Solution

UP Board Class 11th Biology Annual Paper 2026 SET 3

कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा

AI-generated solution. Verify important answers/calculations. · महत्वपूर्ण उत्तर एवं गणनाएँ स्वयं जाँच लें।

खण्ड 'अ' (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न 1(क).

वर्ग क्लोरोफाइसी का मुख्य संचित पदार्थ है–

(a) वसा

(b) मण्ड

(c) ग्लाइकोजन

(d) वाल्यूटिन

उत्तर:

. (b) मण्ड

प्रश्न 1(ख).

मास्ट कोशिकाएं पायी जाती हैं–

(a) पेशियों में

(b) तंत्रिका तन्तु में

(c) संयोजन ऊतक में

(d) एपिथीलियम ऊतक में

उत्तर:

. (c) संयोजन ऊतक में

प्रश्न 1(ग).

C4 चक्र कहलाता है–

(a) EMP पथ

(b) TAC चक्र

(c) हैच तथा स्लैंक पथ

(d) पेन्टोज फास्फेट पथ

उत्तर:

. (c) हैच तथा स्लैंक पथ

प्रश्न 1(घ).

एक स्वस्थ मनुष्य एक मिनट में श्वास लेता है–

(a) 10-15 बार

(b) 20-25 बार

(c) 14-18 बार

(d) 25-30 बार

उत्तर:

. (c) 14-18 बार

2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 2(क).

लाल शैवालों में खाद्य पदार्थ किस रूप में संचित होता है?

उत्तर:

.

लाल शैवालों में खाद्य पदार्थ 'फ्लोरिडियन स्टार्च' (Floridean Starch) के रूप में संचित होता है।

प्रश्न 2(ख).

उस पादप का नाम लिखिए जिसमें श्वसन मूल पायी जाती हैं?

उत्तर:

.

राइजोफोरा (Rhizophora / सुंदरी का पौधा - मैंग्रोव पादप)।

प्रश्न 2(ग).

ग्लाइकोसिटिक बन्ध कहाँ पाए जाते हैं?

उत्तर:

.

कार्बोहाइड्रेट्स (पॉलीसेकेराइड्स / शर्करा के अणुओं जैसे माल्टोज, सुक्रोज, स्टार्च आदि) के मोनोसेकेराइड इकाइयों के मध्य।

प्रश्न 2(घ).

जिबरेलिन सर्वप्रथम किस कवक से प्राप्त हुआ?

उत्तर:

.

जिबरेला फ्यूजीकुरोई (*Gibberella fujikuroi*) नामक कवक से।

प्रश्न 2(ङ).

मूत्र का पीला रंग किसके कारण होता है?

उत्तर:

.

यूरोक्रोम (Urochrome) वर्णक के कारण।

3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)

प्रश्न 3(क).

उस पौधे का वानस्पतिक नाम तथा कुल लिखिए जिसमें लाल मिर्च पायी जाती है।

उत्तर:

.

• वानस्पतिक नाम: कैप्सिकम एनुअम (*Capsicum annuum*)

• कुल (Family): सोलेनेसी (Solanaceae)

प्रश्न 3(ख).

प्रोकेरियोटिक कोशिका के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर:

.

1. जीवाणु (Bacteria / उदा. E. coli)

2. नीले-हरे शैवाल (सायनोबैक्टीरिया / Blue-green algae)

प्रश्न 3(ग).

रेड ड्रॉप किसे कहते हैं?

उत्तर:

.

जब प्रकाश-संश्लेषण की दर का अध्ययन केवल एकवर्णी प्रकाश में किया जाता है, तो 680 nm (लाल प्रकाश) से अधिक तरंगदैर्ध्य देने पर प्रकाश-संश्लेषण की दर में अचानक से तीव्र गिरावट आ जाती है। इस परिघटना को 'लाल पतन' या 'रेड ड्रॉप' (Red Drop) कहते हैं।

प्रश्न 3(घ).

अनिषेक फलन किसे कहते हैं?

उत्तर:

.

बिना निषेचन (Fertilization) के ही अंडाशय (Ovary) से फल बनने की प्रक्रिया को 'अनिषेक फलन' (Parthenocarpy) कहते हैं। ऐसे फल बीजरहित (Seedless) होते हैं (उदा. केला, अंगूर)।

प्रश्न 3(ङ).

किन्हीं दो वृक्क उपस्करों के नाम लिखिए।

उत्तर:

.

1. बोमन सम्पुट (Bowman's Capsule)

2. ग्लोमेरुलस (Glomerulus / केशिकागुच्छ)

4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 4(क).

ऑर्किड की मूलों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

1. आर्किड एक उपरिरोही (Epiphyte) पौधा है जो दूसरे वृक्षों की शाखाओं पर आश्रय हेतु उगता है।

2. इसमें विशेष प्रकार की 'वायवीय मूलें' (Aerial roots) पाई जाती हैं जो हवा में लटकी रहती हैं।

3. इन जड़ों की बाह्य सतह पर स्पंजी ऊतक 'वेलामेन' (Velamen) पाया जाता है, जो वायुमंडल की नमी को अवशोषित करने का कार्य करता है।

प्रश्न 4(ख).

कंकाल तंत्र के विभिन्न कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

.

1. ढाँचा व सहारा प्रदान करना: शरीर को निश्चित आकार, आकृति तथा संबल प्रदान करता है।

2. कोमल अंगों की सुरक्षा: मस्तिष्क, हृदय तथा फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा करता है।

3. गमन व गतिशीलता: पेशियों से जुड़कर शरीर एवं अंगों की गति में सहायता करता है।

4. रुधिर कणिकाओं का निर्माण: अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में RBC व WBC का निर्माण होता है।

प्रश्न 4(ग).

विषम बीजाणुक तथा सम बीजाणुक टेरिडोफाइट्स में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐

│ सम बीजाणुक (Homosporous) │ विषम बीजाणुक (Heterosporous) │

├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤

│ 1. इनमें एक ही प्रकार के सभी │ 1. इनमें दो भिन्न आकार के │

│ समान बीजाणु बनते हैं। │ बीजाणु बनते हैं। │

│ 2. बीजाणु अंकुरित होकर द्विलिंगी│ 2. लघुबीजाणु से नर व गुरु- │

│ प्रोथैलस बनाते हैं। │ बीजाणु से मादा युग्मकोद्भिद│

│ 3. इनमें बीज प्रकृति का विकास │ 3. इनमें बीज प्रकृति (Seed │

│ नहीं देखा जाता। │ habit) की शुरुआत होती है। │

│ 4. उदाहरण: लाइकोपोडियम, │ 4. उदाहरण: सिलेजिनेला, │

│ ड्रायोप्टेरिस। │ मार्सिलिया। │

└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘

प्रश्न 4(घ).

हीमोडायलेसिस पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

हीमोडायलेसिस (Renas/Blood Dialysis):

1. जब वृक्क (Kidney) ख़राब या अक्रिय हो जाते हैं, तो रक्त में यूरिया तथा अन्य उत्सर्जी टॉक्सिन की मात्रा बढ़ जाती है।

2. इस स्थिति में 'कृत्रिम वृक्क' (Artificial Kidney) मशीन द्वारा रोगी के रुधिर को शरीर से बाहर निकालकर सेलोफेन की नलिकाओं द्वारा छाना जाता है।

3. इस प्रक्रिया में रुधिर से यूरिया, यूरिक अम्ल आदि अपशिष्ट विसरित होकर डायलाइजिंग द्रव में चले जाते हैं और शुद्ध रुधिर वापस शरीर में पंप कर दिया जाता है।

5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 5(क).

रुधिर तथा लसीका में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. रुधिर (Blood):

• गहरे लाल रंग का तरल संयोजी ऊतक है।

• इसमें लाल रुधिर कणिकाएँ (RBCs), प्लेटलेट्स तथा हीमोग्लोबिन पाया जाता है।

• O₂ और पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है।

2. लसीका (Lymph):

• रंगहीन या हल्के पीले रंग का तरल है।

• इसमें RBCs व हीमोग्लोबिन अनुपस्थित होते हैं (मुख्यतः WBCs पाए जाते हैं)।

• CO₂ और उत्सर्जी पदार्थों की मात्रा अधिक होती है।

प्रश्न 5(ख).

किन लक्षणों के आधार पर व्हेल तथा एकिडना को स्तनी वर्ग में रखा जाता है?

उत्तर:

.

1. स्तनीय ग्रंथियों की उपस्थिति: दोनों में अपने बच्चों के पोषण हेतु दूध स्रावित करने वाली स्तन ग्रंथियां पाई जाती हैं।

2. समतापी व 4-वेश्मी हृदय: दोनों का हृदय चार वेश्मों में विभाजित होता है तथा ये समतापी जीव हैं।

3. बाल तथा स्वेद ग्रंथियां: शरीर पर रोम/कांटे तथा त्वचा में ग्रंथियां पाई जाती हैं।

4. डायफ्राम की उपस्थिति: वक्ष एवं उदर गुहा के बीच डायफ्राम (Diaphragm) पाया जाता है।

प्रश्न 5(ग).

श्वसन तथा श्वासोच्छ्वास में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. श्वासोच्छ्वास (Breathing):

• यह एक भौतिक/यांत्रिक प्रक्रिया है जिसमें O₂ युक्त वायु ली जाती है और CO₂ युक्त वायु छोड़ी जाती है।

• यह कोशिकाओं के बाहर संपन्न होती है तथा इसमें ऊर्जा मुक्त नहीं होती।

2. श्वसन (Respiration):

• यह एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होता है।

• यह कोशिकाओं के अंदर (कोशिकाद्रव्य व माइटोकॉण्ड्रिया) होती है तथा ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 5(घ).

सोलेनेसी तथा लिलिएसी में पुमंग में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. सोलेनेसी कुल (Family Solanaceae):

• पुंकेसर की संख्या 5 होती है।

• पुंकेसर 'दललग्न' (Epipetalous) होते हैं, अर्थात पुंकेसर के तंतु दलपुंज (Petals) से जुड़े होते हैं।

2. लिलिएसी कुल (Family Liliaceae):

• पुंकेसर की संख्या 6 होती है (3+3 के दो चक्रों में)।

• पुंकेसर 'परिदललग्न' (Epiphyllous/Epitepalous) होते हैं, अर्थात पुंकेसर परिदलपुंज (Tepals) से जुड़े होते हैं।

6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 6(क).

पादप हॉर्मोन्स का महत्व बताइए।

उत्तर:

.

1. वृद्धि नियंत्रण: ऑक्सिन तथा जिबरेलिन कोशिकाओं के दीर्घीकरण और तने की वृद्धि को बढ़ाते हैं।

2. कोशिका विभाजन: साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।

3. फल पकाना: इथाइलीन हॉर्मोन फलों को शीघ्र पकाने में सहायक है।

4. विलग्नन एवं सुप्तता नियंत्रण: एब्सिसिक अम्ल (ABA) पत्तियों के झड़ने तथा बीजों की सुप्तता को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 6(ख).

पेशियाँ कितने प्रकार की होती हैं? प्रत्येक के उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

.

पेशियाँ मुख्यतः 3 प्रकार की होती हैं:

1. रेखित / ऐच्छिक पेशी (Skeletal/Striated Muscle): कंकाल से जुड़ी पेशियाँ (उदा. हाथ-पैर की पेशियाँ)।

2. अरेखित / अनैच्छिक पेशी (Smooth/Non-striated Muscle): अंत्र व आंतरिक अंगों की भित्ति (उदा. आहारनाल, मूत्राशय)।

3. हृद पेशी (Cardiac Muscle): केवल हृदय की भित्ति में पाई जाने वाली अनैच्छिक व रेखित पेशी (उदा. हृदय पेशी)।

प्रश्न 6(ग).

ऑक्सीकरणीय फॉस्फेटीकरण तथा प्रकाश फॉस्फेटीकरण में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. प्रकाश फॉस्फेटीकरण (Photophosphorylation):

• यह प्रक्रिया हरितलवक (Chloroplast) के ग्रैना में प्रकाश-संश्लेषण के दौरान होती है।

• इसमें प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके ADP से ATP का निर्माण होता है।

2. ऑक्सीकरणीय फॉस्फेटीकरण (Oxidative Phosphorylation):

• यह प्रक्रिया माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria) में श्वसन (ETS) के दौरान होती है।

• इसमें ग्लूकोज/पोषक तत्वों के ऑक्सीकरण से निकली ऊर्जा द्वारा ADP से ATP बनता है।

प्रश्न 6(घ).

न्यूक्लियोसोम पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

न्यूक्लियोसोम (Nucleosome):

1. यूकैरियोटिक कोशिकाओं में DNA अत्यधिक सघन होकर क्रोमेटिन बनाता है जिसकी मूल इकाई 'न्यूक्लियोसोम' है।

2. इसमें 8 हिस्टोन प्रोटीन अणुओं (H2A, H2B, H3, H4 के 2-2 अणु) का एक अष्टक (Octamer core) होता है।

3. इस हिस्टोन कोर के चारों ओर नकारात्मक आवेशित DNA लगभग 1.75 फेरे (146 क्षारक युग्म) में लिपटा रहता है।

4. यह क्रोमैटिन धागे पर 'माला के मनकों' (Beads-on-a-string) की भाँति दिखाई देता है।

7. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 7.

निम्न पर टिप्पणी लिखिए- (क) राइबोसोम (ख) लाइसोसोम

उत्तर:

.

(क) राइबोसोम (Ribosome):

• यह बिना झिल्ली वाला अति सूक्ष्म कोशिकांग है जो r-RNA तथा प्रोटीन का बना होता है।

• यह प्रोकैरियोट्स में 70S तथा यूकैरियोट्स में 80S प्रकार का होता है।

• कार्य: इसे 'प्रोटीन की फैक्ट्री' कहा जाता है क्योंकि यह अमीनो अम्लों को जोड़कर प्रोटीन का संश्लेषण करता है।

(ख) लाइसोसोम (Lysosome):

• यह एकल झिल्ली से घिरी गोल थैलीनुमा संरचना है, जिसकी खोज सी. डी दुवे ने की थी।

• इसमें प्रचुर मात्रा में हाइड्रोलिटिक (जल-अपघटनीय) एंजाइम पाए जाते हैं जो अम्लीय माध्यम में कार्य करते हैं।

• कार्य: यह बाहरी जीवाणुओं, अपशिष्ट पदार्थों तथा टूटे-फूटे कोशिकांगों का पाचन करता है। कोशिका के क्षतिग्रस्त होने पर यह फट जाता है जिससे संपूर्ण कोशिका नष्ट हो जाती है, अतः इसे 'आत्मघाती थैली' (Suicide Bag) कहते हैं।

अथवा

प्रश्न 7.

थायराइड ग्रंथि से उत्पन्न विभिन्न हॉर्मोन्स का वर्णन कीजिए। थायराइड की अनियमितताओं के दुष्प्रभाव का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

.

• थायराइड ग्रंथि के हॉर्मोन्स:

1. थाइरॉक्सिन (T₄) एवं ट्राईआयोडोथायरोनिन (T₃): ये आयोडीन युक्त हॉर्मोन हैं जो शरीर की आधारीय उपापचयी दर (BMR), कार्बोहाइड्रेट/वसा के उपापचय तथा मानसिक व शारीरिक वृद्धि का नियंत्रण करते हैं।

2. थायरोकैल्सीटोनिन (TCT): यह रक्त में कैल्शियम (Ca²⁺) के स्तर को कम करके नियंत्रित करता है।

• थायराइड की अनियमितताओं के दुष्प्रभाव:

1. अवथायराइडता (Hypothyroidism - अल्पस्राव):

• घेंघा रोग (Goitre): आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रंथि सूज जाती है।

• क्रेटिनिज्म (Cretinism): बच्चों में शारीरिक व मानसिक वृद्धि रुक जाती है।

• मिक्सिडीमा (Myxedema): वयस्कों में सुस्ती, भार बढ़ना व त्वचा का सूजना।

2. अतिथायराइडता (Hyperthyroidism - अतिस्राव):

• एग्जोफ्थैल्मिक घेंघा (Grave's Disease): नेत्र गोलक बाहर की ओर उभर आते हैं, उपापचय दर व हृदय गति अत्यधिक बढ़ जाती है।

8. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 8.

मानव रुधिर वर्ग से आप क्या समझते हैं? रुधिर वर्ग की वंशागति को चित्र द्वारा समझाइए।

उत्तर:

.

• मानव रुधिर वर्ग (Human Blood Groups):

कार्ल लैंडस्टीनर ने लाल रुधिर कणिकाओं (RBCs) की सतह पर उपस्थित एंटीजन (A तथा B) के आधार पर मानव रुधिर को 4 वर्गों में बाँटा— A, B, AB और O। इसे ABO रुधिर समूह प्रणाली कहते हैं।

• रुधिर वर्ग की वंशागति (Inheritance of Blood Groups):

रुधिर वर्ग का नियंत्रण 'I' जीन द्वारा होता है, जिसके तीन एलिल होते हैं— Iᴬ, I𝑩 और i।

- Iᴬ तथा I𝑩 अप्रभावी 'i' एलिल पर पूर्णतः प्रभावी (Dominant) होते हैं, तथा आपस में सह-प्रभावी (Codominant) होते हैं।

• वंशागति उदाहरण (यदि पिता का रुधिर वर्ग A [Iᴬi] तथा माता का B [I𝑩i] हो):

संततियों में संभावित रुधिर वर्ग:

1. IᴬI𝑩 ➔ रुधिर वर्ग AB (25%)

2. Iᴬi ➔ रुधिर वर्ग A (25%)

3. I𝑩i ➔ रुधिर वर्ग B (25%)

4. ii ➔ रुधिर वर्ग O (25%)

अथवा

प्रश्न 8.

D.N.A. की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

• DNA (डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) की संरचना (वाटसन एवं क्रिक का द्विकुंडली मॉडल):

1. पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएँ: DNA अणु दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं का बना होता है जो एक-दूसरे के विपरीत (Antiparallel 5'➔3' एवं 3'➔5') दिशा में कुंडलित रहती हैं।

2. घटक: प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा, फास्फेट समूह तथा नाइट्रोजन क्षारक से बना होता है।

3. क्षारक युग्मन:

• प्यूरीन (A, G) तथा पिरीमिडीन (T, C) आपस में जुड़े होते हैं।

• ऐडीनीन (A) थाइमिन (T) से दो हाइड्रोजन बंधों (A = T) द्वारा जुड़ता है।

• ग्वानीन (G) साइटोसिन (C) से तीन हाइड्रोजन बंधों (G ≡ C) द्वारा जुड़ता है।

4. कुंडलिनी का माप: प्रत्येक घुमाव (Pitch) 3.4 nm (34 Å) लंबा होता है जिसमें 10 क्षार युग्म होते हैं।

• DNA के कार्य:

1. आनुवंशिक सूचनाओं का संचयन एवं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण करना।

2. RNA निर्माण तथा प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण करना।

3. स्व-द्विगुणन (Replication) की क्षमता द्वारा समान आनुवंशिक प्रतियां बनाना।

9. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 9.

रासायनिक समीकरणों की सहायता से हरे पौधे में CO2 अपचयन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

पौधों में CO₂ का अपचयन प्रकाश-संश्लेषण के 'अप्रकाशिक चरण' (Dark Reaction) में होता है, जिसे 'केल्विन चक्र' (C₃ Path) कहते हैं।

• मुख्य चरण एवं रासायनिक समीकरण:

1. कार्बोक्सीकरण (Carboxylation):

वातावरणीय CO₂ को 5-कार्बन शर्करा RuBP (रिबुलोज 1,5-बिसफास्फेट) ग्रहण करता है और RuBisCO एंजाइम की उपस्थिति में 3-PGA (3-फास्फोग्लिसरिक अम्ल) बनाता है।

RuBP (5C) + CO₂ + H₂O ──(RuBisCO)──> 2 × 3-PGA (3C)

2. अपचयन (Reduction):

3-PGA, प्रकाशिक अभिक्रिया में बनी ATP तथा NADPH₂ की ऊर्जा का प्रयोग करके अपचित होकर PGAL (त्रिऑस फास्फेट) बनाता है।

3-PGA + ATP ──> 1,3-द्विफास्फोग्लिसरिक अम्ल + ADP

1,3-द्विफास्फोग्लिसरिक अम्ल + NADPH₂ ──> PGAL (3C) + NADP⁺ + Pi

3. ग्लूकोज निर्माण (Hexose Synthesis):

PGAL अणुओं के संघनन से ग्लूकोज (शर्करा) का निर्माण होता है।

6 CO₂ + 12 NADPH₂ + 18 ATP ──> C₆H₁₂O₆ (ग्लूकोज) + 12 NADP⁺ + 18 ADP + 18 Pi

4. पुनरुद्भव (Regeneration):

केल्विन चक्र को निरंतर चलाने के लिए RuBP का पुनरुद्भव आवश्यक होता है, जिसमें ATP व्यय होती है।

अथवा

प्रश्न 9.

श्वसन से आप क्या समझते हैं? अनॉक्सी श्वसन एवं किण्वन में अन्तर स्पष्ट कीजिए तथा किण्वन के प्रमुख औद्योगिक उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर:

.

• श्वसन (Respiration):

यह कोशिकाओं में संपन्न होने वाली वह अपचयी (Catabolic) जैव-रासायनिक क्रिया है जिसमें कार्बनिक पदार्थों (जैसे ग्लूकोज) का ऑक्सीकरण करके ऊर्जा (ATP) मुक्त होती है।

• अनॉक्सी श्वसन एवं किण्वन में अन्तर:

1. अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration): यह जीव की कोशिकाओं (जैसे कवक, परजीवी) के अंदर O₂ की अनुपस्थिति में होता है जिसमें ग्लूकोज का अपूर्ण ऑक्सीकरण होकर इथाइल अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल बनता है।

2. किण्वन (Fermentation): यह कोशिकाओं के बाहर सूक्ष्मजीवों (जैसे यीस्ट, जीवाणु) द्वारा स्रावित बाह्य-कोशिकीय एंजाइमों की उपस्थिति में जटिल कार्बनिक पदार्थों का सरल पदार्थों में अपघटन है।

• किण्वन की औद्योगिक उपयोगिता:

1. बेकरी उद्योग: यीस्ट (*Saccharomyces cerevisiae*) द्वारा किण्वन से CO₂ निकलती है जो ब्रेड व केक को स्पंजी/मुलायम बनाती है।

2. अल्कोहल एवं पेय उद्योग: शर्करा के घोल का किण्वन करके एथिल अल्कोहल, बीयर तथा शराब बनाई जाती है।

3. दुग्ध उद्योग: लैक्टोबैसिलस जीवाणु द्वारा दूध के लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में बदलकर दही, पनीर तथा मक्खन बनाया जाता है।

4. कार्बनिक अम्ल व एंटीबायोटिक उत्पादन: सिरका (एसिटिक अम्ल), सिट्रिक अम्ल तथा पेनिसिलिन आदि के औद्योगिक उत्पादन में।