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UP Board Class 10th Social Science Board Paper 2025 825 (CU)

कक्षा 10वीं · सामाजिक विज्ञान · 2025 · बोर्ड परीक्षा

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खण्ड - 'अ' / PART - 'A'

(बहुविकल्पीय प्रश्न / Multiple Choice Type Questions)

प्रश्न 1.

निम्नलिखित में से किसने 1860 ई० में दक्षिण इटली की तरफ 'एक्सपीडिशन ऑफ द थाउजेंड' (हजार लोगों का अभियान) का नेतृत्व किया था ?

(A) गैरीबॉल्डी

(B) कावूर

(C) मैजिनी

(D) बिस्मार्क

उत्तर:

(A) गैरीबॉल्डी

प्रश्न 2.

1932 ई० में पूना पैक्ट किन दो नेताओं के बीच हुआ ?

(A) महात्मा गाँधी और सरदार वल्लभभाई पटेल

(B) महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू

(C) जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस

(D) महात्मा गाँधी और डॉ० भीमराव रामजी अम्बेडकर

उत्तर:

(D) महात्मा गाँधी और डॉ० भीमराव रामजी अम्बेडकर

प्रश्न 3.

बेल्जियम में केन्द्रीय और राज्य सरकारों के अलावा एक तीसरे स्तर की सरकार भी काम करती है। इसे किस नाम से जाना जाता है ?

(A) प्रान्तीय सरकार

(B) स्थानीय सरकार

(C) सामुदायिक सरकार

(D) क्षेत्रीय सरकार

उत्तर:

(C) सामुदायिक सरकार

प्रश्न 4.

संघात्मक शासन प्रणाली में शक्तियों का विभाजन निम्नलिखित में से किनके मध्य होता है ?

(A) केन्द्र और राज्य

(B) व्यवस्थापिका और कार्यपालिका

(C) व्यवस्थापिका और न्यायपालिका

(D) कार्यपालिका और न्यायपालिका

उत्तर:

(A) केन्द्र और राज्य

प्रश्न 5.

महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत सीटों का आरक्षण दिया जाएगा ?

(A) 50

(B) 30

(C) 23

(D) 33

उत्तर:

(D) 33

प्रश्न 6.

निम्नलिखित में से कौन-से राजनीतिक दल के प्रमुख हिस्से हैं ?

(A) नेता

(B) सक्रिय सदस्य

(C) अनुयायी

(D) इनमें से सभी

उत्तर:

(D) इनमें से सभी

प्रश्न 7.

व्यक्ति की गरिमा और नागरिकों में समानता को बढ़ावा देने वाली राजनीतिक व्यवस्था निम्नलिखित में से कौन-सी है ?

(A) राजतंत्र

(B) लोकतंत्र

(C) तानाशाही

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

(B) लोकतंत्र

प्रश्न 8.

किस संधि के द्वारा यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिली ?

(A) पेरिस की संधि

(B) वियना की संधि

(C) वर्साय की संधि

(D) कुस्तुनतुनिया की संधि

उत्तर:

(D) कुस्तुनतुनिया की संधि

प्रश्न 9.

भारत माता की विख्यात छवि को किसने चित्रित किया था ?

(A) रवीन्द्रनाथ टैगोर

(B) बंकिमचन्द्र चटर्जी

(C) अवनीन्द्रनाथ टैगोर

(D) राजा रवि वर्मा

उत्तर:

(C) अवनीन्द्रनाथ टैगोर

प्रश्न 10.

1920 में कांग्रेस के किस अधिवेशन में असहयोग कार्यक्रम को स्वीकृति मिली ?

(A) मद्रास अधिवेशन

(B) कराची अधिवेशन

(C) दिल्ली अधिवेशन

(D) नागपुर अधिवेशन

उत्तर:

(D) नागपुर अधिवेशन

प्रश्न 11.

'प्रोजेक्ट टाइगर' परियोजना की शुरुआत कब हुई ?

(A) 1971

(B) 1973

(C) 1985

(D) 1911

उत्तर:

(B) 1973

प्रश्न 12.

टिहरी बाँध किस नदी पर बना है ?

(A) नर्मदा

(B) भागीरथी

(C) कोसी

(D) कृष्णा

उत्तर:

(B) भागीरथी

प्रश्न 13.

निम्नलिखित में से कौन-सी फसल मोटे अनाज के अन्तर्गत आती है ?

(A) जौ

(B) गेहूँ

(C) बाजरा

(D) चावल

उत्तर:

(C) बाजरा

प्रश्न 14.

निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अधात्विक है ?

(A) अभ्रक

(B) लौह अयस्क

(C) सोना

(D) बाक्साइट

उत्तर:

(A) अभ्रक

प्रश्न 15.

निम्नलिखित में से कौन ऊर्जा स्रोत गैर-परम्परागत है ?

(A) कोयला

(B) पेट्रोलियम

(C) पवन ऊर्जा

(D) प्राकृतिक गैस

उत्तर:

(C) पवन ऊर्जा

प्रश्न 16.

निम्नलिखित में किसका कार्य अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्रक के अन्तर्गत आता है ?

(A) कुम्हार

(B) शिक्षक

(C) कृषक

(D) मछुआरा

उत्तर:

(A) कुम्हार

प्रश्न 17.

विश्व में मानव विकास सूचकांक, 2016 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा देश निम्नतम स्तर पर था ?

(A) बांग्लादेश

(B) श्रीलंका

(C) भारत

(D) नेपाल

उत्तर:

(A) बांग्लादेश

प्रश्न 18.

निम्नलिखित में से किस राज्य में शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक है ?

(A) बिहार

(B) मध्य प्रदेश

(C) केरल

(D) हरियाणा

उत्तर:

(B) मध्य प्रदेश

प्रश्न 19.

वैश्वीकरण का प्रभाव निम्नलिखित में किस पर विपरीत पड़ा है ?

(A) धनी वर्ग

(B) कुशल वर्ग

(C) शिक्षित वर्ग

(D) श्रमिक वर्ग

उत्तर:

(D) श्रमिक वर्ग

प्रश्न 20.

सूचना पाने का अधिकार (आरटीआई) कब लागू हुआ ?

(A) 2001

(B) 1991

(C) 1998

(D) 2005

उत्तर:

(D) 2005

खण्ड - 'ब' / PART - 'B'

वर्णनात्मक - I / Descriptive - I

प्रश्न 1.

उदारवाद से आप क्या समझते हैं ? इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।

अथवा

जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

उदारवाद का अर्थ एवं इसकी प्रमुख विशेषताएँ:

• उदारवाद का अर्थ: अंग्रेजी भाषा का 'लिबरलिज्म' (Liberalism) शब्द लाफिन भाषा के मूल शब्द 'लिवर' (Liber) पर आधारित है, जिसका अर्थ 'आज़ाद' होता है। नए मध्यम वर्ग के लिए उदारवाद का अर्थ व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के समक्ष सबकी समानता था।

• 1. राजनीतिक विशेषता: यह सहमति से बनी सरकार पर जोर देता है। निरंकुश शासकों और पादरियों के विशेषाधिकारों की समाप्ति, संविधान तथा संसदीय प्रतिनिधि सरकार का गठन इसकी प्रमुख राजनीतिक विशेषता थी।

• 2. आर्थिक विशेषता: आर्थिक क्षेत्र में उदारवाद बाजारों की स्वतंत्रता और राज्य द्वारा वस्तुओं तथा पूंजी के आवागमन पर पाबंदियों को समाप्त करने के पक्ष में था। 1834 में प्रश की पहल पर स्थापित 'जोलवेराइन' (Zollverein) शुल्क संघ इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

• 3. सामाजिक और धार्मिक स्वतंत्रता: इसके अंतर्गत सामाजिक भेदभाव का अंत, धार्मिक सहनशीलता और व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा को सर्वोपरि माना गया।

अथवा

जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड:

• घटना का परिचय: जलियाँवाला बाग हत्याकांड आधुनिक भारतीय इतिहास की सबसे क्रूर और ह्रदयविदारक घटनाओं में से एक है, जो 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर (पंजाब) में वैसाखी के दिन हुई थी।

• कारण: ब्रिटिश सरकार द्वारा लाए गए दमनकारी 'रॉलेट एक्ट' (Rowlatt Act) और उसके तहत डॉ. सैफुद्दीन किचलू तथा डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में जलियाँवाला बाग मैदान में एक शांतिपूर्ण जनसभा आयोजित की गई थी।

• क्रूरतापूर्ण कार्रवाई: जनरल डायर ने अपने सैनिकों के साथ मिलकर बाग के इकलौते निकास द्वार को बंद कर दिया और बिना किसी पूर्व चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दीं।

• परिणाम: इस गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए और हज़ारों की संख्या में गंभीर रूप से घायल हुए। इस जघन्य हत्याकांड से आहत होकर रविन्द्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजों द्वारा दी गई 'नाइटहुड' (Sir) की उपाधि वापस लौटा दी थी।

प्रश्न 2.

लोकतंत्र से आप क्या समझते हैं ? यह शासन की अन्य व्यवस्थाओं से क्यों बेहतर है ?

अथवा

भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता से सम्बन्धित कौन-से प्रावधान किए गए हैं ?

उत्तर:

लोकतंत्र का अर्थ एवं इसकी श्रेष्ठता:

• लोकतंत्र का अर्थ: लोकतंत्र शासन का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव देश के आम नागरिक स्वयं अपने मत के माध्यम से करते हैं। इसमें अंतिम शक्ति जनता के पास होती है।

• 1. उत्तरदायी शासन व्यवस्था: लोकतंत्र अन्य व्यवस्थाओं (जैसे राजतंत्र या तानाशाही) की तुलना में अधिक बेहतर है क्योंकि यह एक वैध और नागरिकों के प्रति उत्तरदायी शासन व्यवस्था है।

• 2. गरिमा और स्वतंत्रता में वृद्धि: यह नागरिकों को मौलिक अधिकार, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति की गरिमा में वृद्धि होती है।

• 3. गलतियों को सुधारने का अवसर: लोकतंत्र में निर्णय लेने में भले ही थोड़ी देरी हो, लेकिन इसमें संवाद और बहसों के आधार पर गलतियों को सुधारने और सामंजस्य बैठाने की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

• 4. विभिन्नताओं का सम्मान: यह विभिन्न जातियों, धर्मों और संस्कृतियों वाले समाजों में टकराव को कम करके आपसी शांति और भाईचारा स्थापित करता है।

अथवा

भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता से संबंधित प्रावधान:

• 1. कोई राजकीय धर्म नहीं: भारतीय संविधान में किसी भी धर्म को 'राजकीय धर्म' (State Religion) का दर्जा नहीं दिया गया है। श्रीलंका में बौद्ध धर्म या पाकिस्तान में इस्लाम की तरह भारत का अपना कोई आधिकारिक धर्म नहीं है।

• 2. मौलिक अधिकार (धार्मिक स्वतंत्रता): संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 के तहत देश के प्रत्येक नागरिक को अपने अंतःकरण की धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है।

• 3. राज्य की तटस्थता: राज्य की नजरों में सभी धर्म समान हैं। सरकार किसी भी धर्म विशेष के साथ न तो पक्षपात करती है और न ही नागरिकों के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव कर सकती है।

• 4. धार्मिक संस्थानों में हस्तक्षेप से दूरी और सुधार: राज्य धार्मिक मामलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करता जब तक कि वह सामाजिक समानता और कानून-व्यवस्था के विरुद्ध न हो (जैसे छुआछूत पर रोक)।

प्रश्न 3.

ऊर्जा के परम्परागत एवं गैर-परम्परागत स्रोतों में विभेद कीजिए।

अथवा

रेल परिवहन के वितरण को प्रभावित करने वाले आकृतिक कारकों की समीक्षा कीजिए।

उत्तर:

ऊर्जा के परंपरागत और गैर-परम्परागत स्रोतों में अंतर:

• परिभाषा का अंतर: ऊर्जा के परंपरागत स्रोत वे हैं जो लंबे समय से सामान्य उपयोग में चले आ रहे हैं (जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और लकड़ी), जबकि गैर-परम्परागत स्रोत नवीन या नवीकरणीय स्रोत हैं जो पर्यावरण के अनुकूल होते हैं (जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारिए ऊर्जा और बायोगैस)।

• समाप्ति की संभावना: परंपरागत स्रोत अनवीकरणीय हैं यानी एक बार समाप्त होने पर इन्हें दोबारा नहीं बनाया जा सकता, जबकि गैर-परम्परागत स्रोत समाप्त होने वाले नहीं हैं (अक्षय स्रोत हैं)।

• पर्यावरण पर प्रभाव: परंपरागत स्रोतों के उपयोग से प्रदूषण (कार्बन उत्सर्जन) बहुत अधिक होता है और ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है, जबकि गैर-परम्परागत स्रोत पर्यावरण-अनुकूल और प्रदूषण मुक्त होते हैं।

• लागत और तकनीक: परंपरागत स्रोतों की प्रारंभिक तकनीक पुरानी और उपयोग में आसान रही है (हालांकि इनके दाम लगातार बढ़ रहे हैं), जबकि गैर-परम्परागत स्रोतों की स्थापना में शुरुआती लागत अधिक होती है, परंतु इनका रखरखाव और दीर्घकालिक उपयोग सस्ता व सुलभ होता है।

अथवा

रेल परिवहन के वितरण को प्रभावित करने वाले आकृतिक कारक:

• 1. धरातल की बनावट (भू-आकृति): उत्तर भारत के विशाल मैदान जैसे समतल भू-भाग रेलवे लाइनों के बिछाने और विस्तार के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं, जहाँ कम लागत में रेल मार्ग बनाए जा सकते हैं।

• 2. पर्वतीय और पथरीले क्षेत्र: इसके विपरीत, हिमालयी क्षेत्र या ऊँचे पहाड़ी और पथरीले इलाकों में ढलान अधिक होने और कठिन भू-भाग के कारण रेलवे लाइनों का विस्तार करना अत्यंत कठिन और खर्चीला होता है।

• 3. नदियाँ और जलमार्ग बाधाएँ: बड़े नदी बेसिनों और तटीय क्षेत्रों में कई पुलों और सुरंगों के निर्माण की आवश्यकता पड़ती है, जो रेल परिवहन के विकास को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

• 4. मरुस्थलीय और दलदली क्षेत्र: राजस्थान के रेतीले मरुस्थल या कच्छ जैसे दलदली व अत्यधिक वनीय क्षेत्रों में मिट्टी की कमजोरी और भौगोलिक प्रतिकूलता के कारण रेल नेटवर्क का घनत्व बहुत कम पाया जाता है।

प्रश्न 4.

वैश्वीकरण का भारत में क्या प्रभाव पड़ा है ? किन्हीं चार बिन्दुओं पर प्रकाश डालिये।

अथवा

ऋण के औपचारिक एवं अनौपचारिक स्रोतों की तुलना कीजिए।

उत्तर:

वैश्वीकरण का भारत पर प्रभाव (चार प्रमुख बिंदु):

• 1. बहुराष्ट्रीय कंपनियों का आगमन: वैश्वीकरण के कारण भारत में विदेशी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) ने भारी निवेश किया है, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

• 2. रोजगार के नए अवसरों का सृजन: आईटी (IT), कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर और सेवा क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के नए और बेहतर अवसर पैदा हुए हैं, जिससे जीवन स्तर सुधरा है।

• 3. वस्तुओं की व्यापक उपलब्धता: वैश्वीकरण के फलस्वरूप भारतीय बाजारों में विदेशी और उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुओं की विविधता आई है, जिससे उपभोक्ताओं के पास विकल्पों की अधिकता हो गई है।

• 4. लघु उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव: वैश्वीकरण का एक नकारात्मक प्रभाव यह पड़ा है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण देश के छोटे और घरेलू निर्माताओं (जैसे बैटरी, खिलौने, प्लास्टिक उद्योग) को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

अथवा

ऋण के औपचारिक एवं अनौपचारिक स्रोतों की तुलना:

• 1. परिभाषा और नियंत्रण: औपचारिक स्रोत वे हैं जिन पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसी संस्थाओं का नियंत्रण होता है (जैसे बैंक और सहकारी समितियाँ), जबकि अनौपचारिक स्रोतों पर किसी का सरकारी नियंत्रण नहीं होता (जैसे साहूकार, व्यापारी, रिश्तेदार)।

• 2. ब्याज दरें: औपचारिक स्रोतों द्वारा लिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दरें काफी कम और निश्चित होती हैं, जबकि अनौपचारिक स्रोतों में साहूकार बहुत अधिक और मनमानी ब्याज दरें वसूलते हैं।

• 3. कागजी कार्रवाई और सुरक्षा (कोलैटरल): बैंक ऋण प्राप्त करने के लिए उचित कागजी कार्रवाई और गिरवी रखने के लिए परिसंपत्ति (कोलैटरल) की मांग करते हैं, जबकि अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज आसानी से बिना किसी विशेष कागजी कार्रवाई के मिल जाता है।

• 4. ऋण जाल (Debt Trap): अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लेने वाले लोग अक्सर भारी ब्याज चुकाने के चक्कर में कर्ज के जाल में फंस जाते हैं, जबकि औपचारिक स्रोत पारदर्शी और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाले होते हैं।

वर्णनात्मक - II / Descriptive - II

प्रश्न 5.

नेपोलियन कौन था ? उसके द्वारा किए गए सुधारों का वर्णन कीजिए।

अथवा

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की सीमाओं पर एक संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।

उत्तर:

नेपोलियन का परिचय एवं उसके द्वारा किए गए सुधार:

• नेपोलियन का परिचय: नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का एक महान सैन्य कमांडर और सम्राट था, जिसने 19वीं सदी के शुरुआत में यूरोपीय इतिहास को गहरे तौर पर प्रभावित किया। उसने फ्रांसीसी क्रांति के कई आदर्शों को पूरे यूरोप में फैलाया, हालांकि फ्रांस में उसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त कर राजतंत्र की स्थापना की थी।

• 1. नागरिक संहिता (नेपोलियन की आचार संहिता - 1804): नेपोलियन ने 1804 में 'नेपोलियन कोड' लागू किया। इसके तहत जन्म पर आधारित सभी विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए, कानून के समक्ष समानता स्थापित की गई और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया गया।

• 2. प्रशासनिक सुधार: उसने प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया, सामंती व्यवस्था को खत्म किया और किसानों को भू-दासत्व व जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई।

• 3. आर्थिक और व्यापारिक सुधार: शहरों में कारीगरों और व्यापारियों के संघों के नियंत्रण को हटाया गया। पूरे देश में एक जैसी नाप-तौल की प्रणालियाँ और एक राष्ट्रीय मुद्रा चलाई गई, जिससे व्यापार और आवागमन में भारी सुविधा हुई।

• 4. परिवहन और संचार व्यवस्था: व्यापार और सेना के आवागमन को सुगम बनाने के लिए सड़कों, परिवहन और संचार व्यवस्था का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण किया गया।

अथवा

सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमाएँ:

• 1. समाज के सभी वर्गों की भागीदारी का अभाव: सविनय अवज्ञा आंदोलन में समाज के सभी वर्ग एक समान रूप से उत्साह के साथ शामिल नहीं हुए। उदाहरण के लिए, देश का एक बड़ा तबका (जैसे अछूत या दलित वर्ग) कांग्रेस के सवर्ण-प्रधान नेतृत्व के कारण इस आंदोलन से दूरी बनाए रहा।

• 2. दलित वर्ग और पृथक निर्वाचिका की माँग: डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में दलितों ने कांग्रेस के आंदोलन से अलग अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और पृथक निर्वाचिका की माँग की, जिसके कारण राष्ट्रीय एकता में कुछ समय के लिए मतभेद उभरे।

• 3. मुस्लिम समुदायों की उदासीनता: असहयोग आंदोलन के बाद खिलाफत आंदोलन का मुद्दा समाप्त होने से एक बड़ा मुस्लिम वर्ग कांग्रेस के इस आंदोलन से कटा हुआ महसूस करने लगा। उन्हें लगता था कि कांग्रेस केवल बहुसंख्यक हिंदुओं के हितों की बात कर रही है।

• 4. उद्योगपति वर्ग की सीमित भागीदारी: उद्योगपतियों और व्यापारियों ने शुरुआती दौर में आर्थिक सहायता दी, लेकिन जब अंग्रेजों के दमन चक्र और गोलमेज सम्मेलन की विफलता के कारण व्यापारिक गतिविधियाँ बाधित होने लगीं, तो उनका उत्साह ठंडा पड़ने लगा।

प्रश्न 6.

आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के विविध रूपों की विवेचना कीजिए।

अथवा

भारतीय राजनीति में जाति की भूमिका की विवेचना कीजिए।

उत्तर:

आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के विविध रूप:

• 1. सरकार के विभिन्न अंगों के बीच क्षैतिज वितरण: लोकतंत्र में सत्ता का बँटवारा सरकार के प्रमुख अंगों—व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच होता है। इसे 'क्षैतिज वितरण' (Horizontal Distribution) कहते हैं, जिससे कोई भी एक अंग असीम शक्तियों का दुरुपयोग नहीं कर पाता और संतुलन बना रहता है।

• 2. विभिन्न स्तरों पर सरकारों के बीच ऊर्ध्वाधर वितरण: सत्ता का दूसरा रूप संघीय व्यवस्था है, जिसमें संपूर्ण देश के लिए एक केंद्रीय सरकार होती है और फिर प्रांतीय या क्षेत्रीय स्तर पर अलग सरकारें होती हैं (जैसे भारत में केंद्र और राज्य सरकारें)।

• 3. विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच साझेदारी: सामाजिक विविधताओं वाले देशों (जैसे बेल्जियम) में भाषायी, धार्मिक या जातीय समूहों के बीच भी सत्ता की साझेदारी की जाती है, जिसके लिए 'सामुदायिक सरकार' जैसी व्यवस्थाएँ बनाई जाती हैं।

• 4. राजनीतिक दलों, दबाव समूहों और आंदोलनों द्वारा साझेदारी: आधुनिक लोकतंत्र में राजनीतिक दल चुनाव के जरिए सत्ता हासिल करते हैं और गठबंधन सरकारें बनाकर शक्ति साझा करते हैं। इसके अलावा विभिन्न हित समूह और जन-आंदोलन भी सरकार के फैसलों को प्रभावित करके सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।

अथवा

भारतीय राजनीति में जाति की भूमिका:

• 1. उम्मीदवारों का चयन और मतदान व्यवहार: भारत में चुनावी राजनीति के दौरान राजनीतिक दल अक्सर किसी क्षेत्र विशेष के जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर ही उम्मीदवारों का चयन करते हैं। यहाँ तक कि मतदाता भी कई बार अपने जातीय उम्मीदवार या अपनी जाति के नेता के पक्ष में मतदान करते हैं।

• 2. राजनीतिक लामबंदी और गोलबंदी: जातियों के नाम पर राजनीतिक दल रैलियाँ करते हैं, संगठन बनाते हैं और जनता को लामबंद करते हैं। इससे समाज में राजनीतिक चेतना तो आती है, परंतु कई बार जातिगत भावनाएँ राष्ट्रहित पर भारी पड़ने लगती हैं।

• 3. सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण: जातिगत राजनीति का एक सकारात्मक पहलू यह है कि इसने समाज के शोषित, वंचित और पिछड़े वर्गों को राजनीतिक सत्ता में हिस्सेदारी दिलाई है। आज सत्ता में निचले तबके की भागीदारी बढ़ी है।

• 4. लोकतंत्र में जाति ही सब कुछ नहीं: केवल जाति के आधार पर चुनाव नहीं जीते जा सकते। भारतीय मतदाता बहुत जागरूक हैं; वे विकास के कार्य, पार्टी की नीतियाँ, आर्थिक मुद्दे और नेताओं के प्रदर्शन को देखकर भी वोट करते हैं, यही कारण है कि एक ही जाति के लोग अलग-अलग दलों को वोट देते हैं।

प्रश्न 7.

भू-संसाधन को परिभाषित कीजिए एवं भारत में भू-उपयोग प्रारूप की समीक्षा कीजिए।

अथवा

'भारत के कुछ भागों में जल दुर्लभता एक गम्भीर समस्या है।' समीक्षा कीजिए एवं इसके समाधान हेतु कोई चार उपाय सुझाइए।

उत्तर:

भू-संसाधन का अर्थ एवं भारत में भू-उपयोग प्रारूप:

• भू-संसाधन की परिभाषा: पृथ्वी का वह प्राकृतिक धरातलीय भाग जिस पर मानव निवास करता है, कृषि करता है, उद्योग लगाता है और विभिन्न आर्थिक क्रियाएँ संचालित करता है, उसे भू-संसाधन कहते हैं।

• 1. कुल रिपोर्टेड क्षेत्र: भारत में भू-उपयोग के आंकड़े उपलब्ध कराने वाले कुल क्षेत्रफल का लगभग 93% हिस्सा ही उपलब्ध है, क्योंकि पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों की पूरी पैमाइश नहीं हो पाई है।

• 2. वन क्षेत्र: राष्ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार देश के कम से कम 33% भूभाग पर वन होने चाहिए ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे, लेकिन वर्तमान में भारत में वन का प्रतिशत इससे काफी कम है।

• 3. कृषि योग्य बंजर और अन्य उपयोग: देश का एक बड़ा हिस्सा कृषि के अंतर्गत आता है, जबकि बाकी भूमि का उपयोग बंजर भूमि, चारागाहों, गैर-कृषि कार्यों (सड़क, मकान, कारखाने) के लिए किया जाता है।

• 4. शुद्ध बोया गया क्षेत्र और परती भूमि: विभिन्न राज्यों में भू-उपयोग का प्रारूप अलग-अलग है। पंजाब और हरियाणा में शुद्ध बोया गया क्षेत्र 80% से अधिक है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम जैसे पहाड़ी राज्यों में यह बहुत कम है।

अथवा

भारत में जल दुर्लभता की समस्या और उसके समाधान:

• जल दुर्लभता की समस्या: भारत में अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि, अनियंत्रित नगरीकरण, औद्योगिकीकरण और कृषि में भूजल के अंधाधुंध दोहन के कारण आज देश के कई हिस्सों में पानी की भयंकर कमी (जल दुर्लभता) उत्पन्न हो गई है।

• समाधान के चार प्रमुख उपाय:

• 1. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): छतों पर गिरने वाले वर्षा के पानी को एकत्रित कर भूमिगत टैंकों में संरक्षित करना चाहिए ताकि भूजल स्तर को पुनः रिचार्ज किया जा सके।

• 2. ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीक: कृषि क्षेत्र में बाढ़ सिंचाई के स्थान पर टपका (डिप) सिंचाई और फुहारा (Sprinkler) पद्धति का उपयोग करना चाहिए, जिससे पानी की बर्बादी रोकी जा सके।

• 3. जल पुनर्चक्रण (Recycling of Water): फैक्ट्रियों और शहरी सीवेज के गंदे पानी को आधुनिक संयंत्रों (STP) द्वारा साफ़ करके औद्योगिक कार्यों और बागवानी में पुनः उपयोग करना चाहिए।

• 4. जन-जागृति अभियान: नागरिकों के बीच पानी के महत्व को लेकर जागरूकता फैलानी चाहिए ताकि नल खुले छोड़ने या पानी के दुरुपयोग जैसी आदतों पर लगाम लग सके।

प्रश्न 8.

भारतीय अर्थव्यवस्था के तृतीयक क्षेत्रक में कौन-सी गतिविधियाँ सम्मिलित हैं ? इस क्षेत्रक के बढ़ते महत्व की समीक्षा कीजिए।

अथवा

उपभोक्ता अधिकार पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:

भारतीय अर्थव्यवस्था का तृतीयक क्षेत्रक एवं उसका बढ़ता महत्व:

• तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ: इस क्षेत्रक को 'सेवा क्षेत्रक' भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में मदद करने वाली सेवाएँ शामिल हैं, जैसे—व्यापार, परिवहन, संचार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा, चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और पर्यटन।

• 1. बुनियादी सेवाओं की माँग में वृद्धि: जैसे-जैसे देश का विकास हो रहा है, सरकार द्वारा अस्पताल, शिक्षा संस्थान, डाक-तार, थाने और बीमा जैसी बुनियादी सेवाओं की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

• 2. प्राथमिक और द्वितीयक पर निर्भरता: कृषि और उद्योगों के विकास के साथ-साथ परिवहन, भंडारण और व्यापार जैसी सेवाओं की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ी है, जिससे इस क्षेत्रक का दायरा विस्तृत हुआ है।

• 3. आय के स्तर में वृद्धि: लोगों की आय बढ़ने पर वे अधिक सेवाओं (जैसे बाहर खाना, पर्यटन, शॉपिंग मॉल, निजी अस्पताल और उच्च शिक्षा) पर खर्च करने लगे हैं, जिससे सेवा क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

• 4. सूचना प्रौद्योगिकी का प्रसार: पिछले कुछ दशकों में इंटरनेट, कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर उद्योग के कारण सेवा क्षेत्रक ने भारत की जीडीपी (GDP) और रोजगार सृजन में सबसे बड़ा योगदान देना शुरू कर दिया है।

अथवा

उपभोक्ता अधिकार पर टिप्पणी:

• 1. उपभोक्ता अधिकार का अर्थ: बाजार में खरीदारी करते समय उपभोक्ताओं का शोषण (जैसे मिलावट, अधिक मूल्य वसूलना, कम तौलना और दोषपूर्ण सामान देना) रोकने तथा उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा जो कानूनी अधिकार प्रदान किए गए हैं, उन्हें उपभोक्ता अधिकार कहते हैं।

• 2. मुख्य अधिकार: इसके अंतर्गत 'सुरक्षा का अधिकार', 'सूचना पाने का अधिकार', 'चयन करने का अधिकार', 'निवारण पाने का अधिकार' और 'उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार' प्रमुख रूप से शामिल हैं।

• 3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA - 1986): भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए 1986 में एक ऐतिहासिक कानून बनाया गया, जिसे कोपरा कहा जाता है। इसके तहत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता अदालतों की स्थापना की गई है।

• 4. 'जागो ग्राहक जागो' और प्रमाणन: उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। साथ ही उत्पादों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ISI, Agmark और Hallmarking जैसे गुणवत्ता मानक तय किए गए हैं, जिनका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

प्रश्न 9.

(A) मानचित्र संबंधी प्रश्न (दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के विकल्प के रूप में लिखित उत्तर):

(i) किस स्थान पर नील की खेती करने वाले किसानों का आंदोलन हुआ था ?

• उत्तर: चम्पारण (बिहार)

(ii) सूती मिल श्रमिकों ने कहाँ पर सत्याग्रह किया था ?

• उत्तर: अहमदाबाद

(iii) किस स्थान पर दिसम्बर, 1920 में काँग्रेस का अधिवेशन हुआ था ?

• उत्तर: नागपुर

(iv) किस स्थान पर सर्वप्रथम सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारंभ हुआ था ?

• उत्तर: दांडी (गुजरात)

(v) किस स्थान पर काँग्रेस के अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य की माँग सर्वप्रथम की गई थी ?

• उत्तर: लाहौर

उत्तर:

यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।

प्रश्न 9.

(B) मानचित्र संबंधी प्रश्न (दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के विकल्प के रूप में लिखित उत्तर):

(i) ताप्ती नदी किस सागर में गिरती है ?

• उत्तर: अरब सागर

(ii) राजस्थान की राजधानी का नाम क्या है ?

• उत्तर: जयपुर

(iii) कांडला बन्दरगाह भारत में किस तट पर स्थित है ?

• उत्तर: पश्चिमी तट (गुजरात)

(iv) कॉरबेट राष्ट्रीय उद्यान कहाँ है ?

• उत्तर: उत्तराखंड

(v) अरावली श्रेणी कहाँ है ?

• उत्तर: राजस्थान (एवं हरियाणा-दिल्ली तक विस्तृत)

उत्तर:

यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।