(बहुविकल्पीय प्रश्न)
Solution
UP Board Class 11th Chemistry Annual Paper 2022 A Code
कक्षा 11वीं · जीव विज्ञान · 2022 · बोर्ड परीक्षा
प्रश्न 1(क).
कवकांश तथा शैवालांश किसमें पाए जाते हैं ?
(a) माइकोराइजा में
(b) लाइकेन में
(c) वाइरॉइड में
(d) मोनेरा में
उत्तर:
. (b) लाइकेन में
प्रश्न 1(ख).
जीन की व्यवस्था में परिवर्तन कहलाता है-
(a) सामान्य उत्परिवर्तन
(b) बिन्दु उत्परिवर्तन
(c) गुणसूत्र उत्परिवर्तन
(d) जीनोम उत्परिवर्तन
उत्तर:
. (c) गुणसूत्र उत्परिवर्तन
प्रश्न 1(ग).
प्रकाशीय श्वसन होता है-
(a) माइटोकॉण्ड्रिया में
(b) हरित लवक में
(c) परऑक्सीसोम में
(d) इन सभी में
उत्तर:
. (d) इन सभी में
प्रश्न 1(घ).
सामान्य डायस्टोल रक्तदाब होता है-
(a) 40 mm Hg
(b) 70 mm Hg
(c) 80 mm Hg
(d) 120 mm Hg
उत्तर:
. (c) 80 mm Hg
(अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 2(क).
माइकोप्लाज्मा से उत्पन्न दो पादप रोगों के नाम बताइए।
उत्तर:
.
1. बैंगन का लघुपत्र रोग (Little leaf of brinjal)
2. तिल का फिलोडी रोग (Phyllody of sesame)
प्रश्न 2(ख).
पत्र प्रकलिका किसे कहते हैं ?
उत्तर:
.
यह एक रूपांतरित कलिका (Bud) होती है जो भोजन संग्रह करके फूली हुई तथा मांसल हो जाती है और कायिक जनन (Vegetative propagation) में सहायता करती है। (जैसे— अगेव/Agave में)।
प्रश्न 2(ग).
टमाटर पकने पर लाल क्यों हो जाता है ?
उत्तर:
.
टमाटर के पकने पर उसमें उपस्थित हरितलवक (Chloroplasts) वर्णीलवक (Chromoplasts) में परिवर्तित हो जाते हैं तथा इनमें 'लाइकोपीन' (Lycopene) वर्णक का निर्माण होता है।
प्रश्न 2(घ).
C₄ पौधों के दो महत्व लिखिए।
उत्तर:
.
1. C₄ पौधे उच्च ताप तथा तीव्र प्रकाश तीव्रता में भी उच्च दर से प्रकाश-संश्लेषण करने में सक्षम होते हैं।
2. इनमें प्रकाश-श्वसन (Photorespiration) नगण्य होता है, जिससे ऊर्जा की हानि नहीं होती और उत्पादकता अधिक होती है।
प्रश्न 2(ङ).
सरीसृपों के वृक्कों का उत्सर्जी उत्पाद क्या होता है ?
उत्तर:
.
सरीसृपों (Reptiles) के वृक्कों का मुख्य उत्सर्जी उत्पाद 'यूरिक अम्ल' (Uric Acid) होता है। (ये यूरिकोटेलिक जीव होते हैं।)
(लघु उत्तरीय प्रश्न-I)
प्रश्न 3(क).
साइकस के बीजाण्ड की लम्बकाट की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
.
[साइकस बीजाण्ड (L.S. of Cycas Ovule) का नामांकित आरेख]
(बाह्य आवरण - मांसल परत / Outer Fleshy Layer)
(मध्य आवरण - काष्ठीय परत / Middle Stony Layer)
(आंतरिक आवरण - मांसल परत / Inner Fleshy Layer)
[ द्वार / Micropyle ]
[ पराग कक्ष / Pollen Chamber ]
[ स्त्रीधानी कक्ष / Archegonial Chamber ]
[ स्त्रीधानी / Archegonium ]
[ मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणपोष) / Female Gametophyte (Endosperm) ]
[ बीजांडकाय / Nucellus ]
[ निभाग / Chalaza ]
चित्र वर्णन: साइकस का बीजाण्ड ऋजु (Orthotropous) तथा एकआवरणी (Unitegmic) होता है, जिसमें बीजाण्डकाय (Nucellus) तीन परतों वाले अध्यावरण से घिरा होता है।
प्रश्न 3(ख).
कूटचक्रक और सायथियम पुष्पक्रम में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. कूटचक्रक (Verticillaster):
• यह तुलसी (Lamiaceae कुल) में पाया जाता है।
• यह एक ससीम्राक्ष (Cymose) पुष्पक्रम का रूपांतरण है, जिसमें पत्ती के कक्ष में पुष्प चक्र के रूप में स्थित होते हैं।
2. सायथियम (Cyathium):
• यह यूफोर्बिया (Euphorbiaceae कुल) में पाया जाता है।
• इसमें एक प्यालेनुमा सहपत्र चक्र होता है जिसमें केवल एक केंद्रीय मादा पुष्प और कई नर पुष्प होते हैं।
प्रश्न 3(ग).
सिस्टोलिथ पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
सिस्टोलिथ (Cystolith) कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) के क्रिस्टलों का एक गुच्छा (अंगूर के गुच्छे जैसा) होता है, जो पादपों की विशेष कोशिकाओं जिन्हें 'लिथोसिस' (Lithocysts) कहते हैं, में पाया जाता है। यह मुख्य रूप से एकांथेसी और यूर्टिकेसी कुल के पौधों की पत्तियों की त्वचा (Epidermis) में पाया जाता है।
प्रश्न 3(घ).
श्वसन तथा श्वासोच्छवास क्रियाओं में अन्तर बताइए।
उत्तर:
.
1. श्वसन (Respiration):
• यह एक जैव-रासायनिक (Biochemical) प्रक्रिया है जिसमें ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होकर ऊर्जा (ATP) मुक्त होती है।
• यह कोशिका के अंदर (माइटोकॉण्ड्रिया/कोशिकाद्रव्य) होती है।
2. श्वासोच्छवास (Breathing):
• यह एक भौतिक/यांत्रिक (Physical) प्रक्रिया है जिसमें O₂ युक्त वायु अंदर ली जाती है और CO₂ बाहर निकाली जाती है।
• यह कोशिका के बाहर (श्वसन अंगों में) होती है तथा इसमें ऊर्जा मुक्त नहीं होती।
प्रश्न 3(ङ).
कोशिका विभाजन का नियन्त्रण कौन करता है ?
उत्तर:
.
कोशिका विभाजन का नियंत्रण विशेष प्रोटीन सम्मिश्रों द्वारा किया जाता है, जिनमें मुख्य हैं:
1. साइक्लिन (Cyclins) तथा साइक्लिन-निर्भर काइनेज (Cyclin-dependent kinases - CdKs)।
2. पादप हॉर्मोन (जैसे साइटोकाइनिन और ऑक्सिन) एवं कोशिका चक्र नियंत्रण बिंदु (Checkpoints - G₁, G₂, M)।
(लघु उत्तरीय प्रश्न-II)
प्रश्न 4(क).
मोलस्का संघ की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
.
मोलस्का (Mollusca) संघ की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. ये जीव कोमल शरीर वाले, अद्वैत पार्श्वीय सममित (Bilaterally symmetrical) तथा त्रिस्तरीय (Triploblastic) होते हैं।
2. इनका शरीर प्रायः तीन भागों में विभाजित होता है: सिर (Head), पेशीय पाद (Foot) और ककुद (Visceral hump)।
3. शरीर पर कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) का बना कठोर कवच पाया जाता है।
4. श्वसन के लिए इनमें क्लोम/गिल्स (Ctenidia) पाए जाते हैं।
उदाहरण: पाइला (घोंघा / Pila), यूनियो (Unio), ऑक्टोपस (Octopus)।
प्रश्न 4(ख).
माइटोकॉण्ड्रिया तथा हरित लवक में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. माइटोकॉण्ड्रिया (Mitochondria):
• यह श्वसन अंगक है जहाँ क्रेब्स चक्र और ATP का निर्माण (कोशकीय श्वसन) होता है।
• यह सभी सजीव पादप एवं जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है।
• इसकी आंतरिक झिल्ली में क्रिस्टी (Cristae) पाई जाती है।
2. हरित लवक (Chloroplast):
• यह प्रकाश-संश्लेषण अंगक है जहाँ सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदला जाता है।
• यह केवल पादप कोशिकाओं तथा कुछ प्रोटिस्ट में पाया जाता है।
• इसमें ग्रेना (Grana) तथा स्ट्रोमा (Stroma) पाए जाते हैं।
प्रश्न 4(ग).
प्रकाश-संश्लेषण क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
प्रकाश-संश्लेषण को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक:
1. बाह्य कारक:
• प्रकाश (Light): प्रकाश की तीव्रता, गुण तथा अवधि बढ़ाने पर एक निश्चित सीमा तक प्रकाश-संश्लेषण की दर बढ़ती है।
• कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): वायुमंडल में CO₂ की सांद्रता बढ़ने से दर बढ़ती है।
• तापक्रम (Temperature): अनुकूलतम ताप (20°-35°C) पर दर उच्चतम होती है; अत्यधिक ताप पर एंजाइम निष्क्रिय हो जाते हैं।
• जल (Water): जल की कमी होने पर रंध्र बंद हो जाते हैं, जिससे दर घट जाती है।
2. आंतरिक कारक:
• पर्णहरिम (Chlorophyll) की मात्रा, पत्ती की संरचना तथा आयु।
प्रश्न 4(घ).
अन्तःस्रावी एवं बहिःस्रावी ग्रन्थियों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine Glands):
• ये नलिकाविहीन (Ductless) होती हैं।
• इनके स्राव को 'हॉर्मोन' कहते हैं, जो सीधे रक्त में मुक्त होते हैं।
• उदाहरण: पीयूष ग्रंथि, थायराइड ग्रंथि।
2. बहिःस्रावी ग्रन्थियाँ (Exocrine Glands):
• ये नलिकायुक्त (Ducts present) होती हैं।
• इनके स्राव में 'एंजाइम' या अन्य स्राव होते हैं, जो नलिकाओं द्वारा विशिष्ट स्थानों पर पहुँचाए जाते हैं।
• उदाहरण: लार ग्रंथि, यकृत, स्वेद ग्रंथि।
प्रश्न 5(क).
अरेखित पेशी तन्तु तथा रेखित पेशी तन्तु में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. अरेखित (चिकनी) पेशी (Unstriated Muscle):
• इनमें हल्की तथा गहरी पट्टियाँ (Striations) नहीं पाई जातीं।
• ये अनैच्छिक (Involuntary) होती हैं (तंत्रिका तंत्र द्वारा स्वचलित)।
• ये तर्कुरूपी (Spindle-shaped) और एककेंद्रकीय होती हैं।
• उदाहरण: आहारनाल तथा रक्तवाहिनियों की भित्ति।
2. रेखित पेशी (Striated Muscle):
• इनमें एकांतर क्रम में हल्की और गहरी पट्टियाँ पाई जाती हैं।
• ये ऐच्छिक (Voluntary) होती हैं।
• ये बेलनाकार (Cylindrical) तथा बहुकेंद्रकीय (Multinucleate) होती हैं।
• उदाहरण: कंकाल पेशियाँ (हाथ-पैर की पेशियाँ)।
प्रश्न 5(ख).
70S तथा 80S राइबोसोम्स में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. 70S राइबोसोम:
• इनका अवसादन गुणांक (S) कम होता है और ये आकार में छोटे होते हैं।
• ये प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं तथा माइटोकॉण्ड्रिया/क्लोरोप्लास्ट में पाए जाते हैं।
• इनकी दो उप-इकाइयाँ 50S और 30S होती हैं।
2. 80S राइबोसोम:
• इनका अवसादन गुणांक अधिक होता है और ये आकार में बड़े होते हैं।
• ये यूकैरियोटिक कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में पाए जाते हैं।
• इनकी दो उप-इकाइयाँ 60S और 40S होती हैं।
प्रश्न 5(ग).
एन्जाइम के महत्वपूर्ण गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
एंजाइम के मुख्य गुण निम्नलिखित हैं:
1. प्रोटीन प्रकृति: लगभग सभी एंजाइम जटिल प्रोटीन अणु होते हैं।
2. विशिष्टता (Specificity): प्रत्येक एंजाइम केवल एक विशिष्ट क्रियाधार (Substrate) पर ही कार्य करता है।
3. उच्च दक्षता एवं उत् उत्प्रेरक क्षमता: ये रासायनिक अभिक्रिया की दर को लाखों गुना बढ़ा देते हैं तथा स्वयं अपरिवर्तित रहते हैं।
4. अनुकूलतम ताप एवं pH: ये एक निश्चित ताप (25°-40°C) और विशिष्ट pH पर ही सर्वाधिक सक्रिय रहते हैं।
प्रश्न 5(घ).
CAM पौधों की अनुकूलता पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
CAM (Crassulacean Acid Metabolism) पौधे मरुद्भिद (Xerophytic) आवासों में पाए जाने वाले पौधे हैं (जैसे— नागफनी, अनानास)।
अनुकूलताएँ:
1. इनके रंध्र केवल रात्रि के समय खुलते हैं (Scotoactive stomata) और दिन में बंद रहते हैं, जिससे वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल की हानि न्यूनतम होती है।
2. ये रात्रि के समय CO₂ को मैलिक अम्ल के रूप में स्थिरीकृत करते हैं और दिन में रंध्र बंद रहने पर उसी CO₂ का उपयोग C₃ चक्र (कैल्विन चक्र) में करते हैं।
प्रश्न 6(क).
विटामिन्स तथा हॉर्मोन्स में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
.
1. विटामिन्स (Vitamins):
• ये जटिल कार्बनिक यौगिक हैं जिन्हें शरीर स्वतः संश्लेषित नहीं कर सकता (आहार द्वारा बाहर से लिए जाते हैं)।
• ये सह-एंजाइम (Co-enzymes) के रूप में उपापचयी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
• उदाहरण: विटामिन A, B, C, D।
2. हॉर्मोन्स (Hormones):
• ये जैव-रासायनिक संदेशवाहक हैं जो शरीर की अन्तःस्रावी ग्रंथियों द्वारा संश्लेषित होते हैं।
• ये सीधे रक्त में स्रावित होकर लक्षित अंगों की वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करते हैं।
• उदाहरण: इंसुलिन, थायरोक्सिन।
प्रश्न 6(ख).
सोडियम-पोटैशियम पम्प पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
.
सोडियम-पोटैशियम पम्प (Na⁺/K⁺ Pump) कोशिका झिल्ली में स्थित एक सक्रिय परिवहन (Active Transport) तंत्र है।
1. यह ATP की ऊर्जा का उपयोग करके 3 Na⁺ आयनों को कोशिका से बाहर निकालता है और 2 K⁺ आयनों को कोशिका के अंदर लाता है।
2. यह प्रक्रिया सांद्रता प्रवणता (Concentration Gradient) के विरुद्ध होती है।
3. यह तंत्र तंत्रिका आवेगों के संचरण (Resting membrane potential) और कोशिका के आयनिक संतुलन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
प्रश्न 6(ग).
प्लाज्मा प्रोटीन का क्या महत्व है ?
उत्तर:
.
रक्त प्लाज्मा में उपस्थित मुख्य प्रोटीनों के कार्य निम्नलिखित हैं:
1. फाइब्रिनोजेन (Fibrinogen): रक्त का थक्का (Blood clotting) ज़माने में सहायक।
2. ग्लोबुलिन (Globulins): एंटीबॉडीज का निर्माण करके प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity) बनाती हैं।
3. एल्बुमिन (Albumin): रक्त के परासरणी दाब (Osmotic pressure) और जल संतुलन को बनाए रखती है।
4. रक्त के pH मान को स्थिर बनाए रखने में बफर की तरह कार्य करती हैं।
प्रश्न 6(घ).
जैव क्षमता की परिभाषा दीजिए और इसका महत्व बताइए।
उत्तर:
.
• परिभाषा: बलपूर्वक निःश्वसन (Forced Expiration) के पश्चात् वायु की वह अधिकतम मात्रा जो एक व्यक्ति बलपूर्वक उच्छ्वसन (Forced Inspiration) द्वारा फेफड़ों में भर सकता है, उसे 'जैव क्षमता' (Vital Capacity - VC) कहते हैं।
(VC = TV + IRV + ERV; सामान्य मान लगभग 3500 mL से 4500 mL होता है।)
• महत्व: यह फेफड़ों की कार्यक्षमता, श्वसन मांसपेशियों की सामर्थ्य तथा एथलीटों व खिलाड़ियों के शारीरिक स्वास्थ्य के स्तर को दर्शाती है।
(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 7.
साइकस के जीवन-चक्र का रेखाचित्र की सहायता से संक्षिप्त वर्णन कीजिए। पीढ़ी एकान्तरण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
.
• पीढ़ी एकांतरण (Alternation of Generations): किसी जीव के जीवन-चक्र में द्विगुणित बीजाणुद्भिद (2n) तथा अगुणित युग्मकोद्भिद (n) पीढ़ियों के एकांतर क्रम में आने की परिघटना को पीढ़ी एकांतरण कहते हैं।
• साइकस का जीवन-चक्र (Life Cycle of Cycas):
1. साइकस का मुख्य पौधा बीजाणुद्भिद (Sporophyte, 2n) होता है, जो मरुद्भिदी और एकलिंगाश्रयी (Dioecious) होता है।
2. नर पौधे पर नर शंकु (Male Cone) बनते हैं, जिसमें लघुबीजाणुपर्ण (Microsporophyll) होते हैं। इनमें लघुबीजाणु (Pollen grains, n) बनते हैं।
3. मादा पौधे पर गुरुबीजाणुपर्ण (Megasporophyll) ढीले चक्र में व्यवस्थित होते हैं, जिन पर बीजाण्ड (Ovules, 2n) बनते हैं।
4. बीजाण्ड के अंदर गुरुबीजाणु से मादा युग्मकोद्भिद (n) और स्त्रीधानी (Archegonium) का विकास होता है।
5. परागण हवा द्वारा होता है। शुक्राणु पक्ष्माभिकीय (Ciliated) होते हैं।
6. निषेचन के पश्चात् युग्मनज (Zygote, 2n) बनता है जो भ्रूण (Embryo) और बीज (Seed) में विकसित होकर नया बीजाणुद्भिद पौधा बनाता है।
रेखाचित्र (Flowchart):
बीजाणुद्भिद (2n) ──► नर/मादा शंकु ──► लघु/गुरु बीजाणु (n) ──► युग्मक (n) ──► निषेचन ──► युग्मनज (2n) ──► नया पौधा (2n)
अथवा
प्रश्न 7.
तंत्रिका ऊतक की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• तंत्रिका ऊतक की संरचना:
तंत्रिका ऊतक मुख्य रूप से तंत्रिका कोशिकाओं या न्यूरॉन्स (Neurons) और आलंबन कोशिकाओं (Neuroglia) से मिलकर बना होता है।
1. कोशिकाकाय (Cyton / Cell Body): इसमें केंद्रक, कोशिकाद्रव्य तथा निसिल के कण (Nissl's granules) पाए जाते हैं।
2. द्रुमाश्य (Dendrites): ये छोटी, शाखित प्रवर्ध हैं जो उद्दीपनों को ग्रहण करके साइटॉन की ओर लाते हैं।
3. तंत्रिकाक्ष (Axon): यह एक लंबा, एकल प्रवर्ध है जो आवेगों को साइटॉन से दूर ले जाता है। इस पर माइलिन आच्छद (Myelin sheath) और रनवीर के नोड (Nodes of Ranvier) पाए जाते हैं।
• तंत्रिका ऊतक के कार्य:
1. शरीर के विभिन्न अंगों से संवेदनाओं (Stimuli) को ग्रहण करके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क व मेरुरज्जु) तक पहुँचाना।
2. मस्तिष्क द्वारा दिए गए निर्देशों को कार्यकारी अंगों (पेशियों व ग्रंथियों) तक पहुँचाना।
3. शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं में नियंत्रण एवं समन्वय (Control & Coordination) स्थापित करना।
प्रश्न 8.
मानव मूत्र की जैव-रासायनिक संरचना का सचित्र वर्णन एवं कार्य बताइए।
उत्तर:
.
1. मानव मूत्र की जैव-रासायनिक संरचना:
मानव मूत्र एक पारदर्शी, हल्के पीले रंग का (यूरोग्लोबिन/यूरोक्रोम के कारण) और हल्का अम्लीय (pH ≈ 6.0) द्रव है।
• जल: लगभग 95%
• कार्बनिक पदार्थ: यूरिया (लगभग 2%), यूरिक अम्ल (0.05%), क्रिएटिनिन (0.1%), ऑक्सालेट।
• अकार्बनिक पदार्थ: सोडियम क्लोराइड (NaCl - लगभग 1%), पोटैशियम, फॉस्फेट, सल्फेट आयन।
2. वृक्क/मूत्र निर्माण के कार्य:
• अपशिष्ट पदार्थों का उत्सर्जन: यूरिया, यूरिक अम्ल तथा अन्य विषैले उपापचयी अपशिष्टों को शरीर से बाहर निकालना।
• परासरण नियंत्रण (Osmoregulation): शरीर में जल और लवणों की मात्रा का संतुलन बनाए रखना।
• अम्ल-क्षार संतुलन: रक्त के pH को स्थिर बनाए रखना।
[वृक्काणु / नेफ्रॉन (Nephron) की संरचना का आरेख: बोमैन सम्पुट ➔ समीपस्थ कुंडलित नलिका ➔ हेनले का लूप ➔ दूरस्थ कुंडलित नलिका ➔ संग्रह नलिका]
अथवा
प्रश्न 8.
DNA की संरचना तथा कार्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
• DNA की संरचना (वाटसन एवं क्रिक का द्विकुंडली मॉडल):
1. DNA पॉलीन्यूक्लियोटाइड की दो लंबी श्रृंखलाओं का बना एक द्विकुंडलित (Double Helical) अणु है।
2. प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन घटकों से बना होता है:
• डी-ऑक्सीराइबोज़ शर्करा
• फॉस्फेट समूह
• नाइट्रोजनी क्षार: प्यूरीन (Adenine - A, Guanine - G) तथा पिरीमिडीन (Thymine - T, Cytosine - C)।
3. दोनों श्रृंखलाएँ परस्पर विपरीत दिशाओं (5'→3' और 3'→5') में समानांतर होती हैं।
4. A सदैव T से दो हाइड्रोजन आबंधों (A=T) द्वारा तथा C सदैव G से तीन हाइड्रोजन आबंधों (C≡G) द्वारा जुड़ा होता है।
5. कुंडली का व्यास 2 nm (20 Å) होता है तथा एक पूर्ण घुमाव की लंबाई 3.4 nm (34 Å) होती है जिसमें 10 क्षारक युग्म होते हैं।
• DNA के कार्य:
1. आनुवंशिक सूचनाओं का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण करना।
2. कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण करना (m-RNA के निर्माण द्वारा)।
3. स्व-द्विगुणन (Replication) द्वारा अपनी जैसी प्रतिलिपि तैयार करना।
प्रश्न 9.
पादप कोशिका में समसूत्री विभाजन का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
पादप कोशिका में समसूत्री विभाजन (Mitosis) दो मुख्य चरणों में पूरा होता है:
1. केंद्रक विभाजन (Karyokinesis):
• पूर्वावस्था (Prophase): गुणसूत्र सघन होकर स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। केंद्रक कला और केंद्रिका गायब होने लगते हैं।
• मध्यावस्था (Metaphase): गुणसूत्र कोशिका के मध्यरेखीय पट्ट (Equatorial Plate) पर व्यवस्थित हो जाते हैं। तर्कु तंतु (Spindle fibers) गुणसूत्रबिंदु (Centromere) से जुड़ते हैं।
• पश्चावस्था (Anaphase): सेंट्रोमीयर विभाजित होता है और संतति गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों की ओर जाने लगते हैं।
• अंत्यावस्था (Telophase): ध्रुवों पर गुणसूत्रों के चारों ओर पुनः केंद्रक कला तथा केंद्रिका का निर्माण होता है।
2. कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cytokinesis):
• पादप कोशिका में कोशिकाद्रव्य का विभाजन 'कोशिका पट' (Cell Plate) विधि द्वारा केंद्र से परिधि की ओर (Centrifugal) होता है।
अथवा
प्रश्न 9.
मानव के हृदय की क्रिया-विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
.
मानव हृदय एक चार-कोष्ठीय (दो अलिंद, दो निलय) पेशीय अंग है जो रक्त को पम्प करता है। इसकी क्रिया-विधि में दो मुख्य चरण होते हैं:
1. अलिंद तथा निलय का प्रकुंचन एवं शिथिलन (Cardiac Cycle):
• संयुक्त शिथिलन (Joint Diastole): महाशिराओं से अशुद्ध रक्त दाएँ अलिंद में और फुफ्फुसीय शिराओं से शुद्ध रक्त बाएँ अलिंद में आता है।
• अलिंद प्रकुंचन (Atrial Systole): अलिंद सिकुड़ते हैं, जिससे त्रिवलनी (Tricuspid) तथा द्विवलनी (Bicuspid) कपाट खुलते हैं और रक्त क्रमशः दाएँ तथा बाएँ निलय में प्रवेश करता है।
• निलय प्रकुंचन (Ventricular Systole): निलय सिकुड़ते हैं, कपाट बंद हो जाते हैं (जिससे 'लभ्' / LUBB ध्वनि उत्पन्न होती है)। दाएँ निलय से अशुद्ध रक्त फुफ्फुसीय धमनी द्वारा फेफड़ों में और बाएँ निलय से शुद्ध रक्त महाधमनी (Aorta) द्वारा संपूर्ण शरीर में पम्प कर दिया जाता है। अर्धचंद्रकार कपाट बंद होने से 'डब्' / DUPP ध्वनि बनती है।
2. दोहरा परिसंचरण (Double Circulation):
रक्त एक चक्र पूरा करने के लिए हृदय से दो बार होकर गुजरता है—
• फुफ्फुसीय परिसंचरण (हृदय ➔ फेफड़े ➔ हृदय)
• दैहिक परिसंचरण (हृदय ➔ शरीर ➔ हृदय)