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UP Board Class 10th Science Half Yearly Paper 2026 C code

कक्षा 10वीं · विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

20 सेमी फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने एक वस्तु 30 सेमी की दूरी पर रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया है:

अवतल दर्पण की फोकस दूरी f = -20 सेमी

वस्तु की दूरी u = -30 सेमी

ज्ञात सूत्र:

1/f = 1/v + 1/u

हल:

1/(-20) = 1/v + 1/(-30)

-1/20 = 1/v - 1/30

1/v = -1/20 + 1/30

1/v = (-3 + 2) / 60

1/v = -1/60

v = -60 सेमी

अतः उत्तर:

प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने (वस्तु की ही ओर) 60 सेमी की दूरी पर बनता है। प्रतिबिम्ब वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रश्न 2.

एक दूर-दृष्टि दोष वाले मनुष्य का निकट बिन्दु 150 सेमी है यदि वह 25 सेमी पर रखी पुस्तक को पढ़ना चाहता है तो कितनी फोकस दूरी का कौनसा लेन्स लगाना होगा ?

उत्तर:

दिया है:

प्रतिबिम्ब की दूरी v = -150 सेमी

वस्तु की दूरी u = -25 सेमी

ज्ञात सूत्र:

1/f = 1/v - 1/u

हल:

1/f = 1/(-150) - 1/(-25)

1/f = -1/150 + 1/25

1/f = (-1 + 6) / 150

1/f = 5 / 150

1/f = 1 / 30

f = +30 सेमी

अतः उत्तर:

मनुष्य को +30 सेमी फोकस दूरी वाला उत्तल लेन्स लगाना होगा।

प्रश्न 3.

ओम का नियम लिखिए। यदि 5 ओम के प्रतिरोध युक्त तार में 12 वोल्ट विभवान्तर उत्पन्न हो तो प्रवाहित धारा का मान बताइए।

उत्तर:

ओम का नियम:

यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे ताप, लम्बाई आदि) स्थिर रहें, तो चालक में प्रवाहित होने वाली वैद्युत धारा उसके सिरों के बीच लगाए गए विभवान्तर के समानुपाती होती है।

अर्थात, V ∝ I या V = I × R, जहाँ R चालक का प्रतिरोध है।

आंकिक भाग:

दिया है:

प्रतिरोध R = 5 ओम

विभवान्तर V = 12 वोल्ट

ज्ञात सूत्र:

I = V / R

हल:

I = 12 / 5

I = 2.4 ऐम्पियर

अतः उत्तर:

तार में प्रवाहित धारा का मान 2.4 ऐम्पियर है।

प्रश्न 4.

(क) प्रकाश का परावर्तन किसे कहते हैं ? इसके नियम लिखिए।

(ख) प्रकाश का अपवर्तन क्या है ? इसके नियम लिखिए।

अथवा

प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण से क्या तात्पर्य है ? प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का वर्ण विक्षेपण समझाइए। वर्ण-विक्षेपण की घटना काँच के आयताकार ठोस द्वारा क्यों नहीं होती है ?

उत्तर:

(क) प्रकाश का परावर्तन:

जब प्रकाश की किरण किसी चिकने या पॉलिशदार तल से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट आती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश के परावर्तन के नियम:

1. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

2. आपतन कोण (i) सदैव परावर्तन कोण (r) के बराबर होता है (i = r)।

(ख) प्रकाश का अपवर्तन:

जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अपने मूल मार्ग से विचलित हो जाती है। प्रकाश की इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

प्रकाश के अपवर्तन के नियम:

1. आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

2. किन्हीं दो माध्यमों और प्रकाश के किसी निश्चित रंग के लिए, आपतन कोण की ज्या (sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात एक नियतांक होता है। इसे स्नेल का नियम कहते हैं (sin i / sin r = नियतांक)।

अथवा

प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण:

जब सूर्य का श्वेत प्रकाश किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपने घटक सात रंगों में विभक्त हो जाता है। इस घटना को प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।

प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण:

प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक प्रकाश के विभिन्न रंगों के लिए अलग-अलग होता है। बैंगनी रंग के प्रकाश का विचलन सबसे अधिक तथा लाल रंग के प्रकाश का विचलन सबसे कम होता है। इस कारण प्रिज्म से बाहर निकलने पर रंगों की एक पट्टी प्राप्त होती है जिसे वर्णक्रम (स्पेक्ट्रम) कहते हैं।

चित्र का विवरण:

- बाएँ भाग में एक पारदर्शी त्रिभुजाकार काँच का प्रिज्म स्थित है।

- बाएँ से एक पतली श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म के प्रथम फलक पर आपतित होती है।

- प्रिज्म के भीतर प्रकाश सात रंगों में विभाजित हो जाता है।

- दाएँ फलक से बाहर निकलते समय ये रंग और फैल जाते हैं तथा दाएँ रखे पर्दे पर नीचे से ऊपर के क्रम में बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल रंग प्राप्त होते हैं।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

काँच के आयताकार ठोस द्वारा वर्ण-विक्षेपण न होने का कारण:

आयताकार काँच की स्लैब के दो अपवर्तक पृष्ठ परस्पर समानान्तर होते हैं। प्रथम पृष्ठ पर रंगों का जो विभाजन होता है, दूसरे समानान्तर पृष्ठ से बाहर निकलते समय उनका अपवर्तन विपरीत दिशा में उतना ही हो जाता है। इससे सभी रंग पुनः मिलकर श्वेत प्रकाश के रूप में बाहर निकल आते हैं और वर्ण-विक्षेपण दिखाई नहीं देता।

प्रश्न 5.

प्रतिस्थापन तथा योगात्मक अभिक्रिया को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

1. प्रतिस्थापन अभिक्रिया:

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी कार्बनिक यौगिक के किसी परमाणु या परमाणु समूह का स्थान कोई अन्य परमाणु या परमाणु समूह ले लेता है, प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।

उदाहरण:

सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में मीथेन की क्लोरीन से अभिक्रिया होने पर क्लोरोमीथेन तथा हाइड्रोजन क्लोराइड बनता है।

CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl

2. योगात्मक अभिक्रिया:

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन किसी अन्य पदार्थ से संयुक्त होकर केवल एक ही उत्पाद बनाते हैं, योगात्मक अभिक्रिया कहलाती है।

उदाहरण:

एथिलीन निकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन से क्रिया करके एथेन बनाती है।

CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃-CH₃

प्रश्न 6.

pH मान किसे कहते हैं ? अम्लीय, उदासीन तथा क्षारीय विलयन का pH मान कितना होता है ? दन्तक्षय में pH मान की भूमिका बताइए।

उत्तर:

pH मान:

किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के ऋणात्मक लघुगणक को उस विलयन का pH मान कहते हैं।

pH = -log₁₀[H⁺]

विभिन्न विलयनों का pH मान:

1. अम्लीय विलयन: pH मान 7 से कम होता है।

2. उदासीन विलयन: pH मान 7 के बराबर होता है।

3. क्षारीय विलयन: pH मान 7 से अधिक होता है।

दन्तक्षय में pH मान की भूमिका:

मुँह के अंदर का pH मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय (सड़ना) शुरू हो जाता है। दाँतों का इनेमल कैल्शियम फॉस्फेट से बना होता है जो कठोर होता है, परन्तु मुँह का pH 5.5 से कम होने पर यह संक्षारित होने लगता है। मुँह में उपस्थित जीवाणु भोजन के बाद बचे शर्करा व खाद्य पदार्थों का निम्नीकरण करके अम्ल उत्पन्न करते हैं। इससे बचने के लिए भोजन के बाद मुँह साफ करना चाहिए तथा क्षारीय टूथपेस्ट का उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न 7.

(क) धातु के शोधन की विद्युत अपघटनी विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

(ख) अयस्क के सांद्रण की झाग प्लवन विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

अथवा

प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम, अणुसूत्र तथा बनाने की विधि, रासायनिक गुण तथा उपयोग लिखिए।

उत्तर:

(क) धातु के शोधन की विद्युत अपघटनी विधि:

विद्युत अपघटनीय शोधन अशुद्ध धातुओं (जैसे ताँबा, जस्ता, ऐलुमिनियम आदि) को शुद्ध करने की सबसे उपयुक्त एवं व्यापक विधि है।

सिद्धांत एवं कार्यविधि:

1. इस विधि में अशुद्ध धातु की मोटी छड़ को ऐनोड (धनात्मक ध्रुव) तथा शुद्ध धातु की पतली पट्टी को कैथोड (ऋणात्मक ध्रुव) बनाया जाता है।

2. धातु के किसी घुलनशील लवण के जलीय विलयन को विद्युत अपघट्य के रूप में प्रयुक्त किया जाता है (जैसे ताँबे के शोधन हेतु कॉपर सल्फेट का अम्लीकृत विलयन)।

3. जब विद्युत अपघट्य में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो ऐनोड से अशुद्ध धातु घुलकर विलयन में चली जाती है और विलयन से उतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है।

4. अघुलनशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे पेंदे में एकत्र हो जाती हैं, जिन्हें ऐनोड पंक कहते हैं।

रासायनिक अभिक्रिया (ताँबे के शोधन हेतु):

ऐनोड पर (ऑक्सीकरण): Cu (अशुद्ध) -> Cu2+ + 2e-

कैथोड पर (अपचयन): Cu2+ + 2e- -> Cu (शुद्ध)

चित्र का वर्णन:

- एक आयताकार काँच या प्लास्टिक का पात्र होता है।

- पात्र में कॉपर सल्फेट (CuSO4) और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) का जलीय मिश्रण भरा होता है।

- बाएँ भाग में अशुद्ध कॉपर की मोटी छड़ लगी होती है, जो बैटरी के धन ध्रुव से जुड़कर ऐनोड बनाती है।

- दाएँ भाग में शुद्ध कॉपर की पतली पट्टी लगी होती है, जो बैटरी के ऋण ध्रुव से जुड़कर कैथोड बनाती है।

- ऐनोड छड़ के ठीक नीचे पेंदे में अघुलनशील अशुद्धियाँ (ऐनोड पंक) दिखाई देती हैं।

- परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

(ख) अयस्क के सांद्रण की झाग प्लवन विधि:

यह विधि मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों (जैसे कॉपर पायराइट CuFeS2, गैलेना PbS, जिंक ब्लेंड ZnS) के सांद्रण के लिए प्रयोग की जाती है।

सिद्धांत एवं कार्यविधि:

1. यह विधि अयस्क तथा गैंग (अशुद्धियों) के जल तथा तेल से भीगने के भिन्न-भिन्न गुणों पर आधारित है। सल्फाइड अयस्क के कण तेल से भीगते हैं, जबकि गैंग के कण जल से भीगते हैं।

2. एक बड़े टैंक में बारीक पिसे हुए अयस्क को जल के साथ मिलाकर उसमें चीड़ का तेल (Pine oil) तथा झाग कारक (जैसे पोटैशियम ज़ैंथेट) मिलाया जाता है।

3. इस मिश्रण में एक खोखली नली द्वारा तीव्र गति से वायु प्रवाहित की जाती है।

4. वायु के प्रभाव से तेल से भीगे सल्फाइड अयस्क के कण झाग के रूप में सतह पर तैरने लगते हैं।

5. इस झाग को ऊपर से अलग करके सुखा लिया जाता है, जिससे सांद्रित अयस्क प्राप्त होता है। अशुद्धियाँ पेंदे में बैठ जाती हैं।

चित्र का वर्णन:

- एक बड़ा बेलनाकार टैंक होता है जिसमें जल, चीड़ का तेल और अयस्क का मिश्रण भरा होता है।

- टैंक के ऊपर से मध्य में एक खोखली वायु-नली नीचे की ओर प्रविष्ट होती है, जिसके निचले सिरे पर छिद्रित विक्षोभक लगा होता है।

- टैंक के ऊपरी भाग में झाग (सल्फाइड अयस्क के कणों सहित) तैरता हुआ दिखाई देता है, जिसे एक ओर से बाहर निकाला जाता है।

- टैंक के पेंदे में जल से भीगी हुई भारी अशुद्धियाँ (गैंग) बैठी हुई दिखाई देती हैं।

- परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

अथवा (प्रश्न 7 का दूसरा विकल्प)

प्लास्टर ऑफ पेरिस:

1. रासायनिक नाम: कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट

2. अणुसूत्र: CaSO4 · 1/2 H2O अथवा (CaSO4)2 · H2O

3. बनाने की विधि:

जिप्सम (CaSO4 · 2H2O) को 100°C (373 K) ताप पर गर्म करने पर यह जल के तीन-चौथाई अणुओं का त्याग कर प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाता है।

रासायनिक समीकरण:

CaSO4 · 2H2O --(373 K पर गर्म करने पर)--> CaSO4 · 1/2 H2O + 1.5 H2O

अथवा

2(CaSO4 · 2H2O) --(373 K पर गर्म करने पर)--> (CaSO4)2 · H2O + 3H2O

4. रासायनिक गुण:

(i) जल से अभिक्रिया (जमने का गुण): प्लास्टर ऑफ पेरिस में जल मिलाने पर यह पुनः जिप्सम में बदलकर एक कठोर ठोस पदार्थ बन जाता है।

CaSO4 · 1/2 H2O + 1.5 H2O -> CaSO4 · 2H2O (जिप्सम - कठोर ठोस)

(ii) ऊष्मा का प्रभाव: 200°C से अधिक ताप पर गर्म करने पर इसका सम्पूर्ण निर्जलीकरण हो जाता है और निर्जल कैल्शियम सल्फेट (मृत्त तापित प्लास्टर) प्राप्त होता है।

CaSO4 · 1/2 H2O -> CaSO4 + 1/2 H2O

5. उपयोग:

(i) टूटी हुई हड्डियों को सही स्थान पर स्थिर रखने के लिए प्लास्टर चढ़ाने में।

(ii) खिलौने, मूर्तियां, सजावटी सामान तथा सांचे बनाने में।

(iii) दीवारों तथा छतों को समतल व चिकना बनाने में।

(iv) प्रयोगशाला में उपकरणों को वायु-रुद्ध करने में।

प्रश्न 8.

पोषण क्या है? हमें इसकी आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर:

पोषण:

जीवों द्वारा भोजन ग्रहण करने, उसे पचाने, अवशोषित करने तथा शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए उसका उपयोग करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया को पोषण कहते हैं।

पोषण की आवश्यकता:

हमें पोषण की आवश्यकता निम्नलिखित मुख्य कारणों से होती है:

1. ऊर्जा की प्राप्ति: शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं (जैसे श्वसन, उत्सर्जन, परिसंचरण आदि) को संचालित करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो पोषण द्वारा प्राप्त होती है।

2. शारीरिक वृद्धि एवं विकास: नए ऊतकों तथा कोशिकाओं के निर्माण और शरीर के समुचित विकास के लिए कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि पोषक तत्व आवश्यक हैं।

3. टूट-फूट की मरम्मत: शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं तथा ऊतकों की मरम्मत के लिए प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।

4. रोगों से सुरक्षा: विटामिन तथा खनिज लवण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और शरीर को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं।

प्रश्न 9.

रुधिर तथा लसीका में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

रुधिर तथा लसीका में चार प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं:

1. रंग:

- रुधिर: यह हीमोग्लोबिन की उपस्थिति के कारण गहरे लाल रंग का द्रव है।

- लसीका: यह हीमोग्लोबिन की अनुपस्थिति के कारण रंगहीन या हल्के पीले रंग का द्रव है।

2. लाल रक्त कणिकाएं (RBCs):

- रुधिर: इसमें लाल रक्त कणिकाएं अत्यधिक संख्या में उपस्थित होती हैं।

- लसीका: इसमें लाल रक्त कणिकाएं पूर्णतः अनुपस्थित होती हैं।

3. घटक एवं पोषक तत्व:

- रुधिर: इसमें घुलनशील प्रोटीन, ऑक्सीजन तथा पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है।

- लसीका: इसमें अघुलनशील प्रोटीन, उत्सर्जी पदार्थ तथा कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है।

4. बहाव की दिशा:

- रुधिर: इसका परिसंचरण हृदय से अंगों की ओर तथा अंगों से वापस हृदय की ओर दोनों दिशाओं में होता है।

- लसीका: इसका प्रवाह केवल ऊतकों से हृदय की ओर एक ही दिशा में होता है।

प्रश्न 10.

मानव मस्तिष्क के चार कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

मानव मस्तिष्क के चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

1. संवेदी सूचनाओं का ग्रहण एवं विश्लेषण: मस्तिष्क शरीर के विभिन्न संवेदी अंगों (आँख, कान, नाक, त्वचा, जीभ) से प्राप्त सूचनाओं को ग्रहण करता है, उनका विश्लेषण करता है और उपयुक्त अनुक्रिया हेतु आदेश देता है।

2. ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण: चलना, बोलना, लिखना, उठना-बैठना आदि ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण एवं संतुलन मस्तिष्क का प्रमस्तिष्क और अनुमस्तिष्क करते हैं।

3. अनैच्छिक क्रियाओं का नियमन: हृदय की धड़कन, श्वसन दर, रक्तचाप, पाचक रसों का स्राव आदि अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण मस्तिष्क का मेडुला ऑबलॉन्गेटा भाग करता है।

4. विचार, स्मृति एवं बुद्धिमत्ता का केंद्र: सोचना, विचार करना, याद रखना (स्मृति), तर्क करना तथा भावनाओं का नियंत्रण करना प्रमस्तिष्क के मुख्य कार्य हैं।

प्रश्न 11.

लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में छह : अन्तर लिखिए।

अथवा

प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया की परिभाषा तथा रासायनिक समीकरण लिखिए तथा इसकी क्रिया-विधि को समझाइए।

उत्तर:

लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में छह प्रमुख अन्तर:

1. जनकों की संख्या:

- अलैंगिक जनन: इसमें केवल एक ही जनक की आवश्यकता होती है।

- लैंगिक जनन: इसमें सामान्यतः दो विपरीत लिंग वाले जनकों (नर तथा मादा) की आवश्यकता होती है।

2. युग्मक (Gametes) निर्माण:

- अलैंगिक जनन: इसमें नर तथा मादा युग्मकों का निर्माण नहीं होता है।

- लैंगिक जनन: इसमें नर तथा मादा युग्मकों का निर्माण अनिवार्य रूप से होता है।

3. निषेचन (Fertilization):

- अलैंगिक जनन: इसमें निषेचन की क्रिया नहीं होती है।

- लैंगिक जनन: इसमें युग्मकों के संलयन (निषेचन) से युग्मनज बनता है।

4. कोशिका विभाजन:

- अलैंगिक जनन: इसमें केवल समसूत्री कोशिका विभाजन होता है।

- लैंगिक जनन: इसमें युग्मक जनन के समय अर्धसूत्री तथा बाद में समसूत्री विभाजन होता है।

5. आनुवंशिक विविधता:

- अलैंगिक जनन: उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से अपने जनक के बिल्कुल समान (क्लोन) होती है; इसमें विविधताएं उत्पन्न नहीं होतीं।

- लैंगिक जनन: उत्पन्न संतति में दोनों जनकों के गुण आते हैं, जिससे विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं जो विकास में सहायक हैं।

6. क्रिया की जटिलता एवं दर:

- अलैंगिक जनन: यह एक सरल, तीव्र तथा कम समय लेने वाली प्रक्रिया है।

- लैंगिक जनन: यह एक जटिल, धीमी तथा अधिक समय लेने वाली प्रक्रिया है।

अथवा (प्रश्न 11 का दूसरा विकल्प)

प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया:

1. परिभाषा:

हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) तथा मृदा से जल (H2O) लेकर कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण करने तथा उप-उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन (O2) गैस मुक्त करने की प्रक्रिया को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं।

2. रासायनिक समीकरण:

6CO2 + 12H2O --(सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल)--> C6H12O6 + 6H2O + 6O2

3. प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया-विधि:

प्रकाश-संश्लेषण एक उपचयी-अपचयी (Redox) क्रिया है जो हरितलवक (Chloroplast) में दो चरणों में पूर्ण होती है:

(i) प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction):

- यह अभिक्रिया हरितलवक के 'ग्रैना' भाग में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होती है।

- सूर्य का प्रकाश क्लोरोफिल के अणुओं द्वारा अवशोषित होकर उन्हें उत्तेजित करता है।

- जल का प्रकाशिक अपघटन होता है जिससे हाइड्रोजन आयन (H+), इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीजन गैस (O2) बनती है।

समीकरण: 2H2O -> 4H+ + O2 + 4e-

- इस चरण में ATP तथा NADPH2 के रूप में रासायनिक ऊर्जा का निर्माण होता है।

(ii) अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction):

- यह अभिक्रिया हरितलवक के 'स्ट्रोमा' भाग में होती है, जिसके लिए प्रकाश की प्रत्यक्ष आवश्यकता नहीं होती।

- इस चरण में प्रकाशिक अभिक्रिया में बने ATP तथा NADPH2 की ऊर्जा का उपयोग करके वायुमंडलीय CO2 का अपचयन होता है और ग्लूकोज (C6H12O6) का निर्माण होता है।

प्रश्न 12.

कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है तो उसका pH मान है–

(A) 1

(B) 4

(C) 5

(D) 10

उत्तर:

सही विकल्प: (D) 10

व्याख्या:

जो विलयन लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है, वह क्षारीय प्रकृति का होता है। क्षारीय विलयन का pH मान हमेशा 7 से अधिक होता है। दिए गए विकल्पों में केवल 10 ही 7 से अधिक है, अतः pH मान 10 होगा।

प्रश्न 13.

एण्‍टीमनी है–

(A) धातु

(B) अधातु

(C) उपधातु

(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

विकल्प (C) उपधातु

व्याख्या: एंटीमनी (Sb) में धातु और अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं, इसलिए यह एक उपधातु है।

प्रश्न 14.

स्‍वपोषी पोषण के िलए आवश्‍यक है–

(A) CO₂ गैस तथा जल

(B) क्‍लोरोिफल

(C) सूर्य का प्रकाश

(D) ये सभी

उत्तर:

विकल्प (D) ये सभी

व्याख्या: स्वपोषी पौधों में प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा भोजन निर्माण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, जल, क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश इन सभी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 15.

मनुष्‍य में वृक्‍क तन्‍त्र का भाग है जो सम्‍बिन्‍धत है–

(A) पोषण

(B) श्‍वसन

(C) उत्‍सजर्न

(D) पिरवहन

उत्तर:

विकल्प (C) उत्‍सजर्न

व्याख्या: वृक्क (Kidney) मानव शरीर का मुख्य उत्सर्जी अंग है, जो रक्त से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को छानकर बाहर निकालता है।

प्रश्न 16.

शाम के समय वाष्‍पोत्‍सर्जन की दर हो जाती है–

(A) कम

(B) अिधक

(C) दो गुनी

(D) शून्य

उत्तर:

विकल्प (A) कम

व्याख्या: शाम के समय प्रकाश की तीव्रता घटने और तापमान में कमी आने से पौधों के रंध्र बंद होने लगते हैं, जिससे वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है।

प्रश्न 17.

इन्सुलिन की कमी से हो जाता है–

(A) मधुमेह

(B) रक्‍तअल्‍पता

(C) स्‍कवीर्

(D) बेरी–बेरी

उत्तर:

विकल्प (A) मधुमेह

व्याख्या: अग्न्याशय द्वारा स्रावित इंसुलिन हार्मोन रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है; इसकी कमी से मधुमेह (Diabetes) रोग हो जाता है।

प्रश्न 18.

निम्नलिखित में गैसीय हार्मोन है–

(A) प्रोजेस्‍टे रॉन

(B) एिथलीन

(C) ऑिक्‍सन

(D) ऑक्‍सीटोिसन

उत्तर:

विकल्प (B) एिथलीन

व्याख्या: एथलीन पौधों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एकमात्र गैसीय पादप हार्मोन है, जो मुख्य रूप से फलों को पकाने में सहायक होता है।

प्रश्न 19.

19. अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है–

(A) अमीबा में

(B) ईस्ट में

(C) प्लाज्मोडियम में

(D) लीशमैनिया में

उत्तर:

(B) ईस्ट में

व्याख्या: मुकुलन (Budding) एक प्रकार का अलैंगिक जनन है जो ईस्ट (Yeast) तथा हाइड्रा में पाया जाता है, जिसमें जनक कोशिका पर एक छोटा उभार बनता है जो अलग होकर नया जीव बनाता है।

प्रश्न 20.

20. नर जनन अंगों से सम्बन्धित ग्रन्थि है–

(A) एपिडिडाइमिस

(B) अधिवृक्क

(C) प्रोस्टेट

(D) अग्न्याशय

उत्तर:

(C) प्रोस्टेट

व्याख्या: प्रोस्टेट ग्रन्थि नर जनन तंत्र का एक प्रमुख अंग है, जो शुक्राणुओं के पोषण तथा तरलता के लिए क्षारीय द्रव का स्राव करती है।

प्रश्न 1.

1. 20 सेमी फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने एक वस्तु 30 सेमी की दूरी पर रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया है:

अवतल दर्पण की फोकस दूरी f = -20 सेमी

वस्तु की दूरी u = -30 सेमी

ज्ञात सूत्र:

1/f = 1/v + 1/u

हल:

1/v = 1/f - 1/u

1/v = 1/(-20) - 1/(-30)

1/v = -1/20 + 1/30

1/v = (-3 + 2) / 60

1/v = -1 / 60

v = -60 सेमी

अतः उत्तर:

प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने (वस्तु की ओर) 60 सेमी की दूरी पर वास्तविक तथा उल्टा बनेगा।

प्रश्न 2.

2. एक दूर-दृष्टि दोष वाले मनुष्य का निकट बिन्दु 150 सेमी है यदि वह 25 सेमी पर रखी पुस्तक को पढ़ना चाहता है तो कितनी फोकस दूरी का कौनसा लेन्स लगाना होगा ?

उत्तर:

दिया है:

दूषित नेत्र के लिए प्रतिबिम्ब की दूरी v = -150 सेमी

स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (वस्तु दूरी) u = -25 सेमी

ज्ञात सूत्र:

1/f = 1/v - 1/u

हल:

1/f = 1/(-150) - 1/(-25)

1/f = -1/150 + 1/25

1/f = (-1 + 6) / 150

1/f = 5 / 150

1/f = 1 / 30

f = +30 सेमी

अतः उत्तर:

मनुष्य को +30 सेमी फोकस दूरी वाला उत्तल लेन्स का चश्मा लगाना होगा।

प्रश्न 3.

3. ओम का नियम लिखिए। यदि 5 ओम के प्रतिरोध युक्त तार में 12 वोल्ट विभवान्तर उत्पन्न हो तो प्रवाहित धारा का मान बताइए।

उत्तर:

ओम का नियम:

यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे ताप, दाब आदि) स्थिर रहें, तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवान्तर उसमें प्रवाहित वैद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है।

V = I × R

दिया है:

प्रतिरोध R = 5 ओम

विभवान्तर V = 12 वोल्ट

ज्ञात सूत्र:

I = V / R

हल:

I = 12 / 5

I = 2.4 ऐम्पियर

अतः उत्तर:

तार में प्रवाहित धारा का मान 2.4 ऐम्पियर है।

प्रश्न 4.

(क)

4. (क) प्रकाश का परावर्तन किसे कहते हैं ? इसके नियम लिखिए।

उत्तर:

प्रकाश का परावर्तन:

जब प्रकाश की किरण किसी पॉलिशदार अथवा चिकने पृष्ठ पर आपतित होती है, तो उसका अधिकांश भाग उसी माध्यम में वापस लौट आता है। प्रकाश के चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौटने की इस प्रक्रिया को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश के परावर्तन के नियम:

1. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं।

2. आपतन कोण (i) का मान सदैव परावर्तन कोण (r) के मान के बराबर होता है, अर्थात् ∠i = ∠r।

प्रश्न 4.

(ख)

4. (ख) प्रकाश का अपवर्तन क्या है ? इसके नियम लिखिए।

उत्तर:

प्रकाश का अपवर्तन:

जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अपने मूल पथ से विचलित हो जाती है। इस परिघटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

प्रकाश के अपवर्तन के नियम:

1. आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को पृथक करने वाले पृष्ठ के आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

2. किन्हीं दो माध्यमों और एक निश्चित रंग के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या (sin i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात एक नियतांक होता है (स्नेल का नियम)। sin i / sin r = नियतांक।

प्रश्न 4.

(अथवा)

प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण से क्या तात्पर्य है? प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का वर्ण विक्षेपण समझाइए। वर्ण-विक्षेपण की घटना काँच के आयताकार ठोस द्वारा क्यों नहीं होती है?

उत्तर:

प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण:

सूर्य का श्वेत प्रकाश जब किसी पारदर्शी प्रिज्म में से होकर गुजरता है, तो वह अपने अवयवी सात रंगों में विभाजित हो जाता है। प्रकाश के इस प्रकार रंगों में विभक्त होने की घटना को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।

प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण:

श्वेत प्रकाश सात विभिन्न रंगों का मिश्रण होता है। काँच में विभिन्न रंगों के प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होती है। बैंगनी रंग के प्रकाश का अपवर्तनांक तथा विचलन सबसे अधिक होता है, जबकि लाल रंग के प्रकाश का विचलन सबसे कम होता है। इस कारण प्रिज्म से निर्गत होते समय सभी रंग अलग-अलग कोणों पर झुक जाते हैं और पर्दे पर सात रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल) की एक पट्टी (वर्णक्रम या स्पेक्ट्रम) प्राप्त होती है।

आयताकार काँच के ठोस द्वारा वर्ण-विक्षेपण न होने का कारण:

काँच के आयताकार स्लैब के दो अपवर्तक पृष्ठ परस्पर समानांतर होते हैं। प्रथम पृष्ठ पर जब श्वेत प्रकाश का अपवर्तन होता है तो रंगों का विक्षेपण होता है, किन्तु द्वितीय समानांतर पृष्ठ पर अपवर्तन होने पर विपरीत दिशा में विचलन होता है। इससे सभी रंग पुनः मिलकर श्वेत प्रकाश बना लेते हैं। आयताकार स्लैब से निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर बाहर निकलती है, अतः वर्ण-विक्षेपण दृष्टिगोचर नहीं होता।

चित्र का विवरण:

1. आकृति: एक त्रिभुजाकार काँच का प्रिज्म।

2. बाएँ अपवर्तक पृष्ठ पर आपतित श्वेत प्रकाश की किरण।

3. प्रिज्म के अंदर सात रंगों में विभाजित होती किरणें।

4. दाएँ पृष्ठ से निर्गत होकर पर्दे पर स्पेक्ट्रम: सबसे नीचे बैंगनी रंग, मध्य में हरा-पीला, तथा सबसे ऊपर लाल रंग।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

प्रश्न 5.

प्रतिस्थापन तथा योगात्मक अभिक्रिया को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

1. प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction):

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी कार्बनिक यौगिक के किसी अणु से एक या एक से अधिक परमाणु या परमाणु समूह किसी दूसरे परमाणु या परमाणु समूह द्वारा विस्थापित (प्रतिस्थापित) हो जाते हैं, प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।

उदाहरण:

मेथेन की क्लोरीन के साथ सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अभिक्रिया:

CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (सूर्य का प्रकाश)

इसमें मेथेन (CH₄) का एक हाइड्रोजन परमाणु क्लोरीन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापित होकर क्लोरोमेथेन (CH₃Cl) तथा हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) बनाता है।

2. योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction):

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ (अणु) आपस में जुड़कर केवल एक ही नया पदार्थ बनाते हैं और कोई भी सह-उत्पाद नहीं बनता, योगात्मक अभिक्रिया कहलाती है। यह प्रायः असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्कीन व ऐल्काइन) प्रदर्शित करते हैं।

उदाहरण:

एथिलीन का निकिल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन के साथ संयोजन (हाइड्रोजीनीकरण):

CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃-CH₃ (170°C - 200°C / Ni उत्प्रेरक)

इसमें एथिलीन (एथीन) हाइड्रोजन से क्रिया करके एथेन बनाती है।

प्रश्न 6.

pH मान किसे कहते हैं? अम्लीय, उदासीन तथा क्षारीय विलयन का pH मान कितना होता है? दन्तक्षय में pH मान की भूमिका बताइए।

उत्तर:

pH मान की परिभाषा:

किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सांद्रता [H⁺] के ऋणात्मक लघुगणक (negative logarithm) को उस विलयन का pH मान कहते हैं।

सूत्र: pH = -log₁₀[H⁺]

अम्लीय, उदासीन तथा क्षारीय विलयन का pH मान:

1. अम्लीय विलयन का pH मान 7 से कम होता है (pH < 7)।

2. उदासीन विलयन का pH मान 7 के बराबर होता है (pH = 7)।

3. क्षारीय विलयन का pH मान 7 से अधिक होता है (pH > 7)।

दन्तक्षय में pH मान की भूमिका:

मुँह के अंदर का pH मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का क्षय (दन्तक्षय) प्रारम्भ हो जाता है। दाँतों का इनैमल (दन्तवल्क) कैल्शियम फॉस्फेट से बना होता है, जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। जब हम शर्करा या भोजन खाते हैं, तो मुँह में उपस्थित जीवाणु (बैक्टीरिया) भोजन के अवशेषों और शर्करा का अपघटन करके अम्ल उत्पन्न करते हैं। इस अम्ल के कारण मुँह का pH मान 5.5 से कम हो जाता है, जिससे दाँतों का इनैमल क्षरित होने लगता है।

रोकथाम के लिए क्षारीय दन्त मंजन (टूथपेस्ट) का उपयोग किया जाता है, जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर दन्तक्षय को रोकता है।

प्रश्न 7.

(क)

धातु के शोधन की विद्युत अपघटनी विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर:

धातु के शोधन की विद्युत अपघटनी विधि:

अशुद्ध धातुओं को विद्युत अपघटन द्वारा शुद्ध करने की प्रक्रिया को विद्युत अपघटनी परिष्करण या शोधन कहते हैं। कॉपर (ताँबा), जिंक, ऐलुमिनियम आदि धातुओं का शोधन इसी विधि द्वारा किया जाता है।

कार्यविधि तथा सिद्धांत:

1. इस विधि में एक टैंक (पात्र) में शुद्ध की जाने वाली धातु के लवण का जलीय विलयन (विद्युत अपघट्य) भरा जाता है।

2. अशुद्ध धातु की मोटी छड़ को ऐनोड (धनात्मक ध्रुव) बनाया जाता है।

3. शुद्ध धातु की पतली पट्टी को कैथोड (ऋणात्मक ध्रुव) बनाया जाता है।

4. जब विद्युत अपघट्य में से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो ऐनोड से अशुद्ध धातु घुल-घुल कर विलयन में चली जाती है और विद्युत अपघट्य से उतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है।

5. अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे बैठ जाती हैं, जिन्हें ऐनोड पंक कहते हैं।

सचित्र विवरण:

- आकृति/रूपरेखा: एक आयताकार काँच या प्लास्टिक का पात्र (टैंक) जिसमें विद्युत अपघट्य विलयन भरा होता है।

- ऐनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड): पात्र के बाएँ भाग में स्थित अशुद्ध कॉपर (या धातु) की मोटी छड़, जो बैटरी के धनात्मक (+) टर्मिनल से जुड़ी है।

- कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड): पात्र के दाएँ भाग में स्थित शुद्ध कॉपर (या धातु) की पतली छड़, जो बैटरी के ऋणात्मक (-) टर्मिनल से जुड़ी है।

- विद्युत अपघट्य: पात्र के मध्य और नीचे भरा अम्लीकृत कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का घोल।

- ऐनोड पंक: ऐनोड छड़ के ठीक नीचे पात्र के तल पर एकत्रित अविलेय अशुद्धियाँ।

- बैटरी व कुंजी: पात्र के ऊपर इलेक्ट्रोडों को जोड़ने वाला परिपथ जिसमें बैटरी और स्विच (कुंजी) श्रेणीक्रम में लगे हैं।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

प्रश्न 7.

(ख)

अयस्क के सांद्रण की झाग प्लवन विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर:

झाग प्लवन विधि (Froth Flotation Process):

यह विधि मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों (जैसे कॉपर पायराइट्स - CuFeS₂, गैलेना - PbS, जिंक ब्लेंड - ZnS) के सांद्रण के लिए प्रयुक्त होती है। यह विधि अयस्क तथा अशुद्धियों (गैंग) की जल तथा तेल से भीगने की भिन्न क्षमता (संसंचन क्षमता) पर आधारित है।

विधि:

1. बारीक पिसे हुए सल्फाइड अयस्क को एक बड़े टैंक में जल के साथ मिलाया जाता है।

2. इसमें थोड़ा चीड़ का तेल (Pine oil) या पोटैशियम जैंथेट तथा झाग स्थायीकारी पदार्थ मिलाया जाता है।

3. टैंक के मध्य में लगी एक नली द्वारा तीव्र गति से वायु की धारा प्रवाहित की जाती है तथा मथक द्वारा मिश्रण को तेजी से हिलाया जाता है।

4. तेल से भीगे हुए सल्फाइड अयस्क के कण हलके होने के कारण झाग के साथ ऊपर सतह पर आ जाते हैं।

5. अशुद्धियाँ (गैंग) जल से भीगकर पात्र के तल में बैठ जाती हैं।

6. ऊपर तैरते हुए झाग को अलग करके सुखा लिया जाता है, जिससे सांद्रित अयस्क प्राप्त होता है।

सचित्र विवरण:

- आकृति/रूपरेखा: एक बड़ा धातु या काँच का बेलनाकार टैंक जिसमें जल, चीड़ का तेल और पिसा हुआ अयस्क भरा होता है।

- वायु प्रवेश नली तथा मथक: टैंक के केंद्र में ऊपर से नीचे की ओर आती हुई एक खोखली नली जिसके निचले सिरे पर घुमाने वाला पंखा (मथक) लगा होता है।

- झाग (सल्फाइड अयस्क): टैंक की ऊपरी सतह पर तैरता हुआ झाग का स्तर जिसमें सांद्रित सल्फाइड अयस्क के कण चिपके होते हैं।

- तलछट (अशुद्धियाँ/गैंग): टैंक के निचले पेंदे में बैठी हुई मिट्टी, बालू व अन्य चट्टानी अशुद्धियाँ।

- झाग संग्रह पात्र: टैंक के ऊपरी किनारे से बाहर निकलता झाग जिसे पास के एक पात्र में एकत्रित किया जाता है।

परीक्षा में इसे एक साधारण, स्पष्ट रूप से लेबल किया हुआ चित्र बनाकर उत्तर दें।

प्रश्न 7.

(अथवा)

प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम, अणुसूत्र तथा बनाने की विधि, रासायनिक गुण तथा उपयोग लिखिए।

उत्तर:

1. रासायनिक नाम: कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (या कैल्शियम सल्फेट अर्धहाइड्रेट)

2. अणुसूत्र: CaSO₄·(1/2)H₂O या (CaSO₄)₂·H₂O

3. बनाने की विधि:

जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 100°C (373 K) ताप पर सावधानीपूर्वक गर्म करने पर प्लास्टर ऑफ पेरिस प्राप्त होता है।

रासायनिक समीकरण:

CaSO₄·2H₂O → CaSO₄·(1/2)H₂O + (3/2)H₂O (373 K ताप पर)

4. रासायनिक गुण:

(i) जल से अभिक्रिया (जमने का गुण):

प्लास्टर ऑफ पेरिस जल के साथ मिलाने पर पुनः कठोर जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है तथा जम जाता है।

CaSO₄·(1/2)H₂O + (3/2)H₂O → CaSO₄·2H₂O (जिप्सम - कठोर ठोस)

(ii) ऊष्मा का प्रभाव:

इसे 200°C से अधिक ताप पर गर्म करने पर इसका सम्पूर्ण निर्जलीकरण हो जाता है और मृत तापित प्लास्टर (अनिर्जल कैल्शियम सल्फेट, CaSO₄) प्राप्त होता है।

CaSO₄·(1/2)H₂O → CaSO₄ + (1/2)H₂O (उच्च ताप पर)

5. उपयोग:

(i) टूटी हुई हड्डियों को सही जगह स्थिर रखने के लिए प्लास्टर चढ़ाने में।

(ii) खिलौने, मूर्तियाँ, सजावटी सामान तथा ढाँचे (साँचे) बनाने में।

(iii) मकानों की दीवारों तथा छतों को समतल व सुंदर बनाने (पीओपी) में।

(iv) प्रयोगशाला में उपकरणों को वायु-रुद्ध करने में।

प्रश्न 8.

पोषण क्या है? हमें इसकी आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर:

पोषण (Nutrition):

जीवों द्वारा भोजन (पोषक तत्वों) को ग्रहण करने तथा उसका शरीर की जैविक क्रियाओं के लिए उपयोग करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया को पोषण कहते हैं।

पोषण की आवश्यकता के कारण:

1. ऊर्जा की प्राप्ति: शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं जैसे श्वसन, पाचन, उत्सर्जन, परिसंचरण आदि को सुचारू रूप से चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो भोजन के ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है।

2. शारीरिक वृद्धि एवं विकास: नए ऊतकों तथा कोशिकाओं के निर्माण से शरीर की वृद्धि होती है, जिसके लिए प्रोटीन, खनिज आदि पोषक तत्व आवश्यक हैं।

3. टूट-फूट की मरम्मत: शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं तथा ऊतकों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए पोषण अनिवार्य है।

4. रोगों से सुरक्षा: विभिन्न विटामिन तथा खनिज लवण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्युनिटी) को मजबूत बनाते हैं तथा रोगों से रक्षा करते हैं।

5. जैविक क्रियाओं का नियंत्रण: शरीर में विभिन्न उपापचयी क्रियाओं के संचालन तथा संतुलन के लिए जल, लवण और एंजाइम निर्माण हेतु पोषण जरूरी है।

प्रश्न 9.

रुधिर तथा लसीका में चार अन्तर लिखिए।

उत्तर:

रुधिर (रक्त) तथा लसीका में चार मुख्य अन्तर निम्नवत् हैं:

1. रंग एवं घटक:

रुधिर: यह लाल रंग का तरल संयोजी ऊतक है क्योंकि इसमें लाल रुधिर कणिकाएँ (RBCs) तथा हीमोग्लोबिन उपस्थित होता है।

लसीका: यह रंगहीन (श्वेत) तरल है क्योंकि इसमें RBCs तथा हीमोग्लोबिन अनुपस्थित होते हैं।

2. प्रोटीन की मात्रा:

रुधिर: इसमें घुलनशील प्रोटीन (जैसे एल्ब्यूमिन, ग्लोबुलिन, फाइब्रिनोजेन) अधिक मात्रा में पाई जाती हैं।

लसीका: इसमें प्रोटीन की मात्रा रुधिर की तुलना में काफी कम होती है तथा यह मुख्यतः अघुलनशील रूप में होती हैं।

3. बहने की दिशा एवं परिसंचरण:

रुधिर: यह हृदय से अंगों की ओर तथा अंगों से वापस हृदय की ओर दोहरा परिसंचरण करता है और बंद रक्त वाहिकाओं (धमनियों व शिराओं) में तेज़ी से बहता है।

लसीका: यह केवल ऊतकों से हृदय की ओर एक ही दिशा में बहता है तथा इसकी गति बहुत धीमी होती है।

4. पोषक तत्व एवं उत्सर्जी पदार्थ:

रुधिर: इसमें ऑक्सीजन एवं पोषक पदार्थों (जैसे ग्लूकोज, एमीनो अम्ल) की मात्रा अधिक होती है।

लसीका: इसमें उत्सर्जी पदार्थों (जैसे यूरिया, कार्बन डाइऑक्साइड) तथा वसा की मात्रा अधिक होती है जबकि ऑक्सीजन तथा पोषक तत्व कम होते हैं।

प्रश्न 10.

मानव मस्तिष्क के चार कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

मानव मस्तिष्क शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र है। इसके चार प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

1. संवेदी सूचनाओं का ग्रहण एवं विश्लेषण: मस्तिष्क शरीर के विभिन्न ज्ञानेंद्रियों (आँख, कान, नाक, त्वचा तथा जीभ) से प्राप्त संवेदनाओं और सूचनाओं को ग्रहण करता है, उनका विश्लेषण करता है तथा उनके आधार पर उचित निर्णय लेता है।

2. ऐच्छिक गतियों का नियंत्रण: मस्तिष्क का अनुमस्तिष्क (सेरेबेलम) तथा प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम) शरीर की ऐच्छिक पेशियों की गतियों जैसे चलना, दौड़ना, बोलना, हाथ हिलाना तथा लिखना आदि को नियंत्रित एवं संतुलित करते हैं।

3. अनैच्छिक क्रियाओं का नियमन: मस्तिष्क का पश्च भाग (मेड्युला ऑबलोंगेटा) शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे हृदय की धड़कन, रक्तचाप, श्वास दर, क्रमाकुंचन तथा पाचक रसों के स्राव को स्वतः नियंत्रित करता है।

4. विचार, चिंतन एवं स्मरण शक्ति: प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम) बुद्धि, तर्क, चिंतन, स्मृति, चेतना, भावना और सीखने की क्षमता का केंद्र होता है। यह भूतकाल के अनुभवों को याद रखकर भविष्य के लिए निर्णय लेने में सहायता करता है।

प्रश्न 11.

लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में छ : अन्तर लिखिए।

उत्तर:

लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में छः मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

1. जनकों की संख्या:

अलैंगिक जनन: इसमें केवल एक ही जनक भाग लेता है।

लैंगिक जनन: इसमें प्रायः दो भिन्न लिंगों वाले (नर और मादा) जनकों की आवश्यकता होती है।

2. युग्मक निर्माण:

अलैंगिक जनन: इसमें युग्मकों (Gametes) का निर्माण नहीं होता है।

लैंगिक जनन: इसमें नर एवं मादा युग्मकों का निर्माण होता है।

3. निषेचन की प्रक्रिया:

अलैंगिक जनन: इसमें निषेचन की क्रिया नहीं होती है।

लैंगिक जनन: इसमें नर युग्मक एवं मादा युग्मक का संलयन (निषेचन) होता है, जिससे युग्मनज (Zygote) बनता है।

4. कोशिका विभाजन का प्रकार:

अलैंगिक जनन: इसमें केवल समसूत्री कोशिका विभाजन होता है।

लैंगिक जनन: इसमें युग्मक निर्माण के समय अर्द्धसूत्री विभाजन तथा युग्मनज के विकास में समसूत्री विभाजन होता है।

5. आनुवंशिक भिन्नता:

अलैंगिक जनन: इससे उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से अपने जनक के बिल्कुल समान (क्लोन) होती है, इसमें भिन्नता उत्पन्न नहीं होती।

लैंगिक जनन: इससे उत्पन्न संतति में दोनों जनकों के गुण होते हैं, जिससे आनुवंशिक भिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं जो जैव विकास में सहायक होती हैं।

6. जनन की गति एवं संतति की संख्या:

अलैंगिक जनन: यह जनन की तीव्र एवं सरल विधि है, जिसमें कम समय में अधिक संख्या में संतति उत्पन्न होती है।

लैंगिक जनन: यह एक जटिल एवं धीमी प्रक्रिया है, जिसमें संतति उत्पन्न होने में अधिक समय लगता है।

अथवा

प्रश्न 11.

प्रकाश–संश्लेषण की क्रिया की परिभाषा तथा रासायनिक समीकरण लिखिए तथा इसकी क्रिया–विधि को समझाइए।

उत्तर:

प्रकाश-संश्लेषण की परिभाषा:

सजीव पौधे की हरी कोशिकाओं द्वारा सूर्य के प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) का उपयोग करके कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) का निर्माण करने तथा ऑक्सीजन (O₂) गैस बाहर निकालने की प्रक्रिया को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं।

रासायनिक समीकरण:

6CO₂ + 12H₂O (सूर्य का प्रकाश / क्लोरोफिल) → C₆H₁₂O₆ + 6H₂O + 6O₂ ↑

प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया-विधि:

प्रकाश-संश्लेषण एक जटिल उपचयी क्रिया है, जो दो मुख्य चरणों में संपन्न होती है:

1. प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction):

यह अभिक्रिया क्लोरोप्लास्ट के ग्रैना (Grana) में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होती है। इसके प्रमुख पद निम्नलिखित हैं:

क) क्लोरोफिल के अणु सौर ऊर्जा को अवशोषित करके उत्तेजित हो जाते हैं और इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करते हैं।

ख) अवशोषित ऊर्जा द्वारा जल के अणुओं का प्रकाशिक अपघटन होता है, जिससे हाइड्रोजन आयन (H⁺) तथा ऑक्सीजन (O₂) बनती है।

2H₂O → 4H⁺ + 4e⁻ + O₂ ↑

ग) ADP से ATP का निर्माण होता है जिसे फोटोफॉस्फोरिलीकरण कहते हैं, तथा NADP बदल कर NADPH में अपचयित हो जाता है।

2. अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction):

यह अभिक्रिया प्रकाश की अनुपस्थिति में भी हो सकती है तथा यह क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा (Stroma) में होती है। इसे केल्विन चक्र भी कहते हैं।

क) इसमें प्रकाशिक अभिक्रिया में बने ATP तथा NADPH की ऊर्जा का उपयोग करके वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का अपचयन होता है।

ख) CO₂ के अपचयन से अंततः शर्करा (ग्लूकोज - C₆H₁₂O₆) का निर्माण होता है।