1. (बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2023 A Code
कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2023 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
जाति शब्द दिया था-
(i) जॉन हचिन्सन ने
(ii) जॉन रे ने
(iii) लीनियस ने
(iv) चार्ल्स डार्विन ने
उत्तर:
. (ii) जॉन रे ने
प्रश्न 1(ख).
टोनोप्लास्ट है-
(i) माइटोकॉण्ड्रिया की बाह्य कला
(ii) क्लोरोप्लास्ट की आन्तरिक कला
(iii) पादप कोशिकाओं की रसधानी की कला
(iv) पादप कोशिका की कला
उत्तर:
. (iii) पादप कोशिकाओं की रसधानी की कला
प्रश्न 1(ग).
कोशिका विभाजन के समय DNA का स्वद्विगुणन होता है-
(i) G₁ प्रावस्था में
(ii) G₂ प्रावस्था में
(iii) S-प्रावस्था में
(iv) M-प्रावस्था में
उत्तर:
. (iii) S-प्रावस्था में
प्रश्न 1(घ).
जब मूत्र के साथ रुधिर निकलता है तो इस मूत्र रोग को कहते हैं ?
(i) कीटोनूरिया
(ii) हीमाट्यूरिया
(iii) पाडूरिया
(iv) ग्लाइकोसूरिया
उत्तर:
. (ii) हीमाट्यूरिया
2. (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
कैरियोटैक्सोनॉमी से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
.
वर्गीकरण की वह शाखा जिसमें जीवों का वर्गीकरण उनकी कोशिकाओं में उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या, आकार, संरचना एवं व्यवहार (कोशिका आनुवंशिकी) के आधार पर किया जाता है, उसे कैरियोटैक्सोनॉमी (Karyotaxonomy) कहते हैं।
प्रश्न 2(ख).
ज्वाला कोशिकाएँ किस संघ के सदस्यों में पायी जाती हैं।
उत्तर:
.
ज्वाला कोशिकाएँ (Flame cells / Protonephridia) संघ प्लैटीहेल्मिंथीज (Platyhelminthes - जैसे फीताकृमि, प्लेनेरिया) के सदस्यों में पाई जाती हैं।
प्रश्न 2(ग).
कोशिका में पाए जाने वाले दो अर्धस्वायत्त कोशिकांगों के नाम लिखिए।
उत्तर:
.
1. माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria)
2. हरितलवक (Chloroplast)
प्रश्न 2(घ).
ADH की कमी का उत्सर्जन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
.
ADH (ऐंटीडाययूरेटिक हॉर्मोन) की कमी से वृक्क नलिकाओं में जल का पुनरावशोषण कम हो जाता है, जिससे मूत्र की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है (तनु मूत्र)। इस स्थिति को 'डायबिटीज इंसिपिडस' (Diabetes Insipidus) कहते हैं।
प्रश्न 2(ङ).
प्रोजेस्टेरोन के अल्प स्रावण से क्या होता है ?
उत्तर:
.
प्रोजेस्टेरोन के अल्प स्रावण से गर्भाशय की अंतःस्तर (Endometrium) का विकास सही से नहीं हो पाता, जिससे भ्रूण का रोपण (Implantation) असफल हो जाता है और बांझपन या अकाल गर्भपात (Miscarriage) की समस्या होती है।
3. (लघु उत्तरीय प्रश्न-I)
प्रश्न 3(क).
मानव मस्तिष्क के सेरीब्रिम के कार्य लिखिए।
उत्तर:
.
1. यह बुद्धि, तर्कशक्ति, सोच, स्मृति और चेतना का केंद्र है।
2. यह ऐच्छिक पेशीय गतियों तथा ज्ञानेंद्रियों (दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, गंध आदि) से प्राप्त सूचनाओं का नियंत्रण एवं विश्लेषण करता है।
प्रश्न 3(ख).
कार्डियक चक्र को एक वाक्य में परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
.
हृदय के एक स्पंदन (Heartbeat) के प्रारंभ से लेकर अगले स्पंदन के प्रारंभ होने तक हृदय के अलिंदों तथा निलयों में होने वाले क्रमिक प्रकुंचन (Systole) एवं शिथिलन (Diastole) के पूर्ण चक्र को कार्डियक चक्र (हृदय चक्र) कहते हैं।
प्रश्न 3(ग).
पाश्चर प्रभाव किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
ऑक्सीजन की उपस्थिति (अवायवीय से वायवीय अवस्था में स्थानांतरण) के कारण किण्वन (Fermentation) या अवायवीय श्वसन की दर में आने वाली कमी और शर्करा की खपत के घटने की परिघटना को पाश्चर प्रभाव (Pasteur Effect) कहते हैं।
प्रश्न 3(घ).
कोशिका विभाजन को उद्दीपित करने वाले हॉर्मोन्स के नाम लिखिए।
उत्तर:
.
1. साइटोकाइनिन (Cytokinin)
2. ऑक्सिन (Auxin)
प्रश्न 3(ङ).
साइकस के बीजाण्ड की लम्ब काट की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
.
[साइकस बीजाण्ड की लम्बकाट (L.S. of Cycas Ovule) का रेखाचित्र]
(बाह्य मांसल स्तर / Outer Fleshy Layer)
│
(मध्य काष्ठीय स्तर / Middle Stony Layer)
│
(आंतरिक मांसल स्तर / Inner Fleshy Layer)
│
[ बीजाण्ड द्वार / Micropyle ]
│
[ पराग कक्ष / Pollen Chamber ]
│
[ स्त्रीधानी / Archegonium ]
│
[ मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणपोष) / Female Gametophyte ]
│
[ बीजाण्डकाय / Nucellus ]
│
[ निभाग / Chalaza ]
संरचना: यह एक त्रिस्तरीय अध्यावरण (Integument) से घिरा हुआ ऋजु (Orthotropous) बीजाण्ड होता है।
4. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 4(क).
वाइरस तथा जीवाणु में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. वाइरस (Virus):
• ये अकोशिकीय (Acellular) तथा अतिसूक्ष्मजीव हैं जो केवल जीवित पोषद् कोशिका के अंदर सक्रिय होते हैं।
• इनमें केवल एक ही प्रकार का न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) पाया जाता है।
• इन पर एंटीबायोटिक्स का प्रभाव नहीं पड़ता।
2. जीवाणु (Bacteria):
• ये प्रोकैरियोटिक कोशिकीय (Unicellular) जीव हैं जो स्वतंत्र रूप से जीवित रह सकते हैं।
• इनमें DNA और RNA दोनों प्रकार के न्यूक्लिक अम्ल पाए जाते हैं।
• इन्हें एंटीबायोटिक्स द्वारा नष्ट किया जा सकता है।
प्रश्न 4(ख).
प्रोटोनीमा पर सचित्र टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
प्रोटोनीमा (Protonema) मॉस (जैसे- फ्यूनेरिया) के जीवन-चक्र में अगुणित बीजाणु (Spore) के अंकुरण से बनने वाली प्रथम अवस्था है।
• यह एक हरी, शाखित, तंतुरूप (Filamentous) तथा स्वपोषी संरचना होती है।
• इस पर पार्श्व कलिकाएँ (Lateral buds) विकसित होती हैं, जो आगे चलकर मुख्य पर्णिल पादप (Gametophore) का निर्माण करती हैं।
[बीजाणु (n)] ──► [तंतुरूप प्रोटोनीमा] ──► [कलिका] ──► [मॉस का पौधा]
प्रश्न 4(ग).
स्तनी और सरीसृप में मुख्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
.
1. स्तनी (Mammals):
• ये समतापी (Warm-blooded / Homeothermic) प्राणी हैं।
• त्वचा पर बाल तथा दुग्ध ग्रंथियाँ (Mammary glands) पाई जाती हैं।
• हृदय 4-कोष्ठीय होता है तथा ये बच्चों को जन्म देते हैं (जरायुज)।
2. सरीसृप (Reptiles):
• ये असमतापी (Cold-blooded / Poikilothermic) प्राणी हैं।
• त्वचा पर शल्क (Scales) पाए जाते हैं तथा दुग्ध ग्रंथियाँ अनुपस्थित होती हैं।
• हृदय सामान्यतः 3-कोष्ठीय होता है (मगरमच्छ में 4-कोष्ठीय) तथा ये अंडे देते हैं (अंडज)।
प्रश्न 4(घ).
असीमाक्षी तथा ससीमाक्षी पुष्पक्रम में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. असीमाक्षी पुष्पक्रम (Racemose):
• मुख्य अक्ष की असीमित वृद्धि होती है क्योंकि शीर्ष पर पुष्प नहीं बनता।
• पुष्प अग्राभिसारी (Acropetal) क्रम में (पुराने नीचे, नए ऊपर) लगे रहते हैं।
2. ससीमाक्षी पुष्पक्रम (Cymose):
• मुख्य अक्ष की वृद्धि सीमित होती है क्योंकि शीर्ष पर पुष्प बन जाता है।
• पुष्प तलाभिसारी (Basipetal) क्रम में (पुराने शीर्ष पर, नए नीचे) लगे रहते हैं।
5. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 5(क).
पादप कोशिका व जन्तु कोशिका में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. पादप कोशिका (Plant Cell):
• कोशिका भित्ति (Cellulose) उपस्थित होती है।
• लवक (Plastids) पाए जाते हैं।
• बड़ी केंद्रीय रसधानी (Vacuole) उपस्थित होती है।
• तारककाय (Centrosome) सामान्यतः अनुपस्थित होता है।
2. जन्तु कोशिका (Animal Cell):
• कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।
• लवक अनुपस्थित होते हैं।
• रसधानियाँ बहुत छोटी या अनुपस्थित होती हैं।
• तारककाय (Centrosome) उपस्थित होता है।
प्रश्न 5(ख).
RNA के प्रकार तथा उनके कार्य लिखिए।
उत्तर:
.
1. संदेशवाहक RNA (m-RNA): DNA से आनुवंशिक संदेशों को प्रोटीन संश्लेषण हेतु राइबोसोम तक ले जाता है।
2. स्थानान्तरण RNA (t-RNA): प्रोटीन संश्लेषण के समय विशिष्ट अमीनो अम्लों को कोशिकाद्रव्य से राइबोसोम तक लाता है।
3. राइबोसोमल RNA (r-RNA): राइबोसोम का निर्माण करता है तथा प्रोटीन संश्लेषण हेतु ढाँचा और उत्प्रेरक स्थल प्रदान करता है।
प्रश्न 5(ग).
हॉर्मोन्स तथा एन्जाइम्स में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. हॉर्मोन्स (Hormones):
• ये अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित जैव-रासायनिक संदेशवाहक हैं।
• ये प्रायः प्रोटीन, स्टेरॉयड या अमीनो अम्ल के व्युत्पन्न होते हैं।
• ये क्रिया में प्रयुक्त हो जाते हैं (नष्ट हो जाते हैं)।
2. एन्जाइम्स (Enzymes):
• ये बहिःस्रावी ग्रंथियों या कोशिकाओं द्वारा स्रावित जैव-उत्प्रेरक हैं।
• ये मुख्यतः प्रोटीन प्रकृति के होते हैं।
• ये अभिक्रिया के अंत में अपरिवर्तित रहते हैं (पुनः उपयोग योग्य)।
प्रश्न 5(घ).
न्यूरॉन की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
.
[तंत्रिका कोशिका / न्यूरॉन (Neuron) का आरेख]
(द्रुमाश्य / Dendrites)
\
[ कोशिकाकाय / Cyton ] ── (केंद्रक / Nucleus)
/
(तंत्रिकाक्ष / Axon)
│
[ माइलिन आच्छद / Myelin Sheath ]
│
[ रनवीर के नोड / Node of Ranvier ]
│
(तंत्रिका अंत / Axon Terminal)
वर्णन: न्यूरॉन के तीन मुख्य भाग होते हैं— सायटॉन (Cell body), डेंड्राइट्स (संवेदना ग्रहण करने वाले) तथा एक्सॉन (संवेदना आगे भेजने वाला)।
6. (लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 6(क).
ल्यूकीमिया रोग में क्या होता है ?
उत्तर:
.
ल्यूकीमिया (Leukemia) को 'रक्त कैंसर' (Blood Cancer) भी कहते हैं। इसमें अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में असंतुलित कोशिका विभाजन के कारण श्वेत रक्त कणिकाओं (WBCs) की संख्या असामान्य और अत्यधिक रूप से बढ़ जाती है। ये अपरिपक्व WBCs स्वस्थ लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) और प्लेटलेट्स को नष्ट करने लगती हैं, जिससे गंभीर एनिमिया और प्रतिरक्षा तंत्र की विफलता होती है।
प्रश्न 6(ख).
हृदय आघात पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
हृदय आघात (Heart Attack / Myocardial Infarction): जब हृदय की पेशियों को रक्त पहुँचाने वाली कोरोनरी धमनी में थक्का (Clot) बनने या रुकावट आने के कारण हृदय पेशियों तक पर्याप्त O₂ और पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते, तो हृदय की पेशियाँ अचानक क्षतिग्रस्त या मृत होने लगती हैं। इसे हृदय आघात कहते हैं। इसके लक्षणों में छाती में तीव्र दर्द, सांस फूलना और पसीना आना शामिल है।
प्रश्न 6(ग).
C₃ तथा CAM पौधों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. C₃ पौधे:
• इनके रंध्र केवल दिन में खुलते हैं और रात में बंद रहते हैं।
• इनमें CO₂ स्थिरीकरण का प्रथम स्थाई उत्पाद 3-फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-PGA) होता है।
• इनमें प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) होता है (जैसे- गेहूं, चावल)।
2. CAM पौधे:
• इनके रंध्र रात में खुलते हैं और दिन में जल हानि रोकने हेतु बंद रहते हैं।
• इनमें रात्रि में CO₂ मैलिक अम्ल के रूप में संचित होता है।
• इनमें प्रकाश-श्वसन नगण्य होता है (जैसे- नागफनी, अनानास)।
प्रश्न 6(घ).
मानव जीवन में पादप हॉर्मोन की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
.
1. कृषि में उपयोग: ऑक्सिन और 2,4-D का उपयोग खरपतवार नाशक के रूप में किया जाता है।
2. फलों को पकाना: एथिलीन (Ethylene) हॉर्मोन का प्रयोग कृत्रिम रूप से फलों को शीघ्र पकाने में किया जाता है।
3. बीजहीन फल उत्पादन: जिब्बे्रलिन और ऑक्सिन द्वारा अनिषेकफलन (Parthenocarpy) से बीजहीन फल (जैसे अंगूर, केला) प्राप्त किए जाते हैं।
4. कायिक प्रवर्धन: ऑक्सिन का उपयोग कलमों में जड़ें निकलने को प्रेरित करने के लिए किया जाता है।
7. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 7.
जीवन के तीन डोमेन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
कार्ल वोज़ (Carl Woese) द्वारा 1990 में 16S r-RNA अनुक्रम के आधार पर जीवन को तीन मुख्य डोमेन (Three Domains of Life) में वर्गीकृत किया गया:
1. डोमेन आर्किआ (Domain Archaea):
• इसमें अति-प्राचीन प्रोकैरियोटिक जीव शामिल हैं जो अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों (उच्च ताप, अत्यधिक लवणता) में जीवित रह सकते हैं।
• इनकी कोशिका भित्ति में पेप्टाइडोग्लाइकेन नहीं होता।
• उदाहरण: मेथेनोजेन्स, हेलोफिल्स, थर्मोएसिडोफिल्स।
2. डोमेन बैक्टीरिया (Domain Bacteria):
• इसमें वास्तविक प्रोकैरियोटिक जीवाणु शामिल हैं।
• इनकी कोशिका भित्ति में पेप्टाइडोग्लाइकेन पाया जाता है।
• उदाहरण: ई-कोलाई, साइनोबैक्टीरिया, राइजोबियम।
3. डोमेन यूकेरिया (Domain Eukarya):
• इसमें वे सभी जीव शामिल हैं जिनकी कोशिकाओं में सुविकसित केंद्रक तथा झिल्लीयुक्त कोशिकांग पाए जाते हैं।
• इसे चार जगतों में बाँटा गया है: प्रोटिस्टा, कवक (Fungi), पादप (Plantae) तथा जंतु (Animalia)।
अथवा
प्रश्न 7.
हॉर्मोन्स की क्रिया विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
हॉर्मोन लक्षित कोशिकाओं की सतह या अंदर उपस्थित विशिष्ट 'हॉर्मोन ग्राहियों' (Receptors) से जुड़कर कार्य करते हैं। इनकी क्रिया विधि दो मुख्य प्रकार की होती है:
1. झिल्ली-बद्ध ग्राहियों द्वारा (जल-विलेय हॉर्मोन):
• प्रोटीन तथा पेप्टाइड हॉर्मोन (उदा. इंसुलिन, एड्रिनेलिन) कोशिका झिल्ली को पार नहीं कर पाते।
• ये कोशिका झिल्ली पर स्थित बाह्य ग्राही से जुड़कर 'हॉर्मोन-ग्राही सम्मिश्र' बनाते हैं।
• इससे द्वितीयक संदेशवाहक (Secondary messengers - जैसे cAMP, Ca²⁺) उत्पन्न होते हैं, जो कोशिका के अंदर उपापचयी क्रियाओं को प्रेरित करते हैं।
2. अंतःकोशिकीय ग्राहियों द्वारा (वसा-विलेय हॉर्मोन):
• स्टेरॉयड हॉर्मोन (उदा. एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन) कोशिका झिल्ली को पार करके कोशिकाद्रव्य या केंद्रक में प्रवेश कर जाते हैं।
• ये केंद्रक में स्थित ग्राही से जुड़कर जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) और प्रोटीन संश्लेषण को सीधे नियंत्रित करते हैं।
8. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 8.
रेखाचित्र की सहायता से विभिन्न सरल उपकला ऊतकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
सरल उपकला ऊतक (Simple Epithelium) कोशिकाओं की एक परत से बना होता है। यह निम्न प्रकार का होता है:
1. शल्की उपकला (Squamous Epithelium):
• चपटी, टाइल जैसी कोशिकाएं।
• कार्य: विसरण एवं छानना (रक्त वाहिनियों, फेफड़ों की कूपिकाओं में)।
2. घनाकार उपकला (Cuboidal Epithelium):
• घन के आकार की कोशिकाएं।
• कार्य: स्रावण एवं अवशोषण (वृक्क नलिकाओं, ग्रंथियों में)।
3. स्तम्भाकार उपकला (Columnar Epithelium):
• लंबी, खंभे जैसी कोशिकाएं (केंद्रक आधार में)।
• कार्य: अवशोषण एवं स्रावण (आहारनाल की भित्ति में)।
4. पक्ष्माभी उपकला (Ciliated Epithelium):
• घनाकार या स्तम्भाकार कोशिकाओं पर पक्ष्माभ (Cilia) पाए जाते हैं।
• कार्य: कणों या श्लेष्मा को एक दिशा में धकेलना (श्वासनाल, अंडवाहिनी में)।
[सरल उपकला ऊतकों के रेखाचित्र]
[शल्की] [घनाकार] [स्तम्भाकार] [पक्ष्माभी]
┌───────┐ ┌───┬───┐ ┌──┬──┬──┐ ┌──┬──┬──┐ (Cilia)
└───────┘ └───┴───┘ │ │ │ │ │ │ │ │
(चपटी) (घन रूप) └──┴──┴──┘ └──┴──┴──┘
(स्तंभ रूप) (पक्ष्माभ युक्त)
अथवा
प्रश्न 8.
तन्त्रिका में तन्त्रिका आवेग की उत्पत्ति तथा इसके संचरण की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
तंत्रिका आवेग का संचरण वैद्युत-रासायनिक (Electrochemical) प्रक्रिया द्वारा तीन चरणों में होता है:
1. विश्राम कला (Resting Potential / ध्रुवण):
• विश्राम अवस्था में एक्सॉन झिल्ली की बाहरी सतह पर धनावेश (Na⁺ की अधिकता) तथा आंतरिक सतह पर ऋणावेश (K⁺ तथा ऋणावेशित प्रोटीन की अधिकता) होता है।
• Na⁺-K⁺ पम्प (3 Na⁺ बाहर, 2 K⁺ अंदर) द्वारा यह विश्राम विभव (-70 mV) बना रहता है।
2. आवेग की उत्पत्ति (Depolarization / विध्रुवण):
• उद्दीपन मिलने पर Na⁺ चैनल खुल जाते हैं और Na⁺ तेज़ी से अंदर आते हैं।
• इससे आंतरिक सतह धनावेशित हो जाती है और कार्य विभव (Action Potential / +30 mV) उत्पन्न होता है।
3. पुनःध्रुवण (Repolarization):
• K⁺ चैनल खुलते हैं और K⁺ बाहर निकलने लगते हैं, जिससे पुन: विश्राम अवस्था लौट आती है।
4. सिनेप्स पर संचरण:
• आवेग जब तंत्रिकाक्ष के छोर पर पहुँचता है, तो न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे- एसिटाइलकोलीन) मुक्त होकर सिनेप्टिक दरार द्वारा अगले न्यूरॉन को उद्दीपित करता है।
9. (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 9.
निम्न पर टिप्पणी लिखिए-
(i) राइबोसोम
(ii) लाइसोसोम
उत्तर:
.
(i) राइबोसोम (Ribosome):
• यह झिल्लीरहित, सूक्ष्म कोशिकांग है जो रैनार्ड और पैलाडे द्वारा खोजा गया था।
• यह r-RNA और प्रोटीनों से मिलकर बना होता है।
• इसे 'कोशिका की प्रोटीन फैक्टरी' कहते हैं क्योंकि यह प्रोटीन संश्लेषण का मुख्य स्थल है।
• प्रोकैरियोट्स में 70S तथा यूकैरियोट्स में 80S राइबोसोम पाए जाते हैं।
(ii) लाइसोसोम (Lysosome):
• यह एकल झिल्ली से घिरा गोल कोशिकांग है जिसकी खोज डी-डुवे ने की थी।
• इसमें तीव्र पाचक हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे- प्रोटीऐज, लाइपेज) पाए जाते हैं।
• यह कोशिकीय अपशिष्टों और बाह्य पदार्थों का पाचन करता है।
• कोशिका के क्षतिग्रस्त होने पर यह स्वयं की कोशिका का पाचन कर लेता है, इसलिए इसे 'आत्मघाती थैली' (Suicide Bag) कहते हैं।
अथवा
प्रश्न 9.
रक्त के कणीय अवयवों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
रक्त के कणीय अवयव (Formed Elements) कुल रक्त आयतन का लगभग 45% भाग बनाते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं:
1. लाल रक्त कणिकाएँ (RBCs / एरिथ्रोसाइट्स):
• ये संख्या में सर्वाधिक (4.5 - 5.5 मिलियन/mm³) तथा केंद्रकरहित (स्तनियों में) द्वियावतल (Biconcave) होती हैं।
• इनमें 'हीमोग्लोबिन' श्वसन वर्णक पाया जाता है जो O₂ और CO₂ का परिवहन करता है। इनका जीवनकाल 120 दिन होता है।
2. श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBCs / ल्यूकोसाइट्स):
• ये केंद्रकयुक्त तथा रंगहीन होती हैं (संख्या: 6000-8000/mm³)।
• ये शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र का निर्माण करती हैं।
• प्रकार:
- कणिकामय (Granulocytes): न्यूट्रोफिल, ईओसिनोफिल, बेसोफिल।
- अकणिकामय (Agranulocytes): लिम्फोसाइट (एंटीबॉडीज निर्माण) तथा मोनोसाइट।
3. प्लेटलेट्स (Thrombocytes):
• ये अस्थि मज्जा की मेगाकैरियोसाइट कोशिकाओं के टुकड़े होते हैं।
• ये थ्रोम्बोप्लास्टिन मुक्त करके 'रक्त का थक्का जमाने' (Blood Clotting) में मुख्य भूमिका निभाते हैं।