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UP Board Class 10th Science Board Paper 2026 824(GP)

कक्षा 10वीं · विज्ञान · 2026 · बोर्ड परीक्षा

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प्रश्न 1.

निम्नलिखित कथनों में सही कथन का चयन कीजिए :

(A) अवतल दर्पण से बना प्रतिबिंब सदैव वास्तविक होता है

(B) उत्तल दर्पण से बना प्रतिबिंब सदैव बिंब से बड़ा होता है

(C) उत्तल दर्पण से बना प्रतिबिंब हमेशा बिंब से छोटा और सीधा होता है

(D) उत्तल दर्पण से बना प्रतिबिंब सदैव वास्तविक होता है

उत्तर:

सही उत्तर: (C)

स्पष्टीकरण: उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव आभासी, सीधा तथा आकार में वस्तु (बिंब) से छोटा होता है। (अवतल दर्पण में बिंब के ध्रुव और फोकस के बीच होने पर आभासी प्रतिबिंब बनता है, इसलिए कथन A असत्य है)।

प्रश्न 2.

प्रकाश किरण भिन्न अपवर्तनांक वाले दो पारदर्शी माध्यमों के सम्पर्क तल पर लम्बवत् आपतित होती है। अपवर्तन के पश्चात् प्रकाश किरण

(A) अभिलम्ब की ओर झुक जायेगी

(B) अभिलम्ब से दूर हट जायेगी

(C) बिना किसी विचलन के गमन करेगी

(D) अपने पूर्व के माध्यम में परावर्तित हो जायेगी

उत्तर:

सही उत्तर: (C)

स्पष्टीकरण: जब कोई प्रकाश किरण दो माध्यमों के सीमा पृष्ठ पर लम्बवत् आपतित होती है ( i = 0^°), तो वह बिना किसी विचलन के सीधी निकल जाती है ( r = 0^°)।

प्रश्न 3.

यदि पृथ्वी पर कोई वायुमण्डल न हो, तब पृथ्वी से देखने पर आकाश का रंग प्रतीत होगा

(A) बैंगनी

(B) नीला

(C) लाल

(D) काला

उत्तर:

सही उत्तर: (D)

स्पष्टीकरण: वायुमण्डल की अनुपस्थिति में सूर्य के प्रकाश का प्रकीर्णन (scattering) नहीं हो पाएगा, जिसके कारण आकाश काला दिखाई देगा।

प्रश्न 4.

अवतल लेंस की फोकस दूरी 15 cm है। लेंस के सम्मुख एक वस्तु लेंस से 30 cm दूर रखी है। प्रतिबिंब और वस्तु के आकार का अनुपात होगा

(A) 1 : 3

(B) 3 : 1

(C) 2 : 3

(D) 1 : 1

उत्तर:

सही उत्तर: (A)

गणना:

दिया है:

अवतल लेंस की फोकस दूरी, f = -15 cm

वस्तु की दूरी, u = -30 cm

लेंस सूत्र से:

(1)/(f) = (1)/(v) - (1)/(u)

(1)/(-15) = (1)/(v) - (1)/(-30)

(1)/(v) = -(1)/(15) - (1)/(30) = (-2 - 1)/(30) = -(3)/(30) = -(1)/(10)

v = -10 cm

प्रतिबंध का आवर्धन (m) = (प्रतिबिंब का आकार)/(वस्तु का आकार) = (v)/(u)

m = (-10)/(-30) = (1)/(3)

अतः प्रतिबिंब और वस्तु के आकार का अनुपात 1 : 3 होगा।

प्रश्न 5.

किसी विद्युत परिपथ में 2.0 A की धारा 15 मिनट तक प्रवाहित होती है। परिपथ में प्रवाहित सम्पूर्ण आवेश की मात्रा होगी

(A) 30

(B) 1500

(C) 1800

(D) 600

उत्तर:

सही उत्तर: (C)

गणना:

धारा (I) = 2.0 A

समय (t) = 15 मिनट = 15 × 60 = 900 सेकंड

आवेश (Q) = I × t = 2.0 × 900 = 1800 कूलॉम

प्रश्न 6.

दर्शाए गये समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् नीचे से ऊपर की ओर प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन पर आरोपित बल की दिशा होगी

(A) कागज के तल से लम्बवत् बाहर की ओर

(B) कागज के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर

(C) दायें ओर

(D) बायें ओर

उत्तर:

सही उत्तर: (B)

स्पष्टीकरण: इलेक्ट्रॉन के नीचे से ऊपर गति करने के कारण धनात्मक धारा की दिशा ऊपर से नीचे मानी जाएगी। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बाएँ से दाएँ है। फ्लेमिंग के वामहस्त (बाएँ हाथ) के नियम का उपयोग करने पर इलेक्ट्रॉन पर लगने वाले बल की दिशा कागज के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर प्राप्त होती है।

प्रश्न 7.

निम्नलिखित में कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता ?

(A) I² R

(B) (V²)/(R)

(C) V² R

(D) VI

उत्तर:

सही उत्तर: (C)

स्पष्टीकरण: विद्युत शक्ति के सूत्र P = VI = I² R = (V²)/(R) होते हैं। अतः V² R विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता।

प्रश्न 8.

खाने के सोडे का रासायनिक सूत्र है

(A) NaHCO₃

(B) Na₂CO₃

(C) NaCl

(D) Na₂SO₄

उत्तर:

सही उत्तर: (A)

स्पष्टीकरण: खाने का सोडा (बेकिंग सोडा) सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO₃) होता है।

प्रश्न 9.

निम्नलिखित रासायनिक समीकरण को पूरा कीजिए :

Fe(s) + H₂O(g) → + H₂(g)

(A) Fe₂O₃(s)

(B) Fe₃O₄(s)

(C) FeO₂(s)

(D) Fe(OH)₃(s)

उत्तर:

सही उत्तर: (B)

समीकरण:

3Fe(s) + 4H₂O(g) → Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)

रिक्त स्थान में Fe₃O₄(s) आएगा।

प्रश्न 10.

प्रबल अम्लीय विलयन में मेथिल आरेन्ज सूचक का रंग होता है

(A) रंगहीन

(B) पीला

(C) लाल

(D) नीला

उत्तर:

सही उत्तर: (C)

स्पष्टीकरण: मेथिल ऑरेंज सूचक अम्लीय विलयन में लाल रंग प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 11.

निम्नलिखित में कौन-सा धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित करता है ?

(A) Ag

(B) Pt

(C) Au

(D) Mg

उत्तर:

सही उत्तर: (D)

स्पष्टीकरण: मैग्नीशियम (Mg) विद्युत रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित है, इसलिए यह तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस विस्थापित करता है।

प्रश्न 12.

साबुन के अणु में होता है

(A) जलविरागी शीर्ष तथा जलविरागी पूँछ

(B) जलरागी शीर्ष तथा जलरागी पूँछ

(C) जलविरागी शीर्ष तथा जलरागी पूँछ

(D) जलरागी शीर्ष तथा जलविरागी पूँछ

उत्तर:

सही उत्तर: (D)

स्पष्टीकरण: साबुन के अणु में एक जलरागी (hydrophilic) आयनिक शीर्ष तथा एक जलविरागी (hydrophobic) हाइड्रोकार्बन पूँछ होती है।

प्रश्न 13.

निम्नलिखित में कौन-सा यौगिक सिरके में उपस्थित रहता है ?

(A) HCOOH

(B) CH₃OH

(C) C₂H₅OH

(D) CH₃COOH

उत्तर:

सही उत्तर: (D)

स्पष्टीकरण: सिरके में एथैनिक अम्ल (CH₃COOH - एसिटिक अम्ल) तनु विलयन के रूप में उपस्थित होता है।

प्रश्न 14.

मादा जनन तंत्र के किस भाग में लूप स्थापित किया जाता है ?

(A) योनि में

(B) गर्भाशय में

(C) अन्डवाहिनी में

(D) अन्डाशय में

उत्तर:

सही उत्तर: (B)

स्पष्टीकरण: लूप (या कॉपर-टी) एक अंतः गर्भाशयी युक्ति (IUD) है, जिसे गर्भनिरोधक के रूप में गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।

प्रश्न 15.

कोशिकीय प्रक्रम में ऊर्जा मुद्रा है

(A) ग्लूकोज

(B) फ्रुक्टोज

(C) ए.डी.पी.

(D) ए.टी.पी.

उत्तर:

सही उत्तर: (D)

स्पष्टीकरण: एटीपी (ATP - ऐडेनोसीन ट्राइफॉस्फेट) को कोशिकाओं का ऊर्जा सिक्का/मुद्रा कहा जाता है।

प्रश्न 16.

द्विखण्डन विधि द्वारा अलैंगिक जनन होता है

(A) आलू में

(B) अमीबा में

(C) गुड़हल में

(D) ब्रायोफिलम में

उत्तर:

सही उत्तर: (B)

स्पष्टीकरण: अमीबा जैसे एककोशिकीय जीवों में अलैंगिक जनन द्विखण्डन (Binary fission) द्वारा होता है।

प्रश्न 17.

पुंकेसर में परागकण होते हैं

(A) अगुणित

(B) द्विगुणित

(C) त्रिगुणित

(D) चतुर्गुणित

उत्तर:

सही उत्तर: (A)

स्पष्टीकरण: परागकण पौधे के नर युग्मक होते हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या अगुणित (haploid, n) होती है।

प्रश्न 18.

एक स्थलीय पारितंत्र में, हरे पौधे की पत्तियों द्वारा प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा का लगभग कितना भाग खाद्य ऊर्जा में परिवर्तित होता है ?

(A) 100%

(B) 50%

(C) 10%

(D) 1%

उत्तर:

सही उत्तर: (D)

स्पष्टीकरण: एक स्थलीय पारितंत्र में हरे पौधे अपनी पत्तियों पर पड़ने वाले सौर प्रकाश की ऊर्जा का लगभग 1% भाग खाद्य ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

प्रश्न 19.

आमाशय में पाया जाने वाला अम्ल होता है

(A) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल

(B) नाइट्रिक अम्ल

(C) सल्फ्यूरिक अम्ल

(D) इनमें से सभी

उत्तर:

सही उत्तर: (A)

स्पष्टीकरण: मानव आमाशय की जठर ग्रंथियों से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) स्रावित होता है जो भोजन के पाचन में सहायक है।

प्रश्न 20.

पीयूष ग्रंथि पायी जाती है

(A) यकृत में

(B) गले में

(C) मस्तिष्क में

(D) गुर्दे में

उत्तर:

सही उत्तर: (C)

स्पष्टीकरण: पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland) मस्तिष्क के आधार पर स्थित होती है।

प्रश्न 1 (खण्ड-ब).

अवतल दर्पण के संदर्भ में दी गयी सारणी को पूर्ण कीजिए :

बिंब की स्थिति प्रतिबिंब स्थिति बिंब के सापेक्ष प्रतिबिंब का आकार प्रतिबिंब की प्रकृति

1. ध्रुव और फोकस के बीच A बिंब से बड़ा B

2. फोकस और वक्रता केन्द्र के बीच C D वास्तविक और उल्टा

उत्तर:

सारणी में अज्ञात मानों (A, B, C, D) की पूर्ति:

- A: दर्पण के पीछे

- B: आभासी और सीधा

- C: वक्रता केन्द्र से परे

- D: बिंब से बड़ा (आवर्धित)

पूर्ण सारणी:

बिंब की स्थिति प्रतिबिंब स्थिति बिंब के सापेक्ष प्रतिबिंब का आकार प्रतिबिंब की प्रकृति

1. ध्रुव और फोकस के बीच दर्पण के पीछे बिंब से बड़ा आभासी और सीधा

2. फोकस और वक्रता केन्द्र के बीच वक्रता केन्द्र से परे बिंब से बड़ा वास्तविक और उल्टा

प्रश्न 2.

(i) प्रकाश अपवर्तन के नियमों को लिखिए।

(ii) नेत्र के दीर्घ दृष्टि-दोष के कारणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

(i) प्रकाश के अपवर्तन के नियम:

1. प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं।

2. द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): प्रकाश के किसी निश्चित रंग तथा निश्चित माध्यमों के युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या ( i) तथा अपवर्तन कोण की ज्या ( r) का अनुपात एक स्थिरांक होता है।

( i)/( r) = μ (स्थिरांक)

(ii) नेत्र के दीर्घ दृष्टि-दोष (हाइपरमेट्रोपिया) के कारण:

दीर्घ दृष्टि-दोष के दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी का अत्यधिक हो जाना।

2. नेत्र गोलक का छोटा हो जाना, जिससे पास की वस्तु का प्रतिबिंब दृष्टि पटल (रेटीना) के पीछे बनता है।

प्रश्न 3.

(i) 20 Ω प्रतिरोध के एक तार को 5 बराबर भागों में विभक्त कर उन्हें समान्तर क्रम में जोड़ दिया जाता है। संयोजन का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। संयोजन के सिरों को बैटरी से जोड़ने पर प्रत्येक प्रतिरोध में प्रवाहित धाराओं में क्या सम्बन्ध होगा ?

(ii) विद्युत शक्ति, विभवांतर एवं धारा में संबंध लिखिए। विद्युत शक्ति एवं विद्युत ऊर्जा के मात्रक लिखिए।

उत्तर:

(i)

- तार का कुल प्रतिरोध = 20 Ω

- 5 बराबर भागों में काटने पर प्रत्येक भाग का प्रतिरोध (r) = (20)/(5) = 4 Ω

पार्श्वक्रम (समांतर क्रम) में संयोजन का तुल्य प्रतिरोध (R_eq):

1R_eq = (1)/(r) + (1)/(r) + (1)/(r) + (1)/(r) + (1)/(r)

1R_eq = (1)/(4) + (1)/(4) + (1)/(4) + (1)/(4) + (1)/(4) = (5)/(4)

R_eq = (4)/(5) = 0.8 Ω

धाराओं में संबंध:

समांतर क्रम में जुड़े होने तथा सभी 5 प्रतिरोधकों का मान समान (4 Ω) होने के कारण, संयोजन को बैटरी से जोड़ने पर सभी प्रतिरोधों में से प्रवाहित धाराएँ परस्पर बराबर होंगी (I₁ = I₂ = I₃ = I₄ = I₅ = (V)/(4))।

(ii)

- विद्युत शक्ति (P), विभवांतर (V) और धारा (I) में संबंध:

P = V × I

- विद्युत शक्ति का मात्रक: वाट (Watt) अथवा जूल/सेकंड।

- विद्युत ऊर्जा का मात्रक: जूल (Joule) अथवा किलोवाट-घंटा (kWh / यूनिट)।

प्रश्न 4.

(i) सीधे धारावाही चालक तार द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा ज्ञात करने के लिए दक्षिण-हस्त अंगूठ नियम लिखिए।

(ii) घरेलू विद्युत परिपथों में फ्यूज का क्या महत्व है ?

(iii) किसी तार के प्रतिरोध और प्रतिरोधकता में सम्बन्ध लिखिए। प्रतिरोधकता का मात्रक क्या होता है ?

अथवा

(i) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के किन्हीं तीन विशेषताओं को लिखिए।

(ii) एक घर में 5 बल्ब लगे हैं। प्रत्येक बल्ब 200 वाट के हैं। बल्ब प्रतिदिन 10 घंटे प्रयुक्त होते हैं। 30 दिन में कितनी विद्युत ऊर्जा व्यय होगी और कितना भुगतान करना होगा ? प्रति यूनिट विद्युत मूल्य 7 रुपये है।

उत्तर:

(i) दक्षिण-हस्त अंगूष्ठ नियम (Right-Hand Thumb Rule):

यदि हम अपने दाहिने हाथ में धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा विद्युत धारा की दिशा की ओर संकेत करता हो, तो चालक को घेरने वाली उँगलियों की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को दर्शाती है।

(ii) घरेलू विद्युत परिपथ में फ्यूज का महत्व:

फ्यूज एक सुरक्षा युक्ति है। जब परिपथ में अतिभारण (overloading) या लघुपथन (short circuit) के कारण अत्यधिक धारा प्रवाहित होती है, तो फ्यूज तार ऊष्मा के कारण पिघलकर टूट जाता है। इससे परिपथ भंग हो जाता है और महंगे विद्युत उपकरण जलने या दुर्घटना होने से बच जाते हैं।

(iii) प्रतिरोध (R) और प्रतिरोधकता (ρ) में संबंध:

R = ρ (l)/(A)

जहाँ l = तार की लंबाई, A = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल।

- प्रतिरोधकता का SI मात्रक: ओम-मीटर (Ω·m) होता है।

(अथवा वाला भाग)

(i) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की तीन विशेषताएँ:

1. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ संतत बंद वक्र (closed loops) होती हैं, जो चुम्बक के बाहर उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती हैं।

2. दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती हैं।

3. जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ अधिक सघन होती हैं, वहाँ चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिक होती है।

(ii) आंकिक प्रश्न:

- कुल बल्बों की संख्या = 5

- एक बल्ब की शक्ति = 200 W

- कुल शक्ति (P) = 5 × 200 = 1000 W = 1 kW

- समय प्रति दिन (t) = 10 घंटे

- दिनों की संख्या = 30 दिन

30 दिन में व्यय कुल विद्युत ऊर्जा:

विद्युत ऊर्जा = कुल शक्ति (kW) × समय (घंटे/दिन) × दिन

ऊर्जा = 1 kW × 10 घंटे × 30 = 300 kWh = 300 यूनिट

विद्युत बिल का भुगतान:

कुल खर्च = 300 यूनिट × 7 रुपये/यूनिट = 2100 रुपये

अतः 30 दिन में 300 यूनिट ऊर्जा व्यय होगी और कुल 2100 रुपये का भुगतान करना होगा।

प्रश्न 5.

(i) निम्नलिखित समीकरणों को संतुलित कीजिए :

(a) Fe + CuSO₄ → + (b) MnO₂ + HCl → + H₂O + (ii) लेड नाइट्रेट के ऊष्मीय वियोजन की अभिक्रिया लिखिए तथा बनने वाले पदार्थों के नाम भी लिखिए।

उत्तर:

(i) संतुलित रासायनिक समीकरण:

(a) Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)

(b) MnO₂(s) + 4HCl(aq) → MnCl₂(aq) + 2H₂O(l) + Cl₂(g)

(ii) लेड नाइट्रेट का ऊष्मीय वियोजन:

2Pb(NO₃)₂(s) ⇌Δ 2PbO(s) + 4NO₂(g) + O₂(g)

बनने वाले पदार्थों के नाम:

1. PbO - लेड (II) ऑक्साइड (भूरा/पीला ठोस)

2. NO₂ - नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (भूरे रंग की गैस)

3. O₂ - ऑक्सीजन गैस

प्रश्न 6.

(i) निम्नलिखित यौगिकों का IUPAC नाम लिखिए :

(a) CH₃-CH₂-CHO

(b) CH₃-CH₂-C (ii) ब्लीचिंग पाउडर के निर्माण की अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण तथा इसके दो उपयोग लिखिए।

उत्तर:

(i) IUPAC नाम:

(a) प्रोपेनल (Propanal)

(b) ब्यूट-1-आइन (But-1-yne)

(ii) ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) का निर्माण:

शुष्क बुझे हुए चूने [Ca(OH)₂] पर क्लोरीन गैस की क्रिया द्वारा ब्लीचिंग पाउडर का निर्माण होता है।

Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O

दो उपयोग:

1. पीने के पानी में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने (रोगाणुनाशक के रूप में)।

2. वस्त्र उद्योग में सूती वस्त्रों एवं लिनन के विरंजन (ब्लीचिंग) में।

प्रश्न 7.

(i) अपररूपता से आप क्या समझते हैं ? कार्बन के दो अपररूपों के नाम तथा संरचना लिखिए।

(ii) सजातीय श्रेणी क्या है ? उदाहरण सहित समझाइए।

अथवा

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :

(i) संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन

(ii) कार्बनिक यौगिकों में दहन अभिक्रिया

(iii) दैनिक जीवन में pH के महत्व।

उत्तर:

(i) अपररूपता (Allotropy):

जब कोई तत्व दो या दो से अधिक ऐसे रूपों में पाया जाता है जिनके रासायनिक गुण समान किन्तु भौतिक गुण भिन्न होते हैं, तो इस गुण को अपररूपता कहते हैं।

कार्बन के दो अपररूप एवं उनकी संरचना:

1. हीरा (Diamond): इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ सहसंयोजी बंधों द्वारा जुड़कर एक दृढ़ त्रिआयामी (3D) चतुष्फलकीय संरचना बनाता है।

2. ग्रेफाइट (Graphite): इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ एक ही तल पर जुड़कर षट्कोणीय वलयों की परतीय संरचना बनाता है।

(ii) सजातीय श्रेणी (Homologous Series):

कार्बनिक यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें समान रासायनिक गुणों वाले यौगिकों को उनके बढ़ते अणुभार के क्रम में रखा जाता है तथा जिनके क्रमागत सदस्यों के मध्य -CH₂- समूह एवं 14 u द्रव्यमान का अंतर होता है, सजातीय श्रेणी कहलाती है।

उदाहरण: एल्केन श्रेणी (CₙH₂ₙ₊₂)

- मीथेन (CH₄)

- एथेन (C₂H₆)

- प्रोपेन (C₃H₈)

(अथवा वाला भाग)

(i) संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन:

- संतृप्त हाइड्रोकार्बन: वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के मध्य केवल एकल सहसंयोजी बंध (Single bond) पाया जाता है। जैसे- एल्केन (मीथेन CH₄, एथेन C₂H₆)।

- असंतृप्त हाइड्रोकार्बन: वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणुओं के मध्य कम से कम एक द्वि-बंध (Double bond) या त्रि-बंध (Triple bond) उपस्थित होता है। जैसे- एल्कीन (एथीन C₂H₄) तथा एल्काइन (एथाइन C₂H₂)।

(ii) कार्बनिक यौगिकों में दहन अभिक्रिया:

कार्बनिक यौगिक वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, ऊष्मा तथा प्रकाश उत्पन्न करते हैं। इस अभिक्रिया को दहन कहते हैं।

CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा + प्रकाश

(iii) दैनिक जीवन में pH का महत्व:

1. पाचन तंत्र में pH: हमारे आमाशय में HCl बनता है जो पाचन में मदद करता है। अपच की स्थिति में अत्यधिक अम्ल बनने से दर्द होता है, जिसे दूर करने के लिए एंटासिड (जैसे- Mg(OH)₂) का प्रयोग करते हैं।

2. दंत क्षय: मुँह का pH 5.5 से कम होने पर दाँतों के इनैमल का क्षरण शुरू हो जाता है।

प्रश्न 8.

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :

(i) उपभोक्ता

(ii) पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह

उत्तर:

(i) उपभोक्ता (Consumers):

पारितंत्र के वे जीव जो अपने भोजन का निर्माण स्वयं नहीं कर सकते और अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादकों (पौधों) पर निर्भर रहते हैं, उपभोक्ता कहलाते हैं।

इन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है:

1. प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी): जैसे- गाय, हिरण, टिड्डा।

2. द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी): जैसे- मेढक, लोमड़ी।

3. तृतीयक/उच्च उपभोक्ता: जैसे- शेर, चीता, बाज।

(ii) पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow in Ecosystem):

1. पारितंत्र में ऊर्जा का मुख्य एवं प्राथमिक स्रोत सूर्य का प्रकाश है।

2. उत्पादक (हरे पौधे) सौर ऊर्जा का केवल 1% भाग खाद्य ऊर्जा में बदलते हैं।

3. पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव एकदिशीय (unidirectional) होता है।

4. 10 प्रतिशत का नियम: प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का केवल 10% भाग ही अगले पोषी स्तर को स्थानांतरित होता है, शेष 90% ऊर्जा जैविक क्रियाओं और ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 9.

निम्नलिखित पर व्याख्यात्मक टिप्पणी लिखिए :

(i) इंसुलिन हार्मोन

(ii) पादप में रंधरा (स्टोमेटा)

उत्तर:

(i) इंसुलिन हार्मोन (Insulin Hormone):

- स्रावण स्थान: इंसुलिन हार्मोन अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहेंस की द्वीपिकाओं की बीटा (β) कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है।

- कार्य: यह रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करता है। यह अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में बदलने के लिए प्रेरित करता है।

- कमी का प्रभाव: इंसुलिन की कमी से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मधुमेह (Diabetes) नामक रोग हो जाता है।

(ii) पादप में रंध्र (Stomata):

- संरचना: पौधों की पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्रों को रंध्र कहते हैं। प्रत्येक रंध्र दो वृक्काकार (bean-shaped) द्वार कोशिकाओं (Guard cells) से घिरा होता है जो छिद्र के खुलने व बंद होने को नियंत्रित करती हैं।

- प्रमुख कार्य:

1. प्रकाश-संश्लेषण तथा श्वसन के दौरान गैसों (CO₂ एवं O₂) का आदान-प्रदान करना।

2. वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) क्रिया द्वारा अतिरिक्त जल को वाष्प के रूप में बाहर निकालना।

प्रश्न 10.

वंशागति में प्रभावी लक्षण और अप्रभावी लक्षण में उदाहरण सहित अन्तर कीजिए।

उत्तर:

प्रभावी लक्षण तथा अप्रभावी लक्षण में अंतर:

क्र.सं. लक्षण प्रभावी लक्षण (Dominant Trait) अप्रभावी लक्षण (Recessive Trait)

1. अभिव्यक्ति वह लक्षण जो प्रथम पीढ़ी (F₁) में स्वयं को अभिव्यक्त करता है। वह लक्षण जो प्रथम पीढ़ी (F₁) में छिपा रहता है और स्वयं को व्यक्त नहीं कर पाता।

2. जीन स्थिति यह समयुग्मजी (TT) तथा विषमयुग्मजी (Tt) दोनों स्थितियों में प्रकट होता है। यह केवल समयुग्मजी (tt) स्थिति में ही प्रकट हो पाता है।

3. उदाहरण मेंडेल के प्रयोग में शुद्ध लंबे पौधे का लक्षण (T), गोल बीज (R)। मेंडेल के प्रयोग में बौने पौधे का लक्षण (t), झुर्रीदार बीज (r)।

प्रश्न 11.

मानव में वृक्काणु की संरचना एवं क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।

अथवा

मानव के मादा जनन-तंत्र की संरचना का उपयुक्त चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए।

उत्तर:

मानव में वृक्काणु (Nephron) की संरचना एवं क्रियाविधि:

1. वृक्काणु की संरचना (Structure of Nephron):

वृक्काणु (नेफ्रॉन) वृक्क की कार्यात्मक एवं संरचनात्मक इकाई है। प्रत्येक वृक्क में लाखों वृक्काणु होते हैं। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:

- कप/प्याले के आकार का बोमन संपुट (Bowman's Capsule): यह वृक्काणु का ऊपरी चौड़ा भाग है, जिसमें धमनियों की बारीक रक्त केशिकाओं का गुच्छा स्थित होता है, जिसे केशिकागुच्छ (Glomerulus) कहते हैं।

- वृक्क नलिका (Renal Tubule): बोमन संपुट के पीछे एक नलिकाकार भाग होता है, जिसके तीन मुख्य भाग होते हैं—समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT), हेनले लूप (Henle's Loop), तथा दूरस्थ कुंडलित नलिका (DCT)।

- संग्राहक नलिका (Collecting Duct): दूरस्थ भाग संग्राहक नलिका में खुलता है, जो मूत्र को एकत्र करती है।

2. वृक्काणु की क्रियाविधि (Mechanism of Urine Formation):

मूत्र निर्माण की प्रक्रिया तीन चरणों में सम्पन्न होती है:

1. अतिसूक्ष्म निष्यंदन (Ultrafiltration): उच्च दाब के कारण रक्त केशिकागुच्छ से छनकर बोमन संपुट में आता है। इसमें जल, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण और यूरिया छन जाते हैं, परंतु प्रोटीन व रक्त कोशिकाएं नहीं छनतीं।

2. पुनरावशोषण (Selective Reabsorption): छना हुआ द्रव (निष्यंद) जब नलिका से होकर गुजरता है, तो शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण तथा जल का पुनः अवशोषण कर लिया जाता है।

3. स्रावण (Tubular Secretion): नलिका की कोशिकाएं रक्त से कुछ अतिरिक्त अपशिष्टों (H⁺ आयन, K⁺ आयन आदि) को नलिका के द्रव में स्रावित कर देती हैं।

इसके पश्चात बचा हुआ द्रव मूत्र (Urine) कहलाता है जो संग्राहक नलिका से होकर मूत्रवाहिनी के माध्यम से मूत्राशय में एकत्र हो जाता है।

(अथवा वाला भाग)

मानव के मादा जनन-तंत्र की संरचना:

मादा जनन-तंत्र के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:

1. अंडाशय (Ovaries):

- उदर गुहा में गर्भाशय के दोनों ओर एक-एक अंडाशय स्थित होता है।

- यह मादा युग्मक (अंडाणु) का निर्माण करता है तथा एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है।

2. अंडवाहिनी / फेलोपियन नलिका (Oviduct / Fallopian Tube):

- यह अंडाशय से निकलने वाले अंडाणु को ग्रहण कर गर्भाशय तक पहुँचाती है।

- निषेचन (Fertilization) की क्रिया फेलोपियन नलिका में ही होती है।

3. गर्भाशय (Uterus):

- यह एक खोखला, पेशीय, नाशपाती के आकार का अंग है।

- निषेचित भ्रूण गर्भाशय की दीवार से जुड़कर (रोपण) विकसित होता है।

4. ग्रीवा एवं योनि (Cervix and Vagina):

- गर्भाशय का निचला संकरा भाग ग्रीवा कहलाता है, जो योनि में खुलता है।

- योनि संभोग के समय शुक्राणु प्राप्त करती है तथा शिशु जन्म के समय जन्म-नाल का कार्य करती है।