(क) s, p, d, f उपकोशों में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या:
s उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2
p उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 6
d उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 10
f उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 14
(ख) हुण्ड का अधिकतम बहुफलता का नियम:
किसी भी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक नहीं होता है, जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए। साथ ही, इन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का चक्रण समानान्तर होना चाहिए।
(ग) रासायनिक साम्यावस्था एक गतिशील साम्य है:
साम्यावस्था पर अग्र अभिक्रिया का वेग और प्रतीप (पश्च) अभिक्रिया का वेग आपस में बराबर होता है। इस अवस्था में अभिक्रिया रुकती नहीं है, बल्कि दोनों दिशाओं में समान वेग से लगातार चलती रहती है। चूंकि अभिकारकों और उत्पादों की सांद्रता स्थिर रहती है परन्तु अभिक्रिया निरंतर जारी रहती है, इसलिए इसे गतिशील साम्य कहते हैं।
(घ) IUPAC नाम:
1. CH3COOH का IUPAC नाम: एथेनोइक अम्ल (Ethanoic acid)
2. CH3CH2COOH का IUPAC नाम: प्रोपेनोइक अम्ल (Propanoic acid)
(ङ) अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया:
ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जो केवल एक ही दिशा में (केवल अग्र दिशा में) संपन्न होती हैं तथा जिनमें अभिकारक लगभग पूर्णतः उत्पादों में बदल जाते हैं, अनुत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: AgNO3 + NaCl -> AgCl + NaNO3 (सिल्वर क्लोराइड का सफेद अवक्षेप बनता है जो पुनः अभिकारकों में नहीं बदलता।)
(च) द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम:
गुलडबर्ग तथा वागे के अनुसार, "स्थिर ताप पर किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर अभिकारकों के सक्रिय द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होती है।"
यदि अभिक्रिया A + B -> उत्पाद हो, तो:
अभिक्रिया की दर r ∝ [A] [B]
या r = k [A] [B] (जहाँ k वेग स्थिरांक है।)
(छ) हाइड्रोजन आबन्ध:
जब हाइड्रोजन परमाणु किसी अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व (जैसे F, O, N) से सहसंयोजक आबन्ध द्वारा जुड़ा होता है, तो आबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक विद्युत-ऋणात्मक परमाणु की ओर विस्थापित हो जाता है। इससे हाइड्रोजन पर आंशिक धनावेश आ जाता है। यह धनावेशित हाइड्रोजन परमाणु पास के दूसरे अणु के विद्युत-ऋणात्मक परमाणु को एक दुर्बल आकर्षण बल द्वारा आकर्षित करता है, जिसे हाइड्रोजन आबन्ध कहते हैं।
उदाहरण: जल (H2O) के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबन्ध:
... H - O - H ... H - O - H ... H - O - H ...