1. (सही विकल्प चुनिए)
Solution
UP Board Class 11th Chemistry Half-Yearly Paper 2024 B Code
कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2024 · अर्धवार्षिक
प्रश्न 1(क).
कवकों की कोशिका भित्ति बनी होती है-
(a) सेलुलोस
(b) पेक्टिन
(c) सुबेरिन
(d) काइटिन
उत्तर:
. (d) काइटिन
प्रश्न 1(ख).
कॉर्डेट जन्तु हैं-
(a) त्रिकोरकी
(b) द्विपार्श्व सममित
(c) देहगुहीय
(d) ये सभी
उत्तर:
. (d) ये सभी
प्रश्न 1(ग).
नागफनी में पत्तियाँ रुपान्तरित होती हैं-
(a) शल्क में
(b) शूल में
(c) कटक में
(d) पर्णकाय स्तम्भ में
उत्तर:
. (b) शूल में
प्रश्न 1(घ).
कोशिका द्रव्य का लगभग 80% भाग बनाता है-
(a) खनिज लवण
(b) प्रोटीन
(c) वसाएँ
(d) जल
उत्तर:
. (d) जल
2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
जैव विविधता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
.
किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों (पादपों, जंतुओं एवं सूक्ष्मजीवों) की प्रजातियों की विविधता, विभिन्नता और उनके पारिस्थितिक तंत्र की जटिलता को जैव विविधता (Biodiversity) कहते हैं।
प्रश्न 2(ख).
फर्न को संवहनी क्रिप्टोगैम क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
.
फर्न (टेरिडोफाइटा) में जल तथा भोजन के संवहन के लिए संवहन ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं, लेकिन इनमें पुष्प तथा बीज नहीं बनते (गुप्त जननांग), इसीलिए इन्हें 'संवहनी क्रिप्टोगैम' (Vascular Cryptogams) कहते हैं।
प्रश्न 2(ग).
कीट में कितनी जोड़ी पाद होते हैं?
उत्तर:
.
कीटों (Insecta वर्ग) में 3 जोड़ी (कुल 6) वक्षीय पाद (legs) पाए जाते हैं।
प्रश्न 2(घ).
कूट चक्रक पुष्पक्रम किस पौधे में पाया जाता है ?
उत्तर:
.
कूट चक्रक (Verticillaster) पुष्पक्रम 'तुलसी' (Ocimum sanctum - Lamiaceae कुल) में पाया जाता है।
प्रश्न 2(ङ).
राइबोसोम किस पदार्थ के द्वारा निर्मित होते हैं?
उत्तर:
.
राइबोसोम 'r-RNA' (राइबोसोमल आर.एन.ए.) तथा 'प्रोटीन' (Ribonucleoproteins) द्वारा निर्मित होते हैं।
3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)
प्रश्न 3(क).
न्यूक्लिक अम्ल कितने प्रकार के होते हैं? नाम बताइए।
उत्तर:
.
न्यूक्लिक अम्ल मुख्यतः 2 प्रकार के होते हैं:
1. DNA (डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल)
2. RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल)
प्रश्न 3(ख).
पादप तथा जन्तु कोशिका में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. पादप कोशिका (Plant Cell):
• सेल्यूलोज़ की बनी कोशिका भित्ति (Cell wall) पाई जाती है।
• लवक (Plastids) तथा बड़ी केंद्रीय रसधानी पाई जाती है।
2. जन्तु कोशिका (Animal Cell):
• कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।
• लवक अनुपस्थित होते हैं तथा तारककाय (Centrosome) पाया जाता है।
प्रश्न 3(ग).
अन्तर्वेशी विभज्योतक कहाँ पाये जाते हैं?
उत्तर:
.
अन्तर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem) स्थायी ऊतकों के बीच तथा मुख्य रूप से पत्तियों के आधार (leaf base) और तने की पर्वसंधियों (Nodes/Internodes) के आधार पर पाए जाते हैं (जैसे— घास, बाँस, गन्ना आदि में)।
प्रश्न 3(घ).
स्यूडोसील तथा हीमोसील में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. स्यूडोसील (Pseudocoel / कूटगुहा):
• यह मेसोडर्म द्वारा आस्तरित (lined) नहीं होती; मेसोडर्म बिखरी हुई थैलियों के रूप में होती है।
• यह संघ एस्केल्मिंथीज (जैसे एस्केरिस) में पाई जाती है।
2. हीमोसील (Haemocoel / रक्तगुहा):
• यह प्राथमिक देहगुहा है जो रुधिर (Haemolymph) से भरी रहती है।
• यह संघ आर्थ्रोपोडा और मोलस्का में पाई जाती है।
प्रश्न 3(ङ).
लाइकेन के विभिन्न प्रकारों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
.
संरचना और बाह्य रूप के आधार पर लाइकेन 3 मुख्य प्रकार के होते हैं:
1. क्रस्टोज़ लाइकेन (Crustose Lichen) - जैसे ग्राफिस (Graphis)।
2. फोलियोज़ लाइकेन (Foliose Lichen) - जैसे पारमेलिया (Parmelia)।
3. फ्रुटिकोज़ लाइकेन (Fruticose Lichen) - जैसे उसनिया (Usnea)।
4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 4(क).
टैक्सान का क्या अर्थ है ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
.
टैक्सान (Taxon) वर्गीकरण के किसी भी स्तर/वर्गक (Taxonomic category) को दर्शाने वाली व्यावहारिक इकाई है।
• उदाहरण: 'मैमेलिया' (Mammalia) एक टैक्सान है जो वर्ग (Class) स्तर को दर्शाता है; इसी प्रकार 'सोलेनेसी' (Solanaceae) कुल (Family) स्तर का एक टैक्सान है।
प्रश्न 4(ख).
विषाणुओं की प्रकृति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
.
विषाणु (Viruses) सजीव और निर्जीव के बीच की योजक कड़ी हैं:
1. निर्जीव लक्षण: इनमें कोशिकीय संरचना का अभाव होता है, ये श्वसन/उपापचय नहीं करते और इन्हें क्रिस्टल के रूप में संचित किया जा सकता है।
2. सजीव लक्षण: इनमें आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA) होता है, ये पोषद् कोशिका के अंदर द्विगुणन (Replication) करते हैं तथा इनमें उत्परिवर्तन (Mutation) होता है।
प्रश्न 4(ग).
एक बीजपत्री तथा द्विबीजपत्री बीजों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. एकबीजपत्री बीज (Monocot Seed):
• भ्रूण में केवल 1 बीजपत्र (Cotyledon / Scutellum) होता है।
• ये प्रायः भ्रूणपोषी (Endospermic) होते हैं (जैसे— मक्का, गेहूं)।
2. द्विबीजपत्री बीज (Dicot Seed):
• भ्रूण में 2 बीजपत्र होते हैं।
• ये प्रायः अभ्रूणपोषी (Non-endospermic) होते हैं (जैसे— चना, मटर)।
प्रश्न 4(घ).
पादपों में पेक्टिन का महत्व बताइए।
उत्तर:
.
1. पेक्टिन (Pectin) पादप कोशिकाओं की 'मध्य पटलिका' (Middle Lamella) का मुख्य घटक (कैल्शियम व मैग्नीशियम पेक्टेट) है जो दो समीपस्थ कोशिकाओं को आपस में चिपकाए रखता है।
2. यह कोशिका भित्ति को कठोरता, संरचनात्मक दृढ़ता और लचीलापन प्रदान करता है।
3. यह जल धारण क्षमता बनाए रखने में भी सहायक है।
5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 5(क).
सायनो बैक्टीरिया के लाभदायक प्रभाव के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
.
1. जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण: एनाबीना (Anabaena) और नॉस्टॉक (Nostoc) वायुमंडलीय N₂ का स्थिरीकरण करके मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।
2. जैव उर्वरक एवं भोजन: स्पिरुलिना (Spirulina) में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जिसका उपयोग एकल कोशिका प्रोटीन (SCP) के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 5(ख).
फर्न प्रोथैलस पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
फर्न प्रोथैलस (Fern Prothallus):
1. यह फर्न के अगुणित बीजाणु (Spore) के अंकुरण से बनने वाला स्वतंत्र, अगुणित (n) युग्मकोद्भिद (Gametophyte) है।
2. यह छोटा, हरा, हृदयाकार (Heart-shaped), चपटा तथा स्वपोषी होता है।
3. इसकी निचली सतह पर मूलाभास (Rhizoids) तथा पुंधानी (Antheridia) व स्त्रीधानी (Archegonia) दोनों जननांग पाए जाते हैं।
प्रश्न 5(ग).
रुधिर तथा लसीका मे अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. रुधिर (Blood):
• लाल रंग का द्रव (RBCs, WBCs, प्लेटलेट्स व हीमोग्लोबिन उपस्थित)।
• इसमें प्रोटीन व O₂ की मात्रा अधिक तथा उत्सर्जी पदार्थों की मात्रा कम होती है।
2. लसीका (Lymph):
• रंगहीन/हल्का पीला द्रव (RBCs व प्लेटलेट्स अनुपस्थित, केवल मुख्य रूप से WBCs/लिम्फोसाइट्स उपस्थित)।
• इसमें O₂ कम तथा उत्सर्जी/अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा अधिक होती है।
प्रश्न 5(घ).
संतृप्त तथा असंतृप्त वसा अम्लों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. संतृप्त वसा अम्ल (Saturated Fatty Acids):
• कार्बन शृंखला में केवल एकल आबंध (Single Bonds) पाए जाते हैं।
• इनका गलनांक उच्च होता है और ये सामान्य ताप पर ठोस होते हैं (उदा. स्टीयरिक अम्ल, मक्खन/घी)।
2. असंतृप्त वसा अम्ल (Unsaturated Fatty Acids):
• कार्बन शृंखला में एक या अधिक द्वि-आबंध (Double Bonds) पाए जाते हैं।
• इनका गलनांक कम होता है और ये सामान्य ताप पर द्रव होते हैं (उदा. ओलिक अम्ल, सरसों/सूरजमुखी का तेल)।
6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 6(क).
अर्द्धसूत्री विभाजन का क्या महत्व है ?
उत्तर:
.
1. गुणसूत्रों की संख्या का नियमन: यह लैंगिक जनन करने वाले जीवों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्रों की निश्चित संख्या (2n) को बनाए रखता है।
2. आनुवंशिक विविधता: प्रोफेज-I की पैकीटीन अवस्था में 'जीन विनिमय' (Crossing Over) होने से नए आनुवंशिक पुनर्योजन (Recombinations) बनते हैं, जो जैव विकास के लिए आवश्यक हैं।
3. युग्मकों (Gametes) का निर्माण करता है।
प्रश्न 6(ख).
प्रोटीन की तृतीय संरचना से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
.
प्रोटीन की तृतीयक संरचना (Tertiary Structure):
1. जब पॉलिपेप्टाइड शृंखला स्वयं पर अत्यधिक मुड़कर और वलित (folded) होकर एक त्रिआयामी (3D) गोलिकाकार (Globular) संरचना बनाती है, तो इसे तृतीयक संरचना कहते हैं।
2. यह संरचना पेप्टाइड आबंध, हाइड्रोजन आबंध, आयनिक आबंध, डाइसल्फाइड आबंध तथा जल-विरोधी (Hydrophobic) अन्योन्यक्रियाओं द्वारा स्थिर रहती है।
3. एंजाइमों की जैविक सक्रियता इसी संरचना पर निर्भर करती है।
प्रश्न 6(ग).
अरेखित तथा रेखित पेशी तन्तु में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. अरेखित (चिकनी) पेशी (Unstriated Muscle):
• इनमें हल्की व गहरी पट्टियाँ (Striations) नहीं पाई जातीं।
• ये अनैच्छिक (Involuntary) तथा तर्कुरूपी (Spindle-shaped) होती हैं।
• उदाहरण: आहारनाल तथा रक्तवाहिनियों की भित्ति।
2. रेखित पेशी (Striated Muscle):
• इनमें एकांतर क्रम में हल्की तथा गहरी पट्टियाँ पाई जाती हैं।
• ये ऐच्छिक (Voluntary) तथा बेलनाकार (Cylindrical) होती हैं।
• उदाहरण: हाथ और पैर की कंकाल पेशियाँ।
प्रश्न 6(घ).
नर तथा मादा एस्केरिस में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. नर एस्केरिस (Male Ascaris):
• आकार में छोटा (15-30 सेमी) तथा पतला होता है।
• इसका पश्च सिरा मुड़ा हुआ होता है जिस पर 'पिनियल शूक' (Pineal spicules) पाए जाते हैं।
• गुदा और जनन छिद्र एक ही स्थान (क्लोएका) पर खुलते हैं।
2. मादा एस्केरिस (Female Ascaris):
• आकार में बड़ी (20-40 सेमी) तथा मोटी होती है।
• इसका पश्च सिरा सीधा और नुकीला होता है (पिनियल शूक अनुपस्थित)।
• मलाशय (गुदा) तथा मादा जनन छिद्र अलग-अलग स्थित होते हैं।
7. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 7.
मॉस के स्पोरोफाइट के संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
मॉस (जैसे- फ्यूनेरिया) का बीजाणुद्भिद/स्पोरोफाइट (Sporophyte) अगुणित युग्मकोद्भिद (Gametophyte) पर आश्रित होता है। यह द्विगुणित (2n) होता है और इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:
1. पाद (Foot): यह स्पोरोफाइट का सबसे निचला, त्रिकोणात्मक भाग है जो मुख्य पौधे (युग्मकोद्भिद) के ऊतकों में धंसा रहता है। यह जल व पोषक तत्वों का अवशोषण करता है।
2. सीता (Seta): यह पाद और कैप्सूल को जोड़ने वाला लंबा, पतला और सीधा डंठलनुमा भाग है जो कैप्सूल को ऊपर उठाए रखता है।
3. सम्पुट/कैप्सूल (Capsule): यह शीर्ष पर स्थित सबसे महत्वपूर्ण भाग है जिसमें बीजाणु बनते हैं। इसके मुख्य क्षेत्र हैं:
• एपोफाइसिस (Apophysis): निचला फूला हुआ हरा भाग (प्रकाश-संश्लेषण हेतु)।
• थीका (Theca): मध्य भाग जहाँ बीजाणु मातृ कोशिकाओं में अर्धसूत्री विभाजन द्वारा बीजाणु (Spores) बनते हैं।
• ओपरकुलम व पेरिस्टोम (Operculum & Peristome): ऊपरी ढक्कननुमा भाग जिस पर दाँतेदार पेरिस्टोम पाए जाते हैं जो बीजाणुओं के प्रकीर्णन में मदद करते हैं।
[मॉस स्पोरोफाइट आरेख: पाद ➔ सीता ➔ एपोफाइसिस ➔ थीका (कैप्सूल) ➔ ओपरकुलम]
अथवा
प्रश्न 7.
कार्बोहाइड्रेट क्या हैं ? कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख संवर्गों का उल्लेख कीजिए। जन्तु शरीर में कार्बोहाइड्रेट की क्या भूमिका है ?
उत्तर:
.
• परिभाषा: कार्बोहाइड्रेट पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं, जिनमें C, H और O का अनुपात सामान्यतः 1:2:1 होता है।
• प्रमुख संवर्ग (Classification):
1. मोनोसैकेराइड (Monosaccharides): सबसे सरल शर्कराएँ जो जल-अपघटित नहीं हो सकतीं (उदा. ग्लूकोज, फ्रक्टोज, राइबोज)।
2. ओलिगोसैकेराइड (Oligosaccharides): जल-अपघटन पर 2 से 10 मोनोसैकेराइड इकाइयाँ देती हैं (उदा. सुक्रोज, माल्टोज, लैक्टोज)।
3. पॉलीसैकेराइड (Polysaccharides): सैकड़ों मोनोसैकेराइड इकाइयों के जुड़ने से बने जटिल अणु (उदा. ग्लाइकोजन, स्टार्च, सेल्यूलोज़)।
• जन्तु शरीर में भूमिका:
1. प्राथमिक ऊर्जा स्रोत: ग्लूकोज कोशकीय श्वसन द्वारा ATP के रूप में तत्काल ऊर्जा प्रदान करता है।
2. संचित भोजन: यकृत तथा पेशियों में अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट 'ग्लाइकोजन' के रूप में संचित होता है।
3. संरचनात्मक घटक: कोशिका झिल्ली में ग्लाइकोलिपिड/ग्लाइकोप्रोटीन के रूप में तथा आर्थ्रोपोडा के बाह्य कंकाल में काइटिन के रूप में उपस्थित।
8. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 8.
संघ कॉर्डेटा के मुख्य लक्षण बताइए। जैव वैज्ञानिक नाम के साथ दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
.
• संघ कॉर्डेटा (Phylum Chordata) के मुख्य लक्षण:
1. पृष्ठरज्जु (Notochord): जीवन की किसी न किसी अवस्था में छड़ जैसी पृष्ठरज्जु पाई जाती है।
2. पृष्ठ खोखली तंत्रिका रज्जु (Dorsal Hollow Nerve Cord): ग्रसनी के पृष्ठ भाग में एकल, खोखली तंत्रिका रज्जु पाई जाती है।
3. ग्रसनीय क्लोम दरारें (Pharyngeal Gill Slits): श्वसन हेतु ग्रसनी भित्ति पर क्लोम दरारें पाई जाती हैं।
4. पश्च गुदा पूँछ (Post-anal Tail): गुदा के पीछे पूँछ उपस्थित होती है।
5. द्विपार्श्व सममित, त्रिस्तरीय (Triploblastic) तथा वास्तविक देहगुहीय (Coelomate) जीव होते हैं।
• उदाहरण (वैज्ञानिक नाम सहित):
1. मानव — होमो सेपियंस (*Homo sapiens*)
2. रोहू मछली — लाबियो रोहिता (*Labeo rohita*)
अथवा
प्रश्न 8.
पुष्पासन पर स्थिति के अनुसार लगे पुष्पी भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
पुष्पासन (Thalamus) पर जायांग (Gynoecium) के सापेक्ष अन्य पुष्पी भागों (बाह्यदल, दल, पुंकेसर) की स्थिति के आधार पर पुष्प तीन प्रकार के होते हैं:
1. जायांगधर / अधोजायांगी (Hypogynous):
• इसमें जायांग पुष्पासन पर सर्वोच्च स्थान पर स्थित होता है और अन्य भाग इसके नीचे से निकलते हैं।
• अंडाशय 'ऊर्ध्ववर्ती' (Superior) होता है।
• उदाहरण: सरसों, गुड़हल, बैंगन।
2. परिजायांगी (Perigynous):
• इसमें पुष्पासन का किनारा बढ़कर प्यालेनुमा संरचना बनाता है, जिसके केंद्र में जायांग तथा किनारे पर अन्य पुष्पी भाग स्थित होते हैं।
• अंडाशय 'अर्ध-अधोवर्ती' (Half-inferior) होता है।
• उदाहरण: गुलाब, आडू, प्लम।
3. जायांगोपरिक / अधिजायांगी (Epigynous):
• इसमें पुष्पासन का किनारा पूरी तरह बढ़कर अंडाशय को घेर लेता है और उससे संलीन हो जाता है। अन्य भाग अंडाशय के ऊपर से निकलते हैं।
• अंडाशय 'अधोवर्ती' (Inferior) होता है।
• उदाहरण: अमरूद, खीरा, सूरजमुखी के रश्मि पुष्पक।
9. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 9.
तंत्रिका ऊतक की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• संरचना:
तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई न्यूरॉन (Neuron) है। न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं:
1. कोशिकाकाय (Cyton / Cell Body): इसमें स्पष्ट केंद्रक, कोशिकाद्रव्य तथा निसिल के कण (Nissl's granules) पाए जाते हैं।
2. द्रुमाश्य (Dendrites): ये छोटे, शाखित प्रवर्ध हैं जो संवेदनाओं को ग्रहण करके साइटॉन की ओर लाते हैं।
3. तंत्रिकाक्ष (Axon): यह एक लंबा, एकल बेलनाकार प्रवर्ध है जो तंत्रिका आवेग को साइटॉन से दूर अगले न्यूरॉन या अंग तक ले जाता है। इस पर माइलिन आच्छद पाया जाता है।
• कार्य:
1. शरीर के आंतरिक व बाह्य वातावरण से संवेदनाओं को ग्रहण कर मस्तिष्क व मेरुरज्जु तक पहुँचाना।
2. मस्तिष्क के प्रतिक्रियात्मक संदेशों को कार्यकारी अंगों (पेशियों व ग्रंथियों) तक पहुँचाना।
3. शरीर की जैविक क्रियाओं में नियंत्रण और समन्वय (Control & Coordination) स्थापित करना।
अथवा
प्रश्न 9.
दो कोशिकीय अंगकों का नाम बताइए जो द्विकला से घिरे होते हैं। इन दोनों अंगकों की क्या विशेषताएँ हैं ? इनका कार्य तथा रेखाचित्र को समझाइए।
उत्तर:
.
दोहरा कला (Double Membrane) से घिरे दो मुख्य कोशिकांग हैं:
1. माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria)
2. हरितलवक (Chloroplast)
• विशेषताएँ:
1. दोनों के पास अपना स्वयं का वृत्ताकार DNA (Circular DNA) तथा 70S राइबोसोम होता है।
2. दोनों अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं जो स्वयं का विभाजन कर सकते हैं।
• कार्य:
1. माइटोकॉण्ड्रिया: कोशकीय श्वसन (क्रेब्स चक्र व ॲक्सीकारी फॉस्फोरिलेशन) द्वारा ATP का निर्माण करना ('कोशिका का पावरहाउस')।
2. हरितलवक: सौर ऊर्जा को ग्रहण करके प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट (भोजन) का निर्माण करना।
• रेखाचित्र संरचना:
[माइटोकॉण्ड्रिया]
बाह्य झिल्ली ➔ आंतरिक झिल्ली (क्रिस्टी / Cristae) ➔ मैट्रिक्स (Matrix) ➔ F₁ कण / ऑक्सिसोम
[हरितलवक]
बाह्य झिल्ली ➔ आंतरिक झिल्ली ➔ स्ट्रोमा (Stroma) ➔ थाइलेकॉइड के चट्टे (ग्रेना / Grana)