप) → C₆H₅COOH + H₂O

(टालुईन → बेन्जोइक अम्ल + जल)

(ii) जब एसिटिलीन को रक्त तप्त नली पर प्रवाहित करते हैं:

एसिटिलीन के 3 अणु बहुलकीकृत होकर बेन्जीन का निर्माण करते हैं।

सन्तुलित समीकरण:

3 C₂H₂ (रक्त तप्त Fe नली, 873 K) → C₆H₆

(एसिटिलीन → बेन्जीन)

(iii) जब निर्जलीय AlCl₃ की उपस्थिति में बेन्जीन को एसिटिल क्लोराइड के साथ गर्म करते हैं:

फ्रीडेल-क्रॉफ्ट्स ऐसीलीकरण अभिक्रिया द्वारा एसिटोफीनोन बनता है।

सन्तुलित समीकरण:

C₆H₆ + CH₃COCl (निर्जलीय AlCl₃, ताप) → C₆H₅COCH₃ + HCl

(बेन्जीन + एसिटिल क्लोराइड → एसिटोफीनोन + हाइड्रोजन क्लोराइड)