खण्ड-अ (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2022 A Code
कक्षा 11वीं · रसायन विज्ञान · 2022 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
ऑक्सीजन के एक परमाणु का भार होगा -
(a) 16 a.m.u
(b) (16 / 6.022 × 10²³) ग्राम
(c) (32 / 6.022 × 10²³) ग्राम
(d) (1 / 6.022 × 10²³) ग्राम
उत्तर:
. (b) (16 / 6.022 × 10²³) ग्राम
(गणना: 1 मोल ऑक्सीजन परमाणु = 16 ग्राम = 6.022 × 10²³ परमाणु, अतः 1 परमाणु का भार = 16 / 6.022 × 10²³ ग्राम)
प्रश्न 1(ख).
किसी मुख्य कोश n में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या होगी-
(a) n²
(b) n
(c) 2n²
(d) 3n²
उत्तर:
. (c) 2n²
प्रश्न 1(ग).
किस ताप पर फारेनहाइट पैमाने तथा सेल्सियस पैमाने पर एक समान मान होगा ?
(a) 100°
(b) -100°C
(c) 40°C
(d) -40°C
उत्तर:
. (d) -40°C
(गणना: F = (9/5)C + 32 में F = C = x रखने पर, x = -40 प्राप्त होता है)
प्रश्न 1(घ).
Fe₃O₄ में Fe की ऑक्सीकरण संख्या है -
(a) +2
(b) +3
(c) 8/3
(d) 2/3
उत्तर:
. (c) 8/3
(गणना: 3x + 4(-2) = 0 ⇒ 3x = 8 ⇒ x = +8/3)
प्रश्न 1(ङ).
क्षार धातुएँ सम्बन्धित हैं -
(a) s-ब्लॉक से
(b) p-ब्लॉक से
(c) d-ब्लॉक से
(d) f-ब्लॉक से
उत्तर:
. (a) s-ब्लॉक से
प्रश्न 1(च).
मार्श गैस में मुख्यतः होता है -
(a) C₂H₂
(b) CH₄
(c) H₂S
(d) CO
उत्तर:
. (b) CH₄
खण्ड-ब (वर्णनात्मक प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
एक मोल का मान कितना होता है ?
उत्तर:
.
एक मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतने ही मूल कण (परमाणु, अणु या आयन) होते हैं जितने कार्बन-12 समस्थानिक के ठीक 12 ग्राम में परमाणुओं की संख्या होती है।
1 मोल = 6.022 × 10²³ कण (इसे आवोगाद्रो संख्या, N₇ कहते हैं)।
प्रश्न 2(ख).
कक्षक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
परमाणु के नाभिक के चारों ओर का वह त्रिआयामी (3D) क्षेत्र जहाँ किसी इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता (संभावना) अधिकतम (लगभग 90-95%) होती है, उसे कक्षक (Orbital) कहते हैं।
प्रश्न 2(ग).
परमाणु क्रमांक 105 का IUPAC नाम व सूत्र लिखिए।
उत्तर:
.
• IUPAC नाम: अननिलपेंटियम (Unnilpentium)
• प्रतीक/सूत्र: Unp
प्रश्न 2(घ).
मुक्त मूलक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
वह उदासीन परमाणु या परमाणुओं का समूह जिस पर एक विषम (अयुग्मित) इलेक्ट्रॉन (Unpaired Electron) उपस्थित होता है, उसे 'मुक्त मूलक' (Free Radical) कहते हैं। ये सहसंयोजक बंध के समांश विखंडन (Homolytic Fission) से बनते हैं। (उदाहरण: Cl•, •CH₃)।
प्रश्न 3(क).
हुण्ड के नियम को उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
हुण्ड का अधिकतम बहुफलता का नियम:
"किसी उपकोश (p, d, f) के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन (Pairing) तब तक नहीं होता, जब तक कि उस उपकोश के सभी कक्षकों में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए।"
उदाहरण (नाइट्रोजन, Z = 7):
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 1s² 2s² 2p³
• 2p उपकोश में 3 कक्षक (2pₓ, 2p_y, 2p_z) होते हैं।
• हुण्ड के नियम अनुसार, तीनों 2p कक्षकों में एक-एक समानांतर चक्रण वाला इलेक्ट्रॉन प्रवेश करेगा (2pₓ¹ 2p_y¹ 2p_z¹), न कि किसी एक कक्षक में युग्मन होगा।
प्रश्न 3(ख).
ध्रुवीय सह संयोजी तथा अध्रुवीय सह संयोजी बन्ध किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
1. ध्रुवीय सहसंयोजी बंध (Polar Covalent Bond):
जब सहसंयोजी बंध असमान विद्युत ऋणात्मकता वाले दो परमाणुओं के बीच बनता है, तो साझे का इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक विद्युत ऋणात्मक परमाणु की ओर खिसक जाता है, जिससे परमाणुओं पर आंशिक धनावेश (δ+) और ऋणावेश (δ-) आ जाता है।
उदाहरण: H-Cl, H-O-H
2. अध्रुवीय सहसंयोजी बंध (Non-polar Covalent Bond):
जब सहसंयोजी बंध समान विद्युत ऋणात्मकता वाले दो परमाणुओं के बीच बनता है, तो साझे का इलेक्ट्रॉन युग्म दोनों नाभिकों के ठीक मध्य में स्थित रहता है।
उदाहरण: H-H (H₂), Cl-Cl (Cl₂)
प्रश्न 3(ग).
भारी जल का सूत्र, अणु भार और उपयोग लिखिए।
उत्तर:
.
• सूत्र: D₂O (ड्यूटेरियम ऑक्साइड)
• अणु भार: 20 g/mol
• उपयोग:
1. नाभिकीय रिएक्ट्रों में न्यूट्रॉन मंदक (Moderator) के रूप में।
2. रासायनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि के अध्ययन में ट्रेसर (Tracer) के रूप में।
प्रश्न 3(घ).
रासायनिक साम्य के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
.
रासायनिक साम्यावस्था के प्रमुख लक्षण:
1. गतिज प्रकृति (Dynamic Nature): साम्यावस्था पर अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग बराबर होते हैं।
2. सांद्रता की स्थिरता: साम्य पर अभिकारकों और उत्पादों की सांद्रता में समय के साथ कोई परिवर्तन नहीं होता।
3. उत्प्रेरक का प्रभाव: उत्प्रेरक साम्यावस्था की स्थिति को परिवर्तित नहीं करता, यह केवल साम्य शीघ्र प्राप्त करने में मदद करता है।
4. बंद पात्र: रासायनिक साम्य केवल बंद पात्र में ही स्थापित हो सकता है।
प्रश्न 4(क).
हाइड्रोजन बंध को उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
परिभाषा:
जब हाइड्रोजन परमाणु किसी उच्च विद्युत ऋणात्मक परमाणु (जैसे F, O, N) से सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है, तो वह दूसरे अणु के विद्युत ऋणात्मक परमाणु के साथ एक दुर्बल आकर्षण बल स्थापित कर लेता है, जिसे 'हाइड्रोजन बंध' कहते हैं।
उदाहरण:
जल (H₂O) के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध:
... H - O - H ··· H - O - H ··· H - O - H ...
H H H
(यहाँ बिंदुदार रेखा ··· हाइड्रोजन बंध को दर्शाती है)
प्रश्न 4(ख).
3d⁸ में पाँचवें और आठवें इलेक्ट्रॉन की चारों क्वाण्टम संख्याएँ लिखिए।
उत्तर:
.
3d⁸ उपकोश के लिए: n = 3, l = 2 (d उपकोश के लिए m के मान: -2, -1, 0, +1, +2)
हुण्ड के नियम अनुसार इलेक्ट्रॉन भराव का क्रम:
• 1st electron: m = -2, s = +1/2
• 2nd electron: m = -1, s = +1/2
• 3rd electron: m = 0, s = +1/2
• 4th electron: m = +1, s = +1/2
• 5th electron: m = +2, s = +1/2
• 6th electron: m = -2, s = -1/2
• 7th electron: m = -1, s = -1/2
• 8th electron: m = 0, s = -1/2
पाँचवें (5th) इलेक्ट्रॉन के लिए:
• मुख्य क्वाण्टम संख्या (n) = 3
• द्विगंशी क्वाण्टम संख्या (l) = 2
• चुंबकीय क्वाण्टम संख्या (m) = +2
• चक्रण क्वाण्टम संख्या (s) = +1/2
आठवें (8th) इलेक्ट्रॉन के लिए:
• मुख्य क्वाण्टम संख्या (n) = 3
• द्विगंशी क्वाण्टम संख्या (l) = 2
• चुंबकीय क्वाण्टम संख्या (m) = 0
• चक्रण क्वाण्टम संख्या (s) = -1/2
प्रश्न 4(ग).
इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक को उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
.
इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक (Electrophiles):
वे अभिकर्मक या आयन जिनमें इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है (अर्थात् जिनमें इलेक्ट्रॉन की कमी होती है), 'इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक' कहलाते हैं। ये लुईस अम्ल की भांति कार्य करते हैं।
उदाहरण:
1. धनावेशित आयन: H⁺, Cl⁺, NO₂⁺, H₃O⁺
2. उदासीन अणु (अपूर्ण अष्टक वाले): BF₃, AlCl₃, FeCl₃, SO₃
प्रश्न 4(घ).
ऑक्सीकरण संख्या के आधार पर निम्नलिखित समीकरण को संतुलित कीजिए-
FeCl₃ + H₂S → FeCl₂ + 2HCl + S
उत्तर:
.
1. ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन देखना:
• Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3 से घटकर +2 होती है (कमी = 1)
• S की ऑक्सीकरण संख्या -2 से बढ़कर 0 होती है (वृद्धि = 2)
2. ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि और कमी को बराबर करना:
FeCl₃ को 2 से गुणा करने पर:
2FeCl₃ + H₂S → 2FeCl₂ + 2HCl + S
3. परमाणुओं का संतुलन:
• बाएँ पक्ष में: 2 Fe, 6 Cl, 2 H, 1 S
• दाएँ पक्ष में: 2 Fe, (4+2)=6 Cl, 2 H, 1 S
सन्तुलित समीकरण:
2FeCl₃ + H₂S → 2FeCl₂ + 2HCl + S
प्रश्न 5(क).
आवर्त सारणी में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर हाइड्रोजन की स्थिति की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
.
हाइड्रोजन (Z = 1) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s¹ है। इसकी आवर्त सारणी में दोहरे व्यवहार के कारण अनिश्चित स्थिति है:
1. क्षार धातुओं (वर्ग 1) से समानताएँ:
• बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन (1s¹), जैसे क्षार धातुओं (ns¹) में होता है।
• क्षार धातुओं की भांति यह धनायन (H⁺) बनाता है और हैलोजन से क्रिया करके हैलाइड (HCl) बनाता है।
• यह एक अच्छा अपचायक है।
2. हैलोजन (वर्ग 17) से समानताएँ:
• यह भी एक अधातु और द्विपरमाणुक गैस (H₂) है।
• अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने के लिए इसे 1 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है (जैसे हैलोजन को होती है)।
• धातुओं के साथ जुड़कर हाइड्राइड (NaH) बनाता है, जिसमें यह ऋणायन (H⁻) रूप में होता है।
निष्कर्ष:
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर इसे वर्ग 1 (प्रथम आवर्त) में सबसे ऊपर रखा गया है, परंतु इसके गुण वर्ग 17 से भी मिलते हैं।
प्रश्न 5(ख).
s-ब्लॉक के तत्व किसे कहते हैं ? s-ब्लॉक के तत्वों के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
.
परिभाषा:
वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश के s-उपकोश में प्रवेश करता है, 's-ब्लॉक के तत्व' कहलाते हैं। इसमें वर्ग 1 (क्षार धातुएँ) तथा वर्ग 2 (क्षारीय मृदा धातुएँ) शामिल हैं।
मुख्य लक्षण:
1. सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns¹⁻² होता है।
2. ये सभी नरम, कम घनत्व वाली तथा अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ हैं।
3. इनकी आयनन ऊर्जा का मान बहुत कम होता है, अतः ये आसानी से धनायन बनाती हैं।
4. ये मुख्य रूप से आयनिक यौगिक बनाती हैं।
5. ये प्रबल अपचायक (Reducing Agents) की भांति कार्य करती हैं।
प्रश्न 5(ग).
निम्न के pH मान ज्ञात कीजिए -
(i) 0.001 NaOH
(ii) 0.01 HCl
उत्तर:
.
(i) 0.001 M NaOH विलयन के लिए:
NaOH एक प्रबल क्षार है:
[OH⁻] = 0.001 M = 10⁻³ M
pOH = -log[OH⁻] = -log(10⁻³) = 3
pH + pOH = 14
pH = 14 - pOH = 14 - 3 = 11
उत्तर: pH = 11
(ii) 0.01 M HCl विलयन के लिए:
HCl एक प्रबल अम्ल है:
[H⁺] = 0.01 M = 10⁻² M
pH = -log[H⁺] = -log(10⁻²) = 2
उत्तर: pH = 2
प्रश्न 5(घ).
आदर्श गैस समीकरण को समझाइए।
उत्तर:
.
वह समीकरण जो गैस के दाब (P), आयतन (V), ताप (T) तथा मोलों की संख्या (n) के मध्य सम्बन्ध व्यक्त करता है, उसे 'आदर्श गैस समीकरण' कहते हैं।
व्युत्पत्ति:
1. बॉयल का नियम: V ∝ 1/P (स्थिर ताप T पर)
2. चार्ल्स का नियम: V ∝ T (स्थिर दाब P पर)
3. आवोगाद्रो का नियम: V ∝ n (स्थिर P तथा T पर)
इन तीनों नियमों को मिलाने पर:
V ∝ (n × T) / P
⇒ P V ∝ n T
⇒ P V = n R T
जहाँ:
• P = गैस का दाब
• V = गैस का आयतन
• n = गैस के मोलों की संख्या
• T = परम ताप (Kelvin में)
• R = सार्वत्रिक गैस नियतांक (Universal Gas Constant, मान = 0.0821 L·atm/K·mol या 8.314 J/K·mol)
प्रश्न 6(क).
निम्न का IUPAC नाम लिखिए -
(i) CH₃OH
(ii) CH₂=CH₂
(iii) CH₃-CH₂COOH
(iv) CH₃-CH₂-O-CH₂-CH₃
(v) (CH₃CO)₂O
उत्तर:
.
(i) CH₃OH : मेथेनॉल (Methanol)
(ii) CH₂=CH₂ : एथीन (Ethene)
(iii) CH₃-CH₂COOH : प्रोपेनॉइक अम्ल (Propanoic acid)
(iv) CH₃-CH₂-O-CH₂-CH₃ : एथॉक्सीएथेन (Ethoxyethane)
(v) (CH₃CO)₂O : एथेनॉइक एनहाइड्राइड (Ethanoic anhydride)
अथवा
प्रश्न 6(क).
आधुनिक आवर्त नियम क्या है ? दीर्घाकार आवर्त सारणी की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
आधुनिक आवर्त नियम (Modern Periodic Law):
"तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों (Atomic Numbers) के आवर्ती फलन होते हैं।"
दीर्घाकार (आधुनिक) आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएँ:
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित: यह सारणी तत्वों के बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है।
2. वर्ग एवं आवर्त: इसमें 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ जिन्हें 'वर्ग' (Groups) तथा 7 क्षैतिज पंक्तियाँ जिन्हें 'आवर्त' (Periods) कहते हैं।
3. चार ब्लॉक में विभाजन: तत्वों को उनके अंतिम इलेक्ट्रॉन प्रवेश के आधार पर चार ब्लॉकों—s, p, d तथा f ब्लॉक में बाँटा गया है।
4. धातुओं और अधातुओं का पृथक्करण: इसमें धातुओं को बाईं ओर तथा अधातुओं को दाईं ओर रखा गया है।
5. दोषों का निवारण: इसमें समस्थानिकों (Isotopes) को एक ही स्थान पर रखा गया है क्योंकि उनका परमाणु क्रमांक समान होता है।
प्रश्न 6(ख).
हेस के ऊष्मा संकलन नियम को लिखिए। इस नियम के अनुप्रयोग भी दीजिए।
उत्तर:
.
हेस का स्थिर ऊष्मा संकलन का नियम (Hess's Law of Constant Heat Summation):
"किसी रासायनिक परिवर्तन में होने वाला कुल ऊष्मा परिवर्तन (ΔH) हमेशा समान रहता है, चाहे वह परिवर्तन एक पद में सम्पन्न हो या अनेक पदों में।"
गणितीय रूप:
यदि अभिकारक A से उत्पाद B एक पद में बनता है तथा ऊष्मा परिवर्तन ΔH है:
A → B (ΔH)
यदि वही परिवर्तन A → C → D → B पदों में होता है और इनमें ऊष्मा परिवर्तन क्रमशः ΔH₁, ΔH₂, ΔH₃ हैं:
तो, ΔH = ΔH₁ + ΔH₂ + ΔH₃
अनुप्रयोग:
1. उन अभिक्रियाओं की संभवन ऊष्मा (Heat of Formation) ज्ञात करने में जिनका प्रत्यक्ष मापन कठिन होता है।
2. अपररूपों के रूपांतरण की ऊष्मा ज्ञात करने में।
3. जालक ऊर्जा (Lattice Energy) तथा बंध ऊर्जा (Bond Energy) की गणना में।
अथवा
प्रश्न 6(ख).
किस ताप पर 28 ग्राम N₂ का 2.46 वायुमण्डल दाब पर आयतन 10 लीटर होगा ? (R = 0.0821 लीटर-वायुमण्डल/डिग्री/मोल)
उत्तर:
.
दिया है:
• N₂ का द्रव्यमान (w) = 28 ग्राम
• N₂ का अणुभार (M) = 28 ग्राम/मोल
• मोलों की संख्या (n) = w / M = 28 / 28 = 1 मोल
• दाब (P) = 2.46 atm
• आयतन (V) = 10 L
• R = 0.0821 L·atm/K·mol
आदर्श गैस समीकरण से:
P V = n R T
2.46 × 10 = 1 × 0.0821 × T
24.6 = 0.0821 × T
T = 24.6 / 0.0821
T ≈ 299.63 K
सेल्सियस में:
t = 299.63 - 273.15 = 26.48°C
उत्तर: ताप (T) = 299.63 K या 26.48°C
प्रश्न 7(क).
ला-शॉतलिए का नियम लिखिए। इस नियम के भौतिक और रासायनिक अनुप्रयोगों को समझाइए।
उत्तर:
.
ला-शॉतलिए का नियम:
"यदि साम्यावस्था में स्थित किसी निकाय के ताप, दाब या सांद्रण में परिवर्तन किया जाए, तो साम्य उस दिशा में विस्थापित हो जाता है जिस दिशा में किए गए परिवर्तन का प्रभाव निरस्त हो सके।"
1. भौतिक साम्य पर अनुप्रयोग:
• बर्फ का पिघलना (बर्फ ⇌ जल - ऊष्माशोषी): ताप बढ़ाने पर साम्य आगे बढ़ता है अर्थात् बर्फ तेजी से पिघलती है।
• जल का वाष्पन (जल ⇌ वाष्प): दाब बढ़ाने पर वाष्प जल में संघनित होने लगती है।
2. रासायनिक साम्य पर अनुप्रयोग (अमोनिया निर्माण: N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ + ऊष्मा):
• सांद्रण का प्रभाव: N₂ तथा H₂ मिलाने पर अमोनिया का उत्पादन बढ़ता है।
• ताप का प्रभाव: यह ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, अतः कम ताप पर अधिक NH₃ प्राप्त होती है।
• दाब का प्रभाव: दाब बढ़ाने पर साम्य कम मोलों की ओर विस्थापित होता है, अतः उच्च दाब पर NH₃ अधिक बनती है।
अथवा
प्रश्न 7(क).
बोरोन के भौतिक और रासायनिक गुणों को लिखिए।
उत्तर:
.
1. भौतिक गुण:
• बोरोन (B) आवर्त सारणी के वर्ग 13 का एक अत्यंत कठोर, अत्यंत उच्च गलनांक वाला उपधातु है।
• यह विद्युत का कुचालक (कम ताप पर) तथा अर्धचालक (उच्च ताप पर) होता है।
• इसके मुख्य अपररूप अक्रिस्टलीय बोरोन तथा क्रिस्टलीय बोरोन हैं।
2. रासायनिक गुण:
• ऑक्सीजन से अभिक्रिया: उच्च ताप पर जलकर बोरोन ट्राइऑक्साइड बनाता है:
4B + 3O₂ → 2B₂O₃
• हैलोजन से अभिक्रिया: हैलोजन के साथ गर्म करने पर ट्राइहैलाइड बनाता है:
2B + 3Cl₂ → 2BCl₃
• अम्लों से अभिक्रिया: सांद्र HNO₃ के साथ ऑक्सीकृत होकर बोरिक अम्ल बनाता है:
B + 3HNO₃ → H₃BO₃ + 3NO₂
प्रश्न 7(ख).
25°C पर AgCl का विलेयता गुणनफल 1 × 10⁻¹⁰ है। AgCl की 25°C पर जल में विलेयता ग्राम/लीटर में ज्ञात कीजिए। (AgCl का अणुभार = 143.5)
उत्तर:
.
दिया है:
• K_sp (AgCl) = 1 × 10⁻¹⁰
• अणुभार (M) = 143.5
माना जल में AgCl की विलेयता S मोल/लीटर है।
AgCl(s) ⇌ Ag⁺(aq) + Cl⁻(aq)
विलेयता गुणनफल:
K_sp = [Ag⁺] [Cl⁻]
1 × 10⁻¹⁰ = S × S = S²
S = √(1 × 10⁻¹⁰) = 1 × 10⁻⁵ मोल/लीटर
ग्राम/लीटर में विलेयता (S_g):
S_g = S × अणुभार
S_g = (1 × 10⁻⁵) × 143.5
S_g = 1.435 × 10⁻³ ग्राम/लीटर
उत्तर: AgCl की विलेयता = 1.435 × 10⁻³ ग्राम/लीटर
अथवा
प्रश्न 7(ख).
बेन्जीन की संरचना, अणुसूत्र को समझाइए। बेन्जीन में कैकुले सूत्र में कमियाँ समझाइए।
उत्तर:
.
बेन्जीन का अणुसूत्र एवं संरचना:
• अणुसूत्र: C₆H₆
• संरचना: बेन्जीन एक चक्रीय (Cyclic) समतलीय अणु है जिसमें 6 कार्बन परमाणु एक षट्कोणीय वलय में एकांतर क्रम में एकल बंध (C-C) और द्वि-बंध (C=C) द्वारा जुड़े रहते हैं। प्रत्येक कार्बन से एक हाइड्रोजन जुड़ा होता है।
कैकुले (Kekulé) संरचना की कमियाँ:
1. द्वि-बंधों की असाधारण स्थिरता: कैकुले संरचना के अनुसार बेन्जीन में तीन C=C द्वि-बंध होते हैं, अतः इसे एल्कीन की तरह योगात्मक अभिक्रियाएँ आसानी से देनी चाहिए, जबकि बेन्जीन मुख्य रूप से प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देता है।
2. बंध लंबाइयों का समान होना: कैकुले संरचना में C-C (1.54 Å) और C=C (1.34 Å) अलग-अलग होने चाहिए, जबकि प्रयोगों से पता चलता है कि बेन्जीन में सभी C-C बंध लंबाइयाँ समान (1.39 Å) होती हैं।
3. अनुनाद ऊर्जा (Resonance Energy): कैकुले संरचना बेन्जीन की उच्च अनुनादी स्थिरता तथा कम दहन ऊष्मा की व्याख्या करने में असमर्थ रही।