1. (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Biology Annual Paper 2026 SET 1
कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
यूकैरियोटिक एककोशिकीय जीव किससे सम्बन्धित हैं-
(a) मोनेरा
(b) प्रोटिस्टा
(c) फंचाई
(d) बैक्टीरिया
उत्तर:
. (b) प्रोटिस्टा
प्रश्न 1(ख).
लीची का खाने योग्य भाग है-
(a) एरिल
(b) एण्डोकार्प
(c) बीजपत्र
(d) पुष्पासन
उत्तर:
. (a) एरिल
प्रश्न 1(ग).
माइटोकाण्ड्रिया शब्द किसने दिया-
(a) अल्टमान
(b) बेन्डा
(c) डी दुवे
(d) सी. गॉल्जी
उत्तर:
. (b) बेन्डा
प्रश्न 1(घ).
जिएटिन नामक हॉर्मोन प्राप्त होता है-
(a) गेहूँ से
(b) मक्का से
(c) बाजरा से
(d) धान से
उत्तर:
. (b) मक्का से
2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
नींबू में सिट्रस कैंकर रोग उत्पन्न करने वाले रोग कारक का नाम लिखिए।
उत्तर:
.
ज़ैंथोमोनास सिट्री (Xanthomonas citri - एक जीवाणु)।
प्रश्न 2(ख).
मरुद्भिद् पौधों की दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
.
1. इनकी पत्तियों की बाह्य त्वचा पर मोटी क्यूटिकल (Cuticle) की परत और धंसे हुए रंध्र (Sunken stomata) पाए जाते हैं, जो वाष्पोत्सर्जन को कम करते हैं।
2. पत्तियाँ प्रायः कांटों में रूपांतरित हो जाती हैं और तना मांसल व हरा हो जाता है।
प्रश्न 2(ग).
DNA से RNA निर्माण में कौन-सा एन्जाइम होता है ?
उत्तर:
.
RNA पॉलीमरेज़ (RNA Polymerase) एंजाइम।
प्रश्न 2(घ).
श्वसन दर मापने वाले उपकरण का नाम लिखिए।
उत्तर:
.
रेस्पिरोमीटर (Respirometer)।
प्रश्न 2(ङ).
हृद निकास को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
.
हृदय के प्रत्येक निलय (Ventricle) द्वारा प्रति मिनट पंप की गई रक्त की मात्रा को 'हृद निकास' (Cardiac Output) कहते हैं।
(हृद निकास = स्ट्रोक आयतन × हृदय दर ≈ 70 मिली × 72 = 5040 मिली/मिनट या लगभग 5 लीटर)।
3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)
प्रश्न 3(क).
माइकोप्लाज्मा क्या है ?
उत्तर:
.
माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) सबसे छोटे स्वतंत्र एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीव हैं।
1. इनमें कोशिका भित्ति (Cell wall) पूरी तरह अनुपस्थित होती है, जिसके कारण इनका आकार बदलता रहता है।
2. ये बिना ऑक्सीजन के भी जीवित रह सकते हैं और पौधों तथा जंतुओं में विभिन्न रोग उत्पन्न करते हैं।
प्रश्न 3(ख).
हाइपैन्थोडियम पुष्पक्रम पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
हाइपैन्थोडियम (Hypanthodium):
1. यह एक विशेष प्रकार का पुष्पक्रम है जिसमें पुष्पक्रम का अक्ष मांसल होकर एक खोखली प्यालेनुमा संरचना बनाता है, जिसके शीर्ष पर एक छोटा छिद्र (Ostiole) होता है।
2. प्याले की आंतरिक भित्ति पर तीन प्रकार के एकलिंगी पुष्प लगे होते हैं: छिद्र के पास नर पुष्प, पेंदे में मादा पुष्प तथा मध्य में बंध्य मादा पुष्प (Gall flowers)।
3. उदाहरण: बरगद, पीपल तथा अंजीर (Ficus प्रजातियाँ)।
प्रश्न 3(ग).
समसूत्री कोशिका विभाजन का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
.
समसूत्री विभाजन (Mitosis):
यह कायिक कोशिकाओं (Somatic cells) में होने वाला वह विभाजन है जिसमें एक मातृ कोशिका विभाजित होकर दो समान संतति कोशिकाओं का निर्माण करती है। इसमें संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका के बराबर (2n) ही बनी रहती है। यह जीवों की वृद्धि व ऊतक मरम्मत के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 3(घ).
“वायवीय श्वसन अधिक प्रभावशाली है।” इस कथन का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
.
वायवीय (Aerobic) श्वसन में ग्लूकोज का O₂ की उपस्थिति में पूर्ण ऑक्सीकरण होता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), जल (H₂O) और प्रचुर मात्रा में ऊर्जा (36 या 38 ATP) मुक्त होती है।
इसके विपरीत, अवायवीय (Anaerobic) श्वसन में ग्लूकोज के अपूर्ण ऑक्सीकरण से केवल 2 ATP ऊर्जा मिलती है। अतः वायवीय श्वसन ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से अत्यधिक प्रभावशाली है।
प्रश्न 3(ङ).
रुधिर में CO₂ के परिवहन की विधियाँ बताइए।
उत्तर:
.
रक्त में CO₂ का परिवहन तीन रूपों में होता है:
1. प्लाज्मा में घुलित अवस्था में: लगभग 7% CO₂।
2. बाइकार्बोनेट आयनों (HCO₃⁻) के रूप में: लगभग 70% CO₂ (सोडियम व पोटेशियम बाइकार्बोनेट के रूप में)।
3. कार्बैमिनो-हीमोग्लोबिन के रूप में: लगभग 23% CO₂ (RBC के हीमोग्लोबिन से जुड़कर)।
4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 4(क).
एनीलिडा संघ के चार प्रमुख लक्षण लिखिए। इस संघ के दो जन्तुओं के प्राणी-वैज्ञानिक नाम भी लिखिए।
उत्तर:
.
• प्रमुख लक्षण:
1. इनका शरीर लंबा, बेलनाकार तथा स्पष्ट विखंडी खंडों (Metameric segmentation) में बँटा होता है।
2. ये त्रिस्तरीय (Triploblastic), द्विपार्श्व सममित तथा वास्तविक देहगुहीय (Coelomate) जीव होते हैं।
3. गमन के लिए काइटिन युक्त सीटी (Setae) या पार्श्वपाद (Parapodia) पाए जाते हैं।
4. उत्सर्जन हेतु वृक्कक (Nephridia) पाए जाते हैं तथा बंद रुधिर परिसंचरण तंत्र होता है।
• दो जन्तु एवं उनके वैज्ञानिक नाम:
1. केचुआ — फेरेटिमा पोस्थुमा (*Pheretima posthuma*)
2. जोंक — हिरुडिनेरिया ग्रैनुलोसा (*Hirudinaria granulosa*)
प्रश्न 4(ख).
द्विबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
.
[द्विबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट (T.S. of Dicot Root) का आरेख संरचना]:
बाह्य त्वचा (Epiblema / Epiderma) [मूलरोम युक्त]
↓
वल्कुट (Cortex) [मृदुतकीय कोशिकाएँ]
↓
अंतस्त्वचा (Endodermis) [कैस्पेरियन पट्टियों युक्त]
↓
परिरंभ (Pericycle)
↓
संवहन बंडल (Vascular Bundle)
• जाइलम (Xylem) [बाह्यआदिदारुक / Exarch - बाह्य से आंतरिक]
• फ्लोएम (Phloem) [जाइलम तथा फ्लोएम एकांतर क्रम में (Radial)]
↓
मज्जा (Pith) [अत्यंत सूक्ष्म या अनुपस्थित]
प्रश्न 4(ग).
मेंढक में गैसीय विनिमय कितने प्रकार का होता है ?
उत्तर:
.
मेंढक में श्वसन एवं गैसीय विनिमय तीन प्रकार से होता है:
1. त्वचीय श्वसन (Cutaneous Respiration): त्वचा द्वारा जल में तथा भूमि पर (नम त्वचा से O₂ विसरित होती है)।
2. मुख-ग्रसनी श्वसन (Buccopharyngeal Respiration): मुखगुहा की नम श्लेष्मा झिल्ली द्वारा विश्राम की अवस्था में।
3. फुप्फुसीय श्वसन (Pulmonary Respiration): फेफड़ों (Lungs) द्वारा, जब मेंढक भूमि पर अधिक सक्रिय होता है।
प्रश्न 4(घ).
प्रिऑन्स क्या हैं ? इसके मुख्य लक्षण लिखिए।
उत्तर:
.
• प्रिऑन्स (Prions): ये केवल संक्रामक प्रोटीन कण (Infectious proteinaceous particles) होते हैं, जिनमें न्यूक्लिक अम्ल (DNA/RNA) अनुपस्थित होता है।
• मुख्य लक्षण:
1. ये सामान्य प्रोटीन के असामान्य/गलत वलन (Mis-folded) के कारण बनते हैं।
2. ये उच्च ताप, विकिरण और एंजाइमी अपघटन के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होते हैं।
3. ये केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं तथा तंत्रिका संबंधी गंभीर रोग (उदा. भेड़ों में स्क्रैपी रोग, मवेशियों में मैड काउ रोग) उत्पन्न करते हैं।
5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 5(क).
गॉल्जीकाय पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
गॉल्जीकाय (Golgi Apparatus):
1. यह एकल झिल्ली से घिरे चपटे कुंडों (Cisternae), पुटिकाओं (Vesicles) तथा रिक्तिकाओं से बनी एक जटिल कोशिकीय संरचना है।
2. कार्य: यह कोशिका में संश्लेषित पदार्थों (प्रोटीन, लिपिड) की पैकेजिंग, रूपांतरण तथा उन्हें लक्ष्य स्थानों तक पहुँचाने का मुख्य केंद्र है।
3. यह ग्लाइकोप्रोटीन एवं ग्लाइकोलिपिड का निर्माण करता है और शुक्राणु निर्माण के समय 'अक्रॉसॉम' (Acrosome) बनाता है।
प्रश्न 5(ख).
राइबोजाइम की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• संरचना: राइबोजाइम (Ribozyme) एक गैर-प्रोटीन एंजाइम है जो वास्तव में एक उत्प्रेरक RNA (Catalytic RNA) अणु है। इसमें राइबोन्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ विशिष्ट त्रिआयामी (3D) संरचना में मुड़ी होती हैं।
• कार्य:
1. यह RNA स्प्लाइसिंग (RNA Splicing) प्रक्रिया में गैर-कोडिंग भागों (Introns) को काटने में मदद करता है।
2. पेप्टिडिल ट्रांसफरेज (23S r-RNA) के रूप में यह प्रोटीन संश्लेषण के दौरान पेप्टाइड आबंध बनाने का उत्प्रेरण करता है।
प्रश्न 5(ग).
सूत्री एवं अर्धसूत्री विभाजन में प्रमुख अंतरों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
.
1. समसूत्री/सूत्री विभाजन (Mitosis):
• यह कायिक कोशिकाओं (Somatic cells) में होता है।
• एक मातृ कोशिका से 2 समान संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
• गुणसूत्रों की संख्या समान (2n) बनी रहती है।
• जीन विनिमय (Crossing over) नहीं होता।
2. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis):
• यह जनन कोशिकाओं (Germ cells) में होता है।
• एक मातृ कोशिका से 4 अगुणित (n) संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
• गुणसूत्रों की संख्या आधी (n) रह जाती है।
• पैकीटीन अवस्था में जीन विनिमय होता है, जिससे आनुवंशिक विविधता आती है।
प्रश्न 5(घ).
प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि प्रकाश संश्लेषण क्रिया के लिए प्रकाश आवश्यक है ?
उत्तर:
.
• उद्देश्य: सिद्ध करना कि प्रकाश-संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है।
• उपकरण/सामग्री: गमले में लगा पौधा, काला कागज़, क्लिप, अल्कोहल, आयोडीन घोल।
• विधि:
1. पौधे को 48 घंटे अंधेरे में रखकर मण्डहीन (Destarch) कर लेते हैं।
2. एक पत्ती के मध्य भाग को दोनों ओर से काले कागज़ से ढककर क्लिप लगा देते हैं और पौधे को 4-5 घंटे धूप में रखते हैं।
3. पत्ती को तोड़कर अल्कोहल में उबालकर विरंजित करते हैं और फिर उस पर आयोडीन का घोल डालते हैं।
• प्रेक्षण व निष्कर्ष: पत्ती का खुला भाग आयोडीन से नीला-काला हो जाता है (मंड की उपस्थिति), जबकि ढका हुआ भाग रंगहीन रहता है (मंड अनुपस्थित)। इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश-संश्लेषण हेतु प्रकाश अनिवार्य है।
6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 6(क).
इलेक्ट्रॉन परिवहन तन्त्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (Electron Transport System - ETS):
1. यह माइटोकॉण्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली (Inner Membrane) में स्थित झिल्ली-बद्ध वाहकों (संविलयन I से IV) का एक क्रमबद्ध समूह है।
2. क्रेब्स चक्र तथा ग्लाइकोलाइसिस में बने NADH + H⁺ और FADH₂ के ऑक्सीकरण से इलेक्ट्रॉन ETS के विभिन्न वाहकों (सायटोक्रोम आदि) से होकर गुजरते हैं।
3. इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के दौरान मुक्त ऊर्जा से प्रोटॉन (H⁺) पंम्प होते हैं, जिससे 'प्रोटॉन प्रवणता' बनती है।
4. अंत में ATP सिंथेथेज (F₁-कण) से प्रोटॉन के वापस जाने पर ADP से ATP का निर्माण होता है (ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलेशन)। ऑक्सीजन अंतिम इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन ग्राही (H₂O बनाने हेतु) के रूप में कार्य करता है।
प्रश्न 6(ख).
हीमोग्लोबिन के महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
.
1. O₂ का परिवहन: हीमोग्लोबिन फेफड़ों से O₂ से जुड़कर 'ऑक्सी-हीमोग्लोबिन' (Oxyhemoglobin) बनाता है और इसे शरीर के सभी ऊतकों तक पहुँचाता है।
2. CO₂ का परिवहन: यह ऊतकों से लगभग 23% CO₂ को 'कार्बैमिनो-हीमोग्लोबिन' के रूप में फेफड़ों तक वापस लाता है।
3. बफर क्रिया: यह रक्त के pH को स्थिर (7.4) बनाए रखने में बफर की तरह कार्य करता है।
प्रश्न 6(ग).
प्लाज्मा प्रोटीन का क्या महत्व है ?
उत्तर:
.
1. फाइब्रिनोजन (Fibrinogen): रक्त का थक्का (Blood Clotting) जमाने में मुख्य भूमिका निभाता है।
2. ग्लोबुलिन (Globulin): एंटीबॉडीज (इम्यूनोग्लोबुलिन) बनाकर शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity) को मजबूत करता है।
3. एल्ब्यूमिन (Albumin): रक्त के परासरणी दाब (Osmotic Pressure) और द्रव संतुलन को बनाए रखता है।
प्रश्न 6(घ).
वृक्क के कार्यों पर कौन नियन्त्रण रखता है ?
उत्तर:
.
वृक्क के पुनरावशोषण और मूत्र निर्माण के कार्यों का नियंत्रण मुख्यतः तीन हॉर्मोनल तंत्रों द्वारा होता है:
1. ADH (ऐंटीडाययूरेटिक हॉर्मोन / वैसोप्रेसिन): हाइपोथैलेमस/पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित, जो दूरस्थ नलिका (DCT) व संग्राहक नलिका में जल के पुनरावशोषण को बढ़ाता है।
2. RAAS तंत्र (रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र): एल्डोस्टेरोन हॉर्मोन Na⁺ तथा जल के पुनरावशोषण को नियंत्रित करता है।
3. ANF (ऐट्रियल नेट्रियूरेटिक फैक्टर): हृदय के आलिंद द्वारा स्रावित, जो रक्तचाप बढ़ने पर रेनिन व ADH के प्रभाव को कम करता है।
7. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 7.
शैवाल तथा जिम्नोस्पर्म्स के आर्थिक महत्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
1. शैवाल (Algae) का आर्थिक महत्व:
• भोजन के रूप में: पोर्फायरा, लैमिनेरिया व सारगासम का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है।
• व्यावसायिक उत्पाद: लाल शैवाल (जिगार्टिना) से 'अगर-अगर' प्राप्त होता है जो कल्चर मीडिया में प्रयुक्त होता है।
• ओषधीय व जैविक महत्व: स्पिरुलिना में प्रचुर प्रोटीन होता है। शैवाल पृथ्वी का लगभग 50% CO₂ स्थिरीकरण प्रकाश-संश्लेषण द्वारा करते हैं।
2. जिम्नोस्पर्म्स (Gymnosperms) का आर्थिक महत्व:
• काष्ठ एवं लकड़ी: पाइनस (देवदार) और सिड्रस की लकड़ी से इमारती लकड़ी, फर्नीचर, कागज की लुगदी और दियासलाई बनाई जाती है।
• औषधियाँ: एफेड्रा से 'एफेड्रिन' (दमा की दवा) प्राप्त होती है।
• रेज़िन व तेल: पाइनस से तारपीन का तेल और रेज़िन प्राप्त होता है।
• खाद्य पदार्थ: 'चिलगोजा' (पाइनस का बीज) मेवे के रूप में खाया जाता है।
अथवा
प्रश्न 7.
मेंढक के पाचन तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
मेंढक का पाचन तंत्र आहारनाल तथा पाचक ग्रंथियों से मिलकर बना होता है:
1. आहारनाल (Alimentary Canal):
• मुख तथा मुख-ग्रसनी गुहा: चौड़ा मुख छिद्र जिसमें अग्र सिरा से जुड़ी द्विपालित (Bifid) जिह्वा होती है जो कीटों को पकड़ने में मदद करती है।
• ग्रसिका (Oesophagus): छोटी व चौड़ी नली जो आमाशय में खुलती है।
• आमाशय (Stomach): कार्डियक व पायलोरिक भागों में बँटा मांसल अंग जहाँ भोजन का आंशिक पाचन (HCl व पेप्सिन द्वारा) होता है।
• छोटी आँत (Small Intestine): गृहणी (Duodenum) तथा इलियम (Ileum) में बँटी होती है जहाँ पित्त रस व अग्न्याशयी रस द्वारा पूर्ण पाचन व अवशोषण होता है।
• मलाशय व अवस्कर (Rectum & Cloaca): अपचित भोजन अवस्कर छिद्र द्वारा बाहर निकाला जाता है।
2. पाचक ग्रंथियाँ (Digestive Glands):
• यकृत (Liver): पित्त रस (Bile juice) बनाता है।
• अग्न्याशय (Pancreas): अग्न्याशयी रस स्रावित करता है जिसमें पाचक एंजाइम होते हैं।
[मेंढक पाचन तंत्र आरेख: मुखगुहा ➔ ग्रसिका ➔ आमाशय ➔ गृहणी (पित्ताशय/अग्न्याशय से जुड़ी) ➔ इलियम ➔ मलाशय ➔ अवस्कर]
8. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 8.
एक सामान्य पादप कोशिका का नामांकित चित्र बनाइए। पादप तथा जन्तु कोशिकाओं में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. पादप कोशिका का नामांकित आरेख (Diagrammatic Representation):
[ कोशिका भित्ति (Cell Wall) ]
↓
[ कोशिका झिल्ली (Plasma Membrane) ]
↓
[ बड़ी केंद्रीय रसधानी (Large Vacuole) ]
↓
[ केंद्रक (Nucleus), माइटोकॉण्ड्रिया, हरितलवक (Chloroplast), गॉल्जीकाय, ER, राइबोसोम ]
2. पादप तथा जन्तु कोशिका में अन्तर:
┌───────────────────────────────┬───────────────────────────────┐
│ पादप कोशिका (Plant Cell) │ जन्तु कोशिका (Animal Cell) │
├───────────────────────────────┼───────────────────────────────┤
│ 1. सेल्यूलोज़ की बनी कोशिका │ 1. कोशिका भित्ति अनुपस्थित │
│ भित्ति पाई जाती है। │ होती है। │
│ 2. हरितलवक (Chloroplast) │ 2. लवक/हरितलवक अनुपस्थित │
│ उपस्थित होते हैं। │ होते हैं। │
│ 3. एक बड़ी केंद्रीय रसधानी │ 3. रसधानियाँ छोटी या │
│ (Vacuole) पाई जाती है। │ अनुपस्थित होती हैं। │
│ 4. तारककाय (Centrosome) प्रायः│ 4. तारककाय (Centrosome) │
│ अनुपस्थित होता है। │ उपस्थित होता है। │
└───────────────────────────────┴───────────────────────────────┘
अथवा
प्रश्न 8.
DNA की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• DNA की वाटसन-क्रिक संरचना (Watson-Crick Double Helix Model):
1. द्वि-कुंडलिनी संरचना: DNA दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड शृंखलाओं का बना एक द्विकुंडलित (Double-stranded helix) अणु है।
2. शर्करा-फास्फेट रीढ़: दोनों शृंखलाओं का ढांचा डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा और फॉस्फेट समूहों से बनता है।
3. क्षारक युग्मन (Base Pairing): क्षारक अंदर की ओर स्थित होते हैं। एडेनिन (A) हमेशा थाइमिन (T) से दो हाइड्रोजन बंधों (A=T) द्वारा तथा ग्वानिन (G) हमेशा साइटोसिन (C) से तीन हाइड्रोजन बंधों (G≡C) द्वारा जुड़ता है।
4. प्रति-समांतर दिशा: दोनों शृंखलाएं एक-दूसरे के विपरीत/प्रति-समांतर (5' ➔ 3' और 3' ➔ 5') दिशा में होती हैं।
5. माप: एक पूर्ण घुमाव की लंबाई 3.4 nm (34 Å) होती है जिसमें 10 क्षारक युग्म होते हैं।
• DNA के मुख्य कार्य:
1. आनुवंशिक सूचनाओं का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण करना।
2. कोशिका में प्रोटीन निर्माण का नियंत्रण एवं मार्गदर्शन करना (RNA के निर्माण द्वारा)।
9. (विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 9.
मानव के उत्सर्जी तंत्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
मानव उत्सर्जी तंत्र (Human Excretory System) के मुख्य अंग निम्न हैं:
1. एक जोड़ी वृक्क (Kidneys):
• ये उदर गुहा में कशेरुक दंड के दोनों ओर स्थित गहरे लाल-भूरे रंग के सेम के बीज के आकार के अंग हैं।
• प्रत्येक वृक्क की संरचनात्मक व कार्यात्मक इकाई 'नेफ्रॉन' (Nephron) होती है।
• वृक्क का कार्य रक्त को छानकर यूरिया, यूरिक अम्ल व अतिरिक्त लवणों को बाहर निकालना है।
2. एक जोड़ी मूत्रवाहिनियाँ (Ureters):
• ये दोनों वृक्कों के हाइलम भाग से निकलने वाली लंबी पेशीय नलिकाएं हैं जो मूत्र को मूत्राशय में ले जाती हैं।
3. मूत्राशय (Urinary Bladder):
• यह एक पेशीय, लचीली थैलीनुमा संरचना है जहाँ मूत्र अस्थायी रूप से एकत्र होता है।
4. मूत्रमार्ग (Urethra):
• यह मूत्राशय के निचले भाग से जुड़ी नलिका है जिसके द्वारा मूत्र को समय-समय पर शरीर से बाहर स्रावित किया जाता है।
[उत्सर्जी तंत्र आरेख: वृक्क (बायाँ व दायाँ) ➔ मूत्रवाहिनी ➔ मूत्राशय ➔ मूत्रमार्ग]
अथवा
प्रश्न 9.
मानव शरीर में पायी जाने वाली दो प्रमुख अन्तः स्रावी ग्रन्थियों की स्थिति संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
1. थायराइड ग्रंथि (Thyroid Gland):
• स्थिति व संरचना: यह गर्दन में श्वासनाल (Trachea) के दोनों ओर स्थित द्विपालित (Bilobed), H-आकार की अंतःस्रावी ग्रंथि है।
• कार्य: यह 'थायरोक्सिन' (T₄) तथा ट्राईआयोडोथायरोनिन (T₃) हॉर्मोन स्रावित करती है। यह शरीर की आधारभूत उपापचयी दर (BMR), वृद्धि तथा कार्बोहाइड्रेट/वसा के उपापचय का नियंत्रण करती है।
2. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland / Master Gland):
• स्थिति व संरचना: यह मस्तिष्क के आधार पर हाइपोथैलेमस से एक वृंत (Infundibulum) द्वारा जुड़ी छोटी मटर के दाने के आकार की ग्रंथि है।
• कार्य: यह वृद्धि हॉर्मोन (GH), TSH, ACTH, LH, FSH तथा वैसोप्रेसिन (ADH) आदि हॉर्मोन स्रावित करती है। यह अन्य सभी अंतःस्रावी ग्रंथियों के स्रावण और कार्यों को नियंत्रित करती है।