खण्ड-अ (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2024 A Code
कक्षा 11वीं · रसायन विज्ञान · 2024 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
H⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है-
(A) 1s⁰
(B) 1s¹
(C) 1s²
(D) 1s¹2s¹
उत्तर:
. (A) 1s⁰
(स्पष्टीकरण: हाइड्रोजन परमाणु (H) में 1 इलेक्ट्रॉन होता है (1s¹)। H⁺ बनने पर 1 इलेक्ट्रॉन निकल जाता है, जिससे विन्यास 1s⁰ हो जाता है।)
प्रश्न 1(ख).
1s² इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाला तत्व उपस्थित होगा -
(A) s-ब्लॉक से
(B) p-ब्लॉक से
(C) d-ब्लॉक से
(D) f-ब्लॉक से
उत्तर:
. (p-ब्लॉक से / s-ब्लॉक से)
(नोट: 1s² विन्यास हीलियम (He) का है। रासायनिक गुणों और अक्रिय गैस होने के आधार पर इसे आवर्त सारणी में p-ब्लॉक (वर्ग 18) में रखा गया है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर यह s-ब्लॉक से संबंधित है। प्रायोगिक उत्तर (B) p-ब्लॉक माना जाता है।)
प्रश्न 1(ग).
SO₂ और SO₃ में S- परमाणु में संकरण क्रमशः है -
(A) sp, sp²
(B) sp², sp²
(C) sp², sp³
(D) sp, sp³
उत्तर:
. (B) sp², sp²
(स्पष्टीकरण: SO₂ में S पर 2 सिग्मा बंध + 1 एकांकी युग्म = 3 (sp² संकरण); SO₃ में S पर 3 सिग्मा बंध + 0 एकांकी युग्म = 3 (sp² संकरण)।)
प्रश्न 1(घ).
प्रबल अम्ल व प्रबल क्षार की उदासीनीकरण ऊष्मा होती है-
(A) 13.7 किलो कैलोरी
(B) -13.7 किलो कैलोरी
(C) <13.7 किलो कैलोरी
(D) शून्य
उत्तर:
. (B) -13.7 किलो कैलोरी (या 13.7 kcal/mol)
प्रश्न 1(ङ).
निम्न में से ऐरोमैटिक यौगिक नहीं है-
(A) पिरिडीन
(B) नैफ्थलीन
(C) जाइलीन
(D) साइक्लोहेक्सेन
उत्तर:
. (D) साइक्लोहेक्सेन
प्रश्न 1(च).
ताप बढ़ाने पर ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में साम्य स्थिरांक का मान -
(A) बढ़ेगा
(B) घटेगा
(C) स्थिर रहेगा
(D) कुछ भी नहीं
उत्तर:
. (B) घटेगा
खण्ड-ब (वर्णनात्मक प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
आण्विक सूत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
वह रासायनिक सूत्र जो किसी यौगिक के एक अणु में उपस्थित विभिन्न तत्वों के परमाणुओं की वास्तविक संख्या (Actual Number) को व्यक्त करता है, उसे 'आण्विक सूत्र' (Molecular Formula) कहते हैं।
उदाहरण: ग्लूकोज का आण्विक सूत्र C₆H₁₂O₆ है।
प्रश्न 2(ख).
श्रोंडिंगर का तरंग समीकरण लिखिए।
उत्तर:
.
श्रोंडिंगर का तरंग समीकरण किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन के तरंग व्यवहार को दर्शाने वाला त्रिआयामी समीकरण है:
(∂²Ψ / ∂x²) + (∂²Ψ / ∂y²) + (∂²Ψ / ∂z²) + (8π²m / h²) (E - V) Ψ = 0
जहाँ:
• Ψ (साई) = तरंग फलन (Wave Function)
• m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
• h = प्लांक नियतांक
• E = कुल ऊर्जा
• V = स्थितिज ऊर्जा
• x, y, z = कार्टेशियन निर्देशांक
प्रश्न 2(ग).
ऑस्टवाल्ड तनुता नियम की सीमाएँ लिखिए।
उत्तर:
.
ऑस्टवाल्ड के तनुता नियम की मुख्य सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
1. यह नियम केवल दुर्बल वैद्युत अपघट्यों (Weak Electrolytes) जैसे CH₃COOH, NH₄OH आदि पर ही लागू होता है।
2. यह प्रबल वैद्युत अपघट्यों (Strong Electrolytes) पर लागू नहीं होता, क्योंकि उनका सभी सांद्रताओं पर लगभग पूर्ण आयनन हो जाता है।
प्रश्न 2(घ).
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम लिखिए।
उत्तर:
.
ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के अनुसार:
1. स्वतः प्रवर्धित (Spontaneous) या प्राकृतिक प्रक्रमों में ब्रह्मांड की एन्ट्रॉपी (Entropy) सदैव बढ़ती है।
2. केल्विन-प्लांक कथन: "किसी ऐसे इंजन का निर्माण असंभव है जो किसी स्रोत से ऊष्मा ग्रहण करके उसे पूर्णतः कार्य में बदल दे, बिना किसी अन्य प्रभाव के।"
प्रश्न 3(क).
परमाणु क्रमांक 107 तथा 112 का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
.
1. परमाणु क्रमांक 107:
• IUPAC नाम: अननिलसेप्टियम (Unnilseptium)
• संकेत: Uns (आधिकारिक नाम: Bohrium - Bh)
2. परमाणु क्रमांक 112:
• IUPAC नाम: अननिलबियम (Unnilbium)
• संकेत: Unb (आधिकारिक नाम: Copernicium - Cn)
प्रश्न 3(ख).
ऑक्सीकरण संख्या किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
किसी यौगिक में उपस्थित किसी परमाणु पर स्थित वह वास्तविक या काल्पनिक आवेश (Charge), जो अन्य परमाणुओं के अपने इलेक्ट्रॉनों के साथ अलग हो जाने पर उस परमाणु पर शेष रहता है, उसे उसकी 'ऑक्सीकरण संख्या' (Oxidation Number) कहते हैं।
उदाहरण: HCl में H की ऑक्सीकरण संख्या +1 तथा Cl की -1 होती है।
प्रश्न 3(ग).
मुक्त मूलक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
वह उदासीन परमाणु या परमाणुओं का समूह जिस पर एक विषम (अयुग्मित) इलेक्ट्रॉन (Unpaired Electron) उपस्थित होता है, उसे 'मुक्त मूलक' (Free Radical) कहते हैं। ये सहसंयोजक बंध के समांश विखंडन (Homolytic Fission) से बनते हैं।
उदाहरण: Cl• (क्लोरीन मुक्त मूलक), •CH₃ (मेथिल मुक्त मूलक)।
प्रश्न 3(घ).
Fe³⁺ तथा Mn²⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
.
1. Fe³⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
• Fe (Z = 26) का विन्यास: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁶ 4s² (या [Ar] 3d⁶ 4s²)
• Fe³⁺ (3 इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ (या [Ar] 3d⁵)
2. Mn²⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
• Mn (Z = 25) का विन्यास: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ 4s² (या [Ar] 3d⁵ 4s²)
• Mn²⁺ (2 इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ (या [Ar] 3d⁵)
प्रश्न 4(क).
Na₂CO₃·10H₂O (सोडियम कार्बोनेट डेका हाइड्रेट) के सूत्र द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
.
परमाणु भार: Na = 23, C = 12, O = 16, H = 1
Na₂CO₃·10H₂O का सूत्र द्रव्यमान (अणुभार):
= (2 × Na) + (1 × C) + (3 × O) + 10 × [(2 × H) + (1 × O)]
= (2 × 23) + (1 × 12) + (3 × 16) + 10 × [(2 × 1) + 16]
= 46 + 12 + 48 + 10 × [2 + 16]
= 106 + 10 × 18
= 106 + 180
= 286 u (या g/mol)
उत्तर: 286 amu
प्रश्न 4(ख).
वैद्युत संयोजी यौगिकों के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
.
वैद्युत संयोजी (आयनिक) यौगिकों के प्रमुख लक्षण:
1. उच्च गलनांक व क्वथनांक: आयनों के बीच मजबूत स्थिरवैद्युत आकर्षण बल होने के कारण इनके गलनांक और क्वथनांक उच्च होते हैं।
2. विद्युत चालकता: ये ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, परंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत के सुचालक होते हैं।
3. विलेयता: ये जल जैसे ध्रुवीय विलायकों में विलेय तथा अध्रुवीय विलायकों (जैसे बेन्जीन, ईथर) में अविलेय होते हैं।
4. कठोरता व भंगुरता: ये क्रिस्टलीय तथा भंगुर (Brittle) प्रकृति के होते हैं।
प्रश्न 4(ग).
निम्न की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए-
(i) C₆H₁₂O₆ में C
(ii) NH₄Cl में N
(iii) Cr₂O₇²⁻ में Cr
उत्तर:
.
(i) C₆H₁₂O₆ में C की ऑक्सीकरण संख्या:
मान लें C की ऑक्सीकरण संख्या = x
6(x) + 12(+1) + 6(-2) = 0
6x + 12 - 12 = 0
6x = 0 ⇒ x = 0
उत्तर: C की ऑक्सीकरण संख्या = 0
(ii) NH₄Cl में N की ऑक्सीकरण संख्या:
NH₄⁺ आयन में: x + 4(+1) = +1
x + 4 = +1
x = +1 - 4 = -3
उत्तर: N की ऑक्सीकरण संख्या = -3
(iii) Cr₂O₇²⁻ में Cr की ऑक्सीकरण संख्या:
2(x) + 7(-2) = -2
2x - 14 = -2
2x = -2 + 14 = +12
x = +6
उत्तर: Cr की ऑक्सीकरण संख्या = +6
प्रश्न 4(घ).
जल का आयनिक गुणनफल क्या है ? इसका 25°C पर मान लिखिए।
उत्तर:
.
परिभाषा:
स्थिर ताप पर जल में उपस्थित हाइड्रोजन आयनों [H⁺] तथा हाइड्रॉक्सिल आयनों [OH⁻] की सांद्रताओं (मोल/लीटर) के गुणनफल को 'जल का आयनिक गुणनफल' कहते हैं। इसे K_w से प्रदर्शित करते हैं।
समीकरण:
K_w = [H⁺] [OH⁻]
मान (25°C पर):
K_w = 1.0 × 10⁻¹⁴ mol² L⁻²
प्रश्न 5(क).
पाउली के अपवर्जन नियम को उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
पाउली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion Principle):
"किसी भी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं (n, l, m, s) के मान एक समान नहीं हो सकते। यदि प्रथम तीन क्वांटम संख्याओं (n, l, m) के मान समान भी हों, तो चक्रण क्वांटम संख्या (s) का मान अवश्य भिन्न होगा।"
उदाहरण (हीलियम परमाणु, 1s²):
• प्रथम इलेक्ट्रॉन के लिए: n = 1, l = 0, m = 0, s = +1/2
• द्वितीय इलेक्ट्रॉन के लिए: n = 1, l = 0, m = 0, s = -1/2
यहाँ दोनों इलेक्ट्रॉनों के लिए n, l, m के मान समान हैं, परंतु s का मान अलग-अलग (+1/2 और -1/2) है।
प्रश्न 5(ख).
सिग्मा तथा पाई बन्ध में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
सिग्मा (σ) और पाई (π) बंध में प्रमुख अंतर:
1. निर्माण का तरीका:
• सिग्मा (σ) बंध: कक्षकों के अक्षीय अतिव्यापन (Head-on / Axial Overlapping) से बनता है।
• पाई (π) बंध: कक्षकों के पार्श्वीय अतिव्यापन (Sideways / Lateral Overlapping) से बनता है।
2. मजबूत/स्थायित्व:
• सिग्मा (σ) बंध: यह एक मजबूत बंध (Strong Bond) होता है।
• पाई (π) बंध: यह सिग्मा की तुलना में दुर्बल बंध (Weak Bond) होता है।
3. स्वतंत्र अस्तित्व:
• सिग्मा (σ) बंध: यह अकेला स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में रह सकता है।
• पाई (π) बंध: यह हमेशा सिग्मा बंध बनने के बाद ही बनता है।
4. इलेक्ट्रॉन घनत्व:
• सिग्मा (σ) बंध: इलेक्ट्रॉन अभ्र अंतरनाभिकीय अक्ष के चारों ओर सममित होता है।
• पाई (π) बंध: इलेक्ट्रॉन अभ्र अंतरनाभिकीय अक्ष के ऊपर और नीचे दो तलों में फैला होता है।
प्रश्न 5(ग).
सम विदलन को उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
सम विदलन (Homolytic Fission):
"जब किसी सहसंयोजी आबंध का विखंडन इस प्रकार होता है कि बंध में भाग लेने वाले दोनों परमाणु अपना-अपना एक-एक इलेक्ट्रॉन लेकर अलग हो जाते हैं, तो इस प्रकार के विखंडन को सम विखंडन या सम विदलन कहते हैं।"
इस प्रक्रम में 'मुक्त मूलक' (Free Radicals) का निर्माण होता है।
उदाहरण:
सूर्य के प्रकाश (hν) या पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में क्लोरीन अणु (Cl₂) का विदलन:
Cl — Cl ⎯⎯⎯(hν)→ Cl• + Cl•
(यहाँ दो क्लोरीन मुक्त मूलक प्राप्त होते हैं)
प्रश्न 5(घ).
यदि Fe(OH)₃ का विलेयता गुणनफल स्थिरांक 1.1 × 10⁻³⁶ है, तो उसकी विलेयता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
दिया है:
K_sp [Fe(OH)₃] = 1.1 × 10⁻³⁶
Fe(OH)₃ का आयनन समीकरण:
Fe(OH)₃(s) ⇌ Fe³⁺(aq) + 3 OH⁻(aq)
माना Fe(OH)₃ की जल में विलेयता S मोल/लीटर है।
अतः:
[Fe³⁺] = S
[OH⁻] = 3S
विलेयता गुणनफल व्यंजक:
K_sp = [Fe³⁺] [OH⁻]³
K_sp = (S) × (3S)³
K_sp = S × 27S³ = 27S⁴
मान रखने पर:
27S⁴ = 1.1 × 10⁻³⁶
S⁴ = (1.1 × 10⁻³⁶) / 27
S⁴ = 0.04074 × 10⁻³⁶ = 4.074 × 10⁻³⁸
S = (4.074 × 10⁻³⁸)^(1/4)
S ≈ 1.42 × 10⁻¹⁰ मोल/लीटर
उत्तर: Fe(OH)₃ की विलेयता = 1.42 × 10⁻¹⁰ mol/L
प्रश्न 6(क).
बफर विलयन क्या है? एक अम्लीय बफर की बफर क्रिया उदाहरण सहित समझाइए। रक्त का pH मान कितना होता है ?
उत्तर:
.
1. बफर विलयन (Buffer Solution):
वह विलयन जो थोड़ा अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है, 'बफर विलयन' कहलाता है।
2. अम्लीय बफर (Acidic Buffer):
यह दुर्बल अम्ल तथा उसी अम्ल के प्रबल क्षार के साथ बने लवण का मिश्रण होता है।
उदाहरण: CH₃COOH (एसीटिक अम्ल) + CH₃COONa (सोडियम एसीटेट)
बफर क्रिया (Mechanism of Acidic Buffer):
विलयन में साम्यावस्थाएँ:
CH₃COONa → CH₃COO⁻ + Na⁺ (पूर्ण आयनन)
CH₃COOH ⇌ CH₃COO⁻ + H⁺ (आंशिक आयनन)
• अम्ल (H⁺) मिलाने पर: बाहर से मिलाए गए H⁺ आयन, विलयन में प्रचुर मात्रा में उपस्थित CH₃COO⁻ आयनों से क्रिया करके अवियोजित CH₃COOH बना लेते हैं, जिससे [H⁺] नहीं बढ़ता और pH अपरिवर्तित रहता है:
H⁺ + CH₃COO⁻ → CH₃COOH
• क्षार (OH⁻) मिलाने पर: मिलाए गए OH⁻ आयन, H⁺ आयनों से क्रिया करके जल (H₂O) बना लेते हैं। इस क्षति की पूर्ति के लिए CH₃COOH और अधिक वियोजित हो जाता है, जिससे pH अपरिवर्तित रहता है:
OH⁻ + H⁺ → H₂O
3. रक्त (Blood) का pH मान:
मानव रक्त का pH मान लगभग 7.4 (7.35 - 7.45) होता है।
अथवा
प्रश्न 6(क).
दीर्घ आवर्त नियम क्या है ? दीर्घ आवर्त सारणी की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
दीर्घ आवर्त नियम (Long Form Periodic Law):
"तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों (Atomic Numbers) के आवर्ती फलन होते हैं।"
दीर्घ आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएँ:
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित: यह सारणी तत्वों के बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर बनाई गई है।
2. आवर्त एवं वर्ग: इसमें 7 क्षैतिज पंक्तियाँ जिन्हें 'आवर्त' (Periods) और 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ जिन्हें 'वर्ग' (Groups) कहते हैं।
3. ब्लॉकों में विभाजन: तत्वों को अंतिम इलेक्ट्रॉन के प्रवेश के आधार पर 4 ब्लॉकों—s, p, d तथा f ब्लॉक में विभाजित किया गया है।
4. धातुओं और अधातुओं की स्थिति: बाईं ओर धातुएँ, दाईं ओर अधातुएँ तथा मध्य में उपधातु/संक्रमण धातुएँ स्थित हैं।
5. विषमताओं का निवारण: इसमें समस्थानिकों (Isotopes) को एक ही स्थान पर रखा गया है तथा असमान गुणों वाले तत्वों को अलग-अलग वर्गों में रखा गया है।
प्रश्न 6(ख).
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम लिखिए और इसके गणितीय निरूपण की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
.
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics):
"ऊष्मा ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है; इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।" (ऊर्जा संरक्षण का नियम)
गणितीय निरूपण की व्युत्पत्ति:
माना किसी निकाय की प्रारंभिक आंतरिक ऊर्जा U₁ है।
• यदि निकाय को q ऊष्मा दी जाती है, तो इसकी ऊर्जा बढ़कर (U₁ + q) हो जाती है।
• यदि निकाय पर w कार्य किया जाता है, तो इसकी अंतिम आंतरिक ऊर्जा U₂ हो जाती है:
U₂ = U₁ + q + w
U₂ - U₁ = q + w
चूँकि ΔU = U₂ - U₁ (आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन)
अतः, गणितीय रूप:
ΔU = q + w
(नोट: यदि निकाय द्वारा कार्य किया जाता है, तो ΔU = q - w)
अथवा
प्रश्न 6(ख).
संकरण किसे कहते हैं ? sp, sp² तथा sp³ संकरण को उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
संकरण (Hybridization):
"जब लगभग समान ऊर्जा वाले दो या दो से अधिक कक्षक परस्पर मिश्रित होकर समान ऊर्जा तथा समान आकृति के उतने ही नए कक्षक बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।"
1. sp संकरण:
• जब एक s तथा एक p कक्षक आपस में मिलते हैं, तो दो sp संकर कक्षक बनते हैं (बंध कोण = 180°, रेखीय ज्यामिति)।
• उदाहरण: BeCl₂, C₂H₂ (ऐसीटिलीन)।
2. sp² संकरण:
• जब एक s तथा दो p कक्षक आपस में मिलते हैं, तो तीन sp² संकर कक्षक बनते हैं (बंध कोण = 120°, त्रिकोणीय समतलीय ज्यामिति)।
• उदाहरण: BF₃, C₂H₄ (ऐथिलीन)।
3. sp³ संकरण:
• जब एक s तथा तीन p कक्षक आपस में मिलते हैं, तो चार sp³ संकर कक्षक बनते हैं (बंध कोण = 109°28', समचतुष्फलकीय ज्यामिति)।
• उदाहरण: CH₄ (मेथेन), H₂O, NH₃।
प्रश्न 7(क).
रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल क्या है? इसकी प्रमुख कमियों को दूर करने के लिए बोर ने किस प्रकार का मॉडल प्रस्तुत किया ? समझाइए।
उत्तर:
.
1. रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल:
• परमाणु का अधिकांश भाग खोखला होता है।
• परमाणु के केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म, धनावेशित भाग होता है जिसे 'नाभिक' (Nucleus) कहते हैं।
• इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं।
2. रदरफोर्ड मॉडल की कमियाँ:
• स्थायित्व की व्याख्या न होना: मैक्सवेल के विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत के अनुसार चक्कर लगाता इलेक्ट्रॉन निरंतर ऊर्जा उत्सर्जित करेगा और अंततः नाभिक में गिर जाएगा।
• रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या न होना।
3. नील्स बोर का परमाणु मॉडल (कमियों का निवारण):
• निश्चित कक्षाएँ: इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित, गैर-विकिरणी (Non-radiating) कक्षाओं में ही चक्कर लगाते हैं जिन्हें 'स्थिर कक्षाएँ' कहते हैं।
• कोणीय संवेग का क्वांटीकरण: इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकते हैं जिनमें उनका कोणीय संवेग h/(2π) का पूर्ण गुणज होता है:
mvr = nh / (2π)
• ऊर्जा का उत्सर्जन/अवशोषण: इलेक्ट्रॉन जब अपनी निश्चित कक्षा में घूमता है तो ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण नहीं करता। ऊर्जा का परिवर्तन केवल एक कक्षा से दूसरी कक्षा में संक्रमण (Transition) के समय ही होता है:
ΔE = E₂ - E₁ = hν
अथवा
प्रश्न 7(क).
नाइट्रोजन आकलन की जेल्डाल विधि में 0.5 ग्राम यौगिक में मुक्त NH₃, 10 मिली 1M H₂SO₄ को उदासीन करती है। यौगिक में N की % मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
दिया है:
• कार्बनिक यौगिक का द्रव्यमान (w) = 0.5 ग्राम
• H₂SO₄ का आयतन (V) = 10 mL
• H₂SO₄ की मोलरता (M) = 1 M
H₂SO₄ की नार्मलता (N):
द्विक्षारकीय अम्ल (H₂SO₄) के लिए, नार्मलता = 2 × मोलरता = 2 × 1 = 2 N
उदासीनीकरण के लिए प्रयुक्त अम्ल की तुल्यांकी मात्रा = 10 mL of 2 N H₂SO₄
जेल्डाल विधि द्वारा N की प्रतिशतता का सूत्र:
% N = (1.4 × N_acid × V_acid) / w
मान रखने पर:
% N = (1.4 × 2 × 10) / 0.5
% N = 28 / 0.5 = 56 %
उत्तर: यौगिक में नाइट्रोजन की प्रतिशतता = 56%
प्रश्न 7(ख).
ऐथिलीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। इसके प्रमुख गुण तथा उपयोग लिखिए। संबंधित रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
उत्तर:
.
1. प्रयोगशाला विधि:
प्रयोगशाला में ऐथिलीन (C₂H₄) गैस एथिल अल्कोहल (C₂H₅OH) को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) के आधिक्य के साथ 160°C - 170°C ताप पर गर्म करके बनाई जाती है।
अभिक्रिया के पद:
(i) C₂H₅OH + H₂SO₄ ⎯⎯(100°C)→ C₂H₅HSO₄ + H₂O
(ii) C₂H₅HSO₄ ⎯⎯(160°-170°C)→ C₂H₄ (ऐथिलीन) + H₂SO₄
कुल समीकरण:
C₂H₅OH ⎯⎯(सांद्र H₂SO₄ / 170°C)→ C₂H₄ + H₂O
2. रासायनिक गुण:
(i) हाइड्रोजन का योग (हाइड्रोजनीकरण):
C₂H₄ + H₂ ⎯⎯(Ni / 200°C)→ C₂H₆ (एथेन)
(ii) ब्रोमीन जल से अभिक्रिया:
C₂H₄ + Br₂ → CH₂Br - CH₂Br (1,2-डाइब्रोमोएथेन) - (ब्रोमीन का लाल-भूरा रंग उड़ जाता है)
3. उपयोग:
• कच्चे फलों को पकाने में।
• मस्टर्ड गैस (युद्ध गैस) बनाने में।
• पॉलीथीन (Polyethylene) प्लास्टिक के निर्माण में।
अथवा
प्रश्न 7(ख).
CuCl₂·2H₂O का प्रतिशत संघटन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
.
परमाणु भार: Cu = 63.5, Cl = 35.5, H = 1, O = 16
1. CuCl₂·2H₂O का अणुभार ज्ञात करना:
अणुभार = Cu + 2(Cl) + 2(H₂O)
= 63.5 + 2(35.5) + 2(2 × 1 + 16)
= 63.5 + 71 + 2(18)
= 63.5 + 71 + 36
= 170.5 g/mol
2. प्रत्येक तत्व का प्रतिशत संघटन:
• कॉपर (Cu) का %:
% Cu = (63.5 / 170.5) × 100 ≈ 37.24%
• क्लोरीन (Cl) का %:
% Cl = (71 / 170.5) × 100 ≈ 41.64%
• हाइड्रोजन (H) का %:
% H = (4 / 170.5) × 100 ≈ 2.35%
• ऑक्सीजन (O) का %:
% O = (32 / 170.5) × 100 ≈ 18.77%
उत्तर:
• Cu = 37.24%
• Cl = 41.64%
• H = 2.35%
• O = 18.77%