मानव में वृक्काणु (Nephron) की संरचना एवं क्रियाविधि:
1. वृक्काणु की संरचना (Structure of Nephron):
वृक्काणु (नेफ्रॉन) वृक्क की कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई है। प्रत्येक वृक्क में लाखों वृक्काणु होते हैं। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
- कप/प्याले के आकार का बोमन संपुट (Bowman's Capsule): यह वृक्काणु का ऊपरी चौड़ा भाग है, जिसमें धमनियों की बारीक रक्त केशिकाओं का गुच्छा स्थित होता है, जिसे केशिकागुच्छ (Glomerulus) कहते हैं।
- वृक्क नलिका (Renal Tubule): बोमन संपुट के पीछे एक नलिकाकार भाग होता है, जिसके तीन मुख्य भाग होते हैं—समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT), हेनले लूप (Henle's Loop), तथा दूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT)।
- संग्राहक नलिका (Collecting Duct): दूरस्थ भाग संग्राहक नलिका में खुलता है, जो मूत्र को एकत्र करती है।
2. वृक्काणु की क्रियाविधि (Mechanism of Urine Formation):
मूत्र निर्माण की प्रक्रिया तीन चरणों में सम्पन्न होती है:
1. अतिसूक्ष्म निष्यंदन (Ultrafiltration): उच्च दाब के कारण रक्त केशिकागुच्छ से छनकर बोमन संपुट में आता है। इसमें जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण और यूरिया छन जाते हैं, परंतु प्रोटीन व रक्त कोशिकाएं नहीं छनतीं।
2. पुनरावशोषण (Selective Reabsorption): छना हुआ द्रव (निष्यंद) जब नलिका से होकर गुजरता है, तो शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण तथा जल का पुनः अवशोषण कर लिया जाता है।
3. स्रावण (Tubular Secretion): नलिका की कोशिकाएं रक्त से कुछ अतिरिक्त अपशिष्टों (H⁺ आयन, K⁺ आयन आदि) को नलिका के द्रव में स्रावित कर देती हैं।
इसके पश्चात बचा हुआ द्रव मूत्र (Urine) कहलाता है जो संग्राहक नलिका से होकर मूत्रवाहिनी के माध्यम से मूत्राशय में एकत्र हो जाता है।
(अथवा वाला भाग)
मानव के मादा जनन-तंत्र की संरचना:
मादा जनन-तंत्र के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:
1. अंडाशय (Ovaries):
- उदर गुहा में गर्भाशय के दोनों ओर एक-एक अंडाशय स्थित होता है।
- यह मादा युग्मक (अंडाणु) का निर्माण करता है तथा एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है।
2. अंडवाहिनी / फेलोपियन नलिका (Oviduct / Fallopian Tube):
- यह अंडाशय से निकलने वाले अंडाणु को ग्रहण कर गर्भाशय तक पहुँचाती है।
- निषेचन (Fertilization) की क्रिया फेलोपियन नलिका में ही होती है।
3. गर्भाशय (Uterus):
- यह एक खोखला, पेशीय, नाशपाती के आकार का अंग है।
- निषेचित भ्रूण गर्भाशय की दीवार से जुड़कर (रोपण) विकसित होता है।
4. ग्रीवा एवं योनि (Cervix and Vagina):
- गर्भाशय का निचला संकरा भाग ग्रीवा कहलाता है, जो योनि में खुलता है।
- योनि संभोग के समय शुक्राणु प्राप्त करती है तथा शिशु जन्म के समय जन्म-नाल का कार्य करती है।