(i) अनुशासन की समस्या
1. प्रस्तावना:
जीवन को सुचारु, व्यवस्थित तथा गरिमामय बनाने के लिए अनुशासन अत्यंत आवश्यक है। अनुशासन शब्द दो शब्दों 'अनु' और 'शासन' के मेल से बना है, जिसका अर्थ है नियमों का पालन करते हुए नियंत्रण में रहना। वर्तमान समाज में विद्यार्थियों तथा युवाओं में बढ़ती अनुशासनहीनता एक गंभीर चिंताओं का विषय बन चुकी है।
2. अनुशासन का अर्थ एवं महत्व:
अनुशासन का तात्पर्य अपने मन, वाणी तथा आचरण को नियंत्रित कर समाज और राष्ट्र के नियमों का पालन करना है। प्रकृति भी अनुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। सूर्य, चंद्रमा तथा ऋतुएँ सभी समय पर और नियमानुसार कार्य करते हैं। जिस प्रकार बिना पतवार के नाव दिशाहीन हो जाती है, उसी प्रकार अनुशासन के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ हो जाता है।
3. अनुशासनहीनता के कारण:
आज समाज में अनुशासनहीनता फैलने के अनेक कारण हैं:
क. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली जो केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर बल देती है और नैतिक शिक्षा का अभाव है।
ख. पारिवारिक वातावरण में नैतिक मूल्यों की कमी और अभिभावकों का व्यस्त जीवन।
ग. पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण और सोशल मीडिया का दुष्प्रभाव।
घ. राजनीति का छात्र जीवन में अनुचित हस्तक्षेप।
4. अनुशासनहीनता दूर करने के उपाय:
अनुशासनहीनता की समस्या का समाधान करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:
क. शिक्षा प्रणाली में नैतिक और व्यावहारिक शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
ख. परिवारों में बच्चों को बाल्यकाल से ही सुसंस्कार और श्रेष्ठ आचरण की शिक्षा दी जानी चाहिए।
ग. युवाओं की ऊर्जा को खेलकूद, सामाजिक सेवा एवं रचनात्मक कार्यों में लगाया जाना चाहिए।
घ. शिक्षकों और अभिभावकों को स्वयं आदर्श आचरण प्रस्तुत करना चाहिए।
5. उपसंहार:
अनुशासन किसी भी राष्ट्र की उन्नति और चरित्र-निर्माण की रीढ़ है। यदि देश के युवा अनुशासित रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे, तो भारत पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन हो सकेगा।
(ii) जनसंख्या-विस्फोट–कारण एवं निवारण
1. प्रस्तावना:
वर्तमान समय में भारत तथा संपूर्ण विश्व के समक्ष जनसंख्या-विस्फोट एक विकराल समस्या बन चुका है। सीमित संसाधनों की तुलना में जनसंख्या की तीव्र गति से वृद्धि होना ही जनसंख्या-विस्फोट कहलाता है। यह समस्या देश के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास में सबसे बड़ी बाधक है।
2. जनसंख्या-विस्फोट का अर्थ:
जब किसी देश या क्षेत्र की जनसंख्या उसकी धारण क्षमता और उपलब्ध संसाधनों की तुलना में अत्यधिक तीव्र गति से बढ़ने लगती है, तो इस स्थिति को जनसंख्या-विस्फोट कहते हैं।
3. जनसंख्या वृद्धि के कारण:
क. अशिक्षा एवं अज्ञानता: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की कमी के कारण लोग छोटा परिवार सुखी परिवार का महत्व नहीं समझ पाते।
ख. सामाजिक मान्यताएँ: पुत्र प्राप्ति की लालसा तथा पुरानी सोच।
ग. कम उम्र में विवाह होना।
घ. स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार: मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आई है, परंतु जन्म दर पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका है।
4. जनसंख्या वृद्धि के दुष्प्रभाव:
क. बेरोजगारी तथा निर्धनता में अत्यधिक वृद्धि।
ख. खाद्यान्न, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं में कमी।
ग. प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन तथा पर्यावरण प्रदूषण।
घ. देश के प्रति व्यक्ति आय और आर्थिक विकास दर में गिरावट।
5. जनसंख्या नियंत्रण के उपाय:
क. बालिका शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
ख. परिवार नियोजन कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना।
ग. विवाह की न्यूनतम आयु का कड़ाई से पालन कराना।
घ. दो बच्चों के छोटे परिवार को अपनाने वालों को प्रोत्साहन प्रदान करना।
6. उपसंहार:
जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाए बिना देश की प्रगति की कल्पना अधूरी है। यह केवल सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वे संयमित परिवार अपनाकर देश के विकास में अपना योगदान दें।
(iii) पर्यावरण सुरक्षा
1. प्रस्तावना:
पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है— 'परि' तथा 'आवरण', जिसका अर्थ है चारों ओर से ढका हुआ आवरण। हमारे आसपास की वायु, जल, मृदा, वनस्पति तथा जीव-जंतु मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। मानव जीवन और स्वस्थ प्रकृति का संबंध अटूट है। किंतु आधुनिकता और औद्योगिकीकरण की अंधी दौड़ में मानव ने पर्यावरण को अत्यधिक क्षति पहुँचाई है।
2. पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार एवं कारण:
क. वायु प्रदूषण: वाहनों और कारखानों से निकलने वाले धुएँ तथा विषैली गैसों के कारण।
ख. जल प्रदूषण: नदियों में औद्योगिक कचरा, सीवेज और प्लास्टिक फेंकने से।
ग. मृदा प्रदूषण: रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और प्लास्टिक कचरे का अनियंत्रित उपयोग।
घ. ध्वनि प्रदूषण: लाउडस्पीकर, वाहनों के हॉर्न और मशीनों का शोर।
3. पर्यावरण क्षति के दुष्प्रभाव:
पर्यावरण असंतुलन के कारण वैश्विक तापन (ग्लोबल वॉर्मिंग), असमय वर्षा, सूखा, प्राकृतिक आपदाएँ तथा कैंसर व श्वास रोग जैसी गंभीर बीमारियाँ निरंतर बढ़ रही हैं।
4. पर्यावरण सुरक्षा के उपाय:
क. सघन वृक्षारोपण अभियान चलाकर व्यापक स्तर पर पौधे लगाने चाहिए।
ख. सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध तथा पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना।
ग. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का अधिकतम उपयोग करना।
घ. औद्योगिक अपशिष्ट का उचित निस्तारण करना।
ङ. जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन करना।
5. उपसंहार:
"पर्यावरण की रक्षा, जीवन की सुरक्षा" केवल एक नारा नहीं, बल्कि समय की परम आवश्यकता है। यदि आज हमने अपनी प्रकृति की रक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण हेतु संकल्प लेना चाहिए।
(iv) आतंकवाद
1. प्रस्तावना:
आज संपूर्ण विश्व के लिए आतंकवाद एक भयंकर चुनौती और अभिशाप बन चुका है। आतंकवाद का अर्थ है हिंसा, भय और उपद्रव फैलाकर अपने अनुचित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करना। यह मानवता का सबसे बड़ा शत्रु है।
2. आतंकवाद का अर्थ:
अपने स्वार्थों, धार्मिक कट्टरता या राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए निरपराध लोगों की हत्या करना, भय का माहौल पैदा करना तथा देश की शांति को भंग करना ही आतंकवाद है।
3. आतंकवाद के मुख्य कारण:
क. धार्मिक कट्टरता तथा वैचारिक अंधभक्ति।
ख. बेरोजगारी, गरीबी और युवाओं को दिग्भ्रमित करना।
ग. सीमापार से घुसपैठ तथा प्रायोजित आतंकवाद।
घ. अशिक्षा तथा नैतिक शिक्षा की कमी।
4. आतंकवाद के दुष्परिणाम:
क. हज़ारों निर्दोष लोगों और सैनिकों की जान जाना।
ख. आर्थिक संपत्ति की भारी हानि तथा विकास कार्यों का अवरुद्ध होना।
ग. समाज में अविश्वास, भय और अस्थिरता का माहौल बनना।
घ. देश की अखंडता और संप्रभुता पर आघात होना।
5. आतंकवाद निवारण के उपाय:
क. आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कानून बनाना तथा उनका त्वरित क्रियान्वयन।
ख. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों द्वारा एकजुट होकर आतंकवाद को वित्तीय मदद देने वाली संस्थाओं पर रोक लगाना।
ग. खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक से लैस करना।
घ. युवाओं को सही शिक्षा और रोजगार देकर उनके भटकाव को रोकना।
6. उपसंहार:
आतंकवाद मानवता के अस्तित्व के लिए सीधा खतरा है। इसे जड़ से समाप्त करने के लिए वैश्विक एकजुटता तथा कठोर नीति की आवश्यकता है। शांति, सौहार्द और भाईचारे से ही आतंकवाद जैसी बुराई पर विजय पाई जा सकती है।