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UP Board Class 11th Biology Annual Paper 2026 A Code

कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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खण्ड 'अ' (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न 1(क).

भ्रूण के चारों ओर रक्षात्मक आवरण एम्नियॉन पाया जाता है–

(a) कॉकरोच में

(b) मछली में

(c) छिपकली में

(d) टोड में

उत्तर:

. (c) छिपकली में

प्रश्न 1(ख).

"कोशिका जीवन की इकाई है" नामक कथन किसने दिया ?

(a) श्वान ने

(b) स्लीडेन ने

(c) डूट्रोचेट ने

(d) लैमार्क ने

उत्तर:

. (c) डूट्रोचेट ने

प्रश्न 1(ग).

प्रकाश संश्लेषण में–

(a) H2O का अपचयन होता है

(b) H2O का ऑक्सीकरण होता है

(c) CO2 का ऑक्सीकरण होता है

(d) NO2 का ऑक्सीकरण होता है

उत्तर:

. (b) H2O का ऑक्सीकरण होता है

प्रश्न 1(घ).

प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण करता है–

(a) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र

(b) परिधीय तंत्रिका तंत्र

(c) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र

(d) मेरुदण्ड

उत्तर:

. (d) मेरुदण्ड

2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 2(क).

माइकोप्लाज्मा से उत्पन्न दो पादप रोगों के नाम बताइए।

उत्तर:

.

1. बैंगन का लिटिल लीफ रोग (Little Leaf of Brinjal)

2. तिल का फाइलोडी रोग (Phyllody of Sesame)

प्रश्न 2(ख).

किन्हीं दो संयोजी ऊतकों का नाम लिखिए।

उत्तर:

.

1. रुधिर (Blood / द्रव संयोजी ऊतक)

2. अस्थि (Bone)

प्रश्न 2(ग).

दो सुरक्षात्मक प्रोटीन्स के नाम लिखिए।

उत्तर:

.

1. इम्युनोग्लोबुलिन (Immunoglobulin / एंटीबॉडी)

2. इंटरफेरॉन (Interferon)

प्रश्न 2(घ).

उस रासायनिक यौगिक का नाम लिखिए जो ग्लाइकोलिसिस और क्रेब्स चक्र के मध्य की कड़ी है।

उत्तर:

.

एसिटिल को-एंजाइम A (Acetyl Co-A)।

प्रश्न 2(ङ).

रक्तदाब को किस यंत्र द्वारा मापा जाता है ?

उत्तर:

.

स्फाइग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer)।

3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)

प्रश्न 3(क).

वाइराइड क्या है ?

उत्तर:

.

वाइराइड (Viroids) केवल नग्न RNA अणु से बने संक्रामक कारक होते हैं, जिन पर प्रोटीन का आवरण (Capsid) नहीं पाया जाता है। इनका अणुभार कम होता है और ये पादपों में रोग उत्पन्न करते हैं (उदा. आलू का कंद रोग)।

प्रश्न 3(ख).

ज्वाला कोशिकाओं के मुख्य कार्य लिखिए।

उत्तर:

.

ज्वाला कोशिकाएं (Flame cells / प्रोटोनेफ्रीडिया) संघ प्लैटिहेल्मिंथीज (जैसे- फीताकृमि) में पाई जाती हैं। इनके मुख्य कार्य निम्न हैं:

1. उत्सर्जन (Excretion): नाइट्रोजन युक्त अपशिष्टों को बाहर निकालना।

2. परासरण नियंत्रण (Osmoregulation): शरीर में जल व लवणों का संतुलन बनाए रखना।

प्रश्न 3(ग).

दो आवश्यक संतृप्त तथा असंतृप्त वसा अम्लों के नाम लिखिए।

उत्तर:

.

• असंतृप्त वसा अम्ल (Unsaturated Fatty Acids):

1. लिनोलेनिक अम्ल (Linolenic acid)

2. लिनोलिक अम्ल (Linoleic acid)

• संतृप्त वसा अम्ल (Saturated Fatty Acids):

1. पामिटिक अम्ल (Palmitic acid)

2. स्टेयरिक अम्ल (Stearic acid)

प्रश्न 3(घ).

हृदय निकास को परिभाषित कीजिए।

उत्तर:

.

प्रत्येक निलय (Ventricle) द्वारा प्रति मिनट पंप किए गए रुधिर की मात्रा को 'हृदय निकास' (Cardiac Output) कहते हैं।

• सूत्र: हृदय निकास = स्ट्रोक आयतन (Stroke Volume) × हृदय दर (Heart Rate)

• मान: 70 mL × 72 बार/मिनट ≈ 5 लीटर/मिनट।

प्रश्न 3(ङ).

मानव मस्तिष्क के सेरीब्रम के दो कार्य लिखिए।

उत्तर:

.

1. सोचना, विचारना, तर्क करना, स्मरण शक्ति तथा बुद्धिमत्ता का नियंत्रण करना।

2. ऐच्छिक पेशियों की गति और ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण एवं नियमन करना।

4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 4(क).

प्रोटोनीमा पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

1. प्रोटोनीमा (Protonema) मॉस (जैसे फ्यूनेरिया) के जीवन चक्र की प्रथम कायिक अवस्था है, जो बीजाणु (Spore) के अंकुरण से बनती है।

2. यह एक हरी, शाखित, तंतुमयी तथा युग्मकोद्भिद (Gametophytic) संरचना होती है।

3. इस पर पार्श्व कलिकाएं (Lateral buds) विकसित होती हैं, जो आगे चलकर पत्तीदार मॉस के पौधे में रूपांतरित हो जाती हैं।

प्रश्न 4(ख).

हृदय में पाए जाने वाले ऊतक की क्या विशेषता है ?

उत्तर:

.

हृदय में 'हृद पेशी ऊतक' (Cardiac Muscle Tissue) पाया जाता है, जिसकी मुख्य विशेषताएं निम्न हैं:

1. अनैच्छिक एवं रेखित: यह संरचना में रेखित (Striated) तथा कार्य में अनैच्छिक (Involuntary) होता है।

2. स्व-उत्तेजनशीलता एवं लयबद्धता: ये बिना थके बिना रुके जीवनपर्यंत लयबद्ध रूप से संकुचित व शिथिल होती रहती हैं।

3. अंतरविष्ट डिस्क (Intercalated Discs): इनकी कोशिकाओं के बीच अंतरविष्ट पट्टिकाएं पाई जाती हैं जो आवेगों के तीव्र संचरण में सहायक होती हैं।

प्रश्न 4(ग).

विटामिन्स तथा हॉर्मोन्स में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐

│ विटामिन (Vitamins) │ हॉर्मोन्स (Hormones) │

├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤

│ 1. ये मुख्यतः बाहर से भोजन के │ 1. इनका निर्माण शरीर के अंदर │

│ माध्यम से ग्रहण किए जाते हैं।│ अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा होता है।│

│ 2. ये उत्प्रेरक व सह-एंजाइम के│ 2. ये रासायनिक संदेशवाहक का │

│ रूप में कार्य करते हैं। │ कार्य करते हैं। │

│ 3. इनका उपयोग क्रिया के दौरान │ 3. ये जैविक क्रियाओं के बाद │

│ नष्ट नहीं होता। │ नष्ट या अपघटित हो जाते हैं। │

│ 4. उदाहरण: विटामिन A, C, D │ 4. उदाहरण: इंसुलिन, थाइरॉक्सिन │

└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘

प्रश्न 4(घ).

उत्सर्जन में अन्य अंगों के महत्व पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

वृक्क (Kidney) के अतिरिक्त शरीर के अन्य अंग भी उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

1. फेफड़े (Lungs): श्वसन के दौरान प्रतिदिन लगभग 18-20 लीटर CO2 तथा जलवाष्प को शरीर से बाहर निकालते हैं।

2. त्वचा (Skin): स्वेद ग्रंथियों द्वारा पसीने के रूप में जल, NaCl, थोड़ी मात्रा में यूरिया तथा लैक्टिक अम्ल स्रावित करती है।

3. यकृत (Liver): यह अमोनिया को यूरिया में बदलता है (ऑर्निथिन चक्र) तथा पित्त वर्णक (बिलीरुबिन, बिलीवर्डीन) का निष्कासन करता है।

5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 5(क).

सोलेनेसी तथा लिलिएसी को पुमंग के आधार पर कैसे पहचानेंगे ?

उत्तर:

.

1. सोलेनेसी कुल (Solanaceae):

• पुंकेसर की संख्या 5 होती है।

• पुंकेसर 'दललग्न' (Epipetalous) होते हैं, अर्थात् पुंकेसर दलपुंज (Petals) से जुड़े होते हैं।

2. लिलिएसी कुल (Liliaceae):

• पुंकेसर की संख्या 6 होती है (3 + 3 के दो चक्रों में व्यवस्थित)।

• पुंकेसर 'परिदललग्न' (Epiphyllous) होते हैं, अर्थात् पुंकेसर परिदलपुंज (Tepals/Perianth) से जुड़े होते हैं।

प्रश्न 5(ख).

अरेखित पेशी तन्तु तथा रेखित पेशी तन्तु में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. रेखित पेशी (Striated Muscle):

• ये ऐच्छिक पेशियाँ हैं जो कंकाल से जुड़ी होती हैं।

• इनमें गहरे और हल्के रंग की पट्टियाँ (Striations) पाई जाती हैं।

• कोशिकाएँ बेलनाकार, अशाखित तथा बहुकेन्द्रकीय होती हैं।

2. अरेखित पेशी (Smooth Muscle):

• ये अनैच्छिक पेशियाँ हैं जो आंतरिक अंगों (जैसे आहारनाल) में होती हैं।

• इनमें पट्टियाँ अनुपस्थित होती हैं।

• कोशिकाएँ तर्कुरूपी (Spindle-shaped) तथा एककेन्द्रकीय होती हैं।

प्रश्न 5(ग).

हृदयाघात पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

हृदयाघात (Heart Attack / Myocardial Infarction):

1. जब हृदय की मांसपेशियों को रुधिर आपूर्ति करने वाली 'कोरोनरी धमनी' (Coronary artery) में थक्का (Thrombus) या रुकावट आ जाती है।

2. इसके कारण हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन एवं पोषण नहीं मिलता और वे क्षतिग्रस्‍त या मृत होने लगती हैं।

3. इसके मुख्य लक्षणों में सीने में तीव्र दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना तथा घबराहट शामिल है।

प्रश्न 5(घ).

रुधिर में CO2 के परिवहन की विधियाँ लिखिए।

उत्तर:

.

रक्त में CO2 का परिवहन मुख्यतः 3 रूपों में होता है:

1. प्लाज्मा में घुलकर (भौतिक विलयन): लगभग 7% CO2 प्लाज्मा में कार्बोनिक अम्ल बनकर घुलित अवस्था में परिवहित होती है।

2. बाईकार्बोनेट के रूप में: लगभग 70% CO2 प्लाज्मा व RBCs में सोडियम व पोटेशियम बाईकार्बोनेट (HCO3⁻) के रूप में परिवहित होती है।

3. कार्बामिनो-हीमोग्लोबिन के रूप में: लगभग 23% CO2 हीमोग्लोबिन के एमीनो समूह से जुड़कर कार्बामिनो-हीमोग्लोबिन बनाती है।

6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 6(क).

जीन की संरचना तथा कार्य पर संक्षिप्त लिखिए।

उत्तर:

.

• जीन की संरचना:

जीन आनुवंशिकता की भौतिक एवं कार्यत्मक इकाई है। यह DNA अणु का वह विशिष्ट अनुक्रम (Nucleotide sequence) है जो किसी विशिष्ट लक्षण या प्रोटीन/RNA के निर्माण हेतु सूचना कोडित करता है।

• जीन के कार्य:

1. आनुवंशिक लक्षणों को माता-पिता से संतानों में स्थानांतरित करना।

2. प्रोटीन संश्लेषण (एंजाइम व संरचनात्मक प्रोटीन) का नियंत्रण करना।

प्रश्न 6(ख).

अर्धसूत्री विभाजन का क्या महत्व है ?

उत्तर:

.

1. गुणसूत्र संख्या का नियमन: यह लैंगिक जनन करने वाले जीवों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्र संख्या (2n से n) को स्थिर बनाए रखता है।

2. आनुवंशिक विविधता: प्रोफेज-I की पैकीटीन अवस्था में 'जीन विनिमय' (Crossing over) के कारण नए आनुवंशिक पुनर्योजन बनते हैं जो जैव विकास में सहायक हैं।

3. युग्मक निर्माण: यह अगुणित युग्मकों (शुक्राणु व अंडाणु) के निर्माण हेतु आवश्यक है।

प्रश्न 6(ग).

ऑक्सीश्वसन क्या है ? यह अनॉक्सीश्वसन की अपेक्षा दक्ष क्यों है ?

उत्तर:

.

ऑक्सीश्वसन (Aerobic Respiration):

O2 की उपस्थिति में ग्लूकोज के पूर्ण ऑक्सीकरण से CO2, H2O और अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होने की प्रक्रिया ऑक्सीश्वसन कहलाती है।

दक्षता का कारण:

• अनॉक्सीश्वसन में ग्लूकोज का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है और प्रति ग्लूकोज अणु केवल 2 ATP ऊर्जा प्राप्त होती है।

• ऑक्सीश्वसन में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण (ग्लाइकोलिसिस + क्रेब्स चक्र + ETS) होता है, जिससे प्रति ग्लूकोज अणु कुल 36 या 38 ATP ऊर्जा बनती है। अतः यह बहुत अधिक दक्ष है।

प्रश्न 6(घ).

C3 तथा C4 पथ में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐

│ C3 पथ (Calvin Cycle) │ C4 पथ (Hatch-Slack Path) │

├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤

│ 1. प्रथम स्थायी उत्पाद 3-PGA │ 1. प्रथम स्थायी उत्पाद OAA │

│ (3-कार्बन वाला) होता है। │ (4-कार्बन वाला) होता है। │

2. CO2 का प्रथम ग्राही RuBP │ 2. CO2 का प्रथम ग्राही PEP │

│ होता है। │ होता है। │

│ 3. क्रैंज शारीरिकी (Kranz │ 3. क्रैंज शारीरिकी (Kranz │

│ Anatomy) अनुपस्थित। │ Anatomy) पाई जाती है। │

│ 4. प्रकाश-श्वसन (Photorespi- │ 4. प्रकाश-श्वसन अनुपस्थित या │

│ ration) दर उच्च होती है। │ नगण्य होता है। │

└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘

7. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 7.

उत्सर्जन किसे कहते हैं ? किसी स्तनधारी की एक वृक्क नलिका का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए एवं उसकी क्रिया-विधि समझाइए।

उत्तर:

.

• उत्सर्जन (Excretion):

शरीर में उपापचयी क्रियाओं के फलस्वरूप बने हानिकारक व विषैले अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, यूरिक अम्ल) को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

• वृक्क नलिका (Nephron) की क्रिया-विधि:

मूत्र निर्माण तीन मुख्य चरणों में होता है:

1. अतिसूक्ष्म निष्पंदन (Ultrafiltration):

ग्लोमेरुलस में रुधिर उच्च दाब पर छनता है। जल, ग्लूकोज, एमीनो अम्ल तथा यूरिया छनकर बोमन सम्पुट में चले जाते हैं।

2. वर्णात्मक पुनःअवशोषण (Selective Reabsorption):

समीपस्थ व दूरस्थ कुंडलित नलिका में छनित द्रव में से उपयोगी पदार्थ (जैसे ग्लूकोज, Na⁺, जल) पुनः रुधिर में अवशोषित कर लिए जाते हैं।

3. नलिकीय स्रावण (Tubular Secretion):

नलिका की कोशिकाएं रुधिर से अनावश्यक पदार्थों (जैसे H⁺, K⁺, अमोनिया) को सीधे छनित द्रव में स्रावित कर देती हैं, जिससे अंतिम रूप से मूत्र का निर्माण होता है।

अथवा

प्रश्न 7.

शैवाल तथा जिम्नोस्पर्म के आर्थिक महत्व पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

(A) शैवाल का आर्थिक महत्व (Economic Importance of Algae):

1. भोजन के रूप में: Porphyra, Sargassum आदि शैवाल भोजन के रूप में खाए जाते हैं। Chlorella में प्रचुर प्रोटीन होता है।

2. औद्योगिक उपयोग: लाल शैवाल से 'अगर-अगर' (Agar-agar) प्राप्त होता है जिसका उपयोग संवर्धन माध्यम में होता है।

3. औषधीय उपयोग: कुछ शैवालों से एंटीबायोटिक तथा आयोडीन प्राप्त की जाती है।

(B) जिम्नोस्पर्म का आर्थिक महत्व (Economic Importance of Gymnosperms):

1. भोजन: Cycas के तने से साबूदाना (Sago) तथा Pinus gerardiana से चिलगोजा (मेवा) प्राप्त होता है।

2. इमारती लकड़ी व कागज: चीड़ (Pinus), देवदार की लकड़ी से फर्नीचर, दियासलाई तथा दीया सलाई का सामान व कागज की लुगदी बनती है।

3. रेजिन व तारपीन का तेल: Pinus के पौधे से रेजिन तथा तारपीन का तेल निष्कर्षित किया जाता है।

8. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 8.

गुणसूत्र की जैव-रासायनिक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

गुणसूत्र (Chromosome) कोशिका केंद्रक में पाए जाने वाले धागेनुमा संरचनाएं हैं जो आनुवंशिक सूचनाओं का वहन करती हैं।

• जैव-रासायनिक संरचना (Biochemical Structure):

गुणसूत्र रासायनिक रूप से न्यूक्लियोप्रोटीन के बने होते हैं:

1. DNA (लगभग 35-40%): यह मुख्य आनुवंशिक पदार्थ है जो द्विकुंडली के रूप में पाया जाता है।

2. हिस्टोन प्रोटीन (Histone Proteins - लगभग 40-50%): यह क्षारीय प्रोटीन (H1, H2A, H2B, H3, H4) है जो DNA के संघनन में मदद करता है।

3. गैर-हिस्टोन प्रोटीन (Non-histone Proteins): यह अम्लीय या उदासीन प्रोटीन होता है जो जीन प्रकटन को नियंत्रित करता है।

4. RNA (लगभग 5-10%): थोड़ी मात्रा में mRNA व rRNA पाए जाते हैं।

• न्यूक्लियोसोम मॉडल: DNA ऋणात्मक रूप से आवेशित होता है जो धनात्मक हिस्टोन अष्टक (Octamer) के चारों ओर लिपटकर 'न्यूक्लियोसोम' बनाता है।

अथवा

प्रश्न 8.

श्वसन क्रिया के क्रेब्स चक्र का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle / TCA Cycle):

यह ऑक्सीश्वसन का द्वितीय चरण है जो माइटोकॉण्ड्रिया की मैट्रिक्स में वायवीय अवस्था में संपन्न होता है। इसकी खोज हैंस क्रेब्स ने की थी।

• मुख्य चरण:

1. एसिटिल Co-A का संघनन:

ग्लाइकोलिसिस से प्राप्त पाइरुविक अम्ल से बना एसिटिल Co-A (2C) ऑक्जेलोएसिटिक अम्ल (OAA - 4C) से जुड़कर 'सिट्रिक अम्ल' (6C) बनाता है।

2. समावयवीकरण एवं विकार्बोक्सिलीकरण:

सिट्रिक अम्ल से CO2 बाहर निकलती है और α-कीटोग्लूटेरिक अम्ल (5C) तथा तत्पश्चात् सक्सीनिल Co-A (4C) बनता है।

3. OAA का पुनर्निर्माण:

सक्सीनिक अम्ल से फ्यूमेरिक अम्ल, मैलिक अम्ल बनते हुए पुनः ऑक्जेलोएसिटिक अम्ल (OAA) का निर्माण हो जाता है, जिससे चक्र निरंतर चलता रहता है।

• ऊर्जा उत्पादन:

एक क्रेब्स चक्र में 1 GTP/ATP, 3 NADH2 और 1 FADH2 बनते हैं (कुल 12 ATP प्रति एसिटिल Co-A)।

9. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 9.

प्रकाश-संश्लेषण से आप क्या समझते हैं ? इस प्रक्रम में अप्रकाशीय अभिक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

• प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis):

हरे पौधे सूर्य के प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में CO2 और H2O का उपयोग करके कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण करते हैं और O2 गैस मुक्त करते हैं।

समीकरण: 6CO₂ + 12H₂O ──(प्रकाश / क्लोरोफिल)──> C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O

• अप्रकाशीय अभिक्रिया (Dark Reaction / Calvin Cycle):

यह हरितलवक की 'स्ट्रोमा' में प्रकाश की अनुपस्थिति (या सीधे प्रकाश पर निर्भर न होकर) में होती है।

1. कार्बोक्सीकरण: RuBP (5C) वातावरणीय CO2 को ग्रहण करके RuBisCO एंजाइम की उपस्थिति में 3-PGA बनाता है।

2. अपचयन: 3-PGA, प्रकाशिक अभिक्रिया के उत्पाद ATP और NADPH2 का उपयोग करके शर्करा (ग्लूकोज) में अपचित हो जाता है।

3. पुनरुद्भव: चक्र को जारी रखने के लिए RuBP अणु का पुनः निर्माण होता है।

अथवा

प्रश्न 9.

एन्जाइम्स की अभिक्रियाओं को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

एंजाइम जैव-उत्प्रेरक हैं जो रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं। इनकी कार्यशीलता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्न हैं:

1. तापमान (Temperature):

एंजाइम 25°C से 40°C पर सर्वाधिक सक्रिय होते हैं (इष्टतम ताप)। बहुत कम ताप पर एंजाइम निष्क्रिय हो जाते हैं तथा बहुत उच्च ताप पर प्रोटीन विकृत (Denature) हो जाता है।

2. pH मान (pH):

प्रत्येक एंजाइम एक विशिष्ट pH पर ही सर्वाधिक क्रियाशील होता है। जैसे- पेप्सिन अम्लीय pH (1.5-2) पर तथा ट्रिप्सिन क्षारीय pH (8) पर कार्य करता है।

3. क्रियाधार (Substrate) की सांद्रता:

क्रियाधार की सांद्रता बढ़ाने पर प्रारंभ में अभिक्रिया की दर बढ़ती है, परंतु एक सीमा के बाद जब सभी एंजाइम अणु संतृप्त हो जाते हैं, तो दर स्थिर (Vmax) हो जाती है।

4. एंजाइम की सांद्रता:

यदि क्रियाधार प्रचुर मात्रा में हो, तो एंजाइम की सांद्रता बढ़ाने पर अभिक्रिया की दर सीधे अनुपात में बढ़ती है।

5. निरोधक (Inhibitors):

कुछ विशिष्ट रसायन एंजाइम की सक्रिय सतह से जुड़कर उनकी क्रियाशीलता को रोक देते हैं, जिन्हें निरोधक कहते हैं।