1. (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Biology Annual Paper 2026 SET 2
कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सबसे अधिक होती है-
(अ) लाल रंग में
(ब) हरे रंग में
(स) पीले रंग में
(द) नीले रंग में
उत्तर:
. (अ) लाल रंग में
प्रश्न 1(ख).
ग्लाइकोलाइसिस की क्रिया सम्पन्न होती है-
(अ) कोशिका द्रव्य में
(ब) माइटोकाण्ड्रिया में
(स) ग्रेना में
(द) स्ट्रोमा में
उत्तर:
. (अ) कोशिका द्रव्य में
प्रश्न 1(ग).
फल पकाने वाला हॉर्मोन है-
(अ) इथाइलीन
(ब) ऑक्सिन
(स) साइटोकाइनिन
(द) जिबरेलिन
उत्तर:
. (अ) इथाइलीन
प्रश्न 1(घ).
सिस्टेमा नेचुरी नामक पुस्तक के लेखक हैं-
(अ) लिनियस
(ब) लैमार्क
(स) अरस्तू
(द) मेण्डल
उत्तर:
. (अ) लिनियस
2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
मानव शरीर में पाये जाने वाली सबसे बड़ी तथा छोटी अस्थि का नाम बताइए।
उत्तर:
.
• सबसे बड़ी अस्थि: फीमर (Femur - जांघ की हड्डी)।
• सबसे छोटी अस्थि: स्टेप्स / स्टेपीज (Stapes - कान की हड्डी)।
प्रश्न 2(ख).
मानव शरीर में पाये जाने वाली सबसे बड़े तथा सबसे छोटे अन्तःस्रावी ग्रन्थि का नाम बताइए।
उत्तर:
.
• सबसे बड़ी अंतःस्रावी ग्रंथि: थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland)।
• सबसे छोटी अंतःस्रावी ग्रंथि: पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) / पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)।
प्रश्न 2(ग).
सभी छात्र या छात्राएं अपने-अपने वैज्ञानिक नाम बताइए।
उत्तर:
.
मानव का वैज्ञानिक नाम 'होमो सेपियंस' (Homo sapiens) है।
प्रश्न 2(घ).
पादप जगत का उभयचर किसे कहा जाता है? और क्यों ?
उत्तर:
.
ब्रायोफाइटा (Bryophyta) वर्ग के पौधों को पादप जगत का उभयचर (Amphibians of plant kingdom) कहा जाता है, क्योंकि ये पौधे मृदा/भूमि पर जीवित रहते हैं परंतु लैंगिक जनन (निषेचन) के लिए जल पर अनिवार्य रूप से निर्भर होते हैं।
प्रश्न 2(ङ).
पुष्प के चार भागों को दो भागों में विभक्त कीजिए।
उत्तर:
.
1. सहायक चक्र (Accessory Whorls): बाह्यदलपुंज (Calyx) तथा दलपुंज (Corolla)।
2. जनन चक्र (Essential Whorls): पुमंग (Androecium) तथा जायांग (Gynoecium)।
3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)
प्रश्न 3(क).
पाश्चुरीकरण किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
पाश्चुरीकरण (Pasteurization) द्रवों (विशेषकर दूध) को सूक्ष्मजीवों से मुक्त करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें द्रव को एक निश्चित तापमान (जैसे दूध को 63°C पर 30 मिनट या 72°C पर 15 सेकंड) तक गर्म करके तुरंत ठंडा किया जाता है। इसकी खोज लुई पाश्चर ने की थी।
प्रश्न 3(ख).
प्रथम प्रतिजैविक का स्रोत बताते हुए इसके खोज कब और किसने की ?
उत्तर:
.
• प्रथम प्रतिजैविक (Antibiotic): पेनिसिलिन (Penicillin)।
• स्रोत: पेनिसिलियम नोटैटम (*Penicillium notatum* - कवक)।
• खोजकर्ता व वर्ष: अलेक्जेंडर फ्लेमिंग (Alexander Fleming) ने सन् 1928 में की थी।
प्रश्न 3(ग).
E.C.G. तथा E.M.P का पूरा नाम बताइए।
उत्तर:
.
1. E.C.G. — Electrocardiogram / Electrocardiograph (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम)।
2. E.M.P. — Embden-Meyerhof-Parnas Path (एम्ब्डेन-मेयरहॉफ-पारनास पथ - ग्लाइकोलाइसिस का अन्य नाम)।
प्रश्न 3(घ).
पुष्पक्रम किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है ? प्रत्येक का नाम बताइए।
उत्तर:
.
• परिभाषा: पुष्पवृंत या अक्ष (Peduncle) पर पुष्पों के व्यवस्थित रहने के क्रम को 'पुष्पक्रम' (Inflorescence) कहते हैं।
• मुख्य प्रकार (2 मुख्य प्रकार):
1. असीमाक्षी पुष्पक्रम (Racemose)
2. ससीमाक्षी पुष्पक्रम (Cymose)
(विशेष प्रकार: विशेष पुष्पक्रम जैसे हाइपैन्थोडियम, कूटचक्रक, सायथियम)।
प्रश्न 3(ङ).
ऐसे दो जन्तुओं का नाम बताइए जिनमें बाह्य निषेचन होता है ?
उत्तर:
.
1. मेंढक (Frog)
2. रोहू मछली (Fish)
4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 4(क).
स्तनधारी वर्ग या सरीसृप वर्ग का उदाहरण सहित लक्षण बताइए।
उत्तर:
.
[स्तनधारी वर्ग (Class Mammalia) के लक्षण]:
1. त्वचा पर रोम/बाल (Hair) पाए जाते हैं तथा बाह्य कर्ण (Pinna) उपस्थित होते हैं।
2. मादाओं में बच्चों के पोषण हेतु स्तन ग्रंथियाँ (Mammary glands) पाई जाती हैं।
3. हृदय 4-वेश्मी (4-chambered) होता है तथा ये समतापी (Warm-blooded) होते हैं।
• उदाहरण: मनुष्य (*Homo sapiens*), कंगारू।
[अथवा सरीसृप वर्ग (Class Reptilia) के लक्षण]:
1. ये शल्कों (Scales) युक्त शुष्क त्वचा वाले स्थलचर/जलचर होते हैं।
2. हृदय 3-वेश्मी (मगरमच्छ में 4-वेश्मी) होता है तथा ये असमतापी (Cold-blooded) होते हैं।
• उदाहरण: छिपकली, सांप, मगरमच्छ।
प्रश्न 4(ख).
रन्ध्र के खुलने तथा बंद होने की क्रियाविधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• क्रियाविधि (के. पोटेशियम आयन सिद्धांत):
1. प्रकाश की उपस्थिति में द्वार कोशिकाओं (Guard cells) में K⁺ आयन का प्रवेश होता है, जिससे उनका परासरण दाब बढ़ जाता है।
2. जल अंतःपरासरण द्वारा द्वार कोशिकाओं में प्रवेश करता है, जिससे वे स्फीत (Turgid) हो जाती हैं और रंध्र (Stomata) खुल जाते हैं।
3. रात्रि में/अंधेरे में K⁺ आयन बाहर निकल जाते हैं, द्वार कोशिकाएँ शिथिल (Flaccid) हो जाती हैं और रंध्र बंद हो जाते हैं।
• आरेख संरचना:
[स्फीत द्वार कोशिकाएँ (खुला रंध्र)] ⇄ [शिथिल द्वार कोशिकाएँ (बंद रंध्र)]
प्रश्न 4(ग).
समसूत्री तथा अर्धसूत्री विभाजन में प्रमुख अंतर बताइए।
उत्तर:
.
1. समसूत्री विभाजन (Mitosis):
• यह कायिक कोशिकाओं (Somatic cells) में होता है।
• एक कोशिका से 2 समान संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
• संतति में गुणसूत्रों की संख्या समान (2n) बनी रहती है।
• क्रॉसिंग ओवर (जीन विनिमय) नहीं होता।
2. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis):
• यह जनन कोशिकाओं (Germ cells) में होता है।
• एक कोशिका से 4 अगुणित (n) संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
• गुणसूत्रों की संख्या आधी (n) रह जाती है।
• पैकीटीन अवस्था में क्रॉसिंग ओवर होता है।
प्रश्न 4(घ).
मास्टर ग्रन्थि किसे कहा जाता है ? और क्यों ?
उत्तर:
.
• पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) को 'मास्टर ग्रंथि' कहा जाता है।
• कारण: क्योंकि यह अपने स्रावित हॉर्मोन्स (जैसे TSH, ACTH, FSH, LH आदि) के द्वारा शरीर की अन्य सभी प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियों (थायराइड, एड्रीनल, जनन ग्रंथि) के स्रावण और उनके कार्यों का नियंत्रण तथा संचालन करती है।
5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 5(क).
धमनी तथा शिरा में छह प्रमुख अंतर बताइए।
उत्तर:
.
┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐
│ धमनी (Artery) │ शिरा (Vein) │
├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤
│ 1. शुद्ध (O₂ युक्त) रक्त बहता│ 1. अशुद्ध (CO₂ युक्त) रक्त │
│ है (फुप्फुस धमनी अपवाद)। │ बहता है (फुप्फुस शिरा अपवाद)│
│ 2. रुधिर हृदय से अंगों की ओर │ 2. रुधिर अंगों से हृदय की ओर │
│ जाता है। │ आता है। │
│ 3. भित्ति मोटी व अत्यधिक │ 3. भित्ति पतली व कम लचीली │
│ लचीली होती है। │ होती है। │
│ 4. गुहा (Lumen) संकरी होती है।│ 4. गुहा (Lumen) चौड़ी होती है। │
│ 5. कपाट (Valves) नहीं होते। │ 5. कपाट (Valves) पाए जाते हैं।│
│ 6. यह गहराई में स्थित होती है।│ 6. यह ऊपरी सतह पर स्थित होती है।│
└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘
प्रश्न 5(ख).
मुख की अपेक्षा नाक से सांस लेना लाभदायक है क्यों ?
उत्तर:
.
नाक से सांस लेना निम्नलिखित कारणों से लाभदायक है:
1. नासा मार्ग में छोटे बाल और श्लेष्मा (Mucus) पाए जाते हैं, जो वायु में मौजूद धूल, कणों तथा रोगाणुओं को छानकर अंदर जाने से रोकते हैं।
2. नासा गुहा की रक्त केशिकाएं ठंडी या गर्म हवा को शरीर के तापमान के अनुकूल बनाती हैं।
3. यह हवा को नम (Humidify) करती है जिससे फेफड़ों को क्षति नहीं पहुँचती, जबकि मुख से सांस लेने पर ये सुरक्षात्मक आवरण उपलब्ध नहीं होते।
प्रश्न 5(ग).
हैच-स्लैफ चक्र का रेखाचित्र दीजिए।
उत्तर:
.
[C₄ पथ / हैच-स्लैफ चक्र का प्रवाह आरेख (Flow Chart)]:
वातावरणीय CO₂
↓
[मध्योत्तक कोशिका (Mesophyll Cell)]
PEP (3C) + CO₂ ──(PEP केस)──> ऑक्सालोएसिटिक अम्ल (OAA - 4C)
↓
मैलिक अम्ल (4C)
↓ (परिवहन)
[पूल आच्छद कोशिका (Bundle Sheath Cell)]
मैलिक अम्ल (4C) ──(वि-कार्बोक्सीकरण)──> पाइरुविक अम्ल (3C) + CO₂
↓
केल्विन चक्र (C₃ Path) ➔ ग्लूकोज
प्रश्न 5(घ).
श्वसन भागफल या श्वसन गुणांक किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
.
• परिभाषा: श्वसन क्रिया में मुक्त की गई CO₂ के आयतन और अवशोषित O₂ के आयतन के अनुपात को 'श्वसन गुणांक' (Respiratory Quotient - RQ) कहते हैं।
RQ = (मुक्त CO₂ का आयतन) / (अवशोषित O₂ का आयतन)
• उदाहरण:
1. कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का RQ:
C₆H₁₂O₆ + 6O₂ ➔ 6CO₂ + 6H₂O
RQ = 6 CO₂ / 6 O₂ = 1 (इकाई)।
2. वसा (ट्राइपामिटिन) का RQ = 0.7 (एक से कम)।
6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 6(क).
ऑक्सी तथा अनॉक्सी श्वसन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration):
• यह ऑक्सीजन (O₂) की उपस्थिति में होता है।
• ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होकर CO₂ और H₂O बनते हैं।
• अधिक ऊर्जा (36 या 38 ATP) मुक्त होती है।
• यह कोशिका द्रव्य तथा माइटोकॉण्ड्रिया दोनों में होता है।
2. अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration):
• यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है।
• ग्लूकोज का अपूर्ण ऑक्सीकरण होकर एथिल अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल व CO₂ बनते हैं।
• कम ऊर्जा (केवल 2 ATP) मुक्त होती है।
• यह केवल कोशिका द्रव्य में संपन्न होता है।
प्रश्न 6(ख).
द्विनाम पद्धति क्या है ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
• द्विनाम पद्धति (Binomial Nomenclature): जीवों के वैज्ञानिक नामकरण की वह प्रणाली जिसमें प्रत्येक जीव के नाम में दो शब्द होते हैं — पहला शब्द 'वंश' (Genus) तथा दूसरा शब्द 'जाति' (Species) को दर्शाता है।
• प्रतिपादक: कैरोलस लिनियस (Carolous Linnaeus)।
• उदाहरण:
1. मानव — Homo sapiens (Homo = वंश, sapiens = जाति)।
2. आम — Mangifera indica (Mangifera = वंश, indica = जाति)।
प्रश्न 6(ग).
कार्डेटा तथा नान कार्डेटा में प्रमुख अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. कॉर्डेटा (Chordata):
• जीवन की किसी अवस्था में पृष्ठरज्जु (Notochord) पाई जाती है।
• केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पृष्ठ भाग में, एकल व खोखला होता है।
• ग्रसनीय क्लोम दरारें (Gill slits) पाई जाती हैं।
• हृदय अधर तल (Ventral) पर होता है।
2. नॉन-कॉर्डेटा (Non-Chordata):
• पृष्ठरज्जु पूर्णतः अनुपस्थित होती है।
• तंत्रिका तंत्र अधर तल पर, दोहरा व ठोस होता है।
• क्लोम दरारें अनुपस्थित होती हैं।
• हृदय पृष्ठ तल (Dorsal) पर या अनुपस्थित होता है।
प्रश्न 6(घ).
कुल सोलेनेसी का पुष्पसूत्र लिखकर उसका आर्थिक महत्व बताइए।
उत्तर:
.
• सोलेनेसी (Solanaceae) का पुष्पसूत्र (Floral Formula):
⊕ ⚥ K₍₅₎ C₍₅₎ A₅ G₍₂₎
• आर्थिक महत्व:
1. भोजन/सब्जी: आलू (*Solanum tuberosum*), टमाटर (*Solanum lycopersicum*), बैंगन।
2. औषधियाँ: बेलाडोना (*Atropa belladonna* - एट्रोपिन) तथा अश्वगंधा (*Withania somnifera*)।
3. व्यवसाय/उत्तेजक: तम्बाकू (*Nicotiana tabacum*)।
4. सजावटी पौधे: पिटूनिया (*Petunia*)।
7. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 7.
मानव हृदय की आन्तरिक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
मानव हृदय चार वेश्मों (Chambers) में बँटा एक पेशीय अंग है:
1. अलिंद (Atria):
• बायाँ व दायाँ अलिंद: ऊपरी दो पतली भित्ति वाले कक्ष हैं जो अंतर-अलिंद पट (Interatrial septum) द्वारा अलग रहते हैं।
• दायाँ अलिंद अशुद्ध (CO₂ युक्त) रक्त महाशिराओं से ग्रहण करता है, जबकि बायाँ अलिंद फुप्फुस शिराओं से शुद्ध (O₂ युक्त) रक्त प्राप्त करता है।
2. निलय (Ventricles):
• बायाँ व दायाँ निलय: निचले दो मोटी पेशीय भित्ति वाले कक्ष हैं।
• दायाँ निलय अशुद्ध रक्त को फुप्फुस धमनी द्वारा फेफड़ों में भेजता है।
• बायाँ निलय (सबसे मोटी भित्ति वाला) शुद्ध रक्त को महाधमनी (Aorta) द्वारा पूरे शरीर में पंप करता है।
3. कपाट (Valves):
• त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve): दाएँ अलिंद व दाएँ निलय के बीच।
• द्विवलनी / मिट्रल कपाट (Bicuspid/Mitral Valve): बाएँ अलिंद व बाएँ निलय के बीच।
• अर्धचन्द्राकार कपाट (Semilunar Valves): महाधमनी व फुप्फुस धमनी के निकास पर।
[मानव हृदय आंतरिक आरेख: दायाँ/बायाँ अलिंद ➔ दायाँ/बायाँ निलय ➔ कपाट ➔ महाधमनी/महाशिरा]
अथवा
प्रश्न 7.
क्रेब्स चक्र का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
क्रेब्स चक्र (Krebs Cycle / TCA Cycle / सिट्रिक अम्ल चक्र):
यह वायवीय श्वसन का द्वितीय चरण है जो माइटोकॉण्ड्रिया के मैट्रिक्स (Matrix) में संपन्न होता है। इसकी खोज हैंस क्रेब्स ने की थी।
• मुख्य पद:
1. एसिटिल Co-A का निर्माण: ग्लाइकोलाइसिस में बना पाइरुविक अम्ल एसिटिल Co-A (2C) में बदलता है।
2. सिट्रिक अम्ल का निर्माण: एसिटिल Co-A ऑक्सालोएसिटिक अम्ल (4C) से जुड़कर सिट्रिक अम्ल (6C) बनाता है।
3. क्रमिक वि-कार्बोक्सीकरण व ऑक्सीकरण: सिट्रिक अम्ल विभिन्न मध्यवर्ती यौगिकों (आइसोसिट्रिक अम्ल ➔ α-कीटोग्लुटेरिक अम्ल ➔ सक्शिनिल Co-A ➔ सक्शिनिक अम्ल ➔ फ्यूमेरिक अम्ल ➔ मैलिक अम्ल) से गुजरता है।
4. OAA का पुनरुद्भव: अंत में मैलिक अम्ल से पुनः ऑक्सालोएसिटिक अम्ल (4C) बन जाता है।
• ऊर्जा उत्पादन: क्रेब्स चक्र के दो चक्रों में कुल 2 GTP (ATP), 6 NADH₂ और 2 FADH₂ अणु प्राप्त होते हैं।
8. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 8.
तंत्रिका कोशिका का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
तंत्रिका कोशिका (Neuron) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। इसके तीन मुख्य भाग हैं:
1. कोशिकाकाय (Cyton / Cell Body):
• यह न्यूरॉन का केंद्रीय भाग है जिसमें एक स्पष्ट केंद्रक, कोशिकाद्रव्य तथा प्रोटीन संश्लेषण हेतु 'निसिल के कण' (Nissl's granules) पाए जाते हैं।
2. द्रुमाश्य (Dendrites):
• ये साइटॉन से निकलने वाले छोटे, शाखित प्रवर्ध हैं जो अन्य न्यूरॉन्स से संवेदी आवेगों को ग्रहण करके साइटॉन की ओर लाते हैं।
3. तंत्रिकाक्ष (Axon):
• यह साइटॉन से निकलने वाला सबसे लंबा, बेलनाकार प्रवर्ध है।
• यह आवेगों को साइटॉन से दूर अगले न्यूरॉन या कार्यकारी अंग तक ले जाता है।
• इसके चारों ओर माइलिन आच्छद (Myelin sheath) तथा रैनवियर के नोड (Nodes of Ranvier) पाए जाते हैं। अंतिम सिरे पर सिनैप्टिक बटन होते हैं।
[न्यूरॉन आरेख: द्रुमाश्य ➔ साइटॉन (केंद्रक/निसिल कण) ➔ तंत्रिकाक्ष (माइलिन आच्छद) ➔ सिनैप्टिक बटन]
अथवा
प्रश्न 8.
प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की क्रियाविधि दो मुख्य चरणों में संपन्न होती है:
1. प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction / Hill Reaction):
• स्थल: हरितलवक के ग्रैना (Grana) में।
• यह प्रकाश की उपस्थिति में होती है।
• इसमें जल का प्रकाशिक अपघटन (Photolysis of water) होता है जिससे O₂ गैस मुक्त होती है।
• फोटोफॉस्फोरिलेशन द्वारा ATP तथा NADPH₂ के रूप में स्वांगीकरण शक्ति (Assimilatory power) बनती है।
2. अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction / Blackman Reaction / C₃ Cycle):
• स्थल: हरितलवक के स्ट्रोमा (Stroma) में।
• यह प्रकाश पर सीधे निर्भर नहीं होती।
• इसमें प्रकाशिक अभिक्रिया में बनी ATP और NADPH₂ की ऊर्जा का प्रयोग करके CO₂ का अपचयन (Reduction) होता है और शर्करा/ग्लूकोज का संश्लेषण होता है।
9. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 9.
एक वृक्क नलिका का सचित्र वर्णन कीजिए तथा परानिस्पन्दन एवं धनात्मक पुनरावशोषण को समझाइए।
उत्तर:
.
• वृक्क नलिका (Nephron) की संरचना:
प्रत्येक नेफ्रॉन के दो मुख्य भाग होते हैं:
1. बोमन सम्पुट व ग्लोमेरुलस (Malpighian Body): बोमन सम्पुट एक कपनुमा संरचना है जिसके अंदर रक्त केशिकाओं का गुच्छा 'ग्लोमेरुलस' स्थित होता है।
2. वृक्क नलिका भाग: इसमें समीपस्थ संवलित नलिका (PCT), हैन्ले का लूप (Henle's Loop) तथा दूरस्थ संवलित नलिका (DCT) होती है, जो संग्राहक नलिका में खुलती है।
• मूत्र निर्माण की प्रक्रिया:
1. परानिष्यंदन (Ultrafiltration):
ग्लोमेरुलस की केशिकाओं में उच्च रक्तचाप के कारण रक्त में से जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, यूरिया और लवण छनकर बोमन सम्पुट में आ जाते हैं (ग्लोमेरुलर निष्यंद)।
2. वर्णात्मक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption):
निष्यंद जब PCT और हैन्ले के लूप से गुजरता है, तो शरीर के लिए उपयोगी पदार्थों (ग्लूकोज, जल, आवश्यक लवण) का पुनः अवशोषण होकर रक्त केशिकाओं में भेज दिया जाता है।
[नेफ्रॉन आरेख: बोमन सम्पुट (ग्लोमेरुलस) ➔ PCT ➔ हैन्ले लूप ➔ DCT ➔ संग्राहक नलिका]
अथवा
प्रश्न 9.
हरित लवक का सचित्र वर्णन तथा कार्य भी बताइए।
उत्तर:
.
• हरितलवक (Chloroplast) की संरचना:
यह पादप कोशिकाओं में पाया जाने वाला दोहरी झिल्ली से घिरा लवक है।
1. बाह्य व आंतरिक झिल्ली: दो चिकनी झिल्लियों का आवरण।
2. स्ट्रोमा (Stroma): झिल्ली के अंदर भरा पारदर्शी द्रव जिसमें 70S राइबोसोम, वृत्ताकार DNA तथा अप्रकाशिक अभिक्रिया के एंजाइम पाए जाते हैं।
3. थाइलेकॉइड व ग्रैना (Grana): स्ट्रोमा में चपटी झिल्लीदार थैलियों के चट्टे होते हैं जिन्हें 'ग्रेना' कहते हैं। थाइलेकॉइड की झिल्ली पर 'पर्णहरित' (Chlorophyll) के अणु पाए जाते हैं जहाँ प्रकाशिक अभिक्रिया होती है।
• कार्य:
1. यह सौर ऊर्जा को अवशोषित करके प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन (ग्लूकोज) का निर्माण करता है (कोशिका का रसोईघर)।
2. यह वायुमंडल में O₂ और CO₂ का संतुलन बनाए रखता है।
[हरितलवक आरेख: बाह्य झिल्ली ➔ आंतरिक झिल्ली ➔ स्ट्रोमा ➔ थाइलेकॉइड/ग्रैनम ➔ स्ट्रोमा लैमिली]