खण्ड 'अ' (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Biology Half-Yearly Paper 2026 A\15,000 Code
कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2026 · अर्धवार्षिक
प्रश्न 1(क).
वर्गीकरण का प्रथम पद है–
(i) नामकरण
(ii) पहचान
(iii) वर्णन
(iv) वर्गीकरण
उत्तर:
. (ii) पहचान
प्रश्न 1(ख).
पुष्पक्रम का अक्ष कहलाता है–
(i) पुष्पासन
(ii) पुष्प बलि वृन्त
(iii) पुष्प वृन्त
(iv) पर्ण वृन्त
उत्तर:
. (ii) पुष्प बलि वृन्त (Peduncle)
प्रश्न 1(ग).
सबसे लम्बी पादप कोशिका है–
(i) रेशे
(ii) वाहिनी
(iii) वाहिनिका
(iv) अधोवाही
उत्तर:
. (i) रेशे (Fibers / जैसे पटसन या बोहमीरिया के रेशे)
प्रश्न 1(घ).
किरैटिन पाया जाता है–
(i) मस्तिष्क
(ii) रुधिर
(iii) अस्थि एवं दाँत
(iv) बाल तथा त्वचा
उत्तर:
. (iv) बाल तथा त्वचा
2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
वंश से बड़ी व छोटी एक-एक श्रेणी का नाम लिखिए।
उत्तर:
.
• बड़ी श्रेणी: कुल (Family)
• छोटी श्रेणी: जाति (Species)
प्रश्न 2(ख).
किसी एक कीटभक्षी पौधे का नाम बताइए।
उत्तर:
.
घटपर्णी (Nepenthes / Pitcher Plant) या ड्रोसेरा (Drosera)।
प्रश्न 2(ग).
ऊतक के दो प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर:
.
1. विभाज्योतकी ऊतक (Meristematic Tissue)
2. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
प्रश्न 2(घ).
न्यूक्लिक अम्ल के कितने प्रकार होते हैं ?
उत्तर:
.
न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार के होते हैं:
1. DNA (डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल)
2. RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल)
प्रश्न 2(ङ).
कीट में कितनी जोड़ी पाद होते हैं ?
उत्तर:
.
कीटों में 3 जोड़ी (कुल 6) पाद (Legs) होते हैं।
3. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 3(क).
जूप्लैंक्टन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
जल निकाय (जैसे ताल, झील, समुद्र) की सतह पर तैरने वाले अति सूक्ष्म, अविकसित या तैरने में असमर्थ जंतुओं को 'जूप्लैंक्टन' (जंतु प्लवक) कहते हैं (उदा. डाफ्निया, साइक्लोप्स)।
प्रश्न 3(ख).
विरलदारुक काष्ठ किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
वह काष्ठ (Wood) जिसमें वाहिकाएँ (Vessels) कम संख्या में और दूर-दूर स्थित होती हैं तथा पैरेन्काइमा अधिक मात्रा में पाया जाता है, उसे विरलदारुक काष्ठ (Manoxylic Wood) कहते हैं (उदा. साइकस की काष्ठ)।
प्रश्न 3(ग).
दो पादविहीन उभयचरों के नाम लिखिए।
उत्तर:
.
1. इक्थियोफिस (Ichthyophis)
2. यूरियोटिफ्लस (Uraeotyphlus)
प्रश्न 3(घ).
पुष्पक्रम को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
.
पौधे के मुख्य तने या शाखा के पुष्पीय अक्ष (Peduncle) पर पुष्पों के व्यवस्थित होने अथवा लगे रहने के क्रम को 'पुष्पक्रम' (Inflorescence) कहते हैं।
प्रश्न 3(ङ).
टमाटर पकने पर लाल क्यों हो जाता है ?
उत्तर:
.
टमाटर के पकने पर इसमें उपस्थित हरितलवक (Chloroplast) क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast / वर्णीलवक) में परिवर्तित हो जाते हैं और इनमें 'लाइकोपीन' (Lycopene) नामक लाल वर्णक का निर्माण हो जाता है।
4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)
प्रश्न 4(क).
संतृप्त तथा असंतृप्त वसा अम्लों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. संतृप्त वसा अम्ल (Saturated Fatty Acids):
• कार्बन शृंखला में केवल एकल बंध (-C-C-) पाए जाते हैं।
• इनका गलनांक उच्च होता है तथा ये कमरे के ताप पर ठोस होते हैं। (उदा. स्टेयरिक अम्ल, पामिटिक अम्ल)।
2. असंतृप्त वसा अम्ल (Unsaturated Fatty Acids):
• कार्बन शृंखला में एक या अधिक द्वि-बंध (-C=C-) पाए जाते हैं।
• इनका गलनांक कम होता है तथा ये कमरे के ताप पर द्रव (तेल) होते हैं। (उदा. ओलिक अम्ल, लिनोलेनिक अम्ल)।
प्रश्न 4(ख).
न्यूक्लियोसोम पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
1. यूकैरियोटिक कोशिकाओं में DNA क्रोमेटिन के रूप में व्यवस्थित रहता है, जिसकी मूल संरचनात्मक इकाई को 'न्यूक्लियोसोम' कहते हैं।
2. इसमें 8 हिस्टोन प्रोटीन अणुओं (H2A, H2B, H3, H4 प्रत्येक के दो अणु) का एक अष्टक (Octamer) होता है।
3. इस धनात्मक हिस्टोन कोर के चारों ओर ऋणात्मक आवेशित DNA लगभग 1.75 फेरों में लिपटा रहता है।
4. सूक्ष्मदर्शी में यह 'धागे में पिरोए हुए मनकों' (Beads-on-a-string) की तरह दिखाई देता है।
प्रश्न 4(ग).
लसीका के कार्य लिखिए।
उत्तर:
.
1. पोषक पदार्थों का परिवहन: पचे हुए वसा का अवशोषण एवं परिवहन आंत्र से रुधिर तक लसीका कोशिकाओं (Lacteals) द्वारा होता है।
2. प्रतिरक्षा प्रणाली: लसीका में उपस्थित लिंफोसाइट्स हानिकारक जीवाणुओं एवं रोगाणुओं को नष्ट करके शरीर की सुरक्षा करते हैं।
3. आन्तरिक वातावरण का नियमन: यह ऊतकों एवं रुधिर के मध्य जल, गैसों एवं पोषक तत्वों का विनिमय मध्यस्थ के रूप में करता है।
प्रश्न 4(घ).
हाइपैन्थोडियम पुष्पक्रम पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
1. यह एक विशेष प्रकार का कूट (Special) पुष्पक्रम है।
2. इसमें पुष्पीय अक्ष (Peduncle) मांसल होकर एक कप या नासपाती के आकार का खोखला पात्र बना लेता है, जिसके ऊपरी सिरे पर एक छोटा छिद्र (Ostiole) होता है।
3. खोखली गुहा के अंदर की भित्ति पर तीन प्रकार के पुष्प लगे होते हैं: छिद्र के पास नर पुष्प, नीचे मादा पुष्प तथा मध्य में बंध्य (Gall) पुष्प पाए जाते हैं।
4. उदाहरण: बरगद, पीपल, अंजीर (Ficus प्रजाति)।
5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 5(क).
स्तनी और सरीसृप में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐
│ स्तनी (Mammalia) │ सरीसृप (Reptilia) │
├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤
│ 1. त्वचा पर बाल व स्वेद │ 1. त्वचा शुष्क एवं शल्कों │
│ ग्रंथियाँ पाई जाती हैं। │ (Scales) से ढकी होती है। │
│ 2. स्तन ग्रंथियाँ उपस्थित होती│ 2. स्तन ग्रंथियां अनुपस्थित │
│ हैं जो दुग्ध स्राव करती हैं।│ होती हैं। │
│ 3. हृदय पूर्णतः 4-वेश्मी होता │ 3. हृदय 3-वेश्मी (मगरमच्छ में │
│ है और ये समतापी होते हैं। │ 4-वेश्मी) व असमतापी होते हैं।│
│ 4. बच्चे पैदा करते हैं │ 4. अण्डज (Egg laying) होते │
│ (जरायुज / Viviparous)। │ हैं। │
└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘
प्रश्न 5(ख).
नाल तन्त्र पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
1. नाल तंत्र (Canal System) संघ पोरीफेरा (स्पंजों) की मुख्य विशेषता है।
2. छिद्रों (ऑस्टिया) के माध्यम से जल शरीर की केंद्रीय गुहा (स्पंजोगुहा) में प्रवेश करता है और ऑस्कुलम (Osculum) नामक बड़े छिद्र द्वारा बाहर निकलता है।
3. यह तंत्र जलधारा के साथ भोजन (सूक्ष्मजीव) लाने, श्वसन हेतु O2 उपलब्ध कराने, उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालने तथा जनन कोशिकाओं के स्थानांतरण में सहायक होता है।
प्रश्न 5(ग).
लिवरवर्ट तथा मॉस में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. लिवरवर्ट (Liverworts):
• पादप काय थैलाभ (Thalloid) और चपटा होता है (उदा. मर्चेंशिया)।
• बीजाणुद्भिद (Sporophyte) सरल होता है जिसमें प्रोटोनेमा अवस्था नहीं बनती।
2. मॉस (Mosses):
• पादप काय में आभासी तना एवं पत्तियाँ (पत्तीदार) पाई जाती हैं (उदा. फ्यूनेरिया)।
• जीवन चक्र में बीजाणु के अंकुरण से 'प्रोटोनेमा' (Protonema) नामक तंतुमयी प्राथमिक अवस्था बनती है।
प्रश्न 5(घ).
बैक्टीरिया तथा सायनो बैक्टीरिया में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. बैक्टीरिया (Bacteria):
• ये मुख्यतः विषमपोषी (Heterotrophic) या रसायन-संश्लेषी होते हैं।
• इनमें पर्णहरिम (Chlorophyll-a) अनुपस्थित होता है।
• O2 का उत्पादन नहीं होता (अप्रकाशिक/अवायवीय प्रकाश संश्लेषण)।
2. सायनो बैक्टीरिया (Cyanobacteria / नीले-हरे शैवाल):
• ये स्वपोषी (Autotrophic) होते हैं।
• इनमें क्लोरोफिल-a तथा फाइकोसाइनिन वर्णक पाया जाता है।
• ये प्रकाश-संश्लेषण के दौरान O2 मुक्त करते हैं तथा इनमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण (हेटेरोसिस्ट) की क्षमता होती है।
6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 6(क).
कण्डरा तथा स्नायु में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. कण्डरा (Tendon):
• यह पेशी (Muscle) को अस्थि (Bone) से जोड़ता है।
• यह श्वेत कोलेजन तंतुओं का बना होता है, जो मजबूत तथा कम लचीला होता है।
2. स्नायु (Ligament):
• यह अस्थि (Bone) को दूसरी अस्थि (Bone) से जोड़ता है।
• यह पीले इलास्टिन तंतुओं का बना होता है, जो अत्यधिक लचीला व लोचदार होता है।
प्रश्न 6(ख).
जीन की संरचना तथा कार्य पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
• जीन की संरचना:
जीन आनुवंशिकता की मूलभूत इकाई है। यह DNA अणु का एक विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम है, जो किसी विशिष्ट प्रोटीन या पॉलीपेप्टाइड शृंखला के निर्माण की सूचना कोडित करता है।
• जीन के कार्य:
1. आनुवंशिक लक्षणों को माता-पिता से संतानों में पहुँचाना।
2. कोशिका में एंजाइमों एवं प्रोटीनों के संश्लेषण का नियंत्रण कर उपापचयी क्रियाओं को संचालित करना।
प्रश्न 6(ग).
एंजाइम के महत्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
1. जैव-उत्प्रेरक: एंजाइम जैविक उत्प्रेरक हैं जो जीवों के शरीर में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बिना स्वयं नष्ट हुए लाखों गुना बढ़ा देते हैं।
2. उपापचयी क्रियाओं का नियंत्रण: पाचन, श्वसन, प्रकाश-संश्लेषण, DNA द्विगुणन आदि सभी क्रियाएँ विशिष्ट एंजाइमों द्वारा ही संपन्न होती हैं।
3. विशिष्टता: प्रत्येक एंजाइम अपने विशिष्ट क्रियाधार (Substrate) के लिए अत्यधिक विशिष्ट होता है, जिससे शरीर में सही समय पर सही रासायनिक परिवर्तन होते हैं।
प्रश्न 6(घ).
सिस्टोलिथ पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
1. सिस्टोलिथ (Cistolith) पादप कोशिकाओं की कोशिका भित्ति पर अंगूर के गुच्छे के समान जमा होने वाली एक विशेष आंतरिक संरचना है।
2. यह मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) के क्रिस्टलों से बनी होती है।
3. यह कुछ विशिष्ट कुलों (जैसे एकांथेसी, अर्टिकेसी, कुकरबिटेसी) की पत्तियों की बाह्यत्वचा (Epidermis) की 'लिथोसिस्ट' कोशिकाओं में पाया जाता है।
7. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 7.
गुणसूत्र की आकृति तथा इसके कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
.
• गुणसूत्र की आकृति (Morphology of Chromosome):
गुणसूत्र में निम्नलिखित भाग पाए जाते हैं:
1. सेन्ट्रोमियर (प्राथमिक संकीर्णन): वह स्थान जहाँ दो क्रोमैटिड जुड़ते हैं। सेन्ट्रोमियर की स्थिति के आधार पर गुणसूत्र 4 प्रकार के होते हैं:
- मध्यकेंद्री (Metacentric): सेन्ट्रोमियर बीच में (V-आकार)।
- उप-मध्यकेंद्री (Sub-metacentric): बीच से थोड़ा हटकर (L-आकार)।
- अग्रकेंद्री (Acrocentric): सिरे के पास (J-आकार)।
- अंतकेंद्री (Telocentric): बिल्कुल सिरे पर (I-आकार)।
2. द्वितीयक संकीर्णन व सैटेलाइट: कुछ गुणसूत्रों में द्वितीयक संकीर्णन पाया जाता है जिसके आगे का भाग सैटेलाइट कहलाता है।
• गुणसूत्र के कार्य:
1. आनुवंशिक गुणों का वहन करना एवं उन्हें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचाना।
2. कोशिका विभाजन एवं आनुवंशिक पुनर्योजन का नियंत्रण करना।
3. जीवों में लिंग निर्धारण एवं विभिन्नताओं के विकास में मुख्य भूमिका निभाना।
अथवा
प्रश्न 7.
वाइरस तथा जीवाणु में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐
│ वाइरस (Virus) │ जीवाणु (Bacteria) │
├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤
│ 1. ये अकोशिकीय (Acellular) │ 1. ये एककोशिकीय (Unicellular) │
│ सूक्ष्मजीव हैं। │ प्रोकैरियोटिक जीव हैं। │
│ 2. केवल जीवित पोषी कोशिका के │ 2. ये सजीव माध्यम व निर्जीव │
│ अंदर ही जनन कर सकते हैं। │ संवर्धन माध्यम पर भी जनन │
│ │ कर सकते हैं। │
│ 3. इनमें DNA या RNA में से │ 3. इनमें DNA तथा RNA दोनों │
│ केवल एक ही पाया जाता है। │ पाए जाते हैं। │
│ 4. इन पर एंटीबायोटिक्स का │ 4. एंटीबायोटिक्स दवाइयों द्वारा│
│ कोई प्रभाव नहीं पड़ता। │ इन्हें नष्ट किया जा सकता है।│
└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘
8. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 8.
कार्बोहाइड्रेट क्या है ? कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख संवर्गों का उल्लेख कीजिए। सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट का रासायनिक सूत्र लिखिए। जन्तु शरीर में कार्बोहाइड्रेट की क्या भूमिका है ?
उत्तर:
.
• कार्बोहाइड्रेट की परिभाषा:
कार्बोहाइड्रेट कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) और ऑक्सीजन (O) के यौगिक होते हैं (सामान्य सूत्र Cx(H2O)y), जो रासायनिक रूप से पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं।
• प्रमुख संवर्ग:
1. मोनोसेकेराइड: ये जल-अपघटित नहीं होते (उदा. ग्लूकोज, फ्रक्टोज)।
2. ओलिगोसेकेराइड: जल-अपघटन पर 2 से 10 मोनोसेकेराइड इकाइयाँ देते हैं (उदा. सुक्रोज, माल्टोज)।
3. पॉलीसेकेराइड: जल-अपघटन पर अनेक मोनोसेकेराइड अणु देते हैं (उदा. स्टार्च, ग्लाइकोजन, सेलुलोज)।
• सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट का सूत्र:
ग्लिसरैल्डिहाइड (Glyceraldehyde - ट्रायोज शर्करा) ➔ C3H6O3
• जन्तु शरीर में भूमिका:
1. ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत: ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होकर शरीर को तुरंत ऊर्जा (ATP) मिलती है।
2. संचित ईंधन: यकृत एवं पेशियों में अतिरिक्त ग्लूकोज 'ग्लाइकोजन' के रूप में संचित रहता है।
3. संरचनात्मक घटक: कोशिका झिल्ली में ग्लाइकोप्रोटीन व ग्लाइकोलिपिड के रूप में संरचना बनाते हैं।
अथवा
प्रश्न 8.
पुष्पक्रम की परिभाषा लिखिए। पुष्पी पादपों में विभिन्न प्रकार के असीमाक्षी पुष्पक्रमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• पुष्पक्रम की परिभाषा:
पुष्पीय अक्ष पर पुष्पों के लगने तथा व्यवस्थित रहने के क्रम को पुष्पक्रम (Inflorescence) कहते हैं।
• असीमाक्षी पुष्पक्रम (Racemose Inflorescence) के प्रकार:
इसमें मुख्य अक्ष (Peduncle) अनिश्चित रूप से बढ़ता रहता है और पुष्प अग्राभिसारी (Acropetal) क्रम में लगते हैं। मुख्य प्रकार निम्न हैं:
1. असीमाक्ष (Raceme): मुख्य अक्ष लंबा होता है और उस पर सवृंत (Stalked) पुष्प लगते हैं (उदा. सरसों, मूली)।
2. स्पाइक (Spike): मुख्य अक्ष पर अवृंत (Sessile) पुष्प लगते हैं (उदा. अचीरेंथस / लटजीरा)।
3. स्पैडिक्स (Spadix): मुख्य अक्ष मांसल होता है जो एक बड़े रंगीन पत्र (Spathe) से ढका रहता है (उदा. केला, अरबी)।
4. मंजरी / कैटकिन (Catkin): मुख्य अक्ष कमजोर व लटका हुआ होता है जिस पर एकलिंगी अवृंत पुष्प होते हैं (उदा. शहूत)।
5. समशिख (Corymb): नीचे वाले पुष्पों के वृंत लंबे तथा ऊपर वालों के छोटे होते हैं, जिससे सभी पुष्प एक ही तल पर आ जाते हैं (उदा. कांजी / कैंडिटफ्ट)।
6. छत्रक (Umbell): सभी पुष्प वृंत एक ही बिंदु से निकलते हैं (उदा. धनिया, सौंफ)।
7. मुंडक (Capitulum): मुख्य अक्ष चपटा होकर फ्लैट रिसेप्टकल बनाता है जिस पर छोटे पुष्पक (Florets) लगे होते हैं (उदा. सूरजमुखी, गेंदा)।
9. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 9.
एकबीजपत्री मूल की आन्तरिक रचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
एकबीजपत्री मूल (Monocot Root / जैसे मक्का) की अनुप्रस्थ काट (T.S.) में बाहर से अंदर की ओर निम्नलिखित भाग दिखाई देते हैं:
1. मूलत्वचा (Epiblema / Piliferous layer): यह सबसे बाहरी एककोशिकीय परत है जिस पर एककोशिकीय मूलरोम (Root hairs) पाए जाते हैं।
2. वल्कुट (Cortex): यह बहुस्तरीय, पतली भित्ति वाली मृदुतकीय (Parenchymatous) कोशिकाओं का बना होता है, जिनमें अंतरकोशिकीय स्थान पाए जाते हैं।
3. अंतस्त्वचा (Endodermis): वल्कुट की सबसे भीतरी ढोलकाकार कोशिकाओं की परत है, जिस पर कैस्पेरियन पट्टियाँ पाई जाती हैं।
4. परिरंभ (Pericycle): अंतस्त्वचा के ठीक नीचे स्थित दृढोतक या मृदुतक की परत है।
5. संवहन बंडल (Vascular Bundles):
• ये अरीय (Radial) प्रकार के होते हैं।
• जाइलम तथा फ्लोएम की संख्या 6 से अधिक (बहुआदिदारुक / Polyarch) होती है।
• जाइलम बाह्यआदिदारुक (Exarch) होता है।
6. मज्जा (Pith): केंद्र में एक बड़ी, सुविकसित एवं विशाल मज्जा पाई जाती है।
अथवा
प्रश्न 9.
माइटोकाण्ड्रिया की संरचना तथा कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• माइटोकाण्ड्रिया की संरचना (Structure of Mitochondria):
माइटोकाण्ड्रिया दोहरी झिल्ली से घिरा एक महत्वपूर्ण कोशिकांग है।
1. बाह्य झिल्ली (Outer Membrane): यह चिकनी और पारगम्य होती है।
2. आंतरिक झिल्ली (Inner Membrane): यह चयनात्मक पारगम्य होती है तथा अंदर की ओर अंगुलीनुमा प्रवर्ध बनाती है जिन्हें 'क्रिस्टी' (Cristae) कहते हैं।
3. एफ-1 कण (F1-particles / Oxysomes): क्रिस्टी की सतह पर टेनिस के रैकेट के आकार के सूक्ष्म कण लगे होते हैं, जिनमें ATP-सिंथेटेज एंजाइम पाया जाता है।
4. मैट्रिक्स (Matrix): दोनों झिल्लियों के बीच की गुहा में गाढ़ा द्रव भरा होता है जिसमें वृत्ताकार DNA, 70S राइबोसोम तथा क्रेब्स चक्र के एंजाइम पाए जाते हैं।
• माइटोकाण्ड्रिया के कार्य:
1. कोशिकीय श्वसन (Cellular Respiration): यह ऑक्सीश्वसन (क्रेब्स चक्र व ETS) का मुख्य स्थल है।
2. ATP का निर्माण: ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ऊर्जा मुक्त करके ATP का निर्माण करता है, इसलिए इसे कोशिका का 'पावर हाउस' (Powerhouse of the Cell) कहा जाता है।