खण्ड - 'अ' / PART - 'A'
(बहुविकल्पीय प्रश्न / Multiple Choice Type Questions)
UP Board Class 10th Hindi Half Yearly Paper 2026 A Code
कक्षा 10वीं · हिंदी · 2026 · अर्धवार्षिक
खण्ड - 'अ' / PART - 'A'
(बहुविकल्पीय प्रश्न / Multiple Choice Type Questions)
'महादेवी वर्मा' द्वारा रचित रेखाचित्र है-
(A) जिंदगी मुस्कुराई
(B) अतीत के चलचित्र
(C) गाँव की साँझ
(D) बाजे पायलिया के घुँघरू ।
उत्तर:
(B) अतीत के चलचित्र
'कोणार्क' के रचनाकार हैं-
(A) जगदीश माथुर
(B) रामकुमार वर्मा
(C) जयशंकर प्रसाद
(D) विष्णु प्रभाकर।
उत्तर:
(A) जगदीश माथुर
'तूफानों के बीच' रचना किस विधा की रचना है-
(A) कहानी
(B) उपन्यास
(C) एकांकी
(D) रिपोर्ताज ।
उत्तर:
(D) रिपोर्ताज ।
'चलो चाँद पर चलें' के रचनाकार हैं-
(A) धर्मवीर भारती
(B) जयप्रकाश भारती
(C) अज्ञेय
(D) मोहन राकेश ।
उत्तर:
(B) जयप्रकाश भारती
'पंच परमेश्वर' कहानी के लेखक हैं-
(A) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
(B) प्रेमचन्द
(C) यशपाल
(D) राजेन्द्र यादव ।
उत्तर:
(B) प्रेमचन्द
भक्तिकाल की रचना है-
(A) साकेत
(B) विनय पत्रिका
(C) लहर
(D) प्रेम माधुरी।
उत्तर:
(B) विनय पत्रिका
'केशवदास' किस काल के कवि हैं ?
(A) आदिकाल
(B) रीतिकाल
(C) भक्तिकाल
(D) आधुनिक काल
उत्तर:
(B) रीतिकाल
'भारत-भारती' के रचनाकार हैं-
(A) मैथिलीशरण गुप्त
(B) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(C) माखनलाल चतुर्वेदी
(D) सूरदास ।
उत्तर:
(A) मैथिलीशरण गुप्त
'रीतिमुक्त' काव्यधारा के कवि हैं-
(A) बिहारीलाल
(B) पद्माकर
(C) केशवदास
(D) घनानन्द ।
उत्तर:
(D) घनानन्द ।
महादेवी वर्मा कवयित्री हैं-
(A) द्विवेदी युग की
(B) प्रगतिवादी युग की
(C) छायावादी युग की
(D) प्रयोगवादी युग की
उत्तर:
(C) छायावादी युग की
'प्रिय पति वह मेरा प्राण प्यारा कहाँ है, दुःख जलनिधि डूबी का सहारा कहाँ है', प्रस्तुत पंक्ति में रस है-
(A) करुण रस
(B) हास्य रस
(C) भयानक रस
(D) वीभत्स रस ।
उत्तर:
(A) करुण रस
'चरण कमल बन्दौ हरि राई' में कौन-सा अलंकार है-
(A) उपमा
(B) उत्प्रेक्षा
(C) श्लेष
(D) रूपक ।
उत्तर:
(D) रूपक ।
सोरठा के प्रथम एवं तृतीय चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं-
(A) 11-11
(B) 13-13
(C) 16-16
(D) 24-24
उत्तर:
(A) 11-11
'शताब्दी' में कौन-सा समास है-
(A) द्विगु
(B) बहुव्रीहि
(C) कर्मधारय
(D) द्वन्द्व ।
उत्तर:
(A) द्विगु
'अनुग्रह' में प्रयुक्त उपसर्ग है-
(A) अनु
(B) अ
(C) अन्
(D) अनू
उत्तर:
(A) अनु
'संसार' का पर्यायवाची है-
(A) दुनिया
(B) विश्व
(C) भूमण्डल
(D) ये सभी।
उत्तर:
(D) ये सभी।
'तद्' शब्द का तृतीया बहुवचन का रूप है-
(A) तैः
(B) तैभ्यः
(C) ताभ्यः
(D) ताभ्याम्
उत्तर:
(A) तैः
आज्ञा वाचक वाक्य में होता है-
(A) आज्ञा
(B) निर्देश
(C) विनय
(D) ये सभी।
उत्तर:
(D) ये सभी।
वाच्य का भेद नहीं है-
(A) कर्तृवाच्य
(B) कर्मवाच्य
(C) भाववाच्य
(D) क्रियावाच्य ।
उत्तर:
(D) क्रियावाच्य ।
हिन्दी में पदों की संख्या होती है-
(A) चार
(B) छः
(C) आठ
(D) सात
उत्तर:
(C) आठ
खण्ड 'ब'
(वर्णनात्मक प्रश्न)
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के गद्य खंड के अंतर्गत संकलित एवं आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा रचित 'मित्रता' नामक पाठ से लिया गया है।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: लेखक का कहना है कि सच्चा मित्र जीवन में एक बहुत बड़ी ढाल और सुरक्षित खजाने के समान होता है। जिस व्यक्ति को विश्वासपात्र मित्र मिल जाता है, समझ लीजिए कि उसे जीवन की सबसे बड़ी और मूल्यवान निधि प्राप्त हो गई है, जो हर कठिनाई में उसकी रक्षा करती है।
(ग) प्रस्तुत अवतरण में लेखक क्या कहना चाहता है ?
उत्तर: प्रस्तुत अवतरण में लेखक ने अच्छे और विश्वासपात्र मित्र के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया है कि सच्चा मित्र हमारी आत्मशिक्षा और जीवन के व्यवहार को सुगम बनाने में सहायता करता है।
अथवा (विकल्प हेतु)
(क) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के गद्य खंड के अंतर्गत 'इर्ष्या तू न गई मेरे मन से' नामक पाठ से लिया गया है।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: लेखक कहते हैं कि दोनों ही अवस्थाओं के स्वप्न सुखद और आकर्षक होते हैं, क्योंकि जिस प्रकार दूर के ढोल और उनकी आवाज हमें बहुत सुहानी लगती है, समीप जाने पर उसकी वास्तविकता का पता चलता है। इसी प्रकार भविष्य की कल्पनाएं और अतीत के स्मरण हमेशा मनमोहक लगते हैं।
(ग) हिन्दी साहित्य में आजकल किसका निर्माण हो रहा है ?
उत्तर: हिन्दी साहित्य में आजकल प्रगतिशील साहित्य का निर्माण हो रहा है।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) प्रस्तुत पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के पद्य खंड के अंतर्गत रसखान जी द्वारा रचित 'सवैया' शीर्षक से लिया गया है।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: रसखान जी कामना करते हैं कि यदि अगले जन्म में वे मनुष्य हों तो गोकुल गाँव के ग्वालों के साथ निवास करें, यदि पशु बनें तो नंद बाबा की गायों के बीच चरने का सौभाग्य मिले, और यदि पक्षी बनें तो यमुना के तट पर स्थित कदंब की डालियों पर बसेरा करें।
(ग) रसखान जी की क्या इच्छा है ?
उत्तर: रसखान जी की यही इच्छा है कि वे किसी भी योनि में जन्म लें, लेकिन उनका निवास और सामीप्य श्री कृष्ण की भूमि ब्रज में ही हो।
अथवा (विकल्प हेतु)
(क) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के पद्य खंड के अंतर्गत रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित 'स्वदेश प्रेम' शीर्षक कविता से अवतरित है।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: कवि का मानना है कि सच्चा प्रेम वही कहलाता है जो पूरी तरह से आत्म-बलिदान और त्याग पर निर्भर करता है। त्याग के बिना प्रेम निष्प्राण और अर्थहीन होता है, इसलिए प्रेम के मार्ग पर अपने प्राणों को भी न्योछावर कर देना चाहिए।
(ग) कवि के अनुसार वास्तविक प्रेम क्या है?
उत्तर: कवि के अनुसार वास्तविक प्रेम वह है जिसकी तृप्ति आत्म-बलिदान पर निर्भर हो और जो त्याग की भावना से परिपूर्ण हो।
निम्नलिखित में से किसी एक संस्कृत गद्यांश की सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए-
(क) (संस्कृत गद्यांश - वाराणसी...)
सन्दर्भ: प्रस्तुत संस्कृत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के संस्कृत खंड के अंतर्गत 'वाराणसी' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद: यह नगरी भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का केंद्र-स्थल है। यहीं से संस्कृत साहित्य और संस्कृति का प्रकाश सब तरफ फैला है। मुगल युवराज दाराशिकोह ने यहाँ आकर भारतीय दर्शन शास्त्रों का अध्ययन किया था। वह उनके ज्ञान से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उपनिषदों का अनुवाद फारसी भाषा में कराया।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
निम्नलिखित श्लोकों में से किसी एक श्लोक की सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए-
(क) (श्लोक - मरणं मङ्गलं यत्र...)
सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक 'हिंदी' के संस्कृत खंड के अंतर्गत 'वाराणसी' पाठ से लिया गया है।
हिन्दी अनुवाद: जहाँ मरना भी मंगलकारी (कल्याणकारी) माना जाता है, शरीर पर भस्म ही आभूषण है, और जहाँ कौपीन (लंगोट) ही रेशमी वस्त्र है, उस काशी की तुलना किससे की जा सकती है? अर्थात् काशी की महिमा अद्वितीय है।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
स्वपहित खंडकाव्य के द्वितीय सर्ग की कथा संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
(छात्र अपने पाठ्यक्रम के निर्धारित खंडकाव्य के आधार पर इस प्रश्न का उत्तर लिखें, जैसे मुक्तिप्रद, अग्रपूजा, कर्ण, मेवाड़मुकुट आदि)।
(क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक का जीवन परिचय एवं उनकी दो रचनाएँ लिखिए-
(i) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
- जीवन परिचय: आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म सन 1884 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के आगोना नामक ग्राम में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता के पास राठ (हमीरपुर) में हुई। मिर्जापुर के मिशन स्कूल से इन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। स्वाध्याय से इन्होंने हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और बांग्ला का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। कुछ समय तक इन्होंने मिर्जापुर के लंदन मिशन स्कूल में चित्रकला के अध्यापक के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर नियुक्त हुए और लंबे समय तक अपनी सेवाएँ दीं। 2 फरवरी 1941 ईस्वी को इनका स्वर्गवास हो गया।
- रचनाएँ: (1) चिंतामणि (2) विचारतीथ
(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक का जीवन परिचय एवं उनकी दो रचनाओं का उल्लेख कीजिए-
(iii) महादेवी वर्मा
- जीवन परिचय: आधुनिक युग की मीरा के रूप में विख्यात महादेवी वर्मा का जन्म सन 1907 ईस्वी में फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा प्रयाग में हुई। इन्होंने संस्कृत से एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। महादेवी जी ने लंबे समय तक 'प्रयाग महिला विद्यापीठ' में प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया। इन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्म भूषण' और 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था। 11 सितंबर 1987 ईस्वी को इनका महान देहावसान हो गया।
- रचनाएँ: (1) नीमा (2) रश्मि
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
अपनी पाठ्यपुस्तक से कंठस्थ किया हुआ श्लोक लिखो जो इस प्रश्न-पत्र में न आया हो।
उत्तर:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥
भाई की शादी में शामिल होने के लिए तीन दिन के अवकाश हेतु अपने प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,
[विद्यालय का नाम],
[स्थान का नाम]।
विषय: भाई के विवाह में सम्मिलित होने हेतु तीन दिन के अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा 10 का छात्र हूँ। मेरे बड़े भाई का शुभ विवाह आगामी दिनांक [तारीख] को तय हुआ है। विवाह से संबंधित विभिन्न कार्यों और आयोजनों में परिवार की उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण मैं दिनांक [दिनांक से दिनांक तक] तक विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सकूँगा।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि मुझे तीन दिन (दिनांक ......... से ......... तक) का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका अत्यंत आभारी रहूँगा।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: [आपका नाम]
कक्षा: 10
रोल नंबर: [अनुक्रमांक]
दिनांक: [आज की तिथि]
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए-
(i) वाराणसी किमर्थं प्रसिद्धः?
उत्तर:
वाराणसी विविध भारतीय संस्कृतेः संस्कृतभाषायाश्च केंद्रस्थलं कृते प्रसिद्धः अस्ति।
(ii) गीतायाः कः सन्देशः?
उत्तर: गीतायाः सन्देशः अस्ति यत् "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए-
(i) पर्यावरण एवं स्वास्थ्य
भूमिका: पर्यावरण और स्वास्थ्य का आपस में गहरा और अटूट संबंध है। 'पर्यावरण' शब्द दो शब्दों 'परि' (चारों ओर) और 'आवरण' (घेरा) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है हमारे चारों ओर का आवरण। जब यह पर्यावरण शुद्ध रहता है, तभी मानव स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या: आज औद्योगिकीकरण, वनों की अंधाधुंध कटाई, वाहनों का धुआँ और रासायनिक कचरे के कारण हमारा पर्यावरण तेजी से प्रदूषित हो रहा है। वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण ने मिलकर संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को संकट में डाल दिया है। प्रदूषित हवा सांस के रोगों को जन्म देती है और दूषित जल से अनेक बीमारियाँ फैलती हैं।
स्वास्थ्य पर प्रभाव: स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और प्राकृतिक वातावरण के अभाव में आज का मानव विभिन्न गंभीर शारीरिक और मानसिक बीमारियों जैसे दमा, उच्च रक्तचाप, कैंसर और तनाव का शिकार हो रहा है। स्वस्थ शरीर के लिए प्रदूषणमुक्त वातावरण अनिवार्य है।
उपसंहार: पर्यावरण की रक्षा करना हम सबका नैतिक कर्तव्य है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर, प्लास्टिक का प्रयोग रोककर और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को अपनाकर ही हम अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं और एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।