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UP Board Class 11th Biology Half-Yearly Paper 2026 SET 1

कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक

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खण्ड 'अ' (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न 1(क).

निम्न में से कौन-सा एक जीवित जीवाश्म है–

(अ) पाइनस

(ब) गिंगो

(स) थूजा

(द) देवदार

उत्तर:

. (ब) गिंगो (Ginkgo biloba)

प्रश्न 1(ख).

स्तनियों की सबसे छोटी अस्थि होती है–

(अ) एटलास

(ब) पटेला

(स) स्टेपीस

(द) इनकस

उत्तर:

. (स) स्टेपीस (Stapes)

प्रश्न 1(ग).

हाइड्रा के अन्दर पाया जाने वाला शैवाल है–

(अ) प्रोतोडमी

(ब) क्लेडोफोरा

(स) सीफेल्यूरोस

(द) जूक्लोरेला

उत्तर:

. (द) जूक्लोरेला (Zoochlorella)

प्रश्न 1(घ).

निम्न में से किसके संघ में जल संवहनीय तंत्र पाया जाता है–

(अ) प्रोटोजोआ

(ब) आर्थोपोडा

(स) पोरिफेरा

(द) इकाइनोडर्मेटा

उत्तर:

. (द) इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata)

2. (अतिलघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 2(क).

DNA के किसी एक न्यूक्लियोटाइड की संरचना दीजिए।

उत्तर:

.

DNA का एक न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide) मुख्य रूप से तीन घटकों से मिलकर बनता है:

1. डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा (Deoxyribose sugar)

2. नाइट्रोजन युक्त क्षारक (नाइट्रोजनी बेस: A, T, G, या C में से कोई एक)

3. फास्फेट समूह (Phosphate group)

संरचनात्मक सूत्र: [फास्फेट समूह] — [डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा] — [नाइट्रोजनी क्षारक]

प्रश्न 2(ख).

वेलामेन ऊतक किन पौधों में पाया जाता है ?

उत्तर:

.

वेलामेन (Velamen) ऊतक उपरिरोही पादपों (Epiphytic plants) जैसे 'ऑर्किड' (Orchid) की वायवीय जड़ों (Aerial roots) में पाया जाता है, जो वातावरण से नमी अवशोषित करता है।

प्रश्न 2(ग).

आम का वैज्ञानिक नाम लिखो।

उत्तर:

.

मेंगीफेरा इंडिका (*Mangifera indica*)।

प्रश्न 2(घ).

फर्न को संवहन क्रिप्टोगैम क्यों कहा जाता है ?

उत्तर:

.

1. क्रिप्टोगैम: क्योंकि फर्न में पुष्प एवं बीज का निर्माण नहीं होता (अपुष्पोद्भिद)।

2. संवहन: क्योंकि इनमें जल एवं पोषक तत्वों के संवहन हेतु सुविकसित संवहन ऊतक (जाइलम एवं फ्लोएम) पाए जाते हैं।

इसी कारण फर्न (टेरिडोफाइट्स) को 'संवहन क्रिप्टोगैम' कहा जाता है।

प्रश्न 2(ङ).

माइकोप्लाज्मा से उत्पन्न दो पादप रोगों के नाम बताइए।

उत्तर:

.

1. बैंगन का लघुपत्र रोग (Little Leaf of Brinjal)

2. तिल का फाइलोडी रोग (Phyllody of Sesame)

3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)

प्रश्न 3(क).

एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री पौधों को किस प्रकार विभेदित करोगे ?

उत्तर:

.

1. एकबीजपत्री (Monocot):

• बीज में केवल 1 बीजपत्र होता है।

• पत्तियों में समानांतर शिराविन्यास (Parallel venation) होता है।

• जड़ों में रेशेदार/झकड़ा मूल तंत्र होता है।

2. द्विबीजपत्री (Dicot):

• बीज में 2 बीजपत्र होते हैं।

• पत्तियों में जालिकावत शिराविन्यास (Reticulate venation) होता है।

• जड़ों में मूसला मूल तंत्र (Tap root system) पाया जाता है।

प्रश्न 3(ख).

पटीय एवं ग्रसनीय वृक्कक में अंतर लिखिए।

उत्तर:

.

1. पटीय वृक्कक (Septal Nephridia):

• ये केंचुए के 15वें खण्ड से अंतिम खण्ड तक अंतरखण्डीय पटों (Septa) पर दोनों ओर स्थित होते हैं।

• ये अपने उत्सर्जी पदार्थों को आहारनाल (आंत्र) में डालते हैं (आंत्रमुखी / Enteronephric)।

2. ग्रसनीय वृक्कक (Pharyngeal Nephridia):

• ये केंचुए के 4वें, 5वें और 6वें खण्डों में गुच्छों (Tufts) के रूप में स्थित होते हैं।

• ये अपनी उत्सर्जी नलिकाओं द्वारा अपशिष्टों को ग्रसनी व ग्रसिका में छोड़ते हैं।

प्रश्न 3(ग).

पक्षियों में उड़ने हेतु क्या-क्या रूपांतरण है ?

उत्तर:

.

1. अग्रपाद का पंखों में रूपांतरण: उड़ने हेतु अग्रपाद पंखों में रूपांतरित हो जाते हैं।

2. खोखली अस्थियाँ (Pneumatic Bones): हड्डियों में हवा से भरी गुहाएँ होती हैं, जिससे शरीर हल्का रहता है।

3. सुविकसित उड्डयन पेशियाँ (Flight Muscles): उड्डयन हेतु पेक्टोरैलिस मेजर व माइनर पेशियाँ अत्यंत मजबूत होती हैं।

4. वायुकोश (Air sacs): श्वसन तंत्र के साथ वायुकोश जुड़े होते हैं जो अतिरिक्त O2 प्रदान करते हैं।

प्रश्न 3(घ).

नर तथा मादा ऐसकैरिस में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

.

┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐

│ नर ऐसकैरिस (Male Ascaris) │ मादा ऐसकैरिस (Female Ascaris) │

├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤

│ 1. आकार में छोटा व पतला होता है।│ 1. आकार में लंबी व मोटी होती │

│ │ है। │

2. पश्च सिरा मुड़ा हुआ (Hooked)│ 2. पश्च सिरा सीधा एवं नुकीला │

│ होता है। │ होता है। │

│ 3. मैथुन कंटक (Penial setae) │ 3. मैथुन कंटक अनुपस्थित │

│ उपस्थित होते हैं। │ होते हैं। │

│ 4. जनन छिद्र व गुदा एक साथ │ 4. जनन छिद्र मध्य भाग में तथा │

│ (अवस्कर छिद्र) खुलते हैं। │ गुदा पृथक खुलती है। │

└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘

प्रश्न 3(ङ).

शैवाल के वर्गीकरण का क्या आधार है ?

उत्तर:

.

शैवालों के वर्गीकरण के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं:

1. वर्णक (Pigments): मुख्य रूप से क्लोरोफिल, कैरोटीनॉयड और फाइकोबिलिन की उपस्थिति (जैसे क्लोरोफाइसी, फियोफाइसी, रोडोफाइसी)।

2. संचित भोजन (Stored Food): मंड, लेमिनेरिन, मैनिटॉल या फ्लोरिडियन स्टार्च के रूप में खाद्य संचय।

3. कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना: सेलुलोज, पेक्टिन, एल्जिन या पॉली सल्फेट एस्टर की उपस्थिति।

4. कशाभिका (Flagella) की संख्या और स्थिति: कशाभिकाओं की उपस्थिति, संख्या तथा संवेशन स्थान।

4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 4(क).

प्रिओन्स क्या हैं? इनके मुख्य लक्षण लिखिए।

उत्तर:

.

प्रिओन्स (Prions) केवल प्रोटीन अणु से बने संक्रामक कारक होते हैं, जिनमें आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA) पूर्णतः अनुपस्थित होता है।

• मुख्य लक्षण:

1. ये अत्यधिक असामान्य और मुड़े हुए (Misfolded) प्रोटीन होते हैं जो सामान्य प्रोटीनों को भी असामान्य रूप में बदल देते हैं।

2. ये उच्च ताप, विकिरण तथा प्रोटीज एंजाइमों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं।

3. ये तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं और 'मैड काऊ डिजीज' (BSE) तथा मनुष्यों में 'क्रूट्जफेल्ट-जैकब रोग' (CJD) उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 4(ख).

लिवरवर्ट तथा मॉस में अंतर लिखिए।

उत्तर:

.

1. लिवरवर्ट (Liverworts):

• पादप काय चपटा तथा थैलाभ (Thalloid) होता है (उदा. मर्चेंशिया)।

• बीजाणुद्भिद (Sporophyte) अत्यंत सरल होता है और इसमें प्रोटोनेमा अवस्था नहीं बनती।

2. मॉस (Mosses):

• पादप काय में आभासी तना एवं पत्तियाँ पाई जाती हैं (उदा. फ्यूनेरिया)।

• इनके जीवन चक्र में बीजाणु के अंकुरण से 'प्रोटोनेमा' (Protonema) नामक तंतुमयी संरचना बनती है।

प्रश्न 4(ग).

झकड़ा मूल व अपस्थानिक मूल में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

.

1. झकड़ा मूल (Fibrous Root):

• यह मूलांकुर (Radicle) से निकलने वाली प्राथमिक जड़ के शीघ्र नष्ट हो जाने के बाद तने के आधार से निकलती है।

• यह मुख्य रूप से एकबीजपत्री पौधों (जैसे गेहूं, धान) में पाई जाती है।

2. अपस्थानिक मूल (Adventitious Root):

• यह मूलांकुर को छोड़कर पौधे के किसी अन्य भाग (जैसे तने, शाखाओं या पत्तियों) से विकसित होती है।

• यह एकबीजपत्री व द्विबीजपत्री दोनों में पाई जा सकती है (उदा. बरगद की स्तम्भ मूल, मक्के की जटा मूल)।

प्रश्न 4(घ).

C4 पौधों पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर:

.

1. C4 पौधे शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं (उदा. मक्का, गन्ना, बाजरा)।

2. इनमें CO2 स्थिरीकरण का प्रथम स्थायी उत्पाद 4-कार्बन वाला ऑक्जेलोएसिटिक अम्ल (OAA) बनता है।

3. इनकी पत्तियों में 'क्रैंज शारीरिकी' (Kranz Anatomy) पाई जाती है, जिसमें पूल आच्छद (Bundle sheath) कोशिकाएँ संवहन बंडल के चारों ओर घेरा बनाती हैं।

4. इनमें प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) नगण्य या अनुपस्थित होता है, जिससे इनकी प्रकाश-संश्लेषण क्षमता उच्च होती है।

प्रश्न 4(ङ/ग2).

जाइलम कितने प्रकार की कोशिका से मिलकर बना है?

उत्तर:

.

जाइलम (Xylem) एक जटिल स्थायी ऊतक है जो 4 प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है:

1. वाहिनिकाएँ (Tracheids): जल संवहन करने वाली नलिकाकार, मृत कोशिकाएं।

2. वाहिकाएँ (Vessels): चौड़ी, चौकोर और आपस में जुड़ी मृत कोशिकाएं।

3. जाइलम तंतु (Xylem Fibers): यांत्रिक सहारा प्रदान करने वाली दृढ़ोतकी कोशिकाएं।

4. जाइलम मृदुतक (Xylem Parenchyma): भोजन संचय एवं पार्श्व संवहन करने वाली एकमात्र सजीव कोशिकाएं।

प्रश्न 4(च/घ2).

एकबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर:

.

[एकबीजपत्री जड़ (Monocot Root) की अनुप्रस्थ काट का नामांकित विवरण]:

• बाह्यत्वचा/मूलत्वचा (Epiblema): सबसे बाहरी परत, जिस पर एककोशिकीय मूलरोम पाए जाते हैं।

• वल्कुट (Cortex): बहुस्तरीय मृदुतकीय कोशिकाओं की परत।

• अंतस्त्वचा (Endodermis): वल्कुट के नीचे ढोलकाकार कोशिकाएं, कैस्पेरियन पट्टियों युक्त।

• परिरंभ (Pericycle): अंतस्त्वचा के अंदर स्थित परत।

• संवहन बंडल (Vascular Bundles): अरीय (Radial), जाइलम की संख्या 6 से अधिक (Polyarch)।

• मज्जा (Pith): केंद्र में बड़ी एवं सुविकसित मज्जा।

5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 5(क).

प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए प्रकाश आवश्यक है।

उत्तर:

.

• उद्देश्य: यह सिद्ध करना कि प्रकाश-संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है।

• उपकरण: गमले में लगा पौधा, काली पट्टी, क्लिप, अल्कोहल, आयोडीन घोल।

• विधि:

1. गमले में लगे पौधे को 48 घंटे के लिए अंधेरे कमरे में रखकर मण्ड-रहित (Destarch) कर लेते हैं।

2. इसके बाद एक पत्ती के मध्य भाग को दोनों तरफ से काली पट्टी से ढक देते हैं और पौधे को 4-5 घंटे धूप में रख देते हैं।

3. उस पत्ती को तोड़कर अल्कोहल में उबालकर विरंजित करते हैं और फिर उस पर आयोडीन का घोल डालते हैं।

• प्रेक्षण एवं निष्कर्ष:

पत्ती का खुला भाग आयोडीन के संपर्क में आकर नीला-काला (मण्ड उपस्थिति) हो जाता है, जबकि ढका हुआ भाग नीला नहीं होता। इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश के बिना प्रकाश-संश्लेषण नहीं होता।

प्रश्न 5(ख).

गॉल्जीकाय पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

1. गॉल्जीकाय (Golgi Complex) की खोज कैमिलो गॉल्जी ने की थी।

2. यह चपटी, झिल्लीदार थैलीनुमा कुंडिकाओं (Cisternae), पुटिकाओं (Vesicles) और सुराहीदार नलिकाओं का बना होता है।

3. मुख्य कार्य:

• अंतःप्रद्रव्यी जालिका (ER) द्वारा संश्लेषित प्रोटीन्स एवं लिपिड्स की पैकिंग, रूपांतरण एवं स्रावण करना।

• शुक्राणु के एक्रोसोम (Acrosome) का निर्माण करना।

• पादप कोशिका विभाजन के समय 'कोशिका पट्टी' (Cell plate) का निर्माण करना।

प्रश्न 5(ग/क2).

रेखांकित चित्र की सहायता से केन्द्रक की संरचना का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

केन्द्रक (Nucleus) कोशिका का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। इसकी संरचना में 4 मुख्य भाग होते हैं:

1. केन्द्रक कला (Nuclear Membrane): यह दोहरी झिल्लीदार आवरण है जिसमें छोटे-छोटे केन्द्रकीय छिद्र (Nuclear pores) पाए जाते हैं।

2. केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm): झिल्ली के अंदर भरा पारदर्शी, गाढ़ा तरल द्रव।

3. केन्द्रिका (Nucleolus): केन्द्रक द्रव्य में स्थित सघन गोल संरचना, जो r-RNA तथा राइबोसोम का निर्माण करती है।

4. क्रोमैटिन धागे (Chromatin Threads): यह DNA एवं हिस्टोन प्रोटीन का बना जाल है, जो कोशिका विभाजन के समय गुणसूत्रों में बदल जाता है।

प्रश्न 5(घ/ख2).

मेंढक में कितने प्रकार से गैसीय विनिमय होता है ?

उत्तर:

.

मेंढक में तीन प्रकार से श्वसन (गैसीय विनिमय) होता है:

1. त्वचीय श्वसन (Cutaneous Respiration): नम एवं श्लेष्म युक्त त्वचा द्वारा जल व स्थल दोनों पर (विशेषकर जल में व निष्क्रियता काल में)।

2. मुख-ग्रसनीय श्वसन (Buccopharyngeal Respiration): मुख गुहा की नम श्लेष्मा झिल्ली द्वारा स्थल पर।

3. फुफ्फुसीय श्वसन (Pulmonary Respiration): फेफड़ों द्वारा केवल स्थल पर।

प्रश्न 5(ङ/ग3).

पुष्पासन पर पुष्पी भागों का निवेशन।

उत्तर:

.

पुष्पासन (Receptacle) पर अण्डाशय के सापेक्ष अन्य पुष्पीय भागों (बायदल, दल, पुंकेसर) की स्थिति के आधार पर पुष्प 3 प्रकार के होते हैं:

1. जाययांगोपरिक (Hypogynous - अधोजाय): अण्डाशय सबसे ऊपर तथा अन्य भाग नीचे से निकलते हैं। अण्डाशय उर्ध्ववर्ती (Superior) होता है (उदा. सरसों, गुड़हल)।

2. परिजायांगी (Perigynous - परिजाय): पुष्पासन प्यालेनुमा होता है, अण्डाशय मध्य में तथा अन्य भाग किनारे पर स्थित होते हैं (उदा. गुलाब, आडू)।

3. जायांगोपरिक (Epigynous - अधिजायांग): पुष्पासन अण्डाशय को पूरी तरह घेर लेता है तथा अन्य भाग अण्डाशय के ऊपर से निकलते हैं। अण्डाशय अधोवर्ती (Inferior) होता है (उदा. अमरूद, खीरा)।

प्रश्न 5(च/घ2).

एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

.

┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐

│ एकबीजपत्री (Monocotyledonous) │ द्विबीजपत्री (Dicotyledonous) │

├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤

│ 1. बीज में 1 बीजपत्र होता है। │ 1. बीज में 2 बीजपत्र होते हैं।│

│ 2. पत्ती में समानांतर शिराविन्यास।│ 2. पत्ती में जालिकावत शिराविन्यास।│

│ 3. रेशेदार (झकड़ा) मूल तंत्र। │ 3. मूसला मूल तंत्र पाया जाता है।│

│ 4. संवहन बंडल बिखरे हुए और │ 4. संवहन बंडल वलय में व्यवस्थित│

│ अवर्धी (Closed) होते हैं। │ तथा वर्धी (Open) होते हैं। │

└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘

6. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 6.

द्विबीजपत्री तने की अनुप्रस्थ काट का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

द्विबीजपत्री तने (Dicot Stem / जैसे सूरजमुखी) की अनुप्रस्थ काट में निम्नलिखित भाग दिखाई देते हैं:

1. बाह्यत्वचा (Epidermis): यह सबसे बाहरी एककोशिकीय परत है जिस पर उपत्वचा (Cuticle) तथा बहुकोशिकीय तना-रोम (Stem hairs) पाए जाते हैं।

2. वल्कुट (Cortex): यह तीन क्षेत्रों में विभाजित होता है:

• अधस्त्वचा (Hypodermis): यह स्थूलकोणोतक (Collenchyma) कोशिकाओं की बनी होती है जो यांत्रिक दृढ़ता देती है।

• सामान्य वल्कुट (General Cortex): यह मृदुतकीय कोशिकाओं की बनी होती है।

• अंतस्त्वचा (Endodermis): इसे मण्ड आच्छद (Starch sheath) भी कहते हैं।

3. परिरंभ (Pericycle): अंतस्त्वचा के नीचे स्थित दृढोतक तथा मृदुतक की एकांतर पट्टियाँ।

4. संवहन बंडल (Vascular Bundles):

• संवहन बंडल एक वलय (Ring) में व्यवस्थित होते हैं।

• प्रत्येक संवहन बंडल संयुक्त (Conjoint), समपार्श्विक (Collateral) तथा वर्धी (Open / एधा युक्त) होता है।

5. मज्जा एवं मज्जा रश्मियाँ (Pith & Medullary Rays): केंद्र में विशाल मृदुतकीय मज्जा पाई जाती है, संवहन बंडलों के बीच मज्जा रश्मियाँ फैली होती हैं।

अथवा

प्रश्न 6.

सोलेनेसी कुल के एक पुष्प को उदाहरण के रूप में लो तथा उनका अर्द्धतकनीकी विवरण प्रस्तुत करो।

उत्तर:

.

कुल: सोलेनेसी (Solanaceae - आलू कुल)

उदाहरण पौधा: Solanum nigrum (मकोय) या Datura stramonium (धतूरा)

• कायिक लक्षण: शाकीय या झाड़ीदार पौधा, स्तंभ सीधा व शाखित, पत्तियाँ एकांतर व सरल।

• पुष्पीय लक्षण एवं अर्द्धतकनीकी विवरण:

1. पुष्पक्रम: एकल या ससीमाक्ष (Cymose)।

2. पुष्प: त्रिज्यासममित (Actinomorphic), द्विलिंगी (Bisexual), पंचतयी (Pentamerous), अधोजाय (Hypogynous)।

3. बाह्यदलपुंज (Calyx): बाह्यदल 5, संयुक्त (Gamosepalous), कोरस्पर्शी (Valvate), चिरलग्न।

4. दलपुंज (Corolla): दल 5, संयुक्त (Gamopetalous), कोरस्पर्शी या व्यवर्तित।

5. पुमंग (Androecium): पुंकेसर 5, पृथकपुंकेसरी, दललग्न (Epipetalous)।

6. जायांग (Gynoecium): द्विअण्डपी (Bicarpellary), युक्ताण्डपी (Syncarpous), अण्डाशय उर्ध्ववर्ती (Superior), तिरछा (Oblique) स्थित, बीजांडन्यास अक्षीय (Axile placentation)।

• मातृचित्र एवं पुष्प सूत्र (Floral Formula):

⊕ ⚥ K(5) C(5) A5 G(2) (यहाँ C और A आपस में जुड़े/दललग्न हैं)।

7. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 7.

संघ सीलेन्ट्रेटा को विस्तार से समझाइए।

उत्तर:

.

संघ सीलेन्ट्रेटा / नाइडेरिया (Coelenterata / Cnidaria):

• मुख्य लक्षण:

1. आवास: ये मुख्यतः समुद्री जल में (जैसे मूंगा) तथा कुछ स्वच्छ जल में (जैसे हाइड्रा) पाए जाते हैं।

2. शारीरिक संगठन: ऊतक स्तर का (Tissue level) संगठन पाया जाता है तथा ये द्विस्तरीय (Diploblastic - एक्टोडर्म व एंडोडर्म) होते हैं।

3. सिमेट्री: इनमें अरीय सममिति (Radial Symmetry) पाई जाती है।

4. नाइडोब्लास्ट / दंश कोशिकाएं: इनकी स्पर्शकों पर 'दंश कोशिकाएं' (Cnidoblasts) पाई जाती हैं जो आत्मरक्षा, शिकार पकड़ने तथा चिपकने का कार्य करती हैं।

5. जठर-संवहनी गुहा (Coelenteron): शरीर में एक ही गुहा होती है जो एकल छिद्र (मुख) द्वारा बाहर खुलती है।

6. बहुरूपता (Polymorphism): इनमें दो रूप पाए जाते हैं—

• पॉलिप (Polyp): अचल, बेलनाकार अलैंगिक रूप (उदा. हाइड्रा)।

• मेड्यूसा (Medusa): छतरीनुमा, मुक्त-प्लावी लैंगिक रूप (उदा. ऑरेलिया / जेलीफिश)।

• उदाहरण: हाइड्रा (*Hydra*), ऑरेलिया (*Aurelia* - जेलीफिश), एडम्सिया (*Adamsia*), फाइसेलिया (*Physalia*)।

अथवा

प्रश्न 7.

संघ प्लेटीहैल्मिन्थीज का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

संघ प्लेटीहैल्मिन्थीज (Platyhelminthes - चपटे कृमि):

• मुख्य लक्षण:

1. शरीर की बनावट: इनका शरीर पृष्ठ-अधरीय रूप से चपटा (Dorso-ventrally flattened) होता है, इसीलिए इन्हें 'चपटे कृमि' कहते हैं।

2. संगठन एवं सममिति: अंग स्तर का (Organ level) संगठन, द्विपार्श्व सममिति (Bilateral symmetry) तथा ये त्रिस्तरीय (Triploblastic) जीव हैं।

3. अगूही (Acoelomate): इनमें देहगुहा (Coelom) अनुपस्थित होती है।

4. परजीवी अनुकूलन: अधिकांश जीव परजीवी होते हैं। इनमें शिकार/पोषी से चिपकने हेतु अंकुश (Hooks) तथा चूषक (Suckers) पाए जाते हैं।

5. उत्सर्जन अंग: उत्सर्जन एवं परासरण नियंत्रण हेतु विशेष 'ज्वाला कोशिकाएँ' (Flame cells / Proto-nephridia) पाई जाती हैं।

6. जनन एवं विकास: ये उभयलिंगी (Hermaphrodite) होते हैं। निषेचन आंतरिक होता है तथा पुनर्जनन (Regeneration) की अपार क्षमता होती है।

• उदाहरण: प्लेनेरिया (*Planaria*), यकृत कृमि (*Fasciola hepatica*), फीताकृमि (*Taenia solium*)।

8. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 8.

एड्रीनल कॉर्टेक्स द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स तथा उनके कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

.

एड्रीनल ग्रंथि का बाहरी भाग 'एड्रीनल कॉर्टेक्स' (Adrenal Cortex) कहलाता है। यह स्टेरॉयड हॉर्मोन स्रावित करता है जिन्हें 'कोर्टिकोस्टेरॉयड' (Corticosteroids) कहा जाता है:

1. मिनरेलोकॉर्टिकॉइड्स (Mineralocorticoids - उदा. एल्दोस्टेरोन):

• कार्य: यह वृक्क नलिकाओं में Na⁺ तथा जल के पुनःअवशोषण को बढ़ाता है और K⁺ के उत्सर्जन को नियंत्रित करता है। यह शरीर में जल एवं विद्युत-अपघट्य संतुलन तथा रक्तदाब को बनाए रखता है।

2. ग्लूकोकोर्टिकॉइड्स (Glucocorticoids - उदा. कॉर्टिसोल):

• कार्य: यह कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन उपापचय का नियमन करता है।

• यह ग्लूकोनियोजेनेसिस (Gluconeogenesis) को प्रेरित करता है तथा सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) और प्रतिरक्षा-दमनकारी प्रभाव डालता है।

3. सेक्स कोर्टिकॉइड्स / एंड्रोजेनिक स्टेरॉइड्स (Sex Corticoids):

• कार्य: ये थोड़ी मात्रा में नर व मादा सेक्स हॉर्मोन स्रावित करते हैं जो यौवनारंभ के समय जननांगों के विकास, बगल व जननांगों के बालों की वृद्धि का नियंत्रण करते हैं।

अथवा

प्रश्न 8.

उदाहरण सहित निम्नलिखित शब्दावली का संक्षिप्त वर्णन कीजिए– (अ) पुंधानी (ब) स्त्रीधानी (स) समयुग्मकी

उत्तर:

.

(अ) पुंधानी (Antheridium):

• वर्णन: यह ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स तथा शैवालों में पाया जाने वाला बहुकोशिकीय एवं आवरणयुक्त नर जननांग है। इसके अंदर नर युग्मक अर्थात् कशाभिकायुक्त 'पुमंग' (Antherozoids / Sperm) का निर्माण होता है।

• उदाहरण: Funaria (मॉस) या Fern की पुंधानी।

(ब) स्त्रीधानी (Archegonium):

• वर्णन: यह ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स तथा जिम्नोस्पर्म्स में पाया जाने वाला फ्लास्क के आकार का मादा जननांग है। इसमें एक फूली हुई अंधांत (Venter) होती है जिसमें अंड कोशिका (Egg cell) तथा ऊपर एक ग्रीवा (Neck) पाई जाती है।

• उदाहरण: Riccia, Funaria या फर्न की स्त्रीधानी।

(स) समयुग्मकी (Isogamy / Isogametes):

• वर्णन: जब संलयन करने वाले नर तथा मादा युग्मक आकार, माप एवं संरचना में पूर्णतः एक समान होते हैं, तो उन्हें 'समयुग्मकी' कहते हैं और इस प्रकार के लैंगिक जनन को 'समयुग्मन' (Isogamy) कहा जाता है।

• उदाहरण: Cladophora (कशाभिकायुक्त समयुग्मक), Spirogyra (अकशाभिक समयुग्मक)।