खण्ड-अ (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Chemistry Annual paper 2023
कक्षा 11वीं · रसायन विज्ञान · 2023 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
पोटैशियम डाई क्रोमेट में क्रोमियम की ऑक्सीकरण संख्या है-
a. +2
b. +3
c. +4
d. +6
उत्तर:
. d. +6
(गणना: K₂Cr₂O₇ में, 2(+1) + 2x + 7(-2) = 0 ⇒ 2 + 2x - 14 = 0 ⇒ 2x = 12 ⇒ x = +6)
प्रश्न 1(ख).
A, B, C तथा D चार विलयनों के pH मान क्रमश: 8.5, 3.5, 4.5 तथा 7.5 हैं। इसमें सर्वाधिक अम्लीय विलयन है-
a. A
b. B
c. C
d. D
उत्तर:
. b. B
(कारण: pH मान जितना कम होगा, विलयन उतना ही अधिक अम्लीय होगा।)
प्रश्न 1(ग).
अभिक्रिया H₂ + I₂ ⇌ 2HI के लिए साम्य स्थिरांक (K) का मात्रक होगा-
a. मोल लीटर⁻¹
b. लीटर मोल⁻¹
c. कोई नहीं
d. मोल-लीटर
उत्तर:
. c. कोई नहीं
(कारण: Δn = 2 - (1 + 1) = 0, अतः साम्य स्थिरांक K का कोई मात्रक नहीं होगा।)
प्रश्न 1(घ).
HPO₄²⁻ का संयुग्मी अम्ल है-
a. H₂PO₄⁻
b. PO₄³⁻
c. H₃PO₄
d. H₃PO₃
उत्तर:
. a. H₂PO₄⁻
(कारण: संयुग्मी अम्ल बनाने के लिए H⁺ जोड़ा जाता है: HPO₄²⁻ + H⁺ → H₂PO₄⁻)
प्रश्न 1(ङ).
I.U.P.A.C. पद्धति में (CH₃)₄C का नाम है-
a. टेट्रा मेथिल पेंटेन
b. पेंटेन
c. 2, 2 डाई मेथिल प्रोपेन
d. नियो पेंटेन
उत्तर:
. c. 2, 2 डाई मेथिल प्रोपेन
खण्ड-ब (वर्णनात्मक प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
अनुत्क्रमणीय तथा उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं में अन्तर उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
.
1. अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया (Irreversible Reaction):
• यह अभिक्रिया केवल एक ही दिशा (अग्र दिशा) में चलती है।
• इसमें अभिकारक पूर्णतः उत्पादों में परिवर्तित हो जाते हैं।
• उदाहरण: AgNO₃ + NaCl → AgCl↓ + NaNO₃
2. उत्क्रमणीय अभिक्रिया (Reversible Reaction):
• यह अभिक्रिया अग्र तथा पश्च दोनों दिशाओं में समान परिस्थितियों में होती है।
• यह कभी भी पूर्णता को प्राप्त नहीं होती तथा साम्यावस्था स्थापित करती है।
• उदाहरण: N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃
प्रश्न 2(ख).
वेग स्थिरांक तथा साम्य स्थिरांक में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. वेग स्थिरांक (Rate Constant - k):
• यह किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर (वेग) को व्यक्त करता है जब अभिकारकों की सांद्रता इकाई हो।
• यह केवल ताप पर निर्भर करता है, साम्यावस्था से इसका कोई सीधा संबंध नहीं होता।
2. साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant - K):
• यह उत्क्रमणीय अभिक्रिया में अग्र अभिक्रिया तथा पश्च अभिक्रिया के वेग स्थिरांकों का अनुपात (K = k_f / k_b) होता है।
• यह अभिक्रिया के साम्यावस्था में होने पर उत्पाद और अभिकारक की सांद्रताओं का अनुपात प्रदर्शित करता है।
प्रश्न 2(ग).
ऑक्सीकरण संख्या तथा संयोजकता में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. ऑक्सीकरण संख्या (Oxidation Number):
• यह किसी यौगिक में तत्व के परमाणु पर स्थित वास्तविक या आभासी आवेश की संख्या है।
• इसका मान धनात्मक (+), ऋणात्मक (-), शून्य (0) या भिन्न (fractional) हो सकता है।
2. संयोजकता (Valency):
• यह किसी तत्व के परमाणु की संयोजन क्षमता (बंध बनाने की क्षमता) प्रदर्शित करती है।
• यह हमेशा एक पूर्ण धनात्मक संख्या होती है तथा कभी भी शून्य (उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर) या ऋणात्मक नहीं होती।
प्रश्न 2(घ).
संतृप्त हाइड्रोकार्बन तथा असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अन्तर उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
.
1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons):
• इनमें कार्बन परमाणुओं के मध्य केवल एकल बंध (C-C) उपस्थित होता है।
• ये प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देते हैं।
• उदाहरण: एल्केन श्रेणी जैसे एथेन (C₂H₆), मीथेन (CH₄)।
2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons):
• इनमें कार्बन परमाणुओं के मध्य द्वि-बंध (C=C) या त्रि-बंध (C≡C) उपस्थित होता है।
• ये योगात्मक (Addition) अभिक्रियाएँ देते हैं।
• उदाहरण: एल्कीन जैसे एथीन (C₂H₄) तथा एल्काइन जैसे एथाइन (C₂H₂)।
प्रश्न 2(ङ).
ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर ऑक्सीकरण एवं अपचयन को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
1. ऑक्सीकरण (Oxidation):
ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर, किसी रासायनिक प्रक्रिया में किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या का बढ़ना ऑक्सीकरण कहलाता है।
2. अपचयन (Reduction):
किसी रासायनिक प्रक्रिया में किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या का घटना अपचयन कहलाता है।
उदाहरण:
Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu
• यहाँ Zn की ऑक्सीकरण संख्या 0 से बढ़कर +2 होती है, अतः Zn का ऑक्सीकरण हुआ है।
• Cu²⁺ की ऑक्सीकरण संख्या +2 से घटकर 0 होती है, अतः Cu²⁺ का अपचयन हुआ है।
प्रश्न 3(क).
निम्नलिखित समीकरण को आयन इलेक्ट्रान विधि द्वारा सन्तुलित कीजिए-
MnO₄⁻ + C₂O₄²⁻ + H⁺ → Mn²⁺ + CO₂ + H₂O
उत्तर:
.
1. अपचयन अर्ध-अभिक्रिया:
MnO₄⁻ → Mn²⁺
• O परमाणुओं को H₂O द्वारा संतुलित करने पर: MnO₄⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O
• H परमाणुओं को H⁺ द्वारा संतुलित करने पर: MnO₄⁻ + 8H⁺ → Mn²⁺ + 4H₂O
• आवेश संतुलित करने पर: MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O --- (समीकरण 1)
2. ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया:
C₂O₄²⁻ → 2CO₂
• आवेश संतुलित करने पर: C₂O₄²⁻ → 2CO₂ + 2e⁻ --- (समीकरण 2)
3. इलेक्ट्रॉनों को बराबर करके जोड़ने पर:
समीकरण (1) में 2 से तथा समीकरण (2) में 5 से गुणा करने पर:
2MnO₄⁻ + 16H⁺ + 10e⁻ → 2Mn²⁺ + 8H₂O
5C₂O₄²⁻ → 10CO₂ + 10e⁻
दोनों समीकरणों को जोड़ने पर सन्तुलित आयनिक समीकरण:
2MnO₄⁻ + 5C₂O₄²⁻ + 16H⁺ → 2Mn²⁺ + 10CO₂ + 8H₂O
प्रश्न 3(ख).
निम्नलिखित समीकरण को ऑक्सीकरण संख्या विधि द्वारा सन्तुलित कीजिए-
K₂Cr₂O⠇ + FeSO₄ + H₂SO₄ → K₂SO₄ + Cr₂(SO₄)₃ + Fe₂(SO₄)₃
उत्तर:
.
1. ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन पहचानना:
• Cr की ऑक्सीकरण संख्या: +6 से घटकर +3 होती है (प्रति Cr कमी = 3, अतः K₂Cr₂O⠇ के लिए कुल कमी = 2 × 3 = 6)
• Fe की ऑक्सीकरण संख्या: +2 से बढ़कर +3 होती है (वृद्धि = 1)
2. वृद्धि तथा कमी को बराबर करना:
FeSO₄ में 6 से गुणा करने पर:
K₂Cr₂O⠇ + 6FeSO₄ + H₂SO₄ → K₂SO₄ + Cr₂(SO₄)₃ + 3Fe₂(SO₄)₃
3. परमाणुओं का संतुलन:
• SO₄²⁻ समूहों को संतुलित करने पर: दाएँ पक्ष में कुल 1(K₂SO₄) + 3(Cr₂(SO₄)₃) + 9(Fe₂(SO₄)₃) = 13 SO₄²⁻ हैं।
• बाएँ पक्ष में 6(FeSO₄) हैं, अतः H₂SO₄ के 7 अणुओं की आवश्यकता होगी (6 + 7 = 13)।
• H एवं O संतुलित करने पर H₂O के 7 अणु प्राप्त होते हैं।
संतुलित समीकरण:
K₂Cr₂O⠇ + 6FeSO₄ + 7H₂SO₄ → K₂SO₄ + Cr₂(SO₄)₃ + 3Fe₂(SO₄)₃ + 7H₂O
प्रश्न 3(ग).
H₂₍g₎ + I₂₍g₎ ⇌ 2HI₍g₎ अभिक्रिया के लिए H₂, I₂ तथा HI की सांद्रता साम्य में क्रमशः 8 ग्राम H₂, 200 ग्राम I₂ तथा 1620 ग्राम HI है। साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए। (H = 1, I = 127)
उत्तर:
.
मोलों की संख्या (n):
• H₂ के मोल = 8 / 2 = 4 मोल
• I₂ के मोल = 200 / (127 × 2) = 200 / 254 ≈ 0.787 मोल
• HI के मोल = 1620 / (1 + 127) = 1620 / 128 ≈ 12.656 मोल
मान लिया आयतन V लीटर है, तो साम्य सांद्रताएँ:
[H₂] = 4/V
[I₂] = 0.787/V
[HI] = 12.656/V
साम्य स्थिरांक का सूत्र:
K_c = [HI]² / ([H₂] [I₂])
K_c = (12.656 / V)² / [ (4 / V) × (0.787 / V) ]
K_c = (12.656)² / (4 × 0.787)
K_c = 160.174 / 3.148 ≈ 50.88
उत्तर: साम्य स्थिरांक (K_c) = 50.88
प्रश्न 3(घ).
K_p तथा K_c में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
.
माना एक सामान्य उत्क्रमणीय गैसीय अभिक्रिया:
aA + bB ⇌ cC + dD
1. साम्य स्थिरांक सांद्रता के पदों में (K_c):
K_c = [C]ᶜ [D]ᵈ / ([A]ᵃ [B]ᵇ) --- (1)
2. साम्य स्थिरांक आंशिक दाब के पदों में (K_p):
K_p = (P_C)ᶜ (P_D)ᵈ / ((P_A)ᵃ (P_B)ᵇ) --- (2)
आदर्श गैस समीकरण से:
P V = n R T ⇒ P = (n / V) R T = C R T (जहाँ C = सांद्रता)
अतः प्रत्येक घटक के लिए:
P_A = [A] RT, P_B = [B] RT, P_C = [C] RT, P_D = [D] RT
ये मान समीकरण (2) में रखने पर:
K_p = ([C] RT)ᶜ ([D] RT)ᵈ / (([A] RT)ᵃ ([B] RT)ᵇ)
K_p = ([C]ᶜ [D]ᵈ / ([A]ᵃ [B]ᵇ)) × (RT)⁽ᶜ⁺ᵈ⁾⁻⁽ᵃ⁺ᵇ⁾
समीकरण (1) से मान रखने पर:
K_p = K_c (RT)^Δn
(जहाँ Δn = उत्पाद के गैसीय मोलों की संख्या - अभिकारक के गैसीय मोलों की संख्या)
प्रश्न 3(ङ).
निम्नलिखित को समझाइए-
a. सक्रिय द्रव्यमान
b. द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम
c. ओस्टवाल्ड का तनुता नियम
d. जल का आयनिक गुणनफल
उत्तर:
.
a. सक्रिय द्रव्यमान (Active Mass):
किसी पदार्थ के 1 लीटर विलयन में घुले हुए मोलों की संख्या को उसका सक्रिय द्रव्यमान कहते हैं। इसे मोलर सांद्रता भी कहते हैं।
सक्रिय द्रव्यमान = (पदार्थ का ग्राम में भार) / (अणुभार × आयतन लीटर में)
b. द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम (Law of Mass Action):
गुल्डबर्ग तथा वागे के अनुसार, "निश्चित ताप पर किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर (वेग) उसमें भाग लेने वाले अभिकारकों के सक्रिय द्रव्यमानों (मोलर सांद्रता) के गुणनफल के समानुपाती होती है।"
c. ओस्टवाल्ड का तनुता नियम (Ostwald's Dilution Law):
यह नियम दुर्बल विद्युत अपघट्यों के वियोजन पर लागू होता है। इसके अनुसार, दुर्बल विद्युत अपघट्य की वियोजन की मात्रा (α) उसकी तनुता (V) के वर्गमूल के समानुपाती होती है:
α = √(K_a × V) या α = √(K_a / C)
d. जल का आयनिक गुणनफल (Ionic Product of Water - K_w):
स्थिर ताप पर जल में उपस्थित H⁺ आयनों और OH⁻ आयनों की मोलर सांद्रताओं का गुणनफल 'जल का आयनिक गुणनफल' कहलाता है।
K_w = [H⁺][OH⁻] = 1 × 10⁻¹⁴ (25°C पर)
प्रश्न 4.
किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
प्रश्न 4(क).
ला-शातेलिए का सिद्धान्त लिखिए। इसके द्वारा निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर ताप, दाब तथा सांद्रण का प्रभाव लिखिए।
a. N₂₍g₎ + O₂₍g₎ ⇌ 2NO₍g₎ - 43200 कैलोरी
b. N₂₍g₎ + 3H₂₍g₎ ⇌ 2NH₃₍g₎ + 22400 कैलोरी
c. 2SO₂₍g₎ + O₂₍g₎ ⇌ 2SO₃₍g₎ ΔH = -4.52 किलो कैलोरी
उत्तर:
.
ला-शातेलिए का सिद्धान्त:
"यदि साम्यावस्था में स्थित किसी निकाय के ताप, दाब या सांद्रण में परिवर्तन किया जाए, तो साम्य उस दिशा में विस्थापित हो जाता है जिस दिशा में किए गए परिवर्तन का प्रभाव निरस्त हो सके।"
a. N₂ + O₂ ⇌ 2NO - 43200 कैलोरी (ऊष्माशोषी, Δn = 0):
• ताप का प्रभाव: ताप बढ़ाने पर साम्य अग्र दिशा (NO निर्माण) में विस्थापित होगा।
• दाब का प्रभाव: दोनों ओर मोलों की संख्या समान है, अतः दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
• सांद्रण का प्रभाव: N₂ या O₂ मिलाने पर अधिक NO बनेगा।
b. N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ + 22400 कैलोरी (ऊष्माक्षेपी, Δn = 2 - 4 = -2):
• ताप का प्रभाव: कम ताप अग्र अभिक्रिया (NH₃ निर्माण) के लिए अनुकूल है।
• दाब का प्रभाव: दाब बढ़ाने पर साम्य उस ओर विस्थापित होगा जहाँ मोल कम हैं (अग्र दिशा में NH₃ निर्माण)।
• सांद्रण का प्रभाव: N₂ तथा H₂ का सांद्रण बढ़ाने पर NH₃ अधिक बनेगा।
c. 2SO₂ + O₂ ⇌ 2SO₃, ΔH = -4.52 kcal (ऊष्माक्षेपी, Δn = 2 - 3 = -1):
• ताप का प्रभाव: कम ताप पर SO₃ का उत्पादन अधिक होगा।
• दाब का प्रभाव: उच्च दाब पर साम्य अग्र दिशा (SO₃ निर्माण) में विस्थापित होगा।
• सांद्रण का प्रभाव: SO₂ और O₂ मिलाने से SO₃ की मात्रा बढ़ेगी।
प्रश्न 4(ख).
सम आयन प्रभाव क्या है ? समझाइए कि गुणात्मक विश्लेषण में द्वितीय वर्ग के धातु सल्फाइडों का अवक्षेपण करने के लिए विलयन में H₂S गैस प्रवाहित करने से पहले HCl क्यों मिलाया जाता है ?
उत्तर:
.
सम आयन प्रभाव (Common Ion Effect):
किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के विलयन में समान आयन (Common Ion) रखने वाला प्रबल विद्युत अपघट्य मिलाने पर दुर्बल विद्युत अपघट्य के वियोजन की मात्रा का घट जाना 'सम आयन प्रभाव' कहलाता है।
H₂S के साथ HCl मिलाने का कारण:
गुणात्मक विश्लेषण के द्वितीय वर्ग में धातु सल्फाइडों का अवक्षेपण कराने के लिए s²⁻ आयनों की कम सांद्रता की आवश्यकता होती है।
1. दुर्बल अम्ल H₂S का आयनन: H₂S ⇌ 2H⁺ + S²⁻
2. जब इसमें प्रबल विद्युत अपघट्य HCl मिलाते हैं: HCl → H⁺ + Cl⁻
3. HCl से प्राप्त H⁺ आयन (सम आयन) के कारण सम आयन प्रभाव उत्पन्न होता है, जिससे H₂S का आयनन दब जाता है और S²⁻ आयनों की सांद्रता केवल इतनी ही रह पाती है जो द्वितीय वर्ग के कटायनों के विलेयता गुणनफल को पार कर सके, परंतु चतुर्थ वर्ग के कटायन अवक्षेपित न हों।
प्रश्न 4(ग).
बफर विलयन किसे कहते हैं ? किसी अम्लीय बफर विलयन की बफर क्रिया का स्पष्टीकरण एक उदाहरण देते हुए कीजिए।
उत्तर:
.
परिभाषा:
वह विलयन जिसमें थोड़ा अम्ल या क्षार मिलाने पर भी उसके pH मान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता, उसे 'बफर विलयन' (Buffer Solution) कहते हैं।
अम्लीय बफर का उदाहरण:
एसिटिक अम्ल (CH₃COOH - दुर्बल अम्ल) तथा सोडियम एसिटेट (CH₃COONa - प्रबल क्षार का लवण) का मिश्रण।
बफर क्रिया का स्पष्टीकरण:
विलयन में आयनन:
CH₃COONa → CH₃COO⁻ + Na⁺ (पूर्णतः)
CH₃COOH ⇌ CH₃COO⁻ + H⁺ (आंशिक)
1. थोड़ा अम्ल (H⁺) मिलाने पर:
मिलाया गया H⁺ आयन विलयन में उपस्थित अत्यधिक CH₃COO⁻ आयनों से क्रिया करके अवियोजित CH₃COOH बना लेता है:
H⁺ + CH₃COO⁻ → CH₃COOH
अतः H⁺ की सांद्रता नहीं बढ़ती और pH अपरिवर्तित रहता है।
2. थोड़ा क्षार (OH⁻) मिलाने पर:
मिलाया गया OH⁻ आयन H⁺ से क्रिया करके जल (H₂O) बना लेता है, तथा CH₃COOH का और आयनन होकर H⁺ की पूर्ति हो जाती है:
OH⁻ + CH₃COOH → CH₃COO⁻ + H₂O
अतः pH में कोई बदलाव नहीं होता।
प्रश्न 4(घ).
ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए -
i. SO₂Cl₂ में S का
ii. H₂S₂O₈ में S का
iii. CrO₅ में Cr का
iv. CHCl₃ में C का
v. HNO₃ में N का
vi. KMnO₄ में Mn का
उत्तर:
.
i. SO₂Cl₂ में S का:
x + 2(-2) + 2(-1) = 0 ⇒ x - 4 - 2 = 0 ⇒ x = +6
ii. H₂S₂O₈ (मार्शल अम्ल) में S का:
(इसमें एक पेरॉक्साइड बंध [O-O] होता है जिसमें 2 O परमाणु की -1 तथा 6 O परमाणु की -2 ऑक्सीकरण संख्या होती है)
2(+1) + 2x + 2(-1) + 6(-2) = 0 ⇒ 2 + 2x - 2 - 12 = 0 ⇒ 2x = 12 ⇒ x = +6
iii. CrO₅ में Cr का:
(इसमें बटरफ्लाई संरचना में 4 O परमाणु पेरॉक्साइड बंध द्वारा -1 तथा 1 O परमाणु -2 अवस्था में होता है)
x + 4(-1) + 1(-2) = 0 ⇒ x - 6 = 0 ⇒ x = +6
iv. CHCl₃ में C का:
x + 1(+1) + 3(-1) = 0 ⇒ x + 1 - 3 = 0 ⇒ x = +2
v. HNO₃ में N का:
1(+1) + x + 3(-2) = 0 ⇒ 1 + x - 6 = 0 ⇒ x = +5
vi. KMnO₄ में Mn का:
1(+1) + x + 4(-2) = 0 ⇒ 1 + x - 8 = 0 ⇒ x = +7
प्रश्न 4(ङ).
i. जिस विलयन के हाइड्रोजन आयन सांद्रण का मान 0.005 ग्राम-तुल्यांक लीटर⁻¹ है। उसका pH क्या होगा ? (log 2 = 0.3010)
उत्तर:
.
[H⁺] = 0.005 = 5 × 10⁻³ M
pH = -log[H⁺]
pH = -log(5 × 10⁻³)
pH = -[log 5 + log 10⁻³]
pH = -[log (10 / 2) - 3]
pH = -[log 10 - log 2 - 3]
pH = -[1 - 0.3010 - 3]
pH = -[-2.3010] = 2.70
उत्तर: pH = 2.70
ii. M/1000 HCl विलयन (वियोजन 100%) का pH मान ज्ञात कीजिए। (log 2 = 0.3010)
उत्तर.
[H⁺] = 1/1000 M = 10⁻³ M
pH = -log[H⁺]
pH = -log(10⁻³)
pH = 3
उत्तर: pH = 3
प्रश्न 4(च).
i. निम्नलिखित यौगिक का IUPAC नाम लिखिए: 4-एथिल-2, 2-डाई मेथिल हेक्स-3-ईन [चित्रानुसार संरचना का मानक नाम]
उत्तर:
.
IUPAC नाम: 4-एथिल-2, 2-डिमेलिथ हेक्स-3-ईन (4-Ethyl-2,2-dimethylhex-3-ene) [चित्र की संरचना: CH₃-C(CH₃)₂-CH=C(C₂H₅)-CH₂-CH₃ के आधार पर]
ii. निम्नलिखित यौगिक का I.U.P.A.C. पद्धति के अनुसार नाम लिखिए -
CH₃
CH₃-CH-CH₂-C-CH₂-CH₃
CH₃ CH₃
उत्तर.
IUPAC नाम: 2, 4, 4-ट्राईमेथिलहेक्सेन (2,4,4-Trimethylhexane)
प्रश्न 4(छ).
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए -
i. इलेक्ट्रान बन्धुता
ii. आयनन विभव
iii. विद्युत ऋणात्मकता
उत्तर:
.
i. इलेक्ट्रान बन्धुता (Electron Affinity):
किसी गैसीय विलगित (isolated) उदासीन परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणावेशित आयन (ऋणायन) बनाने में जितनी ऊर्जा मुक्त होती है, उसे उस तत्व की 'इलेक्ट्रॉन बंधुता' कहते हैं।
X(g) + e⁻ → X⁻(g) + E
ii. आयनन विभव (Ionization Potential / Energy):
किसी विलगित गैसीय परमाणु की बाह्यतम कक्षा से एक इलेक्ट्रॉन को पूर्णतः बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को उस तत्व का 'आयनन विभव' या 'आयनन ऊर्जा' कहते हैं।
iii. विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity):
किसी सहसंयोजक यौगिक में बंधित परमाणु द्वारा साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की आपेक्षिक क्षमता को उस परमाणु की 'विद्युत ऋणात्मकता' कहते हैं। (आवर्त सारणी में फ्लोरीन F की विद्युत ऋणात्मकता सर्वाधिक होती है)।