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UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2024 A Code

कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2024 · बोर्ड परीक्षा

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1. (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न 1(क).

दंश कोशिकाएँ पायी जाती हैं-

(A) स्पंजों में

(B) सीलेन्ट्रेट्स में

(C) एनीलिडा में

(D) निमेटोड में

उत्तर:

. (B) सीलेन्ट्रेट्स में

प्रश्न 1(ख).

को-एन्जाइम होता है-

(A) एक अकार्बनिक यौगिक

(B) प्रायः एक धातु

(C) एक प्रोटीन

(D) विटामिन

उत्तर:

. (D) विटामिन

प्रश्न 1(ग).

अंकुरित होते अरण्डी बीजों का RQ होता है-

(A) एक

(B) एक से अधिक

(C) एक से कम

(D) शून्य

उत्तर:

. (C) एक से कम

प्रश्न 1(घ).

दो अस्थियों को परस्पर जोड़ने वाला ऊतक कहलाता है-

(A) स्नायु

(B) कण्डरा

(C) पेशियाँ

(D) संयोजी ऊतक

उत्तर:

. (A) स्नायु

2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 2(क).

ICZN का क्या अर्थ है ?

उत्तर:

.

ICZN का पूर्ण रूप 'International Code of Zoological Nomenclature' (अंतर्राष्ट्रीय प्राणी नामकरण संहिता) है। यह प्राणियों के वैज्ञानिक नामकरण के नियमों को निर्धारित करता है।

प्रश्न 2(ख).

ज्वाला कोशिकाएँ किस संघ के सदस्यों में पायी जाती हैं ?

उत्तर:

.

ज्वाला कोशिकाएँ (Flame cells) संघ प्लैटीहेल्मिंथीज (Platyhelminthes - जैसे फीताकृमि, प्लेनेरिया) के सदस्यों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 2(ग).

सबसे बड़े एक कोशिकीय पादप का नाम लिखिए।

उत्तर:

.

एसिटाबुलैरिया (Acetabularia - एककोशिकीय हरा शैवाल)।

प्रश्न 2(घ).

रक्त दाब को किस यन्त्र द्वारा नापा जाता है ?

उत्तर:

.

रक्त दाब (Blood Pressure) को 'स्फिग्मोमैनोमीटर' (Sphygmomanometer) द्वारा मापा जाता है।

प्रश्न 2(ङ).

एनुरिया रोग में क्या होता है ?

उत्तर:

.

एनुरिया (Anuria) एक ऐसी स्थिति है जिसमें वृक्कों (Kidneys) द्वारा मूत्र का निर्माण पूरी तरह बंद हो जाता है या प्रतिदिन 100 मिलीलीटर से कम मूत्र बनता है।

3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)

प्रश्न 3(क).

प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पर्णहरित के किस भाग में होती है ?

उत्तर:

.

1. प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction): हरितलवक के ग्रैना (Grana) तथा थाइलेकॉइड में होती है।

2. अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction): हरितलवक के स्ट्रोमा (Stroma) में होती है।

प्रश्न 3(ख).

कोलेस्ट्रॉल किस प्रकार मनुष्य को हानि पहुँचाता है ?

उत्तर:

.

रक्त में कोलेस्ट्रॉल की अत्यधिक मात्रा धमनियों की भित्तियों पर जमा होकर उन्हें संकीर्ण तथा कठोर बना देती है (Atherosclerosis)। इससे रक्त प्रवाह बाधित होता है, जिससे उच्च रक्तचाप (Hypertension) तथा हृदय आघात (Heart Attack) का खतरा बढ़ता है।

प्रश्न 3(ग).

100 मिली रक्त में सामान्यतया O₂ की मात्रा कितनी होती है ?

उत्तर:

.

100 मिली शुद्ध (धमनीीय) रक्त में सामान्यतया लगभग 20 मिलीलीटर oxygen (O₂) पाई जाती है।

प्रश्न 3(घ).

मानव मस्तिष्क के सेरीब्रिम के दो कार्य लिखिए।

उत्तर:

.

1. यह सोचने, समझने, तर्क करने, स्मृति और बुद्धिमत्ता का नियंत्रण केंद्र है।

2. यह शरीर की सभी ऐच्छिक पेशीय गतियों और संवेदी अंगों (दृष्टि, श्रवण, स्पर्श आदि) की संवेदनाओं का विश्लेषण करता है।

प्रश्न 3(ङ).

श्वसन तथा प्रकाश श्वसन में दो अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. सामान्य श्वसन (Respiration):

• यह सभी सजीव कोशिकाओं में दिन-रात (24 घंटे) होता है।

• यह माइटोकॉण्ड्रिया तथा कोशिकाद्रव्य में संपन्न होता है और इसमें ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है।

2. प्रकाश श्वसन (Photorespiration):

• यह केवल C₃ पौधों में तथा प्रकाश की उपस्थिति में होता है।

• यह हरितलवक, परऑक्सीसोम तथा माइटोकॉण्ड्रिया तीनों में होता है और इसमें ऊर्जा (ATP) नष्ट होती है।

4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 4(क).

कवक सर्वव्यापी होते हैं। संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

कवक (Fungi) सर्वव्यापी (Ubiquitous) जीव हैं क्योंकि ये जल, वायु, मृदा, पादपों तथा जंतुओं के शरीर पर या उनके अंदर हर स्थान पर पाए जा सकते हैं।

1. इनमें विविधतापूर्ण पोषण विधियाँ (मृतोपजीवी, परजीवी, सहजीवी) पाई जाती हैं।

2. इनके बीजाणु (Spores) अत्यधिक सूक्ष्म, हल्के और प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने वाले होते हैं, जो हवा द्वारा आसानी से सर्वत्र फैल जाते हैं।

प्रश्न 4(ख).

लाल शैवाल तथा भूरे शैवाल में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. लाल शैवाल (Rhodophyceae):

• इनमें 'फाइकोएरिथ्रिन' (Phycoerythrin) वर्णक की प्रचुरता के कारण लाल रंग होता है।

• संचित भोजन 'फ्लोरिडियन स्टार्च' के रूप में होता है।

• कशाभिकाएँ (Flagella) पूर्णतः अनुपस्थित होती हैं।

2. भूरे शैवाल (Phaeophyceae):

• इनमें 'फ्यूकोजैंथिन' (Fucoxanthin) वर्णक के कारण भूरा रंग होता है।

• संचित भोजन 'लैमिनेरिन' या 'मैनिटॉल' के रूप में होता है।

• इनमें असमान, पार्श्वीय कशाभिकाएँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 4(ग).

अन्त स्रावी ग्रन्थि तथा बहि स्रावी ग्रन्थि में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine Glands):

• ये नलिकाविहीन (Ductless) होती हैं।

• इनके स्राव को 'हॉर्मोन' कहते हैं, जो सीधे रक्त में मुक्त होते हैं।

• उदाहरण: पीयूष ग्रंथि, थायराइड ग्रंथि।

2. बहिःस्रावी ग्रन्थियाँ (Exocrine Glands):

• ये नलिकायुक्त (Ducts present) होती हैं।

• इनके स्राव में एंजाइम या अन्य पदार्थ होते हैं जो नलिकाओं द्वारा विशिष्ट अंगों तक पहुँचते हैं।

• उदाहरण: लार ग्रंथि, यकृत, स्वेद ग्रंथि।

प्रश्न 4(घ).

विटामिन्स तथा हॉर्मोन्स में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. विटामिन्स (Vitamins):

• ये बाह्य पोषक तत्व हैं जिन्हें मानव शरीर स्वतः नहीं बना सकता (भोजन से प्राप्त होते हैं)।

• ये सह-एंजाइम के रूप में उपापचयी क्रियाओं को प्रेरित करते हैं।

2. हॉर्मोन्स (Hormones):

• ये शरीर की अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा संश्लेषित कार्बनिक संदेशवाहक हैं।

• ये सीधे रक्त में स्रावित होकर लक्षित अंगों की वृद्धि एवं कार्यों का नियमन करते हैं।

5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 5(क).

पेशीय थकावट पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

अत्यधिक या निरंतर शारीरिक कार्य करने पर पेशियों में ऑक्सीजन (O₂) की आपूर्ति कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप:

1. पेशियाँ अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration) करने लगती हैं, जिससे ग्लाइकोजन टूटकर 'लैक्टिक अम्ल' (Lactic Acid) में परिवर्तित हो जाता है।

2. पेशियों में लैक्टिक अम्ल का जमाव होने और ATP की कमी के कारण पेशियों में संकुचन की क्षमता घट जाती है तथा दर्द व ऐंठन महसूस होती है। इसे ही 'पेशीय थकावट' (Muscle Fatigue) कहते हैं।

प्रश्न 5(ख).

वृक्कों के चार विकारों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

1. युरेमिया (Uremia): रक्त में यूरिया तथा अन्य नाइट्रोजन युक्त अपशिष्टों की असामान्य वृद्धि।

2. रीनल कैलक्यूलाई (Renal Calculi): वृक्क में कैल्शियम ऑक्सालेट आदि लवणों के जमने से बनने वाली 'पथरी'।

3. ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis): वृक्क के ग्लोमेरुलस का संक्रमण या सूजन।

4. एनुरिया (Anuria): वृक्क द्वारा मूत्र निर्माण की प्रक्रिया का पूर्णतः बंद होना।

प्रश्न 5(ग).

“पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह है।” कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर:

.

पुष्प वास्तव में पौधों के प्ररोह (Shoot) का ही रूपांतरित रूप है, जिसके निम्नलिखित प्रमाण हैं:

1. पुष्प की उत्पत्ति तने की कायिक कलिका की भाँति पत्ती के कक्ष से होती है।

2. पुष्प का पुष्पासन (Thalamus) तने का ही संघनित रूप है, जिस पर पर्व (Internodes) तथा पर्वसंधियाँ होती हैं।

3. पुष्प के सभी चक्र (बाह्यदल, दल, पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर) पत्तियों के ही रूपांतरित रूप हैं।

प्रश्न 5(घ).

माइटोकाण्ड्रिया तथा हरित लवक में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria):

• यह कोशकीय श्वसन का स्थल है जहाँ ATP का निर्माण होता है (कोशिका का पावरहाउस)।

• यह पादप और जंतु दोनों कोशिकाओं में पाया जाता है।

• इसकी आंतरिक झिल्ली पर क्रिस्टी (Cristae) पाई जाती है।

2. हरित लवक (Chloroplast):

• यह प्रकाश-संश्लेषण का स्थल है जहाँ सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदला जाता है।

• यह केवल पादप कोशिकाओं और कुछ प्रोटिस्ट में पाया जाता है।

• इसमें थाइलेकॉइड, ग्रेना तथा स्ट्रोमा पाए जाते हैं।

6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)

प्रश्न 6(क).

श्वसन तथा श्वासोच्छवास क्रियाओं में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. श्वसन (Respiration):

• यह कोशिका के अंदर होने वाली जैव-रासायनिक (Biochemical) प्रक्रिया है।

• इसमें ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ऊर्जा (ATP) उत्पन्न होती है।

2. श्वासोच्छवास (Breathing):

• यह कोशिका के बाहर (श्वसन अंगों में) होने वाली भौतिक/यांत्रिक (Physical) प्रक्रिया है।

• इसमें केवल वातावरण से O₂ युक्त वायु ली जाती है और CO₂ बाहर छोड़ी जाती है; ऊर्जा मुक्त नहीं होती।

प्रश्न 6(ख).

पादप हार्मोन्स का महत्व लिखिए।

उत्तर:

.

1. वृद्धि नियंत्रण: ऑक्सिन तथा जिब्बे्रेलिन पौधों की लंबाई बढ़ाने तथा कोशिका विभाजन को प्रेरित करते हैं।

2. फलों को पकाना: एथिलीन हॉर्मोन प्राकृतिक व कृत्रिम रूप से फलों को शीघ्र पकाने में सहायक है।

3. खरपतवार नियंत्रण: synthetic ऑक्सिन (जैसे 2,4-D) का प्रयोग खरपतवार नष्ट करने में होता है।

4. अनिषेकफलन: बिना निषेचन के बीजहीन फल (जैसे- केला, अंगूर) उत्पन्न करने में।

प्रश्न 6(ग).

वर्णक तन्त्र I तथा वर्णक तन्त्र II में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

.

1. वर्णक तन्त्र I (Photosystem I / PS I):

• इसका अभिक्रिया केंद्र P₇₀₀ होता है।

• यह चक्रीय तथा अचक्रीय दोनों प्रकार के फोटोफॉस्फोरिलेशन में भाग लेता है।

• यह थाइलेकॉइड की बाहरी/अग्रैना सतह पर स्थित होता है।

2. वर्णक तन्त्र II (Photosystem II / PS II):

• इसका अभिक्रिया केंद्र P₆₈₀ होता है।

• यह केवल अचक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन में भाग लेता है।

• यह थाइलेकॉइड की आंतरिक झिल्ली पर स्थित होता है तथा इसमें जल का प्रकाशिक अपघटन (Photolysis of water) होता है।

प्रश्न 6(घ).

गॉल्जीकाय पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

गॉल्जीकाय (Golgi Apparatus):

1. यह एकल झिल्लीयुक्त चपटी थैलीनुमा संरचनाओं (Cisternae), पुटिकाओं तथा रिक्तिकाओं का बना कोशिकांग है। इसकी खोज कैमिलो गॉल्जी ने की थी।

2. कार्य: यह कोशिका द्वारा स्रावित पदार्थों की पैकेजिंग, रूपांतरण तथा परिवहन का मुख्य केंद्र है।

3. यह ग्लाइकोप्रोटीन एवं ग्लाइकोलिपिड का निर्माण करता है तथा शुक्रजनन के समय अक्रॉसॉम (Acrosome) बनाता है।

7. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 7.

मानव मस्तिष्क की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

मानव मस्तिष्क अत्यंत जटिल अंग है जो कपाल (Cranium) के अंदर सुरक्षित रहता है। इसके तीन मुख्य भाग हैं:

1. अग्र मस्तिष्क (Forebrain):

• सेरीब्रम (Cerebrum): यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह दो गोलार्द्धों में बँटा होता है और चेतना, सोच, बुद्धि तथा स्मृति को नियंत्रित करता है।

• थैलेमस व हाइपोथैलेमस: हाइपोथैलेमस शरीर के ताप, भूख, प्यास, तथा पीयूष ग्रंथि का नियंत्रण करता है।

2. मध्य मस्तिष्क (Midbrain):

• यह दृष्टि और श्रवण संवेदनाओं के केंद्र के रूप में कार्य करता है।

3. पश्च मस्तिष्क (Hindbrain):

• सेरीबेलम (Cerebellum): यह शरीर का संतुलन और पेशीय समन्वय बनाए रखता है।

• पॉन्स व मेडुला ऑब्लोंगेटा: मेडुला अनैच्छिक क्रियाओं जैसे हृदय स्पंदन, रक्तचाप, श्वसन दर तथा उल्टी आदि का नियंत्रण करता है।

[मानव मस्तिष्क की संरचना का आरेख: सेरीब्रम ➔ थैलेमस ➔ हाइपोथैलेमस ➔ मध्य मस्तिष्क ➔ पॉन्स ➔ सेरीबेलम ➔ मेडुला ऑब्लोंगेटा ➔ मेरुरज्जु]

अथवा

प्रश्न 7.

एन्जाइम क्या है ? एन्जाइम की संरचना एवं कार्यविधि का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

• एंजाइम (Enzymes): एंजाइम कोशिकाओं द्वारा उत्पादित उच्च अणुभार वाले जैविक उत्प्रेरक (Biocatalysts) हैं जो शरीर की जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं।

• संरचना:

एंजाइम मुख्यतः जटिल गोलिकाकार (Globular) प्रोटीन होते हैं। पूर्ण एंजाइम (Holozyme) = एपोएंजाइम (प्रोटीन भाग) + सह-कारक (Non-protein Co-factor)।

• कार्यविधि (Lock and Key Theory):

1. एंजाइम की सतह पर एक विशिष्ट सक्रिय स्थल (Active Site) होता है।

2. क्रियाधार (Substrate) इस सक्रिय स्थल से ठीक उसी प्रकार जुड़ता है जैसे ताले में चाबी बैठती है।

3. 'एंजाइम-क्रियाधार सम्मिश्र' (E-S Complex) बनता है।

4. अभिक्रिया के पश्चात् 'उत्पाद' (Product) बनता है और एंजाइम अपरिवर्तित होकर अलग हो जाता है।

[ E + S ➔ E-S Complex ➔ E + P ]

8. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 8.

मानव के उत्सर्जी तन्त्र का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

मानव उत्सर्जी तंत्र में निम्नलिखित मुख्य अंग शामिल हैं:

1. एक जोड़ी वृक्क (Kidneys): ये सेम के बीज के आकार के, गहरे लाल-भूरे रंग के अंग हैं। इनका मुख्य कार्य रक्त को छानकर मूत्र का निर्माण करना है। प्रत्येक वृक्क में लगभग 10-12 लाख सूक्ष्म नलिकाएँ होती हैं जिन्हें 'नेफ्रॉन' (Nephron) कहते हैं।

2. एक जोड़ी मूत्रवाहिनियाँ (Ureters): ये वृक्क के हाइलम से निकलकर मूत्र को मूत्राशय तक ले जाती हैं।

3. मूत्राशय (Urinary Bladder): यह एक पेशीय थैली है जहाँ मूत्र अस्थायी रूप से संचित रहता है।

4. मूत्रमार्ग (Urethra): इसके द्वारा मूत्र समय-समय पर शरीर से बाहर निकाला जाता है।

[उत्सर्जी तंत्र आरेख: दायाँ/बायाँ वृक्क ➔ वृक्क धमनी/शिरा ➔ मूत्रवाहिनी ➔ मूत्राशय ➔ मूत्रमार्ग]

अथवा

प्रश्न 8.

शैवाल तथा जिम्नोस्पर्म के आर्थिक महत्व पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

.

1. शैवाल (Algae) का आर्थिक महत्व:

• भोजन के रूप में: पोर्फायरा, लैमिनेरिया आदि शैवाल भोजन के रूप में खाए जाते हैं।

• व्यावसायिक उत्पाद: लाल शैवाल से 'अगर-अगर' (Agar-agar) प्राप्त होता है जिसका उपयोग संवर्धन माध्यम में होता है।

• प्रकाश-संश्लेषण: पृथ्वी पर कुल CO₂ स्थिरीकरण का लगभग आधा भाग शैवाल द्वारा होता है।

2. जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) का आर्थिक महत्व:

• काष्ठ (Wood): पाइनस और सिड्रस की लकड़ी से इमारती लकड़ी, फर्नीचर और दियासलाई बनाई जाती है।

• औषधियाँ: एफेड्रा (Ephedra) से 'एफेड्रिन' नामक औषधि मिलती है जो दमा रोग में प्रयुक्त होती है।

• रेज़िन व तारपीन: पाइनस के पौधे से तारपीन का तेल और रेज़िन प्राप्त होता है।

• भोजन: चिलगोजा (Pinus gerardiana का बीज) खाया जाता है।

9. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

प्रश्न 9.

तंत्रिका ऊतक की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

• तंत्रिका ऊतक की संरचना:

तंत्रिका ऊतक की मूलभूत कार्यात्मक इकाई 'न्यूरॉन' (Neuron) है। न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं:

1. कोशिकाकाय (Cyton / Cell Body): इसमें स्पष्ट केंद्रक, कोशिकाद्रव्य तथा निसिल के कण पाए जाते हैं।

2. द्रुमाश्य (Dendrites): ये छोटे, शाखित प्रवर्ध हैं जो संवेदनाओं को ग्रहण करके साइटॉन की ओर लाते हैं।

3. तंत्रिकाक्ष (Axon): यह एक लंबा बेलनाकार प्रवर्ध है जो आवेगों को साइटॉन से दूर ले जाता है। इसके ऊपर माइलिन आच्छद पाया जाता है।

• तंत्रिका ऊतक के कार्य:

1. शरीर के संवेदी अंगों से संवेदनाओं को ग्रहण कर मस्तिष्क व मेरुरज्जु तक पहुँचाना।

2. मस्तिष्क के निर्देशों को कार्यकारी अंगों (पेशियों व ग्रंथियों) तक पहुँचाना।

3. शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों में समन्वय व नियंत्रण स्थापित करना।

अथवा

प्रश्न 9.

श्वास क्रिया तथा फेफड़ों में गैसीय विनिमय का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर:

.

1. श्वास क्रिया (Breathing Mechanism):

• अन्तःश्वसन (Inspiration): मध्यपट (Diaphragm) समतल होता है तथा बाह्य इंटरकोस्टल पेशियाँ पसलियों को ऊपर व बाहर खींचती हैं। वक्ष गुहा का आयतन बढ़ने से फेफड़ों में वायुदाब कम होता है और बाहर से O₂ युक्त वायु फेफड़ों में भर जाती है।

• निःश्वसन (Expiration): मध्यपट पुनः गुंबदाकार हो जाता है और पसलियाँ अपनी सामान्य स्थिति में आ जाती हैं। वक्ष गुहा का आयतन घटने से CO₂ युक्त वायु फेफड़ों से बाहर निकल जाती है।

2. फेफड़ों में गैसीय विनिमय (Gas Exchange in Lungs):

• गैसीय विनिमय फेफड़ों की 'कूपिकाओं' (Alveoli) तथा उनके चारों ओर स्थित रक्त केशिकाओं के बीच केवल 'साधारण विसरण' (Simple Diffusion) द्वारा होता है।

• कूपिका में O₂ का आंशिक दाब (pO₂ = 104 mmHg) अधिक होता है, जबकि अशुद्ध रक्त में pO₂ कम (40 mmHg) होता है। अतः O₂ कूपिका से रक्त में विसरित हो जाती है।

• अशुद्ध रक्त में CO₂ का आंशिक दाब (pCO₂ = 45 mmHg) कूपिका की तुलना में (40 mmHg) अधिक होता है, अतः CO₂ रक्त से निकलकर कूपिका में चली जाती है।