खण्ड-अ : बहुविकल्पीय प्रश्न
(Multiple Choice Questions)
UP Board Class 10th Board paper 2026 801(FG)
कक्षा 10वीं · हिंदी · 2026 · बोर्ड परीक्षा
खण्ड-अ : बहुविकल्पीय प्रश्न
(Multiple Choice Questions)
'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है
(A) जयशंकर प्रसाद को
(B) प्रेमचन्द को
(C) 'अज्ञेय' को
(D) भगवतीचरण वर्मा को
उत्तर:
(B) प्रेमचन्द को
'मेरी आत्मकहानी' के लेखक हैं
(A) डॉ० श्यामसुन्दर दास
(B) महादेवी वर्मा
(C) सुमित्रानन्दन पन्त
(D) रामचंद्र शुक्ल
उत्तर:
(A) डॉ० श्यामसुन्दर दास
एकांकी विधा की रचना है
(A) 'रेशमी टाई'
(B) 'कफ़न'
(C) 'अतीत के चलचित्र'
(D) 'रूस में पच्चीस मास'
उत्तर:
(A) 'रेशमी टाई'
'राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय एकता' रचना के लेखक हैं
(A) जयशंकर प्रसाद
(B) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(C) रामधारी सिंह 'दिनकर'
(D) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
उत्तर:
(C) रामधारी सिंह 'दिनकर'
सही मिलान करके सही विकल्प का चयन करें :
(रचना) - (लेखक)
(i) चिन्तामणि - 3. रामचंद्र शुक्ल
(ii) बापू के कदमों में - 4. डॉ० राजेन्द्र प्रसाद
(iii) बिखरे पन्ने - 1. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
(iv) विज्ञान की विभूतियाँ - 2. जयप्रकाश भारती
दिये गये विकल्प :
(A) (i)-1, (ii)-3, (iii)-2, (iv)-4
(B) (i)-3, (ii)-4, (iii)-2, (iv)-1
(C) (i)-4, (ii)-2, (iii)-1, (iv)-3
(D) (i)-3, (ii)-4, (iii)-1, (iv)-2
उत्तर:
(D)
'यशोधरा' काव्य के रचयिता हैं
(A) केदारनाथ सिंह
(B) मैथिलीशरण गुप्त
(C) रामनरेश त्रिपाठी
(D) सुमित्रानन्दन पन्त
उत्तर:
(B) मैथिलीशरण गुप्त
'सूरदास' की रचना है
(A) साहित्य लहरी
(B) दोहावली
(C) पंचवटी
(D) सतसई
उत्तर:
(A) साहित्य लहरी
रीतिकाल में 'दोहा' छन्द में 'गागर में सागर' की उक्ति को चरितार्थ करने वाले कवि हैं
(A) केशव दास
(B) पद्माकर
(C) बिहारीलाल
(D) महाकवि भूषण
उत्तर:
(C) बिहारीलाल
'द्विवेदी युगीन' कविता की विशेषता है
(A) युद्धों का सजीव वर्णन
(B) राष्ट्रीयता की भावना का विकास
(C) आत्मपरक रचनाएँ
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) राष्ट्रीयता की भावना का विकास
'नयी कविता' के आरम्भ का समय माना जाता है
(A) सन् 1919 ई० से
(B) सन् 1947 ई० से
(C) सन् 1936 ई० से
(D) सन् 1951 ई० से
उत्तर:
(D) सन् 1951 ई० से
देखि सुदामा की दीन दशा, करुणा करिके करुनानिधि रोए।
पानी परात को हाथ छुओ नहि, नैनन के जल सों पग धोए ॥
उपर्युक्त पंक्तियों में प्रयुक्त रस है :
(A) वीर रस
(B) करुण रस
(C) हास्य रस
(D) वात्सल्य रस
उत्तर:
(B) करुण रस
तन मन वचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चितु राचा ॥
रेखांकित पद में अलंकार है
(A) उपमा अलंकार
(B) यमक अलंकार
(C) उत्प्रेक्षा अलंकार
(D) रूपक अलंकार
उत्तर:
(D) रूपक अलंकार
अर्धसम मात्रिक छन्द है
(A) चौपाई
(B) सोरठा
(C) रोला
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) सोरठा
'उपग्रह' में प्रयुक्त उपसर्ग है
(A) अ
(B) अप
(C) उप
(D) अधि
उत्तर:
(C) उप
निम्न में से किस पद में 'बहुव्रीहि समास' है ?
(A) चौराहा
(B) नीलगाय
(C) प्रतिदिन
(D) चन्द्रशेखर
उत्तर:
(D) चन्द्रशेखर
'आकाश' का पर्यायवाची शब्द है
(A) गगन
(B) पवन
(C) जलज
(D) भानु
उत्तर:
(A) गगन
'युष्मद्' शब्द के प्रथमा विभक्ति, बहुवचन का रूप है
(A) त्वम्
(B) युवाभ्याम्
(C) यूयम्
(D) तव
उत्तर:
(C) यूयम्
अरे वाह! कितना मोहक दृश्य है। उपर्युक्त वाक्य किस प्रकार का है ?
(A) साधारण वाक्य
(B) विस्मयादिबोधक वाक्य
(C) प्रश्नवाचक वाक्य
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) विस्मयादिबोधक वाक्य
मंजरी मधुर गीत गाती है। उपर्युक्त वाक्य में वाच्य का भेद है
(A) कर्तृवाच्य
(B) कर्मवाच्य
(C) भाववाच्य
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) कर्तृवाच्य
'संख्यावाचक विशेषण' कितने प्रकार के होते हैं ?
(A) तीन
(B) चार
(C) दो
(D) पाँच
उत्तर:
(D) पाँच
खण्ड-ब : वर्णनात्मक प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के गद्य खंड के अंतर्गत आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा रचित 'ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से' निबंध से लिया गया है।
(ii) लेखक के अनुसार मनुष्य अपनी उन्नति किस प्रकार कर सकता है?
उत्तर: लेखक के अनुसार मनुष्य को दूसरों की निंदा करने के बजाय अपने दोषों को दूर करना चाहिए और अपने अच्छे गुणों का विकास करना चाहिए। इससे वह जीवन में वास्तविक उन्नति कर सकता है।
(iii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: लेखक का आशय है कि कोई व्यक्ति दूसरे को गिराकर स्वयं आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तविक उन्नति अपने गुणों का विकास करने और अपने दोषों को दूर करने से होती है। इसलिए मनुष्य को दूसरों की बुराई करने के बजाय स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के पद्य खंड के अंतर्गत महाकवि सूरदास द्वारा रचित 'सूरसागर' से संकलित 'पद' से लिया गया है।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: इस अंश में माता का कृष्ण के प्रति गहरा स्नेह और ममता व्यक्त हुई है। वह कृष्ण के बचपन को याद करते हुए उनकी आदतों का वर्णन करती हैं। उन्हें तेल लगाना, उबटन करना और नहाना पसंद नहीं था। इस प्रकार इस पद में माता के वात्सल्य भाव का सुंदर चित्रण हुआ है।
(iii) (क) दिये गये पद्यांश में प्रयुक्त रस का नाम लिखिए।
उत्तर: वात्सल्य रस।
(ख) 'क्रम क्रम करि के नाते' पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार का नाम लिखिए।
उत्तर: अनुप्रास अलंकार।
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'प्रबुद्धग्रामीणः' पाठ से लिया गया है।
हिन्दी अनुवाद: एक बार बहुत से लोग रेलगाड़ी से नगर की ओर जा रहे थे। उनमें कुछ ग्रामीण और कुछ नागरिक थे। ग्रामीणों को चुपचाप बैठे देखकर एक नागरिक ने उनका उपहास करते हुए कहा कि ग्रामीण आज भी पहले की तरह अशिक्षित और अज्ञानी हैं। उनका न तो विकास हुआ है और न ही हो सकता है।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों में से किसी एक का संदर्भसहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए।
सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खंड के 'वीरः वीरेण पूज्यते' पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद: बंधन हो या मृत्यु, विजय हो या पराजय, वीर पुरुष दोनों ही परिस्थितियों में समान रहता है। वह अपने साहस और वीरता को कभी नहीं छोड़ता।
उत्तर:
यह प्रश्न स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका।
अपने पठित खण्डकाव्य के आधार पर दिए गए प्रश्नों में से किसी एक खण्ड के एक प्रश्न का उत्तर दीजिए।
(च) 'कर्ण' खण्डकाव्य के आधार पर:
(ii) कर्ण की वीरता एवं दानशीलता का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
'कर्ण' खंडकाव्य के नायक कर्ण महान योद्धा और बहुत बड़े दानी थे। वे युद्ध में अत्यंत वीर और साहसी थे तथा कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते थे। उनकी दानशीलता भी अद्भुत थी। वे किसी याचक को खाली हाथ नहीं लौटाते थे। उन्होंने अपनी रक्षा के लिए मिले कवच-कुंडल तक दान कर दिए। इस प्रकार कर्ण की वीरता और दानशीलता उन्हें एक महान पात्र बनाती है।
(क) निम्नलिखित लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
(ii) जयशंकर प्रसाद
उत्तर:
जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख कवि, लेखक और नाटककार थे। उनका जन्म सन् 1889 ई. में काशी के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उन्होंने हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी और फारसी का अध्ययन किया। उनकी रचनाओं में देशप्रेम, मानवता और भारतीय संस्कृति की भावना दिखाई देती है। उनका निधन सन् 1937 ई. में हुआ।
प्रमुख रचना: 'कामायनी'
(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।
(ii) तुलसीदास
उत्तर:
गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल की रामभक्ति शाखा के महान कवि थे। उन्होंने भगवान राम के जीवन और आदर्शों को अपनी रचनाओं में प्रस्तुत किया। उनकी भाषा सरल और प्रभावशाली थी। उनका अधिकांश जीवन काशी, चित्रकूट और अयोध्या में बीता। हिन्दी साहित्य में उनका विशेष स्थान है।
प्रमुख रचना: 'श्रीरामचरितमानस'
अपनी पाठ्यपुस्तक के 'संस्कृत खण्ड' से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो।
उत्तर:
सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥
विद्यालय में 'विज्ञान प्रयोगशाला' की समस्याओं पर प्रधानाचार्य का ध्यान आकर्षित करने हेतु एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,
[विद्यालय का नाम],
[स्थान]।
विषय: विज्ञान प्रयोगशाला की समस्याओं के समाधान हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला में कई आवश्यक उपकरण और सामग्री उपलब्ध नहीं हैं। कुछ उपकरण खराब भी हो चुके हैं। इसके कारण विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रयोग करने और उन्हें समझने में कठिनाई होती है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि प्रयोगशाला की समस्याओं का शीघ्र समाधान कराकर आवश्यक उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराने की कृपा करें। इससे विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा होगी।
धन्यवाद।
दिनांक: [तिथि]
आपका आज्ञाकारी शिष्य
[आपका नाम]
कक्षा – 10
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए।
(i) धनानां उत्तमं किम् अस्ति ?
उत्तर:
धनानां उत्तमं श्रुतम् अस्ति।
(v) वीरः केन पूज्यते ?
उत्तर: वीरः वीरेण पूज्यते।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए।
(i) पर्यावरण और मानव जीवन
उत्तर:
भूमिका:
पर्यावरण हमारे चारों ओर उपस्थित प्राकृतिक वातावरण है। इसमें वायु, जल, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जंतु शामिल हैं। मानव जीवन पूरी तरह पर्यावरण पर निर्भर है।
पर्यावरण का महत्व:
मनुष्य को जीवन के लिए शुद्ध वायु, जल और भोजन की आवश्यकता होती है। ये सभी हमें पर्यावरण से प्राप्त होते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण आवश्यक है।
पर्यावरण प्रदूषण:
आज वनों की कटाई, वाहनों का धुआँ, कारखानों का कचरा और प्लास्टिक के अधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इससे वायु और जल प्रदूषण बढ़ रहा है तथा जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ भी पैदा हो रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण के उपाय:
पर्यावरण को बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। प्लास्टिक का कम प्रयोग करना चाहिए और कूड़ा-कचरा उचित स्थान पर डालना चाहिए। वाहनों और कारखानों से होने वाले प्रदूषण को भी कम करना चाहिए।
उपसंहार:
स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ जीवन के लिए बहुत जरूरी है। पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम आज पर्यावरण की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ जीवन मिल सकेगा।